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मानसून के बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए खान-पान में क्या करें शामिल

जीवनशैली और नजरिए में थोड़ा सा फर्क लाकर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बना सकते हैं…

बरसात में इनका सेवन जरूरी

तुलसी: तुलसी दल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खांसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है। सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं। काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं। तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं। तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातपित्त विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।

शहद: शहद का सेवन हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। कारण, शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और यह एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है। शक्कर की तुलना में शहद में बीस प्रतिशत कम कैलोरी होती है। इसलिए शहद के सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा और शक्कर की तुलना में कम कैलोरीज मिलती हैं। शहद में अन्य पोषक तत्वों के अलावा शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स बी-1, बी-2, बी-5, बी-6 और विटामिन सी पाए जाते हैं। ये विटामिन्स हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

हर्बल टी: इसमें सिट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो कई बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से बचाता है। इससे पेट साफ रहता है और रक्त संचरण में सुधार होता है। इसका सेवन एग्जि़मा और त्वचा संबंधी संक्रमणों से भी बचाता है। आप चाहे तो इसमें अदरक, काली मिर्च और शहद का भी प्रयोग कर सकते हैं।

सूखे मेवे: सूखे मेवे में जिंक और विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत सहायता करते हैं। इसलिए अपनी डाइट में हर रोज किसी भी रूप में एक मुट्ठी मेवों को शामिल करें। शरीर भीतर से मजबूत होगा और बदलते मौसम का शरीर पर असर नहीं पड़ेगा।

लहसुन: खाली पेट कच्‍चे लहसुन से ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है एवं भुना हुआ लहसुन खाने से शरीर की आंतरिक सफाई होती है। लहसुन से हमारा वजन भी कंट्रोल में रहता है। यह एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक का काम करता है। लहसुन आपके शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ायेगा और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकाल फेकेगा।

करेला: करेले में कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन पाया जाता है। करेला खाने से खून साफ होता है और ये हीमोग्लोबिन बढ़ाने का अच्छा स्त्रोत है। लीवर संबंधी रोगों के लिये करेला बहुत लाभकारी है। श्वांस और दमे के रोगियों को करेले की सादी सब्जी का सेवन करना चाहिये। करेला हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

नीबू: नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है। इसमें पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है।

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जब पस्‍त हुए चिकित्‍सक, तो काम आए योगगुरु

यह सच मध्‍यप्रदेश के एक छोटे जिले मंदसौर का है। योग ने मंदसौर के 50 से अधिक बुजुर्गों को 70 और 80 की उम्र में फिर से युवा बना दिया है। दशपुर कुंज, रामटेकरी और मेघदूत नगर में प्रतिदिन सुबह योग के लिए 200 से अधिक लोग जुटते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो कुछ समय पहले चलने में मोहताज थे। अब युवाओं की तरह दौड़ लगा रहे हैं। शाजापुर में तो योग से पेरालिसिस तक ठीक होने का उदाहरण सामने आया है।

1- 70 के पारिख कर रहे हैं कमाल

मध्‍यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले दिनेशचंद्र पारिख 70 वर्ष के हैं। पारिख का कहना है कि हम योग के लाभ को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकते । वो बताते हैं कि नौ साल पहले हम योग से जुड़े। इसके बाद योग साधना से कुछ लाभ दिखा और मेरी दिलचस्‍पी इसमें गहरी होती गई। धीरे-धीरे योग से शारीरिक और मानसिक लाभ मिला और आस्‍था पैदा होने लगी। उन्‍होंने कहा कि 2008 से मैं नियमित योग कर रहा हूं।

स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त पारिख बताते हैं कि घुटने में तकलीफ से सीढि़यां चढ़ना दूभर हो गया था। इस परेशानी से आजिज आकर मैंने एक साल पहले ही सेवानिवत्ति का मन बना लिया था। चिकित्सकों ने घुटने बदलने की सलाह दी। ऐसे में योग गुरु सुरेंद्र जैन के संपर्क में आकर योग शुरू किया। इससे चलना-फिरना आसान हो गया। छह माह में पैर ठीक हो गया।

