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जीएसटी काउंसिल की 26वीं बैठक आज, हो सकते हैं ये 4 बड़े फैसले

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की आज 26वीं बैठक होनी है। इस अहम बैठक में रिटर्न प्रक्रिया को और आसान किए जाने समेत कई बड़े फैसलों पर आम सहमति बनने की संभावना है। हम अपनी इस खबर में उन्हीं बड़े फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर आज चर्चा हो सकती है।

GSTR-3B की डेडलाइन बढ़ सकती है: आज होने वाली अहम बैठक में पंजीकृत व्यवसायों के लिए रिटर्न फाइलिंग को और आसान किए जाने के लिए प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है। एक अधिकारी के मुताबिक, “नए रिटर्न फाइलिंग सिस्टम को अगर काउंसिल की ओर से सहमति मिलती है, तो इसके कार्यान्वित होने में लगभग 3 महीने का वक्त लग सकता है तब तक जीएसटीआर-3बी जारी रह सकता है।”जीएसटीआर 3बी फाइलिंग की डेडलाइन 31 मार्च 2018 है जिसे बढ़ाकर जून 2018 किया जा सकता है।

ई-वे बिल पर आ सकता है अहम फैसला: ई-वे बिल सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल है। ऐसा माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में वैट और एक्साइज के तर्ज पर प्रोविजनल इनपुट टैक्स क्रेडिट देने के विकल्प देने पर विचार करने के साथ ही ई-वे बिल की व्यवस्था को 1 अप्रैल से लागू होने को मंजूरी दी जा सकती है।

रिटर्न फाइलिंग को और आसान करने पर बन सकती है सहमति: केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल जिसमें अन्य राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियों के लिये सरल रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकती है। माना जा रहा है कि जीएसटी के तहत टैक्स रिटर्न भरने के लिए 3 की बजाय सिर्फ 1 ही फॉर्म भरने की व्यवस्था शुरू की जा सकती है।

ईएनए पर जीएसटी लगाने पर हो सकता है विचार: जीएसटी लागू होने के बाद परोक्ष कर संग्रह में अपेक्षानुरूप वृद्धि न होते देख सरकार अब खजाना भरने के लिए अतिरिक्त उपाय करने में जुट गयी है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्र शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रयास कर रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में शनिवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में ईएनए पर जीएसटी लगाने पर विचार किया जा सकता है। काउंसिल में अगर इस प्रस्ताव पर आम राय बनी तो ईएनए पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगाया जा सकता है।

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देश भर में जल्द सस्ती होगी शराब, GST काउंसिल की बैठक में होगा फैसला

शनिवार को गुड्स एंड सर्विस काउंसिल की 26वीं बैठक होने जा रही है। इस बैठक में काउंसिल कई अहम मुद्दों पर फैसला लेगी। जहां कारोबारियों को जीएसटी रिटर्न को 3बी के जरिए फाइल करने के लिए अनुमोदन मिल सकता है, वहीं शराब को भी जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है।

शराब होगी जीएसटी में शामिल
शराब को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में पहला कदम उठा सकती है। अगर आम राय बनती है तो राज्यों की ओर से प्रतिरोध के बावजूद एल्कोहल युक्त पेय बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्सट्रा न्यूट्रल एल्कोहल या ‘मानव के उपयोग वाले एल्कोहल’ को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है।

इससे व्हिस्की, रम और बियर आदि एल्कोहॉलिक पेय बनाए जाते हैं। शेष 30 प्रतिशत ईएनए का प्रयोग दवा या फिर सौंदर्य प्रसाधन बनाने के काम में लाया जाता है।एक्सट्रा न्यूट्रल एल्कोहल (ईएनए) पर जीएसटी लगाने की केंद्र सरकार की यह दूसरी कवायद है, जिस पर इस समय राज्य सरकारें कर लगाती हैं।

पीने वाले एल्कोहल को जीएसटी के बाहर रखा गया है, जबकि इसका कच्चा माल ईएनए अपरिभाषित क्षेत्र में है।

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53 सर्विसेज और 29 आइटम्स पर GST रेट घटा, अब पुरानी कारें और डायमंड भी हो जाएंगे सस्ते

