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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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भारती एयरटेल 2 साल के नए हाई पर, एक हफ्ते में 16% बढ़े शेयर

टाटा टेलीसर्विसेज के मोबाइल कारोबार के अधिग्रहण से एयरटेल

मजबूत होगी: विशेषज्ञ

दूरसंचार क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि टाटा टेलीसर्विसेज के उपभोक्ता मोबाइल कारोबार के अधिग्रहण से दूरसंचार बाजार में भारती एयरटेल की स्थिति मजबूत होगी और उसे आइडिया-वोडाफोन के विलय से बनने वाली इकाई का बेहतर मुकाबला करने में मदद मिलेगी। कुछ विश्लेषकों का तो यहां तक कहना है कि टाटा के टेलीफोनी कारोबार के अधिग्रहण से सुनील मित्तल की एयरटेल को आइडिया-वोडाफोन के विलय के बाद भी अग्रणी स्थिति बनाए रख पाने में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि भारती एयरटेल ने टाटा समूह के घाटे में चल रहे मोबाइल टेलीफोनी कारोबार का अधिग्रहण करने की घोषणा की है।इसके तहत एयरटेल एक नवंबर से 19 दूरसंचार सर्किलों में टाटा टेलीसर्विसेज (टीटीएसएल) व टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र (टीटीएमएल) के चार करोड़ से अधिक ग्राहकों का अधिग्रहण करेगी। यह अधिग्रहण ‘कोई ऋण नहीं-कोई नकदी नहीं’ आधार पर किया जाएगा।

भारती एयरटेल-टाटा की घोषणा पर ​टिप्पणी करते हुए बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफा-एमएल) ने अपनी ताजा रपट में कहा है हमारे विचार में यह सौदा भारती एयरटेल के लिए बहुत ही सकारात्मक है और शायद वह वोडाफोन-आइडिया विलय के बाद भी बाजार भागीदारी के लिहाज से अग्रणी बनी रह सकती है।

वित्तीय सेवा फर्म यूबीएस का कहना है कि फौरी आय गिरावट से इतर भारती एयरटेल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम व पहुंच को देखते हुए दीर्घकालिक विजेता के रूप में उभरी है। ड्यूश बैंक के अनुसार इस सौदे के साथ दूरसंचार क्षेत्र में ‘एकीकरण’ मोटे तौर पर पूरा हो गया है। इसी तरह रेटिंग एजेंसी फिच का कहना है कि टाटा टेली व भारती एयरटेल का सौदा दोनों कंपनियों के लिए सकारात्मक है और इससे एयरटेल की ऋण प्रोफाइल सुधरेगी।

एजेंसी का कहना है कि इस सौदे में एयरटेल परिचालन के अधिग्रहण के लिए किसी राशि का भुगतान नहीं कर रही है इसमें कोई कर्ज नहीं है और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम का फायदा भी उसे इसमें मिलेगा। एजेंसी ने अपनी रपट में कहा है कि सौदे के बाद भारती की कारोबार बाजार हिस्सेदारी 4-5 प्रतिशत बढ़कर 37-38 प्रतिशत हो जाएगी।