2- अब सीढ़ियों पर दौड़ते हैं 70 वर्षीय पामेचा

इसी जिले के निवासी 70 वर्षीय पामेचा 10 वर्ष पूर्व योग से जुड़े। उनका योग में अपार विश्‍वास है। पमोचा कहते हैं कि वह दस वर्षों से निरंतर योगाभ्‍यास कर रहे हैं। उनका यह विश्‍वास अनायास नहीं है। योग से जुड़ने से पहले पोचा चलने-फ‍िरने में मोहताज थे। आज वह योगाभ्‍यास से दौड़ सकते हैं, सीढि़यों पर चढ़ सकते हैं। पामेचा कहते हैं कि 2008 में 70 वर्ष की उम्र में योग से जुड़ा, तब घर की सी़ढ़ियां एक पैर से ही चढ़ पाता था, दूसरा पैर काम नहीं करता था। योग शुरू करते ही पैर ठीक हो गया। मंदसौर के भंवरलाल पामेचा योग को जीवन के लिए हवा और भोजन की तरह ही जरूरी मानते हैं।

3- बीमा एजेंट यशपाल शर्मा पेरालिसिस ठीक हो गया

बीमा एजेंट यशपाल शर्मा को वर्ष 2001 में हार्ट अटैक हुआ। उनके दुखों का यहीं अंत नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद वह पेरालिसिस से भी ग्रसित हो गए। यशपाल का कहना है कि वह तीन वर्षों तक चिकित्‍सकों से इलाज कराते रहे। इलाज में करीब 10 लाख रुपये भी खर्च हो गए। लेकिन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा। हमें कोई आराम नहीं मिला। यशपाल ने कहा कि हारा मन योग की शरण जा पहुंचा। योगाभ्‍यास से धीरे-धीरे आराम मिला। और मैं सालभर में पूरी तरह स्वस्थ हो गया। यशपाल अब योग में डिप्लोमा करने के बाद लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं।

4- रीतेश के जीवन में योग से फैला उजियारा

शहडोल निवासी रीतेश मिश्रा के जीवन में योग ने उजियारा फैलाया। रीतेश का कहना है कि छह साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने बताया कि मैं लगातार 14 साल तक योग कर रोशनी वापस लाने में कामयाब हुआ हूं। मुझे 80 प्रतिशत चीजें नजर आ जाती हैं। मार्कर से लिखे बड़े अक्षर पढ़ लेता हूं। मोबाइल को भी नजदीक से देखकर चला लेते हैं। रीतेश की तारीफ योग गुर बाबा रामदेव भी करते हैं। रीतेश बताते हैं कि बाबा रामदेव से मेरी पहली मुलाकात रीवा में 2008 में हुई थी। इसके बाद योग के प्रति लगाव पैदा हुआ।

रीतेश ने कहा पहले माता-पिता (सीमा मिश्रा व देवानंद मिश्रा) टीवी पर आसन देखकर योग कराते थे। मेरे माता-पिता मुझे लेकर काफी चिंतित थे। खासकर मेरी शिक्षा को लेकर। लेकिन समस्‍याओं के बावजूद रीतेश ने उच्‍च शिक्षा पूरी की। अब वह लोगों को योग सिखा रहे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की योग कक्षा पुलिस लाइन में सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाती है। वेलफेयर फंड से इन्हें कुछ राशि बतौर मेहनताना मिलती है। इनकी योग कक्षा में शामिल रहने वालों में पुलिस अफसर, जज, डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स शामिल हैं।

बता दें कि 21 जून का पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसके अलावा 150 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए करीब 5000 आयोजन हो रहे हैं।

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ऑस्ट्रेलिया की संसद में पहली बार किया गया योग, भारत से आया योग अब पूरी दुनिया में मचा रहा धूम

केनबरा स्थित संसद के कम्युनिटी हाल में इस सत्र में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट समेत कई मंत्रियों व सांसदों ने हिस्सा लिया और विभिन्न आसनों का अभ्यास किया। दो घंटे तक चले इस सत्र का आयोजन मेलबर्न स्थित वासुदेव क्रिया योग समूह ने किया था।

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

योग को प्रसारित करने में भारत की सफलता का जिक्र करते हुए एबॉट ने कहा, ‘भारत उभरती विश्व शक्ति है और योग उससे जुड़ा हुआ है। मुझे खुशी है भारत से आया योग पूरी दुनिया में फैल रहा है।’

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

वासुदेव क्रिया योग के राजेंद्र येंकानमुले ने कहा, ‘पहली बार किसी देश की संसद में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया है। यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा। हमें उम्मीद है कि आने वाले सालों में यह और भी सफल होगा।’

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बालों की सेहत के लिए हर किसी को खानी चाहिए ये विशेष चीजें

आइए जानते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें खाने से आपके बाल ना केवल स्वस्थ रहेंगे बल्कि खूबसूरत और चमकीले भी नजर आएंगे.

पालक-
अगर आप शाकाहारी हैं तो पालक से बेहतर बालों के लिए कोई चीज हो ही नहीं सकती है. पालक आयरन, विटामिन ए, सी औऱ प्रोटीन का बढ़िया स्रोत होता है. आय़रन की कमी से ही सबसे ज्यादा बाल झड़ते हैं. पालक केवल आयरन से ही भरपूर नहीं होता है बल्कि इसमें सेबम भी होता है जो बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर माना जाता है. इसमें ओमेगा-3 एसिड, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होता है. इससे स्कैल्प हेल्दी और बाल स्वस्थ रहते हैं.

अंडा और दुग्ध उत्पाद-
बालों की ग्रोथ के लिए और मोटे-घने बालों के लिए अंडा व दुग्ध उत्पाद बहुत जरूरी हैं. दूध, योगर्ट और अंडे में कई सारे जरूरी पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन बी12, आयरन, जिंक और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं. दुग्ध उत्पाद बियोटीन (विटामिन बी7) का भी अच्छा स्रोत है जो बालों को झड़ने से रोकता है.

नट्स-
बालों को झड़ने से रोकने के लिए अपनी डाइट में नट्स को शामिल कीजिए.  खासकर अखरोट इकलौता ऐसा नट है जिसमें बियोटीन, बी विटामिन्स, विटामिन ई और प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और मैग्नीशियम होता है. ये सभी बालों को मजबूत बनाते हैं.

अमरूद-
ये तो आप जानते ही होंगे कि बालों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी कितना जरूरी होता है. विटामिन सी बालों को पतला होने से रोकता है. अमरूद में संतरे से भी ज्यादा विटामिन सी होता है. इसकी पत्तियों में भी विटामिन बी और सी होता है जो बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी कोलाजेन ऐक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करता है.

दालें-
दालें प्रोटीन, आय़रन, जिंक, बायोटिन का भंडार होती हैं जोकि बालों के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इसके अलावा दालें फोलिक एसिड का भी खजाना हैं. फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं को दुरुस्त करती है जिससे स्किन और स्कैल्प को जरूरी ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाती है और बाल टूटना रुक जाता है.

जौ- जौ में खूब विटामिन ई होता है जो पतले बालों को ठीक करने में मदद करता है. जौ में आयरन और कॉपर भी होता है जो रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.

चिकन-
चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तो आप टोफू और पीनट्स से इसकी भरपाई कर सकते हैं.

अलसी का बीज-
अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है. आपका शरीर जरूरी फैटी एसिड का उत्पादन नहीं कर पाता है इसलिए आपको अपने आहार से इसकी आपूर्ति करनी चाहिए. अलसी का बीज सबसे बढ़िया विकल्प है.

गाजर-
गाजर केवल आंखों की रोशनी के लिए ही नहीं बल्कि आपके बालों के लिए भी बहुत जरूरी है. इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है जो नैचुरल कंडीशनर का काम करता है और आपके बालों को झड़ने से रोकता है.

विटामिन सी की खुराक के लिए खट्टे फल-
आपके शरीर को आयरन के अवशोषण के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है इसलिए आपको अपनी डाइट में साइट्रस फ्रूट्स को जरूर शामिल करना चाहिए. न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि एक गिलास नींबू पानी भी पर्याप्त साबित होगा.

इसके अतिरिक्त स्वीट पोटैटो भी विटामिन ए का अच्छा स्रोत है. बालों को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

 

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Photos: जब मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी महिला को पहनाई चप्पल, पढ़ें, पूरा मामला

अंबेडकर जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छत्तीसगढ़ के बीजापुर पहुंचे। जहां उन्होंने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत देश के पहले वेलनेस सेंटर के लॉन्च कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक आदिवासी महिला को मंच पर चप्पल भेंट की। चरण-पादुका (फुटवियर) योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने इस आदिवासी महिला को चप्पल पहनाईं। इस योजना का लक्ष्य तेंदूपत्ता जमा करने वालों को चप्पलें उपलब्ध कराना है।

