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अंग्रेज भारत से कितना धन लूट के ले गए थे, जानें अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक की अनोखी खोज

इस बात को हर भारतीय कभी न कभी सोचता होगा कि अंग्रेजी शासन में जो लूट हुई उससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी हानि हुई। सोने की चिड़िया हिन्दुस्तान क्यों अभी भी विकासशील देश ही है।

ब्रिटिश शासन के औपनिवेश के समय की अर्थव्यवस्था पर शोध कर रहीं अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के लिखे थीसिस से बताया है आखिर ब्रिटिश शासकों ने भारत से कितना धन लूटा है। ब्रिटिश शासकों की ओर से लूटे गए खजाने की वजह से अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है200 साल तक देश में अत्याचार करने वाले अंग्रेज वापस लौट तो गए, लेकिन इतने समय में उन्होंने हमारा काफी धन लूट लिया। जानी-मानी अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने अपने निबंध में लिखा कि अंग्रेज़ों ने भारत का करीब 45 ट्रिलियन डॉलर (3,19,29,75,00,00,00,000.50 रुपये) लूटा
इस निबंध को कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है। आगे उत्सा ने बताया कि अंग्रेज़ों ने भारत को लूटकर बर्बाद कर दिया और अपनी शान-ओ-शौकत के लिए कभी भी भारत का नाम तक नहीं लिया.

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CBSE PAPER LEAK 2018 दिल्ली पुलिस ने बतायी इकोनॉमिक्स पेपर लीक करने वाले रोहित-ऋषभ व तौकीर की साठ-गांठ की कहानी

कड़कड़डूमा कोर्ट से पुलिस को पर्चा लीक करने वाले तीनों लोगों की दो दिन की पुलिस कस्टडी मिल गयी है.

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

ANI @ANI_news

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

सीबीएसइ पेपर लीक मामले में आज दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इस संंबंध में मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने कहा आज तड़के रोहित व ऋषभ नाम के दो स्कूल टीचर और कोचिंग के एक ट्यूटर तौकीर को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रश्न खुलने के समय पौने दस बजे से 30 से 40 मिनट पहले 12वीं इकोनॉमिक्स का प्रश्न पत्र खोल लिया गया और रोहित व ऋषभ नामक टीचर ने उसे कोचिंग ट्यूटर तौकीर को वाट्सएप पर भेजा, जिसने उसे बच्चों को भेज दिया. उन्होंने कहा कि एक बच्चे से इस संबंध में पूछताछ की गयी थी. डीसीपी ने यह नहीं बताया कि इस मामले का मास्टमाइंड तीनों में कौन है, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि ऋषभ के कहने पर रोहित ने प्रश्नपत्र तौकीर को भेजा और इन तीनों में अच्छी पहचान व दोस्ती है.

डीसीपी आलोक कुमार ने कहा कि पेपर लीक मामले की जांच की दो हिस्सों में हो रही है. इकोनॉमिक्स पेपर लीक की जांच डॉ रामगोपाल नायक व दसवीं मैथ्स पेपर लीक की जांच जॉय तिर्की की अगुवाई में हो रही है और पूरी जांच का सुपरविजन डॉ रामगोपाल नायक कर रहे हैं.

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 Two teachers and a tutor were arrested. Police custody remand of all three has been taken, they will be questioned: Delhi Police Joint CP Crime Branch on #CBSEPaperLeak

उन्होंने दसवीं पेपर लीक मामले की जांच के संबंध में अभी कोई तथ्य बताने से इनकार करते हुए कहा कि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि कोर्ट से दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है, पुलिस दो दिन इनसे पूछताछ करेगी और मामले के तह तक जाने का प्रयास करेगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि तौकीर 26-27 साल का एक युवक है, जो कोचिंग में पढ़ाता है.

