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रूस के साथ दो लाख करोड़ के लड़ाकू विमान समझौते से अलग हो सकता है भारत। जानें क्या है कारण

मालूम हो कि सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के मकसद से भारत और रूस के बीच 2007 में लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से तैयार करने का अंतर-सरकारी करार हुआ था।

लेकिन लागत साझा करने, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और तैयार किए जाने वाले विमानों की संख्या के मसले पर गंभीर मतभेदों के कारण पिछले 11 साल से यह परियोजना अटकी हुई है। परियोजना पर बातचीत में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘हमने परियोजना की लागत समेत तमाम मसलों पर अपनी राय रख दी है। लेकिन रूसी पक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’

बता दें कि भारत ने लड़ाकू विमान के प्रारंभिक डिजायन के लिए दिसंबर, 2010 में 29.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की थी। बाद में दोनों पक्षों ने अंतिम डिजाइन और पहले चरण में विमान के उत्पादन के लिए छह-छह अरब डॉलर का योगदान देने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

कहां फंसा है पेंच

भारत चाहता है कि विमान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर दोनों देशों का समान अधिकार हो, लेकिन रूस विमान में इस्तेमाल की जाने वाली सभी अहम तकनीकों को भारत के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि उसे सभी जरूरी कोड और अहम तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान को अपग्रेड कर सके। फरवरी, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर की सहमति से परियोजना पर वार्ता फिर शुरू हुई थी। दोनों देश गतिरोध वाले मसलों का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत परियोजना की बेहद ऊंची लागत की वजह से इसके फलदायी होने के प्रति आशान्वित नहीं है।

एचएएल कर रही पैरवी, वायुसेना की रुचि नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस परियोजना की जोरदार पैरवी कर रही है। उसका मानना है कि इस परियोजना के जरिये भारत को अपने एरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका मिलेगा क्योंकि किसी अन्य देश ने भारत को आज तक ऐसी अहम तकनीक का प्रस्ताव नहीं दिया है। वहीं, दूसरी ओर ऊंची लागत की वजह से भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

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भारत बंद के दौरान बिहार में हिंसा, आरा में फायरिंग और गया में लाठीचार्ज

SC/ST एक्ट में हुए बदलावों के विरोध में 2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. अब आरक्षण के विरोध में आज भारत बंद बुलाया गया है. इस बंद को लेकर देश के सभी राज्यों की पुलिस हाईअलर्ट पर है, गृहमंत्रालय ने भी सभी राज्यों को सख्ती बरतने के लिए कहा है. कई राज्यों में भारत बंद के चलते धारा 144 लागू की गई है. ये भारत बंद आरक्षण के विरोध में बुलाया गया है.

बिहार – आरा नगर थाने में आनंदनगर इलाके में बंद समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसक झड़प हुई है. दोनों तरफ से फायरिंग की जा रही है. इसके अलावा आरा में ही सैकड़ों युवाओं ने पटना पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया. आक्रोशित युवाओं ने रेल पटरी पर उतरकर आरक्षण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. आरा में पत्थरबाजी के दौरान सात लोग घायल हुए हैं. घायल में एसडीओ भी शामिल हैं. गया में भारत बंद के दौरान उपद्रवियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है. कई उपद्रवियों को गिरफ्तार भी किया गया है. आरा में धारा 144 लागू की गई है.

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 बिहार के वैशाली में भी आरक्षण के विरोध में बंद के दौरान कई जगह से प्रदर्शन और जाम की तस्वीर सामने आई हैं. आरक्षण विरोधियों ने कई जगह रेल ट्रैक पर आगजनी कर परिचालन को भी बाधित किया है.

इसके अलावा पटना-कोलकाता रेलखंड का परिचालन ठप हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने बरौनी पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया है. कई लोग रेल पटरी पर बैठकर ही प्रदर्शन कर रहे हैं. दरभंगा की ललित नारायण मिश्रा यूनिवर्सिटी ने अपने बीए के पेपर को टाल दिया है. इसके अलावा कई प्राइवेट स्कूलों को भी बंद किया गया है.

