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प्रारंभ हो गया है सावन, जानें भगवान शिव के प्रिय बेलपत्र की विशेषताएं

ह‍िंदू शास्‍त्रों में भी मान्‍यता है क‍ि भगवान श‍िव को बेलपत्र बहुत पसंद हैं। ज‍िससे श‍िव पूजन में इसे शाम‍िल करना अन‍िवार्य माना जाता है। इससे भगवान श‍िव बहुत जल्‍दी पसंद होते हैं आैर भक्‍तों को मनचाहा वरदान देते हैं।

बेलपत्र से जुड़े हैं ये तीन तथ्य

1- मान्‍यता है कि‍ बेलपत्र चढ़ाने से शि‍व जी का मस्‍तक शीतल रहता है। यदि बेलपत्र में तीन पत्‍त‍ियां हों तो वो सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अलावा पत्‍त‍ियां खराब नही होनी चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय जल की धारा साथ में अर्पि‍त करने से इसका प्रभाव कर्इ गुना बढ़ जाता है।

2- सोमवार, अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा और सं‍क्रांति को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। सावन माह में इन दिनों की पूजा के लिए इन्हें पहले तोड़कर रख लें। बेलपत्र कभी भी खरीदकर लाया गया हो श‍िव जी पर चढ़ाया जा सकता है। इतना ही नहीं एक बेलपत्र को कई बार धोकर भी चढ़ा सकते हैं।

3- कहते हैं जि‍न घरों बेलवृक्ष लगा होता हैं वहां श‍िव कृपा बरसती है। बेलवृक्ष को घर के उत्तर-पश्चिम में लगाने से यश कीर्ति की प्राप्‍त‍ि होती है। वहीं उत्तर-दक्षिण में लगे होने पर भी सुख-शांति और मध्‍य में लगे होने से घर में धन और खुश‍ियां आती हैं।

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सांसद की बेटी ने विदेश में नौकरी को ठुकरा चुनी देश सेवा, आर्मी ज्‍वाइन की

पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. निशंक की बेटी डॉ. श्रेयशी पोखरियाल ने सेना में बतौर अफसर आर्मी मेडिकल कोर ज्वाइंन किया। वे रुड़की के मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देंगी। शनिवार को कमांडेंट और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में डॉ. श्रेयशी ने विधिवत रूप से सेना ज्वाइंन की।

बेटी के सेना ज्वाइन करने पर डॉ. निशंक ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि अभी तक हमारे परिवार में सेना में कोई नहीं था। अब बेटी ने सेना में जाकर मुझे गर्व महसूस करवाया है। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक क्षेत्र से हैं और शुरुआत से ही देशभक्ति के गीत और कविताएं लिखते रहे हैं। ऐसे में हमेशा से उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार से भी कोई सेना में जाए।

आज उनकी इस इच्छा को बेटी ने पूरा कर दिखाया है। उन्हें इस बात को लेकर अपनी बेटी पर और गर्व है कि उसे मॉरीशस में एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल यूनिवर्सिटी में उप निदेशक का ऑफर मिला था, लेकिन बेटी ने उसे अस्वीकार कर सेना को चुना। डॉ. निशंक बताते हैं कि उनकी बेटी श्रेयशी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन करीब दो साल पहले उसने सेना में जाने की ठानी।

वे बताते हैं कि लगभग दो साल पहले वे परिवार के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। उसी दौरान श्रेयशी ने काफी कम समय में पैदल यात्रा पूरी कर ली। ऐसे में उन्होंने श्रेयशी को कहा कि वे बेहद कर्मठ है और सेना को ऐसे ही कर्मठ और जोशीले लोगों की जरुरत है। डॉ. निशंक कहते हैं कि मुझे लगता है कि श्रेयशी के मन में यह बात घर कर गई। उसके बाद ही वह कमीशन में बैठी और सफल हो गई। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि अब श्रेयशी सेना में अपनी सेवाएं देकर देश सेवा करेगी।
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हरिद्वार सीट से लडूंगा आगामी लोस चुनाव : हरीश

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह एनएच-74 घोटाले की जांच में हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं। बशर्ते कि जांच हाईकोर्ट की निगरानी में करानी होगी। रावत ने आगामी आम चुनाव हरिद्वार लोकसभा सीट से लड़ने का दावा किया है। साथ ही दोहराया कि प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मंगलौर के मोहल्ला किला निवासी पूर्व राज्यमंत्री सैय्यद अली हैदर जैदी के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। जहां प्रेसवार्ता में हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार के कार्यो की जांच कराने के नाम पर अपने गलत कार्यों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की ओर से चलाई गई जनकल्याण योजनाओं को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में केवल महापौर और चेयरमैन को पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ाया जाएगा। जबकि सभासद के चुनाव में स्थानीय विधायक और चेयरमैन अपने स्तर से मदद करके चुनाव को जीतने का काम करेंगे।

इस अवसर पर कौसर कैरानवी, रजि हेदर, विधायक काजी निजामुददीन, नगर पालिका चेयरमैन इस्लाम चौधरी, नईम, शराफत, परवेज नंबरदार, अशोक कुमार, रईस हैदर, काजिम रजा आदि मौजूद रहे।

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खुशी मिलेगी हरिद्वार घूमकर, इन जगहों पर जरूर जाएं

भारत देश की धार्मिक आस्थाओं में हरिद्वार नगर का विशेष महत्व है। महादेव की नगरी हरिद्वार धार्मिक आस्था का केंद्र तो है ही पर्यटकों के बीच भी खासा आकर्षण रखता है। यहां की हरियाली, कलकल बहती गंगा नदी, शांत और मनोहर घाट पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करते हैं। अगर आप भी देव भूमि हरिद्वार जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। आपका मन प्रसन्न हो जाएगा…

हर की पैड़ी हो पहला पड़ाव
हरिद्वार आएं और हर पैड़ी न जाएं तो आपकी यात्रा एकदम अधूरी है। स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हर की पैड़ी। सबसे पहले यहां जाकर आप पावन-निर्मल गंगा में स्नान करें। आप चाहें तो यहां होनेवाली आरती में भी शामिल हो सकते हैं। आपका दिन बन जाएगा। इसके बाद हरिद्वार स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भारत माता मंदिर। यह 8 मंजिला मंदिर है और इसका हर फ्लोर भारत देश की सुंदरता और भारत माता की महानता को समर्पित है।

ये पर्वत हैं माता के निवास स्थान
स्टेशन से करीब 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पर्वत पर मां मंसा देवी विराजमान हैं। इनके दर्शनों के लिए आप चाहें तो उड़न खटोले से जा सकते हैं। आप अगर पहाड़ों पर चहलकदमी का मज़ा लेना चाहते हैं तो सड़क के रास्ते पैदल भी जा सकते हैं। वहीं, हिमालय की दक्षिण पर्वत माला के नील पर्वत के ऊपर स्थित है चंडी माता मंदिर। इस मंदिर की मुख्य मूर्ति की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी। जबकि मंदिर का निर्माण राजा सुचात सिंह ने 1929 में कराया। स्टेशन से इस मंदिर की दूरी करीब 5 किलोमीटर है।

यहां देखें, रात की आरती का मनोहर दृश्य
आप बह्मकुंड पर गंगा आरती के मनोहर दृश्य को देखना बिल्कुल न भूलें। गंगा आरती का दृश्य दिल में उतर जाता है। इस कुंड की हरिद्वार स्टेशन से दूरी 2 किलोमीटर है। साथ ही इंडिया टेंपल में आप भारतीय आस्था और संस्कृति से सुंदर नजारों को दर्शन कर सकते हैं। स्टेशन से इसकी दूरी करीब 6 किलोमीटर है।

मां आनंदमयी आश्रम और दक्ष प्रजापति मंदिर, कनखल
माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति के नाम पर बना है दक्ष प्रजापति मंदिर। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कनखल स्थित यही वह स्थान है जहां राजा दक्ष ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया और भगवान भोलेनाथ को नहीं बुलाया। इसी जगह पर माता सती ने कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। हरिद्वार स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है मां आनंदमयी आश्रम। यहां प्रसिद्ध संत मां आनंदमयी ने समाधि ली थी। यह बहुत सुंदर और शांत जगह है।

ऋषिकेश में सबसे महत्वपूर्ण
ऋषिकेश स्थित त्रिवेणी घाट की सुंदरता आपको मोह लेगी। यह घाट सुकून से कुछ पल बैठने के लिए बेहद प्यारी जगह है। शिव-पार्वती और गंगा के चरणों में बैठकर कुछ देर जरूर रहें। साथ ही ऋषिकेष स्थित नीलकंठ महादेव का मंदिर देवभूमि पर स्थित वह स्थान है, जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन में निकला विष पिया था। हरिद्वार स्टेशन से यहां की दूरी करीब 30 किलोमीटर है।

