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मेघालय में 2 सीट वाली बीजेपी बना रही NDA सरकार, आज CM पद की शपथ लेंगे कोनराड संगमा

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में आए चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंगलवार को कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. गौरतलब है कि एनपीपी की अगुवाई में बन रही सरकार में बीजेपी भी हिस्सेदार है. संगमा करीब सुबह 10 बजे शपथ लेंगे. कोनराड के साथ करीब 11 विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले गठबंधन में हिस्सेदार HSPDP की मांग थी कि वे गैर बीजेपी-गैर कांग्रेस सरकार का गठन चाहते हैं.

कोनराड संगमा, मुख्यमंत्री समेत 7 मंत्री NPP के, दोनकुपर रॉय (यूडीपी) के दो मंत्री, बीजेपी की तरफ से ए.एल. हेक मंत्री पद की शपथ लेंगे.

ऐसी है विधानसभा की स्थिति

3 मार्च को आए नतीजों में 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के खाते में 21 , एनपीपी के खाते में 19 और बीजेपी के खाते में दो सीटें आई थीं. वहीं, यूनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के छह विधायक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दो विधायक चुने गए थे. एनसीपी और खुन हनीट्रैप नेशनल अवेकिंग मूवमेंट के खाते में एक-एक सीट आई है. इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायक भी चुनाव जीते हैं.

पिछड़ गई कांग्रेस

मेघालय में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 21 सीटें मिली हैं, लेकिन वह 60 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने से 10 सीट पीछे रह गई. कांग्रेस की ओर से पार्टी के बड़े नेता अहमद पटेल, कमलनाथ समेत चार नेता वहां पर सरकार बनाने की संभावना तलाशने गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके.

और बन गई बीजेपी सरकार!

वहीं, दूसरे नंबर पर रही नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के पास 19 विधायक हैं. बीजेपी (2 विधायक), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (6 विधायक), एचएसपीडीपी (2 विधायक), पीडीएफ (4 विधायक) और 1 निर्दलीय विधायक के साथ आने से इस गठबंधन के पास 34 विधायकों का समर्थन हो गया है.

कोनराड संगमा कौन हैं?

मेघालय में मजबूत नेता के रूप में सामने आए कोनराड संगमा राज्य में आठवीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं. उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक के रूप में सदन में विपक्ष का नेतृत्व किया. 27 जनवरी 1978 को जन्मे कोनराड संगमा वेस्ट गारो हिल्स जिले के सेलसेल्ला निर्वाचन क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया. इससे पहले कोनराड संगमा 2008 में मेघालय के सबसे युवा वित्त मंत्री बने थे और अभी वह मेघालय की तुरा सीट से लोकसभा सदस्य हैं.

सियासी करियर की शुरुआत

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कोनराड संगमा 1990 दशक के अंतिम दिनों में पिता पीए संगमा के प्रचार प्रबंधक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. उस समय पीए संगमा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में थे. बता दें कि राकांपा से विवाद के बाद अलग होकर पीए संगमा ने जुलाई 2012 में नेशनल पीपुल्स पार्टी का गठन किया था.

मेघालय विधानसभा में 2009-2013 तक कोनराड संगमा विपक्ष के नेता रहे. वह अभी तुरा सीट से लोकसभा सांसद हैं, जो उनके पिता पीए संगमा के निधन के बाद खाली हुई थी.

मेघालय में बन रही बीजेपी सरकार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि मेघालय में बीजेपी धोखे से सत्ता आ रही है. उन्होंने कहा है कि इसी तरह से बीजेपी गोवा और मणिपुर में भी सत्ता में आई थी. राज्य के विधानसभा चुनावों में केवल दो सीटें पाने वाली बीजेपी सरकार में शामिल होने जा रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘सिर्फ 2 सीटों के साथ ही बीजेपी मेघालय में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही. मणिपुर और गोवा की तरह, मेघालय में भी जनादेश का अपमान हुआ. सत्ता के लालच में बीजेपी बड़े पैमाने पर पैसों का इस्तेमाल करके एक अवसरवादी गठबंधन बनाने में कामयाब रही है.’

