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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बिचौलिए के प्रत्यर्पण का आदेश, बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किलें

फरवरी 2017 में मिशेल को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया था। मिशेल के वकील ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उनके मुवक्किल पर दबाव बना रही है। हालांकि जांच एजेंसी ने इन आरोपों से साफ इन्कार किया था।

सीबीआइ के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने जून में कहा था कि जांच एजेंसी ने अपना गुनाह कबूल कराने के लिए मिशेल को प्रभावित नहीं किया। यूएई में भगोड़े के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही जारी थी। पिछले कुछ समय में भारतीय मीडिया ने मिशेल के कई इंटरव्यू लिए थे। लिहाजा, दोनों जांच एजेंसियां जांच को आगे बढ़ाने के लिए उसे अपनी गिरफ्त में लेना चाहती हैं।

क्या है अगस्ता मामला
वीवीआइपी हेलिकॉप्टर अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 12 चॉपर ख्ररीदे जाने थे। इसके लिए मिशेल समेत तीन बिचौलियों (गुइडो हश्के और कार्लो गेरोसा) के जरिए कथित रूप से दो भारतीयों को रिश्वत दी गई थी। मिशेल ने दुबई की अपनी कंपनी ग्लोबल सर्विसेज के जरिए यह रकम हासिल की थी।

बताया जाता है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में इन बिचौलियों ने भारतीय वायुसेना के अफसरों को प्रभावित करने की कोशिश की। कहा जाता है कि इसके बाद ही हेलिकॉप्टर खरीदने की एक अनिवार्य शर्त में छूट दी गई। वर्ष 2005 में हेलिकॉप्टर की उड़ान की ऊंचाई की सीमा 6000 मीटर से कम करके 4500 मीटर कर दी गई थी।

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भारत में बनेगी अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर की बॉडी

अमेरिकी सेना सहित दुनियाभर में कहीं भी उपयोग में आने वाले एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर की बॉडी भारत में हैदराबाद स्थित संयंत्र में बनेगी। इनका निर्माण टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) करेगी, जिसकी उत्पादन इकाई का शुभारंभ गुरुवार को हैदराबाद में किया गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन, तेलंगाना के उद्योग व आइटी मंत्री के. टी. राव तथा बोइंग और संबंधित कंपनियों के कई शीर्ष अधिकारी इस मौके पर मौजूद थे।

टीबीएएल अमेरिकी कंपनी बोइंग और भारत की टाटा संस नियंत्रित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) का संयुक्त उपक्रम है। बोइंग की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टीबीएएल संयंत्र से निकले एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के बॉडीज बोइंग के सभी ग्राहकों को डिलिवर किए जाएंगे, जिनमें अमेरिकी सेना समेत दुनियाभर के 15 अन्य देश शामिल है। कंपनी का हैदराबाद स्थित संयंत्र करीब 14,000 वर्गमीटर में फैला है, जिनमें 350 बेहद कुशल पेशेवर काम करेंगे। भविष्य में दुनियाभर में जहां कहीं से भी एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर की मांग आएगी, उसकी बॉडी का निर्माण हैदराबाद स्थित इसी संयंत्र में होगा। कंपनी के मुताबिक इस संयंत्र से पहली बॉडी का निर्माण इसी वर्ष अनुमानित है।

सीतारमन ने टीबीएएल को भारत के रक्षा क्षेत्र में इस तरह के बड़े निवेश के लिए बधाई दी। इस संयंत्र के लिए दोनों कंपनियों ने वर्ष 2015 में करार किया था और संयंत्र का निर्माण वर्ष 2016 में शुरू हुआ।

बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सेक्योरिटी की प्रेसीडेंट व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लिएन कैरेट ने कहा कि पिछले दो वर्षो में भारत से बोइंग की सोर्सिग 100 करोड़ डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) को पार कर गई है। उन्होंने कहा, ‘कंपनी योग्य पेशेवरों, कौशल प्रशिक्षण और एडवांस्ड एयरोस्पेस मैन्यूफैक्चरिंग के लिए काम करने वाले योग्य कर्मचारियों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए बड़ा निवेश कर रही है। हम इस संयंत्र से सिर्फ बॉडी ही नहीं, बल्कि बहुत जल्द वर्टिकल स्पार बॉक्स जैसे उपकरणों का भी उत्पादन करेगी।