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अमेजन एक ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप वाली दूसरी अमेरिकी कंपनी

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अमेजन 1 ट्रिलियन डॉलर (71 लाख करोड़ रुपए) मार्केट कैप वाली अमेरिका की दूसरी और दुनिया की तीसरी कंपनी बन गई। इसका शेयर मंगलवार को 2% तेजी के साथ 2050.50 डॉलर पर पहुंच गया। इस बढ़त से मार्केट वैल्यू में इजाफा हुआ।

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एपल दो अगस्त को 1 ट्रिलियन डॉलर की पहली अमेरिकी कंपनी बनी थी। अमेजन का मार्केट कैप एपल से 9900 करोड़ डॉलर कम है। एपल से पहले 2007 में शंघाई के शेयर बाजार में पेट्रोचाइना का मार्केट वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े पर पहुंचा था।

दुनिया की टॉप-3 मार्केट कैप वाली कंपनियां

कंपनी मार्केट कैप (डॉलर)
एपल 1099 अरब
अमेजन 1000 अरब
माइक्रोसॉफ्ट 856 अरब

एक साल में शेयर 100% से ज्यादा चढ़ा: पिछले 12 महीने में अमेजन के शेयर ने 108% रिटर्न दिया। इस साल जनवरी से अब तक इसमें 74% तेजी आई। पिछले तीन महीने में निवेशकों को 20% और एक महीने में करीब 12% मुनाफा दिया।

21 साल में शेयर प्राइस बढ़कर 114 गुना: 15 मई 1997 को 18 डॉलर पर अमेजन के शेयर की लिस्टिंग हुई। मंगलवार की तेजी के बाद शेयर 2050 के ऊपर चला गया। आईपीओ में 1000 डॉलर के निवेश की वैल्यू अब 13 लाख 41 हजार डॉलर से भी ज्यादा हो गई।

तारीख शेयर प्राइस
15 मई 1997 18 डॉलर
23 अक्टूबर 2009 100 डॉलर
27 अक्टूबर 2017 1000 डॉलर
30 अगस्त 2018 2000 डॉलर

जेफ बेजोस दुनिया में सबसे अमीर: अमेजन के फाउंडर और सीईओ लंबे समय से दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 166 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बेजोस नंबर-1 हैं। शेयर में तेजी से इस साल उनकी दौलत में 66.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। बिलेनियर इंडेक्स में 98.1 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बिल गेट्स दूसरे नंबर पर हैं। एशिया के सबसे अमीर मुकेश अंबानी 47.7 अरब डॉलर के साथ 12वें नंबर पर हैं।

 

अमेजन का सफर

1994 किताब बेचने से शुरुआत
मई 1997 अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टिंग
जून 1998 आईएमडीबी का अधिग्रहण

ऑनलाइन म्यूजिक स्टोर की शुरुआत

दिसंबर 2000 कैमरा, फोटो स्टोर शुरू किया

अमेजन मार्केटप्लेस लॉन्च

फरवरी 2005 अमेजन प्राइम लॉन्च
नवंबर 2007 अमेजन किंडल, अमेजन म्यूजिक शुरू
सितंबर 2011 किंडल फायर, किंडल टच, किंडल टच 3जी बाजार में उतारे
दिसंबर 2016 अमेजन वीडियो लॉन्च

ड्रोन सर्विस प्राइम एयर से पहली डिलीवरी

अगस्त 2017 13 अरब डॉलर में होल फूड्स का अधिग्रहण
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अमरीकी चुनाव में कथित रूसी दख़ल पर दिए बयान से पलटे ट्रंप

उन्होंने कहा कि सोमवार को दिए उनके बयान का मतलब था कि उन्हें रूस द्वारा हस्तक्षेप ना करने का कोई कारण नज़र नहीं आता.

क्या कहा था ट्रंप ने

ये विवाद शुरू हुआ जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनल्ड ट्रंप मुलाक़ात के बाद मीडिया से मुख़ातिब हुए थे.

एक पत्रकार के सवाल पर ट्रंप ने जो जवाब दिया, वो अमरीकी एजेंसियों के दावे के विपरीत था.

ट्रंप-पुतिनइमेज कॉपीरइटAFP

व्हाइट हाउस से जो इस न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस का ट्रांसक्रिप्ट जारी हुआ है, नीचे उसका हिस्सा पढ़ा जा सकता है.

रिपोर्टर : राष्ट्रपति पुतिन ने 2016 राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप के आरोप को ख़ारिज किया है लेकिन अमरीका की ख़ुफिसा एजेंसियों का कहना है कि रूस ने हस्तक्षेप किया है. मेरा आपसे सवाल है कि आप क्या मानते हैं?

ट्रंप : हमारे लोग मेरे पास आए, उन्होंने कहा कि उन्हें रूस का हाथ लगता है. मेरे साथ राष्ट्रपति पुतिन हैं, उन्होंने अभी कहा कि रूस का हाथ नहीं है. मैं कहूंगा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा.

अब क्या कह रहे हैं ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कॉन्फ़्रेंस की ट्रांसक्रिप्ट पढ़ी तो लगा कि उन्हें सफ़ाई देनी चाहिए.

उनका कहना है कि एक वाक्य में उन्होंने ‘क्यों नहीं किया होगा’ के बजाय ‘क्यों किया होगा’ कह दिया.

ट्रंप-हिलेरी

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वो अपनी खुफ़िया एजेंसियों के दावे पर यक़ीन करते हैं कि 2016 राष्ट्रपति चुनावों में रूस ने दख़ल दिया था.

ट्रंप ने कहा कि इस दख़ल का चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ा था.

ट्रंप के बयान पर ऐसी हुई प्रतिक्रिया

वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर और सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के सदस्य लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि ट्रंप ने रूस को अमरीका के ‘कमज़ोर’ होने का संकेत दिया है.

उन्होंने ट्वीट किया था, “ट्रंप ने 2016 के हस्तक्षेप के लिए रूस को जवाबदेह बनाने और आने वाले चुनावों को लेकर सख्त चेतावनी देने का मौक़ा गंवाया है.”

उनके सहयोगी रिपल्बिकन सीनेटर जेफ़ फ्लेक ने कहा था कि ट्रंप ने ‘शर्मनाक’ शब्द इस्तेमाल किए हैं.

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हेलसिंकी में आज पुतिन से मिलेंगे ट्रंप, ट्रेड वॉर समेत कई अहम मुद्दों पर बात सम्भव

सोमवार को फिनलैंड की राजधानी में ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। यह इन दोनों नेताओं की पहली बैठक होगी।

बैठक के लिए ट्रंप हेलसिंकी पहुंच चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के आरोपों के मद्देनजर हर कोई जानना चाह रहा है कि दोनों नेताओं में क्या बातचीत होती है?

यूरोप आने से पहले जब ट्रंप ने कहा था कि उनकी यात्रा का सबसे आसान हिस्सा हेलसिंकी प्रवास रहेगा, तो कई लोगों की भवें तन गई थीं। ब्रसेल्स और लंदन प्रवास के दौरान अब तक ट्रंप की यात्रा विवादों में रही है। इस बीच, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल का मामला फिर गरमा गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने में पुतिन ने ट्रंप की गुप्त रूप से मदद की थी। ऐसे में इसकी उम्मीद कम ही है कि बैठक में यह अकेला मुद्दा हावी रहेगा।

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को का द्विपक्षीय संबंध बेहद खराब है। हमें एक नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि, हम ट्रंप को बातचीत के योग्य साझीदार मानते हैं।

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वर्ल्‍ड ट्रेड वार में भारत ने भी दिया अमेरिका को उसकी ही भाषा में जवाब

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी कारोबार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रॉबर्ट लाइटहाइजर के कार्यालय ने भारत सरकार द्वारा वस्तुओं के निर्यात को लेकर चलाई जाने वाली योजनाओं तथा निर्यात से जुड़ी इकाइयों की योजनाओं व अन्य ऐसी योजनाओं को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के खिलाफ कारोबारी विवाद आपत्तियों के निपटारे हेतु कठोर आवेदन प्रस्तुत किया था। अमेरिका की इन आपत्तियों पर भारत सरकार ने दलील दी कि उसके द्वारा दी जा रही विभिन्न राहत और सुविधाएं डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत ही हैं। लेकिन अमेरिका अनुचित और अन्यायपूर्ण ढंग से भारत पर व्यापार प्रतिबंध बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत ने विगत 18 मई को डब्ल्यूटीओ को अमेरिका से आयातित 30 उत्पादों की सूची सौंपी थी, जिन पर वह आयात शुल्क बढ़ाना चाहता था। अब भारत ने इनमें से 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।

वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर
इससे यही लगता है कि बीते कुछ दिनों से वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर यानी वैश्विक व्यापार युद्ध को लेकर जो आशंका जताई जा रही थी, वह सही साबित होने लगी है। यह सही है कि अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कोई सात दशक तक वैश्विक व्यापार, पूंजी प्रवाह और कुशल श्रमिकों के लिए न्यायसंगत आर्थिक व्यवस्था के निर्माण और पोषण में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन अब वही वैश्विक व्यवस्था मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदमों से जोखिम में है। इस साल अमेरिका ने चीन, मैक्सिको, कनाडा, ब्राजील, अर्जेटीना, जापान, दक्षिण कोरिया व यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों के साथ-साथ भारत की कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए हैं। जैसे-जैसे अमेरिका विभिन्न देशों के आयातों पर शुल्क बढ़ा रहा है, जवाब में वे देश भी वैसा ही कर रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव भी भारत के वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि 19 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के आयात पर 10 फीसद शुल्क लगाने की चेतावना दी।

चीन ने लगाया शुल्‍क
इसके चार दिन पूर्व ही ट्रंप ने चीन से 50 अरब डॉलर मूल्य के सामान के आयात पर 25 फीसद शुल्क लगाने को मंजूरी दे दी। इसके बाद चीन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी 50 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाएगा। इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि इसी माह कनाडा के क्यूबेक सिटी में आयोजित जी-7 देशों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और नीतियों की वजह से तमाशा बनकर रह गया। जी-7 के सदस्य देश कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, फ्रांस तथा ब्रिटेन जहां पहले ही ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर नाखुश थे, वहीं जी-7 सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिका ने इस समूह के विभिन्न देशों से होने वाले कुछ आयातों पर नए व्यापारिक प्रतिबंध घोषित करते हुए ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका को और गहरा दिया।

डब्ल्यूटीओ की भूमिका
इस संदर्भ में डब्ल्यूटीओ की भूमिका अहम हो जाती है। डब्ल्यूटीओ एक ऐसा संगठन है, जो सदस्य देशों के बीच व्यापार तथा वाणिज्य को सहज-सुगम बनाने का उद्देश्य रखता है। यद्यपि डब्ल्यूटीओ एक जनवरी, 1995 से प्रभावी हुआ, परंतु वास्तव में यह 1947 में स्थापित एक बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के नए एवं बहुआयामी रूप में अस्तित्व में आया। जहां गैट वार्ता वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रही थीं, वहीं इससे आगे बढ़कर डब्ल्यूटीओ का लक्ष्य वैश्विक व्यापारिक नियमों को अधिक कारगर बनाने के प्रयास के साथ-साथ सेवाओं एवं कृषि में व्यापार संबंधी वार्ता को व्यापक बनाने का रहा है। किंतु वैश्विक व्यापार को सरल और न्यायसंगत बनाने के 71 वर्ष बाद तथा डब्ल्यूटीओ के कार्यशील होने के 23 वर्ष बाद भारत सहित विकासशील देशों के करोड़ों लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि डब्ल्यूटीओ के तहत विकासशील देशों का शोषण हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय
ऐसे में दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञ यही आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका के संरक्षणवादी रवैये से वैश्विक व्यापार युद्ध की शुरुआत हो गई है। लिहाजा इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करना जरूरी है कि यदि विश्व व्यापार व्यवस्था वैसे काम नहीं करती, जैसे उसे करना चाहिए तो डब्ल्यूटीओ ही एक ऐसा संगठन है, जो इसे दुरुस्त कर सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दुनियाभर में घातक व्यापार लड़ाइयां 21वीं सदी की हकीकत बन जाएंगी। बेहतर यही होगा कि विभिन्न देश एक-दूसरे को व्यापारिक हानि पहुंचाने की होड़ में उलझने के बजाय डब्ल्यूटीओ के मंच से ही आसन्न ग्लोबल ट्रेड वॉर के नकारात्मक प्रभावों का उपयुक्त हल निकालें। यद्यपि भारत ने कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है, लेकिन अब बेहतर यही होगा कि वह इस मामले में धैर्य का परिचय दे और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक हितों के व्यापक पहलुओं पर गौर करे।

