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अच्छी खबर करिश्माई खेती की: डेढ़ लाख लगाकर इस किसान ने 70 दिन में कमाए 21 लाख रुपये

गुजरात के बनासकांठा जिले में एक सातवीं पास किसान सुर्खियों में छाया हुआ है. दरअसल, उसने फसल उगाने की ऐसी तरकीब अपनाई कि महज 70 दिन में 21 लाख रुपये का मुनाफा कमा लिया.

इस किसान का नाम है खेताजी सोलंकी. उसने अपने सात बीघा के खेत में आलू की जगह खरबूजे की फसल बोने का फैसला किया, लेकिन इसमें उन्होंने आधुनिक तकनीकों की मदद ली.

खेताजी सोलंकी ने बेहतर बीज, टपक सिंचाई और सोलर वॉटर पंप का इस्तेमाल किया. उनके खेत में 140 टन खरबूजा पैदा हुए. उन्होंने 1.21 लाख रुपये खर्च किए थे. पैदावार इतनी अच्छी थी कि उन्हें उसे बेचने के लिए कहीं जाना भी नहीं पड़ा बल्कि दूसरे राज्यों से व्यापारी उनके पास आकर खरबूजा खरीदकर ले गए. उन्हें इसके काफी अच्छे पैसे मिले. फरवरी में लगाई फसल अप्रैल में तैयार हो गई और 70 दिन में उन्होंने 21 लाख रुपये कमा लिए.

 

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2017 में पीएम मोदी की 6-1 से बंपर जीत, कमलमय हुए ये प्रदेश

21 वीं सदी का 17 वां साल दस्तक दे रहा था और इसके साथ ही इस वर्ष को अनेकों राजनीतिक घटनाओं का गवाह भी बनना था। राजनीतिक तौर पर साल 2017 के सभी महीने किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहे। लेकिन फरवरी-मार्च के साथ नवंबर और दिसंबर का महीना कुछ राजनीतिक दलों के लिए जहां खुशी का लमहा लेकर आया तो कुछ के हिस्से में सिर्फ दुख और दर्द आया। कुछ राजनीतिक दलों और शख्सियतों को आत्मावलोकन की सीख दे गया तो कुछ के लिए ये संदेश कि सफलता को महफूज रखने के लिए आप को लगातार कोशिश करनी होगी। 2017 के जनवरी से दिसंबर के कालखंड में हम पीएम मोदी के उस प्रभामंडल की चर्चा करेंगे जिसका असर देश के सात सूबों में होने वाले चुनाव परिणाम में दिखा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा 14 साल का वनवास खत्म
जनवरी और फरवरी में उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड थी। लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजां में गरमी थी। राजनीतिक दल अवध पर कब्जे की तैयारी कर रहे थे। अवध पर कब्जे की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ के जरिए जाता है और जिसके हाथ से लखनऊ फिसला वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का सिर्फ सपना ही देख सकता है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार अपने काम के दम और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर समाजवादी झंडे को निर्बाध फहराने की तैयारी कर रही थी। इसके साथ ही केसरियां रंग भी यूपी को अपने रंग में सराबोर करने की तैयारी में था। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों से अथक और अकथ कोशिश की गई। चुनाव प्रचार चरम पर था और राजनीतिक दल अपनी तरकश से एक से बढ़कर एक तीर के जरिए एक दूसरे पर निशाना साध रहे थे।


भाजपा जहां 14 साल के वनवास को खत्म करने के लिए अपने आपको मौका देने की मांग कर रही थी। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता यूपी के लड़के करेंगे विकास का नारा बुलंद कर रहे थे। पीएम मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक थे। वो लोगों से अपील कर रहे थे कि ये लड़ाई ईमानदारों और भ्रष्टाचारियों के बीच की है। वो ये भी कहा करते थे कि यूपी की जनता वंशवाद,जातिवाद से तंग आ चुकी है। इसके साथ ही इन नेताओं की अपील का कितना असर पड़ेगा इसे लेकर राजनीतिक टीकाकार अलग अलग ढंग से भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो वो सभी के अनुमानों से जुदा था। यूपी की जनता ने अपना मत दे दिया था, देश का सबसे बड़ा सूबा अब उस राह पर चलने को तैयार था जो केसरिया रंग में रंग चुका था।

