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तीन दोस्तों द्वारा शुरू की गयी ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कंपनी को मिला 1 अरब डॉलर का निवेश। जानें कैसे मिली इन्हें सफलता!

देश की सबसे बड़ी फ़ूड डिलीवरी कंपनी स्विगी को हाल ही में 1 अरब डॉलर का निवेश मिला है। इस निवेश में 66 करोड़ डॉलर साउथ अफ्रीका की कंपनी नैस्पर ने किया जबकि बाकी निवेश टेनसेंट & हेज फंड्स और कैपिटल & वेलिंगटन मैनेजमेंट ने किया है। इस नई फंडिंग के समय पांच साल पुरानी स्विगी की कीमत 3.3 अरब डॉलर लगाई गई। इसके साथ ही अब स्विगी भारतीय कंपनियों में वैल्यूएशन के हिसाब से छठे नंबर की स्टार्टअप कंपनी बन गयी है।

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Swiggy team

Swiggy को तीन दोस्तों ने मिलकर 5 साल पहले शुरू किया था। इस तिकड़ी में राहुल जैमिनी IIT खड़कपुर से, श्रीहर्ष IIT कलकत्ता से जबकि नंदन रेड्डी बिट्स से स्नातक हैं। 5 डिलीवरी बॉयज़ से शुरू हुई स्विगी में अब 1.2 लाख डिलीवरी पार्टनर्स हैं और 42 शहरों के 50 हजार से ज्यादा रेस्ट्रोंस स्विगी के साथ जुड़ चुके हैं।

फ़ूड डिलीवरी मार्केट में स्विगी ने जोमाटो से जंग जीत ली है। गुरुग्राम की जोमाटो को इस साल दो फंडिंग राउंड्स में 41 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिली है जबकि स्विगी ने इस साल तीन फंडिंग राउंड्स में 1.31 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की है।

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Swiggy Slogan

Swiggy में प्रारम्भ में निवेश करने वाली एस्सेल पार्टनर्स, सैफ पार्टनर्स, बेसेमर वेंचर पार्टनर्स और नॉर्वेस्ट वेंचर्स ने इस राउंड में अपनी होल्डिंग्स करीब 20 करोड़ डॉलर में बेची है जबकि किसी भी कंपनी ने अपना पूरा हिस्सा नहीं बेचा है। एवेंडस कैपिटल इस राउंड की फाइनेंशल एडवाइजर रही।

इस फंडिंग के बाद स्विगी ने बताया की ताजा फंडिंग से वो अपने डिलीवरी ओन्ली किचेंस का विस्तार करेंगे, टीम को और मजबूती देंगे। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नेक्स्ट जेनेरेशन प्लेटफॉर्म बनाया जायेगा।

आपको बता दें स्विगी फिलहाल हर महीने 2.5 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर पूरे कर रही है जबकि जोमाटो ने अक्टूबर में 2.1 करोड़ ऑर्डर पूरा करने का दावा किया था।

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अंग्रेज भारत से कितना धन लूट के ले गए थे, जानें अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक की अनोखी खोज

इस बात को हर भारतीय कभी न कभी सोचता होगा कि अंग्रेजी शासन में जो लूट हुई उससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी हानि हुई। सोने की चिड़िया हिन्दुस्तान क्यों अभी भी विकासशील देश ही है।

ब्रिटिश शासन के औपनिवेश के समय की अर्थव्यवस्था पर शोध कर रहीं अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के लिखे थीसिस से बताया है आखिर ब्रिटिश शासकों ने भारत से कितना धन लूटा है। ब्रिटिश शासकों की ओर से लूटे गए खजाने की वजह से अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है200 साल तक देश में अत्याचार करने वाले अंग्रेज वापस लौट तो गए, लेकिन इतने समय में उन्होंने हमारा काफी धन लूट लिया। जानी-मानी अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने अपने निबंध में लिखा कि अंग्रेज़ों ने भारत का करीब 45 ट्रिलियन डॉलर (3,19,29,75,00,00,00,000.50 रुपये) लूटा
इस निबंध को कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है। आगे उत्सा ने बताया कि अंग्रेज़ों ने भारत को लूटकर बर्बाद कर दिया और अपनी शान-ओ-शौकत के लिए कभी भी भारत का नाम तक नहीं लिया.

