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प्रारंभ हो गया है सावन, जानें भगवान शिव के प्रिय बेलपत्र की विशेषताएं

ह‍िंदू शास्‍त्रों में भी मान्‍यता है क‍ि भगवान श‍िव को बेलपत्र बहुत पसंद हैं। ज‍िससे श‍िव पूजन में इसे शाम‍िल करना अन‍िवार्य माना जाता है। इससे भगवान श‍िव बहुत जल्‍दी पसंद होते हैं आैर भक्‍तों को मनचाहा वरदान देते हैं।

बेलपत्र से जुड़े हैं ये तीन तथ्य

1- मान्‍यता है कि‍ बेलपत्र चढ़ाने से शि‍व जी का मस्‍तक शीतल रहता है। यदि बेलपत्र में तीन पत्‍त‍ियां हों तो वो सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अलावा पत्‍त‍ियां खराब नही होनी चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय जल की धारा साथ में अर्पि‍त करने से इसका प्रभाव कर्इ गुना बढ़ जाता है।

2- सोमवार, अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा और सं‍क्रांति को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। सावन माह में इन दिनों की पूजा के लिए इन्हें पहले तोड़कर रख लें। बेलपत्र कभी भी खरीदकर लाया गया हो श‍िव जी पर चढ़ाया जा सकता है। इतना ही नहीं एक बेलपत्र को कई बार धोकर भी चढ़ा सकते हैं।

3- कहते हैं जि‍न घरों बेलवृक्ष लगा होता हैं वहां श‍िव कृपा बरसती है। बेलवृक्ष को घर के उत्तर-पश्चिम में लगाने से यश कीर्ति की प्राप्‍त‍ि होती है। वहीं उत्तर-दक्षिण में लगे होने पर भी सुख-शांति और मध्‍य में लगे होने से घर में धन और खुश‍ियां आती हैं।

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वीकेंड टून्स बी बी सी न्यूज़ के सौजन्य से

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क्यूबा में अमेरिकी डिप्लोमेट्स पर रेडिएशन अटैक? बीमार हुए 21 राजनयिक

क्यूबा के हवाना स्थित अमेरिकी दूतावास पर राजनयिकों पर रहस्मयी हमले की पर्त खुलने लगी है. बीते एक महीने से जारी इस हेल्थ अटैक से अभीतक 21 से ज्यादा अमेरिकी राजनयिक बहरे हो चुके हैं और कुछ राजनयिक मानसिक बिमारी से ग्रस्त बताए जा रहे हैं. हवाना में दूतावास पर इस सिलसिलेवार हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जल्द से जल्द दूतावास को बंद करने का दबाव बढ़ने लगा है.

क्या है रहस्यमयी हेल्थ अटैक?

अमेरिका के शीर्ष राजदूतों के दावे के मुताबिक बीते एक महीने से ज्यादा समय से हवाना शहर में स्थित अमेरिकी दूतावास पर किसी रेडियोधर्मी अथवा सोनार तरंगों से हमला किया जा रहे है. इस हमले से लगातार अमेरिकी दूतावास में रह रहे राजनयिकों का स्वास्थ बिगड़ रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक अभी तक 21 से ज्यादा राजनयिक इस सोनार तरंगों के हमले की चपेट में आ चुके हैं.

एक साल से चल रही हमले की साजिश

रहस्मयी तरंगों से घायल हुए राजनयिक बहरेपन की शिकायत कर रहे हैं और इसके अलावा उनकी मानसिक स्थिति (ब्रेन ट्रॉमा) भी खराब हो रही है. इस हमले की शुरुआती शिकायतें पिछले साल से ही आने लगी थी. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक पिछले साल क्यूबा में कुछ अमेरिकी राजदूतों ने अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देने की शिकायत की थी.

रहस्मयी हमले का असर

कुछ राजनयिकों ने तेज घंटी की आवाज सुनाई देने की बात कही थी तो कुछ ने दरखने की तेज आवाज सुनाई देने की बात डॉक्टरों को बताई थी. इस आवाज की शिकायत के बाद ज्यादातर राजनयिकों ने चोट, जी मचलने, बहरेपन और याद्दाश्त खोने की शिकायत की है.

बंद होगा हवाना दूतावास?

गौरतलब है कि इस हमले की शिकायतें बढ़ने के बाद क्यूबा पर भी अमेरिका से एक बार फिर रिश्ता खराब होने का डर बढ़ रहा है. इसी दबाव में क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कैस्त्रो को अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई को जांच के लिए हवाना पहुंचने की मंजूरी देनी पड़ी. जांच से जाहिर हो रहे तथ्यों के बाद क्यूबा सरकार भी सख्ते में है और राउल कैस्त्रो आधिकारिक तौर पर सफाई दे चुके हैं कि इस हमले से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है.

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी माना है कि इस हमले के बाद अमेरिका की ट्रंप सरकार हवाना में अपने दूतावास को बंद करने का फैसला ले सकती है. अमेरिकी विदेश मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) रेक्स टिलर्सन ने कहा कि ट्रंप सरकार अभी दूतावास बंद करने पर विचार कर रही है.