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आज सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे येदियुरप्पा, BJP सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत से 8 सीट दूर

चुनाव के नतीजे आ गए हैं. लेकिन किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदुरप्पा ने आज सुबह साढे दस बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है. बैठक के बाद, येदुरप्पा विधायक दल के नेता चुने जाने की जानकारी राज्यपाल को देंगे और सरकार बनाने का आधिकारिक दावा पेश करेंगे.

राज्यपाल के पाले में है गेंद

वहीं, एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस की बैठक भी आज है. जेडीएस कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर रही है. बता दें कि कांग्रेस को 78 सीटें मिली है वो दूसरे नंबर की पार्टी बनी है. जबकि जेडीएस को सिर्फ 38 सीटें मिली हैं. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है और देखना होगा कि वह सरकार बनाने का न्योता किसे देते हैं.

हम सबसे बड़ी पार्टी, मौका मिले- येदियुरप्पा

बीएस येदियुरप्पा ने कहा है, ‘’हम सबसे बड़ी पार्टी हैं और ऐसे में सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. बीजेपी 100 प्रतिशत सरकार बनाएगी और विधानसभा में बहमत भी साबित करेगी.’’

पहली प्राथमिकता सरकार का गठन, शर्तों पर फैसला बाद में- सिद्धारमैया

उधर, राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मीडिया से मुखातिब सिद्धारमैया ने कहा, कांग्रेस ने बिना शर्त जेडीएस को समर्थन दिया है. सिद्धारमैया ने कहा कि गठबंधन की शर्तों पर बाद में फैसला होगा. पहली प्राथमिकता सरकार का गठन है. सिद्धारमैया ने दावा किया कि उनके पास मैजिक नंबर है.  उन्होंने कहा कि दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के साथ है

बता दें कि अगर कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन का दावा चल गया तो जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम भी बन सकते हैं.

कौन हैं कुमारस्वामी?

कुमारस्वामी साल 2006 से 2007 तक कर्नाटक के सीएम रह चुके हैं. कुमारस्वामी रामानगरम से तीन बार विधायक रह चुके हैं. रामानगरम सीट कुमारस्वामी का गढ़ मानी जाती है. साल 2013 में कुमारस्वामी रामानगरम से 40 हजार वोटों से जीते थे. कुमारस्वामी दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं.

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CWG 2018: भारत के लिए सुपर संडे, जानें कौन कौन से खिलाड़ियों ने बढ़ाई तिरंगे की शान, जीते मेडल, देखें फोटोज और विश्लेषण

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ी का शानदार प्रदर्शन जारी है। 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने संडे को छह मेडल हासिल करते हुए इसे सुपर संडे बना दिया। इन छह मेडल में 3 गोल्ड, एक सिल्वर और दो कांस्य पदक भारत की झोली में आए। इसके साथ ही अब भारत ने 7 गोल्ड, 2 सिल्वर और 3 कांस्य के साथ कुल 12 मेडल हासिल कर लिए हैं और इसी के साथ भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर आ गया है।

गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ी

टेबल टेनिस टीम ने जीता गोल्ड

21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में टेबल टेनिस के टीम इवेंट के फाइनल में भारत ने सिंगापुर को 3-1 से मात देकर गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। ये भारत का सातवां गोल्ड मेडल रहा।

मनु भाकर

अपना पहला कॉमनवेल्थ खेल रही मनु भाकर ने महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया। फाइनल मुकाबले में मनु ने 240.9 अंक हासिल करते हुए गोल्ड मेडल पर निशाना साध दिया।

पूनम यादव

भारत की पूनम यादव ने 69 किलो वर्ग कैटिगरी में में भारत की झोली में पांचवा गोल्ड डाल दिया। पूनम ने 69 किलो भारवर्ग में कुल 222 किलो वजन उठाया। स्नैच में 100 और क्लीन एंड जर्क में पूनम ने 122 किलो ग्राम वजन उठाया।

राहुल रागला

राहुल ने 85 किग्रा भार वर्ग में 338 किग्रा (151187) वजन उठाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। उन्होंने सामोआ के डोन ओपेलोगे (331) को पीछे छोड़ा, जिन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। क्लीन एंड जर्क में पहले प्रयास में राहुल ने 147 और ओपेलोगे ने 144 किग्रा का वजन उठाया। राहुल ने दूसरे प्रयास में 187 किग्रा वजन उठाया, जबकि ओपेलोगे दूसरे प्रयास में विफल रहे। हालांकि, दोनों का 191 किग्रा का आखिरी प्रयास विफल रहा।