उत्तराखंड में प्रचंड विजय
उत्तर प्रदेश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड में चुनाव का आगाज हो चुका था। उत्तराखंड में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार दोबारा सरकार बनाने की तैयारी के साथ चुनाव मैदान में थी। लेकिन भाजपा देवभूमि की जनता को ये समझा रही थी कि किस तरह से कांग्रेस शासन में उत्तराखंड विकास की पटरी से उतर गया था। एक तरफ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनमत को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश करते रहे, वहीं भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी ने कहा कि एक ऐसी पार्टी के हाथ में आप सत्ता कैसे सौंप सकते हैं जिसका दामन दागदार है। देवभूमि की धरती पर दोनों दल अपने अपने अंदाज में एक दूसरे की वादों और दावों की धज्जियां उड़ा रहे थे। लेकिन जन का मत कुछ और ही था। इवीएम से जब परिणाम बाहर आने शुरू हुए तो नतीजे प्रत्याशित लेकिन चौंकाने वाले थे। देवभूमि की जनता का फैसला सार्वजनिक हो चुका था और केसरिया झंडा मैदान से लेकर पहाड़ तक फहर रहा था।

गोवा और मणिपुर बनाई सरकार
यूपी और उत्तराखंड के साथ पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और समुद्र के किनारे स्थित गोवा में भी चुनावी सरगर्मी तेज थी। भाजपा के विरोधी पणजी में जोरशोर से नोटबंदी के मुद्दे को उठा रहे थे। गोवा में विरोधी दल अपने तर्कों से समझाने की कोशिश कर रहे थे कि किस तरह से नोटबंदी ने गोवा की रीढ़ (पर्यटन व्यवसाय) को तोड़ दी है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी कहते रहे कि उनकी लड़ाई गरीबों के लिए है। नोटबंदी के समर्थन में उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। लेकिन गरीबों की पीड़ा को कम करने के लिए इस तरह का कदम उठाना जरुरी था। गोवा और मणिपुर में भाजपा-कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर में भाजपा भारी पड़ी और गोवा के साथ मणिपुर में कमल खिलने में कामयाब रहा।

पंजाब में  कांग्नेस को मिली कामयाबी
यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ ही पंजाब में विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार परवान चढ़ चुका था। पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस और आप मोर्चा खोले थी। कांग्रेस के नेता इस तथ्य को वहां की जनता के सामने रख रहे थे कि कैसे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में पंजाब नशे की गिरफ्त में आ गया। कांग्रेस और आप के नेता जनता को ये बताने में कामयाब रहे कि पंजाब का भला सिर्फ कांग्रेस सोचती है और मौका मिलने पर वो प्रदेश को तरक्की के राह पर ले जायेंगे। पंजाब की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया और सत्ता अमरिंदर सिंह के हाथों सौंप दी।


कमलमय हुआ गुजरात

साल 2017 के पहले तीन महीनों में देश के इन सूबों में चुनावी शोर खत्म हो चुका था। देश की राजनीति किसी और बड़ी घटना की गवाह बनने वाली थी। एक जुलाई 2017 को भारत एक बाजार में बदल चुका था। एक राष्ट्र और एक कर के जरिए जीएसटी को लाया जा चुका था। ठीक उसके बाद पीएम के गृहराज्य गुजरात और देवभूमि हिमाचल में विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी। राजनीति के जानकारों का मानना था कि गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के लिए लिटमस टेस्ट होगा। इसके साथ ही कई जानकारों का कहना था कि गुजरात में पाटीदार, दलित और पिछड़ो के मुद्दे पर मौजूदा भाजपा सरकार बैकफुट पर है। यही नहीं जीएसटी का फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी कहा करते थे कि केंद्र की मोदी सरकार महज कुछ लोगों के फायदे के लिए सोचती है। ये बात अलग है कि इवीएम से निकले हुए परिणाम कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे। गुजरात में छठी बार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन चुनाव नतीजे कुछ संकेत भी दे गए।