ऐसे लीक किया इकोनॉमिक्स का पेपर 

नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसइ पेपर लीक मामले में दो टीचर व एक कोचिंग सेंटर के मालिक सहित कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. न्यूज एजेंसी एएनआइ के अनुसार, दोनों शिक्षकों ने 9.15 बजे सुबह हाथ से लिखे प्रश्न पत्र की तसवीर उतारी थी और फिर उसे कोचिंग सेंटर के ट्यूटर को भेज दिया था. फिर कोचिंग सेंटर के ट्यूटर ने उसे स्टूडेंट्स को भेज दिया. कोचिंग ट्यूटर एनसीआर के बवाना का है, जबकि दोनों टीचर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. 26 मार्च को 12वीं इकोनॉमिक्स पेपर लीक की पूरी घटना परीक्षा शुुरू होने के समय 9.45 बजे के डेढ़ घंटे पहले तक में घटी. यह जानकारी दिल्ली पुलिस ने दी है. इन पर आरोप है कि उन्होंने 26 मार्च को परीक्षा के  पहले इकोनाॅमिक्स के पेपर को लीक किया. हालांकि पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया है वे दोनों टीचर किस स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार शनिवार रात मीडिया को जानकादी देते हुए.


उधर, क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार रात इस मामले में सीबीएसइ के मुख्यालय भी पहुंची थी. सूत्रों का कहना है कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स एवं 10वीं के मैथ्स पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम को कुछ अहम तथ्यों की जानकारी हाथ लगी है. पुलिस ने अबतक इस मामले में 60 लोगों से पूछताछ की है. इसमें वे दस वाट्सएप ग्रुप के संचालक भी शामिल हैं, जिनके ग्रुप में प्रश्न वायरल किया गया था.

दिल्ली के प्रीत विहार स्थित सीबीएसइ मुख्यालय पहुंची पुलिस. 

इस पूरे मामले में पुलिस को उस विह्सलब्लोअर की भी जानकारी मिली है, जिन्होंने मेल के जरिये सीबीएसइ प्रमुख को गणित के प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी थी. पुलिस ने उस शख्स का पता लगाने के लिए गूगल की मदद मांगी थी, क्योंकि उस व्यक्ति ने जीमेल से मेल भेजा था.

ध्यान रहे कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को ली जाएगी.

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पेपर लीक: 12वीं की अर्थशास्‍त्र की परीक्षा का एलान हुआ

एजुकेशन सेक्रटरी अनिल स्‍वरूप ने बताया कि कक्षा 12वीं के इकनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को होगी। कक्षा 10वीं के गणित के पेपर की दोबारा परीक्षा की तारीखों का एलान 15 दिन में होगा। उन्‍होंने यहां साफ किया कि 10वीं के गणित की दोबारा परीक्षा केवल दिल्ली और हरियाणा में होगी, वो भी तब, जब जांच के बाद जरूरत महसूस की जाएगी। अगर 10वीं के गणित की परीक्षा दोबारा कराने की जरूरत महसूस होती है, तो वो जुलाई में कराई जा सकती है।

अनिल स्‍वरूप ने कहा कि कक्षा 12वीं के छात्रों ने कई विश्‍वविद्यालयों और संस्‍थानों में कोर्सों के लिए आवेदन कर रखे हैं। इसलिए उनकी परीक्षा जल्‍द कराना बेहद जरूरी है। हम इन छात्रों का समय ना बर्बाद करते हुए 25 अप्रैल को अर्थशास्‍त्र के पेपर की परीक्षा करा रहे हैं। हमें छात्रों के हितों की चिंता, छात्रों को दिक्कत ना हो, इसलिए हम काम कर रहे हैं। 10वीं की परीक्षा की तारीख के बारे में फैसला अभी नहीं लिया गया है, क्‍योंकि जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। हालांकि कक्षा 10वीं की दोबारा परीक्षा की तारीखों का एलान 15 दिन में कर दिया जाएगा। लेकिन अगर दोबारा परीक्षा का निर्णय लिया जाता है, तो सिर्फ दिल्ली और हरियाणा में परीक्षा होगी, अन्‍य किसी राज्‍य में नहीं। 10वीं के गणित की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय अगर लिया जाता है, तो परीक्षा जुलाई माह में होगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं के गणित व 12वीं के अर्थशास्त्र के पेपर लीक होने के मामले चारों ओर से विरोध प्रदर्शन का सामना कर रहा है। कई शहरों में पेपर लीक मामले को लेकर सीबीएसई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इधर कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले में मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है।