सतीश शिवलिंगम

भारतीय वेटलिफ्टर सतीश कुमार शिवलिंगम ने 53 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था। सतीश ने स्नैच में अपने पहले प्रयास में 136 किलोग्राम वजन उठाया था, इसके बाद 140 और अपने आखिरी प्रयास में 144 किलो भार उठाया।

संजीता चानू

कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत की झोली में दूसरा गोल्ड मेडल आया। ये मेडल भारत की स्टार वेटलिफ्टर संजीता चानू ने 53 किलोग्राम वर्ग में दिलाया था। संजीता ने ग्लासगो में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था।

मीरा बाई चानू

गोल्ड कोस्ट में खेले जा रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स के पहले ही दिन भारतीय वेटलिफ्टर मीरा बाई चानू ने भारत को पहला गोल्ड मेडल दिला दिया। मीरा बाई चानू ने अपने पहले ही प्रयास में 80 किलोग्राम वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनाया। पिछला रिकॉर्ड 77 किलोग्राम का था जो कि अगस्तानिया ने बनाया था। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने बड़ी ही आसानी से 84 किलोग्राम वजन उठा दिया। दूसरी कोशिश में 84 किग्रा वजन उठाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। तीसरी और आखिरी कोशिश में 86 किग्रा वजन उठाकर दूसरी बार अपने ही रिकॉर्ड से आगे निकल गईं।

सिल्वर मेडल जीतने वाले खिलाड़ी

हिना सिद्धू

21वें कॉमनवेल्थ गेम्स के महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में हीना सिद्धू ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में मनु ने 240.9 अंक हासिल किए और हिना को 234 अंक मिले। इस स्पर्धा में मनु ने गोल्ड जीता तो हिना को सिल्वर मेडल मिला।

गुरुराजा पुजारी

21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला पदक वेटलिफ्टर गुरुराजा पुजारी ने दिलवाया। गुरुराजा ने 56 किलोग्राम कैटेगरी में 249 किग्रा वजन उठाया। इससे पहले 2016 साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। वहीं, इस साल पेनांग में कॉमनवेल्थ सीनियर वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में भी गुरुराजा पुजारी ने गोल्ड पर कब्जा जमाया था।

कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी

विकास ठाकुर

भारत के भारोत्तोलक विकास ठाकुर ने भारत की झोली में तीसरा कांस्य पदक डाला। विकास ने 94 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। विकास ने कुल 351 किलोग्राम भार उठाया। उन्होंने स्नैच में 159 का भार उठाकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। क्लीन एंड जर्क में वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और इस कारण उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

रवि कुमार

भारत को रवि कुमार ने 10 मी. एयर राइफल में दूसरा कांस्य पदक दिलाया। रवि कुमार एक समय रजत पदक जीतते दिखाई पड़ रहे थे, लेकिन आखिरी में उन्हें कांस्य से संतोष करना पड़ा। रवि कुमार ने 224.1 का स्कोर किया।

दीपक लाठेर

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला कांस्य पदक दीपक लाठेर ने दिलवाया। दीपक ने वेटलिफ्टिंग के 69 किलो की प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। 18 साल के दीपक लाठेर के लिए ये पहला मौका है जब वो कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग ले रहे हैं।

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फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला व रॉकेट बनाने वाली कंपनी स्पेसएक्स के मालिक और खरबपति एलन मस्क फिर से अपनी ‘फैक्ट्री में सोने’ लगे हैं. ऐसा उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट के जवाब में कहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला की मॉडल-3 इलेक्ट्रिक कार के प्रॉडक्शन में देरी होने की वजह से एलन फैक्ट्री जाने लगे हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला…
फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

टेस्ला की पिछली कार मॉडल एक्स की लॉन्चिंग के दौरान भी एलन स्लीपिंग बैग रखा करते थे और जरूरत पड़ने पर सो सकते थे. तब साथ में स्लिपिंग बैग रखने की काफी चर्चा हुई थी.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलन ने टेस्ला के इंजीनियरिंग हेड डुग फील्ड से प्रोडक्शन का काम अपने हाथ में ले लिया है. जबकि पिछले साल डुग ही प्रॉडक्शन और इंजीनियरिंग, दोनों काम देख रहे थे.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

