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अफगानिस्तान ने लगाई शर्मनाक रिकॉर्ड्स की झड़ी, तोड़ा 90 साल का रिकॉर्ड

अफगानिस्तान की टीम ने इस मैच की अपनी पहली पारी में 109 रन बनाने के लिए सिर्फ 27.5 ओवर तक बल्लेबाज़ी की। इसी के साथ अफगानिस्तान ने पहला टेस्ट मैच में सबसे कम ओवर बल्लेबाज़ी करने का रिकॉर्ड भी बना दिया। अफगानिस्तान से पहले ये रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम था। बांग्लादेश की टीम ने अपने पहले टेस्ट की दूसरी पारी मेंं 46.3 ओवर बल्लेबाज़ी की थी। बांग्लादेश से पहले ये रिकॉर्ड न्यूज़ीलैंड के नाम था जो अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में 47.1 ओवर में ही सिमट गई थी।

भारत ने पहली पारी में 474 रन बनाए थे और इसके जवाब में अफगानिस्तान अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में सिर्फ 109 रनों पर सिमट गई। इस लिहाज़ से भारत को 365 रन की बढ़त मिली और फिर टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन खेलने का न्यौता दिया। पहले टेस्ट मैच में फॉलोऑन खेलते हुए ये किसी भी टीम पर बनाई गई सबसे बड़ी बढ़त रही। इससे पहले 1928 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज़ के बीच खेले गए मैच में इंग्लिश टीम ने कैरिबियाई टीम पर 224 रन की बढ़त बनाई थी। वो टेस्ट मैच लॉर्ड्‍स के मैदान पर खेला गया था और वो वेस्टइंडीज़ का पहला टेस्ट मैच था।

चिन्नास्वामी में अफगानिस्तान की टीम द्वारा बनाया गया 109 रन टेस्ट की एक पारी में सबसे कम रन हैं। इससे पहले 2017 में बेंगलुरु के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया की टीम के नाम इस मैदान पर सबसे कम रन बनाने का रिकॉर्ड था। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम सिर्फ 112 रन बनाकर सिमट गई थी।

पहली पारी में मिली बड़ी बढ़त के आधार पर भारत ने अफगानिस्तान को फॉलोआन खेलने पर मजबूर कर दिया और दूसरी पारी में मेहमान टीम 38.4 ओवर में सिर्फ 103 रन पर ऑल आउट हो गई। टेस्ट मैच में ये भारत की सबसे बड़ी जीत थी। इससे पहले भारत ने वर्ष 2017 में बांग्लादेश को पारी और 239 रन से हराया था। इस मैच में भारतीय बल्लेबाजों और उसके बाद गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन रहा। शिखर धवन को मैन ऑफ द मैच चुना गया। इस मैच में विराट की जगह रहाणे ने कप्तानी की थी और उनकी अगुआई में भारतीय टीम ने इस एतिहासिल टेस्ट मैच में जीत हासिल की। इस टेस्ट मैच के जरिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले अफगानिस्तान को भारत ने एक पारी और 262 रन से हराया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारत ने पहली बार किसी टीम के खिलाफ सिर्फ दो दिनों में ही टेस्ट मैच जीतकर खिताब पर कब्जा किया।

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वॉटसन ने रचा IPL का नया इतिहास

IPL 2018 के फाईनल मैच में वॉटसन जब अपनी पारी की शुरुआत करने आए तब वो 10 गेंदों के बाद यानी 11वें गेंद पर अपना खाता खोला और इसके बाद ऐसी पारी खेली की टीम को फाइनल में जीत दिला दी। शेन वॉटसन ने इस आइपीएल में अपना दूसरा शतक लगाया। शेन के शतक के दम पर चेन्नई ने तीसरी बार आइपीएल का खिताब अपने नाम किया।

वॉटसन ने रचा इतिहास
चेन्नई के ओपनर बल्लेबाज शेन वॉटसन का खतरनाक रूप हैदराबाद के खिलाफ फाइनल मैच में देखने को मिला। उन्होंने गेंदों 51 पर अपना शतक पूरा किया। वॉटसन ने हैदराबाद के खिलाफ 57 गेंदों पर नाबाद 117 रन की पारी खेली और अपनी टीम को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। शेन वॉटसन आइपीएल इतिहास के पहले ऐसे बल्लेबाज बन गए जिन्होंने रन चेज करते हुए शतक लगाया। वॉटसन ने अपनी शतकीय पारी के दौरान 11 चौके और 8 छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 205.26 का रहा।

ठोका आइपीएल का दूसरा शतक
शेन वॉटसन इस आइपीएल में दो शतक लगाने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे। इस मैच से पहले उन्होंने लीग मुकाबले में राजस्थान के खिलाफ 106 रन की पारी खेली थी। इसके बाद फाइनल मुकाबले में उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ नाबाद 117 रन बनाए।