सीबीएसई पेपर लीक के खिलाफ लुधियाना, कानुपर और दिल्‍ली में छात्र और अभिभावक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन छात्रों ने चेयरमैन के इस्तीफे की मांग के साथ कहा है कि सीबीएसई की गलती की सजा सभी छात्रों को नहीं मिलनी चाहिए। कुछ छात्रों का कहना है कि जिस राज्‍य में पेपर लीक हुआ, वहीं पर फिर से परीक्षा होनी चाहिए। लगभग सभी छात्र पेपर लीक के लिए सीबीएसई को जिम्‍मेदार ठहरा रहे हैं। कुछ छात्र केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के घर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। इसके बाद दिल्ली में प्रकाश जावड़ेकर के घर के पास धारा 144 लागू कर दी गई है।

शुक्रवार को सुबह कांग्रेस पार्टी का स्टूडेंट्स विंग एनएसयूआइ भी छात्रों के साथ मार्च में शामिल हुआ। कांग्रेस पार्टी सरकार पर और ज्यादा हमलावर हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री ने एग्जाम वॉरियर्स किताब लिखी, जो परीक्षा के दौरान छात्रों का तनाव दूर करने के लिए है। अब उन्हें एग्जाम वॉरियर्स 2 लिखनी चाहिए, जिसे पेपर्स लीक होने के कारण तबाह हुई स्टूडेंट्स और पैरंट्स की जिंदगियों के बाद उनके तनाव को दूर करने के लिए पढ़ाया जाए।’

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह एचआरडी मिनिस्ट्री की विफलता है, 28 लाख स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर है। हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। वहीं कपिल सिब्‍बल ने कहा कि सीबीएसई पेपर लीक अकेला पेपर लीक का मामला नहीं है। एसएससी पेपर घोटाला भी बड़ी चिंता का विषय है। अगर इसके लिए सरकार की जवाबदेही नहीं है, तो फिर किसकी है।

कांग्रेस के साथ इस मुद्दे पर राज ठाकरे ने भी सरकार को घेरा। उन्‍होंने कहा कि यह सरकार की असफलता है, इस बात को स्‍वीकार करने के बजाय क्‍यों वे चाहते हैं कि छात्र फिर से एग्‍जाम दें। मेरी अभिभावकों से अपील है कि अपने बच्‍चों को फिर से एग्‍जाम देने के लिए ना भेजें।

वैसे बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 10 से ज्यादा वॉट्सऐप ग्रुप्स की पहचान की, इनमें से हर ग्रुप में 50-60 सदस्य हैं। इन लोगों से जांच और पूछताछ जारी है। इससे पहले क्राइम ब्रांच की एसआइटी ने गुरुवार को 18 छात्र समेत कुल 34 लोगों से पूछताछ की। इनमें 11 विभिन्न स्कूलों के छात्र, सात विभिन्न कॉलेजों के छात्र, पांच ट्यूटर व दो अन्य लोग शामिल हैं। ट्यूटर में एक महिला भी शामिल है, जिसका लाजपत नगर में कोचिंग सेंटर है।

एसआइटी ने बुधवार रात दिल्ली-एनसीआर में करीब 10 जगहों पर छापेमारी की। जिन 34 लोगों से पूछताछ की गई है उन्होंने कबूल किया कि 10वीं के गणित व 12वीं के अर्थशास्त्र के पेपर, परीक्षा शुरू होने से 24 घंटे पहले लीक हो गए थे। असली पेपर देखकर पहले हाथ से सादे कागजों पर प्रश्नों को लिखा गया, फिर उसकी तस्वीरें वाट्सएप के जरिये बांटी गईं। 24 घंटे पहले पेपर मिलने से छात्र-छात्राओं को प्रश्नों की तैयारी करने का काफी समय मिल गया।