एलन ने कहा है कि डुग को दोनों काम इसलिए दिया गया था कि ताकि प्रॉडक्शन आसान हो. उन्होंने कहा कि टेस्ला ऐसी कार नहीं डिजाइन करती जिसका निर्माण करना मुश्किल हो.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के ऊपर ग्राहकों की डिमांड पूरा करने का दबाव है. Bloomberg के मुताबिक, हफ्ते में 2200 कारें बन रही हैं, जबकि 2500 का लक्ष्य रखा गया था.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

एलन अक्सर मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं. पिछले दिनों उन्होंने ट्विटर पर एक चैलेंज दिए जाने के बाद अपनी कंपनियों के दो फेसबुक पेज डिलीट कर दिए थे. दोनों पेज वेरिफाइड था और उस पर करीब 50 लाख फॉलोअर्स थे. उन्होंने ऐसा तब किया है, जब फेसबुक डाटा लीक मामले में विवादों में आया.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

अरबों रुपये के मालिक ने तब कहा था कि वे फेसबुक यूज नहीं करते हैं. असल में व्हाट्सऐप के को-फाउंडर ब्रायन ऐक्टन ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि अब फेसबुक डिलीट करने का समय आ गया है. इसके जवाब में एलन ने लिखा था कि फेसबुक क्या है.

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SC/ST Act: सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च के फैसले पर नहीं लगाई रोक, 10 दिन बाद होगी सुनवाई

SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच अनिवार्य करने के मामले में केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. सुनवाई के दौरान एजी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बेगुनाह को सजा न मिले, यह देखा जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

  • हम फिलहाल तुरंत गिरफ्तारी पर रोक के निर्देश पर रोक नहीं लगाएंगे.
  • SC/ST एक्ट में केस दर्ज दर्ज करने के लिए प्रारंभिक जांच जरूरी
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीडित को मुआवजे का भुगतान तुरंत किया जा सकता है चाहे शिकायत आने के बाद FIR दर्ज ना हुई हो
  • कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि FIR IPC के अन्य प्रावधानों पर दर्ज हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी –

  • कोर्ट ने जो सुरक्षा उपाय किये है ताकि किसी निर्दोष को सजा न मिले.
  • ये अकेला ऐसा कानून है कि जिसमें किसी व्यक्ति को कोई कानूनी उपचार नहीं मिलता.
  • अगर एक बार मामला दर्ज हुआ तो व्यक्ति गिरफ़्तार हो जाता है.
  • इस मामले में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है.
  • जबकि दूसरे मामलों में संरक्षण के लिए फ़ोरम है, कोर्ट हैं जो झूठे मामलों में सरंक्षण दे सकता है.
  • कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन बेगुनाह को सजा न मिले.
  • कोर्ट ने कहा कि प्रेरित, दुर्भावना और झूठे आरोप लगाकर उनकी स्वतंत्रता का हनन नहीं कर सकते.

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने ये भी कहा

  • इस कानून में आरोपों को वैरीफाई करना मुश्किल है इसलिए इस तरह की गाइडलाइन जारी की गई.
  • जबकि अन्य अपराध में आरोपों को वैरीफाई किया जा सकता है.

जस्टिस गोयल ने कहा
हम एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, हमारा मकसद सिर्फ निर्दोष को बचाना है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

  • जो लोग सडकों पर प्रदर्शन कर रहे हैं शायद उन्होंने हमारे फैसले को नहीं पढ़ा
  • सरकार क्यों ये चाहती है कि जांच के बिना हीलोग गिरफ्तार हो
  • अगर सरकारी कर्मी पर कोई आरोप लगाए तो वो कैसे काम करेगा
  • हमने एक्ट को नहीं बल्कि सीआरपीसी की व्याख्या की है

जस्टिस यू यू ललित ने कहा

  • हमने जो गाइडलाइन जारी की हैं वो कानून में सेफगार्ड हैं
  • ये जरूरी नहीं कि समुदाय के लोग ही इसका मिसयूज करें, पुलिस भी कर सकती है