आइपीएल 2018 में शेन का सफर
शेन वॉटसन की बल्लेबाजी की बात करें तो उन्होंने आइपीएल में खेले 15 मैचों में 39.64 की औसत से 555 रन बनाए। रन बनाने के मामले में आइपीएल में पांचवें नंबर पर रहे। वॉटसन ने 15 मैचों में 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाए और उनका स्ट्राइक रेट 154.59 का रहा। वॉटसन ने इस आइपीएल में 44 चौके और 35 छक्के लगाए। हालांकि गेंदबाजी में वो कुछ खास नहीं कर पाए और सिर्फ 6 विकेट ही ले सके।

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एबी डिविलियर्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, इनके नाम दर्ज़ है ये विश्व रिकॉर्ड

डिविलियर्स ने द. अफ्रीका के लिए 114 टेस्ट 228 वनडे और 78 टी 20 मैच खेले हैं। 114 टेस्ट मैचों में 8765 रन बनाए हैं जिसमें 22 शतक और 46 अर्धशतक बनाए हैं। वे एक बेहतरीन बल्लेबाज के साथ ही एक शानदार विकेट कीपर भी रह चुके हैं।

एक वीडियो संदेश में कहा कि वे दक्षिण अफ्रीका और दुनियाभर में अपने फैंस के शुक्रगुजार हैं। एबी ने कहा अब समय आ गया है जब दूसरे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाए। ईमानदारी से कहूं तो मैं अब थक गया हूं। ये एक मुश्किल निर्णय है और मैने ये फैसला काफी सोच समझकर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि  मैं अपने संन्यास का एलान बेहतरीन क्रिकेट खेलते हुए करना चाहता था। हालांकि वे घरेलू क्रिकेट के लिए उपलब्ध रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक लगाने का रिकॉर्ड भी ए बी डिविलियर्स के नाम ही है। ये कमाल उन्होंने 18 जनवरी 2015 को वेस्टइंडीज के खिलाफ महज 31 गेंदों में शतक लगाकर किया था। डीविलियर्स ने कोरी एंडरसन के 36 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर ये रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 16 छक्कों और 9 चौके की मदद से वनडे का यह कीर्तिमान बनाया। उन्होंने इस मैच में कुल 149 रन बनाए थे।

एबी डीविलियर्स के नाम 31 गेंदों में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड तो है ही इसके अलावा सबसे तेज 150 रनों का रिकॉर्ड भी डीविलियर्स के ही नाम पर है। साल 2015 विश्व कप में डीविलियर्स ने सिडनी के मैदान पर 64 गेंदों में 150 रन ठोककर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था। उन्होंने इस दौरान नाबाद 66 गेंदों में 162 रन बनाए थे जिसमें 17 चौके और 8 छक्के शामिल थे।

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CWG 2018: राहुल ने दिलाया भारत को चौथा गोल्ड, वेटलिफ्टिंग में हैटट्रिक

कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को भारतीय वेटलिफ्टर्स ने दो गोल्ड मेडल जीते। वेटलिफ्टर सतीश कुमार शिवलिंगम ने शनिवार को 77 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड जीता। उधर, 85 किग्रा कैटेगिरी में वेंकट राहुल रागला ने भी भारत को सोना दिलाया। राहुल मां की बीमारी की वजह से रियो ओलंपिक में दावेदारी नहीं कर पाए थे। गोल्ड कोस्ट में भारत को अब तक 4 स्वर्ण पदक मिल चुके हैं।

बता दें कि भारत पहली बार 1934 में शामिल हुआ था। इस तरह 84 साल में भारत वेटलिफ्टिंग में अब तक 42 गोल्ड जीत चुका है।

सतीश ने कुल 317 किग्रा वजन उठाया

– 25 साल के सतीश ने स्नैच के पहली कोशिश में 136, दूसरी में 140 और तीसरी में 144 किग्रा का वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क में पहली कोशिश में 169 और दूसरी में 173 किग्रा का वजन उठाया। इसके साथ ही उनका गोल्ड पक्का हो गया। इसलिए उन्होंने तीसरी कोशिश नहीं की।

– सतीश ने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में इसी कैटेगरी (77 किग्रा) में गोल्ड जीता था। उन्होंने तब 328 (स्नैच में 149 और क्लीन एंड जर्क में 179) किग्रा का वजन उठाया था।

– 2016 रियो ओलिंपिक में वह 11वें स्थान पर रहे थे। रियो में उन्होंने 329 (स्नैच में 148 और क्लीन एंड जर्क में 181) किग्रा का वजन उठाया था।

जैक ने सतीश से 5 किग्रा कम वजन उठाया

– जैक ओलिवर ने कुल 312 किग्रा वजन उठाया। उन्होंने स्नैच की पहली कोशिश में 141, दूसरी में 145 किग्रा वजन उठाया। तीसरी कोशिश में 148 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहली कोशिश में 167 किग्रा वजन उठाया। दूसरी और तीसरी कोशिश में 171 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन दोनों बार फाउल कर गए।

