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दुनिया की इन 10 जगहों पर किसी को भी जाने की नहीं है इजाजत

आज इंसान अंतरिक्ष में रहने की तैयारियां कर रहा है। मगर इतनी तरक्की करने के बाद भी दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जहां इंसान नहीं पहुंच सकते हैं। इंसानों पर ये पाबंदी वहां की सरकारों ने लगाई है। ऐसे ही कुछ इलाकों की सैर इन तस्वीरों के जरिए करिए।

ग्लोबल सीड वॉल्ट, नॉर्वे- ये एक अंडरग्राउंड बीज भंडारण केंद्र है। जिसे नार्वे के एक आइलैंड पर पहाड़ के अंदर बनाया गया है। यहां दुनिया की 4 हजार प्रजातियों के लगभग 8,40,000 बीज संरक्षित किए गए हैं। यहां पर सिर्फ उन्हीं लोगों को आने की इज़ाजत है, जो इसके सदस्य हैं और अपने बीज सुरक्षित रखना चाहते हैं।

स्नैक आयलैंड, ब्राजील- ब्राजील के साओ पाउलो से कुछ 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद Ilha da Queimada Granda नाम के आईलैंड पर 5-10 सांप हर 10 वर्ग फ़ीट पर मौजूद हैं। ये सांप बहुत ही ज़हरीले हैं, इसलिए यहां लोगों का जाना मना है।

द क्वींस बेडरूम, यूनाइडेट किंगडम- ब्रिटेन की महारानी Buckingham Palace में रहती हैं और ये 1837 से राजघराने का शाही महल रहा है। इस महल के एक भाग को छोड़ कर बाकी सभी को टूरिस्टों के लिए खोला गया है। जो हिस्सा बचा के रखा गया है, वो है महारानी का बेडरूम। जहां किसी को भी जाने की मंजूरी नहीं है।

नॉर्थ सेंटिनेल आयलैंड, भारत- भारत के अंडमान में मौजूद इस आइलैंड पर कोई भी व्यक्ति नहीं जा सकता, अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो यहां मौजूद कुछ आदिवासी उसे जान से मारने पर उतारू हो जाते हैं। उनकी मानना है कि ये बहुत ही पवित्र क्षेत्र है, जहां इंसानों को नहीं जाना चाहिए।

एरिया 51, यूएसए- अमेरिका के नेवादा में मौजूद इस इलाके में भी घूमने-फिरना मना है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो इसे अमेरिकी सेना ने एलियन टेस्टिंग के लिए बनाया है। हालांकि ये बात सही है या नहीं, ये आज तक नहीं पता चल पाया है। लेकिन यहां जाना जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ने यहां लैंड माइंस बिछा रखी हैं।

निहाऊ, अमेरिका- इसे The Forbidden Island भी कहा जाता है,क्योंकि इसकी झलक आप दिन ढ़लने के बाद ही पा सकते हैं, इसका स्वामित्व 150 सालों से एक ही परिवार के हाथ में है।

पोवेगलिया, इटली- इटली के वीनस शहर के पास ये एक छोटा सा आइलैंड है। यहां 14वीं शताब्दी में प्लेग फैलने के कारण सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी भी कहानी है कि, 19वीं सदी में यहां एक पागल खाना बना था। इस पागल खाने में बहुत से मरीज़ों पर जानलेवा प्रयोग किए जाते थे। फिलहाल इस डरावनी जगह पर सैलानियों के जाने पर पूरी तरह से पाबंदी है।

किन शी हुआंग मकबरा, चीन- चीन के पहले सम्राट के पास टेराकोटा वारियर्स नाम की एक सेना थी। ये सैनिक अपने राजा की रक्षा के लिए तैनात थे। जब उनकी मौत हुई, तब क्रब में टेराकोटा वॉरियर्स की हजारों मूर्तियां दफन की गई थी। यहां जाना बैन है, क्योंकि इस मकबरे में मौजूद पारे के कारण लोगों की जान जाने का खतरा है।

कोका-कोला रेसिपी वॉल्ट, अमेरिका- सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी कोका कोला को बनाने वाली रेसिपी को एक 6.6 फ़ीट की तिज़ोरी में अटलांटा में सुरक्षित रखा गया है। इसकी सुरक्षा में हर दम हथियारबंद गार्ड तैनात रहते हैं। जिमी होफा ने इसकी खोज की थी, जिनकी बाद में हत्या कर दी गई थी। इस तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है।

