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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक और वीडियो वायरल। आरती की थाली में चढ़ावा चढ़ाने लगे Under The Thali स्टाइल में!?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी जी को जब पूजा की थाली में चढ़ावा चढ़ाने की बात सूझी तो पहले तो उन्होंने थाली के नीचे रुपये रखने चाहे। देखें यह वायरल वीडियो ???

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आखिर ऐसा क्या हुआ जिसे याद कर आज भी कपिल शर्मा की आंखों से निकल जाते हैं आंसू, जानें

टेलीविजन किंग कॉमेडियन कपिल शर्मा ने फिर से छोटे पर्दे पर वापसी कर ली है. कपिल शर्मा ने सोनी टीवी पर फैमिली टाइम विद कपिल से कमबैक किया है. यूं तो कपिल शर्मा का नाम सुनते ही सभी के चेहरों पर मुस्कराहाट छा जाती है लेकिन पिछले कुछ समय से कपिल शर्मा का विवादों से चोली दामन का साथ सा बन गया था. आगे जानिए कॉमेडियन कपिल शर्मा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

आपको बताते हैं आखिर देश का सबसे बड़े कॉमेडियन कैसे बने कपिल शर्मा. कपिल शर्मा का सफर शुरू हुआ अमृतसर से. कपिल शर्मा का जन्म पंजाब के अमृतसर में 2 अप्रैल 1981 को हुआ था. कपिल के पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कांस्टेबल थे और मां जनक रानी एक हाउसवाइफ हैं. कपिल का बचपन अमृतसर की पुलिस कॉलोनी में बीता. यही वजह है कि कपिल अपने करियर की शुरुआत में अक्सर शमशेर सिंह नाम के पुलिसवाले के किरदार में नजर आते थे. कपिल ने अपनी पढ़ाई अमृतसर के हिंदू कॉलेज से की है लेकिन कपिल की जिंदगी इतनी आसान नहीं थी. जब कपिल दसवीं क्लास मे पढ़ रहे थे तो उन्होंने अपनी पॉकेट मनी के लिए अमृतसर के एक टेलीफोन बूथ में भी काम किया था.

कपिल ने एक इंटरव्यू मे बताया कि उन्होंने चंद पैसों के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के क्रेट्स तक उठाए हैं. साथ ही कपिल ने अपने कॉलेज में पढ़ाई करने के साथ साथ ऑर्ट ऑफ परफॉर्मेंस की क्लासेज भी देनी शुरू कर दी यानि अपने ही कॉलेज में कपिल स्टूडेंट भी थे और टीचर भी. कपिल की जिंदगी का एक अहम हिस्सा थियेटर करते हुए भी गुजरा. कपिल जिंदगी में स्ट्रगल कर रहे थे. वो सबको हंसाना चाहते थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब कपिल की आंखों में आ गए थे आंसू और आज भी उन बातों को याद कर भावुक हो जाते हैं कपिल. दरअसल, कैंसर से पीड़ित पिता का साया उनके सिर से 2004 में उठ गया तो वहीं दूसरी और परिवार को एक वक्त खाने कि दिक्कत देखनी पड़ी पर कपिल ने कभी हार नहीं मानी.

कपिल बड़े कॉमेडियन बनना चाहते थे लेकिन किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद कपिल को लगा कि उनकी जिंदगी बदल जाएगी. साल 2007 में कपिल को स्टार टीवी के कॉमेडी शो ‘ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज 3’ में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया लेकिन किस्मत ने यहां कपिल का साथ नहीं दिया और वो शो में सेलेक्ट नहीं हुए. कपिल को तो शो में नहीं लिया गया लेकिन कपिल के दोस्त चंदन प्रभाकर को सेलेक्ट कर लिया. चंदन प्रभाकर इन दिनों कपिल के शो में उनके नौकर राजू का किरदार निभाते हैं.

इस रिजेक्शन के बाद जैसे कपिल का दिल टूट गया. लेकिन किस्मत को अभी एक और करवट लेनी थी. कपिल को इस शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली और उसके बाद तो कपिल ने अपनी कॉमेडी का खूब जादू चलाया और ये शो जीत गए. कपिल शर्मा ने जब लाफ्टर चैलेंज जीता तो उन्हें 10 लाख रुपए का इनाम मिला. उस वक्त कपिल को अपनी बहन की सगाई करनी थी और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे. लेकिन जब ये दस लाख रुपए हाथ आए तो कपिल ने सबसे पहले अपनी बहन की ही ये बात बताई और फिर कपिल ने अपनी बहन की शादी धूमधाम से की.