– इसी तरह फ्रांकोइस ने कुल 307 किग्रा वजन उठाया। फ्रांकोइस ने स्नैच की पहली कोशिश में 128, दूसरी में 133 और तीसरी में 136 किग्रा वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहली कोशिश में 162 किग्रा वजन उठाया। दूसरी कोशिश में 168 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। तीसरी कोशिश में 169 किग्रा का वजन उठाया।

कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में चार बार जीत चुके हैं गोल्ड
– सतीश कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में चार बार 2012, 2013, 2015 और 2017 में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
– 2012 में समोआ के आपिया में उन्होंने 297 (स्नैच में 131 और क्लीन एंड जर्क में 166) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2013 में मलेशिया के पेनांग में उन्होंने 317 (स्नैच में 142 और क्लीन एंड जर्क में 175) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2015 में पुणे में उन्होंने 325 (स्नैच में 150 और क्लीन एंड जर्क में 175) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2017 में गोल्ड कोस्ट में उन्होंने 320 (स्नैच में 148 और क्लीन एंड जर्क में 172) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2014 अलमाटी (कजाखिस्तान) वर्ल्ड चैम्पियनशिप में वह 22 स्थान पर रहे थे। वहां उन्होंने 317 (स्नैच में 140 और क्लीन एंड जर्क में 177) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2015 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उन्होंने स्नैच में 142 किग्रा का वजन उठाया था, लेकिन क्लीन एंड जर्क की तीनों कोशिश में फाउल कर गए थे।
– 2017 में अॅनाहाइम (अमेरिका) वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 14वें नंबर पर रहे थे। वहां उन्होंने 328 (स्नैच में 148 और क्लीन एंड जर्क में 180) किग्रा का वजन उठाया था।

सतीश के पिता भी वेटलिफ्टर रहे
– तमिलनाडु के वेल्लोर में जन्मे सतीश सदर्न रेलवे में चेन्नई में सीनियर क्लर्क के पद पर तैनात हैं। उनके पिता सेना से रिटायर हैं। सेना से रिटायर होने के बाद वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में वाचमैन थे। वह भी वेटलिफ्टर रहे हैं।

वेटलिफ्टिंग में एकमबारम करुणाकरन ने दिलाया था देश को पहला गोल्ड

वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए पहली बार गोल्ड एकमबारम करुणाकरन ने जीता था। उन्होंने 1978 एडमोनटन कॉमनवेल्थ गेम्स में फ्लाईवेट ओवरऑल में 205 किग्रा वजन उठाया था। वह तमिलनाडु के तिरुवल्लूर के रहने वाले थे।

अपना बेस्ट करने से चूके वेंकट राहुल

– वेंकट राहुल ने स्नैच की पहली कोशिश में 147 किग्रा वजन उठाया, दूसरी में 151 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। तीसरी कोशिश में 151 किग्रा वजन उठाया।

– क्लीन एंड जर्क में पहली कोशिश में 182 और दूसरी में 187 किग्रा वजन उठाया। तीसरी कोशिश में 191 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए।

– हालांकि वह अपना बेस्ट यहां नहीं कर सके। पिछले साल कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में उन्होंने 351 किग्रा वजन उठाया था।

351 किग्रा वजन उठाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय वेटलिफ्टर हैं वेंकट राहुल
– 16 मार्च, 1997 को आंध्र प्रदेश के स्टुअर्टपुरम में जन्में वेंकट राहुल पहली बार तब सुर्खियों में आए थे, जब 2015 में पुणे में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में उन्होंने 85 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था। तब उन्होंने 327 (स्नैच में 146 और क्लीन एंड जर्क में 181) किग्रा वजन उठाया था।

– 2017 में गोल्ड कोस्ट में हुई कॉमंनवेल्थ चैम्पियनशिप में 85 किग्रा कैटेगरी में उन्होंने गोल्ड जीता था। उन्होंने 351 (स्नैच में 156 और क्लीन एंड जर्क में 195) किग्रा वजन उठाया था। इतना वजन उठाने वाले सबसे युवा भारतीय वेटलिफ्टर हैं।

– 2015 में गोल्ड जीतने के बाद वह रियो ओलिंपिक की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन मां की तबियत खराब होने के कारण ट्रायल्स नहीं दे पाए।

84 साल में भारत वेटलिफ्टिंग में 42 गोल्ड जीते

साल गोल्ड मेडल
1978 1
1982 0
1986 भाग नहीं लिया
1990 12
1994 3
1998 3
2002 11
2006 3
2010 2
2014 3
2018 4
कुल 42

पदक तालिका: टॉप 5 देश

देश गोल्ड सिल्वर ब्रॉन्ज कुल
ऑस्ट्रेलिया 17 16 17 50
इंग्लैंड 14 11 4 29
कनाडा 5 5 6 16
भारत 4 1 1 6
स्कॉटलैंड 3 5 6 14

* यह तालिका भारतीय समयानुसार शनिवार शाम 5 बजे तक अपडेट है।

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5 दिन में डिफॉल्‍टर हो सकता है पंजाब नेशनल बैंक, जानें क्‍या होगा लाखों कस्‍टमर्स का

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रामनवमी विशेष: जानें रामनवमी का इतिहास, महत्व और त्यौहार के बारे में!