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बच्चों की खातिर ऋतिक रोशन फिर चले दूल्हा बनने, इनसे रचाएंगे शादी!

 

 बॉलीवुड के सुपरहीरो कहलाने वाले ऋतिक रोशन को लेकर फिर से शादी करने को लेकर मीडिया में काफी चर्चे सुनने को मिल रहे हैं.  अहम बात यह है कि ऋतिक किसी और से नहीं बल्कि अपनी पूर्व पत्नी से तलाक ले चुके सुजैन खान से है. खबरों की मानें तो दोनों ही इन दिनों एक साथ कई जगहों पर देखे जा चुके हैं. इतना ही नहीं, अपने पूर्व पति ऋतिक के लिए सुजैन का सपोर्ट भी कई बार देखने को मिला है. वह चाहे कंगना रनोट से या फिर उनके बच्चे से जुड़ा हुआ मामला हो. सुजैन अपने दो बच्चे और ऋतिक के साथ छुट्टियां मनाने भी जा चुके हैं.

ऋतिक-सुजैन की नजदीकियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि जल्द ही दोनों एक बार फिर शादी के बंधन में बंध सकते हैं. फिलहाल इसके लिए अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. अंग्रेजी वेबसाइट डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक दोनों के एक करीबी दोस्त ने बताया है कि ऋतिक और सुजैन की इस मामले में बातचीत चल रही है. दोनों ही अपने रिश्तों को लेकर होने वाली समस्याओं के बारे में समझ-बूझ रहे हैं और अच्छे रिश्ते को पनपने के लिए काम कर रहे हैं. उन्हें समय देना चाहिए, वे फिर एक साथ होंगे.

हालांकि रोशन खानदान के एक सदस्य ने दोनों के सुलह की सभी बातों को खारिज कर दिया और कहा कि पूर्व जोड़ी को एक साथ फिर से देखना काफी हास्यास्पद होगा. दोनों ने बच्चों के लिए एक साथ मिलने-जुलने और समय बिताने की सहमति जताई थी, जैसा कि अब देखा जा रहा है. पैरेंट्स होने के नाते यह उनका कर्तव्य बनता है. फिलहाल ऋतिक और सुजैन दोनों ही अपनी लाइफ अलग-अलग जी रहे हैं.

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GST : नये साल में मिलेगी नई राहत, पेट्रोल-डीजल समेत होंगे ये 5 बड़े बदलाव

देश की टैक्स नीति के लिए साल 2017 काफी अहम रहा. इस साल न सिर्फ नई टैक्स नीति गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू किया गया, बल्क‍ि इसमें कई बदलाव भी किए गए. मोदी सरकार ने जीएसटी के तहत आम आदमी को राहत देने के लिए कई  उत्पादों का रेट घटाया. कारोबारियों के लिए भी रिफंड क्लेम करने का काम आसान कर दिया गया है.

नये साल में जीएसटी आम आदमी के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने का काम करेगी. अगले साल जहां जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना तय माना जा रहा है. वहीं, अर्थव्यवस्था के नये साल में जीएसटी के साइड इफेक्ट से उभरने की उम्मीद भी जताई जा रही है. आगे जानिए नये साल में जीएसटी आपके लिए क्या तोहफे ला सकती है.

सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल

नये साल में जीएसटी आम आदमी को सस्ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा दे सकती है. गुरुवार को बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने भी इस ओर संकेत‍ किया. इस साल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने के लिए ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नितिन गडकरी ने आवाज उठाई थी. इन नेताओं ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर लगाम कसने के लिए जीएसटी ही एकमात्र रास्ता है. सुशील मोदी का कहना है कि अगले साल बिजली भी जीएसटी के दायरे में आ सकती है.