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हरिद्वार जिले में सर्वाधिक बढ़े सर्किल रेट

हरिद्वार जिले में गैर कृषि और कृषि दोनों ही श्रेणियों में चिह्नित क्षेत्रों में राज्य में सर्वाधिक सर्किल रेट तय किए गए हैं। जिले के आबादी क्षेत्र में गैर कृषि भूमि में सर्किल रेट में एक फीसद से 233 फीसद तक वृद्धि की गई है। सर्वाधिक 233 फीसद की वृद्धि पिरान कलियर के बेड़पुर गांव में की गई है। गांव में अब 1500 रुपये प्रति वर्गमीटर सर्किल रेट को बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया है। रुड़की क्षेत्र में हरिद्वार मार्ग, नया बाइपास, बुग्गावाला समेत प्रमुख मार्गों पर सर्किल छह फीसद से 100 फीसद तक बढ़ाए गए हैं। वहीं कृषि भूमि में शून्य से 400 फीसद तक वृद्धि हुई है। हाईवे स्थित पतंजलि योगपीठ के समीप हरिद्वार बार्डर पर सांतरशाह में सर्किल रेट को 60 लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर तीन करोड़ प्रति हेक्टेयर किया गया है। यह रेट बाजार भाव से अब भी काफी कम बताया जा रहा है।

ऊधमसिंहनगर में 25 फीसद तक वृद्धि

ऊधमसिंहनगर जिले के आबादी क्षेत्रों की गैर कृषि भूमि में तीन फीसद से 25 फीसद तक सर्किल रेट बढ़ाने का निर्णय हुआ। 25 फीसद तक वृद्धि वाले क्षेत्रों में गदरपुर के 13 गांव शामिल हैं। इनमें सर्किल रेट 4400 रुपये प्रति वर्गमीटर से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया है। सितारगंज के कुछ मोहल्लों में सर्किल रेट में 30 फीसद तक कमी भी की गई है। रुद्रपुर के प्रमुख मार्ग व नए नगरीय क्षेत्रों में भी सर्किल रेट में 25 फीसद तक वृद्धि हुई है। वहीं कृषि भूमि के सर्किल रेट तीन से 81 फीसद तक बढ़े हैं। सर्किल रेट में सर्वाधिक 81 फीसद वृद्धि दिनेशपुर मार्ग पर की गई है। कृषि भूमि के सर्किल रेट में  सामान्य वृद्धि 15 फीसद तक है।

  • नैनीताल: सर्वाधिक 60 हजार रुपये सर्किल रेट नैनीताल जिले में आबादी क्षेत्र में गैर कृषि भूमि के सर्किल रेट एक फीसद से 208 फीसद तक बढ़े हैं। हालांकि आबादी क्षेत्र में सामान्य वृद्धि 15 फीसद है।

पर्वतीय जिले

  • टिहरी-गैर कृषि भूमि में सर्किल रेट में दो फीसद से 20 फीसद और कृषि भूमि में दो फीसद से 35 फीसद तक वृद्धि की गई है। जिले में चंबा रोड पर सर्किल रेट में काफी इजाफा हुआ है।
  • पौड़ी-अकृषि और कृषि दोनों भूमि श्रेणियों के सर्किल रेट में 10 फीसद से 100 फीसद तक इजाफा। सौ फीसद इजाफा लैंसडौन क्षेत्र में किया गया है। जिले के प्रमुख मार्गों के इर्द-गिर्द कृषि भूमि के सर्किल रेट भी बढ़ाए गए हैं।
  • उत्तरकाशी-गैर कृषि और कृषि भूमि के सर्किल रेट में पांच से दस फीसद तक वृद्धि।
  • रुद्रप्रयाग-गैर कृषि व कृषि भूमि सर्किल रेट में पांच से दस फीसद वृद्धि
  • चमोली-गैर कृषि व कृषि भूमि सर्किल रेट में तीन फीसद से 15 फीसद तक इजाफा
  • अल्मोड़ा-कृषि व अकृषि भूमि सर्किल रेट में पांच से दस फीसद वृद्धि
  • पिथौरागढ़-गैर कृषि भूमि में तीन फीसद से 20 फीसद और कृषि भूमि के सर्किल रेट में एक फीसद से 20 फीसद तक इजाफा
  • चंपावत-अकृषि भूमि व कृषि भूमि के सर्किल रेट में दो फीसद से 25 फीसद तक बढ़ोतरी
  • बागेश्वर-गैर कृषि व कृषि भूमि के सर्किल रेट में दो फीसद से दस फीसद तक इजाफा।
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डेंटर ने अपने पैसे से बनाया स्कूल, सिलाई केंद्र और गरीबों के लिए गाड़ी