बोहेमियन ग्रोव, अमेरिका- कैलिफोर्निया के मोंटे रियो में ये जगह एक खेल मैदान की तरह है, मगर इस मैदान पर चुनिंदा शख्सियतों को ही जाने की इजाजत है। जिनमें कुछ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति, संगीतकार और बड़े सरकारी अफसर शामिल हैं। इसकी सदस्यता हासिल करना भी बड़ी टेढ़ी खीर साबित होता है। सदस्यतों की मंजूरी के बाद ही यहां कोई आ सकता है।

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यूएन के महासचिव ने किया नरेंद्र मोदी को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण अवॉर्ड चैंपियंस ऑफ अर्थ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यह अवॉर्ड यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दिया। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभारी हूं। यह सम्मान भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की प्रतिबद्धता का फल है। चैंपियन अर्थ अवॉर्ड भारत के जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है, जो अपने जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं।’

ये देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान :प्रधानमंत्री ने कहा- ‘यह देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान है। महिलाएं पौधों में भी भगवान देखती हैं, वे पत्तियां भी गिनकर तोड़ती हैं। मैं इस सम्मान के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए यह दोहरे सम्मान का मौका है। कोच्चि एयरपोर्ट को ऊर्जा क्षेत्र में सम्मान मिला है। पर्यावरण और प्रकृति का सीधा रिश्ता कल्चर से है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को विश्व स्वीकार कर रहा है। हम उस समाज का हिस्सा हैं, जहां सुबह उठने से पहले धरती पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगी जाती है। क्योंकि हम उस पर वजन डालने वाले हैं।’

भारतीयों के लिए प्रकृति ही सर्वोपरि है : उन्होंने कहा, ‘हमारे व्रत और त्योहारों में प्रकृति का जुड़ाव है। हमारे यहां प्रकृति को सर्वोपरि माना गया है। यजुर्वेद से लिए शांतिपाठ में वातावरण में शांति की प्रार्थना की गई है। यूएन ने जो सम्मान दिया, वह लोगों की आस्था का सम्मान है। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं। आबादी के एक हिस्से को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सूखे की वजह से सीमित संसाधन वाले गरीब परेशान हो रहे हैं। आज प्रकृति पर अतिरिक्त दवाब डाले बगैर विकास की जरूरत है।’

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अमेजन एक ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप वाली दूसरी अमेरिकी कंपनी

amazon head quarter

अमेजन 1 ट्रिलियन डॉलर (71 लाख करोड़ रुपए) मार्केट कैप वाली अमेरिका की दूसरी और दुनिया की तीसरी कंपनी बन गई। इसका शेयर मंगलवार को 2% तेजी के साथ 2050.50 डॉलर पर पहुंच गया। इस बढ़त से मार्केट वैल्यू में इजाफा हुआ।

amazon jeff bezos

एपल दो अगस्त को 1 ट्रिलियन डॉलर की पहली अमेरिकी कंपनी बनी थी। अमेजन का मार्केट कैप एपल से 9900 करोड़ डॉलर कम है। एपल से पहले 2007 में शंघाई के शेयर बाजार में पेट्रोचाइना का मार्केट वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े पर पहुंचा था।

दुनिया की टॉप-3 मार्केट कैप वाली कंपनियां

कंपनी मार्केट कैप (डॉलर)
एपल 1099 अरब
अमेजन 1000 अरब
माइक्रोसॉफ्ट 856 अरब

एक साल में शेयर 100% से ज्यादा चढ़ा: पिछले 12 महीने में अमेजन के शेयर ने 108% रिटर्न दिया। इस साल जनवरी से अब तक इसमें 74% तेजी आई। पिछले तीन महीने में निवेशकों को 20% और एक महीने में करीब 12% मुनाफा दिया।

21 साल में शेयर प्राइस बढ़कर 114 गुना: 15 मई 1997 को 18 डॉलर पर अमेजन के शेयर की लिस्टिंग हुई। मंगलवार की तेजी के बाद शेयर 2050 के ऊपर चला गया। आईपीओ में 1000 डॉलर के निवेश की वैल्यू अब 13 लाख 41 हजार डॉलर से भी ज्यादा हो गई।

तारीख शेयर प्राइस
15 मई 1997 18 डॉलर
23 अक्टूबर 2009 100 डॉलर
27 अक्टूबर 2017 1000 डॉलर
30 अगस्त 2018 2000 डॉलर