आरक्षण के खिलाफ भारत बंद के दौरान भोजपुर में आक्रोशित युवाओं ने सड़क पर आगजनी कर आवागमन बाधित कर दिया. नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा मोड़ के समीप आरक्षण के खिलाफ नारे लगा रहे युवाओं ने 84 आरा बक्सर मुख्य मार्ग को सुबह से ही जाम लगाना शुरू कर दिया.

बिहार के मुजफ्फरपुर में हिंसा के दौरान लोगों ने तीन राउंड फायरिंग की है. समर्थकों ने पुलिस और मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी भी की.

केंद्रीय मंत्री से बदसलूकी

भारत बंद का सबसे ज्यादा असर बिहार में दिख रहा है. इस दौरान हाजीपुर में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा जाम में फंस गए. बंद समर्थकों ने केंद्रीय मंत्री से बदसलूकी भी की गई. ये घटना हाजीपुर के शुभाई की है.

जो युवा नारेबाजी कर रहे थे उनका कहना था कि आरक्षण जाति के हिसाब से नहीं बल्कि आर्थिक रुप से कमजोर लोगों को मिलना चाहिए ताकि हर वर्ग के लोग समाज की मुख्यधारा में आ सके. इसके अलावा बिहार में NH 219 के पास रतवार गांव में लोगों ने सड़क को जाम कर दिया है और नारेबाजी कर रहे हैं. मुजफ्फरपुर में मंगलवार सुबह पटना रोड के पास टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया. इसके अलावा भगवानपुर में मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया गया है.

बिहार में भी भारत बंद के चलते सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज बिहार में ही हैं, इसलिए सुरक्षा वैसे ही बढ़ाई गई है. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि केंद्र सरकार की एंटी-दलित छवि बनती जा रही है. उन्होंने कहा कि एक साल में सबकुछ ठीक हो जाएगा, सरकार दलितों के लिए बहुत कुछ कर रही है.

उत्तर प्रदेश –

भारत बंद का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिख रहा है. मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर में रविवार से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सहारनपुर में अग्रिम आदेशों तक इंटरनेट की सुविधा को बंद कर दिया गया है. इसके अलावा हापुड़ और मुजफ्फरनगर में भी इंटरनेट की सेवा बंद है. वहीं फिरोजाबाद और मुजफ्फरनगर में स्कूलों को भी बंद रखा गया है. रविवार रात से ही कई इलाकों में पुलिस ने मार्च किया. अभी शुरुआत में मेरठ में भारत बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है.

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ANI UP

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 No impact of #BharatBandh call seen as yet in Meerut. MHA had issued an advisory that some groups would be protesting against caste-based reservations in jobs and education.

पंजाब

 पंजाब के फिरोजपुर में भारत बंद के दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प हो गई. दुकान बंद करवाने के दौरान लोगों ने मोटरसाइकिल पर पथराव किया. इस दौरान लोगों ने तलवारों से हमला किया, जिसमें दो घायल हुए हैं.

मध्य प्रदेश –

2 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा मध्यप्रदेश में ही हुई थी. इस बार भारत बंद को देखते हुए राज्य के कई शहरों में धारा 144 लागू की गई है. भिंड, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, श्योपुर, शिवपुरी में इंटरनेट की सुविधा पर रोक लगा दी गई है. भिंड और मुरैना में कर्फ्यू लगा दिया हया है. पैरामिलिट्री फोर्स की 6 कंपनियों को तैनात किया गया है.

ग्वालियर में उपद्रवियों से निपटने के लिए 2 हज़ार से ज्यादा पुलिस बलों को तैनात किया गया है. इसके अलावा सीआरपीएफ को भी तैनात किया गया है. भोपाल, रायसेन, टीकमगढ़ में धारा 144 को लागू किया गया है. वहीं सागर में किसी भी तरह के धरने, रैली और जुलूस पर प्रतिबंध लगाया गया है.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर, मुरैना और भिंड में हुई हिंसा के बाद, उच्च जातियों के संगठनों द्वारा 10 अप्रैल को प्रस्तावित भारत बंद और 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है.

राजस्थान –

राजस्थान में इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया गया है. जयपुर में मोबाइल इंटरनेट सुविधा पर रोक लगा दी गई है और शहर में धारा 144 लागू की गई है.

केरल – 

केरल में आज CPIM भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन करेगी. CPIM राज्य के हर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेगी. CPIM का आरोप है कि बीजेपी के राज में दलितों पर अत्याचार बढ़ा है.