पिछले लंबे समय से हरिद्वार में कारों की डेंटिंग पेंटिंग करने वाला एक मिस्त्री समाज के लिए मिसाल बन गया है. अपने छोटी-छोटी बचत से मिस्त्री ने लोगों के वह सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं जो कायदे से सरकार को उपलब्ध करवानी चाहिए थी.

मोती बाबा के नाम से मशहूर इस मिस्त्री ने अपनी कमाई से थोड़ा-थोड़ा पैसा जोड़कर गरीब बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल और विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई केंद्र खोला है. अब इन्होंने टिबड़ी क्षेत्र के गरीब लोगों के लिए एक गाड़ी भी तैयार करके दी है.

इसका उपयोग कोई भी दुख परेशानी के समय में मुफ़्त में कर सकता है. बाबा की इस पहल ने सरकारी तंत्र को आइना दिखाने का काम किया है.

कारों की डेंटिंग पेंटिंग से होने वाली रोज़ की कमाई से बाबा एक हिस्सा निकाल देते हैं. इस बचत से टिबड़ी क्षेत्र की जनता के लिए उन्होंने एक कार तैयार कर दी है जो परेशानी के समय महिलाओं को निशुल्क सेवा देगी.


इसके अलावा बाबा ने गरीब बच्चों के लिए एक छोटा सा स्कूल और विधवा हुई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई केंद्र भी खोला है.

बाबा की इस पहल का क्षेत्र की जनता खूब स्वागत कर रही है. महिलाओं का तो यहां तक कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़े-बड़े नेता आए लेकिन आज तक किसी ने उनके लिए कुछ नहीं किया. अब इस गाड़ी के मिलने से परेशानी के समय में उन्हें बड़ी राहत मिलेगी.

ख़ास बात यह है कि बाबा ने जो कार तैयार कर टिबड़ी के लोगों के लिए सौंप दी है उसका खर्च भी वे खुद ही वहन करेंगे.

आज के समय में जनता से वोट लेने वाले नेता सिर्फ चुनाव के समय में ही लोगों के बीच नज़र आते हैं तो वही इस मिस्त्री ने अपनी जन सेवा की भावना से इन नेताओं को आइना दिखाने का काम किया है.

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प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है मर्म विज्ञान: ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के परिसर निदेशक डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा वेदों पर आधारित प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो आयुर्वेद का ही एक अंग है।

वह सोमवार को नंदीपुरम नोरंगाबाद में आयोजित मर्म विज्ञान एवं मर्म चिकित्सा की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। पांच दिवसीय कार्यशाला में देश विदेश से आए चिकित्सक और जिज्ञासु भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति की जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संजीवनी विद्या सूर्य चिकित्सा स्वचिकित्सा, पंचमहाभूत चिकित्सा विलुप्त हो गई है। उसी प्रकार वैदिक चिकित्सा की विद्या मर्म चिकित्सा भी विलुप्त के कगार पर है। 107 मर्म बिंदुओं पर आधारित मर्म चिकित्सा दुष्प्रभाव रहित तुरन्त असर दिखाने वाली चिकित्सा पद्धति है जो सुश्रुत संहिता में निहित है। कार्यशाला के समन्वयक कनाडा से आए ज्ञानप्रकाश ने कार्यशाला में शरीर के ऊपरी भाग के मर्म बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि तल हृदय, शप्रि मर्म, मणि बंध, कूपर मर्म, अणि, उर्वी, गुल्फ, इन्द्र बस्ती, जानु मर्म को उत्प्रेरित करने से शरीर की व्याधियों का शमन किया जाता है।

मर्म चिकित्सक मयंक जोशी ने स्व मर्म चिकित्सा की जानकारी दी। कहा कि मनुष्य के शरीर में उसकी व्याधियों का निदान समाहित है। 107 मर्म बिंदुओं को उत्प्रेरित कर शरीर में छिपी हुई ऊर्जा को जाग्रत किया जाता है।