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पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने पत्नी सुनंदा पुष्कर हत्याकांड पर दी सफाई। जाने पूरा मामला!

थरूर ने अपनी सफाई में एक पत्र जारी किया है। इसमें उन्‍होंने कहा, ‘मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं, वो ऊटपटांग और आधारहीन हैं। मेरे खिलाफ द्वेषपूर्ण और बदला लेने के उद्देश्‍य से अभियान चलाया जा रहा है।’ दरअसल, सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में आरोपी बनाए गए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान शशि थरूर को 7 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया है। यहां पर बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में सुनंदा पुष्कर के पति शशि थरूर को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोपी माना है।

वहीं, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर भी सुनवाई हुई। स्वामी ने कहा कि अपराध हुआ था, उस समय सबूत मिटाए गए थे। एक साल बाद एफआईआर दर्ज की गई, दिल्ली पुलिस ने सही तरीके से जांच नहीं की। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वामी की याचिका पर हम अलग से गौर करेंगे। इस पर पुलिस को अगली सुनवाई में जवाब देना है।

यहां पर बता दें कि पिछले महीने 14 मई को बहुचर्चित सुनंदा पुष्कर मौत मामले में सवा चार साल बाद विशेष जांच दल (एसआइटी) ने पटियाला हाउस कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इस चार्जशीट में सुनंदा के पति व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की भूमिका को संदिग्ध माना था। तकरीबन 4 साल बाद दिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर मामले में कोर्ट में 3000 पेज की चार्जशीट पेश की थी। चार्जशीट में आईपीसी की धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने और वैवाहिक जीवन में प्रताड़ित करने के की बात कही गई है।

प्रताड़ना से तंग आकर सुनंदा ने की थी खुदकशी

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा की 17 जनवरी 2014 को चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा होटल लीला पैलेस के सुइट नंबर 345 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

मौत को पहले आत्महत्या बताया गया था, लेकिन एक साल बाद विसरा रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले की जांच के लिए एसआइटी बनाई गई। लेकिन, सवा चार साल बाद भी न तो केस सुलझ सका और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई।

एम्स के मेडिकल बोर्ड ने सुनंदा के शव का पोस्टमार्टम किया था। 29 सितंबर 2014 को मेडिकल बोर्ड ने दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सुनंदा की मौत जहर से हुई है। बोर्ड ने कहा था कि कई ऐसे रसायन हैं जो पेट में जाने या खून में मिलने के बाद जहर बन जाते हैं। लिहाजा, बाद में उनके वास्तविक रूप के बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

इस रिपोर्ट के बाद 1 जनवरी, 2015 को सरोजनी नगर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद सुनंदा के विसरा को जांच के लिए फोरेंसिक ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ), अमेरिका की लैब में भेज दिया गया था। लेकिन, वहां की लैब में भी जहर के बारे में पता नहीं लग सका। उस वक्त दवाओं के ओवरडोज को मौत की वजह बताया गया था।

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्‍‌नी सुनंदा पुष्कर का शव दिल्ली के होटल लीला से बरामद किया गया था। सुनंदा का शव कमरे के बिस्तर पर मिला था। सुनंदा और शशि थरूर की शादी 2010 में ही हुई थी। यह सुनंदा की तीसरी और शशि थरूर की दूसरी शादी थी।

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पीएम मोदी ने इराक में मारे गए लोगों के परिवार वालों को 10 लाख रुपए की मदद की घोषणा की

इराक के मोसुल में मारे गए भारतीयों के परिवारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 लाख रुपये का अनुग्रह राशि यानी मदद का ऐलान किया है. इससे पहले पीएम मोदी ने उनकी मौत की खबर की पुष्टि होने के बाद दुख जताया था. बता दें कि इससे पहले मारे गए लोगों के परिजनों की तरफ से मुआवजे की मांग किए जाने के सवाल पर विदेश राज्य मंत्री ने कहा था कि, ‘ये बिस्कुट बांटने वाला काम नहीं है’.

