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रूस के साथ दो लाख करोड़ के लड़ाकू विमान समझौते से अलग हो सकता है भारत। जानें क्या है कारण

मालूम हो कि सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के मकसद से भारत और रूस के बीच 2007 में लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से तैयार करने का अंतर-सरकारी करार हुआ था।

लेकिन लागत साझा करने, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और तैयार किए जाने वाले विमानों की संख्या के मसले पर गंभीर मतभेदों के कारण पिछले 11 साल से यह परियोजना अटकी हुई है। परियोजना पर बातचीत में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘हमने परियोजना की लागत समेत तमाम मसलों पर अपनी राय रख दी है। लेकिन रूसी पक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’

बता दें कि भारत ने लड़ाकू विमान के प्रारंभिक डिजायन के लिए दिसंबर, 2010 में 29.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की थी। बाद में दोनों पक्षों ने अंतिम डिजाइन और पहले चरण में विमान के उत्पादन के लिए छह-छह अरब डॉलर का योगदान देने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

कहां फंसा है पेंच

भारत चाहता है कि विमान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर दोनों देशों का समान अधिकार हो, लेकिन रूस विमान में इस्तेमाल की जाने वाली सभी अहम तकनीकों को भारत के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि उसे सभी जरूरी कोड और अहम तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान को अपग्रेड कर सके। फरवरी, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर की सहमति से परियोजना पर वार्ता फिर शुरू हुई थी। दोनों देश गतिरोध वाले मसलों का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत परियोजना की बेहद ऊंची लागत की वजह से इसके फलदायी होने के प्रति आशान्वित नहीं है।

एचएएल कर रही पैरवी, वायुसेना की रुचि नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस परियोजना की जोरदार पैरवी कर रही है। उसका मानना है कि इस परियोजना के जरिये भारत को अपने एरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका मिलेगा क्योंकि किसी अन्य देश ने भारत को आज तक ऐसी अहम तकनीक का प्रस्ताव नहीं दिया है। वहीं, दूसरी ओर ऊंची लागत की वजह से भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट हैक, ब्राजील के हैकर्स पर शक

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट गुरुवार को हैक हो गई. इस साइबर अटैक में ब्राजीलियन हैकर्स का हाथ बताया जा रहा है. वेबसाइट supremecourtofindia.nic.in खोलने पर ‘पत्ती’ जैसी तस्वीर और ‘hackeado por HighTech Brazil HacTeam’ मैसेज दिख रहा है. हालांकि, अब वेबसाइट पर Site Under Maintenance लिखा दिख रहा है.

बताया जाता है कि 2013 में भी इन हैकरों ने भारतीय वेबसाइट को निशाना बनाया था. सुप्रीम कोर्ट के वेबसाइट न खुलने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके हैक होने की सूचना भी दी. यूजर्स ने दावा कि साइट डाउन नहीं हुई है बल्‍कि हैक की गई है.

इससे पहले रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट भी हैक हो चुकी है. उस समय अधिकारियों ने बताया था कि वेबसाइट पर चीनी अक्षर में कुछ नजर आ रहा है, जिसके बाद बताया गया कि वेबसाइट हैक हो चुकी है.

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गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

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रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक, होम पेज पर दिखाई दे रहा चीनी अक्षर

शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट को किसी ने हैक कर लिया है। वेबसाइट के होम पेज पर चीनी अक्षर दिखाई दे रहा है। वेबसाइट को खोलने करने पर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (अंग्रेजी में) और हिंदी में रक्षा मंत्रालय लिखा दिख रहा है। इस घटना के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, उचित कदम उठाए जा रहे हैं। वेबसाइट को जल्द ही चालू किया जाएगा। आने वाले समय में हर संभावित कदम उठाए जाएंगे ताकि इस तरह की चीजों को होने से रोका जाए।

अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट पर चीनी अक्षर नजर आये जो इस बात का संकेत है कि चीनी हैकर उसमें शामिल हो सकते हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ” मामले पर हमारी पैनी नजर है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र उसे बहाल करने का प्रयास कर रहा है।यह  केंद्र वेबसाइट का रखरखाव करता है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चीनी हैकर इस वेबसाइट को बिगाड़ने में शामिल हो सकते हैं।
 

Nirmala Sitharaman(Twitter)

@nsitharaman

 Action is initiated after the hacking of MoD website ( http://mod.nic.in  ). The website shall be restored shortly. Needless to say, every possible step required to prevent any such eventuality in the future will be taken. @DefenceMinIndia @PIB_India @PIBHindi

बता दें कि खबर लिखे जाने तक साइट नहीं खुल रही है। भारतीय रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट https://mod.gov.in है। शुक्रवार शाम करीब 4.30 बजे रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक होने की खबर सामने आई। चीनी कैरक्टर दिखने से तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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चीन की हर चाल का जवाब देने के लिए भारत भी कर चुका है पूरी तैयारी

चीन एक बार फिर से भारत से लगती सीमा पर तनाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसको देखते हुए भारत ने सीमाओं पर अपने जवानों की संख्‍या बढ़ा दी है। दरअसल यह कवायद चीन की उस नापाक चाल के बाद की जा रही है जिसके तहत वह भारत की सीमा से सटे तिब्बती इलाके में तेजी से ढांचों का निर्माण करने में लगा है। इसके अलावा एक दिन पहले ही चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में लोहित घाटी के दूसरी और चीन की तरफ से टावर खड़ा करने और सैन्‍य गतिविधियों के लिए पक्‍का निर्माण करने की बात सामने आई है। लिहाजा यह जरूरी हो गया है कि भारत भी इन इलाकों में सड़कों का नेटवर्क बढ़ाए, जिससे सेना की शीघ्रता के साथ आवाजाही हो सके।

सीमा के नजदीक एक्‍सप्रेस वे

चीन की नापाक चाल को सफल होने से रोकने के लिए भारत भी अपनी तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत की तैयारियों से पहले हम आपको बता दें कि चीन भारत से लगती सीमाओं पर क्‍या कुछ अब तक कर चुका है। सितंबर 2017 में तिब्‍बत से नेपाल को जोड़ने वाला हाईवे खोलने के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब एक और एक्‍सप्रेसवे खोला जो तिब्‍बत की राजधानी ल्‍हासा और निंगची को जोड़ता है। यह एक्‍सप्रेसवे 5.8 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ है और इसकी लंबाई करीब 409 किमी है। निंगची अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक है। इस एक्‍सप्रेस वे के जरिए ल्हासा और निंगची के बीच की दूरी महज पांच घंटों में पूरी की जा सकती है। पहले इसमें करीब आठ घंटे का समय लगता था। यह एक्‍सप्रेस वे इस तरह से बनाया गया है कि समय आने पर सैन्‍य साजोसामान तेजी से सीमा तक ले जाया जा सके।

सीमा के नजदीक एयरपोर्ट

इसके अलावा पिछले वर्ष ही चीन ने अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा के नजदीक तिब्‍बत का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट भी खोला है। भारतीय सीमा के नजदीक स्थित यह एयरपोर्ट टर्मिनल 10300 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2020 तक यह सालाना 750000 यात्रियों और 3 हजार टन माल संभालने लायक हो जाएगा। नया टर्मिनल तिब्बत में खुला छठा टर्मिनल है जो न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट पर स्थित है। चीन के इन कदमों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है।

क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस चीन की वेस्टर्न थियेटर कमान