जीएसटी काउंसिल ने गुरुवार को 53 सर्विसेज और 29 आइटम्स पर जीएसटी रेट घटाने का फैसला लिया। मीटिंग के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि काउंसिल ने जीएसटी रिटर्न फाइलिंग की प्रोसेस को आसान बनाने पर चर्चा की। हालांकि, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने पर कोई फैसला नहीं हो सका। नई टैक्स रेट 25 जनवरी से लागू होंगे। रिवाइज्ट रेट लागू होने से पुरानी कारें और डायमंड भी सस्ते हो जाएंगे। जीएसटी रेेट में बड़े पैमाने पर की गई कटौती से करीब 1000-1200 करोड़ रुपए का रेेेवेन्यू नुकसान होगा।

 

पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर टला फैसला 

– पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला फिलहाल पेंडिंग है, इसकी डिमांड काफी समय से हो रही है। जेटली ने कहा कि इस मसले पर मीटिंग में कोई चर्चा नहीं हुई। संभव है कि अगली मीटिंग में इस पर चर्चा हो।

 

 

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इन पर 28% से कम जीएसटी 
-बायो डीजल से चलनेवाली पुरानी बसें।
-पुराने लग्जरी यात्री वाहनों को छोड़कर सभी पुराने वाहनों पर जीएसटी 28 से घटकर 12 प्रतिशत होगी।

इन सामानों पर 18 से घटकर 5% 
-इमली बीज पाउडर।
-कोन में पैक मेंहदी।
-निजी रसोई गैस आपूर्तिकताओं द्वारा रसोई गैस की आपूर्ति।
-प्रक्षेपण वाहन, उपग्रह और पेयलोड के लिए आवश्यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपकरण, असेसरीज, कलपुर्जे, स्पयेर टूल्स।

12 से घटकर 5% जीएसटी 
-वेल्वेट फैब्रिक पर भी जीएसटी 12 प्रतिशत से कम कर पांच प्रतिशत हो जाएगी।

इन पर 18 % से घटकर 12% 
-चीनी वाली कंफेक्शनरी।
-20 लीटर के जार में बंद पेयजल।
-उर्वरक योग्य फॉस्फेरिक एसिड।
-बायो डीजल।
-12 तरह के बॉयो कीटनाशक।
-बांस के घर बनाने के लिए उपयोगी कनेक्टर।
-ड्रिप सिंचाई उपकरण और मैकेनिकल स्प्रेयर।

हीरे और कीमती पत्थर पर टैक्स में कटौती
हीरे और कीमती पत्थरों पर जीएसटी की दर को तीन फीसदी से कम कर 0.25 प्रतिशत कर दिया गया है।

टैक्स फ्री हुए ये सामान
– कान की मशीनों के निमार्ण के लिए उपकरण।

-तेल निकाला हुआ चावल का छिलका।
-हस्तशिल्प उत्पादों की श्रेणी में शामिल 40 वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं।

 

बढ़ गया टैक्स 
-बिना तेल निकाले गए चावल के छिलके पर जीएसटी दर शून्य से बढ़ाकर 5% हो गई।
-सिगरेट फिल्टर पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की गई है।

 

ये सेवाएं सस्तीं 
18% से घटकर 5% जीएसटी 
कपड़ों की सिलाई से जुड़ी सेवाओं पर।
चमड़े के सामान, फुटवियर का उत्पादन।

 

18% से घटकर 12% 
-मेट्रो और मोनो रेल निर्माण प्रॉजेक्ट।
-पेट्रोलियम पदार्थों और नैचरल गैस की माइनिंग, ड्रिलिंग सर्विसेज।
-पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के ट्रांसपोर्टेशन पर टैक्स क्रेडिट के साथ जीएसटी घटाकर 12% और टैक्स क्रेडिट के बिना 5% किया गया है।
-मिड डे मील के लिए बननेवाली बिल्डिंग पर 12 फीसदी जीएसटी।

 

28 से 18% 

-थीम पार्क, वॉटर पार्क, जॉय राइड, मेरी गो राउंड, गो कार्टिंग बैलेट जैसी सेवाओं पर 18% जीएसटी लगेगा, जो पहले 28% था।

 

