Posted on

उत्तर प्रदेश में है दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल, 300 रुपये कर्ज लेकर हुआ था शुरू

कम लोग ही ये जानते होंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भारत में है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना ये स्कूल पूरी दुनिया में मशहूर है और यहां हजारों लोग पढ़ाई करते हैं. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े इस स्कूल के बारे में और जानते हैं यहां क्या खास है…
बता दें कि लखनऊ का सिटी मोंटेसरी स्कूल दुनिया में सबसे बड़ा स्कूल है. यह स्कूल बच्चों की संख्या को लेकर सबसे बड़ा स्कूल है. इस स्कूल में करीब 55 हजार बच्चे पढ़ाई करते हैं.
इस स्कूल में 55 हजार बच्चों के लिए 4500 लोगों को स्टाफ काम करता है. स्कूल के लखनऊ शहर में 18 कैंपस हैं.
यह स्कूल साल 1959 में 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ था. उस वक्त यह 300 रुपये की कैपिटल से शुरू किया गया था. आज इस स्कूल का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है.
इसकी स्कूल की स्थापना डॉ जगदीश गांधी और डॉ भारती गांधी ने की थी. अब यह स्कूल से आईसीएसई से मान्यता प्राप्त है. इस स्कूल का रिजल्ट भी सर्वश्रेष्ठ रहता है.
वैसे तो लखनऊ के इस स्कूल ने 2005 में ही 29,212 छात्रों के साथ रिकॉर्ड बना लिया था. इससे पहले सबसे बड़े स्कूल का रिकॉर्ड फिलिपीन्स के मनीला स्थित रिजाल हाई स्कूल के नाम था, जिसमें केवल 19,738 छात्र थे.
इस स्कूल में 2,500 टीचर हैं, 3,700 कंप्यूटर और 1,000 क्लासरूम है, जहां हजारों बच्चे शिक्षा लेते हैं. हालांकि किसी भी अन्य निजी स्कूल की तरह यहां भी बच्चों के माता पिता को इन सब सुविधाओं की अच्छी खासी कीमत देनी होती है.
वहीं पढ़ाई के साथ यहां खेलकूद को लेकर भी खास ध्यान दिया जाता है. पहला मॉनटेसरी स्कूल खोलने वाली मारिया कभी शिक्षा को व्यवसाय नहीं मानती है.
स्कूल को यूनेस्को से भी पीस एजुकेशन का अवार्ड मिल चुका है.
Posted on

सबसे मंहगी इस बाइक की खूबियां कर देंगी आपको हैरान, कीमत उड़ा देगी होश

दुनियाभर में सबसे ज्यादा कस्टमाइज्ड बाइक्स के शौकीनों के लिए हार्ले-डेविडसन पहली पसंद बनी हुई है और इसी पसंद को बरकरार रखने के लिए हार्ले-डेविडसन ने अपनी दुनिया की सबसे महंगी बाइक पेश की है, जिसका कीमत के आधार पर मुकाबला शायद ही कोई बाइक कर पाए। हार्ले डेविडसन की यह बाइक हीरों से जड़ी हुई है और इसे ब्लू एडिशन में बनाने के लिए वॉच और ज्वेलरी कंपनी बुकेरर के साथ बुंडनरबाइक के साथ साझेदारी की है।

हार्ले डेविडसन ब्लू एडिशन सॉफ्टेल स्लिम एस पर आधारित इस बाइक का बॉडीवर्क पर कस्टम रेट्रो-स्टाइल में काम किया गया है। कंपनी के मुताबिक इस मोटरसाइकिल के हर बॉडी पार्ट की वेल्डिंग, बीटिंग, शेप देना और पॉलिश करने जैसे सारे काम हाथों से किए गए हैं। इतना ही नहीं बाइक के व्हील रिम्स भी कस्टम-मेड हैं।

