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जानिए कौन तय करता है ‘मैन ऑफ़ द मैच’

क्रिकेट मैच के दौरान या ख़त्म होते ही हम अंदाज़ा लगा लेते हैं कि किस खिलाड़ी को ‘मैन ऑफ़ द मैच’ मिलेगा. ज़्यादातर ये अंदाज़ा सही भी रहता है. जीतने वाली टीम की ओर से सबसे ज़्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले खिलाड़ी को ही ये पुरस्कार मिलता है. कुछ मामलों में हारने वाले टीम के भी खिलाड़ी को ‘मैन ऑफ़ द मैच’ मिल जाता है. ये तो तुक्के की बात हो गई, क्या आपको पता है कि ‘मैन ऑफ़ द मैच’ देने का फ़ैसला कौन लेता है?

ये जो कमेंटेटर होते हैं, जिनकी बारीक नज़र पर पूरे मैच पर होती है, जो खेल को अपने कमेंट्री से और ज़्यादा रोमांचक बना देते हैं.

ये वो लोग होते हैं जिनके पास खेल की अच्छी जानकारी होती है, इनमे से ज़्यादातर पुराने खिलाड़ी ही होते हैं. ‘मैन ऑफ़ द मैच’ चुनने का काम भी इन्हीं का होता है. सभी अन्य भाषाओं के कमंटेटर एक साथ बैठ कर ये फ़ैसला लेते हैं कि किसे आज के मैच के लिए ये पुरस्कार दिया जाए.

कभी-कभी कमंटेटर के अलावा मैच रेफ़्री और दूसरे वरिष्ठ खिलाड़ी भी ‘मैन ऑफ़ द मैच’ चुनने वाले पैनल का हिस्सा होते हैं.

बड़ी श्रृंख्ला जैसे चैंपियंस ट्रॉफ़ी या वर्ल्ड कप में ‘मैन ऑफ़ द मैच’ को चुनने के लिए अलग से पैनल तैयार किया जाता है.

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यूपी पीसीएस 2018 के लिए ऑनलाइन आवेदन छह से, एसडीएम के 119 पद, जानें क्या एग्जाम पैटर्न में क्या हुए बदलाव

इस बदलाव से अब पीसीएस की मुख्य परीक्षा का महत्व बढ़ जाएगा। साथ ही साक्षात्कार की आड़ में अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देकर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की शिकायतों को पर भी विराम लगेगा।

इसके अलावा अब दो की बजाय वैकल्पिक विषय एक ही होगा। सामान्य अध्ययन के दो की जगह अब चार पेपर होंगे। प्रदेश में भाजपा की सरकार ने इस अहम निर्णय पर पहले ही अपनी मुहर लगा दी है, ताकि पीसीएस परीक्षा में पारदर्शिता रहे। गौरतलब है कि अभी तक पीसीएस परीक्षा में लिखित परीक्षा 1500 नंबर और की होती थी और साक्षात्कार 200 नंबर के होते थे।

बदलाव के बाद लिखित परीक्षा तो 1500 अंकों की ही रहेगी लेकिन, साक्षात्कार में 100 नंबर घटा दिए जाने से चयन प्रक्रिया कुल 1600 नंबरों में पूरी की जाएगी। इस बार कई बदलाव के साथ यूपीएससी ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यूपीएससी से होने वाली आइएएस परीक्षा की तर्ज पर पीसीएस 2018 में भी दो अलग-अलग क्षेत्रों की प्रारंभिक परीक्षाएं एक साथ कराने की योजना तैयार की है। सचिव जगदीश ने बताया कि इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा में पीसीएस के साथ सहायक वन संरक्षक का पेपर भी होगा। यानी प्रश्न पत्र एक ही आएगा जबकि मुख्य परीक्षा अलग-अलग होगी।

19 अगस्त को प्रारंभिक परीक्षा पर असमंजस बरकरार

यूपीपीएससी ने दूसरी छमाही के कैलेंडर में पीसीएस 2018 की प्रारंभिक कराने की तारीख 19 अगस्त घोषित कर रखी है। पहले यह तारीख 24 जून तय थी। अब आवेदन लेने का सिलसिला अगस्त माह के पहले सप्ताह तक चलेगा, ऐसे में परीक्षा तारीख पर असमंजस बना है। हालांकि सचिव का कहना है कि इम्तिहान तय तारीख पर कराने की तैयारी है।

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10 अप्रैल को भारत बंद, गृह मंत्रालय ने जारी की अडवाइज़री