गृह मंत्रालय ने मुहैया कराई सुरक्षा

आपको बता दें कि भारत बंद को देखते हुए देशभर में गृहमंत्रालय ने 30 अर्धसैनिक बलों की कंपनियों को तैनात किया है. इसमें 14 कंपनी अर्धसैनिक बल की उत्तर प्रदेश में, 4 कंपनी सीआरपीएफ की मध्यप्रदेश में, 8 कंपनी CRPF की राजस्थान में और बिहार में CRPF की 4 कंपनियां तैनात की गई हैं.

गृह मंत्रालय ने सोमवार को ही सभी राज्यों को एडवाइज़री जारी की थी. इसमें राज्यों के डीएम और एसपी को अलर्ट जारी किया गया था और बंद के दौरान सतर्क रहने को कहा गया था. आपको बता दें कि ये बंद किसी संगठन के द्वारा नहीं बुलाया गया है. बल्कि 2 अप्रैल के बाद लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों के जरिए ही बुलाया गया है.

आपको बता दें कि बीते 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में बदलावों के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. इस भारत बंद में काफी हिंसा हुई थी, जिसमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. इस दौरान उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में काफी हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी.

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जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल भारत की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में भारतीय सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं ये सुरक्षा बल, भारतीय सेना से अलग होते हैं और इन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी काफी अलग होती है. आइए जानते हैं पैरा मिलिट्री फोर्सेज और सेना में क्या अंतर होता है…
जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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बता दें कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और भारतीय सेना में काफी अंतर होता है. कई सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, जिसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, आसाम राइफल्स और एसएसबी शामिल है. वहीं सेना में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना आते हैं.

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अर्धसैनिक बल देश में रहकर या सीमा पर देश की सुरक्षा करते हैं और अर्धसैनिक बल पूरे देश में आतंकवाद औऱ नक्सलवाद विरोधी अभियानों में भी लगे हुए हैं. वहीं वीआईपी सिक्योरिटी में भी मुख्यतौर पर अर्धसैनिक बलों के जवान ही होते हैं. सुविधाओं के नाम पर जो सहूलियतें भारतीय सेना को मिलती हैं, वैसी सुविधाएं अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलती है.

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बीएसएफ पीस-टाइम के दौरान तैनात की जाती है, जबकि सेना युद्ध के दौरान मोर्चा संभालती है. बीएसएफ के जवानों को हमेशा सीमा की सुरक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता है.

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बीएसएफ के जवानों को सीमा पर तैनात किया जाता है, जबकि भारतीय सेना के जवान सीमा से दूर रहते हैं और युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं. साथ ही यह क्रॉस बोर्डर ऑपरेशन भी करती है.

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भारतीय सेना के जवानों को बीएसएफ के जवानों से ज्यादा सुविधा मिलती है, इसमें कैंटीन, आर्मी स्कूल आदि की सेवाएं शामिल है.

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भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है, जबकि बीएसएफ गृह मंत्रालय के अधीन होती है.

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भारतीय सेना में रैंक लेफ्टिनेंट, मेजर, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जर्नल आदि होती है, लेकिन बीएसएफ में पोस्ट कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, एएसआई, डीएआई, आईजी आदि होती है.

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भारतीय सेना में अधिकारी एनडीए और सीडीएस के माध्यम से चुने जाते हैं और इस परीक्षा का चयन यूपीएससी की ओर से किया जाता है. वहीं बीएसएफ में एसआई तक के उम्मीदवार एसएससी की ओर से चुने जाते हैं. वहीं बीएसएफ के डीजी आईपीएस बनते हैं.