बाइक का लीवर, रिसर्वायरकैप, हेडलाइट कवर और फुट कंट्रोल जैसे पार्ट्स को गोल्ड ट्रीटमेंट दिया गया है। इस बाइक के हर पार्ट्स सिल्वर प्लेटेड हैं।

इतना ही नहीं बाइक में अलग-अलग रंगों के छह कोट्स किए गए हैं जिसे कंपनी की तरफ से ‘स्पेशल कोटिंग मेथड’ बताया गया है। बाइक के टॉप फ्यूल टैंक पर दो कटआउट्स हैं, जिसमें लेफ्ट वाले पर 5.40 कैरेट के हीरे वाला सॉलिटियर रिंग दिया गया है।

वहीं, दूसरी तरफ कस्टम-मेड वॉच का इस्तेमाल किया गया है और इसे साधने के लिए रिंग्स हैं ताकि वी-ट्विन मोटर के वाइब्रेशंस से इसे किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

इस बाइक को बनाने के लिए दोनों कंपनियों के 8 लोग, स्विस क्राफ्ट्समेन, जर्मन मोटरसाइकिल डिजाइनर्स ने मिलकर 2500 घंटे तक काम किया है। हार्ले डेविडसन की इस ब्लू एडिशन बाइक को ज्यूरिक में पेश किया गया और करेंट एक्सचेज रेट के हिसाब से इसकी कीमत 12.2 करोड़ रुपये है।

Posted on

फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

Posted on

दुनिया की 10 सबसे ताकतवर हस्तियों में शुमार हुए नरेंद्र मोदी, No. 1 पर चिनफिंग

प्रतिष्ठित फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली नेताओं की सूची में शुमार हो गए हैं. फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम मोदी नौवें स्‍थान पर काबिज हैं. इस सूची में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार पहले स्‍थान पर काबिज हुए हैं. वह रूसी नेता व्‍लादिमीर पुतिन को हटाकर पहले स्‍थान पर पहुंचे हैं. फोर्ब्‍स 2018 लिस्‍ट में दुनिया को चलाने वाले सबसे ताकतवर 75 नामों को शामिल किया गया है. फोर्ब्‍स ने लिस्‍ट जारी करते हुए कहा, ”दुनिया में करीब 7.5 अरब लोग हैं लेकिन ये 75 लोग दुनिया को चलाते हैं. फोर्ब्‍स की वार्षिक रैंकिंग में हर एक अरब में से एक ऐसे व्‍यक्ति को चुना जाता है जिनके एक्‍शन सबसे ज्‍यादा मायने रखते हैं.”

पीएम नरेंद्र मोदी
फोर्ब्स ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश (भारत) में “बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं.” इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मोदी सरकार के नवंबर 2016 के नोटबंदी के फैसले का हवाला दिया गया है. हाल के वर्षों में पीएम मोदी ने आधिकारिक यात्रा के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की और वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बढ़ाई है. इसके अलावा वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं.

mukesh ambani
PM मोदी के अलावा मुकेश अंबानी लिस्‍ट में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय हैं.(फाइल फोटो)

मुकेश अंबानी
रिलांयस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस सूची में पीएम मोदी के अलावा स्थान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं. वहीं, माइफ्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्या नाडेला को 40वें पायदान पर रखा गया है. अंबानी पर फोर्ब्स ने कहा कि अरबपति उद्योगपति ने 2016 में भारत के अति-प्रतिस्‍पर्द्धी बाजार में 4-G सेवा जियो शुरू करके कीमत की जंग छेड़ दी.

शी जिनपिंग
जिनपिंग ने पिछले लगातार चार वर्ष तक इस सूची में शीर्ष पर चले आ रहे पुतिन को दूसरे स्थान पर धकेल दिया है. सूची में तीसरे पायदान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चौथे पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और पांचवें पर अमेजन प्रमुख जैफ बेजोस हैं. पीएम मोदी के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग(13वें), ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे(14), चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग(15), एपल के सीईओ टिम कुक(24) को रखा गया है. इस वर्ष सूची में 17 नए नामों को शामिल किया गया है, इसमें सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (8वें ) भी हैं. सूची में पोप फ्रांसिस(6), बिल गेट्स(7), फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों(12), अलीबाबा के प्रमुख जैक मा(21) भी शामिल हैं.

Posted on

किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

Posted on

Avengers ने Box Office पर मचाई तबाही, दुनिया के कई रिकॉर्ड ध्वस्त

आपने बॉक्स ऑफ़िस पर बड़े उथल-पुथल देखे होंगे। कमाई का तूफ़ान और सुनामी भी देखी होगी लेकिन डेढ़ दर्जन सुपरहीरोज़ से लैस एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर ने तीन दिन में भारतीय बॉक्स ऑफ़िस पर जिस तरह से करोड़ों बटोरे हैं वो आपको हैरान करने के लिए काफ़ी हैं।

एंथोनी और जो रूसो के निर्देशन में बनी एवेंजर्स- इनफिनिटी वॉर ने इंडियन बॉक्स ऑफिस पर पहले वीकेंड में 94 करोड़ 30 लाख रूपये का विशाल कलेक्शन कर लिया है। हिंदी, तमिल और तेलुगु में रिलीज़ हुई इस फिल्म ने अपनी रिलीज़ के तीसरे  32 करोड़ 50 लाख रूपये का कलेक्शन किया जो तीन दिनों में सबसे ज़्यादा है। फिल्म ने दूसरे दिन 30 करोड़ करोड़ 50 लाख रूपये का कलेक्शन किया और एवेंजर्स ने पहले ही दिन 31 करोड़ 30 लाख का कलेक्शन कर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। रॉबर्ट डाउनी जूनियर, क्रिस हेम्सवर्थ, मार्क रुफालो, बेनेडिक्ट कम्बरबैच, सबस्टियन स्टान, क्रिस इवांस,स्कारलेट जोहेनसन और चैडविक बोसमैन जैसे बड़े सितारों से सजी ये फिल्म करीब 300 मिलियन डॉलर में बनाई गई और इसे भारत में 2000 से अधिक स्क्रीन्स में रिलीज़ किया गया, जिसमें से एक हजार के करीब थियेटर्स में ये फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु के डब वर्जन में देखने मिल रही है । एवेंजर्स पहले ही इस साल की इंडियन बॉक्स ऑफिस की सबसे बड़ी ओपनर बन चुकी है , जिसने बाग़ी 2 के 25 करोड़ 10 लाख रूपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया।

उधर दुनिया भर में एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर का जलवा हैl बिना चीन में रिलीज़ हुए फिल्म ने दुनिया भर से एक वीकेंड में 630 मिलियन डॉलर की कमाई कर एक नया विश्व कीर्तिमान बना दिया है l अकेले अमेरिका में भी फिल्म ने 250 मिलियन डॉलर का कलेक्शन किया है जो स्टारवार्स –द फ़ोर्स अवेकंस से अधिक है l यही नहीं फिल्म ने दुनिया भर में भी एक रिकॉर्ड बनाया है l इससे पहले एक वीकेंड में द फेट ऑफ द फ्यूरियस को 541.9 मिलियन डॉलर की कमाई हुई थी l

एवेंजर्स ने कई सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इनमें फ़ास्ट एंड फ्यूरियस 7 का एक वीकेंड का 50 करोड़ 11 लाख रूपये का और जंगल बुक का एक हफ़्ते में कमाया गया 74 करोड़ करोड़ 63 लाख रूपये का कलेक्शन भी शामिल है। उम्मीद की जा रही है कि ये फिल्म सोमवार के कलेक्शन के साथ फास्ट एंड फ्यूरियस 7 के लाइफ़ टाइम कलेक्शन 108 करोड़ को तोड़ देगी।   