सबसे बड़ा निर्यातक बाजार
यह इसलिए भी जरूरी है कि जहां भारत के लिए अमेरिका दुनिया का सबसे पहले क्रम का निर्यातक बाजार है, वहीं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। पिछले वित्त-वर्ष में भारत ने अमेरिका को 47.9 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया था। हम उम्मीद करें कि भारत सरकार और भारतीय उद्यमी निर्यात की नई उभरती चुनौतियों के बीच विभिन्न देशों में विभिन्न वस्तुओं के निर्यात के नए मौके ढूंढने की डगर पर आगे बढ़ेंगे। खासकर चीन व अन्य देशों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ने के कारण अमेरिका से आयातित सोयाबीन, तंबाकू, फल, गेहूं, मक्का तथा रसायन जैसी जो कई चीजें महंगी हो गई हैं, वहां के बाजारों में ये भारतीय उत्पाद सस्ते होने के कारण सरलता से अपनी पैठ बना सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड वॉर की स्थिति के चलते हमारे निर्यात, निवेश व आर्थिक विकास दर घटने की जो आशंकाएं बढ़ गई हैं, उनसे निपटने हेतु सरकार को पुख्ता रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

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इम्पोर्टेड साइकिल के दाम में लॉन्च हुआ Hero का ये स्वदेशी स्कूटर, चलने में भी रहेगा किफायती

हीरो इलेक्ट्रीक ने अपना नया ईको-फ्रेंडली स्कूटर Flash लॉन्च किया है. जिसकी कीमत 19,990 रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) रखी गई है.

इस स्कूटर को खासकर उन कस्टमर्स को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपना रहें हैं और वो जो पहली दफा ई-व्हिकल खरीद रहें हैं.

नया फ्लैश दो कलर वेरिएंट में आएगा और इसे एक बार चार्ज करने पर 65 किलोमीटर तक चला सकते हैं. इस स्कूटर में 250 वॉट का मोटर है जिसमें 48-Volt 20 Ah VRLA की बैटरी है और ये पूरी तरह शॉर्ट शर्किट प्रोटेक्शन से लैस है. स्कूटर में सीट के नीचे स्टोरेज कंपार्टमेंट भी दिया गया है.

फ्लैश का वजन केवल 87 KG है जो इसे तेजी से चलने में मदद करता है. इसमें मैग्नेशियम अलॉय व्हील, टेलीस्कोपिक सस्पेंशन और फुल बॉडी क्रैश गार्ड दी गई है.

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Congress poster spotted in Cambridge Analytica CEO Nix’s London office

Though the Congress has denied it has any links with Cambridge Analytica, the company accused of stealing Facebook data to influence elections, a documentary released last year by journalist and tech blogger Jamie Bartlett throws up an image the Congress may have hard time to explain.

The Persuasion Machine, the last of the two-part documentary series for the BBC, ‘Secrets of the SIlicon Valley’, shows Bartlett meeting Cambridge Analytica’s now-suspended CEO Alexander Nix in his London office. As Bartlett enters Nix’s room, he stands up and greets him. Right behind Nix, on the wall, is a poster showing the ‘hand’ symbol of the Congress party. Below the hand is written “Congress” in bold letters. The poster carries the slogan ‘Development for all’.

Bartlett’s documentary probes the role of technology in the election campaign of US President Donald Trump. Nix is one of the many people he interviews. Though Nix says nothing about the operations of Cambridge Analytica in India and talks about only the Trump campaign, the Congress poster on the wall behind him looks like proud showcasing of a big client.

In ‘The Persuasion Machine’, Bartlett narrates how Silicon Valley has opened a new frontier—controlling political expression and behaviour of the masses. “It was the biggest political earthquake of the century. But just how did Donald Trump defy the predictions of political pundits and pollsters?” begins Bartlett.

BJP Minister Smriti Irani shares this picture from her official Twitter handle and disclose this important news with mentioning economictimes article.

After Nix explains how the company created psychographic profiles of voters, Bartlett asks, “Where did all the information to predict voters’ personalities come from?” Nix says,”Very originally, we used a combination of telephone surveys and then we used a number of online platforms for gathering questions. As we started to gather more data, we started to look at other platforms such as Facebook, for instance.”