विशेष आयुक्त क्राइम ब्रांच आरपी उपाध्याय के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर उनसे फिर पूछताछ की जाएगी। पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल नंबर व अन्य जरूरी जानकारियां ले ली गई हैं। बता दें कि सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक की शिकायत पर दो मुकदमे दर्ज करने के बाद एसआइटी ने बुधवार रात से ही जांच शुरू कर दी थी और पेपर लीक से जुड़े सुबूत आरोपित कहीं मिटा न दें, इसलिए गुरुवार सुबह होते ही एसआइटी ने कार्रवाई तेज कर दी। सीबीएसई ने एक एफआइआर 27 मार्च व दूसरी 28 मार्च को दर्ज कराई थी। एसआइटी पता लगा रही है कि छात्र-छात्राओं के वाट्सएप पर किसने प्रश्नपत्र भेजे थे। साथ ही मुख्य आरोपित व उसके स्त्रोत के बारे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पूछताछ में कुछ छात्रों ने दोस्तों के जरिये पेपर मिलने की बात कही है। पेपर लीक के संभावित ठिकानों की पहचान की गई है, उनमें से कुछ जगहों की सीसीटीवी फुटेज भी जब्त की गई है।

एसआइटी में शामिल अधिकारी का कहना है कि सीबीएसई ने लिखित शिकायत में ओल्ड राजेंद्र नगर में पिछले दस सालों से कोचिंग सेंटर चलाने वाले विक्की पर शक जताया था। लिहाजा उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वह विद्या कोचिंग सेंटर का मालिक है और सेंटर में 10वीं व 12वीं के छात्रों को गणित व अर्थशास्त्र पढ़ाता है। उसने 1996 में डीयू से बीकॉम किया है। विक्की के अलावा हिरासत में लिए गए अन्य लोगों व उनसे जब्त दस्तावेजों के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है। एसआइटी ने सीबीएसई से कई जानकारी मांगी है। मसलन, परीक्षा केंद्रों व छात्रों तक पेपर पहुंचाने का तरीका क्या है? सुरक्षा के लिए किस तरह की सावधानियां बरती जाती हैं? पेपर किन-किन प्रिटिंग प्रेस से छपवाए गए?

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CBSE Exams 2018: हफ्ते भर में आएंगी गणित और इकोनॉमिक्स के पेपर की नई तारीखें

पेपर लीक की खबरें आने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के गणित और 12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर को रद्द कर दिया है। 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर 26 मार्च को आयोजित हुआ था और 10वीं का गणित का पेपर 28 मार्च को। इन दोनों पेपरों का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर लीक होने की खबरें आई थीं।

यहां जानिए इस मामले से जुड़ी 10 खास बातें

1. 10वीं की गणित और 12वीं की इकोनॉकिक्‍स की परीक्षा रद्द करने के साथ ही बोर्ड ने यह भी ऐलान किया है कि दोनों पेपरों की नई तारीखों का ऐलान एक हफ्ते के भीतर कर दिया जाएगा।

2. 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर होने के बाद ऐसी खबरें आई थीं कि ये व्हाट्सएप पर लीक हुआ है। कहा जा रहा था कि जो पेपर सोशल मीडिया पर घूम रहा था वह असल इकोनॉमिक्स के पेपर से हूबहू मिल रहा था।

3. तब इन खबरों को सीबीएसई ने सिरे से खारिज कर दिया था। बोर्ड का कहना था किसी भी सेंटर में पेपर लीक नहीं हुआ है। सोशल मीडिया में चल रही खबर अफवाह है।

4. 28 मार्च को जब 10वीं का मैथ्स का पेपर हुआ तब भी इसके लीक होने की खबरें आईं।

5. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के कई पेपर इस बार विवादों में आए हैं। इससे पहले अकाउंटेंसी का पेपर लीक होने की खबरें आई थीं। अकाउंटेंसी के पेपर की लीक होने के आरोपों के बाद दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने संबंधित अधिकारियों से आरोपों की जांच के लिए कहा था।