रामनवमी एक धार्मिक और पारम्परिक त्योहार है, जो हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा पूरे उत्साह के साथ हर साल मनाया जाता है। यह अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र भगवान राम, के जन्मदिन के रुप में मनाया जाता है। भगवान राम, हिन्दू देवता, भगवान विष्णु के दशावतार में से 7वें अवतार थे। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार हर वर्ष चैत्र मास (महीने) के शुक्ल पक्ष के 9वें दिन पड़ता है। रामनवमी को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी भी कहा जाता है, जो नौ दिन लम्बें चैत्र-नवरात्री के त्योहार के साथ समाप्त होती है।

हिन्दू धर्म के लोग इसे नौ दिन के त्योहार के रुप में, पूरे नौ दिनों पर राम चरित्र मानस के अखंड पाठ, धार्मिक भजन, हवन, पारम्परिक कीर्तन और पूजा व आरती के बाद प्रसाद के वितरण आदि का आयोजन करने के द्वारा मनाते हैं। भक्त भगवान राम की शिशु के रुप में मूर्ति बनाते हैं और उसके सामने भगवान की पूजा करते हैं। जैसा कि सभी जानते हैं कि, भगावन विष्णु के 7वें अवतार भगवान राम थे और उन्होंने सामान्य लोगों के बीच में उनकी समस्याएं हटाने के लिए जन्म लिया था। लोग अपनी समस्याओं को दूर करने और बहुत अधिक समृद्धि व सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य से मन्दिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को अपने पारम्परिक अनुष्ठानों करने के लिए सुसज्जित करते हैं और प्रभु को फल व फूल अर्पण करते हैं। वे सब इस दिन वैदिक मंत्रों का जाप, आरती और अन्य बहुत से धार्मिक भजनों का गान करने के लिए मन्दिरों या अन्य धार्मिक स्थलों पर एकत्रित होते हैं।

बहुत से भक्त इस त्योहार को पूरे नौ दिनों का उपवास रखने के द्वारा मनाते हैं और नवरात्री के अन्तिम दिन उन्हें पूरा आशीर्वाद मिलता है। दक्षिणी भारतीय लोग इस दिन को भगवान राम और माता सीता की शादी की सालगिरह के रुप में मनाते हैं। दक्षिणी क्षेत्र में नवरात्री मनाने के लिए सभी मन्दिर सजाए जाते हैं। यद्यपि, वाल्मिकी रामायण के अनुसार मिथला और अयोध्या के लोग शादी की सालगिरह को विवाह पंचमी पर मनाते हैं। हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा अयोध्या (उत्तर प्रदेश), सीतामढ़ी, बिहार, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भद्राचलम, आंध्रप्रदेश आदि, स्थलों पर राम नवमी के भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है। कुछ स्थानों (जैसे: अयोध्या, वनारस, आदि) पर, भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की रथ यात्रा अर्थात् जूलुस (शोभा यात्रा) को हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा पवित्र नदी गंगा या सरयू में पवित्र डुबकी लेने के बाद निकाला जाता है।

राम नवमी का इतिहास

रामायण हिन्दू धर्म का महान और धार्मिक महाकाव्य है, जो अयोध्या के राजा दशरथ और उनके पुत्र प्रभु श्री राम का इतिहास बताता है। एकबार, त्रेता युग में दशरथ नामक एक राजा थे, जिनकी तीन पत्नियाँ (कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी) थी। उनके कोई भी संतान नहीं थी, जिसके कारण वे अयोध्या के भावी भविष्य के राजा के लिए चिन्तित रहते थे। एक दिन उन्हें महान ऋषि वशिष्ठ ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा को पूरा करने के लिए सन्तान प्राप्ति यज्ञ करने की सलाह दी।

इस यज्ञ को करने के लिए विशेष रुप से ऋष्यशृंग को आमंत्रित किया गया। यज्ञ पूरा करने के बाद, यज्ञ देवता ने उन्हें दिव्य खीर से भरा हुआ कटोरा दिया। उन्होने कटोरे की दिव्य खीर को तीनों पत्नियों में खिला देने के लिए दिया। खीर खाने के कुछ दिनों के बाद में, सभी रानियाँ गर्भवती हो गई। चैत्र के महीने में नौंवी के दिन कौशल्या ने दोपहर के समय राम को, कैकेयी ने भरत को और सुमित्रा ने जुड़वा पुत्र लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।