When Bartlett wonders if some people would find it a little bit creepy to predict a voter’s personality to persuade him, Nix says, “No, I can’t. Quite the opposite. I think that the move away from blanket advertising, the move towards ever more personalised communication is a very natural progression. I think it is only going to increase.”

Justifying the company using personal data people put in the public domain, Nix gives the example of a supermarket loyalty card where people get points and the company gathers the data on consumer behaviour. But Bartlett is puzzled. “I mean, we are talking about politics and we’re talking about shopping. Are they really the same thing?” he asks. Nix replies, “The technology is the same. In the next 10 years, the sheer volumes of data that are going to be available, that are going to be driving all sorts of things including marketing and communications, is going to be a paradigm shift from where we are now and it’s going to be a revolution, and that is the way the world is moving. And, you know, I think, whether you like it or not, it is an inevitable fact.”

For more than a week, the Congress and the Bharatiya Janata Party (BJP) have traded charges, accusing each other of having been clients of Cambridge Analytica. Christopher Wylie, the Cambridge Analytica whistleblowerat the heart of the Facebook privacy scandal, told British lawmakers yesterday that he “believes” Congress was the company’s client.

The Congress denies it has anything to do with Cambridge Analytica. However, Alexander Nix was not shy of displaying the Congress poster in his own office.

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एसबीआई ने बंद कर दिए 41 लाख से ज्यादा बचत खाते, इसके पीछे बताई ये वजह

भारतीय स्टेट बैंक ने 41 लाख 16 हजार सेविंग अकाउंट बंद कर दिए हैं। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। यह खाते अप्रैल 2017 से लेकर जनवरी 2018 तक किए गए हैं। बैंक ने इसके पीछे बैंक मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने की वजह बताई है। दरअसल मध्यप्रदेश के नीमच के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि उनकी आरटीआई अर्जी पर एसबीआई (State bank of India) के एक आला अधिकारी ने उन्हें 28 फरवरी को भेजे पत्र में यह जानकारी दी। स्टेट बैंक में 41 करोड़ सेविंग अकाउंट हैं। इनमें से 16 करोड़ प्रधान मंत्री जन धन योजना / बुनियादी बचत बैंक जमा (बीएसबीडी) और पेंशनभोगी, नाबालिगों, सामाजिक सुरक्षा लाभ धारकों के अधीन हैं। इन खातों पर मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने का चार्ज नहीं लगता है।

SBI ने 75 फीसदी तक कम किया AMB चार्ज: स्टेट बैंक ने खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाले चार्ज में 75 फीसदी तक की कटौती कर दी है। चार्ज में हुए यह बदलाव 1 अप्रैल से लागू किए जाएंगे। मेट्रो और शहरी क्षेत्रों के खातों पर लगने वाली पेनल्टी की राशि को प्रति महीने 50 रुपये से कम कर 15 रुपये प्रति महीने कर दिया गया है। वहीं सेमी अर्बन एरिया में इस चार्ज को 40 रुपए महीने से घटाकर 12 रुपए महीने कर दिया है। वहीं ग्रामीण इलाकों में मौजूद ब्रांचों के खातों पर ली जाने वाली पेनल्टी की राशि को 10 रुपये कर दिया गया है। इन पर जीएसटी अलग से लिया जाएगा।

आपको बता दें कि स्टेट बैंक के केवल 8 महीने में 1,771 करोड़ रुपए की कमाई सिर्फ मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने वाले खाताधारकों से की थी। इसके लिए बैंक की काफी आलोचना भी हुई थी। यह राशि स्टेट बैंक के जुलाई-सितंबर 2017 की पूरी तिमाही से भी ज्यादा थी। बैंक ने इस तिमाही में 1,581.55 करोड़ रुपए की कमाई की थी। यह अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 तक की बैंक की कमाई का लगभग आधा था। इस दौरान बैंक ने 3,586 करोड़ रुपए की कमाई की थी। पिछले साल अक्टूबर में एसबीआई ने मासिक औसत बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाली फीस में 20-50 फीसदी तक सर्विस चार्ज में कटौती की थी।
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अमेजन के मालिक दुनिया में सबसे रईस, मुकेश अंबानी 19वें स्थान पर

