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स्वतंत्रता दिवस स्पेशल: आजाद भारत में इन 5 बाइक्स ने मचाया तहलका, इनमें से कौन सी बाइक है आपकी फेवरेट!

शक्तिशाली रॉयल एनफील्ड बुलेट से लेकर सबसे पुरानी मोटसाइकिलों में से एक को स्वतंत्र भारत में टू-स्ट्रॉक के साथ बेचा जाना था जो यामाहा RD 350 थी। भारत में आज भी इन मोटरसाइकिल्स को याद किया जाता है। 72 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज हम आपको उन बाइक्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो 1947 के बाद भारत में काफी पॉपुलर हुई हैं।

रॉयल एनफील्ड बुलेट

रॉयल एनफील्ड पहली मोटरसाइकिल्स में से एक ऐसी थी जो भारत आजाद होने के सबसे ज्यादा बेची गई। इस बाइक को सबसे पहले बॉर्डर पर गश्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था और यह अब भारतीय सेना की सबसे पसंदीदा बाइक है। 1955 में यूके की रॉयल एनफील्ड और मद्रास मोटर्स ने भारत में फैक्ट्री खोली जो कि अभ चेन्नई में स्थित है और इस फैक्ट्री में बुलेट 350 को असेम्बल किया गया जो कि रॉयल एनफील्ड की इग्लैंड फैक्टरी रेड्डिच से लाई गई थी। 1962 में बुलेट 350 को भारत में भारत में स्क्रैच द्वारा मैन्युफैक्चर किया गया और कंपनी ने यहा सालाना इसकी 20,000 यूनिट्स बनानी शुरू कर दी। आज 40 साल बाद भी रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 में समान टेक्नोलॉजी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। अब रॉयल एनफील्ड पूरी तरह भारत की आयशर मोटर्स के स्वामित्व वाली कंपनी बन चुकी है।

येज्दी रोडकिंग

येज्दी मूल रूप से चेक-मूल जावा मोटरसाइकिल का भारतीय वर्जन है और इसने भारतीय बाजार में स्वतंत्रता दिवस के बाद कई पॉपुलर बाइक्स बनाई हैं। भारत में इस कंपनी ने 1973 से बाइक्स की बिक्री शुरू की। भारतीय बाजार में येज्दी ने कई मॉडल्स उतारे लेकिन उनमें सबसे ज्यादा पॉपुलर मॉडल येज्दी रोडकिंग था, जिसे 1978 से लेकर 1996 तक मैसूर के आदर्श जावा फैक्ट्री में बनाया गया। इस बाइक में 250cc सिंगल-सिलेंडर 2-स्ट्रॉक इंजन है जो 16bhp की पावर और 24Nm का टॉर्क जनरेट करता है।

हीरो होंडा CD100

हीरो होंडा की प्रतिष्ठित मोटरसाइकिल हीरो होंडा CD100 आज भी भारतीय सड़कों पर दिखाई दे जाती है। हीरो ने इस मोटरसाइकिल को जापान की होंडा मोटर कंपनी के साथ मिलकर 1983 में बनाया था और यह दोनों कंपनी की भारत में पहली मोटरसाइकिल थी जिसे हीरो होंडा CD100 के नाम से 1984 में लॉन्च किया गया था। 80 और 90 के दशक में यह बाइक भारतीय सड़कों पर राज करती थी। यह भारत की पहली 4-स्ट्रॉक 100cc मोटरसाइकिल थी।

यामाहा RX 100

यामाहा की यह वो बाइक थी जो रेसिंग में लोगों का दिल जीत लेती थी। इस बाइक में 98cc टू-स्ट्रॉक इंजन लगा था, जो 7,500 rpm पर 11bhp की पावर और 6,500 rpm पर 10.39 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। बाइक का इंजन 4-स्पीड गियरबॉक्स से लैस था। यामाहा का दावा था कि 100cc बाइक में उनकी इस बाइक की टॉप स्पीड 100kmph थी। 1985 में इस बाइक की 5,000 यूनिट्स को जापान से नॉक्ड डाउन किट्स के तौर पर लाया गया। इसके बाद इस बाइक का प्रोडक्शन 1996 तक चला।

यामाहा RD 350

RX100 के अलावा 80 के दशक में यामाहा की दूसरी बाइक RD 350 को रॉयल एनफील्ड की बुलेट के बाद सबसे ज्यादा प्यार मिला। हालांकि भारत में इस बाइक को 1983 से लेकर 1989 तक ही बेचा गया। भारत में बेची जाने वाली यामाहा RD350 पहली ट्विन-सिलेंडर परफॉर्मेंस मोटरसाइकिल थी। इस बाइक में 347cc पैरेलेल-ट्विन टू-स्ट्रॉक इंजन दिया गया था। यह इंजन 30.5bhp की पावर जनरेट करने में सक्षम था। इस बाइक की टॉप स्पीड 140kmph थी।