देवभूमि हिमाचल में खिला कमल
इसके साथ ही देवभूमि हिमाचल में कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में भ्रष्टाचार का मामला छाया रहा। भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी लोगों तक ये छाप छोड़ने में कामयाब रहे कि कांग्रेस का मतलब ही भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए वीरभद्र की सरकार से छुटकारा पाना ही होगा। कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी लड़ाई में जनता ने अपने नायक पीएम मोदी पर भरोसा किया और राज्य की कमान भाजपा के हाथों में सौंप दी।

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विजय रूपाणी चुने गए गुजरात के मुख्‍यमंत्री, नितिन पटेल होंगे उप मुख्‍यमंत्री

गुजरात में विजय रूपाणी को राज्‍य का अगला मुख्‍यमंत्री चुन लिया गया है. साथ ही नितिन पटेल को उप मुख्‍यमंत्री चुना गया है. पार्टी विधायकों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. केंद्रीय पर्यवेक्षक अरुण जेटली और सरोज पांडे की मौजूदगी में यह फैसला हुआ. इससे पहले 5 नेता मुख्‍यमंत्री पद की रेस में थे जिनमें विजय रूपाणी के अलावा नितिन पटेल, पुरुषोत्तम रूपाला, मनसुख मांडविया और वजूभाई वाला शामिल थे. और अंतत: रूपाणी के नाम पर मुहर लग गई. इससे पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी की सीटें कम होने से रूपाणी की कुर्सी जा सकती है. सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि सोमवार को नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होगा.

कौन हैं विजय रूपाणी
विजय भाई रूपाणी का जन्म बर्मा में हुआ था. वह 61 साल के हैं. 1960 में बर्मा में राजनीतिक उथल-पुथल के चलते उनका परिवार राजकोट आ गया था.  उन्होंने सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई की. एबीवीपी और RSS से जुड़े रहे. इमरजेंसी के दौरान वह 11 महीने जेल भी गए. 1996-97 के बीच वह राजकोट शहर के मेयर भी रहे. मुख्यमंत्री बनने से पहले वह गुजरात प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष भी रहे. आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री थीं तब वह परिवहन और वाटर सप्लाई के मंत्री थे. 7 अगस्त 2016 से वह गुजरात के मुख्यमंत्री हैं. राजकोट पश्चिम से वह चुनाव लड़ते हैं और जीतते आए हैं. जैन समाज से आते हैं, उनके दो बेटे और एक बेटी है.

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गुजरात-हिमाचल में मिली जीत पर भाजपा में जोश, नेताओं ने दी ऐसी प्रतिक्रियाएं

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे एक-एक कर आने लगे हैं। इसमें एक बार फिर गुजरात में भाजपा सत्ता पर काबिज होती दिख रही है।

राज्य की 182 सीटों में से भाजपा 99 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं साल 1995 से सत्ता से दूर कांग्रेस 80 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है।

दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है। ऐसे में भाजपा नेताओं में इसे लेकर खुशी है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर चुटकी ली। उन्होंने पार्टी के बेहतर प्रदर्शन पर कहा कि- ‘ मैंने पहले ही कहा था कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन भाजपा के पक्ष में जाएगा।

वहीं सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोनों राज्यों की जनता ने कांग्रेस की बांटने की राजनीति को नकार दिया है। वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत और कुशल नेतृत्व की बदौलत पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है।

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी पार्टी नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ये विकास की जीत है। वहीं कांग्रेस की तरफ से कड़ी टक्कर मिलने की बात पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस जीत में बूथ पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का रोल सबसे अहम है।

भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि भाजपा सरकार बनाने जा रही है और राज्य के लोगों ने विकास के मुद्दे पर ही पार्टी को वोट दिया है। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राज्य में ये पहला विधानसभा चुनाव है।

गुजरात के सीएम विजय रुपाणी ने कहा कि यह गुजरात के लोगों की जीत है।

“I would like to give credit for this victory to the people of Gujarat, also give assurance that in the coming 5 years BJP will work towards what the people of the state want” says Gujarat CM Vijay Rupani

वहीं हिमाचल में बीजेपी के सीएम उम्मीद्वार प्रेम कुमार धूमल के हारने पर केन्द्रीय मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान ने कहा कि हम सब उनके हारने से दुखी हैं लेकिन लोगों ने बीजेपी को वोट दिया इसलिए खुशी भी है।

आपको बता दें कि गुजरात की 182 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ था। पहले चरण के लिए 9 दिसंबर को वोट डाले गए थे। इस दौरान 89 सीटों के लिए वोटिंग हुई थी। 14 दिसंबर को उत्तर और मध्य गुजरात के 93 सीटों के लिए वोटिंग हुई थी।

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गुजरात चुनाव परिणाम: राज्य में फिर खिला कमल, भाजपा बनाएगी सरकार

गुजरात विधानसभा चुनावों की मतगणना लगभग पूरी हो चुकी है और अब तक आए नतीजों के अनुसार भाजपा एक बार फिर से राज्य में सरकार बनाने जा रही है। खबर लिखे जाने तक भाजपा ने 99 सीटों पर जीत दर्ज कर ली थी वहीं कांग्रेस 80 सीटें जीत चुकी थी। अन्य के खाते में 3 सीटें गईं। राज्य में 22 साल सत्ता में रहने के बाद भाजपा की इस जीत को भाजपा नेता ऐतिहासिक करार दे रहे हैं वहीं कांग्रेस हार के बावजूद इसे अपनी जीत बता रही है।

सुबह शुरू हुई मतगणना के बाद जैसे-जैसे नतीजे आने लगे भाजपा में जीत की खुशी की लहर दौड़ने लगी और पार्टी समर्थक पार्टी दफ्तर के बाहर एकत्रित हो गए और मिठाई के साथ खमण ढोकला बांटने का सिलसिला शुरू हो गया ।

इस चुनाव में कई दिग्गज हार गए जिनमें कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल भी शामिल हैं। इसके पहले शुरुआती रुझानों में कांग्रेस ने एक बार बड़ी टक्कर देते हुए भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। एक वक्त कांग्रेस ने 88 सीटों पर बढ़त बना ली थी और भाजपा पीछे रह गई थी लेकिन कुछ देर बाद भाजपा की स्थिति सुधरने लगी। अब तक आए 182 रुझानों में जहां भाजपा 105 सीटों पर आगे है वहीं कांग्रेस 75 सीटों पर पिछड़ गई है। जानकारी के अनुसार उत्तर गुजरात में जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है वहीं मध्य और दक्षिण गुजरात में भाजपा ने बढ़त बना रखी है।

 

फिलहाल मतगणना जारी है और धीरे-धीरे तस्वीर साफ होती जा रही है। इसे देखकर माना जा रहा है कि भाजपा एक बार फिर से गुजरात में जीत का जश्न मानएगी।

बता दें कि पिछले दिनों आए सभी एग्जिट पोल्स में गुजरात में भाजपा की सरकार का अनुमान जताया गया है। हालांकि इसके बावजूद कांग्रेस अपनी जीत के दावे कर रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव के यह नतीजे पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में उनकी व भाजपा की प्रतिष्ठा का और नए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहली अग्नि परीक्षा का फैसला करेंगे।

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मोदी ने किया मनसुख काका का जिक्र: बोले- बधाई, उन्होंने मनमोहन को सच्चाई बता दी

नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ राजकोट में हुई घटना का जिक्र किया। दरअसल, राजकोट में मनसुख भाई नाम के एक बुजुर्ग शख्स ने मनमोहन को रोककर उन्हें यूपीए सरकार के दौरान हुए करप्शन की एक किताब थमा दी थी। मनसुख ने मनमोहन से सवाल किया- आप अपनी सरकार के दौरान हुए घोटालों पर क्यों नहीं बोलते? मोदी ने बनासकांठा के भाबर में इस घटना का जिक्र किया। कहा- मनसुख काका को बधाई। उन्होंने मनमोहन को सच्चाई बता दी। बता दें कि मनसुख के सवाल पर मनमोहन ने बिना कोई जवाब दिए बस हाथ जोड़ लिए थे।

मोदी ने क्या कहा?

– मोदी ने कहा- आप जानते हैं राजकोट में क्या हुआ? डॉक्टर मनमोहन सिंह मीडिया से मिले और इसके बाद एक बुजुर्ग शख्स मनसुख काका उनसे मिलने पहुंच गए। उन्होंने मनमोहन सिंह को यूपीए सरकार के दौरान हुए घोटालों की एक किताब सौंप दी। मैं मनसुख काका को बधाई देता हूं। उन्होंने सच्चाई और ईमानदार सरकार के लिए आवाज उठाई।

– पूर्व पीएम मनमोहन सिंह राजकोट में थे। वह सभास्थल से लौट रहे थे, तभी बुजुर्ग मनसुखभाई ने उन्हें आवाज लगाई। मनमोहन रुके तो मनसुख ने उन्हें एक किताब दिखाकर कहा कि आपके शासन में करोड़ों रुपए के घोटाले हुए, आप उन पर क्यों नहीं बोले? इस पर मनमोहन ने हाथ जोड़ लिए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बोला बीजेपी पर हमला

1) आर्थिक नीतियों की आलोचना की
– मनमोहन सिंह ने राजकोट में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की। खासकर नोटबंदी और जीएसटी को गलत बताया।
– उन्होंने कहा- “नरेंद्र मोदी ने गुजरातियों के भरोसे को तोड़ने के साथ उन्हें धोखा भी दिया है। गुजरात की जनता ने नोटबंदी के मोदी जी के फैसले का यह सोच का समर्थन किया कि उनके त्याग से शायद देश को फायदा हो जाए पर ऐसा नहीं हुआ। उनकी उम्मीदें और भरोसा टूट गया। 99% पुराने नोट बैंक में आ गए और काले धन को सफेद बना लिया गया।”
– “इससे छोटे और मझोले उद्योगों को सबसे तगड़ी चोट लगी और लाखों नौकरियां चली गईं, जबकि नई नौकरियों के मौके नहीं बन रहे।”

2) मोदी करप्शन पर कार्रवाई करें
– मनमोहन ने कहा- “उनकी यूपीए सरकार के दौरान करप्शन के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होती थी और अगर मोदी जी भी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के दावे करते हैं तो उन्हें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी पर लगे आरोपों समेत अन्य आरोपों की जांच करानी चाहिए।”

3) राम मंदिर पर कुछ भी कहने से इनकार किया
– मनमोहन सिंह ने राम मंदिर से जुड़े एक सवाल पर केवल यही कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसलिए वह इस पर वह कुछ नहीं कहना चाहते। कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह मान्य होगा।

4) नर्मदा प्रोजेक्ट को लेकर मोदी मुझसे कभी नहीं मिले
– सिंह ने कहा- जहां तक मुझे ध्यान है, नर्मदा प्रोजेक्ट को लेकर मोदी मुझसे प्रधानमंत्री रहते कभी नहीं मिले।

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गुजरात चुनाव में राम मंदिर की एंट्री: मोदी बोले, सिब्बल ने क्यों की सुनवाई टालने की मांग

राहुल गांधी के धर्म पर विवाद के बाद अब अयोध्या मसले की भी गुजरात के विधानसभा चुनाव में एंट्री हो गई है। बुधवार को अहमदाबाद के धांधुका में चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मसले पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। पीएम मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल द्वारा अयोध्या मसले पर सुनवाई टालने की मांग पर तीखा हमला बोला।

नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘ मुझे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि कपिल सिब्बल मुस्लिम समुदाय की तरफ से लड़ रहे हैं पर वह यह कैसे कह सकते हैं कि अगले चुनाव तक अयोध्या मामले का कोई हल नहीं होना चाहिए? इसका संबंध लोकसभा चुनाव से कैसे है?’ पीएम मोदी ने कहा कि आखिर 2019 में चुनाव कांग्रेस लड़ेगी या फिर सुन्नी वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘यह साफ है कि मैं तीन तलाक के मुद्दे पर चुप नहीं रहूंगा। हर चीज चुनाव के बारे में नहीं होती। यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों का है। चुनाव इंसानियत के बाद आता है।’

राहुल के मंदिर दर्शन पर भी कसा तंज
राहुल गांधी के मंदिर दर्शन पर तंज करते हुए कहा कि मंदिर जाने से गुजरात में बिजली नहीं आई। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए तीन तलाक मामले पर कहा कि मैं चुनाव के लिए फैसले नहीं लेता। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गुजरात के 33 जिलों में चुनाव प्रचार की कमान थामे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अहमदाबाद के धंधुका में थे। यहां उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें याद किया। इसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस को लपेटे में लेकर कहा कि एक परिवार के लिए अंबेडकर और सरदार पटेल के साथ नाइंसाफी हुई। नरेंद्र मोदी ने आगे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व फैक्टर पर धावा बोलते हुए कहा, ‘मंदिर-मंदिर जाने से गुजरात में बिजली नहीं आई। मैं इतने सालों से माला नहीं जप रहा था बल्कि काम कर रहा था।’

दागा सवाल, राम मंदिर का चुनाव से क्या कनेक्शन?
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर अपना प्रहार जारी रखा और अयोध्या विवाद पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बयान पर कहा कि मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है कि कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल अयोध्या विवाद में मुस्लिम समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे हैं। लेकिन वह कैसे सुप्रीम कोर्ट से कह सकते हैं कि अगले चुनाव तक इसका हल ना निकालें। इस मुद्दे का लोकसभा चुनाव से भला कैसे कोई कनेक्शन है?

‘यूपी में हो सकता था नुकसान, फिर भी तीन तलाक पर रखी राय

वहीं तीन तलाक मामले पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में था, सरकार को अपना हलफनामा दाखिल करना था, अखबारों में आया कि यूपी चुनाव को देखते हुए मोदी इस मुद्दे पर शांत रहेंगे। लोगों ने मुझे इस मुद्दे पर न बोलने की राय दी। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यह साफ है कि मैं तीन तलाक के मुद्दे पर मैं चुप नहीं रहूंगा। हर चीज चुनाव के बारे में नहीं होती। यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों का है। चुनाव इंसानियत के बाद आता है। रैली में पीएम मोदी ने गुजरात के किसानों को राहत देते बड़ा ऐलान किया कि किसानों के कर्ज का ब्याज सरकार देगी।

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अहमद पटेल के ‘करीबियों’ पर ईडी के छापे, 5500 करोड़ के घोटाले का आरोप

दिल्ली में संदेसारा ग्रुप के ठिकानों पर 5500 करोड़ के घोटाले के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा है. इस मामले में बड़ी बात ये है कि छापेमारी कुछ ऐसे लोगों के ठिकानों पर भी की गई है जो काम तो अहमद पटेल के यहां करते थे लेकिन उन्हें वेतन संदेसारा ग्रुप की ओर से दिया जाता था, अब प्रवर्तन निदेशालय इसी की जांच कर रहा है.

इस पूरे मामले पर अहमद पटेल ने कहा, ”जिन तीन लोगों के यहां छापे मारे गए (घनश्यान पांडे, संजीव महाजन और लक्ष्मीचंद शर्मा) उनमें संजीव महाजन उनके घर आते हैं.” अहमद पटेल ने इसके अलावा किसी भी प्रतिक्रिया ये इनकार कर दिया.