जेफ बेजोस दुनिया में सबसे अमीर: अमेजन के फाउंडर और सीईओ लंबे समय से दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 166 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बेजोस नंबर-1 हैं। शेयर में तेजी से इस साल उनकी दौलत में 66.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। बिलेनियर इंडेक्स में 98.1 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बिल गेट्स दूसरे नंबर पर हैं। एशिया के सबसे अमीर मुकेश अंबानी 47.7 अरब डॉलर के साथ 12वें नंबर पर हैं।

 

अमेजन का सफर

1994 किताब बेचने से शुरुआत
मई 1997 अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टिंग
जून 1998 आईएमडीबी का अधिग्रहण

ऑनलाइन म्यूजिक स्टोर की शुरुआत

दिसंबर 2000 कैमरा, फोटो स्टोर शुरू किया

अमेजन मार्केटप्लेस लॉन्च

फरवरी 2005 अमेजन प्राइम लॉन्च
नवंबर 2007 अमेजन किंडल, अमेजन म्यूजिक शुरू
सितंबर 2011 किंडल फायर, किंडल टच, किंडल टच 3जी बाजार में उतारे
दिसंबर 2016 अमेजन वीडियो लॉन्च

ड्रोन सर्विस प्राइम एयर से पहली डिलीवरी

अगस्त 2017 13 अरब डॉलर में होल फूड्स का अधिग्रहण
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यहां हुई है बादल और बर्फ की चोरी, इस देश पर लगा है आरोप

ईरान में हो रहे जलवायु परिवर्तन को देखते हुए इजरायल संदेह के घेरे में है। अन्‍य देशों के साथ इजरायल की कोशिश है कि ईरान में बारिश न हो। लेकिन ईरानी मौसम विभाग प्रमुख अहद वजीफे इससे सहमत नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के सवाल और आरोपों से समाधान नहीं मिलने वाला है हम अपने इस संकट का सही समाधान करने में जुटे हैं।

अहमदीनेजाद ने भी लगाया था ऐसा आरोप
जलाली ने कहा कि अफगानिस्तान और भूमध्य सागर के बीच का 2200 मीटर का पहाड़ी हिस्सा बर्फ से ढका होता है, लेकिन ऐसा ईरान में नहीं है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है कि जब ईरान में किसी अफसर ने अन्य देश पर बारिश चोरी का आरोप लगाया हो। इसके पहले भी 2011 में पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा था कि पश्चिमी देशों के चलते ईरान में सूखा पड़ा हुआ है। यूरोपीय देश एक खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल करके बादलों को कैद कर लेते हैं।

ईरान के मौसम विभाग के प्रमुख अहद वजीफे ने इससे स्‍पष्‍ट तौर से इन्कार करते हुए कहा है कि बादल या बर्फ की चोरी नहीं की जा सकती। ईरान लंबे वक्त से सूखे से जूझ रहा है। यह एक वैश्विक समस्या है न कि केवल ईरान की।

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जब पस्‍त हुए चिकित्‍सक, तो काम आए योगगुरु

यह सच मध्‍यप्रदेश के एक छोटे जिले मंदसौर का है। योग ने मंदसौर के 50 से अधिक बुजुर्गों को 70 और 80 की उम्र में फिर से युवा बना दिया है। दशपुर कुंज, रामटेकरी और मेघदूत नगर में प्रतिदिन सुबह योग के लिए 200 से अधिक लोग जुटते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो कुछ समय पहले चलने में मोहताज थे। अब युवाओं की तरह दौड़ लगा रहे हैं। शाजापुर में तो योग से पेरालिसिस तक ठीक होने का उदाहरण सामने आया है।

1- 70 के पारिख कर रहे हैं कमाल

मध्‍यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले दिनेशचंद्र पारिख 70 वर्ष के हैं। पारिख का कहना है कि हम योग के लाभ को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकते । वो बताते हैं कि नौ साल पहले हम योग से जुड़े। इसके बाद योग साधना से कुछ लाभ दिखा और मेरी दिलचस्‍पी इसमें गहरी होती गई। धीरे-धीरे योग से शारीरिक और मानसिक लाभ मिला और आस्‍था पैदा होने लगी। उन्‍होंने कहा कि 2008 से मैं नियमित योग कर रहा हूं।