कौशल्या के पुत्र राम, भगवान विष्णु के 7वें अवतार थे, जिन्होंने अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना करने के लिए धरती पर जन्म लिया था। भगवान राम अपने भक्तों को दुष्टों के प्रहार से बचाया था उन्होंने रावण सहित सभी राक्षसों का सर्वनाश करने के द्वारा पूरी धरती से अधर्म का नाश करके पृथ्वी पर धर्म को स्थापित किया। अयोध्या के निवासी अपने नए राजा से बहुत खुश रहते थे, इसलिए उन्होंने अपने राजा का जन्मदिन हर वर्ष राम नवमी के रुप में बहुत अधिक उत्साह और आनंद के साथ मनाना शुरु कर दिया, जो आज एक परम्परा है और धार्मिक रुप से पूरे भारत में हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा मनाया जाता है।

राम नवमी का समारोह

भारत के दक्षिणी क्षेत्र में रहने वाले हिन्दू धर्म के लोग आमतौर पर इस उत्सव को कल्याणोत्सवम अर्थात् भगवान की शादी के समारोह के रुप में मनाते हैं। वे इसे, राम नवमी के दिन, अपने घरों में हिन्दू देवी-देवताओं राम-और सीता की मूर्तियों के साथ मनाते हैं। वे राम नवमी का समारोह करने के लिए दिन के अन्त में भगवान की मूर्तियों के साथ शोभायात्रा निकालते हैं। यह अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से मनाई जाती है; जैसे- महाराष्ट्र में चैत्र नवरात्री, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक या तमिलनाडु में वसंतोत्सव आदि के नाम से मनाई जाती है।

लोग इस त्योहार को भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी की मूर्तियों को सजाने के द्वारा मनाते हैं। वे अनुष्ठान करने के लिए मिठाईयाँ, मीठा पेय, तैयार करते हैं, वे हवन और कथा करने के लिए पंडित जी को आमंत्रित करते हैं, वे अपने घरों से बुरी शक्तियों को हटाने और अच्छी शक्तियों और ऊर्जा को लाने के लिए पूजा के अन्त में धार्मिक भजन, मंत्र और आरती पढ़ते हैं। वे अपने परिवार के सदस्यों और अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए भी प्रार्थना करते हैं।

वे पूरे नौ दिन या नवरात्री के अन्तिम दिन पवित्र वार्षिक पूजा करने के लिए उपवास रखते हैं। वे हिन्दूओं के पवित्र महाकाव्य रामायण का पाठ करते हैं; अपने जीवन में खुशहाली और शान्ति लाने के लिए भगवान राम और सीता की पूजा करते हैं। वे सुबह को जल्दी उठकर नहाने के बाद हिन्दूओं के देवता सूर्य की उपासना करते हैं। लोग भगवान राम के साथ, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की पूजा करते हैं, क्योंकि ये सभी दिल से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

राम नवमी त्योहार का महत्व

राम नवमी का त्योहार हिन्दू धर्म के लोगों के लिए महान महत्व का त्योहार है। चैत्र के महीने में 9वें दिन रामनवमी के त्योहार को मनाना, पृथ्वी से बुरी शक्तियों के हटने और धरती पर दैवीय शक्तियों के आगमन का प्रतीक है। पृथ्वी से असुरी शक्तियों को हटा कर धर्म की स्थापना करने के लिए, भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के घर पुत्र रुप में जन्म लिया था। रामनवमी हिन्दू धर्म के लोगों के लिए पारम्परिक समारोह है, जिसे वे अपनी आत्मा और शरीर को पवित्र करने के लिए पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। भगवान राम धरती पर विशेष कार्य या जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अर्थात् राक्षस राज रावण को मारकर धर्म की स्थापना करने के लिए आए थे।

इस त्योहार का उत्सव बुरी शक्तियों पर अच्छाई की विजय को और अधर्म के बाद धर्म की स्थापना को प्रदर्शित करता है। राम नवमी का त्योहार प्रातः काल में हिन्दू देवता सूर्य को जल अर्पण करने के साथ शुरु होता है, क्योंकि लोगों का विश्वास है कि, भगवान राम के पूर्वज सूर्य थे। लोग पूरे दिन भक्तिमय भजनों को गाने में शामिल होने के साथ ही बहुत सी हिन्दू धार्मिक पुस्तकों का पाठ करते और सुनते हैं। इस समारोह के आयोजन पर धार्मिक लोगों या समुदायों के द्वारा वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है

इस दिन पर उपवास रखना शरीर और मन को शुद्ध रखने का एक अन्य महत्वपूर्ण तरीका है। कुछ स्थानों पर, लोग धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव रामलीला का आयोजन, लोगों के सामने भगवान राम के जीवन के इतिहास को बताने के लिए करते हैं। लोग नाटकीय रुप में भगवान राम के जीवन के पूरे इतिहास को बताते हैं। राम नवमी के त्योहार की रथ यात्रा का पारम्परिक और भव्य जूलुस शान्तपूर्ण राम राज्य को प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा तरीका है, जिसमें लोग भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियों को अच्छे ढंग से सजाते हैं और फिर गलियों में शोभायात्रा निकालते हैं।