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कुली का कमाल: स्‍टेशन के फ्री वाई फाई की मदद से पास की UPSC की परीक्षा

सपने पूरे करने के लिए हौंसला चाहिए सुविधा नहीं इस सच को सुनाती है इस कुली कीकहानी जो स्‍टेशन के फ्री वाईफाई की मदद से सिविल सेवा परीक्षा में पास हुआ।

केरल में एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ के. की कहानी कुछ अनोखी है, जिन्होंने रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध मुफ्त वाईफाई सुविधा के सहारे इंटरनेट के जरिये पढ़ाई की और केरल पब्लिक सर्विस कमीशन, केपीएससी की लिखित परीक्षा पास की। सबसे बड़ी बात ये है कि तैयारी के दौरान वह किताबों में नहीं डूबे रहे बल्‍कि अपना काम करते हुए स्मार्ट फोन और ईयरफोन के सहारे पढ़ाई करते रहे। अब अगर श्रीनाथ साक्षात्‍कार में सफल हो जाते हैं तो वह भूमि राजस्व विभाग के तहत विलेज फील्ड असिस्टेंट के पद पर नियुक्‍त्‍त हो जायेंगे।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

श्रीनाथ पिछले पांच वर्ष से कुली के रूप में काम कर रहे हैं और उनका सिविल परीक्षा के इम्‍तिहान में बैठने का ये तीसरा प्रयास था। उनका कहना है कि यह पहला मौका था, जब उन्‍होंने स्टेशन पर उपलब्ध वाईफाई सुविधा का इस्तेमाल किया। उन्‍होंने ये भी बताया कि कुली का काम करने के दौरान वे हमेशा ईयरफोन कान में लगाए रखते थे और इंटरनेट पर अपने संबंधित विषयों पर लेक्चर सुना करते थे। उसे मन ही मन दोहराते भी रहते थे और रात को मौका मिलते ही फिर रिवाइज कर लेते थे। इसी वाईफाई की मदद से उन्‍होंने ऑनलाइन अपना परीक्षा फार्म भरा और देश दुनिया की ताजा जानकारियों से खुद को अपडेट किया साथ ही अपने विषयों की जम कर तैयारी की।

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ISIS के चंगुल से भागे भारतीय हरजीत मसीह की कहानी पर सुषमा ने उठाया पर्दा

इराक में बीते दिनों अगवा हुए 39 भारतीय लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने मंगलवार को राज्‍यसभा में की। उन्‍होंने बताया कि 38 लोगों का डीएनए मैच हो गया है, जबकि 39वें का डीएनए 70 प्रतिशत तक मैच हो गया है। लाशों के ढेर में से भारतीयों के शवों को ढूंढा गया जिसके बाद उनके मारे जानें का पता चला। विदेश मंत्री ने बताया कि इन 39 भारतीयों के शवों को अमृतसर एयरपोर्ट लाया जाएगा। विदेश मंत्री ने बताया कि इनमें से 31 पंजाब के और चार हिमाचल प्रदेश के हैं। विदेश मंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के लोगों के प्रति संवेदना जताई। वहीं सुषमा ने बताया इनमें से एक भारतीय हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौट आया था लेकिन उसने जो कहानी सुनाई थी, वह झूठी थी।

सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा, जहां से उसने सुषमा स्वराज को फोन किया था। स्वराज ने कहा कि आईएसआईएस के आतंकियों ने एक कंपनी में काम कर रहे 40 भारतीयों को एक टेक्सटाइल कंपनी में भिजवाने को कहा था। उनके साथ कुछ बांग्लादेशी युवा भी थे। यहां पर उन्होंने बांग्लादेशियों और भारतीयों को अलग-अलग रखने को कहा लेकिन हरजीत मसीह ने अपने मालिक के संग जुगाड़ करके अपना नाम अली किया और बांग्लादेशियों वाले समूह में शामिल हो गया। यहां से वह इरबिल पहुंच गया। सुषमा ने बताया कि यह कहानी इसलिए भी सच्ची लगती है क्योंकि इरबिल के नाके से ही हरजीत मसीह ने उन्हें फोन किया था।

 

सुषमा ने आगे बताया, ‘हरजीत की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता।’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो।’