केंद्र की दलील –

  • केंद्र सरकार ने कहा कि इस कानून के प्रावधान में किसी गाइडलाइन की जरूरत नहीं है.
  • AG ने जस्टिस करनन के मामले का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने चीफ जस्टिस व सुप्रीम कोर्ट के जजों पर दलित होने की वजह से प्रताडित करने का आरोप लगाया था.
  • AG ने कहा कि वो आरोप सही नहीं थे तो कोई कार्रवाई नहीं की गई

AG ने कहा
इस आदेश के बाद समाज में जबरदस्त रोष है और प्रदर्शन हो रहे हें

जस्टिस गोयल ने कहा
  • हम सिर्फ कानूनी बात करेंगे, बाहर क्या हो रहा है हमें नहीं पता
  • हमने शिकायत की वैरिफिकेशन के लिए सात दिनों का वक्त रखा है

अमिक्स क्यूरी अमरेंद्र शरण ने कहा कि

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखे को सीआरपीसी भी यही कहता है कि गिरफ्तारी से पहले जांच हो.
  • भले ही प्रावधान एक्ट के हों लेकिन प्रक्रिया सीआरपीसी की होती है
  • ये गाइडलाइन जारी होने से केस की जांच, ट्रायल आदि प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

इससे पहले सुनवाई में एजी की ओर से खुली अदालत में इस संबंध में सुनवाई की अपील पर कोर्ट ने हामी भर दी थी. कोर्ट में एजी केके वेणुगोपाल ने कहा कि आज ही सुनवाई हो. इस पर जस्टिस आदर्श गोयल ने कहा कि वो खुली अदालत में सुनवाई को तैयार हैं, कोई परेशानी नहीं है लेकिन वही बेंच होनी चाहिए जिसका फैसला था. जस्टिस गोयल ने कहा कि बेंच के गठन के लिए चीफ जस्टिस के सामने मेंशन करें. केंद्र की ओर से AG ने आज ही दो बजे सुनवाई की मांग की. AG केके वेणुगोपाल ने सीजेआई कोर्ट में कहा, देश में कानून व्यवस्था खराब हो रही है. ऐसे में मामले की आज ही सुनवाई की जानी चाहिए. कोर्ट ने मांग मान ली. अमिक्स क्यूरी अमरेंद्र शरण ने इसका विरोध किया.

सुनवाई के बाद CJI ने कहा – वही बेंच आज दो बजे सुनवाई करेगी जिसने फैसला दिया. फैसले पर रोक लगे या नहीं वहीं बेंच तय करेगी.

शरण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि कानून व्यवस्था खराब हो रही है. बता दें कि 20 मार्च के फैसले के खिलाफ केंद्र ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. मामले पर जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यू यू ललित की बेंच ने आदेश दिया था.

SC/ ST एक्ट मामले में केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का 20 मार्च का फैसला SC/ ST समुदाय के संविधान के तहत दिए गए अनुच्छेद 21 के तहत जीने के मौलिक अधिकार से वंचित करेगा. SC/ ST के खिलाफ अपराध लगातार जारी है तथ्य बताते हैं कि कानून के लागू करने में कमजोरी है ना कि इसका दुरुपयोग हो रहा है.
अगर आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई तो वो पीडित को आतंकित करेगा और जांच को रोकेगा.

अग्रिम जमानत का प्रावधान 1973 में अधिकार के तहत जोड़ा गया. कोर्ट ने गलत कहा है कि जमानत देने से इंकार करना जीने के अधिकार का उल्लंघन है.

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CBSE PAPER LEAK 2018 दिल्ली पुलिस ने बतायी इकोनॉमिक्स पेपर लीक करने वाले रोहित-ऋषभ व तौकीर की साठ-गांठ की कहानी

कड़कड़डूमा कोर्ट से पुलिस को पर्चा लीक करने वाले तीनों लोगों की दो दिन की पुलिस कस्टडी मिल गयी है.

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

ANI @ANI_news

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

सीबीएसइ पेपर लीक मामले में आज दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इस संंबंध में मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने कहा आज तड़के रोहित व ऋषभ नाम के दो स्कूल टीचर और कोचिंग के एक ट्यूटर तौकीर को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रश्न खुलने के समय पौने दस बजे से 30 से 40 मिनट पहले 12वीं इकोनॉमिक्स का प्रश्न पत्र खोल लिया गया और रोहित व ऋषभ नामक टीचर ने उसे कोचिंग ट्यूटर तौकीर को वाट्सएप पर भेजा, जिसने उसे बच्चों को भेज दिया. उन्होंने कहा कि एक बच्चे से इस संबंध में पूछताछ की गयी थी. डीसीपी ने यह नहीं बताया कि इस मामले का मास्टमाइंड तीनों में कौन है, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि ऋषभ के कहने पर रोहित ने प्रश्नपत्र तौकीर को भेजा और इन तीनों में अच्छी पहचान व दोस्ती है.

