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मानो या न मानो षड्यंत्र बहुत ही योजनाबद्ध है। #JusticeForAsifa #CBI4KathuaCase #CBI4Ashifa

मैं बार-बार बस यही सोच रहा हूँ, आसिफा की ये फोटो किसने और क्यूँ ली?

बड़ी और गौर करने वाली बात ये है कि फोटो खींचने वाले को कैसे पता था ये फोटो पूरे भारत में एक एजेंडा चलाने में काम आएगी क्यूंकि आसिफा की लाश भी इन्हीं कपड़ों में मिली थी। क्या आपने निर्भया रेप कांड की प्रताड़ित दामिनी(जिसकी पहचान भी अब तक किसी को नहीं पता) की तस्वीर कभी देखी, तो सोचिये सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन्स के उलट एक रेप प्रताड़ित की तस्वीर वायरल होना भी एक बहुत बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है।

प्रारम्भिक जाँच के बाद लिखी गयी FIR में सिर्फ हत्या का केस दर्ज हुआ था और वारदात की जगह भी लकड़ी का गोदाम था। फिर जाँच राज्य की क्राइम ब्रांच के पास आते ही यह केस ऐसे पलटा की अब इसके सहारे कुछ नेतागण अपनी बिखर चुकी राजनीति पलटने की कोशिश कर रहे हैं!

कौन हैं आखिर वो लोग?? मानो या न मानो षड्यंत्र बहुत ही योजनाबद्ध है।

जहाँ एक तरफ आरोपियों के बार बार बोलने पर भी जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच उनका नार्को टेस्ट नहीं करवा रही और बस आरोप थोप के कबूल करने के लिए प्रताड़ित कर रही है, यह बेहद ही संघीन है।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का CBI जाँच की मंजूरी अब तक न देना उनके कर्तव्य-परायण पर भी संदेह उत्पन्न करता है।

भारतीय राजनीतिज्ञों का स्तर भी अब इतना गिर चुका है कि बस रोटियां सिंकनी चाहिए, फिर चाहें वो छोटे बच्चों के रेप और मौत करने के बाद उनकी लाशों पर ही क्यों न सेंकनी पड़े!

आइये आपको ABP News का एक विश्लेषण दिखाएं जिसमे उस मंदिर के बारे में रची गयी मनगढ़ंत बातें बिलकुल साफ हो जाएँगी।

इस मुहीम को आगे बढ़ाएं और निष्पक्ष जाँच की मांग करें। #JusticeForAsifa #CBI4KathuaCase #CBI4Ashifa

(लेख: संपादकीय)

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फेक न्यूज पर लगाम कसने के लिए केंद्र ने जारी किए सख्त दिशानिर्देश

फेक न्‍यूज पर लगाम कसने के लिए केंद्र की ओर से पत्रकारों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं जिसके तहत ऐसी खबरों के प्रकाशन पर उनको सस्‍पेंड किया जा सकता है या उनकी प्रेस मान्‍यता रद कर दी जाएगी।

सोमवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि प्रिंट व टेलीविजन मीडिया के लिए दो रेगुलेटरी संस्‍थाएं- प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन (NBA), यह निश्‍चित करेगी कि खबर फेक है या नहीं। दोनों को यह जांच 15 दिन में पूरी करनी होगी। एक बार शिकायत दर्ज कर लिए जाने के बाद आरोपी पत्रकार की मान्यता जांच के दौरान भी निलंबित रहेगी।

दोनों एजेंसियों द्वारा फेक न्‍यूज की पुष्‍टि किए जाने के बाद पहली गलती पर छह माह के लिए मान्‍यता रद की जाएगी, दूसरी बार में एक साल के लिए मान्‍यता रद हो जाएगी लेकिन तीसरी बार में स्‍थायी रूप से पत्रकार की मान्‍यता खत्‍म कर दी जाएगी।

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ISIS के चंगुल से भागे भारतीय हरजीत मसीह की कहानी पर सुषमा ने उठाया पर्दा

इराक में बीते दिनों अगवा हुए 39 भारतीय लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने मंगलवार को राज्‍यसभा में की। उन्‍होंने बताया कि 38 लोगों का डीएनए मैच हो गया है, जबकि 39वें का डीएनए 70 प्रतिशत तक मैच हो गया है। लाशों के ढेर में से भारतीयों के शवों को ढूंढा गया जिसके बाद उनके मारे जानें का पता चला। विदेश मंत्री ने बताया कि इन 39 भारतीयों के शवों को अमृतसर एयरपोर्ट लाया जाएगा। विदेश मंत्री ने बताया कि इनमें से 31 पंजाब के और चार हिमाचल प्रदेश के हैं। विदेश मंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के लोगों के प्रति संवेदना जताई। वहीं सुषमा ने बताया इनमें से एक भारतीय हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौट आया था लेकिन उसने जो कहानी सुनाई थी, वह झूठी थी।

सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा, जहां से उसने सुषमा स्वराज को फोन किया था। स्वराज ने कहा कि आईएसआईएस के आतंकियों ने एक कंपनी में काम कर रहे 40 भारतीयों को एक टेक्सटाइल कंपनी में भिजवाने को कहा था। उनके साथ कुछ बांग्लादेशी युवा भी थे। यहां पर उन्होंने बांग्लादेशियों और भारतीयों को अलग-अलग रखने को कहा लेकिन हरजीत मसीह ने अपने मालिक के संग जुगाड़ करके अपना नाम अली किया और बांग्लादेशियों वाले समूह में शामिल हो गया। यहां से वह इरबिल पहुंच गया। सुषमा ने बताया कि यह कहानी इसलिए भी सच्ची लगती है क्योंकि इरबिल के नाके से ही हरजीत मसीह ने उन्हें फोन किया था।

 

सुषमा ने आगे बताया, ‘हरजीत की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता।’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो।’

 

यह थी हरजीत मसीह की कहानी
मसीह ने बताया था कि किस तरह आईएस के आतंकी 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर किसी पहाड़ी पर ले गए थे। उसके मुताबिक, ‘आईएस के आतंकी हमें किसी पहाड़ी पर ले गए और हम सभी को किसी दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया। आतंकियों ने दो दिन तक हम सभी को अपने कब्जे में रखा।’

 

मसीह ने बताया, ‘एक रोज हम सभी को कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए। इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं। मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा। बाकी सभी लोग मारे गए।’ मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया।