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हेलसिंकी में आज पुतिन से मिलेंगे ट्रंप, ट्रेड वॉर समेत कई अहम मुद्दों पर बात सम्भव

सोमवार को फिनलैंड की राजधानी में ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। यह इन दोनों नेताओं की पहली बैठक होगी।

बैठक के लिए ट्रंप हेलसिंकी पहुंच चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के आरोपों के मद्देनजर हर कोई जानना चाह रहा है कि दोनों नेताओं में क्या बातचीत होती है?

यूरोप आने से पहले जब ट्रंप ने कहा था कि उनकी यात्रा का सबसे आसान हिस्सा हेलसिंकी प्रवास रहेगा, तो कई लोगों की भवें तन गई थीं। ब्रसेल्स और लंदन प्रवास के दौरान अब तक ट्रंप की यात्रा विवादों में रही है। इस बीच, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल का मामला फिर गरमा गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने में पुतिन ने ट्रंप की गुप्त रूप से मदद की थी। ऐसे में इसकी उम्मीद कम ही है कि बैठक में यह अकेला मुद्दा हावी रहेगा।

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को का द्विपक्षीय संबंध बेहद खराब है। हमें एक नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि, हम ट्रंप को बातचीत के योग्य साझीदार मानते हैं।

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रूस के साथ दो लाख करोड़ के लड़ाकू विमान समझौते से अलग हो सकता है भारत। जानें क्या है कारण

मालूम हो कि सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के मकसद से भारत और रूस के बीच 2007 में लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से तैयार करने का अंतर-सरकारी करार हुआ था।

लेकिन लागत साझा करने, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और तैयार किए जाने वाले विमानों की संख्या के मसले पर गंभीर मतभेदों के कारण पिछले 11 साल से यह परियोजना अटकी हुई है। परियोजना पर बातचीत में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘हमने परियोजना की लागत समेत तमाम मसलों पर अपनी राय रख दी है। लेकिन रूसी पक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’

बता दें कि भारत ने लड़ाकू विमान के प्रारंभिक डिजायन के लिए दिसंबर, 2010 में 29.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की थी। बाद में दोनों पक्षों ने अंतिम डिजाइन और पहले चरण में विमान के उत्पादन के लिए छह-छह अरब डॉलर का योगदान देने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

कहां फंसा है पेंच

भारत चाहता है कि विमान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर दोनों देशों का समान अधिकार हो, लेकिन रूस विमान में इस्तेमाल की जाने वाली सभी अहम तकनीकों को भारत के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि उसे सभी जरूरी कोड और अहम तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान को अपग्रेड कर सके। फरवरी, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर की सहमति से परियोजना पर वार्ता फिर शुरू हुई थी। दोनों देश गतिरोध वाले मसलों का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत परियोजना की बेहद ऊंची लागत की वजह से इसके फलदायी होने के प्रति आशान्वित नहीं है।

एचएएल कर रही पैरवी, वायुसेना की रुचि नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस परियोजना की जोरदार पैरवी कर रही है। उसका मानना है कि इस परियोजना के जरिये भारत को अपने एरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका मिलेगा क्योंकि किसी अन्य देश ने भारत को आज तक ऐसी अहम तकनीक का प्रस्ताव नहीं दिया है। वहीं, दूसरी ओर ऊंची लागत की वजह से भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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व्हाट्सएप पर आवेदन कर पाएं लाखों कमाने का मौका

कंपनी ने फेक न्यूज का पता लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने का एलान किया है। व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने बताया कि हम अपने यूजर्स की सुरक्षा के प्रति बेहद गंभीर हैं। ऐसे में हम इस नए प्रोजेक्ट के जरिए भारत के बड़े शैक्षिक जानकारों को साथ जोड़ने के लिए तैयार हैं। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आखिर कैसे गलत जानकारी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाया जाता है। इस रिसर्च की मदद से हम लोगों को फेक न्यूज को पहचानने और गलत जानकारी को रोकने की कोशिश करेंगे, जिससे वो फेक न्यूज को आगे बढ़ने से रोकें।

अकेले प्रौद्योगिकी को मॉब लिंचिंग जैसे क्रूर कृत्यों के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, निश्चित रूप से इसके जरिये भारत में नकली खबरों को फैलाना आसान हो गया है।

इन लोगों को मिलेगी प्राथमिकता

कंपनी ने कहा कि भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, मेक्सिको और इसी तरह उन देशों में किए गए शोध को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां व्हाट्सएप संचार का एक प्रमुख माध्यम है। पीएचडी धाकर शोधकर्ताओं के आवेदन को व्हाट्सएप स्वीकार करेगा। हालांकि, कुछ असाधारण मामलों में यह बिना पीएचडी वाले व्यक्तियों के आवेदनों की समीक्षा भी करेगा, जो सामाजिक विज्ञान या तकनीकी अनुसंधान में उच्च स्तर की उपलब्धि रखते होंगे।

12 अगस्त तक करें आवेदन

आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 12 अगस्त 2018 है। व्हाट्सएप पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को 14 सितंबर 2018 तक ईमेल द्वारा उनके आवेदन की स्थिति पर सूचना देगा। अधिक जानकारी के लिए, आवेदक व्हाट्सएप ब्लॉग पर जा सकते हैं। इसके बाद दो वर्कशॉप की जाएंगी, जिसमें चयनित लोगों को बताया जाएगा कि व्हाट्सएप काम कैसे करता है और उसका फोकस एरिया क्या है।

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यहां हुई है बादल और बर्फ की चोरी, इस देश पर लगा है आरोप

ईरान में हो रहे जलवायु परिवर्तन को देखते हुए इजरायल संदेह के घेरे में है। अन्‍य देशों के साथ इजरायल की कोशिश है कि ईरान में बारिश न हो। लेकिन ईरानी मौसम विभाग प्रमुख अहद वजीफे इससे सहमत नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के सवाल और आरोपों से समाधान नहीं मिलने वाला है हम अपने इस संकट का सही समाधान करने में जुटे हैं।

अहमदीनेजाद ने भी लगाया था ऐसा आरोप
जलाली ने कहा कि अफगानिस्तान और भूमध्य सागर के बीच का 2200 मीटर का पहाड़ी हिस्सा बर्फ से ढका होता है, लेकिन ऐसा ईरान में नहीं है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है कि जब ईरान में किसी अफसर ने अन्य देश पर बारिश चोरी का आरोप लगाया हो। इसके पहले भी 2011 में पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा था कि पश्चिमी देशों के चलते ईरान में सूखा पड़ा हुआ है। यूरोपीय देश एक खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल करके बादलों को कैद कर लेते हैं।

ईरान के मौसम विभाग के प्रमुख अहद वजीफे ने इससे स्‍पष्‍ट तौर से इन्कार करते हुए कहा है कि बादल या बर्फ की चोरी नहीं की जा सकती। ईरान लंबे वक्त से सूखे से जूझ रहा है। यह एक वैश्विक समस्या है न कि केवल ईरान की।

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वर्ल्‍ड ट्रेड वार में भारत ने भी दिया अमेरिका को उसकी ही भाषा में जवाब

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी कारोबार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रॉबर्ट लाइटहाइजर के कार्यालय ने भारत सरकार द्वारा वस्तुओं के निर्यात को लेकर चलाई जाने वाली योजनाओं तथा निर्यात से जुड़ी इकाइयों की योजनाओं व अन्य ऐसी योजनाओं को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के खिलाफ कारोबारी विवाद आपत्तियों के निपटारे हेतु कठोर आवेदन प्रस्तुत किया था। अमेरिका की इन आपत्तियों पर भारत सरकार ने दलील दी कि उसके द्वारा दी जा रही विभिन्न राहत और सुविधाएं डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत ही हैं। लेकिन अमेरिका अनुचित और अन्यायपूर्ण ढंग से भारत पर व्यापार प्रतिबंध बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत ने विगत 18 मई को डब्ल्यूटीओ को अमेरिका से आयातित 30 उत्पादों की सूची सौंपी थी, जिन पर वह आयात शुल्क बढ़ाना चाहता था। अब भारत ने इनमें से 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।

वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर
इससे यही लगता है कि बीते कुछ दिनों से वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर यानी वैश्विक व्यापार युद्ध को लेकर जो आशंका जताई जा रही थी, वह सही साबित होने लगी है। यह सही है कि अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कोई सात दशक तक वैश्विक व्यापार, पूंजी प्रवाह और कुशल श्रमिकों के लिए न्यायसंगत आर्थिक व्यवस्था के निर्माण और पोषण में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन अब वही वैश्विक व्यवस्था मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदमों से जोखिम में है। इस साल अमेरिका ने चीन, मैक्सिको, कनाडा, ब्राजील, अर्जेटीना, जापान, दक्षिण कोरिया व यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों के साथ-साथ भारत की कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए हैं। जैसे-जैसे अमेरिका विभिन्न देशों के आयातों पर शुल्क बढ़ा रहा है, जवाब में वे देश भी वैसा ही कर रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव भी भारत के वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि 19 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के आयात पर 10 फीसद शुल्क लगाने की चेतावना दी।

चीन ने लगाया शुल्‍क
इसके चार दिन पूर्व ही ट्रंप ने चीन से 50 अरब डॉलर मूल्य के सामान के आयात पर 25 फीसद शुल्क लगाने को मंजूरी दे दी। इसके बाद चीन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी 50 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाएगा। इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि इसी माह कनाडा के क्यूबेक सिटी में आयोजित जी-7 देशों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और नीतियों की वजह से तमाशा बनकर रह गया। जी-7 के सदस्य देश कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, फ्रांस तथा ब्रिटेन जहां पहले ही ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर नाखुश थे, वहीं जी-7 सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिका ने इस समूह के विभिन्न देशों से होने वाले कुछ आयातों पर नए व्यापारिक प्रतिबंध घोषित करते हुए ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका को और गहरा दिया।

डब्ल्यूटीओ की भूमिका
इस संदर्भ में डब्ल्यूटीओ की भूमिका अहम हो जाती है। डब्ल्यूटीओ एक ऐसा संगठन है, जो सदस्य देशों के बीच व्यापार तथा वाणिज्य को सहज-सुगम बनाने का उद्देश्य रखता है। यद्यपि डब्ल्यूटीओ एक जनवरी, 1995 से प्रभावी हुआ, परंतु वास्तव में यह 1947 में स्थापित एक बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के नए एवं बहुआयामी रूप में अस्तित्व में आया। जहां गैट वार्ता वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रही थीं, वहीं इससे आगे बढ़कर डब्ल्यूटीओ का लक्ष्य वैश्विक व्यापारिक नियमों को अधिक कारगर बनाने के प्रयास के साथ-साथ सेवाओं एवं कृषि में व्यापार संबंधी वार्ता को व्यापक बनाने का रहा है। किंतु वैश्विक व्यापार को सरल और न्यायसंगत बनाने के 71 वर्ष बाद तथा डब्ल्यूटीओ के कार्यशील होने के 23 वर्ष बाद भारत सहित विकासशील देशों के करोड़ों लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि डब्ल्यूटीओ के तहत विकासशील देशों का शोषण हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय
ऐसे में दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञ यही आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका के संरक्षणवादी रवैये से वैश्विक व्यापार युद्ध की शुरुआत हो गई है। लिहाजा इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करना जरूरी है कि यदि विश्व व्यापार व्यवस्था वैसे काम नहीं करती, जैसे उसे करना चाहिए तो डब्ल्यूटीओ ही एक ऐसा संगठन है, जो इसे दुरुस्त कर सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दुनियाभर में घातक व्यापार लड़ाइयां 21वीं सदी की हकीकत बन जाएंगी। बेहतर यही होगा कि विभिन्न देश एक-दूसरे को व्यापारिक हानि पहुंचाने की होड़ में उलझने के बजाय डब्ल्यूटीओ के मंच से ही आसन्न ग्लोबल ट्रेड वॉर के नकारात्मक प्रभावों का उपयुक्त हल निकालें। यद्यपि भारत ने कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है, लेकिन अब बेहतर यही होगा कि वह इस मामले में धैर्य का परिचय दे और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक हितों के व्यापक पहलुओं पर गौर करे।

सबसे बड़ा निर्यातक बाजार
यह इसलिए भी जरूरी है कि जहां भारत के लिए अमेरिका दुनिया का सबसे पहले क्रम का निर्यातक बाजार है, वहीं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। पिछले वित्त-वर्ष में भारत ने अमेरिका को 47.9 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया था। हम उम्मीद करें कि भारत सरकार और भारतीय उद्यमी निर्यात की नई उभरती चुनौतियों के बीच विभिन्न देशों में विभिन्न वस्तुओं के निर्यात के नए मौके ढूंढने की डगर पर आगे बढ़ेंगे। खासकर चीन व अन्य देशों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ने के कारण अमेरिका से आयातित सोयाबीन, तंबाकू, फल, गेहूं, मक्का तथा रसायन जैसी जो कई चीजें महंगी हो गई हैं, वहां के बाजारों में ये भारतीय उत्पाद सस्ते होने के कारण सरलता से अपनी पैठ बना सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड वॉर की स्थिति के चलते हमारे निर्यात, निवेश व आर्थिक विकास दर घटने की जो आशंकाएं बढ़ गई हैं, उनसे निपटने हेतु सरकार को पुख्ता रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

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जब पस्‍त हुए चिकित्‍सक, तो काम आए योगगुरु

यह सच मध्‍यप्रदेश के एक छोटे जिले मंदसौर का है। योग ने मंदसौर के 50 से अधिक बुजुर्गों को 70 और 80 की उम्र में फिर से युवा बना दिया है। दशपुर कुंज, रामटेकरी और मेघदूत नगर में प्रतिदिन सुबह योग के लिए 200 से अधिक लोग जुटते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो कुछ समय पहले चलने में मोहताज थे। अब युवाओं की तरह दौड़ लगा रहे हैं। शाजापुर में तो योग से पेरालिसिस तक ठीक होने का उदाहरण सामने आया है।

1- 70 के पारिख कर रहे हैं कमाल

मध्‍यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले दिनेशचंद्र पारिख 70 वर्ष के हैं। पारिख का कहना है कि हम योग के लाभ को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकते । वो बताते हैं कि नौ साल पहले हम योग से जुड़े। इसके बाद योग साधना से कुछ लाभ दिखा और मेरी दिलचस्‍पी इसमें गहरी होती गई। धीरे-धीरे योग से शारीरिक और मानसिक लाभ मिला और आस्‍था पैदा होने लगी। उन्‍होंने कहा कि 2008 से मैं नियमित योग कर रहा हूं।

स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त पारिख बताते हैं कि घुटने में तकलीफ से सीढि़यां चढ़ना दूभर हो गया था। इस परेशानी से आजिज आकर मैंने एक साल पहले ही सेवानिवत्ति का मन बना लिया था। चिकित्सकों ने घुटने बदलने की सलाह दी। ऐसे में योग गुरु सुरेंद्र जैन के संपर्क में आकर योग शुरू किया। इससे चलना-फिरना आसान हो गया। छह माह में पैर ठीक हो गया।

2- अब सीढ़ियों पर दौड़ते हैं 70 वर्षीय पामेचा

इसी जिले के निवासी 70 वर्षीय पामेचा 10 वर्ष पूर्व योग से जुड़े। उनका योग में अपार विश्‍वास है। पमोचा कहते हैं कि वह दस वर्षों से निरंतर योगाभ्‍यास कर रहे हैं। उनका यह विश्‍वास अनायास नहीं है। योग से जुड़ने से पहले पोचा चलने-फ‍िरने में मोहताज थे। आज वह योगाभ्‍यास से दौड़ सकते हैं, सीढि़यों पर चढ़ सकते हैं। पामेचा कहते हैं कि 2008 में 70 वर्ष की उम्र में योग से जुड़ा, तब घर की सी़ढ़ियां एक पैर से ही चढ़ पाता था, दूसरा पैर काम नहीं करता था। योग शुरू करते ही पैर ठीक हो गया। मंदसौर के भंवरलाल पामेचा योग को जीवन के लिए हवा और भोजन की तरह ही जरूरी मानते हैं।

3- बीमा एजेंट यशपाल शर्मा पेरालिसिस ठीक हो गया

बीमा एजेंट यशपाल शर्मा को वर्ष 2001 में हार्ट अटैक हुआ। उनके दुखों का यहीं अंत नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद वह पेरालिसिस से भी ग्रसित हो गए। यशपाल का कहना है कि वह तीन वर्षों तक चिकित्‍सकों से इलाज कराते रहे। इलाज में करीब 10 लाख रुपये भी खर्च हो गए। लेकिन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा। हमें कोई आराम नहीं मिला। यशपाल ने कहा कि हारा मन योग की शरण जा पहुंचा। योगाभ्‍यास से धीरे-धीरे आराम मिला। और मैं सालभर में पूरी तरह स्वस्थ हो गया। यशपाल अब योग में डिप्लोमा करने के बाद लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं।

4- रीतेश के जीवन में योग से फैला उजियारा

शहडोल निवासी रीतेश मिश्रा के जीवन में योग ने उजियारा फैलाया। रीतेश का कहना है कि छह साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने बताया कि मैं लगातार 14 साल तक योग कर रोशनी वापस लाने में कामयाब हुआ हूं। मुझे 80 प्रतिशत चीजें नजर आ जाती हैं। मार्कर से लिखे बड़े अक्षर पढ़ लेता हूं। मोबाइल को भी नजदीक से देखकर चला लेते हैं। रीतेश की तारीफ योग गुर बाबा रामदेव भी करते हैं। रीतेश बताते हैं कि बाबा रामदेव से मेरी पहली मुलाकात रीवा में 2008 में हुई थी। इसके बाद योग के प्रति लगाव पैदा हुआ।

रीतेश ने कहा पहले माता-पिता (सीमा मिश्रा व देवानंद मिश्रा) टीवी पर आसन देखकर योग कराते थे। मेरे माता-पिता मुझे लेकर काफी चिंतित थे। खासकर मेरी शिक्षा को लेकर। लेकिन समस्‍याओं के बावजूद रीतेश ने उच्‍च शिक्षा पूरी की। अब वह लोगों को योग सिखा रहे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की योग कक्षा पुलिस लाइन में सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाती है। वेलफेयर फंड से इन्हें कुछ राशि बतौर मेहनताना मिलती है। इनकी योग कक्षा में शामिल रहने वालों में पुलिस अफसर, जज, डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स शामिल हैं।

बता दें कि 21 जून का पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसके अलावा 150 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए करीब 5000 आयोजन हो रहे हैं।

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ऑस्ट्रेलिया की संसद में पहली बार किया गया योग, भारत से आया योग अब पूरी दुनिया में मचा रहा धूम

केनबरा स्थित संसद के कम्युनिटी हाल में इस सत्र में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट समेत कई मंत्रियों व सांसदों ने हिस्सा लिया और विभिन्न आसनों का अभ्यास किया। दो घंटे तक चले इस सत्र का आयोजन मेलबर्न स्थित वासुदेव क्रिया योग समूह ने किया था।

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

योग को प्रसारित करने में भारत की सफलता का जिक्र करते हुए एबॉट ने कहा, ‘भारत उभरती विश्व शक्ति है और योग उससे जुड़ा हुआ है। मुझे खुशी है भारत से आया योग पूरी दुनिया में फैल रहा है।’

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

वासुदेव क्रिया योग के राजेंद्र येंकानमुले ने कहा, ‘पहली बार किसी देश की संसद में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया है। यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा। हमें उम्मीद है कि आने वाले सालों में यह और भी सफल होगा।’

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दीवार के पीछे की हमारी हलचल को पकड़ सकता है एम आई टी का नया एआइ सिस्टम

शोधकर्ताओं ने लोगों की सामान्य गतिविधियों, जैसे टहलने, बातचीत करने, बैठने, दरवाजा खोलने या लिफ्ट का इंतजार करने की हजारों फोटो एकत्र कीं। फिर इन तस्वीरों को कैमरे से निकालकर उनके स्टिक फिगर्स (एक तरह के रेखा-चित्र) प्राप्त किए गए। संबंधित रेडियो सिग्नल के साथ इन्हें न्यूरल नेटवर्क से जोड़ा गया। इस संयोजन के साथ सिस्टम रेडियो सिग्नल और स्टिक फिगर्स के बीच संबंध को समझ गया। ट्रेनिंग के बाद आरएफ-पोज इतना समर्थ हो गया कि वह कैमरे के बिना केवल वायरलेस रिफ्लेक्शन के आधार पर लोगों के मूवमेंट को नोट करने लगा।

निगरानी में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिस्टम सही तरह से काम करे तो बुजुर्गों की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी और उन्हें गिरने, चोट लगने और एक्टिविटी पैटर्न में बदलाव जैसी चीजों से बचाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं की टीम मौजूदा समय में डॉक्टरों के साथ मिलकर हेल्थकेयर में इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर काम कर रही है।