आमतौर पर, लोग शरीर और आत्मा की पूरी तरह से शुद्धि की मान्यता के साथ अयोध्या की पवित्र सरयू नदी में स्नान करते हैं। दक्षिणी क्षेत्र के लोग इस अवसर को भगवान राम और माता सीता के विवाह की सालगिरह के रुप में मनाते हैं, जो पति और पत्नी के बीच प्यार के बंधन को बढ़ाने का प्रतीक है।

श्री राम स्तुति

2018 में रामनवमी पूजा का महूर्त : सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक।

पूजा करने की पूरा कार्यकाल: 2 घंटे और 25 मिनट।

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Donald Trump to meet Kim Jong Un: A recap of US-North Korea’s vehement relations

Following a historic announcement at the White House, US President Donald Trump and North Korean leader Kim Jong Un are poised for a face-to-face meeting.

Since the end of the Korean War, the countries` relations have been marked by high tensions and periodic, but short-lived, thaws.

Here is a recap of their troubled history: In 1945 Japan`s defeat in World War II ends its occupation of Korea. The peninsula is divided along the 38th parallel between the Soviet-backed regime of Kim Il-Sung in the North and a South under US protection.

In June 1950 North Korea, later assisted by China, invades the South. A coalition led by the United States retakes Seoul. In July 1953, an armistice — not a full-fledged peace treaty — is signed and Washington imposes sanctions on Pyongyang.In January 1968, the spy ship USS Pueblo is captured by North Korea. After 11 months, its 83 crew members are released. According to Pyongyang, the ship violated its territorial waters, a charge the United States denies.

In 1969, North Korea shoots down a US reconnaissance aircraft.In June 1994, former US president Jimmy Carter makes an unprecedented visit to North Korea.

In October, three months after the death of Kim Il-Sung and his succession by his son Kim Jong-Il, Pyongyang and Washington sign a bilateral agreement. North Korea commits to freeze and dismantle its military nuclear program in exchange for the construction of civilian reactors.

In 1999, a year after its first test of a long-range ballistic missile, Kim Jong-Il declares a moratorium on missile tests and Washington eases sanctions.

In October 2000, US Secretary of State Madeleine Albright meets Kim Jong-Il in Pyongyang.In January 2002, US president George W. Bush labels North Korea, Iran and Iraq an “axis of evil.”

In October, Washington accuses Pyongyang of conducting a secret uranium enrichment program in violation of the 1994 agreement.

In August 2004, North Korea declares it is impossible to participate in a new nuclear program with the United States, attacking Bush as a “tyrant” worse than Hitler and a “political imbecile.”

In 2006, Pyongyang conducts its first nuclear test.In October 2008, the United States withdraws North Korea from its blacklist of state sponsors of terrorism in return for controls on all of its nuclear installations.

Pyongyang had been on the blacklist since 1988 due to its suspected involvement in the bombing of a South Korean airliner in 1987 that killed 115 people. In January 2016, American student Otto Wambier is arrested and sentenced to 15 years of hard labor for allegedly stealing a propaganda poster.

He dies in June 2017, one week after being returned home to the US in a coma. Numerous Americans have been held for years before being repatriated. Three are currently detained there.On January 2, 2017, then US President-elect Donald Trump says North Korea will never be allowed to develop a nuclear weapon capable of reaching US territory.

In July, North Korea conducts two intercontinental ballistic missile tests. Kim declares: “The entire US territory is now within our ICBM range.”

On August 8, Trump threatens “fire and fury” if Pyongyang continues to threaten the United States.

On August 29, Pyongyang test fires a ballistic missile over Japan. The US president says, “Talking is not the answer,” although his defense secretary does not rule out diplomacy.

September 3, North Korea carries out its sixth nuclear test, announcing a “perfect test” of a hydrogen bomb that it claims can be mounted on a missile.On September 21, Washington unveils tougher sanctions to curb North Korea`s nuclear and ballistic missile program. The announcement comes on the heels of Trump`s maiden speech to the UN General Assembly, in which he nicknames Kim “Rocket Man” and declares him to be on a “suicide mission.”

A day later on September 22, Kim brands Trump “mentally deranged” and a “dotard”, and warns he will pay dearly for his threats to destroy North Korea. As 2017 closes, Kim boasts his missile arsenal can hit any city on the US mainland.

On January 3, 2018, Trump raises eyebrows as he responds to Kim`s New Year warning that he has a “nuclear button” on his desk. “I too have a Nuclear Button, but it is a much bigger & more powerful one than his, and my Button works!”, he writes. Pyongyang brands his outburst “the spasm of a lunatic” and the “bark of a rabid dog.”

