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सट्टेबाजी पर पूछे गए ये 5 सवाल, जवाब देते ही फंस गए अरबाज खान

ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच 3 घंटे से ज्यादा वक्त तक अरबाज खान से पूछताछ की.

अरबाज खान को बुकी सोनू के सामने बिठाकर पूछताछ की गई. इसमें उनसे 5 सवाल दागे गए जिनका जवाब देकर अरबाज फंस गए. उनसे पूछा गया कि,

1. क्या आपने सोनू जालान के साथ सट्टा लगाया?

2. सोनू को कैसे जानते हैं आप?

3. क्या इस बारे में परिवार को पता था?

4. अब तक कितनी रकम का सट्टा लगाया है?

5. क्या जालान ने उन्हें फोन पर धमकी दी?

इन सवालों के जवाब में अरबाज ने बताया कि उन्होंने न सिर्फ आईपीएल मैचों पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों में भी सट्टा लगाया है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल IPL मैचों में लगाए गए पैसों में उन्हें करीब 2.75 करोड़ रुपये का नुकसाना भी हुआ था. अरबाज ने बताया कि करीब 4-5 साल से वह इस धंधे में शामिल हैं.

तनाव में शुरू की सट्टेबाजी

अभिनेता अरबाज ने पूछताछ में खुलासा किया कि उनका परिवार हमेशा से सट्टा लगाने के लिए मना करता था. परिवार इस काम को गलत मानता था लेकिन वह शौक के लिए क्रिकेट मैचों में करोड़ों रुपये का खेल करते थे. उन्होंने यह भी बताया कि पारिवारिक तनाव की वजह से वह सट्टेबाजी के खेल में शामिल हुए क्योंकि उनके निजी जीवन में काफी उतार-चढ़ाव था और पत्नी मलाइका अरोड़ा से तलाक की एक वजह सट्टेबाजी भी बताई जा रही है क्योंकि मलाइका हमेशा से उन्हें इसके लिए मना करती थीं.

पुलिस की पूछताछ में अरबाज ने सोनू से लिंक की बात कबूल की है लेकिन उन्हें याद नहीं कि वह कब और कैसे सोनू से मिले थे. उन्होंने बताया कि सोनू से उन्हें किसने मिलवाया इस बारे में ठीक से याद नहीं है.

इससे पहले ठाणे पुलिस की एंटी एक्टॉर्सन सेल ने शुक्रवार को अरबाज को समन किया था. पुलिस अब अरबाज का बयान दर्ज कर सट्टेबाजी रैकेट से उनके लिंक के बारे में पड़ताल की है. पुलिस को इंटरनेशनल बुकी सोनू जालान के साथ अरबाज की तस्वीरें मिली थीं. पुलिस सोनू पर मकोका के तहत नया केस भी दर्ज करेगी. अरबाज की ओर से उनके भाई सलमान खान की लीगल टीम इस मामले में उनका पक्ष रखेगी. सुबह अरबाज सलमान के बॉडीगार्ड शेरा के साथ क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे थे.

कैसे आया अरबाज का नाम

पिछले महीने पुलिस ने डोबिंवली में सट्टेबाजी रैकिट का भंडाफोड़ करते हुए 4 सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया. शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सट्टेबाजी रैकिट चल रहा था. इतना ही नहीं, डॉन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी से भी सट्टेबाजी रैकिट के लिंक मिलते दिख रहे हैं.

पूछताछ में रैकेट के पीछे सोनू जालान का नाम सामने आया था. इसके बाद सोनू जालान को गिरफ्तार कर जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी बेटिंग में अलग-अलग नामों से पैसा लगाते हैं. तब इस मामले में अरबाज खान को समन किया गया था. पुलिस को शक है कि इस खेल में बॉलीवुड की कई और हस्तियां भी शामिल हो सकती हैं.

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CBI में निकली वैकेंसी, ऐसे होगा सलेक्शन

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन अर्थात CBI ने सब-इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के पद पर वैकेंसी निकाली है. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार के 4 जून से पहले आवेदन कर सकते हैं. वहीं आवेदन करने से पहले वैकेंसी से जुड़ी जरूरी जानकारिया पढ़ लें.

पदों का ब्यौरा

सब-इंस्पेक्टर

इंस्पेक्टर

पे- स्केल

9300 से 34800 रुपये.

योग्यता

उम्मीदवारों ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन की डिग्री ली हो.

आयु सीमा

इन पदों के लिए 20 से 30 साल तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.

चयन प्रक्रिया

आवेदकों का चयन डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन, फिजिकल टेस्ट और कंप्यूटर परीक्षा के आधार पर होगा.

आवेदन फीस

उम्मीदवारों को 100 रुपये फीस का भुगतान करना होगा.