अगर घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर भारतीय फिल्मों की बात करें तो इस साल आई पद्मावत के तीन दिन के कलेक्शन 78 करोड़ और बाग़ी 2 के 73 करोड़ 10 लाख रूपये की कमाई को ये फिल्म पीछे छोड़ चुकी है। बाग़ी 2 के 165 करोड़ रूपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ना भी इस फिल्म के लिए मामूली बात लग रही है। हालांकि फिल्म सुल्तान, प्रेम रतन धन पायो और बाहुबली 2 के पहले वीकेंड के कलेक्शन को पीछे नहीं छोड़ पाई। 

माना रहा है कि देश में सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी के चलते 15 से 20 करोड़ रूपये का कलेक्शन हो सकता है।  फिल्म को एक मई को मे डे की छुट्टी का भी भरपूर फ़ायदा मिलेगा।

हालांकि फिलहाल ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन सबसे अधिक कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्म बन गई है। अब जंगल बुक (13.51 करोड़) दूसरे, एवेंजर्स- एज ऑफ़ अल्ट्रॉन (11.95 करोड़) तीसरे, फास्ट एंड फ्यूरियस 8 ( 9.75 करोड़ ) चौथे और कैप्टन अमेरिका सिविल वॉर (8.79 करोड़) पांचवे नंबर पर है।

Posted on

India is Tolerant: सहिष्णु देशों में भारत ने पाया चौथा स्थान: सर्वे

हर कोई यह मानकर चल रहा था कि देश में लोग दिनोंदिन ज्यादा असहिष्णु होते जा रहे हैं। समाज बंट रहा है। लोगों की इस सोच के इतर सामाजिक समरसता की तस्वीर पेश करती यह अच्छी खबर है। 27 देशों में इप्सोस मोरी द्वारा किए एक अध्ययन के अनुसार भारत चौथा सबसे सहिष्णु देश है। देश के 63 फीसद लोग मानते हैं कि यहां एक-दूसरे के प्रति लोग बहुत सहिष्णु हैं। कनाडा सूची में शीर्ष पर जबकि हंगरी सबसे नीचे है।

अमीर और गरीब का अंतर दूसरी और देश के मूल निवासी व प्रवासियों के मध्य मतभेद तीसरी सबसे बड़ी वजह है। भारत के 49 फीसद लोग मानते हैं कि राजनीतिक विचारों में भिन्नता तनाव की वजह है। 48 फीसद अलग-अलग धर्मों और 37 फीसद सामाजिक-आर्थिक हैसियत के अंतर को इसका कारण मानते हैं। करीब 53 प्रतिशत भारतीयों ने माना कि अलग संस्कृति, विचारों और पृष्ठभूमि में रहने से और लोगों के बीच लगातार घुलते मिलते रहने से आपसी समझ और सम्मान बढ़ता हैं।

Posted on

फॉर्च्यून की 50 हस्तियों की सूची में मुकेश अंबानी 24वें नंबर पर पहुंचे

एशिया के अमीरों की लिस्ट में शामिल कारोबारी मुकेश अंबानी को फॉर्च्यून की 50 मशहूर हस्तियों की लिस्ट में जगह मिली है।

इस लिस्ट में सुप्रीम कोर्ट की जानी-मानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंह और आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोषी को भी जगह दी गई है। आपको बता दें कि 19 अप्रैल को मुकेश अंबानी का जन्मदिन था और इस मौके पर इससे अच्छा तोहफा तो हो ही नहीं सकता है। अंबानी को इस लिस्ट में 24वां स्थान मिला है। गौरतलब है कि गुरुवार को वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट लीडर्स ऑफ 2018 में दुनियाभर के 50 महानतम पथप्रदर्शकों की रैंकिंग लिस्ट जारी की गई थी।