कुछ समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद की खबरों के बीच गृह मंत्रालय ने अडवाइज़री जारी की और सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे किसी भी तरह की हिंसक घटना और अन्य गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दें। साथ ही गृह मंत्रालय ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर हिंसा को रोकने के लिए वे तमाम ऐक्शन ले सकते हैं।

बता दें कि 2 अप्रैल को देशभर में कुछ दलित संगठनों द्वारा भारत बंद का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापक हिंसा हुई और एक दर्जन से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई। अब 10 अप्रैल को यानी कल जनरल और ओबीसी संगठनों द्वारा भारत बंद की मांग की गई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट और मेसेज वायरल हो रहे हैं। इनमें ‘आरक्षण हटाओ’ की मांग करते हुए देशभर में किए जा रहे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है।

‘हिंसा हुई तो जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक जिम्मेदार’
इसी के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने एहतियात के तौर पर सोमवार को अडवाइज़री जारी की और कहा कि अगर जरूरत पड़े तो गश्त और बढ़ा दी जाए, लेकिन कानून व्यवस्था बनी रहनी चाहिए और किसी भी इलाके में किसी भी तरह की हिंसा या जान-माल का नुकसान नहीं होना चाहिए। अडवाइज़री में यह भी कहा गया है कि अपने इलाके में किसी भी तरह की हिंसा के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने एक अडवाइज़री जारी की है कि कुछ समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएं। इसके अलावा सभी राज्यों को किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिये सुरक्षा बढ़ाने और उचित इंतजाम करने को भी कहा गया है।

हापुड़ में ठप रहेगी इंटरनेट सेवा

10 अप्रैल को भारत बंद की खबरों के बीच, हापुड़ के जिलाधिकारी ने अडवाइज़री जारी करते हुए कहा है कि आज शाम से लेकर कल शाम 6 बजे तक शहर में इंटरनेट सेवा ठप रहेगी।

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जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल भारत की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में भारतीय सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं ये सुरक्षा बल, भारतीय सेना से अलग होते हैं और इन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी काफी अलग होती है. आइए जानते हैं पैरा मिलिट्री फोर्सेज और सेना में क्या अंतर होता है…
जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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बता दें कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और भारतीय सेना में काफी अंतर होता है. कई सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, जिसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, आसाम राइफल्स और एसएसबी शामिल है. वहीं सेना में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना आते हैं.

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अर्धसैनिक बल देश में रहकर या सीमा पर देश की सुरक्षा करते हैं और अर्धसैनिक बल पूरे देश में आतंकवाद औऱ नक्सलवाद विरोधी अभियानों में भी लगे हुए हैं. वहीं वीआईपी सिक्योरिटी में भी मुख्यतौर पर अर्धसैनिक बलों के जवान ही होते हैं. सुविधाओं के नाम पर जो सहूलियतें भारतीय सेना को मिलती हैं, वैसी सुविधाएं अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलती है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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बीएसएफ पीस-टाइम के दौरान तैनात की जाती है, जबकि सेना युद्ध के दौरान मोर्चा संभालती है. बीएसएफ के जवानों को हमेशा सीमा की सुरक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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बीएसएफ के जवानों को सीमा पर तैनात किया जाता है, जबकि भारतीय सेना के जवान सीमा से दूर रहते हैं और युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं. साथ ही यह क्रॉस बोर्डर ऑपरेशन भी करती है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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भारतीय सेना के जवानों को बीएसएफ के जवानों से ज्यादा सुविधा मिलती है, इसमें कैंटीन, आर्मी स्कूल आदि की सेवाएं शामिल है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है, जबकि बीएसएफ गृह मंत्रालय के अधीन होती है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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भारतीय सेना में रैंक लेफ्टिनेंट, मेजर, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जर्नल आदि होती है, लेकिन बीएसएफ में पोस्ट कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, एएसआई, डीएआई, आईजी आदि होती है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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भारतीय सेना में अधिकारी एनडीए और सीडीएस के माध्यम से चुने जाते हैं और इस परीक्षा का चयन यूपीएससी की ओर से किया जाता है. वहीं बीएसएफ में एसआई तक के उम्मीदवार एसएससी की ओर से चुने जाते हैं. वहीं बीएसएफ के डीजी आईपीएस बनते हैं.

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SBI Recruitment 2018: 407 पदों पर आवेदन करने का आखिरी मौका, ऐसे करें अप्लाई

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 407 पदों पर भर्तियां निकाली हैं. इन पदों के लिए आवेदन करने का यह आखिरी मौका है. इच्छुक उम्मीदवार बैंक की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी आवेदन कर सकता है. आवेदन करने की आखिरी तारीख 15 फरवरी है. पद और योग्याता से जुड़ी अन्य जानकारी नीचे दी गई है….

यहां से करें आवेदन- इच्छुक आवेदक इन पदों के लिए एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट www.sbi.co.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

इन पदों के लिए निकली है भर्तियां- विभाग ने जिन पदों पर भर्तियां निकाली हैं उनमें Special Cadre Officer Posts के पद शामिल हैं.

इतनी होनी चाहिए योग्यता- इन पदों के लिए योग्यता का पैमाना अलग-अलग है. आप योग्यता से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या नोटिफिकेशन को देख सकते हैं.

 उम्र सीमा– अलग-अलग पद के लिए उम्र की सीमा 20 से 50 साल के बीच है.

इस आधार पर होगा उम्मीदवारों का चयन– बैंक उम्मीदवारों का चयन शार्टलिस्टिंग और इंटरव्यू के आधार पर करेगा.

इतना देना होगा आवेदन शुल्क– सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपये जबकि एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी उम्मीदवार को 100 रुपये.

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वसुंधरा राजे का चुनावी बजट, खोला घोषणाओं का पिटारा

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोमवार को वर्तमान सरकार का पांचवा और अंतिम बजट पेश किया। बजट में करीब 9 माह बाद होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव की छाया साफ तौर पर नजर आई। सबसे बड़े वोट बैंक किसानों को साधने का पूरा प्रयास किया गया। बजट के माध्यम से वसुंधरा राजे ने किसान,युवा और सरकारी कर्मचारियों के वोट बैंक पर पूरा फोकस किया इन तीनों वर्गों को लुभाने के लिए वसुंधरा राजे ने कई बड़ी घोषणाएं की।

इसके साथ ही हाल ही में सम्पन्न दो लोकसभा और एक विधानसभा उप चुनाव में पार्टी के परम्परागत वोट बैंक सवर्ण जातियों को हाथ से जाते देख,वसुंधरा राजे ने आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को एक बार फिर अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया। वसुंधरा राजे ने किसानों का 50 हजार रूपए तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की । लघु एवं सीमांत किसानों के लिए की गई इस घोषणा से राज्य सरकार पर 8 हजार करोड़ रूपए का वित्तीय भार पड़ेगा । इसके तहत 30 सितम्बर,2017 के 50 हजार रूपए तक के कर्ज एक बार में माफ होंगे और फिर भविष्य में यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। राजस्थान राज्य कृषक श्रृण राहत आयोग का गठन कर कर्ज माफी की प्रक्रिया को जारी रखने की भी मुख्यमंत्री ने घोषणा की। भविष्य में किसानों को आयोग में कर्ज माफी के लिए आवेदन करना होगा। किसानों को एक बड़ी राहत देते हुए राजफैड के माध्यम से समर्थन मूल्य पर सरसों और चने की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने की भी घोषणा की गई। इसके लिए 500 करोड़ रूपए का ब्याज मुफ्त कर्ज दिया जाएगा।

किसानों को खेत में पानी के छोटे तालाब बनाने के लिए लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान के साथ ही नहरी क्षेत्र में डिग्गी निर्माण पर अधिकत 3 लाख रूपए तक का अनुदान देने की भी घोषणा की गई है। इसके लिए 90 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को जनवरी,2012 तक के लंबित 2 लाख विधुत कृषि कनेक्शन देने की भी घोषणा की गई है। किसानों के बाद सबसे अधिक राहत युवा वर्ग को देते हुए विभिन्न विभागोंमें 1 लाख,8 हजार पदों पर भर्ती करने की घोषणा की गई है । इसमें शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी से लेकर लेक्चरार तक के 77 हजार 100 पदों,प्रशासनिक सुधार विभाग में 11,930,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 6571,वन विभाग में 500 फोरेस्टर और 2 हजार फोरेस्ट गार्ड के पदों पर भर्ती शामिल होगी । राज्य के दो बड़े वोट बैंक किसान और युवाओं को कर्ज माफी और नौकरियों से साधने की कोशिश के बाद एक बड़े वोट बैंक सरकारी कर्मचारियों को भी लुभाने का प्रयास किया गया है । मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार की तर्ज पर राजस्थान में भी महिला कर्मचारियों को अधिकतम 2 वर्ष की बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश देने की घोषणा की है। इसके साथ ही 1 अप्रेल,2018 से सातवें वेतन आयोग के एरियर की राशि के भुगतान की घोषणा भी की गई ।

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को लोन- हाल ही में सम्पन्न दो लोकसभा और एक विधानसभा चुनाव में भाजपा के परम्परागत वोट बैंक सवर्ण जातियों को दूर होते देख मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्ण वर्ग के युवाओं के लिए “सुंदर सिंह भंडारी ईबीसी स्वरोजगार योजना” की घोषणा की । इस योजना के तहत 50 हजार परिवारों को 50 हजार रूपए तक का कर्ज 4 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा । इसके साथ ही दलित वोट बैंक को आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ जोड़ने के लिए अजजा,जजा वित्त एवं विकास सहकारी निगम के 2 लाख रूपए तक के बकाया कर्ज एवं ब्याज माफ करने की भी घोषणा बजट में की गई है । इससे राज्य सरकार पर 114 करोड़ का भार पड़ेगा । छोटे कामगारों को 2 लाख रूपए तक का ब्याज मुक्त कर्ज और ” पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत अंत्योदय स्वरोजगार योजना ” के तहत 50 हजार परिवारों को 50 हजार रूपए तक के कर्ज 4 प्रतिशत की ब्याज दर पर उपलब्ध कराए जाने की भी बजट में घोषणा की गई ।

सस्ते होंगे घर,शहरी मतदाताओं का रखा ध्यान

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने वर्तमान कार्यकाल के अंतिम बजट में रियल स्टेट और शहरी मतदाओं को भी राहत देने की कोशिश की। जीएसटी और नोटबंदी के बाद रियल स्टेट सेक्टर में आई भारी मंदी को संजीवनी देने का प्रयास वसुंधरा राजे ने बजट में किया है। सबसे बड़ी राहत डीएलसी दरों में 10 फीसदीकी कटौती करने की घोषणा है। इससे मकान और जमीन खरीदना सस्ता होगा। इस कटौती के बाद रजिस्ट्री भी सस्ती होगी।

दरअसल,रजिस्ट्री का आधार डीएलसी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जन आवास योजना में ईडब्लूएस और एलआईजी श्रेणी लोगों के पक्ष में आवंटित आवासीय यूनिटों के दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी 2 और 3:5 प्रतिशत से घटाकर 1 और 2 प्रतिशत की गई है। मुख्यमंत्री ने मिक्स लैंड यूज के पट्टों की भूमि का मूल्यांकन वाणिज्यक भूमि की मूल्यांकन दर से 75 फीसदी के स्थान पर 50 फीसदी की दर से करने और रियल स्टेट मंदी को देखते हुए 3000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंडों के मूल्यांकन पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त रियायत देने की घोषणा की है। आईटी सेक्टर,मनोजरंजन एवं पर्यटन इकाईयों के लिए बहुमंजिला व्यवसायिक भवनों में स्पेस या फ्लोर खरीद पर देय स्टाफ ड्यूटी में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा भी बजट में की गई है। मुख्यमंत्री ने कृषि भूमि पर लगने वाले भू-राजस्व को माफ करने की भी घोषणा की है । इसका फायदा प्रदेश के 50 लाख किसानों को होगा।

गौशालाओं का अनुदान बढ़ाया,नंदी गौशालाओं की स्थापना

गायों को लेकर समय-समय पर होने वाली राजनीति के बीच मुख्यमंत्री ने बजट में राज्य के प्रत्येक जिले में एक नंदी गौशाला को गौ संरक्षण के लिए 50 लाख रूपए का अनुदान देने की घोषणा की। इसके साथ ही गौशालाओं को चारा पशु आहार के लिए सहायता 3 माह से बढ़ाकर 6 माह करने,पंजीकृत गौशालाओं में आधारभूत संरचना के विकास हेतु संरक्षण निधि से 50 करोड़ और ऊंटनी के दूध का प्रसंस्करण एवं विपणन करने के लिए 5 करोड़ की लागत से जयपुर में मिनी प्लांट लगाने की भी घोषणा की गई ।

कमलेश नागरकोटी को 25 लाख का ईनाम

मुख्यमंत्री ने बजट में अंडर-19 विश्वकप में अपनी तेज और धारदार गेंदबाजी की बदौलत देश को वर्ल्ड कप दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कमलेश नागरकोटी को 25 लाख रूपए का ईनाम देने की घोषणा की । कमलेश नागरकोटी राजस्थान में बाड़मेर जिले के निवासी है ।