इन सभी के अलावा चीन ने इसी वर्ष फरवरी में भारत से लगती सीमा पर वेस्टर्न थियेटर कमान को क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस किया है। यह सब अमेरिकी फौज की तैयारियों की तर्ज पर किया गया है। आपको बता दें कि वेस्टर्न थियेटर कमान भारत से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी संभालती है। क्यूटीएस-11 दरअसल, अमेरिकी सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली की तरह है। इसके अलावा यह सभी तरह के फायरआर्म्‍स पर काबू पाने में सक्षम है। इसके अलावा यह एक पूरी तरह से डिजिटलीकृत समेकित व्यक्तिगत सैनिक लड़ाकू प्रणाली भी है। राइफल और 20 मिलीमीटर ग्रेनेड लांचर वाली यह प्रणाली लक्ष्य के अंदर के सैन्यकर्मियों को नष्ट करने में सक्षम है।

चीन ने सीमा पर तैनात किए हैं फाइटर जेट

भारतीय सीमा से सटे इलाकों में अपने सेना के जमावड़े के साथ-साथ चीन ने इसी वर्ष तिब्‍बत से लगती भारतीय सीमा के निकट स्थित अपने वायुसेना के ठिकानों पर फाइटर जेट्स की संख्या 47 से बढ़ाकर 51 कर दी है। ल्हासा-गोंगका में चीन ने आठ फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इसके अलावा एयर मिसाइल सिस्टम्स समेत 22 एमआई-17 हेलिकॉप्टर्स सहित कई अन्य हथियार भी तैनात हैं। होपिंग-रिकाजे में चीनी वायु सेना के 18 एयरक्राफ्ट्स तैनात हैं। इसके अलावा 11 एमआई-17 अनमैन्ड एरियल वीकल्स भी शामिल हैं। यही नहीं चीन ने तिब्बत में भारत से लगती सीमा में जमीन से हवा पर मार करने वाली मिसाइलों को भी तैनात कर दिया है।

चीन को देखते हुए भारत की तैयारी

चीन की इस रणनीति ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। लिहाजा भारत ने चीन सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है। बीजिंग की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए सामरिक रूप से महत्वूपर्ण अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गश्त भी तेज कर दी गई है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारत ने तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में चीन की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए अपने निगरानी तंत्र को भी बेहद चाकचौबंद कर लिया है। इन क्षेत्रों की टोह लेने के लिए नियमित रूप से हेलीकॉप्टरों से भी गश्त की जा रही है। भारत दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी जैसे दुर्गम इलाकों में अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है। इन इलाकों में 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और नदियां हैं। इन क्षेत्रों से लगती सीमाओं पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव की काट के तौर पर भारत ने यह रणनीति अपनाई है।

अहम सामरिक इलाकों पर भी ध्यान

चीन के तिब्बती क्षेत्र से लगते अरुणाचल के गांव किबिथू में तैनात सेना के एक अधिकारी का कहना है, ‘डोकलाम के बाद हमने सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत, चीन और म्यांमार के ट्राई जंक्शन समेत अहम सामरिक इलाकों में सेना की तैनाती बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्त (लांग रेंज पेट्रोल्स) को बढ़ा रही है। इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिनों के लिए गश्त पर भेजी जाती है।

टी 72 से लेकर सुखोई तक तैनात

भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती करके चीन के सामने शक्ति प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है। अकेले अरुणाचल प्रदेश की रक्षा के लिए चार इंफेंटरी माउंटेन डिविजन लगाई गई हैं जिसमें 3 कॉर्प्स (दीमापुर) और 4 कॉर्प्स (तेजपुर) की हैं और दो कॉर्प्स को रिजर्व में रखा गया है। हर डिवीजन में करीब 1200 जवान तैनात हैं। तवांग जिसपर कि चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता रहा है वहां भी सैनिकों की संख्या ज्यादा है जो किसी भी तरह की नापाक हरकत को विफल कर सकती हैं।

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जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल भारत की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में भारतीय सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं ये सुरक्षा बल, भारतीय सेना से अलग होते हैं और इन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी काफी अलग होती है. आइए जानते हैं पैरा मिलिट्री फोर्सेज और सेना में क्या अंतर होता है…
जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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बता दें कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और भारतीय सेना में काफी अंतर होता है. कई सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, जिसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, आसाम राइफल्स और एसएसबी शामिल है. वहीं सेना में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना आते हैं.

