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प्रोफेसर सतीश प्लास्टिक से पेट्रोल बना कर कमा रहे हैं 2 से 3 लाख प्रतिमाह। जानें कैसे!

हैदराबाद के 45 वर्षीय प्रोफेसर सतीश ने डेड प्लास्टिक को डीपोलिमराईज़ेशन या पयरोलीसिस प्रक्रिया से पेट्रोल बनाने का सफल उद्योग शुरू किया है।

Fuel from plastic by pyrolysis

सतीश एक मेकैनिकल इंजीनियर हैं और 200 लीटर से अधिक पेट्रोल का उत्पादन प्रतिदिन कर रहे हैं।

Satish petrol from plastic

डेड प्लास्टिक वह प्लास्टिक होती है जो कि प्लास्टिक को 4 से 5 बार रिसायकल करने पर प्राप्त होती है। यह उपयोग नहीं की जा सकती तथा प्लास्टिक के सभी गुण खो चुकी होती है। यह प्लास्टिक अभी भी नष्ट नहीं होती और इसको बड़े बड़े डंपिंग ग्राउंड्स में इसको ढककर डाल दिया जाता है।

Dead plastic

प्रोफेसर सतीश की इस सफलता से पर्यावरण को बेहद ही सकारात्मक लाभ हो रहा है और इसको बड़े स्तर पर जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। एक ओर जहां इस प्लांट में पानी का इस्तेमाल नहीं होता, साथ ही इसमें कोई चिमनी न होने से पर्यावरण को भी संरक्षित रखा जाता है।

वर्ष 2013 से सतीश ने इस विषय पर कार्य करना शुरू किया। अगस्त 2015 तक इन्होंने सफलता पाकर कारखाना लगाने का काम शुरू किया जिससे जनवरी 2016 तक काम करना शुरू कर दिया।

Satish machine petrol from plastic

प्रोफेसर सतीश की यह मशीन एक बार मे 300 लीटर डीज़ल, 100 लीटर हाई स्पीड डीज़ल और 50 लीटर पेट्रोल बनाती है।

Satish lab final products

प्रोफेसर सतीश की कंपनी हाइड्रोक्सी सिस्टम्स भारत सरकार की बायोफ्यूल पॉलिसी का फ़ायदा उठाकर सफलता पूर्वक कार्य कर रही है और हम सभी को इस पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा दे रही है।

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इम्पोर्टेड साइकिल के दाम में लॉन्च हुआ Hero का ये स्वदेशी स्कूटर, चलने में भी रहेगा किफायती

हीरो इलेक्ट्रीक ने अपना नया ईको-फ्रेंडली स्कूटर Flash लॉन्च किया है. जिसकी कीमत 19,990 रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) रखी गई है.

इस स्कूटर को खासकर उन कस्टमर्स को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपना रहें हैं और वो जो पहली दफा ई-व्हिकल खरीद रहें हैं.

नया फ्लैश दो कलर वेरिएंट में आएगा और इसे एक बार चार्ज करने पर 65 किलोमीटर तक चला सकते हैं. इस स्कूटर में 250 वॉट का मोटर है जिसमें 48-Volt 20 Ah VRLA की बैटरी है और ये पूरी तरह शॉर्ट शर्किट प्रोटेक्शन से लैस है. स्कूटर में सीट के नीचे स्टोरेज कंपार्टमेंट भी दिया गया है.

फ्लैश का वजन केवल 87 KG है जो इसे तेजी से चलने में मदद करता है. इसमें मैग्नेशियम अलॉय व्हील, टेलीस्कोपिक सस्पेंशन और फुल बॉडी क्रैश गार्ड दी गई है.

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अब से आपके वाहन में पड़ेगा नए किस्म का पेट्रोल-डीजल, जानें क्यों है खास

राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने की चुनौती से निपटने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने एक अप्रैल से राजधानी में यूरो-6 मानक के  डीजल एवं पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर देंगी। कंपनियां इसके लिये कोई अतिरिक्त कीमत नहीं वसूलेंगी।

दिल्ली देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां यूरो-4  मानक ईंधन का प्रयोग बंद कर सीधे यूरो-6  मानक ईंधन को इस्तेमाल में लाया जायेगा।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित अन्य शहरों नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के अलावा मुंबई, चेन्नई,  बेंगलुरू, हैदराबाद और पुणे समेत 13 प्रमुख शहरों में यूरो-6 मानक ईंधन की आपूर्ति अगले साल एक जनवरी से शुरू होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह अप्रैल 2020 से शुरू होगा।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी)  के निदेशक (रिफाइनरी) बी. वी. रामगोपाल ने कहा कि सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियां आईओसी, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड  कल से दिल्ली के अपने सभी 391 पेट्रोल पंपों पर यूरो-छह उत्सर्जन मानक वाले ईंधन की आपूर्ति शुरू कर देंगी।