मुकेश अंबानी को लिस्ट में 24वां स्थान मिला

मुकेश अंबानी को लिस्ट में 24वां स्थान मिला

मुकेश अंबानी ने इस लिस्ट में जगह जियो के कारण मिली है। जिसने पिछले दो सालों से भी कम समय में बड़ी संख्या में भारतीयों के हाथ में इंटरनेट और मोबाइल डेटा पहुंचाया है और देश के टेलिकॉम मार्केट की तस्वीर को पूरी तरह से बदल दी है।

फॉर्च्यून ने मुकेश अंबानी की तारीफ की

फॉर्च्यून ने मुकेश अंबानी की तारीफ की

फॉर्च्यून ने मुकेश अंबानी की तारीफ करते हुए लिखा है कि मुकेश अंबानी ने एक सपने को पूरी तरह से हकीकत में बदल दिया, जिसके कारण बेहद कम पैसों में मुफ्त कॉल्स और डेटा मुहैया कराना, जिससे जियो के सारे कंपीटिटर या तो खत्म हो गए या उन्हें अपनी कीमतें कम करनी पड़ी हैं।

जियो कंपनी के 16 करोड़ ग्राहक बन चुके

जियो कंपनी के 16 करोड़ ग्राहक बन चुके

भारत में डेटा की खपत में भी 1100 प्रतिशत का उछाल आया है। जिससे जिओ को फायदा हुआ, आज जियो की वजह से भारत का हर छोटा-बड़ा इंसान इंटरनेट से जुड़ गया है, जो एक बहुत बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन है। आपको बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सितंबर 2016 में जिओ लॉन्च किया था। तब से अब तक कंपनी के 16 करोड़ ग्राहक बन चुके हैं।

 कौन हैं मुकेश अंबानी

कौन हैं मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी एक भारतीय उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। मुकेश रिलायंस के संस्थापक स्वर्गीय धीरुभाई अम्बानी के पुत्र और ‘रिलायंस धीरुभाई अम्बानी ग्रुप’ के अध्यक्ष अनिल अंबानी के बड़े भाई हैं।

मुंबई इंडियन्स टीम के भी मालिक हैं मुकेश अंबानी

मुंबई इंडियन्स टीम के भी मालिक हैं मुकेश अंबानी

मुकेश के रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल, तेल, गैस और रिटेल जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। वे इंडियन प्रीमियर लीग के अंतर्गत आने वाली क्रिकेट टीम मुंबई इंडियन्स टीम के भी मालिक हैं। सन 2012 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर ‘स्पोर्ट्स ओनर्स’ की सूची में स्थान दिया। अपनी कंपनी के अलावा मुकेश अंबानी अलग-अलग समय पर विभिन समितियों के सदस्य, अध्यक्ष और प्रतिष्ठित कंपनियों के बोर्ड मेंबर भी रहे हैं। वे भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट बैंगलोर’ के बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

Posted on

सीरिया में अपनी फौज बनाए रखने के पीछे अमेरिका के हैं तीन खास मकसद

सीरिया पर हुए ताजा हमले ने वहां पर शांति स्‍थापना की उम्‍मीद पर पानी फेर दिया है। अब अमेरिका ने सीरिया में अपनी फौज की स्थिति को यथावत रखने का फैसला करते हुए करीब दो सप्‍ताह पहले लिए फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है।

यूएन में अमेरिकी राजदूत निक्‍की हेली के मुताबिक सीरिया में अमेरिकी फौज की मौजूदगी पर फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैन्‍युल मैक्रान ने भी अपनी सहमति जताई है। इसके अलावा अमेरिका सीरिया समेत रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध भी लगाने वाला है, जिसकी घोषणा जल्‍द ही कर दी जाएगी। यह प्रतिबंध रूस के सीरिया को लगातार समर्थन देने के खिलाफ लगाए जाने वाले हैं।