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अर्धसैनिक बल देश में रहकर या सीमा पर देश की सुरक्षा करते हैं और अर्धसैनिक बल पूरे देश में आतंकवाद औऱ नक्सलवाद विरोधी अभियानों में भी लगे हुए हैं. वहीं वीआईपी सिक्योरिटी में भी मुख्यतौर पर अर्धसैनिक बलों के जवान ही होते हैं. सुविधाओं के नाम पर जो सहूलियतें भारतीय सेना को मिलती हैं, वैसी सुविधाएं अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलती है.

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बीएसएफ पीस-टाइम के दौरान तैनात की जाती है, जबकि सेना युद्ध के दौरान मोर्चा संभालती है. बीएसएफ के जवानों को हमेशा सीमा की सुरक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता है.

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बीएसएफ के जवानों को सीमा पर तैनात किया जाता है, जबकि भारतीय सेना के जवान सीमा से दूर रहते हैं और युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं. साथ ही यह क्रॉस बोर्डर ऑपरेशन भी करती है.

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भारतीय सेना के जवानों को बीएसएफ के जवानों से ज्यादा सुविधा मिलती है, इसमें कैंटीन, आर्मी स्कूल आदि की सेवाएं शामिल है.

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भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है, जबकि बीएसएफ गृह मंत्रालय के अधीन होती है.

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भारतीय सेना में रैंक लेफ्टिनेंट, मेजर, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जर्नल आदि होती है, लेकिन बीएसएफ में पोस्ट कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, एएसआई, डीएआई, आईजी आदि होती है.

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भारतीय सेना में अधिकारी एनडीए और सीडीएस के माध्यम से चुने जाते हैं और इस परीक्षा का चयन यूपीएससी की ओर से किया जाता है. वहीं बीएसएफ में एसआई तक के उम्मीदवार एसएससी की ओर से चुने जाते हैं. वहीं बीएसएफ के डीजी आईपीएस बनते हैं.

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सरकार ने एक बार फिर बताया 670 करोड़ रुपये में खरीदा है एक राफेल जेट

राफेल सौदे को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बार फिर सरकार ने संसद में बताया कि एक राफेल फाइटर जेट की कीमत 670 करोड़ रूपये है. रक्षा राज्यमंत्री सुभाषराव भामरे ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में बताया कि ये कीमत बिना किसी साजों-सामान, हथियार और मेंटनेंस इत्यादि के है.

Once again, the government told that they bought a Rafael jet for Rs 670 crore
लेकिन आज ही देश के गोला-बारूद पर हुए एक सेमिनार के बाद मीडिया से बात करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया से कहा कि राफेल जेट की कीमत क्या है उसपर पहले ही लिखित जवाब दे दिया गया है. मीडिया ने दरअसल, निर्मला सीतारमण से ये सवाल पूछा था कि क्या जो राफेल जेट भारत ने फ्रांस से खऱीदा है उसकी कीमत कतर और मिश्र से कम है या ज्यादा. लेकिन उन्होनें ये कहकर सवाल टाल दिया कि इस बारे में पहले ही लिखित जवाब दे दिया गया है.

एबीपी न्यूज के पास आज राज्यसभा में रक्षा राज्यमंत्री ने जो लिखित जवाब दिया है उसकी कॉपी मौजूद है. इसमें साफ तौर से लिखा है कि नबम्बर 2016 में जो मुद्रा विनियम का जो रेट था उसके हिसाब से बिना राफेल जेट के जरूरी साजों-सामान, हथियार, मेंटनेंट स्पोर्ट और सर्विस तथा भारत के हिसाब से जरूरी इन्हेंसमेंट के एक राफेल जेट की कीमत करीब 670 करोड़ रूपये है.