6. इससे पहले सीबीएसई इकोनॉमिक्स, अकाउंटेंसी के पेपर होने की खबरों को सिरे से खारिज करती आई हैं। सीबीएसई ने इन खबरों को हमेशा अफवाह करार दिया।

7. 26 मार्च को इकोनॉमिक्स के पेपर लीक होने की खबरों को लेकर सीबीएसई ने कहा था कि सभी सेंटरों से बात की गई है। किसी सेंटर से पेपर लीक होने की खबर नहीं मिली है। ऐसे में यह कोरी अफवाहें हैं।

8. सीबीएसई 10वीं का इंग्लिश का पेपर भी सुर्खियों में आया था। काफी विद्यार्थियों और टीचरों ने कॉम्प्रिहेंशन पैसेज के प्रश्न को सही नहीं बताया था। इसके बाद एक खबर वायरल हुई थी कि सीबीएसई उस कथित गलत सवाल के बदले में दो मार्क्स देगा। लेकिन फिर बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि उसने फिलहाल इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है।

9. 10वीं का मैथ्स और 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर रद्द होने से काफी स्टूडेंट्स और पेरेंट्स नाराज हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक होना ईमानदारी से मेहनत करके परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अब परीक्षा दोबारा होगी जिससे उन पर फिर से दवाब बनेगा। वह तनाव में रहेंगे।

28 मार्च को पेपर होने के बाद अधिकांश विद्यार्थियों और टीचरों ने कहा कि पेपर आसान और स्कोरिंग था। प्रश्न सिलेबस के मुताबिक ही थे। एनसीईआरटी की किताबों से ही था।

10. इस साल 5 मार्च से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं शुरू हुई थीं। इन परीक्षाओं में देशभर से 28 लाख, 24 हजार, 734 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। सीबीएसई के मुताबिक इस साल 10वीं की परीक्षा में 16 लाख, 38 हजार, 428 और 12वीं की परीक्षा में 11 लाख, 86 हजार, 306 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे।

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क्या होती है जीडीपी और क्या हैं इसके मायने?

हाल में आपने एक खबर पढ़ी होगी कि वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के साथ भारत चीन (6.8 प्रतिशत) को पछाड़कर विश्व की सबसे तेज विकास दर वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। अक्सर आपको अखबार में जीडीपी, विकास दर जैसी आर्थिक शब्दावली पढ़ने को मिलती है। इनका अर्थ क्या है? इसमें वृद्धि या गिरावट का आशय क्या है? ‘जागरण पाठशाला’ में हम ऐसी ही आर्थिक शब्दावली समझने का प्रयास करेंगे। जीडीपी के साथ आज हम इसकी शुरुआत कर रहे हैं।

सकल घरेलू उत्पाद

किसी देश में एक साल में कृषि, उद्योग और सेवाओं के रूप में कितना उत्पादन हुआ? उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है? यह जानने का प्रचलित तरीका सकल घरेलू उत्पाद (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट)है।

किसी देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य(रुपये के हिसाब से मूल्य) को जीडीपी कहते हैं। हालांकि जीडीपी का आकलन करते वक्त सकल मूल्य व‌र्द्धन यानी जीवीए में टैक्स को जोड़ दिया जाता है जबकि इसमें से सब्सिडी को घटा दिया जाता है। जीडीपी दो प्रकार से व्यक्त होता है-प्रचलित मूल्य यानी वर्तमान कीमतों पर और स्थायी मूल्य यानी आधार वर्ष पर (जैसे 2011-12 के मूल्य स्तर पर)। जीडीपी जब स्थायी मूल्यों पर होता है तो उसमें से मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटा दिया जाता है। यही वजह है कि जब किसी तिमाही या वर्ष में जीडीपी वृद्धि स्थायी मूल्यों पर व्यक्त की जाती है तो उसे ‘विकास दर’ कहते हैं।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय करता है जीडीपी की गणना

संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (यूनएनएसएनए) के तहत सभी देश अपने यहां राष्ट्रीय उत्पादन या कहें राष्ट्रीय आय की गणना के लिए जीडीपी का तरीका अपनाते हैं। हमारे देश में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) जीडीपी की गणना करता है। सैद्धांतिक तौर पर जीडीपी गणना तीन आधार- उत्पादन, आय और व्यय पर होती है। सीएसओ के मुताबिक, ”जीडीपी एक संदर्भ अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए सभी निवासी उत्पादक इकाइयों के सकल मूल्य व‌र्द्धन (जीवीए) का कुल योग होता है।”

इन तीन बातों को समझना है बहुत जरूरी

इससे स्पष्ट है कि जीडीपी समझने के लिए तीन बातों- ‘संदर्भ अवधि’, ‘निवासी उत्पादक इकाइयां’ और ‘सकल मूल्य व‌र्द्धन को समझना’ जरूरी है। संदर्भ अवधि से आशय तिमाही या वित्त वर्ष से है जो एक अप्रैल से अगले साल 31 मार्च तक होता है। वित्त वर्ष चार तिमाहियों- अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर, अक्टूबर से दिसंबर और जनवरी से मार्च- तक होता है और प्रत्येक तिमाही के लिए जीडीपी के अलग आंकड़े आते हैं। उदाहरण के लिए 28 फरवरी को जीडीपी में 7.2 प्रतिशत वृद्धि का जो आंकड़ा सीएसओ ने जारी किया वह चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) का था। इस तरह इसमें संदर्भ अवधि तीसरी तिमाही थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जीडीपी में वृद्धि का यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही के जीडीपी की तुलना वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के जीडीपी से कर के ज्ञात किया गया। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप इस साल किसी तिमाही के जीडीपी वृद्धि के आंकड़े पर गौर कर रहे हैं तो उसकी तुलना पिछले साल की समान तिमाही से ही करनी होगी क्योंकि पूर्व तिमाही से तुलना करने पर विसंगति आ जाती है।

अब हम ‘निवासी उत्पादक इकाइयों’ का अर्थ समझते हैं। दरअसल जब व्यक्ति या कंपनी भारत में छह माह से अधिक रहते हैं और उनका मुख्यत: आर्थिक हित भारत में ही है तो उन्हें निवासी इकाइयां माना जाता। यहां यह जानना जरूरी है कि निवासी उत्पादक इकाई की परिभाषा में आने के लिए भारतीय नागरिक या भारतीय कंपनी होना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई अमेरिकी कंपनी भारत में अपना कारखाना लगाती है तो उसका उत्पादन भारत के जीडीपी में शामिल होगा।

सकल मूल्य व‌र्द्धन

अब हम ‘सकल मूल्य व‌र्द्धन’ को समझते हैं क्योंकि जीवीए में टैक्स को जोड़ने और सब्सिडी को घटाने पर ही जीडीपी का आंकड़ा प्राप्त होता है। दरअसल जब किसी उत्पाद के मूल्य से उसकी इनपुट लागत को घटा दिया जाता है तो जो राशि बचती है उसे जीवीए कहते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी 20 रुपये में ब्रेड का पैकेट बेचती है और इसे बनाने में 16 रुपये का इनपुट इस्तेमाल होता है तो उस स्थिति में जीवीए 4 रुपये माना जाएगा। इस तरह भारत में अर्थव्यवस्था के तीन सेक्टर- प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक को मुख्यत: आठ क्षेत्रवार समूहों में विभाजित जीवीए का अनुमान लगाया जाता है।

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Paytm founder Vijay Shekhar Sharma youngest Indian billionaire

Paytm founder Vijay Shekhar Sharma, 39, is the youngest Indian billionaire, while 92-year-old Samprada Singh, chairman emeritus of Alkem Laboratories, is the oldest, according to Forbes.