सभी राज्य राजी, बस सही वक्त का है इंतजार

अक्टूबर महीने में महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगटीवार ने कहा था कि सभी राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की अनुमति दे दी है. उनके मुताबिक अब इन उत्पादों को इसके तहत लाने के लिए हमें सही वक्त का इंतजार करना होगा. उम्मीद जताई जा रही थी कि जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में इसको लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है, लेक‍िन ऐसा हुआ नहीं.

45 रुपये प्रति लीटर  हो जाएगा पेट्रोल

अब उम्मीद जताई जा रही है कि नये साल में जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल कर ही लेगी. अगर ऐसा होता है, तो आपको एक लीटर पेट्रोल करीब 45 रुपये में मिल सकेगा. डीजल की कीमत भी इसके आसपास रहने की संभावना है. दरअसल जीएसटी के तहत आने से कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सकेगा.

सस्ता होगा घर खरीदना

वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है. सुशील मोदी ने भी इस बात को दोहराया है. जेटली के मुताबिक इससे न सिर्फ आम आदमी को सस्ता घर खरीदने में मदद मिलेगी, बल्क‍ि यह कर चोरी पर भी लगाम कसने में मददगार साबित होगा.

कर चोरी पर लगेगी लगाम

जेटली के मुताबिक सबसे ज्यादा कर चोरी रियल इस्टेट क्षेत्र में ही होती है. अगर इसे जीएसटी के दायरे में ला दिया जाता है, तो कर चोरी पर काफी हद तक लगाम कसी जा सकती है. इस पर भी जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में फैसला लिये जाने की संभावना जताई जा रही थी, लेक‍िन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद नये साल में रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाना तय है.

टैक्स स्लैब होंगे कम

आने वाले नये साल में जीएसटी के तहत टैक्स स्लैब को घटाकर सिर्फ दो पर ही सीमित किया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में मौजूदा 5 टैक्स स्लैब को 2 में ही सीमि‍त किया जा सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब को खत्म किया जा सकता है. इसकी जगह सिर्फ 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब रखे जा सकते है.

वहीं, सुशील मोदी ने कहा है कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब की जगह 25 फीसदी अध‍िकतम स्लैब रहेगा.  अगर ऐसा होता है, तो आपके लिए 28 फीसदी में शामिल कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. जीएसटी परिषद अगली बैठक में कई उत्पादों का जीएसटी रेट भी कम कर सकती है. इससे अन्य कई उत्पादों पर भी आम आदमी को राहत मिलने की उम्मीद है.

कारोबारियों के लिए होगी राह आसान

जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में कारोबारियों को कई दिक्कतें पेश आ रही हैं. अभी भी छोटे कारोबारियों के मन में जीएसटी को लेकर कई उलझने हैं. उन्हें जीएसटी रिटर्न भरने में दिक्कतें पेश आ रही हैं. इन्हीं सभी दिक्कतों का समाधान ढूंढ़ने के लिए सरकार लगातार नई-नई चीजें ला रही है. हाल ही में सरकार ने जीएसटीएन नेटवर्क पर ऑफलाइन टूल जारी किया है.

ऑनलाइन होंगे सभी काम

इस ऑफलाइन टूल की मदद से कारोबारी अपने पूरे कारोबार और उस पर  लगने वाले जीएसटी का हिसाब-किताब आसानी से रख सकेंगे. इसके अलावा सरकार लगातार जीएसटी रिटर्न और रिफंड भरने में यूज किए जाने वाले फॉर्म्स भी कम करेगी. जीएसटी रिफंड समेत अन्य प्रक्र‍ियाओं को भी ऑनलाइन किए जाने की योजना है. अगले साल इस मोर्चे पर सरकार तेजी से काम कर सकती है.

सुधरेगी अर्थव्यवस्था

मॉर्गन स्टेनली, आईएमएफ और विश्व बैंक समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार कहती आ रही हैं कि नया साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर साबित होगा. मॉर्गन स्टेनली की मानें तो अगले साल जीडीपी की वृद्ध‍ि दर 7.5 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसी तरह विश्व बैंक और आईएमएफ समेत अन्य संस्थाओं ने भी अगला साल नोटबंदी और जीएसटी के असर को खत्म करने वाला बताया है.