रक्षा राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि ये तथ्य गलत है कि पिछली (यूपीए) सरकार ने 126 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा 10.2 बिलियन डॉलर (यानि 66 हजार करोड़ रुपये) में किया था. उन्होनें कहा 126 विमानों के लिए आरएफपी यानि रिक्यूस्ट फॉर प्रपोजल वर्ष 2007 में दी गई थी लेकिन 2014 तक भी कीमत का मोल-भाव नहीं हो पाया था.

साथ ही 108 विमानों के लिए सिर्फ बनाने का लाईसेंस था ना कि ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी यानि तकनीकी हस्तांतरण था. सुभाषराव भामरे के मुताबिक“इसलिए 126 विमानों की कीमत का उन 36 विमानों से तुलना नहीं की जा सकती जिन्हें सीधे फ्लाई-वे हालत में खरीदा जा रहा है.”

रक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए सीसीएस यानि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से 24 अगस्त 2016 को मंजूरी ली गई थी और 23 सितम्बर 2016 को सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे.

रक्षा राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड या फिर किसी अन्य सरकारी उपक्रम का राफेल जेट बनाने वाली कंपनी, दसॉल्ट एवियेशन से किसी भी तरह का कोई करार नहीं हुआ था. क्योंकि (पिछली) सरकार कभी भी ना तो सौदे को लेकर किसी नतीजे पर पहुंच पाई थी और ना ही कोई करार कर पाई थी.

आपको बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल खड़ी कर रही है. सवालों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले संसद सत्र में जवाब दिया था कि सरकार राफेल सौदे की कीमत फ्रांस से हुए सुरक्षा समझौते को लेकर नहीं बता सकती है. लेकिन खुद रक्षा राज्यमंत्री नबम्बर 2016 में ही एक राफेल लड़ाकू विमान की कीमत संसद में बता चुके थे. आज दूसरी बार सरकार ने एक राफेल की कीमत बताई है.

सौदे में ऑफसेट को लेकर रिलायंस कंपनी से हुए करार पर भी रक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि राफेल जेट बनाने वाली कंपनी किसी भी भारतीय कंपनी को अपना ऑफसेट-पार्टनर चुनने के लिए स्वतंत्र है.

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भारत-फ्रांस के बीच 14 समझौते, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की दोस्‍ती अहम

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में आज दोनों देशों के बीच 14 अहम समझाैते हुए। इस मौके पर हैदराबाद हाउस में आयोजित संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस में दोनों देशों के प्रमुखों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की मित्रता को अहम बताया और कहा, सरकार किसी की भी हो दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता है। वहीं मैक्रों ने कहा, ‘भारत और फ्रांस ने आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का अब नया स्‍वरूप होगा।’

सभ्‍यताओं की साझेदारी सदियों पुरानी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हम सिर्फ दो लोकतंत्र के नेता नहीं हैं, हम समर्थ और समृद्ध विरासत के उत्‍तराधिकारी हैं। हमारे देशों और हमारी सभ्‍यताओं की साझेदारी सदियों पुरानी है। हम मानते हैं कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों के उज्‍जवल भविष्‍य के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण आयाम है हमारे पीपुल टू पीपुल संबंध। हम चाहते हैं कि हमारे युवा एक दूसरे के देशों को जानें, इसके लिए हमने आज दो समझौते भी किए हैं।’

राष्‍ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर

विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मुलाकात के बाद फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इससे पहले पत्‍नी ब्रिगिट के साथ मैक्रों ने राजघाट पर महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए राष्‍ट्रपति मैक्रों का राष्‍ट्रपति भवन में औपचारिक स्‍वागत हुआ और उन्‍हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने यहां औपचारिक स्‍वागत के बाद कहा, भारत आना खुशी और गर्व की बात है। फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारी केमिस्‍ट्री काफी अच्‍छी है हमारे दो लोकतंत्रों का ऐतिहासिक संबंध है।’