डीसीपी आलोक कुमार ने कहा कि पेपर लीक मामले की जांच की दो हिस्सों में हो रही है. इकोनॉमिक्स पेपर लीक की जांच डॉ रामगोपाल नायक व दसवीं मैथ्स पेपर लीक की जांच जॉय तिर्की की अगुवाई में हो रही है और पूरी जांच का सुपरविजन डॉ रामगोपाल नायक कर रहे हैं.

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 Two teachers and a tutor were arrested. Police custody remand of all three has been taken, they will be questioned: Delhi Police Joint CP Crime Branch on #CBSEPaperLeak

उन्होंने दसवीं पेपर लीक मामले की जांच के संबंध में अभी कोई तथ्य बताने से इनकार करते हुए कहा कि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि कोर्ट से दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है, पुलिस दो दिन इनसे पूछताछ करेगी और मामले के तह तक जाने का प्रयास करेगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि तौकीर 26-27 साल का एक युवक है, जो कोचिंग में पढ़ाता है.

ऐसे लीक किया इकोनॉमिक्स का पेपर 

नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसइ पेपर लीक मामले में दो टीचर व एक कोचिंग सेंटर के मालिक सहित कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. न्यूज एजेंसी एएनआइ के अनुसार, दोनों शिक्षकों ने 9.15 बजे सुबह हाथ से लिखे प्रश्न पत्र की तसवीर उतारी थी और फिर उसे कोचिंग सेंटर के ट्यूटर को भेज दिया था. फिर कोचिंग सेंटर के ट्यूटर ने उसे स्टूडेंट्स को भेज दिया. कोचिंग ट्यूटर एनसीआर के बवाना का है, जबकि दोनों टीचर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. 26 मार्च को 12वीं इकोनॉमिक्स पेपर लीक की पूरी घटना परीक्षा शुुरू होने के समय 9.45 बजे के डेढ़ घंटे पहले तक में घटी. यह जानकारी दिल्ली पुलिस ने दी है. इन पर आरोप है कि उन्होंने 26 मार्च को परीक्षा के  पहले इकोनाॅमिक्स के पेपर को लीक किया. हालांकि पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया है वे दोनों टीचर किस स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार शनिवार रात मीडिया को जानकादी देते हुए.


उधर, क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार रात इस मामले में सीबीएसइ के मुख्यालय भी पहुंची थी. सूत्रों का कहना है कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स एवं 10वीं के मैथ्स पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम को कुछ अहम तथ्यों की जानकारी हाथ लगी है. पुलिस ने अबतक इस मामले में 60 लोगों से पूछताछ की है. इसमें वे दस वाट्सएप ग्रुप के संचालक भी शामिल हैं, जिनके ग्रुप में प्रश्न वायरल किया गया था.

दिल्ली के प्रीत विहार स्थित सीबीएसइ मुख्यालय पहुंची पुलिस. 

इस पूरे मामले में पुलिस को उस विह्सलब्लोअर की भी जानकारी मिली है, जिन्होंने मेल के जरिये सीबीएसइ प्रमुख को गणित के प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी थी. पुलिस ने उस शख्स का पता लगाने के लिए गूगल की मदद मांगी थी, क्योंकि उस व्यक्ति ने जीमेल से मेल भेजा था.

ध्यान रहे कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को ली जाएगी.

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अगर फ़ेसबुक बंद हो गया तो क्या होगा?

दिन हो या रात, ऑफ़िस का डेस्कटॉप हो या हाथों में समाने वाला स्मार्टफ़ोन, फ़ेसबुक वो दुनिया है जो हमारी दुनिया का अब अहम हिस्सा है.

घर-परिवार की तस्वीरें हों या फिर ऑफ़िस से जुड़ी कोई अच्छी-बुरी ख़बर, अब निजी ज़िंदगी की ख़बरें फ़ेसबुक पर ब्रेक होती हैं.