Sharma, ranked 1,394th on the list with a fortune of USD 1.7 billion, is the only Indian billionaire in the under-40 league.

Sharma founded fast-rising mobile wallet Paytm in 2011. He has also created Paytm Mall, an e-commerce business

& Paytm Payment Bank.
“One of the biggest beneficiaries of India’s demonetisation, Paytm has notched up 250 million registered users and 7 million transactions daily. Sharma owns 16 per cent of Paytm, which is now valued at USD 9.4 billion,” Forbes said.

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रघुराम राजन को नहीं मिला अर्थशास्‍त्र का नोबेल: अमेरिकी अर्थशास्‍त्री रिचर्ड थैलर को चुना गया है

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए अमेरिकी अर्थशास्‍त्री रिचर्ड थैलर को चुना गया है. 2017 के लिए चुने गए इस पुरस्‍कार की रेस में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी शामिल थे. लेकिन उन्‍हें पुरस्‍कार नहीं मिला.थैलर शिकागो में व्यवहारिक विज्ञान के प्रोफेसर हैं.

अर्थशास्‍त्र-मनोविज्ञान के बीच की दूरी कम की
अवॉर्ड की घोषणा करते हुए रॉयल स्‍वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा है कि थैलर के योगदान ने एक व्यक्ति के फैसले लेने के मामले में आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दूरी के बीच पुल का काम किया है. उनके काम ने इकोनॉमिक्‍स और साइकोलॉजी के बीच के गैप को कम किया है. इनाम के तौर पर 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब 7.25 करोड़ रुपए) दिए जाएंगे.

नोबेल ज्यूरी के मुताबिक, थैलर ने लिमिटेड रेशनलिटी, सोशल प्रेफरेंसेज और खुद पर कंट्रोल में कमी के बीच संबंध स्‍थापित करने का काम किया है. उन्‍होंने स्‍थापित किया है कि ये तीनों चीजें व्यक्तिगत आर्थिक फैसलों के साथ ही बाजार के फैसलों को भी प्रभावित करती हैं.


कौन हैं थैलर 
थैलर यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में बिहेवियरल साइंस और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं. वे 2008 में आई पुस्‍तक Nudge के सह-लेखक हैं. थैलर ने यह पुस्‍तक कैस आर.संस्टीन के साथ लिखी थी. इसमें बताया गया था कि बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के जरिए सोसाइटी की कई समस्‍याओं को हल किया जा सकता है.

राजन भी थे रेस में
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इकोनॉमिक्‍स के नोबेल पुरस्‍कार की रेस में थे. लिस्‍ट तैयार करने वाली रिसर्च कंपनी क्‍लैरिवेट एनालिटिक्‍स के अनुसार, कॉरपोरेट फाइनेंस से जु़ड़े निर्णयों के दायरे को बढ़ाने में अनोखे योगदान के लिए राजन के नाम पर विचार किया जा रहा था. राजन इस समय यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्‍कूल ऑफ बिजनेस में कैथरीन डूसक मिलर डिस्टिंग्‍यूज्‍ड सर्विस प्रोफेसर हैं. इससे पहले 1998 में भारत के अमर्त्य सेन को वेलफेयर इकोनॉमिक्स के लिए अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

1968 में शुरू हुआ अर्थशास्‍त्र में नोबेल
अर्थशास्‍त्र में नोबेल पुरस्‍कार 1968 में शुरू हुआ. यह 1895 में अल्‍फ्रेड नोबेल द्वारा शुरू किए गए मूल पुरस्‍कारों में शामिल नहीं था.

अमेरिका का दबदबा है इकोनॉमिक्‍स के नोबेल में
इकोनॉमिक्‍स के नोबेल में अमेरिका का दबदबा रहा है. अभी तक जितने लोगों को अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्‍कार मिला है, उनमें लगभग आधे अमेरिकी ही हैं. 2000 और 2013 के बीच तो हर साल या तो अमेरिकी जीते, या फिर उन्‍होंने किसी और के साथ इसे शेयर किया.