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उत्तराखण्ड में बिजली दरें बढ़ाने की तैयारी, जानिए कितना बढ़ेगा भार

राज्य में बिजली दरों को बढ़ाने की तैयारी है। सोमवार को ऊर्जा निगम की बोर्ड बैठक में यह फैसला किया गया। प्रस्तावित टैरिफ का प्रस्ताव अब विद्युत नियामक आयोग को भेजा जाएगा। नियामक आयोग इस पर अंतिम फैसला लेगा।

ऊर्जा निगम मुख्यालय में सोमवार को नई बिजली दरों को लेकर हुई बोर्ड बैठक में ऊर्जा निगम प्रबंधन ने कहा कि पावर सप्लाई सिस्टम को सामान्य बनाने में बहुत अधिक खर्च हो रहा है। उस अनुरूप बिजली बिल नहीं मिल पा रही है। बिजली की दरें खर्च की अपेक्षा बहुत कम है। दूसरी ओर यूजेवीएनएल बोर्ड ने 8 फीसदी व पिटकुल बोर्ड ने 5 फीसदी टैरिफ को बढ़ाने की मंजूरी दी। कुल साढ़े 13 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी है।

बिजली सभी के लिए महंगी करने का प्रस्ताव 

बिजली के दामों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आवासीय, व्यावसायिक, उद्योग समेत सभी वर्गों के लिए है। ऊर्जा निगम प्रबंधन की ओर से अब इस प्रस्ताव को विद्युत नियामक आयोग को भेजा जाएगा। बोर्ड बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, एमडी बीसीके मिश्रा आदि मौजूद रहे।

प्रदेश भर में होंगी सुनवाई 

ऊर्जा निगम की ओर से बिजली दरों में साढ़े 13 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव का नियामक आयोग पहले तकनीकी व वित्तीय आधार पर परीक्षण करेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में कई स्थानों में प्रस्तावित दरों पर आम जनता से आपत्ति व सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद मार्च अंतिम सप्ताह में आयोग की ओर से वर्ष 2018-19 की दरों की घोषणा की जाएगी।

करंट लगने पर मुआवजा दोगुना 

करंट लगने से होने वाली मौत पर आश्रितों को अब मुआवजा दोगुना मिलेगा। यूपीसीएल बोर्ड ने मुआवजा दो लाख से बढ़ा कर चार लाख रुपये किए जाने को मंजूरी दी। इस मुआवजे का लाभ यूपीसीएल के उपनल कर्मचारी, स्वयं सहायता समूह के कर्मचारियों समेत आम जनता को भी मिलेगा।

नये सब स्टेशनों को मंजूरी 

ऊर्जा निगम बोर्ड बैठक में पॉवर सप्लाई सिस्टम को सुधारने के लिए मोथरोवाला, सिकंदरपुर रुड़की, हरिद्वार सिडकुल सेक्टर पांच, सेक्टर 11, आर्यनगर हरिद्वार, चौरास श्रीनगर में नये सब स्टेशन बनाने का फैसला लिया गया।

माजरा सब स्टेशन पर लोड होगा कम 

राजधानी दून के पॉवर सप्लाई सिस्टम को सुधारने के लिए 33 केवी के छह नये फीडर विकसित करने पर भी मुहर लगी। ये छह नये फीडर 220 केवी आईआईपी बिजलीघर से तैयार होंगे। 33 केवी के ये नये फीडर मियांवाला, रिंग रोड, अजबपुर, रायपुर, स्पोर्ट्स कालेज, आईआईपी के लिए विकसित होंगे। इन नये फीडरों से माजरा व पुरुकुल बिजली घर पर लोड कम होगा।

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लाजवाब है ‘न्यूटन’ की कहानी, जा रही है ऑस्कर

फिल्म का नाम: न्यूटन

डायरेक्टर: अमित मसूरकर

स्टार कास्ट: राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव

अवधि: 1 घंटा 46 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 4 स्टार

डायरेक्टर अमित मसूरकर ने सुलेमानी कीड़ा नामक फिल्म बनायी थी जिसकी क्रिटिक ने काफी तारीफ की थी. उसके बाद अब एक बार फिर से अमित मसूरकर ने भारत के चुनाव सिस्टम पर आधारित विषय पर अपना पक्ष रखते हुए ‘न्यूटन’ फिल्म की है. फिल्म में मंझे हुए कलाकारों की कास्टिंग भी हुए है.