On February 25, North Korea slams what Trump describes as the “heaviest sanctions ever” as an “act of war.”

Meanwhile, North Korean general Kim Yong Chol arrives in the South for the Winter Olympics closing ceremony — also attended by Trump`s daughter Ivanka — part of North Korea`s Olympic Games charm offensive. On March 8, 2018, in a remarkable announcement at the White House, South Korean national security advisor Chung Eui-yong says Kim has invited US Trump to meet by May, and will “refrain from any further nuclear or missile tests.”

The White House says Trump has accepted the invitation, but does not set a date or locations for the talks, and adds that sanctions against North Korea will stay in place.

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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आज ही के दिन वनडे में दोहरा शतक जड़ सचिन तेंदुलकर ने रच दिया था इतिहास

भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शनिवार को टी-20 सीरीज का फाइनला मुकाबला खेलना है। 24 फरवरी को होने वाले इस मैच को जीतने के लिए दोनों टीमों के कप्तान पूरा जोर लगाएंगे। अगर इतिहास की बात करें तो 24 परवरी भारतीय टीम के लिए लकी साबित रहा है। 8 साल पहले आज ही के दिन भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे में दोहरा शतक जड़ एक नया रिकॉर्ड अपने नाम किया था। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका की टीम भारत दौरे पर तीन वनडे मैच खेलने आई थी। सीरीज का पहले मैच बेहद रोमांचक रहा और भारतीय टीम वो मैच एक रन से जीतने में कामयाब रही। वहीं दूसरे मैच में सचिन तेंदुलकर की नाबाद 200 रनों की बदौलत भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 153 रनों से हरा दिया। ग्‍वालियर में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत की तरफ से वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर ओपनिंग करने आए। सहवाग के 9 रन पर आउट होने के बाद सचिन ने दिनेश कार्तिक के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 150 से ऊपर रनों की साझेदारी की। इस दौरान सचिन बेहतरीन लय में नजर आ रहे थे और हर तरफ शॉट्स खेलने में कामयाब हो रहे थे।

cricket world records, Sachin Tendulkar, Chris Gayle, Virender Sehwag, Rohit Sharma, double hundred, highest individual score in ODIs, highest individual score in T20s, Highest team total in T20s, Fastest T20 Hundred, Chris Gayle 175, Chris Gayle fastest century, Jansatta Sports gallary, jansatta sports news gallary2010 में ग्वालियर कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे में डबल सेंचुरी बनाई थी।

इस मैच में सचिन ने 147 गेंदों में नाबाद 200 रन बनाए और वनडे में दोहरा शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर बने। सचिन ने अपनी पारी के दौरान 25 चौके और 3 छक्के भी लगाए। सचिन की यह पारी आज भी फैंस के जहन में तरोताजा है। इस मैच में सचिन के अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी 35 गेंदों में 68 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, इस दौरान उन्होंने 7 चौके और 4 छक्के लगाए।

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INDvsSA : 5 हीरो जिन्होंने दिलाई टीम इंडिया को कभी न भूलने वाली जीत

टीम इंडिया को आखिरकार वह जीत मिल ही गई, जिसके लिए टीम पिछले 26 साल से इंतजार कर रही थी. टेस्ट सीरीज में पहले दो टेस्ट बुरी तरह हारने के बाद टीम इंडिया का टेस्ट सीरीज जीतने का सपना टूट गया. लेकिन जोहानिसगबर्ग में तीसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया को मिली जीत के बाद सब कुछ बदल गया. टीम ने छह मैचों की सीरीज के 5वें मैच में ही सभी हार और इतिहास को भुलाते हुए अफ्रीका को पहली बार उसकी ही धरती पर धूल चटा दी. टीम को इस जीत के लिए 26 साल लंबा इंतजार करना पड़ा.

टीम इंडिया की इस जीत में अगर ध्यान से देखें तो 5 खिलाड़ियों का सबसे अहम योगदान रहा. विराट कोहली, शिखर धवन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और पांचवें मैच में फॉर्म में लौटे रोहित शर्मा. एक मैच में रहाणे का बल्ला भी बोला. हालांकि टीम का मध्यक्रम इस पूरी सीरीज में बुरी तरह नाकाम साबित हुआ. ये टीम के लिए चिंता की बात होगी.

वैसे देखे जाए तो इस पूरी सीरीज में अगर शिखर धवन और विराट कोहली का बल्ला अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं गरजता तो भारत को ये ऐतिहासिक जीत शायद ही मिलती. टीम इंडिया के इन दो बल्लेबाजों ने अफ्रीका में सबसे ज्यादा रन बनाए. यही हाल गेंदबाजी में रहा. टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज इस सीरीज में कुछ खास कमाल नहीं कर सके.