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भारत में बनेगी अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर की बॉडी

अमेरिकी सेना सहित दुनियाभर में कहीं भी उपयोग में आने वाले एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर की बॉडी भारत में हैदराबाद स्थित संयंत्र में बनेगी। इनका निर्माण टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) करेगी, जिसकी उत्पादन इकाई का शुभारंभ गुरुवार को हैदराबाद में किया गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन, तेलंगाना के उद्योग व आइटी मंत्री के. टी. राव तथा बोइंग और संबंधित कंपनियों के कई शीर्ष अधिकारी इस मौके पर मौजूद थे।

टीबीएएल अमेरिकी कंपनी बोइंग और भारत की टाटा संस नियंत्रित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) का संयुक्त उपक्रम है। बोइंग की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टीबीएएल संयंत्र से निकले एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के बॉडीज बोइंग के सभी ग्राहकों को डिलिवर किए जाएंगे, जिनमें अमेरिकी सेना समेत दुनियाभर के 15 अन्य देश शामिल है। कंपनी का हैदराबाद स्थित संयंत्र करीब 14,000 वर्गमीटर में फैला है, जिनमें 350 बेहद कुशल पेशेवर काम करेंगे। भविष्य में दुनियाभर में जहां कहीं से भी एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर की मांग आएगी, उसकी बॉडी का निर्माण हैदराबाद स्थित इसी संयंत्र में होगा। कंपनी के मुताबिक इस संयंत्र से पहली बॉडी का निर्माण इसी वर्ष अनुमानित है।

सीतारमन ने टीबीएएल को भारत के रक्षा क्षेत्र में इस तरह के बड़े निवेश के लिए बधाई दी। इस संयंत्र के लिए दोनों कंपनियों ने वर्ष 2015 में करार किया था और संयंत्र का निर्माण वर्ष 2016 में शुरू हुआ।

बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सेक्योरिटी की प्रेसीडेंट व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लिएन कैरेट ने कहा कि पिछले दो वर्षो में भारत से बोइंग की सोर्सिग 100 करोड़ डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) को पार कर गई है। उन्होंने कहा, ‘कंपनी योग्य पेशेवरों, कौशल प्रशिक्षण और एडवांस्ड एयरोस्पेस मैन्यूफैक्चरिंग के लिए काम करने वाले योग्य कर्मचारियों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए बड़ा निवेश कर रही है। हम इस संयंत्र से सिर्फ बॉडी ही नहीं, बल्कि बहुत जल्द वर्टिकल स्पार बॉक्स जैसे उपकरणों का भी उत्पादन करेगी।

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सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 10 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर के नक्सल प्रभावित पुजारी कांकेर इलाके में तेलंगाना पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी (नक्सल ऑपरेशंस) ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में मिली इस सफलता की पुष्टि की है। इस ऑपरेशन में एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गया।

सुरक्षाबलों की यह कामयाबी इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया था। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन पुलिस जवान घायल हो गए थे। संयुक्त दल जब मुंगारी और दुलारगुफा के मध्य पहाड़ी में था, तभी घात लगाए नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी।

25 फरवरी को भी नक्सलियों ने विस्फोट कर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के दो जवान को जख्मी कर दिया था। घायलों में एक सहायक प्लाटून कमांडर भी शामिल था। वहीं, बीते 18 फरवरी को सुकमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों में एक एसटीएफ और एक डीआरजी से जुड़े थे।

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सऊदी अरब: सभी आला सैन्य अधिकारी बर्ख़ास्त

सऊदी अरब ने देर रात एक शाही फ़रमान जारी कर देश के सभी आला सैन्य अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. इनमें सेना के प्रमुख भी शामिल हैं.

जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है उनमें वायुसेना और थल सेना के आला अधिकारी शामिल हैं.

इसके अलावा कई उप-मंत्रियों की भी नियुक्तियां की गई हैं. इन नए नामों में तमादुर बिंत यूसुफ़ अल-रमाह नाम की महिला उप-मंत्री भी शामिल हैं.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमानइमेज कॉपीरइटEPA
Image captionसऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

सऊदी अरब में किसी महिला का उप-मंत्री बनना आम बात नहीं है.

ये फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब यमन में सऊदी नेतृत्व में गठबंधन सेना की विद्रोहियों के साथ लड़ाई के लगभग तीन साल पूरे होने वाले हैं.

यमन में लड़ाईइमेज कॉपीरइटFAYEZ NURELDINE/AFP/GETTY IMAGES

यमन में सऊदी हस्तक्षेप के कारण हूथी विद्रोही देश के दक्षिण की तरफ सीमित हो गए हैं, लेकिन अभी भी वो राजधानी सना और कई इलाकों में मज़बूती से डटे हुए हैं.