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खाली समय का करें उपयोग, YouTube देखकर ऐसे कमाएं पैसे

अगर आपको यूट्यूब वीडियो देखना पसंद है तो आप इस शौक के जरिए पैसा भी कमा सकते हैं। आपका यह शौक औसतन आपको 20 से 30 हजार तक की कमाई करवा देगा। ध्यान रहे ऑनलाइन साइट्स सेकंडों के हिसाब से पेमेंट करती हैं। ऐसे में आप जितने ज्यादा वीडियोज देखेंगे, उतना ही ज्यादा आपको फायदा होगा। इसलिए आप अपने दिन के कुछ खाली घंटे निकालकर ये काम करें। जानिए कौन सी साइट देती हैं वीडियो देखने का पैसा।

पेड2यूट्यूब (paid2youtube): जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस साइट पर आपको सबसे पहले खुद को रजिस्टर्ड करवाना होगा। यहां पर 30 सेकंड का यूट्यूब वीडियो देखने और उस पर कमेंट करने के पैसे मिलते हैं। यहां आप 200 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। आप यह काम एक साथ और कुछ-कुछ देर बाद समय निकालकर भी कर सकते हैं। आपके खाते में एक बार 670 रुपए की रकम जमा होने के सात दिन बाद पेपाल अकाउंट से आपको पेमेंट कर दी जाती है।

स्वैगबक्स (swagbucks): यहां भी आपको सबसे पहले अपना अकाउंट बनाना होगा। यहां पर आप सर्वे के जरिए भी कमाई कर सकते हैं। आपकी ओर से किए गए हर क्लिक और वीडियो देखने पर स्वैगबक्स आपको एक एसबी से लेकर 30 एसबी तक प्वाइंट्स देता है। 500 एसबी प्वाइंट्स पर आपको 250 रुपए का फ्लिपकार्ट और एमेजन का गिफ्ट कार्ड दे दिया जाता है।

यू-क्यूब्ज (you-cubez): यहां पर भी आपको सबसे पहले साइन अप करना होगा। यानी अपना अकाउंट बनाना होगा। इस एजेंसी पर प्रति क्लिक आपको 0.005 सेंट का भुगतान किया जा सकता है। यानी आप इस साइट पर अगर एक दिन में 400 बार क्लिक करते हैं तो आप 134 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह एक एडवरटाइजिंग एजेंसी की साइट है।

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श्रीकृष्ण से लेकर इंद्र तक से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी, जानें क्यों मनाते हैं राखी

मुख्य रूप से रक्षाबन्धन को हिन्दू आैर जैन त्योहार के तौर पर मान्यता प्राप्त है। ये प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। सावन में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी अर्थात रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व होता है। ये सूत्र कच्चे सूत से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, सोने आैर चाँदी जैसी मंहगी धातु तक से र्निमित हो सकते हैं। हांलाकि राखी सामान्यतः बहनें ही भाई को बांधती हैं परन्तु कर्इ स्थानों पर बेटियों द्वारा पिता या परिवार के बड़े लोगों को, ब्राह्मणों, आैर गुरुओं को भी बांधने की परंपरा है। राखी बांधने के पीछे मूल भावना प्रेम आैर रक्षा का आश्वासन ही होता है। कन्याएं अपने भार्इ आैर पिता को राखी इसी भावना के तहत बांधती हैं। राखी से जुड़ी कथायें भी इसी का संदेश देती हैं। राखी कैसे शुरू हुर्इ इससे जुड़ी इसी तरह की कर्इ कथायें बतार्इ जाती हैं।