लॉफ्टर चैलेज जीतने के बाद कपिल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इसके बाद कपिल सोनी टीवी के शो कॉमेडी सर्कस में नजर आए जहां कपिल ने अलग अलग किरादरों के जरिए दर्शकों को खूब हंसाया. कलर्स टीवी ने साल 2013 में कपिल के साथ एक नया शो शुरू किया जिसका नाम था कॉमेडी नाइट्स विद कपिल. ये शो कपिल के नाम से शुरू किया. कपिल ने इस शो से एक नई तरह की कॉमेडी की शुरुआत की. दर्शकों ने इस शो को खूब पसंद किया और देखते ही देखते कपिल ने कामयाबी का एक नया इतिहास रच दिया. कपिल के शो की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड का हर बड़ा कलाकार अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कपिल के शो में आता था.

कपिल शर्मा टेलीविजन तक ही सीमित नहीं रहे. साल 2015 में कपिल को अबास-मस्तान की फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ में काम किया. कपिल की इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद तो किया लेकिन फिल्म समीक्षकों ने यही कहा कि ये फिल्म कपिल के टीवी शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल जैसी ही है. कपिल की कामयाबी और उनकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति सीजन 8 के पहले एपिसोड में कपिल को बतौर गेस्ट बुलाया.

कपिल को करण जौहर भी अपने शो ‘कॉफी विद करण’ में बुला चुके हैं. जबकि कपिल बहुत अच्छी इंग्लिश नहीं बोल पाते और करण का शो अंग्रेजी भाषा का शो है लेकिन ये कपिल की पॉपुलैरिटी ही है कि करण को उन्हें अपने शो में बुलाना पड़ा.

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जब एक पार्सल बन गया था ऐश्वर्या राय बच्चन के लिए मुसीबत, जानिए वजह

बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हालांकि, एक बार ऐश्वर्या राय के लिए विदेश से आया एक पार्सल मुसीबत बन गया था। साल 2016 में बैलार्ड पोस्ट ऑफिस में 16 किलोग्राम का एक पार्सल नीदरलैंड से आया था। पार्सल पर अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन के घर का पता लिखा था। खास बात यह है कि पार्सल पर कस्टम विभाग की मुहर थी। हालांकि, एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय को विभाग की ओर से एक लेटर भी भेजा गया, जिसमें लिखा था कि पार्सल खुलने के समय आपका कस्टम ऑफिस में उपस्थित होना अनिवार्य है।

उस समय ऐश्वर्या राय बच्चन फिल्म ‘जोधा-अकबर’ की शूटिंग में बिजी थीं। फिल्म की शूटिंग जयपुर में हो रही थी। हालांकि, कस्टम विभाग के अधिकारियों ने ऐश्वर्या राय की गैर मौजूदगी में यह पार्सल खोला तो वे हैरान रह गए, क्योंकि पार्सल में कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैजेट्स थे, इसके साथ ही एक शर्ट में विदेशी मुद्रा (यूरो) भी थी। उस समय उस विदेशी मुद्रा की कीमत भारत में करीब 13 लाख रुपए थी। इतनी विदेशी मुद्रा मिलने के कारण कस्टम विभाग ने ऐश्वर्या राय को सफाई देने का नोटिस जारी कर दिया। एक्ट्रेस के वकील गिरीश कुलकर्णी ने बताया कि पार्सल भेजने वाले का नाम है अविनिश्नर, हालांकि ऐश्वर्या पार्सल भेजने वाले को नहीं जानती हैं, वह यह भी नहीं जानती हैं कि पार्सल क्यों भेजा गया है।

 

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इसके बाद ऐश्वर्या राय अपनी मां और वकील के साथ कस्टम अधिकारियों से मिलीं। ऐश्वर्या राय ने सफाई दी कि आईफा अवॉर्ड के लिए वह नीदरलैंड गई जरूर थीं, लेकिन वह पार्सल भेजने वाले को नहीं जानती हैं और न ही उस शख्स से उनका कोई लेना-देना है। ऐश्वर्या राय की सफाई सुनने के बाद कस्टम विभाग के अधिकारियों को उनकी बात पर विश्वास हुआ और उन्होंने अभिनेत्री को क्लीन चिट दे दी थी।

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सौरव गांगुली ने बताया लॉर्ड्स में किसे जवाब देने के लिए उतारी थी शर्ट