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय गगन धवन नाम के शख्स को गिरफ्तार भी कर चुका है. प्रवर्तन निदेशालय पीएमएलए के तहत मामला दर्ज है. बैंक से 5500 करोड़ रूपये का लोन दिलाने और इस पैसे को ठिकाने लगाने में अहमद पटेल की भूमिका की जांच हो रही है. दिल्ली में कुल सात ठिकानों पर छापेमारी चल रही है, सूत्रों के मुताबिक छापेमारी में प्रवर्तन निदेशालय के हाथ बेहद अहम दस्तावेज लगे हैं.

कौन हैं अहमद पटेल?
अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं. कांग्रेस पार्टी में अहमद पटेल की अहम भूमिका है. गुजरात के भरूच के रहने वाले हैं. कहा जाता है सोनिया गांधी के हर निर्णय के पीछे अहमद पटेल का ही दिमाग होता है.

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मोदी जी की ये सच्चाई आपकी आँखें नम कर देगी

गुजरात के वडनगर में जहाँ पीएम मोदी का पूरा परिवार रहता है सभी भाई रहते है वही घर से 2 km की दुरी पर रैली हो रही थी। लाखो की भीड़ में पीएम मोदी के छोटे भाई भी नजर आये जो काफी पीछे बेठे थे। मिडिया की नजर आखिर तक उन पर रही। उनकी आँखों में आंसू थे क्योंकि परिवार आज भी तंगहाली बदहाली का जीवन जी रहा है। बीपीएल कार्ड से गुजर बसर हो रहा है।

पीएम मोदी के छोटे भाई प्राइवेट जॉब करते है। रैली खत्म होने के बाद मिडिया ने उनसे सवाल पूछा कि आप अपने भाई मोदी से कब मिले तो जवाब था जब उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दिया। फिर पूछा आप उनसे मदद क्यों नही माँगते ? जवाब था वे संयासी है वे खुद के लिए कुछ नही कर सके तो हमको क्या देंगे, उन पर देश की जिम्मेदारी है। जो देना है सबको देंगे।

फिर पूछा कि मोदी जी नजदीक ही है आप मिल सकते हो तब उन्होंने कहा के उनका एक एक मिनट बहुत कीमती है। फिर पूछा दिल्ली जाकर पूरा परिवार मिल क्यों नही लेता शायद आपकी मदद भी हो जाये तब उन्होंने रुला देने वाला जवाब दे दिया, कहा के आज तक देश की मिडिया ने हम सब भाईयो को हमारे परिवार को कभी चैनल पर नही दिखाया, हम क्या करते है हम क्या खाते है हमारे घर कैसे है। हमारे बच्चे कहाँ पढ़ रहे है। शायद इसलिए नही दिखाया के हमारा हाल देखकर कहि विपक्षी पार्टियो का मुँह बंद न हो जाये और देश की जनता के दिल में मोदी भगवान की तरह जगह न बना ले। दिल्ली जाकर मिल लिए तो यही मिडिया बढ़ा चढ़ाकर दिखाएगी और पूरा विपक्ष कहेगा के मोदी ने अरबो खरबो रूपये अपने भाइयो को दे दिए। बड़ी बड़ी कंपनी दे दी। बड़े बिजनेश करा के दे दिए। हम नही चाहते के हमारी वजह से मोदी पर जरा भी ऊँगली उठे।

इतना कहते ही वे पार्किंग में खड़ी अपनी पुरानी सी स्कूटर उठाकर चले गए। उनकी आँखों के दर्द को जिसने भी देखा वो रो पड़ा।

यही महानता मोदी को दुनिया में सबसे अलग बनाती है। भले ही आप मोदी से नफ़रत करे पर उनको इज्ज़त दीजिए उनके परिवार को इज्जत दीजिए। एक यही परिवार ऐसा है जो लालू, मुलायम, मायावती, बादल, केजरीवाल, ममता, जैसे नेताओ के परिवार की तरह नही फला फूला.