लगभग तीन सालों से लड़ रही सऊदी सेना का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ की शक्ल में पड़ा है. साथ ही हूथी विद्रोहियों ने देश की राजधानी रियाद पर मिसाइल दाग़ने की धमकी दी है.

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परमाणु क्षमता से लैस ‘धनुष’ मिसाइल का सफल परीक्षण, सेना को मिलेगी जबरदस्त ताकत

भारत ने गुरूवार को परमाणु क्षमता से लैस बैलिस्टिक मिसाइल ‘धनुष’ का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा तट के पास नौसेना के एक पोत से इस मिसाइल को प्रक्षेपित किया गया। इससे पहले इसी महीने भारत ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम स्वदेशी ‘अग्नि-1’ बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जो अग्नि-1 का 18वां संस्करण था। इस मिसाइल की क्षमता 350 किलोमीटर है।

सूत्रों के अनुसार धनुष मिसाइल बिल्कुल सटीक तरीके से अपना निशाना भेदने में सफल है यह धरती और समुद्र दोनों जगहों से 500 किलो तक की वजनी क्षमता के साथ मार करने में सक्षम है। यह मिसाइल हल्के मुखास्त्रों के साथ 500 किलोमीटर तक मार कर सकती है।

इस मिसाइल की मारक क्षमता की निगरानी डीआरडीओ द्वारा की गई। आपको बता दें कि यह मिसाइल समुद्र और जमीन दोनों जगहों से अपने लक्ष्य को भेद सकती है और इसे पहले ही सशस्त्र बलों में शामिल किया जा चुका है। धनुष मिसाइल का पिछला परीक्षण 9 अप्रैल, 2015 को किया गया था।

अगर भारत की स्वदेशी मिसाइलों की बात करें तो उसके पास नाग मिसाइल है जिसका सफल परीक्षण 1990 में किया गया। इसी तरह भारत ने 1990 में आकाश मिसाइल का परीक्षण किया। जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल की तुलना अमेरिका के पेटियॉट मिसाइल से की जाती है। इसके अलावा भारत के पास ब्रह्मोस और अग्नि मिसाइल भी हैं।

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मालदीव एमरजेंसी पर बोले पूर्व राष्ट्रपति नशीद, संकट के हल के लिए भारत भेजे सेना

मालदीव के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने अपने देश में जारी राजनीतिक संकट के हल के लिए भारत से सैन्य हस्तक्षेप करने की अपील की।मालदीव में न्यायपालिका और राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन के बीच टकराव गहरा गया है। राष्ट्रपति यमीन ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है और सेना ने देश की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद और एक अन्य न्यायाधीश अली हमीद को राष्ट्रपति की ओर से आपातकाल की घोषणा किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ किसी जांच या किसी आरोप की जानकारी भी नहीं दी गई। विपक्ष का समर्थन कर रहे पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को भी उनके आवास पर हिरासत में ले लिया गया। राष्ट्रपति यमीन ने न्यायाधीशों पर आरोप लगाया कि वह उन्हें अपदस्थ करने की साजिश रच रहे थे और इस साजिश की जांच करने के लिए ही आपातकाल लगाया गया है। टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए यमीन ने कहा, ‘‘हमें पता लगाना था कि यह साजिश या तख्तापलट कितना बड़ा था।’’

भारत की मालदीव संकट पर पैनी नजर
मालदीव में राजनीतिक संकट पर चिंतित भारत ने कल अपने नागरिकों से कहा कि वे अगली सूचना तक इस द्वीपीय देश की गैर-जरूरी यात्रा न करें। भारत मालदीव के हालात पर पैनी नजर रख रहा है। पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने भारत से मदद की अपील की है। उनकी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) कोलंबो से अपना कामकाज संचालित कर रही है।

पूर्व राष्ट्रपति ने भारत से मांगी मदद
नशीद ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘हम चाहेंगे कि भारत सरकार अपनी सेना द्वारा सर्मिथत एक दूत भेजे ताकि न्यायाधीशों और पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम सहित सभी राजनीतिक बंदियों को हिरासत से छुड़ाया जा सके और उन्हें उनके घर लाया जा सके। हम शारीरिक मौजूदगी के बारे में कह रहे हैं।’’ लोकतांत्रिक तौर पर चुने गए देश मालदीव के पहले राष्ट्रपति नशीद को 2012 में अपदस्थ करने के बाद इस देश ने कई राजनीतिक संकट देखे हैं। बीते गुरूवार को मालदीव में उस वक्त बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया जब सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद नौ नेताओं को रिहा करने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन कैदियों पर चलाया जा रहा मुकदमा ‘‘राजनीतिक तौर पर प्रेरित और दोषपूर्ण’’ है। इन नौ नेताओं में नशीद भी शामिल हैं। यमीन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल से इनकार कर दिया, जिसके बाद राजधानी माले में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया।