स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त पारिख बताते हैं कि घुटने में तकलीफ से सीढि़यां चढ़ना दूभर हो गया था। इस परेशानी से आजिज आकर मैंने एक साल पहले ही सेवानिवत्ति का मन बना लिया था। चिकित्सकों ने घुटने बदलने की सलाह दी। ऐसे में योग गुरु सुरेंद्र जैन के संपर्क में आकर योग शुरू किया। इससे चलना-फिरना आसान हो गया। छह माह में पैर ठीक हो गया।

2- अब सीढ़ियों पर दौड़ते हैं 70 वर्षीय पामेचा

इसी जिले के निवासी 70 वर्षीय पामेचा 10 वर्ष पूर्व योग से जुड़े। उनका योग में अपार विश्‍वास है। पमोचा कहते हैं कि वह दस वर्षों से निरंतर योगाभ्‍यास कर रहे हैं। उनका यह विश्‍वास अनायास नहीं है। योग से जुड़ने से पहले पोचा चलने-फ‍िरने में मोहताज थे। आज वह योगाभ्‍यास से दौड़ सकते हैं, सीढि़यों पर चढ़ सकते हैं। पामेचा कहते हैं कि 2008 में 70 वर्ष की उम्र में योग से जुड़ा, तब घर की सी़ढ़ियां एक पैर से ही चढ़ पाता था, दूसरा पैर काम नहीं करता था। योग शुरू करते ही पैर ठीक हो गया। मंदसौर के भंवरलाल पामेचा योग को जीवन के लिए हवा और भोजन की तरह ही जरूरी मानते हैं।

3- बीमा एजेंट यशपाल शर्मा पेरालिसिस ठीक हो गया

बीमा एजेंट यशपाल शर्मा को वर्ष 2001 में हार्ट अटैक हुआ। उनके दुखों का यहीं अंत नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद वह पेरालिसिस से भी ग्रसित हो गए। यशपाल का कहना है कि वह तीन वर्षों तक चिकित्‍सकों से इलाज कराते रहे। इलाज में करीब 10 लाख रुपये भी खर्च हो गए। लेकिन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा। हमें कोई आराम नहीं मिला। यशपाल ने कहा कि हारा मन योग की शरण जा पहुंचा। योगाभ्‍यास से धीरे-धीरे आराम मिला। और मैं सालभर में पूरी तरह स्वस्थ हो गया। यशपाल अब योग में डिप्लोमा करने के बाद लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं।

4- रीतेश के जीवन में योग से फैला उजियारा

शहडोल निवासी रीतेश मिश्रा के जीवन में योग ने उजियारा फैलाया। रीतेश का कहना है कि छह साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने बताया कि मैं लगातार 14 साल तक योग कर रोशनी वापस लाने में कामयाब हुआ हूं। मुझे 80 प्रतिशत चीजें नजर आ जाती हैं। मार्कर से लिखे बड़े अक्षर पढ़ लेता हूं। मोबाइल को भी नजदीक से देखकर चला लेते हैं। रीतेश की तारीफ योग गुर बाबा रामदेव भी करते हैं। रीतेश बताते हैं कि बाबा रामदेव से मेरी पहली मुलाकात रीवा में 2008 में हुई थी। इसके बाद योग के प्रति लगाव पैदा हुआ।

रीतेश ने कहा पहले माता-पिता (सीमा मिश्रा व देवानंद मिश्रा) टीवी पर आसन देखकर योग कराते थे। मेरे माता-पिता मुझे लेकर काफी चिंतित थे। खासकर मेरी शिक्षा को लेकर। लेकिन समस्‍याओं के बावजूद रीतेश ने उच्‍च शिक्षा पूरी की। अब वह लोगों को योग सिखा रहे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की योग कक्षा पुलिस लाइन में सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाती है। वेलफेयर फंड से इन्हें कुछ राशि बतौर मेहनताना मिलती है। इनकी योग कक्षा में शामिल रहने वालों में पुलिस अफसर, जज, डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स शामिल हैं।

बता दें कि 21 जून का पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसके अलावा 150 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए करीब 5000 आयोजन हो रहे हैं।

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ऑस्ट्रेलिया की संसद में पहली बार किया गया योग, भारत से आया योग अब पूरी दुनिया में मचा रहा धूम

केनबरा स्थित संसद के कम्युनिटी हाल में इस सत्र में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट समेत कई मंत्रियों व सांसदों ने हिस्सा लिया और विभिन्न आसनों का अभ्यास किया। दो घंटे तक चले इस सत्र का आयोजन मेलबर्न स्थित वासुदेव क्रिया योग समूह ने किया था।