भगवान विष्णु आैर बलि की कथा

कहते हैं कि भगवान विष्णु के प्रभाव से जब राजा बलि को पताल लोक में जाना पड़ा इससे देवताओं की रक्षा हुई तभी से हिंदू धर्मावलंबी रक्षाबंधन मनाते हैं। दूसरी आेर उसी समय बलि ने विष्णु जी से अपने साथ रहने का आर्शिवाद प्राप्त कर लिया आैर उससे अपने पति को वापस लाने आैर अपने साथ रखने के लिए माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधीं आैर बदले में अपने पति को वापस प्राप्त किया। तबसे राखी की परंपरा की शुरूआत मानी जाती है, क्योंकि इस तरह लक्ष्मी जी के सौभाग्य की रक्षा हुर्इ। बलि से जुड़ा ये श्लोक भी इसी की पुष्टि करता है। येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं। हे रक्षे मतलब राखी! तुम अडिग रहना यानि तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।

इंद्र से जुड़ी कथा

भविष्यपुराण के अनुसार देवराज इंद्र जब देव दानव युद्घ में दानवों से पराजित हो रहे थे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए उपरोक्त श्लोक पढ़ा था जिसके चलते ना सिर्फ इंद्र की रक्षा हुर्इ थी बल्कि उनकी जीत भी हुर्इ थी। इसे भी रक्षाबंधन की शुरूआत कहा जाता है।

कृष्ण आैर युधिष्ठिर की कथा

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में भी रक्षाबन्धन का प्रसंग है ये कहा जाता है। इसी प्रकार मान्यता है कि द्वापर युग में ही युधिष्ठिर ने वासुदेव नंदन श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा चली आ रही है। अपनी इन्हीं विशेषताआें के चलते धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने वाला माना जाता है।

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बिना नौकरी के कमाना चाहते हैं अच्छी रकम, आजमाएं ये 4 आसान ऑनलाइन तरीके

जानें सोशल मीडिया पर आप क्या कुछ कर कमा सकते हैं पैसे:

ब्लॉंगिंग: लिखने का हुनर जानने वाले और भाषायी व्याकरण पर अच्छी पकड़ रखने वालों के लिए ब्लॉगिंग कमाल की चीज है। यानी अगर आपको लिखना पसंद है तो आप इसके जरिए कमाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको गूगल की ब्लॉ गिंग साइट ‘ब्लॉ गर’ पर अकाउंट बनाना होगा और इसके बाद आप वहां लिखना शुरू कर दीजिए। बेहतर होगा कि आप अपने ब्लॉग पर जो कुछ भी लिखते हैं उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक या ट्विटर पर शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आपका लिखा पहुंचे सके। इससे एक फायदा यह होगा कि आप अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा पाएंगे, आपकी प्रसिद्धी बढ़ेगी साथ ही आपके ब्लॉग को कई लोग जान पाएंगे। जब आपके पेज व्यूदज का काउंट काफी ज्या दा बढ़ जाएगा, तब आप गूगल एडसेंस के लिए अप्लाजई कर दें और अप्रूवल मिलते ही आपकी कमाई शुरू हो जाएगी।

वीडियो ब्लॉागिंग: फोटोग्राफी का शगल रखने वाले और इसे जज्बे के साथ अंजाम देने वालों के लिए इससे कमाल की कोई चीज नहीं हो सकती है। वीडियो ब्लॉकगिंग से भी आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। आप किसी एक टॉपिक को चुन लें और उस पर वीडियो बनाना शुरू कर दें। मान लीजिए आपको बाइक पसंद है तो आप उसके किसी खास टॉपिक पर रिव्यू देकर उसे हाईलाइट कर सकते हैं।

इसके लिए आपको फेसबुक और यू ट्यूब पर लगातार सक्रिय रहना होगा। आप जो भी वीडियो बनाएं उसे फेसबुक और यू ट्यूब पर शेयर करें। इससे आपके वीडियो को देखने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी और लोग आपके यू ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करेंगे। जब आपके सब्सक्राइबर की संख्या बढ़ जाएगी फिर आपके पास पैसे आने लगेंगे। इतना ही नहीं इसके अलावा जो कंपनियां अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करना चाहती हैं वह आपके वीडियो का सहारा ले सकती हैं। इससे भी आपकी कमाई बढ़ जाएगी।