पूर्व भारतीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने आत्मकथा ‘ए सेंचुरी इज नॉट एनफ’ में अपने क्रिकेट से जुड़े कई लम्हों को फैंस के सामने लाने का काम किया है। इस किताब को जल्द ही लॉन्च किया जाना है, लेकिन लॉन्च से पहले किताबों के कुछ अंश का जिक्र गांगुली ने फैंस के साथ किया। जर्नलिस्ट बरखा दत्त से बात करते हुए सौरव गांगुली ने साल 2002 में खेले गए नैटवेस्ट सीरीज का जिक्र किया। गांगुली ने कहा. ”फाइनल मैच जीत से टीम काफी उत्साहित थी और जहीर खान के विनिंग शॉट लगाते ही मैं अपने आपको रोक नहीं सका। गांगुली ने बताया कि जीतने के बाद शर्ट उतारकर सेलिब्रेट करना सही नहीं था। उस दौरान जीत का जश्न मनाने के लिए और भी कई तरीके थे”। गांगुली ने कहा, ”जब इंग्लैंड की टीम भारत आई थी तो एंड्र्यू फ्लिंटॉफ ने यह काम किया था। लॉर्ड्स में फाइनल मुकाबला जीतने के बाद मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। हालांकि, इस घटना के बाद इस चीज को लेकर काफी पछतावा हुआ और मैं आज तक इस बात का अफसोस कर रहा हूं। रियल लाइफ में मैं इस तरह का इंसान नहीं हूं। खुशी जाहिर करने को और भी तरीके थे, लेकिन क्रिकेट का जुनून मुझ पर इस कदर हावी था कि मैंने फ्लिंटॉफ को उन्हीं के अंदाज में जवाब देना बेहतर समझा”।

बता दें कि इंग्लैंड की टीम ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत को वनडे सीरीज के फाइनल मुकाबले में हराया था। जिसके बाद जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर गई थी तो वहां वो जीतने में कामयाब रही। इस मैच में मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर भारतीय खिलाड़ियों ने जीत हासिल की थी। लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मैच में इंग्लैंड की टीम ने 50 ओवर में 5 विकेट खोकर 325 रन बनाने में सफल रही थी।

जब मुशर्रफ ने सौरभ गांगुली से कहा था ऐसा करके हमें मुसीबत में मत डालिए

326 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी रही। कप्तान सौरव गांगुली और सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने पहले विकेट के लिए 106 रनों की पार्टनरशिप की। इसके बाद सहवाग 45 तो गांगुली 60 रन बनाकर आउट हो गए। इन दोनों के अलावा युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ ने टीम को जीत की ओर बढ़ाने का काम किया। अंतिम ओवर में भारतीय टीम ने दो विकेट से इस मैच को अपने नाम कर लिया।

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इस घटना ने एडोल्फ हिटलर को बनाया जर्मनी का नाजी तानाशाह

दुनिया को अपनी तानाशाही और क्रूरता से लोगों पर शासन करने वाले एडोल्फ हिटलर को यदि जर्मनी की सोशलिस्ट पार्टी में सदस्यता मिल गई होती तो शायद दूसरा विश्व युद्ध नहीं होता और न ही नाजीवाद का उदय हो पाता. ये दावा अबेरदीन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस वेबर ने सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक हैंस जॉर्ज के बयान से जुड़े अप्रकाशित ऐतिहासिक दस्तावेजों के हवाले से किया है. ये दस्तावेज म्यूनिख स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्पररी हिस्ट्री में सुरक्षित रखा गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थॉमस वेबर का दावा है कि हिटलर के तानाशाह बनने के पीछे उसे सोशलिस्ट पार्टी में जगह न मिलना सबसे बड़ी वजह है. उन्हें मिले दस्तावजों में इस बात का जिक्र है कि 1919 में जर्मन सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ था. इससे प्रभावित युवा एडोल्फ पार्टी का हिस्सा बनना चाहता था. इसके लिए वो पार्टी के प्रकाशन गृह में ग्रेसिंगर से मिलने पहुंचा और पार्टी में शामिल होने के साथ ही उसके मुख्यपत्र के लिए लिखने की इच्छा जताई.

ग्रेसिंगर ने एडोल्फ को शामिल करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसके लिए पार्टी या मुख्यपत्र में कोई जगह नहीं है. इसके बाद उन्होंने एडोल्फ को पैसे दिए और वहां से जाने के लिए कह दिया. 1920 में एडोल्फ नाजी पार्टी में शामिल हो गया, जिसका कद सोशलिस्ट पार्टी से काफी छोटा था. लेकिन 1921 में स्थिति बदली और सोशलिस्ट पार्टी को भंग कर दिया गया.

थॉमस की माने तो यदि हिटलर को सोशलिस्ट पार्टी में जगह मिल गई होती तो उसे कोई छोटा पद मिलता और वो इतना बड़ा नेता नहीं बन पाता. नाजी पार्टी से जुड़ने के बाद एक साल तक वो छोटे पद पर ही खुशी से काम करता रहा. 1921 में वो पार्टी में नेता बना, जिसके बाद उसने मुड़कर नहीं देखा.