कहानी

यह कहानी नूतन कुमार (राजकुमार राव) की है जिसने अपने लड़कियों वाले नाम को दसवीं के बोर्ड में ‘न्यूटन’ लिख कर बदल लिया है. अब सभी लोग उसे न्यूटन के नाम से ही जानते हैं. न्यूटन ने फिजिक्स में एमएससी की पढ़ाई की है. आगामी इलेक्शन में ड्यूटी लगती है जिसके लिए उसे जंगल के नक्सल प्रभावित इलाके में जाकर वोटिंग करवानी पड़ती है. इलेक्शन की तैयारी के लिए न्यूटन की हेल्प संजय मिश्रा करते हैं उसके बाद एक टीम जिसमें लोकनाथ (रघुबीर यादव), मालको (अंजलि पाटिल), पुलिस अफसर आत्मा सिंह (पंकज त्रिपाठी) जंगली इलाके की तरफ बढ़ती है जहां जाने पर पता चलता है की कुल मिलाकर वहां के 76 वोटर्स की चर्चा है लेकिन वोट वाले दिन कोई नहीं आता. कुछ वक्त के बाद चीजें बदलती हैं और अंततः एक ख़ास तरह का रिजल्ट सामने आता है जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

क्यों देख सकते हैं फिल्म

– फिल्म का डायरेक्शन लोकेशन सिनेमेटोग्राफी बहुत बढ़िया है.

– फिल्म की कहानी और डायलॉग्स बहुत ही कमाल के हैं और गंभीर मुद्दे पर आधारित इस कहानी के संवाद के लिए मयंक तिवारी की जितनी भी तारीफ की जाए कम है. बहुत ही जबरदस्त तरीके से इलेक्शन वोटिंग जैसे गंभीर मुद्दे को मनोरंजन से भरपूर डायलॉग्स के साथ परोसा गया है.

– इलेक्शन के दौरान तरह-तरह के चुनाव चिन्हों के साथ ही उम्मीदवारों के बारे में भी अलग तरह से बताया किया गया है जिसे देखकर हंसी आती हैं.

– फिल्म में राजकुमार राव ने एक बार फिर से अपनी उम्दा एक्टिंग से बता दिया है कि वो एक बेहतरीन कलाकर हैं, वहीँ उनके अपोजिट अलग तरह के पुलिस अफसर के रोल में पंकज त्रिपाठी ने बेहतरीन एक्टिंग की है. राजकुमार राव के साथ उनकी कैमि‍स्ट्री बहुत उम्दा है. वहीँ रघुबीर यादव ने भी मनोरंजन में कोई कमी नहीं छोड़ी है. अभिनेत्री अंजलि पाटिल का काम भी काफी सहज है और संजय मिश्रा की मौजूदगी आपके चेहरे पर मुस्कान जरूर लाती है.

कमजोर कड़ियां

इक्का दुक्का बातों को छोड़ दें तो फिल्म में ऐसी कोई बात नहीं है जो इसे कमजोर बनाती हो, हां इसमें आपको आइटम नंबर जैसी बातें नहीं मिलेगी और एक अलग तरह का क्लाइमेक्स देखने को मिलता है.

बॉक्स ऑफिस

प्रोडक्शन कॉस्ट और प्रोमोशन को मिलकर फिल्म का बजट लगभग 8-10 करोड़ बताया जा रहा है और फिल्म के लिए वर्ड ऑफ माउथ बहुत ही अहम रोल प्ले करेगा. फिल्म को 350 से ज्यादा स्क्रीन्स में रिलीज किया जाने वाला है.