फ्रीलांसिंग: अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं लेकिन आपको मिलने वाली सैलरी आपके खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है तो यह भी पैसे कमाने का अच्छा जरिया है। यदि आपके भीतर हुनर है तो आप फ्रीलांसिंग का काम करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं। बहुत सारी ऐसी वेबसाइट हैं जो फ्रीलांस का काम करने का मौका देती हैं। इनके टास्क अलग अलग कैटिगरी के हिसाब से लिस्ट होते हैं। आप जो काम बेहतर कर सकते हैं उनके लिए अप्लाई कर दें। फ्रीलांसिंग से प्रति असाइनमेंट 5 डॉलर से 100 डॉलर तक की कमाई की जा सकती है।

ऑनलाइन सर्वे: ऑनलाइन वर्ल्ड में यह कमाई के लिए एक नए तरीके का आसान काम है। इसमें बस आपको कंपनियों की तरफ से ऑनलाइन सर्वे आयोजित कराना होता है। दैनिक आधार पर जिन सर्वे को आप पढ़ते हैं वे बाजार अनुसंधान फर्मों और मेगा-कॉरपोरेशन द्वारा तैयार नहीं किए जाते हैं। दरअसल सर्वे वाले ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते हैं जो अच्छे पैसे के बदले उत्पादों और सेवाओं पर सर्वे करने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं।

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बेहद आसानी से घर पर डोनट बनाएं

कितने लोगों के लिए : 4

सामग्री :

मैदा 1 कप, यीस्ट 1 चम्मच, चीनी 1/3 कप (पिसी हुई आटे में डालने के लिए), नमक 2 चुटकी, बेकिंग पाउडर आधा चम्मच, बटर 1 बड़ा चम्मच, तलने के लिए रिफाइंड ऑयल, आधा कप पिसी चीनी ऊपर से लगाने के लिए

विधि :

-यीस्ट को गुनगुने पानी में भिगा दें।

-मैदे को छान ले उसमे बटर, चीनी, नमक, बेकिंग पाउडर, और यीस्ट मिला के मुलायम आटा गूंध ले।

-फिर उस आटे की एक बड़ी सी मोटी रोटी बेल ले, और उसे डोनट कटर या फिर किसी ग्लास से -गोल काट ले बीच से भी काट के डोनट का शेप बना दे।

-इसी तरह से सारे डोनट तैयार कर ले।

-फिर उसे ढककर चार घंटे के लिए रख दे या फिर जब तक डोनट फूल के दोगने मोटे न हो जाये तब तक उसे रखे।

-एक कड़ाही में तेल गरम करे और डोनट को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तल ले।

फिर ऊपर से पिसी हुई चीनी चारों तरफ से लगा दे।

-आप चाहे तो चाकलेट और क्रीम भी डोनट पर लगा सकते हैं।

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जानें आपकी कार से आने वाली हर आवाज का क्या है कारण। कैसे करें इसका उपाय! #Car #Maintenance #Sounds

कार में आने वाली इस तरह की आवाजें कार की परफॉर्मेंस के बारे में बताती हैं। आइये जानते हैं इन्ही आवाजों के बारे में।

1. इंजन से फट-फट की आवाज: अगर कार के इंजन से फट-फट की आवाज सुनाई दे तो इस बात को नजरअंदाज बिलकुल न करें क्योकिं इससे इंजन स्टार्ट करने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यह आवाज एयर फिल्टर गंदा होना, स्पार्क प्लग खराब होना, इग्निशन में प्रॉब्लम, गैसोलिन में पानी आना और कारब्यूरेटर में खराब पावर सर्किट के चलते आती हैं।

2. गियर शिफ्ट के दौरान आवाज: गियर शिफ्ट के दौरान जब गियर अटकने की शिकायत आये तो इसकी सर्विस जल्दी करा लें, क्योकिं इसका कारण क्लच और गियरबॉक्स दोनों में खराबी हो सकता है। इसके साथ ही इसमें क्लच की खराबी, गियर शिफ्ट लिकेज, गियरबॉक्स खराब होना और गियर ऑयल की समस्या के कारण भी यह आवाज आती हैं।