 

यह थी हरजीत मसीह की कहानी
मसीह ने बताया था कि किस तरह आईएस के आतंकी 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर किसी पहाड़ी पर ले गए थे। उसके मुताबिक, ‘आईएस के आतंकी हमें किसी पहाड़ी पर ले गए और हम सभी को किसी दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया। आतंकियों ने दो दिन तक हम सभी को अपने कब्जे में रखा।’

 

मसीह ने बताया, ‘एक रोज हम सभी को कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए। इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं। मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा। बाकी सभी लोग मारे गए।’ मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया।

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टेरर से जंग किसी धर्म के खिलाफ नहीं: मोदी

कट्टरपंथ और आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई किसी पंथ के खिलाफ नहीं बल्कि युवाओं को गुमराह करने वाली मानसिकता के खिलाफ है।

पूरी खुशहाली, समग्र विकास तभी संभव है, जब मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में कुरान शरीफ हो और दूसरे हाथ में कंप्यूटर। मोदी ने यह बात एक सम्मेलन में कही, जिसमें जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय भी मौजूद थे।

शाह ने कहा कि कट्टरपंथ चिंता का विषय है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है।

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भारत और समृद्ध हुआ, चीन के मुकाबले स्थिति सुधरी

भारत ने समृद्धि सूचकांक में 2012 के मुकाबले चार स्थानों की छलांग लगाई है। इसके साथ ही भारत समृद्धि के मामले में चीन से अब मात्र 10 स्थान ही पीछे है। भारत इस सूची में 100वें स्थान पर है, जबकि चीन 90वें स्थान पर है।
लंदन स्थित लेगातुम इंस्टिट्यूट के प्रॉस्पेरिटी इंडेक्स के मुताबिक समृद्धि के मामले में भारत 2012 की तुलना में 2016 में चार स्थान ऊपर चढ़ गया है। लेगातुम रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस वर्ष नोटबंदी और जीएसटी लागू किए जाने से जीडीपी ग्रोथ को झटका लगा है लेकिन इसके बावजूद समृद्धि सूचकांक में इसका ऊपर चढ़ना खास मायने रखता है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारत ने आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रगति की है। इंडेक्स तैयार करने में 149 देशों को 104 विभिन्न पैमानों पर परखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन आर्थिक मोर्चे पर कमजोर पड़ा है क्योंकि लोग व्यापार करने में ज्यादा बाधाएं और प्रतिस्पर्धा के लिए कम प्रोत्साहन महसूस कर रहे हैं।
रिपोर्ट की मानें तो 2017 में पूरी दुनिया में समृद्धि बढ़ी है, लेकिन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह बढ़त ज्यादा अच्छी है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन और भारत ने बिजनेस एनवायरमेंट के मामले में शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि प्राकृतिक वातावरण में इनका सबसे खराब प्रदर्शन रहा। इस रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक समृद्धि के मामले में अब भारत और चीन के बीच की खाई और कम हुई है।
समृद्धि सूचकांक के लिए बिजनेस एनवायर्नमेंट (व्यावसायिक माहौल), गवर्नेंस (शासन-प्रशासन), एजुकेशन (शिक्षा), हेल्थ (स्वास्थ्य), सेफ्टी एंड सिक्योरिटी (सुरक्षा एवं संरक्षा), पर्सनल फ्रीडम (व्यक्तिगत स्वतंत्रता), सोशल कैपिटल (सामाजिक पूंजी) और नैचुरल एनवायर्नमेंट (प्राकृतिक वातावरण) की समीक्षा की गई। लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स, टुफ्ट्स यूनिवर्सिटी, ब्रूकिंग्स इंस्टिट्यूशंस और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया, सैन डिएगो जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से विभिन्न विषयों के जानकारों के एक पैनल ने इन नौ पैमानों पर देशों के प्रदर्शन की समीक्षा की।
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पहली बार 14,000 डॉलर के पार पहुंचा बिटकॉइन, एक दिन में 1,29,000 रुपये बढ़ी कीमत

भारतीय रिजर्व बैंक ने भले ही भारत में बिटकॉइन को लेकर निवेशकों को आगाह किया हो, लेकिन इसकी कीमत दिन-दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रही है। बुधवार को 12,000 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहे बिटकॉइन की कीमत महज 24 घंटे के भीतर 14,000 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई । इस तरह कह सकते हैं कि महज एक दिन में ही निवेशकों ने इस डिजिटल करंसी से करीब 1,29,084 रुपये की कमाई कर ली। इस साल की शुरुआत से ही बिटकॉइन की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि बुधवार को ही भारतीय रिजर्व बैंक ने आगाह करते हुए कहा था कि इसमें लेन-देन या निवेश करने का जोखिम निवेशकों को खुद उठाना होगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह इसमें किसी भी धोखाधड़ी के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