पहले फौज को वापस बुलाने का हुआ था ऐलान

गौरतलब है कि 4 अप्रैल को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि वह अमेरिकी फौज को सीरिया से वापस बुला लेंगे। हालांकि इसी दौरान उन्‍होंने यह भी कहा था कि सीरिया में जब तक उनका मकसद पूरा नहीं हो जाता और वहां मौजूद आएस आतंकियों को खत्‍म नहीं कर दिया जाता है तब तक करीब दो हजार जवान वहां पर तैनात रहेंगे। ताजा फैसले की जानकारी देते हुए यूएन में अमेरिकी राजदूत निक्‍की हेली ने एक बार फिर से यह साफ कर दिया है कि अमेरिका का मकसद पूरा होने तक अब अमेरिकी फौज सीरिया में मौजूद रहेंगी। इसमें कोई कटौती नहीं की जाएगी।

रूस को अलग-थलग करने में यूएस कामयाब

सीरिया पर ताजा हमले के बाद बदले माहौल में रूस को अलग-थलग करने की भी पूरी कोशिश अमेरिका ने की है, जिसमें वह कामयाब भी रहा है। यूएन में सीरियाई हमले के खिलाफ रूस के प्रस्‍ताव का गिरना अमेरिका के लिए एक बड़ी कामयाबी है। वहीं संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह भी साफ कर दिया गया है कि यदि सीरियाई राष्‍ट्रपति बशर अल असद नहीं मानें तो इस तरह के हमले आगे भी किए जाएंगे। रूस के लिए यह दोनों ही बातें किसी बड़ी हार की तरह हैं। मौजूदा स्थिति में अमेरिका और रूस के बीच शीतयुद्ध का दूसरा दौर शुरू हो चुका है।

अमेरिका के तीन मकसद

अमेरिका की तरफ से यूएन में उसके तीन मकसद भी बेहद साफ जाहिर कर दिए गए हैं। इसमें पहला मकसद सीरिया में केमिकल वैपंस का आगे इस्‍तेमाल न होना, दूसरा आतंकी संगठन आईएस का खात्‍मा और तीसरा ईरान पर नजर रखना है। हेली ने यह भी कहा है कि इन मकसद के पूरा होने के बाद सीरिया से अमेरिकी फौज वापस लौट जाएंगी। इस बातचीत के दौरान हेली का ये भी कहना था कि सीरिया अमे‍रिका के साथ वन-टू-वन टॉक के लिए पहले ही इंकार कर चुका है। उनका कहना था कि सीरिया बातचीत करना ही नहीं चाहता है। यह बातें उन्‍होंने एक चैनल से हुई वार्ता के दौरान कही हैं।

केमिकल अटैक के बाद बदले हालात

आपको बता दें कि सीरिया में हुए कथित केमिकल अटैक और इसके बाद हुए संयुक्‍त हमले से पूरी दुनिया में तनाव पैदा हो गया है। इसके चलते रूस के अमेरिका और उसके समर्थित देशों से संबंध जो पहले से ही काफी नाजुक हालात में थे अब और ज्‍यादा खराब हो गए हैं। खासतौर पर ब्रिटेन और फ्रांस के साथ। ताजा हमले में अमेरिका का साथ फ्रांस और ब्रिटेन ने ही दिया है। तीनों ने मिलकर सीरिया के दमिश्‍क और होम्‍स में करीब 103 मिसाइलें दागी थीं। इस हमले में सीरिया के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस बीच सीरिया की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि यदि उसके पास केमिकल वैपंस होते तो इस हमले में कुछ लीकेज जरूर होती लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसका अर्थ यही है कि सीरिया के पास केमिकल वैपंस नहीं हैं, जिनका जिक्र लगातार किया जा रहा है।