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

योग को प्रसारित करने में भारत की सफलता का जिक्र करते हुए एबॉट ने कहा, ‘भारत उभरती विश्व शक्ति है और योग उससे जुड़ा हुआ है। मुझे खुशी है भारत से आया योग पूरी दुनिया में फैल रहा है।’

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

वासुदेव क्रिया योग के राजेंद्र येंकानमुले ने कहा, ‘पहली बार किसी देश की संसद में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया है। यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा। हमें उम्मीद है कि आने वाले सालों में यह और भी सफल होगा।’

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दीवार के पीछे की हमारी हलचल को पकड़ सकता है एम आई टी का नया एआइ सिस्टम

शोधकर्ताओं ने लोगों की सामान्य गतिविधियों, जैसे टहलने, बातचीत करने, बैठने, दरवाजा खोलने या लिफ्ट का इंतजार करने की हजारों फोटो एकत्र कीं। फिर इन तस्वीरों को कैमरे से निकालकर उनके स्टिक फिगर्स (एक तरह के रेखा-चित्र) प्राप्त किए गए। संबंधित रेडियो सिग्नल के साथ इन्हें न्यूरल नेटवर्क से जोड़ा गया। इस संयोजन के साथ सिस्टम रेडियो सिग्नल और स्टिक फिगर्स के बीच संबंध को समझ गया। ट्रेनिंग के बाद आरएफ-पोज इतना समर्थ हो गया कि वह कैमरे के बिना केवल वायरलेस रिफ्लेक्शन के आधार पर लोगों के मूवमेंट को नोट करने लगा।

निगरानी में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिस्टम सही तरह से काम करे तो बुजुर्गों की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी और उन्हें गिरने, चोट लगने और एक्टिविटी पैटर्न में बदलाव जैसी चीजों से बचाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं की टीम मौजूदा समय में डॉक्टरों के साथ मिलकर हेल्थकेयर में इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर काम कर रही है।

सेंसर पहनने व डिवाइस चार्ज करने की जरूरत नहीं

एमआइटी के वैज्ञानिक दीना कताबी कहते हैं, हमने देखा है कि अक्सर लोगों को तेज चलते और सामान्य कामकाज करते हुए देखने के आधार पर ही डॉक्टर मर्ज को समझते हैं और इलाज की दिशा तय करते हैं। यहीं से हमें इसे तैयार करने का विचार आया। हमने इसी का एक जरिया उपलब्ध कराने की कोशिश की है। अब तक यह व्यवस्था नहीं थी।

शोधकर्ता के अनुसार, हमारी पहल की एक खासियत यह है कि इसमें मरीज को न तो कोई सेंसर पहनना पड़ता है और न ही अपनी डिवाइस को चार्ज करने की चिंता करनी पड़ती है। हेल्थकेयर के अलावा नया सिस्टम यानी आरएफ-पोज ऐसे वीडियो गेमों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जिनमें खिलाड़ियों का मूवमेंट होता है।

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किम के बड़े कदम से टली परमाणु आपदा, अब नए रिश्ते की होगी शुरुआत: डोनाल्ड ट्रम्प

सिंगापुर में मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने का वादा किया। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन डीसी लौटते वक्त ट्वीट किया, ‘अपने लोगों के उज्जवल भविष्य की खातिर साहसिक कदम उठाने के लिए मैं किम को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारी अप्रत्याशित मुलाकात से यह साबित होता है कि वास्तविक बदलाव संभव है।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘रॉकेट लांच, परमाणु परीक्षण या रिसर्च और नहीं। हम लोगों का एक साथ गुजरा दिन ऐतिहासिक रहा। धन्यवाद किम।’

दक्षिण कोरिया, चीन के दौरे पर पोंपियो

ट्रंप-किम शिखर वार्ता संपन्न होने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो दक्षिण कोरिया रवाना हो गए, जहां से वह चीन जाएंगे। पोंपियो दोनों देशों के अपने समकक्षों को शिखर वार्ता के बारे में जानकारी देंगे।

अन्य मिसाइल लांच स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे किम

शिखर वार्ता के एक दिन बाद ट्रंप ने बताया कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल परीक्षण स्थल को नष्ट करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम आगामी कुछ दिनों में अन्य मिसाइल स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे। उत्तर कोरिया ने पिछले महीने विदेशी मीडिया की मौजूदगी में अपना एक परमाणु परीक्षण स्थल ध्वस्त कर दिया था।