कैसे करें अावेदन

उम्मीदवार CBI की आधिकारिक वेबसाइट cbi.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

अंतिम तारीख

4 जून 2018

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#Kathua: कठुआ गैंगरेप मामले में दिल्ली की फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा

कश्मीर से कन्याकुमारी तक दिल को झकझोर देने वाले कठुआ गैंग रेप मामले में एक अहम खबर सामने आई है, इस केस के तमाम सबूतों की जांच करने वाली दिल्ली की फॉरेंसिक लैब (FSL) ने सभी सबूतों को सच माना है। FSL की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि होती है कि मंदिर में मिले खून के निशान पीड़िता के ही है, जिससे ये बात सत्यापित होती है कि मंदिर के अंदर ही आठ साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया था।

आरोपी शुभम सांगरा के खिलाफ अहम सबूत

रिपोर्ट के हिसाब से मंदिर में मिले बाल का डीएनए इस केस के आठ आरोपियों में से एक शुभम सांगरा से मिलते हैं, पीड़िता के कपड़े पर मिले खून के निशान का डीएनए भी शुभभ के डीएनए से मिलता है। रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि पीड़िता के यौनांग में खून पाया गया था। आपको बता दें कि इस केस की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) टीम को इस बात की शिकायत थी कि उसे जो सबूत मिले हैं, वो आरोपियों को गुनाहगार साबित करने को काफी नहीं थी क्योंकि ऐसी बात सामने आई थी कि आरोपियों ने कथित तौर से कुछ स्थानीय पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर पीड़िता के कपड़े धुले थे ताकि सबूत को नष्ट किया जा सके। ये ही वजह थी कि एसआईआटी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं कर पा रही थी।

शुभम सांगरा और परवेश के भी ब्लड सेम्पल भेजे गए थे

मार्च में ही पीडि़ता के कपड़ों, खून, बाल, मल जैसे सबूतों को दिल्ली की फॉरेंसिक लैब में भेजा गया था और इसके साथ ही आरोपी पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, शुभम सांगरा और परवेश के भी ब्लड सेम्पल भेजे गए थे। इस केस की 28 अप्रैल को सुनवाई आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले के रासना गांव में बकरवाल समुदाय की 8 साल की बच्ची को 10 जनवरी में अगवा किया गया था। एक हफ्ते बाद घर से कुछ दूर उसका शव बरामद हुआ था। 10 अप्रैल को दायर पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या की गई थी।आरोप गांव के एक मंदिर के सेवादार पर लगा। कहा जा रहा है कि बकरवाल समुदाय को गांव से बेदखल करने के इरादे से यह साजिश रची गई थी। इस मामले में एक नाबालिग समेत 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। सेशन कोर्ट इस केस की 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

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रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक, होम पेज पर दिखाई दे रहा चीनी अक्षर

शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट को किसी ने हैक कर लिया है। वेबसाइट के होम पेज पर चीनी अक्षर दिखाई दे रहा है। वेबसाइट को खोलने करने पर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (अंग्रेजी में) और हिंदी में रक्षा मंत्रालय लिखा दिख रहा है। इस घटना के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, उचित कदम उठाए जा रहे हैं। वेबसाइट को जल्द ही चालू किया जाएगा। आने वाले समय में हर संभावित कदम उठाए जाएंगे ताकि इस तरह की चीजों को होने से रोका जाए।

अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट पर चीनी अक्षर नजर आये जो इस बात का संकेत है कि चीनी हैकर उसमें शामिल हो सकते हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ” मामले पर हमारी पैनी नजर है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र उसे बहाल करने का प्रयास कर रहा है।यह  केंद्र वेबसाइट का रखरखाव करता है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चीनी हैकर इस वेबसाइट को बिगाड़ने में शामिल हो सकते हैं।
 

Nirmala Sitharaman(Twitter)

@nsitharaman

 Action is initiated after the hacking of MoD website ( http://mod.nic.in  ). The website shall be restored shortly. Needless to say, every possible step required to prevent any such eventuality in the future will be taken. @DefenceMinIndia @PIB_India @PIBHindi

बता दें कि खबर लिखे जाने तक साइट नहीं खुल रही है। भारतीय रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट https://mod.gov.in है। शुक्रवार शाम करीब 4.30 बजे रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक होने की खबर सामने आई। चीनी कैरक्टर दिखने से तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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CBSE PAPER LEAK 2018 दिल्ली पुलिस ने बतायी इकोनॉमिक्स पेपर लीक करने वाले रोहित-ऋषभ व तौकीर की साठ-गांठ की कहानी

कड़कड़डूमा कोर्ट से पुलिस को पर्चा लीक करने वाले तीनों लोगों की दो दिन की पुलिस कस्टडी मिल गयी है.