फोर्ब्स की सालाना अरबपतियों की सूची में इस वर्ष अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन डॉट कॉम के मालिक जेफरी प्रेस्टन बेजॉस ने धमाकेदार प्रदर्शन के साथ बिल गेट्स से दुनिया के सबसे बड़े धनकुबेर का रुतबा छीन लिया है। सूची के मुताबिक 110 अरब डॉलर (करीब 7.15 लाख करोड़ रुपये) मूल्य की संपत्ति के साथ जेफ बेजॉस दुनिया के सबसे बड़े धनकुबेर बन गए हैं। इसके साथ ही जेफ 100 अरब डॉलर से ज्यादा संपत्ति वाले पहले अरबपति भी बन गए हैं।

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और सामाजिक कार्यों के लिए भरपूर दान देने वाले बिल गेट्स को वर्षों बाद पहली बार दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा है। फोर्ब्स की नवीनतम सूची में गेट्स की कुल संपत्ति 90 अरब डॉलर आंकी गई है। वहीं, भारत के सबसे बड़े धनकुबेर और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी 40.1 अरब डॉलर (करीब 2.61 लाख करोड़ रुपये) संपत्ति के साथ सूची में एक पायदान चढ़कर 19वें स्थान पर रहे हैं। पिछले वर्ष वे 20वें स्थान पर थे और उनकी संपत्ति में करीब आठ अरब डॉलर का इजाफा हुआ है।

फोर्ब्स के मुताबिक इस वर्ष इन्वेस्टमेंट गुरु वारेन बफेट (84 अरब डॉलर) तीसरे, बर्नार्ड अर्नाल्ट (72 अरब डॉलर) चौथे और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग (71 अरब डॉलर) पांचवें स्थान पर रहे। दुनिया के शीर्ष 100 धनकुबेरों की सूची में देश के अन्य दिग्गजों में हिंदुजा परिवार, अजीम प्रेमजी (विप्रो), लक्ष्मी निवास मित्तल (आर्सेलरमित्तल), शिव नाडर (एचसीएल), दिलीप सांघवी (सन फार्मा), उदय कोटक (कोटक महिंद्रा बैंक), राधाकिशन दमानी, सायरस पूनावाला (सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया), सुनील मित्तल और परिवार (भारती एयरटेल) तथा आचार्य बालकृष्ण (पतंजलि) शामिल हैं।

फोर्ब्स की सूची में शीर्ष 10 में कोई महिला नहीं है। अमेरिकी रिटेल चेन वालमार्ट की उत्तराधिकारी एलिस वाल्टन 16वें स्थान के साथ पहली महिला हैं।

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भारत-वियतनाम के बीच परमाणु समेत 3 समझौते हुए, मोदी बोले- इंडो-पैसिफिक के लिए मिलकर काम करेंगे

पीएम नरेन्द्र माेदी और वियतनाम के प्रेसिडेंट त्रान दाई क्‍वांग के बीच बात-चीत के बाद शनिवार को दोनों देशों ने परमाणु सहयोग समेत तीन समझौतों पर दस्तखत किए। इस दौरान नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने फैसला किया है कि डिफेंस प्रोडक्शन में आपसी सहयोग बढ़ाने के साथ टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान की संभावनाआें की तलाश करेंगे। भारत के आसियान देशों से संबंध और एक्ट ईस्ट पॉलिसी के फ्रेमवर्क में वियतनाम महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बता दें कि क्‍वांग तीन दिन के भारत दौरे पर आए हैं। शनिवार को दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति भवन में उनको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

किन क्षेत्रों में हुए समझौते?
– एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग
– इकोनाॅमिक एंड ट्रेड क्षेत्र में सहयोग
– टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान और एग्रीकल्चर से जुड़े फील्ड में टेक्नीकल एक्सपर्ट्स की विजिट में सहयोग

मोदी ने और क्या कहा?
– नरेन्द्र मोदी ने कहा, “हम मिलकर ऐसे खुले, आजाद और समृद्ध इंडो-पैसिफिक एरिया के लिए काम करेंगे, जहां संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूरा सम्मान किया जाएगा।”
– मोदी ने कहा, “भारत और वियतनाम रिन्यूएवल एनर्जी (हाइड्रो एनर्जी, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा, बायोमास, जैव ईंधन) एग्रीकल्चर, टेक्सटाइल, तेल और गैस समेत अन्य क्षेत्रों में अपने रिश्ते और मजबूत करेंगे।”
– मोदी ने कहा, “हम न केवल गैस और तेल के सेक्टर में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाएंगे, बल्कि अन्य देशों के साथ मिलकर त्रिपक्षीय संबंधों को भी आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