नशीद ने कहा कि यमीन ने अवैध रूप से ‘मार्शल लॉ’ (आपातकाल) घोषित किया है।  उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति यमीन का ऐलान- जिसमें आपातकाल घोषित कर दिया गया है, बुनियादी आजादी पर पाबंदियां लगा दी गई है और सुप्रीम कोर्ट को निलंबित कर दिया गया। मालदीव में ‘मार्शल लॉ’ घोषित करने के बराबर है। यह घोषणा असंवैधानिक और अवैध है। मालदीव में किसी को भी इस गैर-कानूनी आदेश को मानने की जरूरत नहीं है और उन्हें नहीं मानना चाहिए।’’ नशीद ने कहा, ‘‘हमें उन्हें सत्ता से हटा देना चाहिए। मालदीव के लोगों की दुनिया, खासकर भारत और अमेरिका, की सरकारों से प्रार्थना है।’’ उन्होंने अमेरिका से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि सभी अमेरिकी वित्तीय संस्थाएं यमीन सरकार के नेताओं के साथ हर तरह का लेन-देन बंद कर दें। इन घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए अमेरिका ने कहा कि वह यमीन की ओर से आपातकाल घोषित करने पर ‘‘निराश’’ और ‘‘मुश्किल’’ में है।

अमेरिका ने यमीन से कहा कि वह कानून के शासन का पालन करें और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमल में लाएं। विदेश विभाग की प्रवक्ता हीथर नॉअर्ट ने वॉशिंगटन में कहा, ‘‘अमेरिका राष्ट्रपति यमीन, सेना और पुलिस से अपील करता है कि वे कानून के शासन का पालन करें, सुप्रीम कोर्ट और फौजदारी अदालत के फैसले पर अमल करें, संसद का उचित एवं पूर्ण संचालन सुनिश्चित करें और मालदीव के लोगों एवं संस्थाओं को संवैधानिक तौर पर मिले अधिकारों की बहाली सुनिश्चित करें।’’ इस बीच, खबरों के मुताबिक, मालदीव के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश में काम कर रहे विदेशियों या पर्यटकों की सुरक्षा की चिंता की कोई बात नहीं है। भारत और चीन की ओर से अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श जारी करने के बाद यह बयान जारी किया गया है।

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चिंता जताते रह गए चीन-पाक, सुखोई पर सवार ब्रह्मोस ने उड़ा दिया टारगेट

 

  • भारत ने दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रम्होस का फाइटर जेट सुखोई-30 MKI से सफल परिक्षण किया. सुखोई से छोड़ी गई मिसाइल बंगाल की खाड़ी में अपने टारगेट पर हिट हुई.

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    यह पहला मौका है जब ब्रम्होस का परिक्षण किसी फाइटर जेट से दिया गया हो. इसके पहले इसे जमीन और लड़ाकू जहाज से दागा जा चुका है.

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    बता दें कि रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल तो तैयार किया है.

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    इसकी सबसे ख़ास बात तो यह कि आदेश मिलते ही यह मिसाइल अपना रूट बदल सकती है. यही नहीं, रडार सिस्टम भी रफ़्तार के कारण धोखा खा जाते हैं.

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    मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मिसाइल के जरिए 400 किमी की दूरी तक हमला किया जा सकता है. साथ ही यह  न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस होती है.

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    यही वजह है कि न्यूक्लियर वॉर हेड के डर से पाकिस्तान और चीन इस मिसाइल को लेकर पहले ही चिंता जता चुका है.

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    इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मसक्वा के नाम पर रखा गया है. यह अब तक की सुखोई द्वारा दागी गई सबसे भारी मिसाइल है. इसका वजन 2.5 टन बताया जा रहा है.