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

ANI @ANI_news

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

सीबीएसइ पेपर लीक मामले में आज दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इस संंबंध में मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने कहा आज तड़के रोहित व ऋषभ नाम के दो स्कूल टीचर और कोचिंग के एक ट्यूटर तौकीर को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रश्न खुलने के समय पौने दस बजे से 30 से 40 मिनट पहले 12वीं इकोनॉमिक्स का प्रश्न पत्र खोल लिया गया और रोहित व ऋषभ नामक टीचर ने उसे कोचिंग ट्यूटर तौकीर को वाट्सएप पर भेजा, जिसने उसे बच्चों को भेज दिया. उन्होंने कहा कि एक बच्चे से इस संबंध में पूछताछ की गयी थी. डीसीपी ने यह नहीं बताया कि इस मामले का मास्टमाइंड तीनों में कौन है, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि ऋषभ के कहने पर रोहित ने प्रश्नपत्र तौकीर को भेजा और इन तीनों में अच्छी पहचान व दोस्ती है.

डीसीपी आलोक कुमार ने कहा कि पेपर लीक मामले की जांच की दो हिस्सों में हो रही है. इकोनॉमिक्स पेपर लीक की जांच डॉ रामगोपाल नायक व दसवीं मैथ्स पेपर लीक की जांच जॉय तिर्की की अगुवाई में हो रही है और पूरी जांच का सुपरविजन डॉ रामगोपाल नायक कर रहे हैं.

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 Two teachers and a tutor were arrested. Police custody remand of all three has been taken, they will be questioned: Delhi Police Joint CP Crime Branch on #CBSEPaperLeak

उन्होंने दसवीं पेपर लीक मामले की जांच के संबंध में अभी कोई तथ्य बताने से इनकार करते हुए कहा कि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि कोर्ट से दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है, पुलिस दो दिन इनसे पूछताछ करेगी और मामले के तह तक जाने का प्रयास करेगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि तौकीर 26-27 साल का एक युवक है, जो कोचिंग में पढ़ाता है.

ऐसे लीक किया इकोनॉमिक्स का पेपर 

नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसइ पेपर लीक मामले में दो टीचर व एक कोचिंग सेंटर के मालिक सहित कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. न्यूज एजेंसी एएनआइ के अनुसार, दोनों शिक्षकों ने 9.15 बजे सुबह हाथ से लिखे प्रश्न पत्र की तसवीर उतारी थी और फिर उसे कोचिंग सेंटर के ट्यूटर को भेज दिया था. फिर कोचिंग सेंटर के ट्यूटर ने उसे स्टूडेंट्स को भेज दिया. कोचिंग ट्यूटर एनसीआर के बवाना का है, जबकि दोनों टीचर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. 26 मार्च को 12वीं इकोनॉमिक्स पेपर लीक की पूरी घटना परीक्षा शुुरू होने के समय 9.45 बजे के डेढ़ घंटे पहले तक में घटी. यह जानकारी दिल्ली पुलिस ने दी है. इन पर आरोप है कि उन्होंने 26 मार्च को परीक्षा के  पहले इकोनाॅमिक्स के पेपर को लीक किया. हालांकि पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया है वे दोनों टीचर किस स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार शनिवार रात मीडिया को जानकादी देते हुए.


उधर, क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार रात इस मामले में सीबीएसइ के मुख्यालय भी पहुंची थी. सूत्रों का कहना है कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स एवं 10वीं के मैथ्स पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम को कुछ अहम तथ्यों की जानकारी हाथ लगी है. पुलिस ने अबतक इस मामले में 60 लोगों से पूछताछ की है. इसमें वे दस वाट्सएप ग्रुप के संचालक भी शामिल हैं, जिनके ग्रुप में प्रश्न वायरल किया गया था.

दिल्ली के प्रीत विहार स्थित सीबीएसइ मुख्यालय पहुंची पुलिस. 

इस पूरे मामले में पुलिस को उस विह्सलब्लोअर की भी जानकारी मिली है, जिन्होंने मेल के जरिये सीबीएसइ प्रमुख को गणित के प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी थी. पुलिस ने उस शख्स का पता लगाने के लिए गूगल की मदद मांगी थी, क्योंकि उस व्यक्ति ने जीमेल से मेल भेजा था.

ध्यान रहे कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को ली जाएगी.

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ICICI बैंक लोन मामलाः चंदा कोचर के पति से CBI कर सकती है पूछताछ

वीडियोकॉन लोन मामले में सीबीआई ने दीपक कोचर के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. वीडियोकॉन समूह को दिए गए एक लोन मामले में कोचर और उनके परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता की खबरें आई थीं, जिसके बाद सीबीआई ने शुक्रवार को दीपक कोचर के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू की.