बिजनेस 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर बनी सहमति
-विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन रवीश कुमार ने ट्वीट किया है कि भारत और वियतनाम का 2016-17 में बिजनेस 6.24 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच बिजनेस को 2020 तक 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति बनी है।

शुक्रवार को भारत पहुंचे थे क्वांग
– प्रेसिडेंट त्रान दाई क्‍वांग शुक्रवार को भारत पहुंचे। इसके बाद वे बौद्धों के पवित्र तीर्थस्थल बिहार के बोधगया गए।
– शनिवार सुबह क्वांग का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद और नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। क्वांग ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी।

– वहीं, समझौतों से पहले क्‍वांग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी मुलाकात की।

– प्रेसिडेंट क्‍वांग के साथ अाए प्रतिनिधिमंडल में वियतनाम के वाइस प्रेसिडेंट और विदेश मंत्री फाम बिन मिन्ह के अलावा कई मंत्री शामिल हैं। इनके साथ एक कारोबारी शिष्टमंडल भी है।

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PNB और Rotomac के बाद अब CBI ने तीन नए घोटालों से उठाया पर्दा, मामला दर्ज

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले और रोटोमैक घोटाले से अभी देश ठंग से उबरा भी नहीं था कि अब सीबाआई ने कई और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को उजागर किया है। इन तीन मामलों में सीबीआई ने एक ज्वैलर, एक बिजनेस मैन और एक पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है क्योंकि इनके खिलाफ तीन अलग अलग बैंकों ने शिकायत दर्ज कराई है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है।

ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में हुआ 3.9 बिलियन का फ्रॉड

गुरुवार को सीबीआई ने कथित धोखाधड़ी के इस मामले में द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। 389.85 करोड़ रुपये का यह कथित कर्ज घोटाला ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) में हुआ है। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने आरोप लगाया है कि दिल्ली जौहरी द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल और उसके मालिक सभ्या सेठ ने उन्हें धोखा दिया। उनको दिया गया लोन 2014 में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गया, लेकिन बैंक ने पिछले साल 16 अगस्त को ही एजेंसी से संपर्क किया था, जब कंपनी ने अपना कारोबार समेट लिया और सेठ देश से भाग गए। सभ्या की कंपनी ने ओबीसी से 2007 से 2012 के दौरान कुल 389 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। बैंक की ओर से कराई गई जांच में पाया गया कि कंपनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल सोने और दूसरे कीमती रत्नों की खरीद का भुगतान करने के लिए किया। कंपनी ने फर्जी लेनदेन का उपयोग कर सोने और धन को देश से बाहर भेजा।

पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से नीरव मोदी और रोटोमैक ग्लोबाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पीएनबी के बाड़मेर ऑफिस ने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया, धोखाधड़ी की शिकायतों के साथ-साथ, इन्होंने एजेंसी के समक्ष ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र बैंक घोटाला: सीबीआई ने बुधवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायत के आधार पर व्यापारी अमित सिंगला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। बैंक ने आरोप लगाया कि जाली दस्तावेजों के आधार पर लोन लिया गया और इसका गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने दिल्ली के कारोबारी अमित सिंगला के खिलाफ 9.5 करोड़ रुपए के गबन का मामला दर्ज कराया है। शिकायत के मुताबिक सिंगला की कंपनी आशीर्वाद चेन ने बैंक से लोन लिया, लेकिन अब चुकाने में वो टालमटोल कर रहे हैं। सिंगला ने ये लोन कैश क्रेडिट फैसिलिटी के जरिए साल 2010 और 2012 में लिया था। आरोपी ने दिल्ली और हरियाणा में एक ही परिवार की तीन संपत्तियों को पेश किया था। लोन लेने के दौरान इन तीनों संपत्तियों का कुल मूल्य टेक महिंद्रा इंटरनेशनल की ओर से 180 मिलियन लगाया गया था।