उन्होंने कहा कि भले ही कंपनियों ने स्वच्छ ईंधन उत्पादन के लिए भारी निवेश किया है, उपभोक्ताओं के ऊपर अभी कुछ समय तक इसका बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, आश्वस्त रहिये, खर्च का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की कोई योजना नहीं है।  अभी उपभोक्ताओं से तत्काल लागत वसूलने की कोई योजना नहीं है।

लागत के हिसाब से स्वच्छ ईंधन50  पैसे प्रति लीटर महंगाहोना चाहिये। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में यूरो-6  मानक के ईंधन की आपूर्ति शुरू हो जाएगी तब लागत वसूलने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

रामगोपाल ने कहा कि दिल्ली की 9.6 लाख टन पेट्रोल तथा 12.65 लाख टन डीजल की सालाना खपत देखते हुए उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा परिशोधन संयंत्र, हरियाणा की पानीपत रिफाइनरी, मध्य प्रदेश के बिना संयंत्र तथा पंजाब के बठिंडा  संयंत्र ने स्वच्छ ईंधन का उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अकेले पानीपत संयंत्र पर ही करीब 183  करोड़ रुपये खर्च किये गये।

उन्होंने कहा कि बाकी के संयंत्रों के उन्नयन का काम चल रहा है। वर्ष 2015 में निर्णय लिया गया था कि यूरो6  मानक के अनुकूल ईंधन की आपूर्ति पूरे देश में एक अप्रैल 2020 से शुरू की जायेगी  हालांकि, जहरीली धुंध की समस्या को देखते हुए दिल्ली में इसे पहले ही किया जा रहा है।

गोपाल ने कहा कि स्वच्छ यूरो6  मानक के ईंधन तथा पुराने इंजन के इस्तेमाल से पार्टिकुलेट उत्सर्जन में10 से 20  प्रतिशत की कमी आएगी। इसका पूरा लाभ उठाने के लिए यूरो6 मानक के इंजनों की भी जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, यूरो6 मानक के ईंधन की आपूर्ति कल से शुरू हो जाने से वाहन निर्माता कंपनियों को यह भरोसा मिलेगा कि स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता कोई समस्या नहीं है।

दिल्ली में सुचारू आपूर्ति के लिए आईओसी मथुरा और पानीपत संयंत्रों से स्वच्छ ईंधन मंगाएगी। एचपीसीएल की बठिंडा स्थित संयुक्त संयंत्र तथा बीपीसीएलबीना  संयंत्र से ईंधन मंगाएगी।

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Tata Motors की ई-विजन कॉम्पैक्ट सेडान से उठा पर्दा। जानिए खूबियां!?

88th जिनेवा मोटर शो में टाटा मोटर्स ने अपनी नई इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट सेडान ई-विजन को शोकेस किया है। इस मौके पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और रतन टाटा भी मौजूद थे। इस कार को टाटा मोटर्स ने ओमेगा प्लैटफॉर्म पर बनाया है। इस कार की टॉप-स्पीड 200 किलोमीटर प्रति घंटा है और कंपनी का दावा है कि यह 0-100 किलोमीटर की रफ़्तार पकड़ने के लिए सिर्फ 7 सेकेंड का समय लेगी।

ई-विजन में कंपनी ने स्लो और फास्ट चार्जिंग की सुविधा दी है। सोर्स की माने तो नई ई-विजन 2022 तक कार बाजार में दस्तक दे देगी लेकिन इसे सबसे पहले कहां लॉन्च किया जायेगा इस पार कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।

टाटा मोटर्स ने नई ई-विजन सेडान को नए इंपैक्ट डिजाइन 2.0 पर बनाया है जिसकी वजह से यह फ्रेश लुक्स के साथ स्टाइलिश नज़र आती है और यहां पर कंपनी कामयाब भी हुई है। नई ई-विजन को देखकर साफ़ लगता है कि टाटा मोटर्स अपने डिजाइन सेक्शन पर काफी सीरियस होकर काम कर रही है।

नई ई-विजन कॉन्सेप्ट के साथ ही टाटा मोटर्स ने जिनेवा मोटर शो में अपने 20 साल भी पूरे कर लिए हैं। ई-विजन कॉन्सेप्ट से पहले टाटा इस ऑटो शो में आरिआ, नैनो, नैनो पिक्सल,मेगा पिक्सल और टामो रेसिमो कॉन्सेप्ट को भी उतार चुकी है।