इस ख़बर को पढ़ने वाले ज़्यादातर लोग ऐसा करते होंगे, इसलिए फ़ेसबुक से जुड़ी हालिया घटना और उसके संभावित नतीजे के बारे में आपको ज़रूर ख़बर होनी चाहिए.

दरअसल, फ़ेसबुक से जुड़ी एक ख़बर ने दुनिया के होश उड़ा दिए हैं. सुनने में ये कहानी बड़ी जटिल है. लेकिन जितनी जटिल है, उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल सामने ला सकती है.

फ़ेसबुक फंसा कैसे?

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रिसर्च फ़र्म कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप लगा है कि उसने 5 करोड़ फ़ेसबुक यूज़र से जुड़ी जानकारी का ग़लत इस्तेमाल किया है.

ये बहस एक बार फिर शुरू हो गई है कि सोशल नेटवर्क पर लोगों से जुड़ी जानकारी कैसे और किसके साथ साझा की जाती है और फ़ेसबुक के लिए ये सारी जानकारी या कहें डेटा, कमाई का मुख्य स्रोत है क्योंकि यही विज्ञापन देने वाली कंपनियों को उसके पास खींच लाती हैं और उसे कमाई कराती हैं.

लेकिन कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ी घटना ने फ़ेसबुक को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतने कि सोशल मीडिया में फ़ेसबुक डिलीट करने से जुड़ा हैशटैग #deletefacebook भी वायरल बना दिया है.

फ़ेसबुक डिलीट करने की सलाह

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वॉट्सऐप के को-फ़ाउंडर ब्रायन एक्टन ने टि्वटर पर ये सलाह दी है. फ़ेसबुक ने कुछ साल पहले 16 अरब डॉलर या 1 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा में वॉट्सऐप ख़रीदा था.

ये बात तो हुई ख़ुद फ़ेसबुक डिलीट करने की सलाह की, लेकिन क्या साल 2017 की अंतिम तिमाही में 2.2 अरब मासिक एक्टिव यूज़र रखने वाला फ़ेसबुक बंद भी हो सकता है? और अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा? समाज में इसकी वजह से कितना बड़ा बदलाव आएगा?

फ़ेसबुक के आकार को देखकर आज ऐसा लग सकता है कि ये मुमकिन नहीं है. लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में चीज़ें इतनी तेज़ी से बदलती हैं कि आज नामुमकिन-सी लगने वाली बात कल को सामान्य लग सकती है.

सीएनएन के मुताबिक ज़्यादा दिन नहीं बीते जब चुनिंदा इंटरनेट कंपनियों ने मिलकर पूरी दुनिया बदल दी थी. फ़ेसबुक ने पारंपरिक मीडिया को बदलकर रख दिया. उबर, नेटफ़्लिक्स और एयरबीएनबी जैसी चीज़ों ने टैक्सी, मूवी थियेटर और होटलों की जगह ले ली है.

क्या ज़रूरत से ज़्यादा बड़ा हुआ FB

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लेकिन कभी क्रांतिकारी दिखने वाली ये अपस्टार्ट कंपनियां अब ताक़तवर दिखने लगी हैं और वे अब हमारे बारे में काफ़ी कुछ जानती हैं और लोगों को इससे परेशानी हो रही है.

यही वजह है कि अब हमें ब्लॉकचेन शब्द बार-बार सुनाई दे रहा है. दूसरी चीज़ों के अलावा ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी वो हथियार है जो फ़ेसबुक की ताक़त ख़त्म कर सकता है. बिटकॉइन में इसकी झलक मिलती है.

बिना बैंक और सरकार की मदद के डिजिटल मनी पूरी दुनिया में फैल रहा है. दूसरे शब्दों में कहें तो ब्लॉकचेन मध्यस्थों को हटाता है और ये टेक्नोलॉजी कई इंडस्ट्री की मदद कर सकती है.

ब्लॉकगीक के मुताबिक डिजिटल इंफ़ॉर्मेशन को कॉपी नहीं बल्कि डिस्ट्रीब्यूट करने का ज़रिया देने वाली ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी नए तरह के इंटरनेट की रीढ़ है. इसे शुरुआत में बिटकॉइन के लिए बनाया गया था लेकिन आगे चलकर ये फ़ॉर्मूला दूसरे लोगों के भी काम आ सकता है.

ब्लॉकचेन से फ़ायदा क्या?