इस साल की शुरुआत में 1,000 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहे बिटकॉइन ने बीते सप्ताह ही 10,000 डॉलर के लेवल को पार किया था। दिग्गज अर्थशास्त्रियों और बिजनस लीडर्स की ओर से बिटकॉइन को लेकर चेतावनी जारी किए जाने के बाद भी इसमें निवेशकों का उत्साह बरकरार है। बीते 24 घंटे में ही इसने 12,000 के स्तर और फिर 13,000 के स्तर को पारकर 14,000 डॉलर के आंकड़े को छू लिया।

हॉन्ग कॉन्ग में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत 14,000 डॉलर तक पहुंच गई। इस क्रिप्टोकरंसी में इस साल बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। बीते सप्ताह ही 11,000 डॉलर के आंकड़े तक गिरने के बाद इसमें अचानक इजाफा हुआ है और 3,000 डॉलर तक की ग्रोथ देखने को मिली है।

गौरतलब है कि सितंबर में ही अमेरिका के सबसे बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन ने कहा था कि बिटकॉइन फ्रॉड करंसी है। उन्होंने तो यहां तक कहा था कि यह ड्रग डीलर्स और धोखाधड़ी करने वाले लोगों की करंसी है। जेमी ने कहा था, ‘ईमानदारी से कहूं तो मैं अचंभित हूं कि इस करंसी को कोई देख भी नहीं सकता कि आखिर यह क्या है।’

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शराब पीने के बाद लोग अंग्रेज़ी क्यों बोलते हैं?

गैर-अंग्रेजीभाषियों के साथ आपने अक्सर ऐसा महसूस किया होगा?

अगर आप किसी दूसरी भाषा में बोलने की कोशिश करते हैं तो कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा. सही शब्द आपको मुश्किल से मिलेंगे और उनका ठीक से उच्चारण करना भी चुनौती जैसा लगेगा.

लेकिन अगर आप थोड़ी सी शराब पी लें तो उस दूसरी भाषा के शब्द अपने आप मुंह से धारा प्रवाह निकलेंगे. लफ्जों की तलाश खत्म हो जाएगी और आपकी बातें लच्छेदार लगने लगेंगी. मानो ये जुबान आपकी अपनी हो.

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सामाजिक व्यवहार

ये शराब को लेकर कोई अंदाज़े की बात नहीं है. बल्कि इसे लेकर एक अध्ययन आया है. साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक थोड़ी सी शराब किसी दूसरी भाषा में बोलने में मदद करती है.

ये भी सही है कि शराब हमारी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर असर डालती है और इस लिहाज से ये एक बाधा है. लेकिन दूसरी तरफ ये हमारी हिचकिचाहट भी दूर करती है, हमारा आत्म-विश्वास बढ़ाती है और सामाजिक व्यवहार में संकोच कम करती है.

जब हम किसी दूसरे शख्स से मिलते हैं और बात करते हैं तो इन सब बातों का असर हमारी भाषाई क्षमता पर पड़ता है. इस विचार अब तक बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ही स्वीकार किया जाता था.

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थोड़ा एल्कोहल

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल, ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज और नीदरलैंड्स के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास्ट्रिच के शोधकर्ताओं ने इस विचार को टेस्ट किया. टेस्ट के लिए 50 जर्मन लोगों के एक समूह को चुना गया जिन्होंने हाल ही में डच भाषा सीखी थी.

कुछ लोगों को पीने के लिए ड्रिंक दिया गया जिनमें थोड़ा एल्कोहल था. लोगों के वजन के अनुपात में एल्कोहल की मात्रा दी गई थी. कुछ के ड्रिंक्स में एल्कोहल नहीं था. टेस्ट में भाग लेने वाले जर्मन लोगों को नीदरलैंड्स के लोगों से डच में बात करने के लिए कहा गया.

डच भाषियों को ये पता नहीं था कि किसने शराब पी रखी है और किसने नहीं. जांच में ये बात सामने आई कि जिन्होंने शराब पी रखी थी वे बेहतर उच्चारण के साथ बात कर रहे थे. शोधकर्ताओं ने ये साफ किया कि उन्हें ये नतीजे शराब की बहुत कम मात्रा में खुराक देने से मिले हैं.