सेंसर पहनने व डिवाइस चार्ज करने की जरूरत नहीं

एमआइटी के वैज्ञानिक दीना कताबी कहते हैं, हमने देखा है कि अक्सर लोगों को तेज चलते और सामान्य कामकाज करते हुए देखने के आधार पर ही डॉक्टर मर्ज को समझते हैं और इलाज की दिशा तय करते हैं। यहीं से हमें इसे तैयार करने का विचार आया। हमने इसी का एक जरिया उपलब्ध कराने की कोशिश की है। अब तक यह व्यवस्था नहीं थी।

शोधकर्ता के अनुसार, हमारी पहल की एक खासियत यह है कि इसमें मरीज को न तो कोई सेंसर पहनना पड़ता है और न ही अपनी डिवाइस को चार्ज करने की चिंता करनी पड़ती है। हेल्थकेयर के अलावा नया सिस्टम यानी आरएफ-पोज ऐसे वीडियो गेमों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जिनमें खिलाड़ियों का मूवमेंट होता है।

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किम के बड़े कदम से टली परमाणु आपदा, अब नए रिश्ते की होगी शुरुआत: डोनाल्ड ट्रम्प

सिंगापुर में मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने का वादा किया। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन डीसी लौटते वक्त ट्वीट किया, ‘अपने लोगों के उज्जवल भविष्य की खातिर साहसिक कदम उठाने के लिए मैं किम को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारी अप्रत्याशित मुलाकात से यह साबित होता है कि वास्तविक बदलाव संभव है।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘रॉकेट लांच, परमाणु परीक्षण या रिसर्च और नहीं। हम लोगों का एक साथ गुजरा दिन ऐतिहासिक रहा। धन्यवाद किम।’

दक्षिण कोरिया, चीन के दौरे पर पोंपियो

ट्रंप-किम शिखर वार्ता संपन्न होने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो दक्षिण कोरिया रवाना हो गए, जहां से वह चीन जाएंगे। पोंपियो दोनों देशों के अपने समकक्षों को शिखर वार्ता के बारे में जानकारी देंगे।

अन्य मिसाइल लांच स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे किम

शिखर वार्ता के एक दिन बाद ट्रंप ने बताया कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल परीक्षण स्थल को नष्ट करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम आगामी कुछ दिनों में अन्य मिसाइल स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे। उत्तर कोरिया ने पिछले महीने विदेशी मीडिया की मौजूदगी में अपना एक परमाणु परीक्षण स्थल ध्वस्त कर दिया था।

किम ने ट्रंप को दिया प्योंगयांग आने का न्योता

किम जोंग उन ने शिखर वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग आने का न्योता दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बुधवार को कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। दोनों ने इस आमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया है। इससे नए रिश्ते की शुरुआत होगी।

ट्रंप-किम वार्ता को उत्तर कोरिया के मीडिया ने बताया अपनी जीत

उत्तर कोरिया के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता को उत्तर कोरिया की जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर छाई रही। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट ने हालांकि शिखर वार्ता में हुए समझौते का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किए जाने पर सवाल भी उठाए।

दोनों अखबारों ने पहले पेज पर शिखर वार्ता की खबर को ट्रंप-किम की तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रॉडोंग सिनमुन ने अपने पहले पेज पर शिखर वार्ता को ‘सदी की बैठक’ बताया। सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने लिखा, ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को बंद करने, उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी देने और प्रतिबंधों को हटाने का इरादा जाहिर किया है।

उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन पर स्टार न्यूज एंकर री चुन ही ने भी इसी तरह की खबर पढ़कर सुनाई। 75 वर्षीय री आमतौर पर बड़ी घोषणाओं के मौके पर ही सामने आती हैं। पिछले साल सितंबर में उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण का एलान भी उन्होंने ही किया था।

सरकारी अखबार ने पहले पेज पर ट्रंप और किम के हाथ मिलाने समेत कई तस्वीरों को प्रकाशित किया है। जबकि अंदर के पेज पर अधिकारियों के साथ शिखर वार्ता, लंच और संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर करने की तस्वीरें छापी गई हैं।

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ब्रिटिश जज ने आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश भूमिका की जाँच के लिए फाइल सार्वजनिक करने को कहा

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फ‌र्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से ‘इंडिया पोलिटिकल’ के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआइ5, एमआइ6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।