1. विराट कोहली : इस सीरीज के सबसे बड़े हीरो विराट कोहली ही रहे. टेस्ट के बाद वनडे सीरीज में भी वह 5 मैचों में सबसे ज्यादा रन बना चुके हैं. उनके बल्ले ने अब तक 2 शतक और दो अर्धशतकों की मदद से 429 रन बनाए हैं. विराट दक्षिण अफ्रीका में द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 350 से अधिक रन बनाने वाले एबी डिविलियर्स के बाद दूसरे बल्लेबाज बन गए. डिविलियर्स ने 2013 में पाकिस्तान के खिलाफ 367 रन बनाये थे.

2. शिखर धवन : 5 मैचों में शिखर धवन अब तक 305 रन बना चुके हैं. इसमें 2 अर्धशतक और 1 शतक शामिल है. चौथे मैच में उन्होंने अपने 100वें मैच में शतक जड़कर पहले भारतीय होने का गौरव पाया. इससे पहले अपने 100वें मैच में कोई भी भारतीय खिलाड़ी शतक नहीं जड़ पाया था. इस पूरी सीरीज में वह शानदार रहे हैं.

3. युजवेंद्र चहल : युजवेंद्र चहल 5 मैचों की 5 पारियों में 14 विकेट ले चुके हैं. अफ्रीका की तेज पिचों पर किसी स्पिनर का इस तरह से विकेट लेना अचंभित कर रहा है. एक बार वह 5 विकेट भी ले चुके हैं. वह इस सीरीज में विदेशी दौरे पर किसी भी भारतीय द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेटों के रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं. मैच अभी बाकी हैं, हो सकता है वह इसमें कामयाब हो जाएं.

4. कुलदीप यादव : चहल और कुलदीप यादव में अफ्रीका में सबसे ज्यादा विकेट लेने की होड़ मची हुई है. कुलदीप भी 16 विकेट हासिल किए हैं.  पांचवें मैच में कुलदीप ने 4 विकेट झटके. एक ही ओवर में उन्होंने 3 विकेट लेकर अफ्रीका की कमर तोड़ दी. दोनेां की बेखोफ गेंदबाजी मैदान के अंदर ही नहीं मैदान के बाहर भी क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है.

5. रोहित शर्मा : वैसे तो रोहित सीरीज के चार मैचों बुरी तरह असफल रहे, लेकिन पांचवें मैच में टीम इंडिया को जीत उन्हीं के शतक की बदौलत मिली. उन्होंने मैच में सभी नाकामियों को भुलाकर 115 रनों की पारी खेली. 5 मैचों में रोहित ने 155 रन बनाए. सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारत के ही पहले 3 बल्लेबाज रहे.

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1 साल पहले मैं रिलेशनशिप में थी, प्रियंका का सबसे बड़ा खुलासा

प्रियंका चोपड़ा ने अपने रिलेशनशिप स्टेट्स पर पहली बार चुप्पी तोड़ी

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    बॉलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा ने अपने रिलेशनशिप स्टेट्स पर पहली बार चुप्पी तोड़ी है. हाल ही में फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने खुलासा किया वो एक साल पहले सीरियस रिलेशनशिप में थीं. लेकिन इन दिनों वह सिंगल हैं.

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    प्रियंका चोपड़ा ने पहली बार अपने निजी रिश्ते पर खुलकर बयान देते हुए कहा, मैं जिंदगी में सिर्फ एक बार शादी करने में यकीन करती हूं. मैं एक सीरियस रिलेशनशिप में थीं. लेकिन इस बात को तकरीबन एक साल हो गया है. तबसे मैं सिंगल हूं.

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    प्रियंका ने कहा. मैं कई लोगों से मिली हूं और कई लोगों के साथ हैंगआउट करती हूं. मैं लोगों को मौका देती हूं कि वो मुझे इंप्रेस करें लेकिन मुझे अभी तक कुछ समय नहीं आया है.

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    एक्ट्रेस ने कहा, ऐसा नहीं है कि मेरे आसपास कोई अच्छे लड़के नहीं हैं. बात बस इतनी है कि मैं किसी को डेट करने के मूड में नहीं हूं और दोबारा से लक नहीं आजमाना चाहती.

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    मैं काफी लंबे समय बाद सिंगल हुई हूं. मुझे बहुत सारा अटेंशन मिलता है. लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि क्या किया जाए. हां मुझे ये सब पसंद है. मैं एक लड़की हूं.

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    इससे पहले 2016 में प्रियंका ने शादी के सवाल पर कहा था कि जब मेरे हाथों में रिंग होगी, तब मैं खुद लोगों को इस बारे में बताऊंगी. तब तक कोई मुझपर हक नहीं जता सकता.

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    2017 में डेटिंग के सवाल पर पिगी चॉप्स ने कहा, मेरे प्लान में फिलहाल शादी नहीं है. इसके लिए आपको सही इंसान की तलाश होती है. अगर मुझे सही इंसान मिला तो मैं शादी करूंगी.