इराक के मोसुल में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा मारे गए भारतीय नागरिकों के अवशेष लेकर विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह सोमवार को भारत पहुंचे थे. इसके बाद वह सबसे पहले पंजाब गए. मोसुल में 39 भारतीय मारे गए थे. इनमें से 38 के अवशेष भारत आए हैं. एक की पहचान नहीं हो पाई. इनमें से 27 लोग में पंजाब के थे. अमृतसर एयरपोर्ट पर मारे गए लोगों के परिजनों की तरफ से मुआवजेकी मांग किए जाने के सवाल पर विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि, ‘ये बिस्कुट बांटने वाला काम नहीं है’. विदेश राज्य मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है.

विदेश राज्यमंत्री वी. के. सिंह ने कहा कि इराक में आतंकवादी समूह आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाए गए 40 भारतीयों का कोई भी रिकॉर्ड किसी दूतावास में नहीं है क्योंकि वे वहां ट्रैवल एजेंट के माध्यम से अवैध रूप से गए थे.  आतंकवादी समूहों ने 40 में से 39 भारतीयों की हत्या कर दी थी जबकि उनमें से एक खुद को बांग्लादेशी बताकर बच गया था. सिंह सोमवार को कहा कि इराक से एक विशेष विमान से 38 भारतीयों का शव लेकर अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर पहुंचे. मारे गए लोगों में से एक के शव की अभी तक स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाई है.

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डेटा लीक: भारत-ब्राजील में चुनाव को देखते हुए अपने सिक्युरिटी फीचर्स में इजाफा करेगा फेसबुक: जुकरबर्ग

डाटा लीक मामला सामने आने के बाद फेसबुक अब भारत-ब्राजील में आगामी चुनावों के मद्देनजर सिक्युरिटी फीचर्स को और सख्त करने जा रहा है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने गुरुवार को इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए फेसबुक के सिक्युरिटी फीचर्स में और इजाफा किया जाएगा। इससे पहले जुकरबर्ग ने कहा था कि यूजर्स की डाटा सीक्रेसी को लेकर मेरी कंपनी ने गलती की है। किसी के पर्सनल डाटा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया ने दावा किया है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा का यूएस इलेक्शन में गलत इस्तेमाल किया था।

आर्टीफिशियल टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है फेसबुक
– जुकरबर्ग ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि इलेक्शन के दौरान न्यूज में हेरफेर (मैनुपुलेट) करने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले फेक अकाउंट का पता लगाने के लिए फेसबुक आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। ये टूल पहली बार फ्रेंच इलेक्शन में इस्तेमाल किए गए थे।

– “इन नए टूल्स को 2016 में 30,000 से ज्यादा फेक अकाउंट मिलने के बाद बनाया गया था। हमारा मानना है कि इन सभी का रशियन कनेक्शन था। इन्होंने उसी तरह की टैक्टिक्स अपनाने की कोशिश की थी, जो 2016 इलेक्शन में यूएस में अपनाई गई थींं। हम इन्हें बंद करने में कामयाब रहे। उधर, फ्रांस इलेक्शन में ऐसा होने से हमने बड़े स्तर पर रोका भी।”

2017 में भी हमने ऐसा ही किया?
– “पिछले साल अलबामा के विशेष चुनाव के दौरान हमने कुछ नए एआई टूल्स फेक अकाउंट और झूठी खबरों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया था। हमें बड़ी तादाद में मैसेडोनियन अकाउंट्स भी मिले थे, जो झूठी खबरें फैलाने की कोशिश कर रहे थे। हमने इन्हें हटा दिया था।”

भारत में चुनाव हमारे लिए अहम
– बकौल जुकरबर्ग, “हम 2018 में अमेरिका में होने वाले चुनावों पर ही नजर नहीं रख रहे। भारत समेत अन्य जगहों पर भी इस साल होने वाले आम चुनाव हमारे लिए अहमियत रखते हैं। रूस जैसे देशों के दखल को रोकने के लिए फेसबुक को कड़ी मशक्कत करनी होगी। हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि फेक न्यूज न फैलाई जाए। ये साल काफी अहम है। ब्राजील में भी चुनाव होने हैं। दुनियाभर में कई जगह इलेक्शन हैं। हम हर चीज के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भरोसा दिलाते हैं कि फेसबुक की सुरक्षा कायम रहेगी ताकि चुनावों की विश्वसनीयता बनी रहे।”
– सीएनएन को दिए इंटरव्यू में जुकरबर्ग ने आशंका जताई थी कि कोई 2018 में अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन में दखलअंदाजी कर सकता है।

जुकरबर्ग ने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा?

