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ब्रिटिश जज ने आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश भूमिका की जाँच के लिए फाइल सार्वजनिक करने को कहा

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फ‌र्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से ‘इंडिया पोलिटिकल’ के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआइ5, एमआइ6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।

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UPSC 2017 RESULT: उन होनहारों की कहानी जिन्होंने UPSC में लहराया परचम

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आप सांसद पर 5000 करोड़ की मानहानि का मुकदमा

फ्रांस से खरीदे गए लड़ाकू विमान राफेल के सौदे को लेकर देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी ने आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर 5000 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अंबानी का आरोप है कि संजय सिंह ने झूठे आरोप लगाकर उनकी कंपनी को राफेल सौदे में खींचा था। उद्योगपति ने यह भी दलील दी है कि आप सांसद संजय सिंह के आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। उद्योगपति अंबानी दिल्ली के दो तिहाई हिस्से में बिजली की आपूर्ति करने वाली निजी बिजली कंपनी बीएसईएस के मालिक भी हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता व सांसद संजय सिंह ने बीते 13 फरवरी को कहा था कि भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों को लेकर 56000 करोड़ रुपए का सौदा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें रिलायंस डिफेंस लिमिटेड फ्रांस की एविएशन कंपनी डसॉल्ट एविएशन को 22000 करोड़ का ठेका मिला। उन्होंने सौदे की गोपनीयता पर भी सवाल उठाए थे। इस सौदे पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए संजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा- राफेल डील ही साबित होगी मोदी सरकार के ताबूत में आखिरी कील, 500 करोड़ का जहाज 1500 करोड़ में, अनुभवहीन रिलायंस कंपनी को जहाज के पार्ट बनाने का 22000 करोड़ का ठेका मिला।

सांसद के इसी आरोप को अपनी मानहानि करार देते हुए अंबानी ने संजय सिंह को मानहानि का नोटिस भेजा है। मानहानि का दावा किए जाने पर संजय सिंह ने अंबानी पर पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है, पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि करेंगे। राफेल रक्षा सौदे का घोटाला उजागर करने पर अंबानी ने मेरे ऊपर देश का सबसे बड़ा 5000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। मैं अपनी बात पर कायम हूं। बंदर घुड़की नहीं चलेगी। पार्टी के एक अन्य नेता आशतोष ने ट्वीट करके कहा कि अब तो डर लग रहा है कहीं नीरव मोदी भी 11400 करोड़ का मानहानि का मुकदमा न कर दे।

बता दें कि राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने भी केंद्र की राजग सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा कर रखा है। खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार, संसद के भीतर और बाहर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में जवाब मांग रहे हैं। आम आदमी पार्टी नेताओं ने भी इस मुद्दे को बार-बार उठाया है। अब पार्टी सांसद पर मानहानि का मुकदमा होने के बाद इस मुद्दे पर नए सिरे से सियासत गरमा गई है।

उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है। पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि करेंगे। राफेल रक्षा सौदे का घोटाला उजागर करने पर अंबानी ने मेरे ऊपर देश का सबसे बड़ा 5000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। मैं अपनी बात पर कायम हूं।

– संजय सिंह का ट्वीट

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शोपियां फायरिंग केस: SC ने कहा, मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ FIR पर फिलहाल कोई कार्रवाई ना हो

 शोपियां में पत्‍थरबाजी के दौरान सेना द्वारा फायरिंग करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेना के मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ एफआईआर पर अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस मामले सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार और अटार्नी जनरल को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है.सेना में मेजर के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में जम्मू-कश्मीर के शोपियां में 27 जनवरी को दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की.

10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार के पिता ने लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बचाने के लिए और जान की बाज़ी लगाने वाले भारतीय सेना के जवानों के मनोबल की रक्षा की जाए. जिस तरीके से राज्य में राजनीतिक नेतृत्व द्वारा एफआईआर का चित्रण किया गया और राज्य के उच्च प्रशासन प्रोजेक्ट किया गया. इससे लगता है कि राज्य में विपरीत स्थिति है. ये उनके बेटे उनके लिए समानता के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार का उलंघन है.

पुलिस ने इस मामले में मेरे मेजर बेटे को आरोपी बनाकर मनमाने तरीके से काम किया है ये जानते हुए भी की वो घटना स्थल पर मौजूद नहीं था और सेना के जवान शांतिपूर्वक काम कर रहे थे. जबकि हिंसक भीड़ की वजह से वो सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए कानूनी तौर पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर हुए.  सेना का यह काफ़िला केंद्र सरकार के निर्देश पर जा रहा था और अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे. ये कदम लिया गया जब भीड़ ने पथराव किया और  हिंसक भीड़ ने कुछ जवानों को पीट पीट कर मार डालने की कोशिश की और देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ करवाई से रोकने की कोशिश की गई.

इस तरह का हमला सेना का मनोबल गिराने के लिए किया गया. याचिका में मांग की गई है आतंकी गतिविधियों और सरकारी सम्पतियों को नुकसान पहुंचाने और केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन को खतरे में डालने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच दूसरे राज्य में किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए.