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भारत-फ्रांस के बीच 14 समझौते, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की दोस्‍ती अहम

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में आज दोनों देशों के बीच 14 अहम समझाैते हुए। इस मौके पर हैदराबाद हाउस में आयोजित संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस में दोनों देशों के प्रमुखों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की मित्रता को अहम बताया और कहा, सरकार किसी की भी हो दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता है। वहीं मैक्रों ने कहा, ‘भारत और फ्रांस ने आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का अब नया स्‍वरूप होगा।’

सभ्‍यताओं की साझेदारी सदियों पुरानी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हम सिर्फ दो लोकतंत्र के नेता नहीं हैं, हम समर्थ और समृद्ध विरासत के उत्‍तराधिकारी हैं। हमारे देशों और हमारी सभ्‍यताओं की साझेदारी सदियों पुरानी है। हम मानते हैं कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों के उज्‍जवल भविष्‍य के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण आयाम है हमारे पीपुल टू पीपुल संबंध। हम चाहते हैं कि हमारे युवा एक दूसरे के देशों को जानें, इसके लिए हमने आज दो समझौते भी किए हैं।’

राष्‍ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर

विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मुलाकात के बाद फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इससे पहले पत्‍नी ब्रिगिट के साथ मैक्रों ने राजघाट पर महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए राष्‍ट्रपति मैक्रों का राष्‍ट्रपति भवन में औपचारिक स्‍वागत हुआ और उन्‍हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने यहां औपचारिक स्‍वागत के बाद कहा, भारत आना खुशी और गर्व की बात है। फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारी केमिस्‍ट्री काफी अच्‍छी है हमारे दो लोकतंत्रों का ऐतिहासिक संबंध है।’

प्रोटोकॉल तोड़ पीएम मोदी ने किया स्‍वागत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पत्‍नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ चार दिवसीय भारत यात्रा पर शुक्रवार शाम को भारत पहुंचे और प्रोटोकॉल तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्‍वयं एयरपोर्ट पर उनका स्‍वागत किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के विमान से उतरने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गले लगाकर उनका स्वागत किया।

वाराणसी जाएंगे इमैनुएल

इमैनुएल 12 मार्च को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाएंगे। वहां वे तुलसी घाट पर भगवान राम के राज्याभिषेक को देखेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों मीरजापुर में 75 मेगावाट के सोलर एनर्जी प्लांट का शुभारंभ कर वाराणसी आने के बाद सबसे पहले ट्रेड फैसिलिटी सेंटर देखने जाएंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ अस्सी घाट भी जाएंगे।

दोनों देश समुद्री सुरक्षा तथा आतंकवाद से निपटने के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत बनाने पर भी विचार करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान फ्रांस के सहयोग से बन रहे जैतापुर (महाराष्ट्र) परमाणु बिजली संयंत्र को लेकर भी समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैक्रों के बीच शनिवार को प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में हिंद महासागर में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे पर बात हो सकती है।

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होली मनाने राहुल गाँधी पहुंचे नानी के पास! भाजपा नेता का तंज; कहा- कार्ति की गिरफ्तारी ने नानी याद दिला दी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नानी संग होली मनाने पर भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने तंज कसा है। राहुल गांधी ने जिस ट्वीट में नानी संग होली मनाने की जानकारी साझा की, उसी को रिट्वीट करते हुए दिल्ली से भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने टिप्पणी कर डाली। लेखी ने लिखा कि कार्ति की गिरफ्तारी ने नानी याद दिला दी।

दरअसल, मीडिया ग्रुप में विदेशी निवेश की अनुमति दिलाने के लिए घूस लेने के आरोप में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। गुरुवार को उन्हें दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था। जहां से कार्ति को 5 दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया गया।

इसके बाद गुरुवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विदेश जाकर अपनी नानी के साथ होली मनाने की जानकारी दी। राहुल के इसी ट्वीट को मीनाक्षी लेखी ने रिट्वीट किया और उनके नानी से मिलने जाने को कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी से जोड़ दिया।

गौरतलब बै कि अपनी नानी को ‘सरप्राइज’ देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को इटली रवाना हो गए। राहुल गांधी अपनी नानी के साथ होली का पर्व मनाएंगे। यह जानकारी राहुल गांधी ने खुद ट्विटर पर दी। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों को होली की शुभकामनाएं भी दी हैं।

राहुल ने ट्वीट किया कि मेरी नानी 93 साल की हैं। वह दुनिया में सबसे दयालु महिला हैं। इस बार होली की छुट्टी उनके साथ बिताकर मैं उन्हें ‘सरप्राइज’ देना चाहता हूं। मैं उनका आशीर्वाद लेने के लिए अब इंतजार नहीं कर सकता। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘आप सभी को होली की शुभकामनाएं। सभी आनंद से उत्सव मनाएं।’

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तेजप्रताप ने भूतों के डर से छोड़ा बंगला, सुशील मोदी बोले- वे लोग खुद भूत हैं

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र एवं पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने सरकारी बंगले को खाली कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बंगले में भूत छोड़ दिया है। इसलिए यहां रहना अब ठीक नहीं है। तेज प्रताप के बयान पर पलटवार करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि जो लोग खुद भूत हैं, वे भूत की बात करते हैं।

दरअसल, राज्य की महागठबंधन सरकार में तेजप्रताप जब स्वास्थ्य मंत्री थे तो उन्हें देशरत्न मार्ग स्थित तीन नंबर का बंगला आवंटित किया गया था। वास्तुविदों और ज्योतिषियों की सलाह पर उन्होंने उक्त बंगले में कई बदलाव भी किए थे। जुलाई में महागठबंधन में बिखराव के बाद राज्य सरकार ने सभी पूर्व मंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने का नोटिस जारी किया था। फिर भी कई पूर्व मंत्रियों ने अभी तक बंगला खाली नहीं किया है।

तेजप्रताप ने कहा कि उन्हें सरकारी भीख की जरूरत नहीं है। उनके पास पहले से ही 10 सर्कुलर रोड का बंगला है, जो उनकी मां राबड़ी देवी के नाम से आवंटित है।

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पाकिस्तान पहुंची UN टीम, पर सईद ने भारत-US की कोशिशों के खिलाफ चला अपना दांव

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की टीम के पैर रखने से पहले अपना दांव चल दिया है. इस टीम के पाक दौरे की वजह से हाफिज सईद को अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा था. बुधवार दोपहर को यह टीम पाकिस्तान पहुंची, लेकिन तब तक हाफिज खुद को सुरक्षित कर चुका था.

जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ने इस टीम के दौरे की वजह से मंगलवार शाम को लाहौर हाई कोर्ट में अपील की कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. कोर्ट ने हाफिज सईद की अपील सुनने के बाद उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

सईद ने कहा था कि भारत और अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तानी सरकार उसे फिर से गिरफ्तार कर सकती है. हाफिज की शिकायत के बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी सरकार को हाफिज के खिलाफ कोई आशंकित कदम लेने से रोक दिया है.

जानकारी के मुताबिक यूएनएससी की 1267 सेंक्शंस कमेटी की निगरानी समिति बुधवार दोपहर को पाकिस्तान पहुंच गई. समिति यह देखने के लिए आई है कि पाकिस्तान यूएन के प्रतिबंधों को लागू कर रहा है या नहीं. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तानी सरकार यूएन की कमेटी को हाफिज सईद या उसके परिसरों तक नहीं जाने देगी.

इससे पहले, हाफिज ने मंगलवार शाम को ही हाफिज सईद ने अपने वकील एके डोगर के जरिए अदालत में याचिका देकर कहा था कि उसके या उसके संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए. उसने इस याचिका में अपने चैरिटी अस्पतालों और स्कूलों का भी हवाला दिया था.

आपको बता दें कि हाफिज सईद को पिछले साल नवंबर में ही नजरबंदी से रिहाई मिली है. इसके बाद से वह पाकिस्तानी राजनीति में आने की कोशिश में लगा है. उसने इसके लिए नई राजनीतिक पार्टी ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ भी बनाई है.

माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना हाफिज सईद के राजनीति में आने में उसकी मदद कर रही है. पिछले दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस ही नहीं है तो उस पर कैसे कार्रवाई करें.

हाफिज का नाम 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 में शामिल किया गया था. वहीं अमेरिका ने जून 2014 में लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन करार दिया था.

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दोस्ती की मिसाल: बोले विनोद कांबली- सचिन के कारण फिर से आया क्रिकेट मैदान पर

भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज विनोद कांबली ने कहा कि उन्होंने कोच बनने का फैसला दोस्त और टीम के साथी रहे सचिन तेंदुलकर की सलाह पर किया. तेंदुलकर और कांबली दिग्गज क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर के शिष्य हैं. अपनी दोस्ती के लिए मशहूर इन दोनों खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया.

कांबली ने कहा कि क्रिकेट मैदान वह खिलाड़ी नहीं, बल्कि कोच के रूप में वापसी कर रहे हैं, जिसका श्रेय तेंदुलकर को जाता है. उन्होंने कहा,‘जब मैंने क्रिकेट से संन्याय लिया था, तब मैंने कमेंट्री या टीवी पर विशेषज्ञ बनने के बारे में सोचा, लेकिन क्रिकेट के प्रति मेरा प्यार हमेशा बना रहा, इसलिए मैं फिर से मैदान पर आ रहा हूं.’

बाएं हाथ का यह पूर्व बल्लेबाज मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के बांद्रा कुर्ला परिसर में एक क्रिकेट कोचिंग अकादमी के लॉन्च के मौके पर मौजूद था. इस अकादमी में वह कोचिंग सत्र आयोजित करेंगे. लगातार दो टेस्ट मैच में दोहरा शतक लगाने वाले देश के पहले बल्लेबाज कांबली ने कहा, ‘सचिन को पता है मुझे क्रिकेट से कितना लगाव है, इसलिए उन्होंने मुझ से कहा कि मैं कोचिंग देना शुरू करूं. उन्होंने मुझे जो रास्ता दिखाया मैं उस पर चलने की कोशिश कर रहा हूं.’

उन्होंने कहा कि कोचिंग लेने वाले छात्रों को वह उन मूल्यों के बारे में बताएंगे जो उन्होंने आचरेकर से सिखा है. कांबली ने कहा, ‘आचरेकर सर से मिले मूल्यों को मैं छात्रों के साथ साझा करूंगा.’

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प्रद्युम्न मामले में अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा

गुड़गांव के चर्चित प्रद्युम्न हत्याकांड में एक बड़ा फ़ैसला आया है.

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने फ़ैसला दिया है कि प्रद्युम्न की हत्या के नाबालिग अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाएगा.

11वीं में पढ़ने वाले इस अभियुक्त को सीबीआई ने आठ नवंबर को गिरफ़्तार किया था.

इस फ़ैसले के बाद अब जुवेनाइल बोर्ड ने ये मामला ज़िला सत्र अदालत को सौंप दिया है जहां 22 दिसंबर को अभियुक्त की पेशी होगी.

सात साल के प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या आठ सितंबर को हुई थी. उनका शव गुड़गांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में शौचालय के बाहर मिला था.

अभियुक्त भी उसी स्कूल का छात्र है. सीबीआई का दावा है कि अभियुक्त ने प्रद्युम्न की हत्या परीक्षाएं टलवाने के लिए की थी.

जुवेनाइल जस्टिस क़ानून में बदलाव के बाद ये पहला मामला है जिसमें किसी नाबालिग को जघन्य अपराध करने की वजह से बालिग मानकर मुकदमा चलाया जाएगा.

दिसंबर 2012 में हुए निर्भया हत्याकांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस क़ानून को सख़्त किया गया था. नया क़ानून जनवरी 2016 में लागू हुआ.

रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांवइमेज कॉपीरइट/AFP/GETTY

इस क़ानून के मुताबिक़

  • अगर जुर्म ‘जघन्य’ हो, यानी आईपीसी में उसकी सज़ा सात साल से ज़्यादा हो तो, 16 से 18 साल की उम्र के नाबालिग़ को वयस्क माना जा सकता है.
  • ऐसा होने पर किशोर अपराधी पर सामान्य कोर्ट में मुकदमा चलाए जाने के बारे में निर्णय लेने का अधिकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास होगा.
  • पुराने क़ानून के तहत 18 साल से कम उम्र के अभियुक्त पर मुकदमा अदालत की जगह जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता था.
  • जघन्य अपराधों में दोषी पाए गए किशोर अपराधी को जेल की सज़ा दी जा सकती है, हालांकि उसे उम्र क़ैद या मौत की सज़ा नहीं होगी.
  • दोषी पाए जाने की सूरत में अपराधी को अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए किशोर सुधार गृह भेजा जाता है.
रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांवइमेज कॉपीरइट/PTI

बालिग की तरह मुकदमा

किस अभियुक्त को बालिग माना जाए, इसकी सिफ़ारिश जांच एजेंसी करती है.

प्रद्युम्न मामले में सीबीआई ने अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की सिफ़ारिश की थी. साथ ही प्रद्युम्न के पिता ने भी इसके लिए अर्ज़ी लगाई थी.

जुवेनाइल बोर्ड के वजह पूछने पर सीबीआई ने बताया कि अभियुक्त का जुर्म जघन्य की श्रेणी में आता है.

  • अभियुक्त को अगले तीन साल तक सुधार गृह में रखा जा सकता है.
  • उसके बाद भी अगर ज़मानत न मिली तो उसे जेल भेज दिया जाएगा.
  • उस पर मुकदमा बालिग के तौर पर चलेगा लेकिन उसे उम्र क़ैद या फांसी की सज़ा नहीं हो सकती
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दलाई लामा से मिलने को बेताब हुए बराक ओबामा, पढ़िए कैसी रही मुलाकात

तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा भारत दौरे पर आये अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से दिल्ली में मिले। यह मुलाकात तिब्बतियों के लिये खास मायने रखती है। दिल्ली के होटल मौर्या में ओबामा से मिलने के बाद दलाई लामा धर्मशाला लौट आये हैं।

‘हम दोनों पुराने मित्र हैं’

दिल्ली से वापस धर्मशाला लौटते हुये दलाई लामा ने कांगड़ा एयरपोर्ट पर पत्रकारों को इस मुलाकात के बारे में बताते हुये कहा कि मुलाकात बेहद सुखद रही। मैं जानता हूं कि हम दोनों पुराने विश्वस्त मित्र हैं। दलाई लामा ने बताया कि जब उन्हें सूचना मिली कि बराक ओबामा भारत आ रहे हैं,तो उन्होंने ओबामा से मिलने की इच्छा जताई। इसके लिये ओबामा भी उतने ही उत्साहित थे। हम अब तक पांच बार आपस में मिल चुके हैं। हर मुलाकात रोचक रही है। आज करीब 45 मिनट तक चली मुलाकात में दलाई लामा ने विशव में पनपती अशांति व आतंकवाद पर चर्चा की।

‘विश्व शांति में ओबामा की अहम भूमिका’

दलाई लामा ने कहा कि बढ़ते धार्मिक कट्टरवाद से विश्व बंधुत्व की भावना खतरे में है। खून-खराबे व मारकाट से मानवता खतरे में है। लिहाजा विश्व में आज मानव धर्म को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिये खुद ओबामा भी सहमत हैं। मेरा मानना है कि ओबामा आज भी विश्व शांति में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हम तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ेंगे। दलाई लामा ने कहा कि वह कई प्रमुख लोगों से मिलते रहते हैं। अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराते रहते हैं,लेकिन अभी भी उनकी ओर से जो प्रयास होने चाहिये वह हुये नहीं। मैं चाहता हूं कि बात को कागजों में उकेरा जाये। मैं भारत में हूं लिहाजा मेरी सोच भारत की पुरातन पंरपरा शांति व सहनशीलता की रही है। शांति सद्भावना से ही बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है।

ओबामा से लामा को उम्मीद

बराक ओबामा की ओर मुखातिब होते हुये दलाई लामा ने कहा कि आप मात्र अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति नहीं हैं,बल्कि आप नोबेल पुरस्कार विजेता भी हैं। आप युवा हैं आप विश्व के लिये बहुत कुछ कर सकते हैं। दलाई लामा ने कहा कि ओबामा विश्व शांति के लिये हमारी अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। भले ही इसका परिणाम मेरी पीढ़ी न देख पाये लेकिन अगली पीढ़ी इसे जरूर देख सकेगी।

दलाई लामा कम करेंगे विदेशी दौरे, किये दो दूत नियुक्त

अपनी सेहत में आ रही समस्याओं के चलते तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा आने वाले दिनों में अपने विदेश दौरों पर विराम लगा सकते हैं। जिससे उनके विदेशी प्रशसंकों को निराशा झेलनी पड़ सकती है। इस बारे में खुद दलाई लामा ने धर्मशाला के पास मैक्लॉडगंज में एक समारोह में बयान दिये। दलाई लामा ने मैक्लॉडगंज में अंतरराष्ट्रीय युवाओं के एक समूह को संबोधित करते हुये कहा कि उनकी थकान काफी बढ़ गई है, मैं 82 साल का हूं, और पिछले साल के बाद से मेरी थकान बढ़ती जा रही है इसलिए विदेश में होने वाले कार्यक्रमों में उनकी तरफ से निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री डॉ लोबसंग सांग्ये के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री प्रो सामदोंग रिंपोछे आधिकारिक दूतों के रूप में काम करेंगे।

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इस घटना ने एडोल्फ हिटलर को बनाया जर्मनी का नाजी तानाशाह

दुनिया को अपनी तानाशाही और क्रूरता से लोगों पर शासन करने वाले एडोल्फ हिटलर को यदि जर्मनी की सोशलिस्ट पार्टी में सदस्यता मिल गई होती तो शायद दूसरा विश्व युद्ध नहीं होता और न ही नाजीवाद का उदय हो पाता. ये दावा अबेरदीन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस वेबर ने सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक हैंस जॉर्ज के बयान से जुड़े अप्रकाशित ऐतिहासिक दस्तावेजों के हवाले से किया है. ये दस्तावेज म्यूनिख स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्पररी हिस्ट्री में सुरक्षित रखा गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थॉमस वेबर का दावा है कि हिटलर के तानाशाह बनने के पीछे उसे सोशलिस्ट पार्टी में जगह न मिलना सबसे बड़ी वजह है. उन्हें मिले दस्तावजों में इस बात का जिक्र है कि 1919 में जर्मन सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ था. इससे प्रभावित युवा एडोल्फ पार्टी का हिस्सा बनना चाहता था. इसके लिए वो पार्टी के प्रकाशन गृह में ग्रेसिंगर से मिलने पहुंचा और पार्टी में शामिल होने के साथ ही उसके मुख्यपत्र के लिए लिखने की इच्छा जताई.

ग्रेसिंगर ने एडोल्फ को शामिल करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसके लिए पार्टी या मुख्यपत्र में कोई जगह नहीं है. इसके बाद उन्होंने एडोल्फ को पैसे दिए और वहां से जाने के लिए कह दिया. 1920 में एडोल्फ नाजी पार्टी में शामिल हो गया, जिसका कद सोशलिस्ट पार्टी से काफी छोटा था. लेकिन 1921 में स्थिति बदली और सोशलिस्ट पार्टी को भंग कर दिया गया.

थॉमस की माने तो यदि हिटलर को सोशलिस्ट पार्टी में जगह मिल गई होती तो उसे कोई छोटा पद मिलता और वो इतना बड़ा नेता नहीं बन पाता. नाजी पार्टी से जुड़ने के बाद एक साल तक वो छोटे पद पर ही खुशी से काम करता रहा. 1921 में वो पार्टी में नेता बना, जिसके बाद उसने मुड़कर नहीं देखा.