– “मैंने फेसबुक शुरू किया था। इस प्लेटफॉर्म पर जो होता है, उसके लिए अंत में मैं ही जिम्मेदार हूं। डाटा लीक रोकने के लिए मैं काफी गंभीर हूं। अपने यूजर्स का डाटा लीक होने से रोकने के लिए फेसबुक ही जिम्मेदार है। लेकिन हम इसमें नाकाम रहे। हम आपको सेवाएं देने के लिए लायक नहीं हैं। अब हमारी कंपनी को बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमने गलती की है। हम जरूरी कदम उठाएंगे। और हम ऐसा कर रहे हैं।”

5 प्वाइंट में समझिए क्या हैं ये मामला?

2016: ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव जीतने से शुरुआत
– आरोप लगा कि ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जिताने के लिए रूसी दखल था। हिलेरी की रणनीतियां हैक करके ट्रम्प को भेजी गईं। सोशल मीडिया डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ। एफबीआई ने रूस के 13 लोगों और तीन कंपनियों पर आरोप तय किए हैं।

17 मार्च 2018: अमेरिकी-ब्रिटिश मीडिया में खुलासा
– गार्डियन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापा कि ट्रम्प के कैंपेन से जुड़ी ब्रिटिश फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने 2014 में 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हासिल किया था। फेसबुक को इसका पता था, पर यूजर्स को सतर्क नहीं किया गया।

18 मार्च 2018: वादा नहीं निभाया एनालिटिका ने
– फेसबुक ने एनालिटिका को अपने प्लेटफॉर्म से सस्पेंड कर दिया। साथ ही सफाई दी कि 2015 में ही उसका एप बैन कर दिया था। एनालिटिका ने सारा डेटा डिलिट करने का भरोसा दिया था, पर अब पता चला कि उसने ऐसा नहीं किया।

19 मार्च 2018: सीईओ का स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा
– ब्रिटिश चैनल 4 ने एनालिटिका के सीईओ एलेग्जेंडर निक्स का स्टिंग किया। उन्होंने माना कि क्लाइंट को जिताने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं। डेटा पर काम करने के चलते ट्रम्प को बड़ी जीत हासिल हुई।

आखिर डेटा का गलत इस्तेमाल होता कैसे है…
– एनालिटिका के सीईओ ने बताया कि कंपनी फेसबुक यूजर्स के साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के साथ अपने क्लाइंट के समर्थन में और विरोधी के खिलाफ सूचनाएं प्लांट करती है। इससे जनमत बदलता है।

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Jio ने अवार्ड मिलने की खुशी ग्राहकों के साथ बांटी, फ्री में दे रहा है 10GB डेटा

मुकेश अंबानी की कंपनी की जियो टीवी को उसकी उपलब्धियों की वजह से 2018 का प्रतिष्ठित ग्लोबल मोबाइल (GLOMO) अवॉर्ड्स मिला है। बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में जियो टीवी को GLOMO अवार्ड्स देने की घोषणा की गई। इस सम्मान को हासिल करने के बाद जियो ने ये खुशी अपने यूजर्स के साथ बांटी है।

जियो ने इस अवार्ड्स के मिलने की खुशी में अपने ग्राहकों को 10GB डेटा देने का ऐलान किया है। इस बारे में जियो ने अपने ग्राहकों को सूचित कर दिया है। कंपनी नोटिफिकेशन और एसएमएस भेजकर अपने यूजर्स को 10GB डेटा फ्री देने की सूचना दे रही है।

जियो को मिला GLOMO अवार्ड्स जियो ने अपने कस्टमर्स को मैसेज भेजकर इस बारे में जानकारी दी है। जियो ने अपने संदेश में लिखा है कि जियो टीवी ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में ‘बेस्ट मोबाइल विडियो कॉन्टेंट’ का प्रतिष्ठित ग्लोबल मोबाइल अवॉर्ड्स 2018 जीता है।

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इस जीत को साझा करते जियो ने अपने यूजर्स को धन्यवाद दिया है और लिखा है कि उत्साहवर्धन के लिए हमने आपके अकाउंट में 10GB का कंप्लीमेंट्री डेटा ऐड किया है।