केमिकल वैपंस का इस्‍तेमाल

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में कुर्द लड़ाकों ने दावा किया था कि इस्लामिक स्टेट ने उनके खिलाफ उत्तरी इराक में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया था। वर्ष 1997 में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए हुए समझौते में यह तय हुआ था कि लड़ाई में क्लोरीन गैस का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अमेरिका ने इराक पर केमिकल वेपंस रखने का आरोप लगाते हुए साल 2003 में इराक पर हमला कर दिया था। 30 दिसंबर 2006 को इराकी राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी की सजा दे दी गई।

Posted on

पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं यहां की महारानी, सामने आए ऐसे दावे

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं। ये सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन मोरक्को के एक न्यूजपेपर ने ऐसा दावा किया है। अखबार ने ये दावा एक रिसर्च स्टडी के हवाले से किया है, जो खबरों में है। हालांकि, महारानी के पैगंबर मोहम्मद की वंशज होने का ये दावा कोई पहली बार नहीं किया गया है। 1986 में भी इसी तरह की एक रिपोर्ट सामने आई थी।

शाही फैमिली की बुक में भी ऐसे दावे…

– मोरक्को के अखबार के मुताबिक, शाही फैमिली की वंशावली की 43 पीढ़ियों को देखने के बाद इतिहासकारों का दावा है कि क्वीन एलिजाबेथ सेकंड असल में पैगंबर की दूर की रिश्तेदार हैं।
– ब्रिटिश वेबसाइट डेलीमेल ने भी दावा किया है कि इसी तरह की रिसर्च 1986 में बुर्केज पीराज (Burke’s Peerage) में भी पब्लिश हुई थी। इस बुक को शाही वंशावली के बारे में ऑथराइज्ड ब्रिटिश गाइड माना जाता है।
– हिस्टोरियंस के मुताबिक, एलिजाबेथ सेकंड की ब्लडलाइन 14वीं सदी के अर्ल ऑफ कैंब्रिज से जुड़ी हैं। ये ब्लडलाइन मध्यकालीन मुस्लिम स्पेन से लेकर पैगंबर साहब की बेटी फातिमा तक जाती हैं।
– फातिमा पैगंबर मोहम्मद की बेटी थीं और उनके वंशज स्पेन के राजा थे। इन्हीं से महारानी एलिजाबेथ का संबंध बताया जा रहा है। यही वजह है कि उन्हें पैगंबर का वंशज बताया जा रहा है।

ऐसे जोड़ा गया कनेक्शन

– मोरक्को के अखबार में इस पर आर्टिकल देने वाले हामिद अल अवनी ने लिखा कि 11 वीं सदी में स्पेन के सेविले के किंग अबू अल कासिम मुहम्मद बिन अब्बाद पैगंबर साहब की बेटी फातिमा के वंशज थे।
– उनकी बेटी का नाम जायदा था। बुर्केज पीराज की स्टडी के मुताबिक, महारानी मुस्लिम प्रिसेंज जायदा की फैमिली से ताल्लुक रखती हैं।
– जायदा बाद में सेविले के शासक अल मुतामिद इब्न अब्बाद की चौथी वाइफ बनीं, जिनका सांचो नाम का एक बेटा था।
– अब्बादी साम्राज्य पर हमला हुआ तो जायदा सेविले भागकर स्पेन के राजा अल्फोंसो सिक्स्थ के पास पहुंच गई। वहां उन्होंने धर्म परिवर्तन करा लिया और ईसाई बन गई। उनका नाम जायदा से इसाबेला हो गया।
– इसके बाद उनके बेटे सांचो के वंशज ने थर्ड अर्ल ऑफ कैंब्रिज रिचर्ड ऑफ कोनिसबर्ग से शादी कर ली। अर्ल ऑफ कैंब्रिज इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय के पोते थे।

दावों को लेकर मतभेद
– कुछ हिस्टोरियन इसके सपोर्ट में नहीं हैं, लेकिन इस दावे का प्रारंभिक मध्ययुगीन स्पेन की वंशावली के रिकॉर्ड ने समर्थन किया है। मिस्र के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती अली गोमा द्वारा भी इसे सत्यापित किया गया था।