प्रोटोकॉल तोड़ पीएम मोदी ने किया स्‍वागत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पत्‍नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ चार दिवसीय भारत यात्रा पर शुक्रवार शाम को भारत पहुंचे और प्रोटोकॉल तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्‍वयं एयरपोर्ट पर उनका स्‍वागत किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के विमान से उतरने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गले लगाकर उनका स्वागत किया।

वाराणसी जाएंगे इमैनुएल

इमैनुएल 12 मार्च को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाएंगे। वहां वे तुलसी घाट पर भगवान राम के राज्याभिषेक को देखेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों मीरजापुर में 75 मेगावाट के सोलर एनर्जी प्लांट का शुभारंभ कर वाराणसी आने के बाद सबसे पहले ट्रेड फैसिलिटी सेंटर देखने जाएंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ अस्सी घाट भी जाएंगे।

दोनों देश समुद्री सुरक्षा तथा आतंकवाद से निपटने के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत बनाने पर भी विचार करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान फ्रांस के सहयोग से बन रहे जैतापुर (महाराष्ट्र) परमाणु बिजली संयंत्र को लेकर भी समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैक्रों के बीच शनिवार को प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में हिंद महासागर में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे पर बात हो सकती है।

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भारत के ड्रोन ‘रुस्तम 2’ से खौफ में पाकिस्तान, मीडिया से बातचीत में कही ये बात

पाकिस्तान ने भारत द्वारा अत्याधुनिक ड्रोन प्रौद्योगिकी विकसित करने पर बुधवार (28 फरवरी) को चिंता जतायी और इसे ‘‘चिंताजनक’’ बताया. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल से साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में भारत के रुस्तम 2 को लेकर सवाल किया गया था, जिसे अमेरिकी प्रीडेटर ड्रोन की तर्ज पर निगरानी एवं टोह लेने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘भारत द्वारा ड्रोन प्रौद्योगिकी का विकास करना चिंताजनक है, जब इसे परंपरागत और गैर परंपरागत क्षेत्रों में उसके द्वारा निर्माण एवं सैन्य क्षमताओं के विस्तार के संदर्भ में देखा जाता है.’’

उन्होंने कहा कि ड्रोन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून एवं किसी जिम्मेदार देश के व्यवहार के अन्य स्थापित नियमों के अनुरूप होना चाहिए. उन्होंने इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) द्वारा पाकिस्तान के अभिनेताओं एवं कलाकारों पर प्रतिबंध बरकरार रखने के निर्णय की भी आलोचना की और इसे ‘‘भारत में व्याप्त अतिवाद और पाकिस्तान विरोधी पूर्वाग्रह का एक और उदाहरण’’ बताया

भारत में बढ़ती असहिष्णुता पर जताई चिंता
फैसल ने कहा कि कलाकारों को प्रतिबंधित करने के बाद कई अन्य फैसले आए जिसमें ‘‘पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को वीजा जारी नहीं करना, सिख धर्मावलंबियों एवं कटासराज जाने वाले श्रद्धालुओं को सम्मिलित होने की इजाजत नहीं देना तथा खेल मैचों को रद्द करना भारत में बढ़ती असहिष्णुता और व्याप्त पूर्वाग्रह को रेखांकित करते हैं.’’ इस सवाल पर कि क्या पाकिस्तान और भारत के विदेश सचिवों के अफगानिस्तान में ‘काबुल प्रोसेस’ से इतर मुलाकात करने की संभावना है, उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी किसी भी बैठक की परिकल्पना नहीं की गई है.’’ भारतीय मीडिया में आयी उस खबर के बारे में पूछे जाने पर कि आने वाले दिनों में भारत के विदेश सचिव पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ऐसी किसी यात्रा की जानकारी नहीं है.’’