इन सेवाओं पर भी राहत 
प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी वन और एमआईजी भवन के लिए घोषित क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम के तहत घर के निर्माण पर जीएसटी दरें कम होंगी।
सभी तरह के शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए फी और सेवाओं पर जीएसटी में छूट।
आरडब्ल्यूए मेंबर्स को दी जा रही सर्विसेज पर छूट सीमा 5000 रुपए से बढ़ाकर 7500 रुपए कर दी गई है।
छात्रों, शिक्षकों या स्टाफ के यातायात सेवाओं पर भी जीएसटी से छूट दी गई है, यह छूट हायर सेकंडरी तक ही लागू होगी।
आरटीआई ऐक्ट के तहत सूचना मुहैया करानेवाली सेवाओं को जीएसटी से छूट दे दी गई है।
भारत से बाहर प्लेन के जरिए सामान भेजने पर ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज को जीएसटी से छूट दी गई है।
समुद्री जहाज से सामान भेजने पर भी छूट दी गई है। यह छूट 30 सितंबर, 2018 तक रहेगी।
क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए बननेवाले एयरपोर्ट को मिलनेवाली वाइबिलिटी गेप फंडिंग पर जीएसटी छूट की सीमा को 1 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है।

 

एंट्रेंस फीस पर भी नहीं लगेगा GST 

– सभी एजुकेशन इंस्‍टीट्यूट में एडमिशन या एग्‍जाम कराने के लिए दी जा रही सर्विसेस को GST से छूट दे दी गई है। उन्‍हें एंट्रेंस इग्‍जाम के लिए ली जाने वाली एंट्रेंस फीस पर भी जीएसटी से छूट दी गई है।

-स्‍टूडेंट्स, फैकल्‍टी या स्‍टाफ को ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज पर भी जीएसटी से छूट दी गई है, लेकिन यह छूट हायर सेकेंडरी तक के एजुकेशनल इंस्‍टीट्यूट को दी गई है।

 

राइस ब्रान पर लगेगा टैक्स 

– राइस ब्रान पर टैक्स रेट बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है, जिस पर पहले कोई टैक्स नहीं था। इसके अलावा डि-ऑयल्ड राइस ब्रान पर रेट शून्य कर दिया गया।

 

रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने पर हुई चर्चा 

-मीटिंग के दौरान छोटे कारोबारियों पर से कंप्लायंस का बोझ कम करने के लिए जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रोसेस को आसान बनाने पर भी चर्चा हुई।

-इस क्रम में ऐसा सिस्टम बनने तक जीएसटीआर 3बी में रिटर्न फाइलिंग को जारी रहने पर सहमति बनी, जहां सप्लायर इनवॉइस में ट्रांजैक्शन की डिटेल शामिल हो।

-जेटली ने कहा कि नए प्रोसेस को जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए राज्यों के बीच लिखित फॉर्म्यूलेशन बांट दिया गया है। काउंसिल की अगली मीटिंग की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

 

केंद्र और राज्यों के बीच बंटेंगे IGST के 35 हजार करोड़ 

– जेटली ने आगे कहा कि मीटिंग में आईजीएसटी में क्रेडिट लाइन की भारी धनराशि के मसले पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जीएसटी पैनल ने आईजीएसटी कलेक्शन के 35 हजार करोड़ रुपए को केंद्र और राज्यों के बीच बांटने का फैसला किया।

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GST : नये साल में मिलेगी नई राहत, पेट्रोल-डीजल समेत होंगे ये 5 बड़े बदलाव

देश की टैक्स नीति के लिए साल 2017 काफी अहम रहा. इस साल न सिर्फ नई टैक्स नीति गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू किया गया, बल्क‍ि इसमें कई बदलाव भी किए गए. मोदी सरकार ने जीएसटी के तहत आम आदमी को राहत देने के लिए कई  उत्पादों का रेट घटाया. कारोबारियों के लिए भी रिफंड क्लेम करने का काम आसान कर दिया गया है.

नये साल में जीएसटी आम आदमी के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने का काम करेगी. अगले साल जहां जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना तय माना जा रहा है. वहीं, अर्थव्यवस्था के नये साल में जीएसटी के साइड इफेक्ट से उभरने की उम्मीद भी जताई जा रही है. आगे जानिए नये साल में जीएसटी आपके लिए क्या तोहफे ला सकती है.

सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल

नये साल में जीएसटी आम आदमी को सस्ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा दे सकती है. गुरुवार को बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने भी इस ओर संकेत‍ किया. इस साल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने के लिए ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नितिन गडकरी ने आवाज उठाई थी. इन नेताओं ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर लगाम कसने के लिए जीएसटी ही एकमात्र रास्ता है. सुशील मोदी का कहना है कि अगले साल बिजली भी जीएसटी के दायरे में आ सकती है.

