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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे बना Battlefield, जमीन से लेकर आसमान तक हुई भयंकर गर्जन

आगरा एक्सप्रेस-वे आज कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जहां वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख विमानों और विशालकाय हरक्यूलिस विमान ने अपने जौहर तथा हैरतअंगेज कौशल का नमूना पेश करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया कि वे युद्ध तथा शांति के समय में किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वायुसेना के जगुआर, मिराज और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों तथा विशाल मालवाहक विमान सी-130 ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव के बांगरमऊ के पास तीन किलोमीटर हिस्से का हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल करते हुए इस पर ‘लैंडिंग तथा टेक ऑफ’ कर वायु सेना की तैयारियों का नमूना पेश किया।

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15 लड़ाकू विमानों ने दिखाए करतब
उत्तर प्रदेश सरकार और वायु सेना के इस संयुक्त अभियान के तहत 15 लड़ाकू विमानों तथा एक हरक्यूलिस विमान ने अपने करतब दिखाए जिससे एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा जमीन से लेकर आसमान तक थर्रा उठा। एक्सप्रेस-वे के 3.3 किमी़ लंबे तथा 33 मीटर चौड़े हिस्से को खासतौर पर तैयार किया गया था। विशाल हरक्यूलिस विमान सी-130 ने अभियान की शुरुआत करते हुए वायु सेना के जांबाज दस्ते गरूड़ के कमांडो तथा उनके वाहनों को एक्सप्रेस-वे पर उतारा। कमांडो ने पलक झपकते ही दुश्मन के खिलाफ एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर अपने मोर्चे संभाल लिए और स्थिति को काबू में करते हुए घेराबंदी कर ली।

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मिराज ने दिखाई बाज जैसी फुर्ती
रक्षा-एक्सप्रेस-वे लड़ाकू विमान दो अंतिम उन्नाव इसके बाद वायु सेना के 15 घातक लड़ाकू विमानों ने एक्सप्रेस वे पर आपात स्थिति में उतरने तथा उड़ान भरने के असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया। सबसे पहले छह मिराज लड़ाकू विमानों ने बाज जैसी फुर्ती के साथ लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेस-वे को छुआ और पलक झपकते ही उड़ान भर हैरतअंगेज कारनामा किया। इसके बाद तीन-तीन के समूह में छह सुखोई विमानों और तीन जगुआर विमानों ने इस रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब का अछ्वुत नजारा पेश किया। विमानों ने हवा में मार करने वाले अंदाज में आक्रामक रूख अपनाते हुए जमीन से लेकर आसमान तक भयंकर गर्जन किया।

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हरक्यूलिस-हिंडन ने भरी उड़ान
वायु सेना के हरक्यूलिस विमान ने हिंडन एयरबेस गाजियाबाद, मिराज ने ग्वालियर, जगुआर ने गोरखपुर और सुखोई ने बरेली एयरबेस से उड़ान भरी। अभियान में हिस्सा लेने वाले गरुड़ कमांडो वायुसेना के आगरा एयरबेस से आए थे। यह समूचा अभियान वायुसेना की मध्य कमान की देखरेख में हुआ और इसका नेतृत्व एयर मार्शल ए़ एस़ बुटौला ने किया। एयर मार्शल बुटौला ने कहा कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वायुसेना की क्षमता और रणकौशल को बढाना है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से को हवाई पट्टी के रुप में विकसित करना बहुत अच्छी पहल है। इससे वायुसेना को कम लागत में सामरिक महत्व की जगहों पर सस्ती और टिकाऊ हवाई पट्टी मिलती हैं। जिनका युद्ध और शांति के समय किसी भी आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की भविष्य में अन्य एक्सप्रेस-वे पर भी इस तरह की हवाई पट्टियां बनाने की योजना है और इसे केवल युद्ध की दृष्टि से देखा जाना सही नहीं है। इस अभ्यास को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई की आशंका के मद्देनजर किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की वायु सेना की तैयारियों के रूप में भी देखा जा रहा है। साथ ही इसका उद्देश्य मानवीय सहायता या आपदा राहत जैसी स्थितियों में वायु सेना की तैयारियों को कसौटी पर परखने का भी है।

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आपात लैडिंग के लिए 12 राजमार्गों पर मिली मंजूरी
सरकार ने विभिन्न आपात परिस्थितियों से निपटने की रणनीति के तहत लगभग 12 राजमार्गों में वायुसेना के विमानों की लैंडिंग के लिए मंजूरी दी थी लेकिन अभी तक केवल दो में इसका परीक्षण किया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान, चीन और स्विटजरलैंड जैसे देश युद्ध और आपात स्थितियों में हवाई आपरेशन सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभ्यास करते रहे हैं। सबसे पहले यह अभ्यास मिराज-2000 लड़ाकू विमान ने मई 2015 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर किया। इसके बाद नवंबर 2016 में सुखोई और मिराज विमानों ने लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे पर इस कारनामे को दोबारा अंजाम देकर देशवासियों को आश्वस्त किया कि वायु सेना किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस अभ्यास के लिए एक्सप्रेस-वे के इस हिस्से को विशेष रूप से तैयार किया गया था और एक्सप्रेस को दो दिन पहले वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था।