भारत के संघर्षविराम उल्लंघनों का जवाब दे रहा है पाकिस्तान
भारत और पाकिस्तान द्वारा वृद्ध, मानसिक रूप से बीमार और महिला कैदियों के आदान प्रदान से जुड़े समझौते की योजना के बारे में पूछे गए एक सवाल पर फैसल ने कहा, ‘‘प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय गौर कर रहा है.’’ उन्होंने यह भी कहा कि नियंत्रण रेखा और कामकाजी सीमा पर भारत के ‘‘आक्रामक रुख’’ का न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र पर प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान भारत के संघर्षविराम उल्लंघनों का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है. यह खेदजनक है कि भारत ऐसे कृत्यों का सहारा लेता है जो पूरे क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता के लिए हानिकारक हैं.’’ फैसल ने कहा कि भारत की पाकिस्तान के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाने की प्रवृत्ति है.

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भारत-वियतनाम के बीच परमाणु समेत 3 समझौते हुए, मोदी बोले- इंडो-पैसिफिक के लिए मिलकर काम करेंगे

पीएम नरेन्द्र माेदी और वियतनाम के प्रेसिडेंट त्रान दाई क्‍वांग के बीच बात-चीत के बाद शनिवार को दोनों देशों ने परमाणु सहयोग समेत तीन समझौतों पर दस्तखत किए। इस दौरान नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने फैसला किया है कि डिफेंस प्रोडक्शन में आपसी सहयोग बढ़ाने के साथ टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान की संभावनाआें की तलाश करेंगे। भारत के आसियान देशों से संबंध और एक्ट ईस्ट पॉलिसी के फ्रेमवर्क में वियतनाम महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बता दें कि क्‍वांग तीन दिन के भारत दौरे पर आए हैं। शनिवार को दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति भवन में उनको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

किन क्षेत्रों में हुए समझौते?
– एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग
– इकोनाॅमिक एंड ट्रेड क्षेत्र में सहयोग
– टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान और एग्रीकल्चर से जुड़े फील्ड में टेक्नीकल एक्सपर्ट्स की विजिट में सहयोग

मोदी ने और क्या कहा?
– नरेन्द्र मोदी ने कहा, “हम मिलकर ऐसे खुले, आजाद और समृद्ध इंडो-पैसिफिक एरिया के लिए काम करेंगे, जहां संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूरा सम्मान किया जाएगा।”
– मोदी ने कहा, “भारत और वियतनाम रिन्यूएवल एनर्जी (हाइड्रो एनर्जी, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा, बायोमास, जैव ईंधन) एग्रीकल्चर, टेक्सटाइल, तेल और गैस समेत अन्य क्षेत्रों में अपने रिश्ते और मजबूत करेंगे।”
– मोदी ने कहा, “हम न केवल गैस और तेल के सेक्टर में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाएंगे, बल्कि अन्य देशों के साथ मिलकर त्रिपक्षीय संबंधों को भी आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

बिजनेस 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर बनी सहमति
-विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन रवीश कुमार ने ट्वीट किया है कि भारत और वियतनाम का 2016-17 में बिजनेस 6.24 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच बिजनेस को 2020 तक 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति बनी है।

शुक्रवार को भारत पहुंचे थे क्वांग
– प्रेसिडेंट त्रान दाई क्‍वांग शुक्रवार को भारत पहुंचे। इसके बाद वे बौद्धों के पवित्र तीर्थस्थल बिहार के बोधगया गए।
– शनिवार सुबह क्वांग का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद और नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। क्वांग ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी।

– वहीं, समझौतों से पहले क्‍वांग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी मुलाकात की।

– प्रेसिडेंट क्‍वांग के साथ अाए प्रतिनिधिमंडल में वियतनाम के वाइस प्रेसिडेंट और विदेश मंत्री फाम बिन मिन्ह के अलावा कई मंत्री शामिल हैं। इनके साथ एक कारोबारी शिष्टमंडल भी है।