जियो की नई उपलब्धि आपको बता दें कि जियो टीवी GLOMO अवॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित सम्मान को हासिल करने वाली भारत की एक मात्र कंपनी है।

जियो को अमेरिकी कंपनी सिस्को के साथ साझे तौर पर बेस्ट मोबाइल ऑपरेटर सर्विस फॉर कन्ज्यूमर्स का अवॉर्ड भी मिला है। इसके साथ-साथ जियो टीवी ऐप को बेस्ट मोबाइल विडियो कॉन्टेंट सर्विस का अवॉर्ड भी मिला है।

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एयर इंडिया की रणनीतिक जीत, सऊदी अरब एयरस्पेस के इस्तेमाल की मिली मंजूरी

एयरलाइंस एयर इंडिया को सऊदी अरब पर एक रणनीतिक जीत मिली है।सऊदी अरब ने एयर इंडिया को इसराईल  के तेल अवीव शहर की उड़ान के लिए अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। एयर इंडिया अब इजरायल के लिए डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने जा रही है। इसराईल के पर्यटन मंत्रालय ने एयर इंडिया को इन उड़ानों के लिए एकमुश्त 750,000 यूरो देने की घोषणा की है। एयर इंडिया के विमान नई दिल्ली से तेल अवीव के लिए सीधी उड़ान भर सकेंगे।  खास बात यह है कि सऊदी अरब पिछले 70 सालों से इसराईल जाने वाली कमर्शियल उड़ानों के लिए अपना हवाई रास्ते का इस्तेमाल नही करने देता था।

दरअसल सऊदी अरब इसराईल को मान्यता नहीं देता है। इसलिए वह पिछले 70 सालों से अपने उड़ान क्षेत्र पर इसराईल जाने वाले विमानों को रास्ता नहीं देता है। गौरतलब है कि इसराईल और सऊदी अरब दोनों ही अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देशों में से हैं। लेकिन इन दोनों देशों के बीच ईरान से जुड़ी चिंताओं के चलते तनाव रहता है। अधिकारियों के अनुसार सऊदी अरब के अपने हवाई क्षेत्र में भारतीय एयरलाइंस एयर इंडिया को उड़ान भरने की अनुमति दी है। इससे एयर लाइंस एक छोटा रास्ता लेकर अहमदाबाद, मस्कट, सऊदी अरब होते हुए अब तेल अवीव में अपने विमान उतार सकेगी। इस मार्ग से दो शहरों के बीच की दूरी तय करने में महज अढ़ाई घंटे लगेंगे। साथ ही ईंधन की भी भारी बचत होगी।

फिलहाल मुंबई से तेल अवीव की उड़ान भरने वाली इसराईल की एलएआइ उड़ानों में 7 घंटे का लंबा समय लगता है। यह विमान लाल सागर से होते हुए अदन की खाड़ी से होकर तब भारत में प्रवेश करता है। ताकि सऊदी अरब, अफगानिस्तान, यूएई, ईरान व पाकिस्तान और अन्य ऐसे देशों से गुजरने से बचा जा सके। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता और इसराईली हवाई अड्डा प्राधिकरण ने बताया कि राष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपने नियामक डीजीसीए से दिल्ली से तेल अवीव के लिए हफ्ते में तीन उड़ानों के लिए अनुमति मांगी है। एयर लाइंस की एक महिला प्रवक्ता ने बताया कि यह विमान सेवा मार्च से शुरू होगी। एयर इंडिया के एक अन्य अधिकारी के अनुसार एयरलाइंस को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और तेल अवीव के बेन गुर्सियन अंतर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों के लिए कई टाइम स्लॉट मिलने का इंतजार है।

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मेरे पास ज्यादा बड़ा और पावरफुल न्यूक्लियर बटन: नॉर्थ कोरिया की धमकी पर ट्रम्प

यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉर्थ कोरिया के तानाशाह की एटमी जंग की धमकी का जवाब उसी के अंदाज में दिया है। ट्रम्प ने एक ट्वीट में कहा- मेरे पास ज्यादा बड़ा और ताकतवर न्यूक्लियर बटन है। और ये काम भी करता है। बता दें कि नए साल पर किम जोंग उन ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा था कि एटमी हथियार लॉन्च करने का बटन हमेशा उनकी टेबल पर रहता है और वो इसके जरिए पूरे अमेरिका को तबाह कर सकते हैं। किम की धमकी का जवाब डोनाल्ड ट्रम्प ने दो दिन बाद दिया।

क्या कहा था नए साल पर किम जोंग ने?