सभी राज्य राजी, बस सही वक्त का है इंतजार

अक्टूबर महीने में महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगटीवार ने कहा था कि सभी राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की अनुमति दे दी है. उनके मुताबिक अब इन उत्पादों को इसके तहत लाने के लिए हमें सही वक्त का इंतजार करना होगा. उम्मीद जताई जा रही थी कि जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में इसको लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है, लेक‍िन ऐसा हुआ नहीं.

45 रुपये प्रति लीटर  हो जाएगा पेट्रोल

अब उम्मीद जताई जा रही है कि नये साल में जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल कर ही लेगी. अगर ऐसा होता है, तो आपको एक लीटर पेट्रोल करीब 45 रुपये में मिल सकेगा. डीजल की कीमत भी इसके आसपास रहने की संभावना है. दरअसल जीएसटी के तहत आने से कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सकेगा.

सस्ता होगा घर खरीदना

वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है. सुशील मोदी ने भी इस बात को दोहराया है. जेटली के मुताबिक इससे न सिर्फ आम आदमी को सस्ता घर खरीदने में मदद मिलेगी, बल्क‍ि यह कर चोरी पर भी लगाम कसने में मददगार साबित होगा.

कर चोरी पर लगेगी लगाम

जेटली के मुताबिक सबसे ज्यादा कर चोरी रियल इस्टेट क्षेत्र में ही होती है. अगर इसे जीएसटी के दायरे में ला दिया जाता है, तो कर चोरी पर काफी हद तक लगाम कसी जा सकती है. इस पर भी जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में फैसला लिये जाने की संभावना जताई जा रही थी, लेक‍िन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद नये साल में रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाना तय है.

टैक्स स्लैब होंगे कम

आने वाले नये साल में जीएसटी के तहत टैक्स स्लैब को घटाकर सिर्फ दो पर ही सीमित किया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में मौजूदा 5 टैक्स स्लैब को 2 में ही सीमि‍त किया जा सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब को खत्म किया जा सकता है. इसकी जगह सिर्फ 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब रखे जा सकते है.

वहीं, सुशील मोदी ने कहा है कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब की जगह 25 फीसदी अध‍िकतम स्लैब रहेगा.  अगर ऐसा होता है, तो आपके लिए 28 फीसदी में शामिल कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. जीएसटी परिषद अगली बैठक में कई उत्पादों का जीएसटी रेट भी कम कर सकती है. इससे अन्य कई उत्पादों पर भी आम आदमी को राहत मिलने की उम्मीद है.

कारोबारियों के लिए होगी राह आसान

जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में कारोबारियों को कई दिक्कतें पेश आ रही हैं. अभी भी छोटे कारोबारियों के मन में जीएसटी को लेकर कई उलझने हैं. उन्हें जीएसटी रिटर्न भरने में दिक्कतें पेश आ रही हैं. इन्हीं सभी दिक्कतों का समाधान ढूंढ़ने के लिए सरकार लगातार नई-नई चीजें ला रही है. हाल ही में सरकार ने जीएसटीएन नेटवर्क पर ऑफलाइन टूल जारी किया है.

ऑनलाइन होंगे सभी काम

इस ऑफलाइन टूल की मदद से कारोबारी अपने पूरे कारोबार और उस पर  लगने वाले जीएसटी का हिसाब-किताब आसानी से रख सकेंगे. इसके अलावा सरकार लगातार जीएसटी रिटर्न और रिफंड भरने में यूज किए जाने वाले फॉर्म्स भी कम करेगी. जीएसटी रिफंड समेत अन्य प्रक्र‍ियाओं को भी ऑनलाइन किए जाने की योजना है. अगले साल इस मोर्चे पर सरकार तेजी से काम कर सकती है.

सुधरेगी अर्थव्यवस्था

मॉर्गन स्टेनली, आईएमएफ और विश्व बैंक समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार कहती आ रही हैं कि नया साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर साबित होगा. मॉर्गन स्टेनली की मानें तो अगले साल जीडीपी की वृद्ध‍ि दर 7.5 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसी तरह विश्व बैंक और आईएमएफ समेत अन्य संस्थाओं ने भी अगला साल नोटबंदी और जीएसटी के असर को खत्म करने वाला बताया है.