3. जब कार मोड़ते समय आये ऐसी आवाज: कार को मोड़ते समय करहाने की आवाज आने लगे तो समाज जान चाहिये कि यह आवाज सीवी एक्सेल के टूटने से भी आ सकती है या फिर एक्सेल से ग्रीस लीक खत्म होने के चलते भी आती है। ग्रीस खत्म होने के चलते कॉम्पोनेंट सूख जाता है और सीवी एक्सेल का खराब कर देता है जिसके चलते आपको सीवी एक्सेल रिप्लेस करवाना पड़ता है। इस तरह की आवाज आते ही ग्रीस फिर से फिल करवा ले ताकि कोई दिक्कत न आए।

4. स्पीड बढ़ाने पर ऐसी आवाज़ को नजरअंदाज न करें: फर्स्ट गियर में गाड़ी को रेस देते समय अगर गाड़ी आगे स्पीड पकड़ते समय आवाज़ करे तो इसका मतलब यह है कि कार की फैन बेल्ट ढीली या फिर खराब हो रही है। फैन बेल्ट हम कार में समय के साथ ढीली हो जाती है और कार स्टार्ट करते समय रबड़ से रगड़ लगते समय आवाज आने लगती है। इसके लिए आपको अंत में फैन बेल्ट बदलवानी ही पड़ती है।

5. ब्रेक लगाते समय जब आये आवाज आवाज: ब्रेक लगाने के दौरान अगर ची-ची की आवाज आए तो समझ जाओ कि ब्रेक शूज पूरी तरह खराब हो गए हैं ऐसे में जितना जल्दी हो इन्हें बदलवा लेना चाइये, वरना ब्रेक लगने में काफी दिक्कत हो सकती है।

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रूस के साथ दो लाख करोड़ के लड़ाकू विमान समझौते से अलग हो सकता है भारत। जानें क्या है कारण

मालूम हो कि सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के मकसद से भारत और रूस के बीच 2007 में लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से तैयार करने का अंतर-सरकारी करार हुआ था।

लेकिन लागत साझा करने, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और तैयार किए जाने वाले विमानों की संख्या के मसले पर गंभीर मतभेदों के कारण पिछले 11 साल से यह परियोजना अटकी हुई है। परियोजना पर बातचीत में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘हमने परियोजना की लागत समेत तमाम मसलों पर अपनी राय रख दी है। लेकिन रूसी पक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’

बता दें कि भारत ने लड़ाकू विमान के प्रारंभिक डिजायन के लिए दिसंबर, 2010 में 29.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की थी। बाद में दोनों पक्षों ने अंतिम डिजाइन और पहले चरण में विमान के उत्पादन के लिए छह-छह अरब डॉलर का योगदान देने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

कहां फंसा है पेंच

भारत चाहता है कि विमान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर दोनों देशों का समान अधिकार हो, लेकिन रूस विमान में इस्तेमाल की जाने वाली सभी अहम तकनीकों को भारत के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि उसे सभी जरूरी कोड और अहम तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान को अपग्रेड कर सके। फरवरी, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर की सहमति से परियोजना पर वार्ता फिर शुरू हुई थी। दोनों देश गतिरोध वाले मसलों का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत परियोजना की बेहद ऊंची लागत की वजह से इसके फलदायी होने के प्रति आशान्वित नहीं है।

एचएएल कर रही पैरवी, वायुसेना की रुचि नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस परियोजना की जोरदार पैरवी कर रही है। उसका मानना है कि इस परियोजना के जरिये भारत को अपने एरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका मिलेगा क्योंकि किसी अन्य देश ने भारत को आज तक ऐसी अहम तकनीक का प्रस्ताव नहीं दिया है। वहीं, दूसरी ओर ऊंची लागत की वजह से भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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यूपी पीसीएस 2018 के लिए ऑनलाइन आवेदन छह से, एसडीएम के 119 पद, जानें क्या एग्जाम पैटर्न में क्या हुए बदलाव

इस बदलाव से अब पीसीएस की मुख्य परीक्षा का महत्व बढ़ जाएगा। साथ ही साक्षात्कार की आड़ में अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देकर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की शिकायतों को पर भी विराम लगेगा।