– बता दें कि किम जोंग ने नए साल के मौके पर अपने देश को टीवी पर आकर संबोधित किया था। इस दौरान उसने अमेरिका को एटमी हथियारों से तबाह कर देने की धमकी दी थी। हालांकि, ये पहली बार नहीं था। किम जोंग उन पहले भी अमेरिका और उसके सहयोगियों की इस तरह की धमकी दे चुका है।
– किम जोंग उन ने कहा था- अमेरिका अब कभी भी हमारे खिलाफ जंग शुरू नहीं कर सकता, क्योंकि हमारे एटमी हथियार उसको तबाह कर देंगे। पूरा अमेरिका हमारे न्यूक्लियर वेपन्स की रेंज में है। इन हथियारों का बटन हमेशा मेरी टेबल पर रहता है। और यह एक सच्चाई है, इसे धमकी नहीं समझा जाना चाहिए।

ट्रम्प ने तंज कसते हुए दिया जवाब

– डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक ट्वीट के जरिए किम जोंग उन को उसी के अंदाज में जवाब दिया। इसमें तंज भी था। शायद ट्रम्प ये बताना चाहते थे कि नॉर्थ कोरिया के एटमी हथियार दिखावे के हैं। लेकिन, अमेरिका के हथियार हकीकत में काम करते हैं।
– ट्रम्प ने अपने ट्वीट में कहा- क्या कोई भुखमरी से जूझ रहे देश में उसे (किम जोंग उन को) ये बताएगा कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है। लेकिन, ये उनसे कहीं ज्यादा बड़ा और ज्यादा ताकतवर है। और मेरा बटन काम करता है।
– ‘मेरा बटन काम करता है’- किम जोंग उन की धमकी पर ट्रम्प की तरफ से किया गया तंज माना जा रहा है।
– व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी सराह सैंडर्स ने बाद में कहा- नॉर्थ कोरिया को लेकर अमेरिका की सोच बदली नहीं है। हम उसे दुनिया के लिए खतरा मानते हैं।

किम ने पिछले साल भी दी थी धमकी

– पिछले साल की शुरुआत में किम ने कहा था- नॉर्थ कोरिया उस स्टेज में पहुंच गया है, जहां से वो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बना सकता है और उन्हें लॉन्च भी कर सकता है। उसने ऐसी 15 मिसाइल तैयार करने का दावा किया था।
– साउथ कोरिया की न्यूज एजेंसी योन्हेप के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया दुनिया को तबाह करने में सक्षम हथियारों को बड़े पैमाने पर तैयार कर रहा है।
– किम की धमकी के बाद यूनाइटेड नेशन्स में अमेरिकी मिशन के स्पोक्सपर्सन जोनाथन वाशेल का बयान आया था। उन्होंने कहा था- अगर ऐसी कोई जंग हुई तो किम जोंग उन ही इसका पहला शिकार बनेंगे।

गद्दाफी और सद्दाम हुसैन जैसा होगा हश्र

– अमेरिकी न्यूज हेडक्वॉर्टर के होस्ट कैली राइट ने कहा था- अगर किम जोंग अमेरिका पर हमले की प्लानिंग करते हैं तो उनका हश्र भी लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी या फिर इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन जैसा ही होगा।
– वहीं, वाशेल ने कहा था कि रूस और चीन कभी नहीं चाहेंगे कि उनके आसपास कोई न्यूक्लियर ताकत मौजूद रहे। वैसे, अमेरिका और उसके सहयोगी देश किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं।