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ब्लॉकचेन होने से कई लोग रिकॉर्ड इंफॉर्मेशन में कई सारी एंट्री डाल सकते हैं और यूज़र मिलकर (कम्युनिटी) इस बात का कंट्रोल अपने हाथ में रख सकते हैं कि इस रिकॉर्ड को कैसे इस्तेमाल करना है, बदलाव और अपडेट कैसे करना है.

कॉइनडेस्क के अनुसार इसे सबसे आसान तरीके से समझने के लिए विकीपीडिया का उदाहरण है. इस वेबसाइट पर कोई भी एक पब्लिशर मौजूद जानकारी पर अधिकार नहीं रखता.

हालांकि, ये दोनों ही डिस्ट्रीब्यूटेड नेटवर्क पर चलते हैं, लेकिन विकीपीडिया वर्ल्ड वाइड वेब पर बिल्ट किया गया है जिसमें क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है.

एकाउंट से ज़रिए मिलने वाली परमिशन के साथ कोई क्लाइंट या यूज़र सेंट्रलाइज़्ड सर्वर पर रखी विकीपीडिया की जानकारी बदल सकता है.

विकीपीडिया से समझें

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जब कोई यूज़र विकीपीडिया पेज पर जाता है तो उन्हें विकीपीडिया एंट्री की मास्टर कॉपी का अपडेटेड वर्ज़न मिलता है.

लेकिन डेटाबेस का कंट्रोल विकीपीडिया एडमिनिस्ट्रेटर के पास रहता है, जो ऐक्सेस और परमिशन देने से जुड़ी बातों का फ़ैसला सेंट्रल अथॉरिटी के खाते में रखते हैं.

अब फ़र्ज़ कीजिए कि फ़ेसबुक जैसी कोई साइट ऐसी ही बने जिस पर मौजूद डेटा का कंट्रोल किसी कंपनी नहीं बल्कि सभी के पास या कम्युनिटी के पास रहे तो कैसा होगा?

विकीपीडिया का डिजिटल आधार भी उन्हीं सुरक्षित और सेंट्रलाइज़्ड डेटाबेस की तरह है जो आम तौर पर सरकारें या बैंक या बीमा कंपनियां रखती हैं. इनका कंट्रोल भी सबसे ऊपर वाले लोगों के पास रहता है.

कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी?

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कंट्रोल में अपडेट, एक्सेस और साइबर हमलों से बचने के तौर-तरीके भी शामिल हैं. लेकिन ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में बुनियादी रूप से अलग डिजिटल आधार होता है. ये इस टेक्नोलॉजी का सबसे ख़ास और अलग फ़ीचर भी है.

विकीपीडिया की मास्टर कॉपी सर्वर पर एडिट होती है और सभी यूज़र को नया वर्ज़न दिखता है.

ब्लॉकचेन के मामले में नेटवर्क में मौजूद हर नोड एक ही निष्कर्ष तक पहुंचता है और उनमें से हरेक स्वतंत्र रूप से रिकॉर्ड को अपडेट करते हैं.

इसके बात जो सबसे ज़्यादा लोकप्रिय रिकॉर्ड होता है, वो मास्टर कॉपी की जगह आधिकारिक रिकॉर्ड माना जाता है. लेकिन फ़ेसबुक के बदलने या ऐसा कोई नया विकल्प आने में अभी वक़्त है.

जब तक फ़ेसबुक पर हैं, बचे रहें

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  • फ़ेसबुक पर लॉगइन करें और ऐप सेटिंग पेज पर जाएं
  • ऐप्स, वेबसाइट एंड प्लगइन के तहत एडिट बटन को क्लिक करें
  • प्लेटफ़ॉर्म को डिसएबल करें

इसका ये मतलब हुआ कि आपको फ़ेसबुक पर थर्ड-पार्टी साइट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे और अगर आपको इतना करना भी ज़्यादा लगता है तो ऐप इस्तेमाल करने के बावजूद पर्सनल इंफॉर्मेशन तक पहुंच सीमित बनाई जा सकती है.

  • फ़ेसबुक के ऐप सेटिंग पेज पर लॉगइन करें
  • हर वो कैटेगरी को अनक्लिक करें जिस तक आप किसी को पहुंचने नहीं देना चाहते. इनमें बायो, बर्थडे, फ़ैमिली, रेलीजियस व्यूज़ शामिल हैं.