इसके अलावा अब दो की बजाय वैकल्पिक विषय एक ही होगा। सामान्य अध्ययन के दो की जगह अब चार पेपर होंगे। प्रदेश में भाजपा की सरकार ने इस अहम निर्णय पर पहले ही अपनी मुहर लगा दी है, ताकि पीसीएस परीक्षा में पारदर्शिता रहे। गौरतलब है कि अभी तक पीसीएस परीक्षा में लिखित परीक्षा 1500 नंबर और की होती थी और साक्षात्कार 200 नंबर के होते थे।

बदलाव के बाद लिखित परीक्षा तो 1500 अंकों की ही रहेगी लेकिन, साक्षात्कार में 100 नंबर घटा दिए जाने से चयन प्रक्रिया कुल 1600 नंबरों में पूरी की जाएगी। इस बार कई बदलाव के साथ यूपीएससी ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यूपीएससी से होने वाली आइएएस परीक्षा की तर्ज पर पीसीएस 2018 में भी दो अलग-अलग क्षेत्रों की प्रारंभिक परीक्षाएं एक साथ कराने की योजना तैयार की है। सचिव जगदीश ने बताया कि इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा में पीसीएस के साथ सहायक वन संरक्षक का पेपर भी होगा। यानी प्रश्न पत्र एक ही आएगा जबकि मुख्य परीक्षा अलग-अलग होगी।

19 अगस्त को प्रारंभिक परीक्षा पर असमंजस बरकरार

यूपीपीएससी ने दूसरी छमाही के कैलेंडर में पीसीएस 2018 की प्रारंभिक कराने की तारीख 19 अगस्त घोषित कर रखी है। पहले यह तारीख 24 जून तय थी। अब आवेदन लेने का सिलसिला अगस्त माह के पहले सप्ताह तक चलेगा, ऐसे में परीक्षा तारीख पर असमंजस बना है। हालांकि सचिव का कहना है कि इम्तिहान तय तारीख पर कराने की तैयारी है।

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थानेदार के 14 साल के लड़के ने बनाए ये 3 एप, गूगल ने बताया शानदार, कमाई कर दी गरीबों को दान

14 वर्ष का आर्यन राज नौवीं कक्षा का छात्र है। आर्यन मार्च-अप्रैल में स्कूल की छुट्टी के समय तीन एप मोबाइल शॉर्ट कट, कम्प्यूटर शॉर्ट कट और वाट्सएप क्लीनर लाइट तैयार किया। तीनों एप को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करने के लिए भेज दिया। उसके बाद वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया। उधर, गूगल ने उसके तीनों एप की जांच की। रिसर्च किया। पाया गया कि अच्छे और कारगर एप हैं। गूगल ने तीनों एप को अप्रैल में अपने प्ले स्टोर में अपलोड कर दिया है। एक माह में प्ले स्टोर से आर्यन के एप को दस हजार लोगों ने डाउनलोड किया है।

क्या खासियत है एप की

– मोबाइल और कंप्यूटर शॉर्टकट एप : ये दोनों एप इंटरनेट के माध्यम से किसी तरह के मॉलवेयर और वायरस का प्रवेश रोकता है।

– वाट्सएप क्लीनर लाइट एप : यह वाट्सएप के बैकग्राउंड का रंग बदल देता है। साथ ही फोटो और वीडियो के माध्यम से किसी प्रकार के वायरस का प्रवेश रोकता है।

कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है पटना के थानेदार का बेटा

पत्रकार नगर थानाध्यक्ष संजीत सिन्हा का बेटा है आर्यन राज। कक्षा दो से ही वह कंप्यूटर फ्रेंडली हो गया। वह सेंट माइकल दीघा में नौंवी का छात्र है। संजीत सिन्हा कहते हैं कि बेटा इंजीनियर बनना चाहता है। पूर्व में आर्यन ने बिहार पुलिस को लेकर एक एक एप बनाया था, जो सफल नहीं हो सका।

एप बनाने से भी एक बड़ा काम आर्यन ने किया है। उसने पुरस्कार की राशि स्वीकार करने से मना कर दिया। गूगल को बैंक अकाउंट नंबर न देकर यह आग्रह किया है कि इस राशि को उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाए, जो अभाव की वजह से पढ़ाई नहीं पूरी कर पा रहे। पटना के एक थानेदार के बेटे की मेधा और बड़प्पन की खूब चर्चा हो रही।