पीएम मोदी ने भेंट की चप्पल शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अंबेडकर जयंती के मौके पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर पहुंचे। उन्होंने बीजापुर में कई केन्द्रीय और राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं की नींव रखी। बीजापुर में पीएम मोदी ने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के पहले वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया। स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने एक आदिवासी महिला को चप्पल का एक जोड़ा भेंट किया। प्रधानमंत्री ने मंच पर ही महिला को चप्पल पहनाई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अनंत कुमार के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी मौजूद थे। चरण-पादुका योजना के तहत दिया गया चप्पलों का जोड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरण-पादुका योजना के तहत आदिवासी महिला को चप्पलों का जोड़ा दिया।

जानकारी के मुताबिक चरण-पादुका (फुटवियर) योजना का लक्ष्य तेंदूपत्ता जमा करने वालों को चप्पलें उपलब्ध कराना होता है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि विकास की दौड़ में पीछे छूट गए और पीछे छोड़ दिए गए समुदायों में आज जो चेतना जागी है, वो चेतना बाबा साहब की ही देन है।

योजना के तहत तेंदूपत्ता जमा करने वालों को चप्पलें उपलब्ध कराना है पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि एक गरीब मां का बेटा, पिछड़े समाज से आने वाला आपका ये भाई अगर आज देश का प्रधानमंत्री है, तो ये भी बाबा साहेब की ही देन है। उन्होंने कहा कि आज बाबा साहेब की प्रेरणा से, मैं बीजापुर के लोगों में, यहां के प्रशासन में, यही भरोसा जगाने आया हूं। ये कहने आया हूं कि केंद्र की आपकी सरकार, आपकी आशाओं-आकांक्षाओं, आपकी ‘aspirations’ के साथ खड़ी है।

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मशरूम के होते हैं अनेक फायदे: घर बैठे पाइये 100% सेहतमंद मशरूम प्रोडक्ट्स

मशरूम स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं।

सेहत का खजाना ‘मशरूम’

वेजिटेरियन हों या फिर नॉन वेजिटेरियन, मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है। और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ जो है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। चीन में तो इसे महौषधि एवं रसायन सदृश्य माना जाता है। वहीं रोम के लोग मशरूम को र्इश्वर का आहार मानते हैं। भारत में उगने वाले मशरूम की दो सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रजातियां वाइट बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम है।

सेहत का खजाना 'मशरूम'

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

मशरूम में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट हमें हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स से बचाते हैं। मशरूम का सेवन करने से शरीर में एंटीवाइरल और अन्‍य प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है, जो शरीर की कोशिकाओं को रिपेयर करता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो कि माइक्रोबियल और अन्‍य फंगल संक्रमण को भी ठीक करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

हृदय रोगों से बचाव

मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

हृदय रोगों से बचाव

कैंसर के लिए मशरूम

मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम

मधुमेह

मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।

मधुमेह

मोटापा से बचाए

मशरूम में लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में मददगार होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट लेने की सलाह दी जाती है, जिसके लिए मशरूम खाना बेहतर विकल्पों में से एक माना जाता है।

मोटापा से बचाए

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

पेट के विकार करे दूर

ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।

पेट के विकार करे दूर

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

कुपोषण से बचाए

मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।

कुपोषण से बचाए

ट्यूमर को रोके

मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है। साथ  ही इसमें लगभग 22-35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह शाकभाजी व जन्तु प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखता है।
इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व भी होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते है।

ट्यूमर को रोके

मशरूम और AdTo.In

आपको जानकर ख़ुशी होगी की हमारी कंपनी उत्तराखंड की एक अग्रणी मशरूम उत्पादक कंपनी सौम्या फूड्स के साथ हाथ मिला चुकी है और जल्द ही AdTo पर मशरूम के कई उत्पादों जैसे ओएस्टर मशरूम, बटन मशरूम, मिल्की मशरूम पिकल, बटन मशरूम पिकल, ओएस्टर मशरूम पिकल, मिक्स मशरूम पिकल, शिटाके और गैनोडर्मा मशरूम के साथ साथ औषिधीय गुणों से युक्त पहाड़ों की अनमोल खाद्य वस्तु कीड़ाजड़ी भी आप ऑनलाइन आर्डर कर घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे।
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पेट के दर्द, गैस, ब्लोटिंग और अनियमित मलत्याग. इन सभी परेशानियों से राहत दिला सकती है ये एक चीज़

अगर आपको 3 महीने से ज्यादा पेट में दर्द और अनियमित मलत्याग हो तो आपको इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम हो सकता है. एक रिसर्च में पता लगा है कि विटामिन-डी की खुराक का नियमित सेवन आपको इसके दर्द से छुटकारा दिला सकता है. इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पेट और आंत के विकार से संबंधित है और इससे पीड़ित शख्स को पेट में सूजन और दर्द सहित कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

क्या है आईबीएस?
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) का मतलब है अनियमित मलत्याग. यह एक बीमारी नहीं बल्कि एक साथ होने वाले कई लक्षणों का समूह है. इसमें बड़ी आंत (कोलन) और छोटी आंत में अवरोध होता है. लगभग 10 से 15 प्रतिशत वयस्क इससे प्रभावित होते हैं.

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शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि आईबीएस रोगियों में विटामिन-डी की कमी सामान्य है.

विटामिन-डी की खुराक के सेवन से पेट में दर्द, सूजन, दस्त और कब्ज जैसे लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है.

शोध में पता चलता है कि विटामिन-डी आईबीएस के रोगियों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने में भी कारगर है.

इंग्लैंड की शेफील्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुख्य लेखक बर्नार्ड कॉर्फे ने कहा, “इन निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि आईबीएस से पीड़ित सभी लोगों को अपने विटामिन-डी के स्तर का परीक्षण करना चाहिए और इनमें से अधिकांश को इसके सप्लीमेंट से फायदा हो सकता है.”

इन निष्कर्षों के लिए शोध दल ने सात अध्ययनों का आकलन किया था, जिनमें विटामिन-डी और आईबीएस के बीच संबंधों पर आधारित चार अवलोकन और तीन सर्वेक्षण आधारित अध्ययन शामिल थे.

यह शोध ‘यूरोपीयन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन’ में प्रकाशित हुआ है.

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दलाई लामा से मिलने को बेताब हुए बराक ओबामा, पढ़िए कैसी रही मुलाकात

तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा भारत दौरे पर आये अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से दिल्ली में मिले। यह मुलाकात तिब्बतियों के लिये खास मायने रखती है। दिल्ली के होटल मौर्या में ओबामा से मिलने के बाद दलाई लामा धर्मशाला लौट आये हैं।

‘हम दोनों पुराने मित्र हैं’

दिल्ली से वापस धर्मशाला लौटते हुये दलाई लामा ने कांगड़ा एयरपोर्ट पर पत्रकारों को इस मुलाकात के बारे में बताते हुये कहा कि मुलाकात बेहद सुखद रही। मैं जानता हूं कि हम दोनों पुराने विश्वस्त मित्र हैं। दलाई लामा ने बताया कि जब उन्हें सूचना मिली कि बराक ओबामा भारत आ रहे हैं,तो उन्होंने ओबामा से मिलने की इच्छा जताई। इसके लिये ओबामा भी उतने ही उत्साहित थे। हम अब तक पांच बार आपस में मिल चुके हैं। हर मुलाकात रोचक रही है। आज करीब 45 मिनट तक चली मुलाकात में दलाई लामा ने विशव में पनपती अशांति व आतंकवाद पर चर्चा की।

‘विश्व शांति में ओबामा की अहम भूमिका’

दलाई लामा ने कहा कि बढ़ते धार्मिक कट्टरवाद से विश्व बंधुत्व की भावना खतरे में है। खून-खराबे व मारकाट से मानवता खतरे में है। लिहाजा विश्व में आज मानव धर्म को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिये खुद ओबामा भी सहमत हैं। मेरा मानना है कि ओबामा आज भी विश्व शांति में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हम तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ेंगे। दलाई लामा ने कहा कि वह कई प्रमुख लोगों से मिलते रहते हैं। अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराते रहते हैं,लेकिन अभी भी उनकी ओर से जो प्रयास होने चाहिये वह हुये नहीं। मैं चाहता हूं कि बात को कागजों में उकेरा जाये। मैं भारत में हूं लिहाजा मेरी सोच भारत की पुरातन पंरपरा शांति व सहनशीलता की रही है। शांति सद्भावना से ही बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है।

ओबामा से लामा को उम्मीद

बराक ओबामा की ओर मुखातिब होते हुये दलाई लामा ने कहा कि आप मात्र अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति नहीं हैं,बल्कि आप नोबेल पुरस्कार विजेता भी हैं। आप युवा हैं आप विश्व के लिये बहुत कुछ कर सकते हैं। दलाई लामा ने कहा कि ओबामा विश्व शांति के लिये हमारी अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। भले ही इसका परिणाम मेरी पीढ़ी न देख पाये लेकिन अगली पीढ़ी इसे जरूर देख सकेगी।

दलाई लामा कम करेंगे विदेशी दौरे, किये दो दूत नियुक्त

अपनी सेहत में आ रही समस्याओं के चलते तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा आने वाले दिनों में अपने विदेश दौरों पर विराम लगा सकते हैं। जिससे उनके विदेशी प्रशसंकों को निराशा झेलनी पड़ सकती है। इस बारे में खुद दलाई लामा ने धर्मशाला के पास मैक्लॉडगंज में एक समारोह में बयान दिये। दलाई लामा ने मैक्लॉडगंज में अंतरराष्ट्रीय युवाओं के एक समूह को संबोधित करते हुये कहा कि उनकी थकान काफी बढ़ गई है, मैं 82 साल का हूं, और पिछले साल के बाद से मेरी थकान बढ़ती जा रही है इसलिए विदेश में होने वाले कार्यक्रमों में उनकी तरफ से निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री डॉ लोबसंग सांग्ये के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री प्रो सामदोंग रिंपोछे आधिकारिक दूतों के रूप में काम करेंगे।

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ब्लैकबेरी ने बदली फ़ोन के इस्तेमाल की हर वजह। पेश है डॉक्टर फोन

Based on the idea of a mood ring, this futuristic cellphone integrates a keypad that changes color according to the emotional state, sensed from messages and phone calls, as the biometric ring transmits the body signals of wearer and sends data to the main device for interpretation. The goal  is to create empathy for one another and strengthen relationships.

Designer Daniel Yoon

As Daniel describes the interface:

It is of course touch based and all the user’s connections are shown graphically so you can see who is connected to whom. Each contact has an avatar that is encompassed by two colored rings. The inner colored ring shows the contact’s previous emotional state, and the outer ring represents the contact’s current emotional state. It is important to show the shift in emotions in order to see how an event has affected that contact.

Another important feature that we felt was important was the “Emotional Health Chart”. This chart would monitor the user’s emotional health through an indefinite period of time. One would be able to see how a certain event, or phone call/ message has affected the user. Obviously, if the chart shows someone is always upset, there would be a problem… If permitted, a user would be able to view other user’s charts as well.


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फिटकरी के फायदे जानकर आप दंग रह जायेंगे

हम बात करने वाले है कि फिटकरी हमारे जीवन में कैसे उपयोगी साबित हो सकती है.दोस्तों हर घर में फिटकरी जरूर रखना चाहिए. आपको बता दें फिटकरी केवल पानी ही साफ करने के काम ही नहीं आती बल्कि इसके कई हेल्थ बेनिफिट्स भी हैं. यह न केवल चोट, कटने-छिलने से हुई ब्लीडिंग रोकने में सहायक होती है बल्कि स्किन डिजीज, झुर्रियां दूर करने, खांसी, पाइल्स जैसी कई प्रॉब्लम्स में फायदेमंद होती है. फिटकरी में मैग्नीशियम सल्फेट होता है जो हमारे शरीर को हेल्दी बनता है.तो आइये जान लेते है इसके 5 बेस्ट फायदों के बारे में.

 

फिटकरी के 5 बेस्ट फायदे-

  1. फिटकरी के पाउडर को एक चम्मच ले और एक गिलास पानी में घोल लें.इसे पीने से यूरिन की जलन ठीक होती है.
  2. फिटकरी के पानी से बाल धोने से बालों की गंदगी और डैंड्रफ साफ हो जाते हैं. जुओं से भी छुटकारा मिलता है.
  3. आग में भूनी हुई फिटकरी को मिश्री के साथ लेने से अस्थमा के मरीजों को फायदा होता है.
  4. अगर हल्का बुखार है तो एक चम्मच भुनी हुई फिटकरी में दो चुटकी शक्कर मिलाकर देने से बुखार में आराम मिलता है.
  5. सांस की बदबू और दांतों में दर्द होने पर फिटकरी के पानी से गरारा करने से फायदा होता है.

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