किम ने ट्रंप को दिया प्योंगयांग आने का न्योता

किम जोंग उन ने शिखर वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग आने का न्योता दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बुधवार को कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। दोनों ने इस आमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया है। इससे नए रिश्ते की शुरुआत होगी।

ट्रंप-किम वार्ता को उत्तर कोरिया के मीडिया ने बताया अपनी जीत

उत्तर कोरिया के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता को उत्तर कोरिया की जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर छाई रही। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट ने हालांकि शिखर वार्ता में हुए समझौते का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किए जाने पर सवाल भी उठाए।

दोनों अखबारों ने पहले पेज पर शिखर वार्ता की खबर को ट्रंप-किम की तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रॉडोंग सिनमुन ने अपने पहले पेज पर शिखर वार्ता को ‘सदी की बैठक’ बताया। सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने लिखा, ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को बंद करने, उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी देने और प्रतिबंधों को हटाने का इरादा जाहिर किया है।

उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन पर स्टार न्यूज एंकर री चुन ही ने भी इसी तरह की खबर पढ़कर सुनाई। 75 वर्षीय री आमतौर पर बड़ी घोषणाओं के मौके पर ही सामने आती हैं। पिछले साल सितंबर में उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण का एलान भी उन्होंने ही किया था।

सरकारी अखबार ने पहले पेज पर ट्रंप और किम के हाथ मिलाने समेत कई तस्वीरों को प्रकाशित किया है। जबकि अंदर के पेज पर अधिकारियों के साथ शिखर वार्ता, लंच और संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर करने की तस्वीरें छापी गई हैं।

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ब्रिटिश जज ने आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश भूमिका की जाँच के लिए फाइल सार्वजनिक करने को कहा

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फ‌र्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से ‘इंडिया पोलिटिकल’ के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआइ5, एमआइ6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।

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दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले शख्स बने निकेश अरोड़ा, अब हैं पालो अल्टो नेटवर्क के नए CEO

50 साल के अरोड़ा ने मार्क मिकलॉकलीन जगह ली है. जो पिछले सात सालों से पालो अल्टो के सीईओ के पद पर बने हुए थे. निकेश अरोड़ा सीईओ के साथ ही इस ग्रुप के नए चेयरमैन भी बन गए हैं. निकेश का सालाना वेतन 1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6.7 करोड़ रुपये होगा और इतना ही उन्हें बोनस मिलेगा. इसके साथ ही उन्हें 40 मिलियन डॉलर यानी 268 करोड़ रुपए के रिस्ट्रीक्टेड शेयर मिलेंगे।

कौन हैं निकेश अरोड़ा?
निकेश अरोड़ा का जन्म 6 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के गाजि‍याबाद में हुआ. निकेश के पिता इंडियन एयरफ़ोर्स में अधिकारी थे. उन्होंने दिल्ली के एयरफ़ोर्स के स्कूल से पढ़ाई की. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग आआईटी वाराणसी (बीएचयू) से साल 1989 में किया. आईआईटी की डिग्री के बाद उन्हें विप्रो में नौकरी मिली लेकिन उन्होंने जल्द ही ये नौकरी छोड़ दी औऱ आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली.

निकेश अरोड़ा ने साल 2004 में गूगल कंपनी ज्वाइन की. गूगल में वे कई ऑपरेशन के लीडर के तौर पर काम करते रहे. साल 2004 से 2007 के बीच वे गूगल के यूरोप ऑपरेशन के वाइस प्रेसिडेंट रहे. इसके बाद अफ्रीका रिजन के लिए साल 2009 तक काम किया. साल 2009 से 2010 तक वे गूगल के ग्लोबल बिजनेस डेवपमेंट के प्रेसिडेंट रहे. 2011 में वो गूगल में चीफ़ बिज़नेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही वो उस लीग में आ गए जिन्हें गूगल सबसे ज्यादा सैलरी देता है. साल 2014 में अरोड़ा ने गूगल की नौकरी छोड़ दी.

इसके बाद निकेश ने बतौर सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) सॉफ़्ट बैंक ज्वाइन किया था और यहां उन्हें दो सालों में 200 मिलियन डॉलर का कंपेंसेशन पैकेज मिला. निकेश यहां जून 2016 तक रहे थे. अब जून 2018 में उन्होंने पालो अल्टो का हाथ थामा है.