सतर्क रहे अमेरिका

– यूएस आर्मी के पूर्व चीफ ऑफ स्टाप माइक मुलेन एक टीवी शो में अमेरिका को नॉर्थ कोरिया से सतर्क रहने की हिदायद दे चुके हैं। मुलेन ने कहा था- अमेरिका नॉर्थ कोरिया से जंग के करीब पहुंचता जा रहा है। अब डिप्लोमैटिक तरीके से मामला हल करने की गुंजाइश काफी कम बची है।
– मुलेन ने कहा था – मेरे हिसाब से हालात अब काफी खतरनाक हो चुके हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इसका अंत किस तरह होगा। मुझे लगता है कि हम नॉर्थ कोरिया से एटमी जंग के काफी करीब आ गए हैं।

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अयोध्या में बने राम मंदिर, हम जमीनी हक छोड़ देंगे: शिया वक्फ बोर्ड का नया फॉर्मूला

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या विवाद पर नया प्रपोजल दिया है। अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले वक्फ बोर्ड की तरफ से ये प्रस्ताव आया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि हमने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया है। ड्राफ्ट में अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनाने की बात कही है। इस प्रपोजल पर कई महंतों ने सहमति जताई है। 5 दिसंबर को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

शिया वक्फ बोर्ड का फॉर्मूला, 5 प्वाइंट

1) विवादित जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक नहीं
– शिया वक्फ बोर्ड का दावा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का पूरा केस 26 फरवरी 1944 को जारी एक नोटिफिकेशन पर बेस्ड है। इसमें उसने बाबरी मस्जिद पर हक जताया था। लेकिन कोर्ट ने इस नोटिफिकेशन की वैलिडिटी पर शक जताया था। बाबरी मस्जिद पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन भी फैजाबाद कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर अवैध घोषित हो चुका था। लिहाजा, सुन्नी वक्फ बोर्ड को इस मामले में फैसला लेने का हक नहीं है।

2) हम अयोध्या में जमीन का पूरा हक छोड़ने को तैयार
– शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हिंदुओं की आस्था का सम्मान करते हुए और राष्ट्र हित में विवाद खत्म करने के मकसद से हम राम मंदिर बनाने के लिए पूरी जमीन पर अपना हक छोड़ते हैं।

3) लखनऊ में मस्जिद के लिए मिले जगह
लखनऊ के मोहल्ला हुसैनाबाद में नजूल की खाली पड़ी एक एकड़ जमीन शिया समुदाय को मस्जिद बनाने के लिए मिले। यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार दे।

4) लखनऊ में मस्जिद किसी मुगल बादशाह के नाम पर नहीं होगी
– मीर बाकी या किसी मुगल बादशाह के नाम पर मस्जिद नहीं होगी। इसे अमन की मस्जिद नाम दिया जाएगा।

– इस प्रपोजल पर यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी, हनुमान गढ़ी निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास, नृत्य गोपालदास, रामविलास वेदान्ती, श्रीपंच निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास जैसे नेताओं के दस्तखत हैं।

5) बाबर का सेनापति शिया मुसलमान था

– ड्राफ्ट में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद को 1528 से 1529 के बीच मीर बाकी ने अयोध्या में बनवाया था। मीर बाकी बाबर के सेनापति थे और वो शिया मुसलमान थे।
– बाबरी मस्जिद बनने के बाद उसके मुतल्लवी (केयरटेकर) मीर बाकी ही रहे। मीर बाकी के बाद 1945 तक उनके परिवार के लोगों ने इस मस्जिद के मुतल्लवी का जिम्मा संभाला। ये सभी लोग शिया मुसलमान थे।

शिया कमेटी ही वसीम रिजवी को नहीं मानती: इकबाल अंसारी

– हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा कि वसीम रिजवी को तो शिया कमेटी भी नहीं मानती है। घोटालों से बचने के लिए यह राम मंदिर बनाना चाहते हैं। हमारे यहां सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड जो करेगा वही माना जाएगा। ड्राफ्ट भले ही दे दिया गया हो लेकिन कोर्ट का फैसला ही माना जाएगा।

– हाशिम, बाबरी विवाद में ही पक्षकार थे। उनकी मौत हो चुकी है।

अयोध्या विवाद में कौन-कौन से पक्ष हैं ?

– निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड।

तीनों पक्षों का दावा क्या है ?

– निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा शुरू से करता रहा है। लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए।
– रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वह रामलला के करीबी मित्र हैं। चूंकि भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं।
– सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी। मुस्लिम वहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

– 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।