साभार – हेमन्त भाई. गुजरात से।

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मुझे जेल में डालने के लिए कैसी-कैसी साजिशें नहीं की गईं : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को विकास एवं गुजरात विरोधी करार देते हुए कहा कि बीजेपी के लिए चुनाव विकासवाद की जंग है, जबकि कांग्रेस के लिए यह वंशवाद की जंग है. पीएम मोदी ने कहा, जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब मुझे जेल में डालने के लिए मेरे खिलाफ कैसी-कैसी साजिशें नहीं की गईं. लेकिन आज देखें कि हम कहां है और वो कहां हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि जब-जब गुजरात में चुनाव आता है, उनको (कांग्रेस) जरा ज्यादा बुखार आता है, तकलीफ ज्यादा बढ़ जाती है. इस पार्टी और परिवार को गुजरात आंखों में चुभता रहा है.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
  1. गुजरात गौरव महासम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने हमेशा कुर्सी का खेल खेला, वंशवाद को कैसे सलामत रखना है, इस पार्टी ने हमेशा इसकी चिंता की. उनको न देश की चिंता है और न समाज की.
  2. पीएम मोदी ने कहा, ये जहर, गुजरातियों के प्रति द्वेष… इसी का परिणाम था कि पंडित नेहरू ने नर्मदा परियोजना का शिलान्यास किया, लेकिन वह आंखों में इसलिए चुभती थी, क्योंकि इसकी संकल्पना सरदार पटेल ने की थी, इसलिए पूरा नहीं होने दिया. कोई कल्पना कर सकता है कि 40 साल तक यह अटकी रही.
  3. प्रधानमंत्री ने कहा, कांग्रेस ने विकास के मुद्दे पर कभी चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई. मैं एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी को चुनौती देता हूं कि वे विकासवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ें और लोगों को भ्रमित करने का काम छोड़ें.
  4. राहुल और सोनिया गांधी का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने कहा कि जो जेल की सजा काटे हैं, उनके साथ ये कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं.
  5. पीएम मोदी ने कहा कि इनको गुजरात से नफरत है, जनसंघ से नफरत है, भाजपा से नफरत है. इन लोगों और पार्टी ने कभी हमें गांधी का हत्यारा कहा, कभी दलित विरोधी कहा. आज सबसे ज्यादा दलित सासंद बीजेपी के हैं.
  6. पीएम मोदी ने कहा, इनका विकास से कोई नाता नहीं है. उनको एक ही चीज की आदत लगी है और उनके नेता, पार्टी और परिवार भ्रष्टाचार में डूबी रही है.
  7. प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव एक यज्ञ होता है. चुनाव के यज्ञ में लोकतंत्र के सभी सिपाही, सभी मतदाता और अधिक अच्छा करने के भाव से हर कोई जुटता है। लेकिन सतयुग से, रामायण-महाभारत के काल से ऐसा होता आया है कि जब-जब यज्ञ होता है रुकावट डालने वाले इसमें रुकावट डालते हैं
  8. लोगों ने बहुत सरकारें देखी हैं, धनबल और बाहुबल से चलने वाली पार्टियां, वंशवाद से चलने वाली पार्टियां हैं, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से चलने वाली भाजपा इकलौती पार्टी है.
  9. प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की इतनी सरकारें आईं, लेकिन सिंचाई से जु़ड़ी तमाम योजनाएं अटकी पड़ी रहीं, क्योंकि कांग्रेस को विकास में कोई रुचि नहीं है. 12 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट अटके पड़े थे, हमने उन्हें आगे बढ़ाने का काम किया.
  10. नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं पूछना चाहता हूं कि क्या कारण है कि चुनाव से पहले कांग्रेस के 25 प्रतिशत विधायकों ने उस पार्टी को छोड़ दिया… ऐसा इसलिए क्योंकि राजनेता हवा का रुख भांप लेते हैं.