सीबीआई के एक अधिकारी ने आजतक को बताया कि सभी अधिकारियों जिनका लोन पास कराने में योगदान था, उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं. इसके अलावा सीबीआई ने इस लोन से जुड़े सभी दस्तावेजों को भी ज़ब्त कर लिया है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है.

अब सीबीआई दीपक कोचर को पूछताछ के लिए बुला सकती है. दीपक के अलावा सीबीआई वीडियोकॉन ग्रुप के अहम लोगों से भी पूछताछ कर सकती है. यह पूछताछ सीबीआई की बैंक फ्रॉड एंड सिक्योरिटी विंग करेगी.

हालांकि, नियमों के मुताबिक, प्रारंभि‍क जांच के दौरान सीबीआई अधिकारिक नोटिस जारी नहीं कर सकती, लेकिन जरूरत पड़ने पर पूछताछ जरूर कर सकती है.

प्रारंभिक जांच के तहत इस बात का पता लगाया जाएगा कि दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों द्वारा बनाई गई फर्म को वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत ने रिश्वत के रूप में कितने रुपये दिए. साथ ही उन आरोपों की भी जांच होगी, जिसमें कहा जा रहा है कि वीडियोकॉन समूह को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दी गयी कर्ज सहायता कुछ ले-दे कर दी गयी और इस में कोचर और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की कथित संलिप्तता थी.

4000 करोड़ के लोन में हेरा-फेरी का आरोप

दरअसल, ICICI बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप के निवेशक अरविंद गुप्ता ने चंदा कोचर पर आरोप लगाया था कि कोचर ने वीडियोकोन को कुल 4000 करोड़ रुपए के दो ऋण मंजूर करने के बदले में गलत तरीके से निजी लाभ लिया.

रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज में दर्ज जानकारी के मुताबिक ICICI बैंक चीफ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर ने धूत के साथ मिलकर दिसंबर 2008 में न्यू पॉवर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) के नाम से साझा कंपनी बनाई. NRPL में धूत, उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों के 50 फीसदी शेयर थे.

बाकी शेयर चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और पैसेफिक कैपिटल के नाम थे. पैसेफिक कैपिटल का स्वामित्त्व दीपक कोचर के परिवार के पास ही था. एक साल बाद जनवरी 2009 में धूत ने NRPL के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और अपने करीब 25000 शेयर दीपक कोचर को ट्रांसफर कर दिए. मार्च 2010 में NRPL को सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से लोन मिला जो कि धूत की ही कंपनी थी.

मार्च 2010 के आखिर तक सुप्रीम एनर्जी ने NRPL का अधिकतर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. दीपक कोचर के पास 5 फीसदी शेयर ही रह गए. करीब 8 महीने बाद धूत ने सुप्रीम एनर्जी में अपनी सारी होल्डिंग अपने सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया के नाम कर दी. दो साल बाद पुंगलिया ने सुप्रीम एनर्जी में अपना सारा स्टेक दीपक कोचर की पिनेकल एनर्जी को 9 लाख रुपए में दे दिया.

2012 में दिया 3250 करोड़ का ऋण

अरविंद गुप्ता ने इंडिया टुडे से कहा, ‘हमें जानने की जरूरत है कि क्यों दीपक कोचर और धूत ने साझा उपक्रम बनाया और फिर धूत ने उसे छोड़ दिया. हमें जानने की जरूरत है कि मारिशियन कंपनी (डीएच रीन्यूएबल्स) के पीछे असल में कौन लोग हैं.’ गुप्ता के संदेह का कारण NRPL को उसी समय विदेशी फंड का बहुतायत में मिलना है.

ICICI बैंक ने करीब 4000 करोड़ रुपए ऋण के तौर पर वीडियोकोन ग्रुप को 2010 से 2012 के बीच दिए और डीएच रीन्यूएबल्स ने 325 करोड़ और 66 करोड़ रुपए NRPL में डाले. ICICI बैंक ने 3250 करोड़ 5 वीडियोकॉन कंपनियों को अप्रैल 2012 में दिए. इसके बाद केमेन आईलैंड्स की एक शैल कंपनी को 660 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया.

सेबी भी कस सकता है ICICI बैंक पर शिकंजा

आईसीआईसीआई बैंक के विवादों में घिरने के बीच बाजार नियामक सेबी ने देखना शुरू किया है कि कहीं इस मामले में सूचनाओं के प्रकाशन या कंपनी संचालन से जुड़ा कोई मामला तो नहीं बनता है.

इसी तरह वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज व इसके प्रवर्तक भी एक मामले में नियामक की निगाह में हैं. यह मामला आईसीआईसीआई बैंक व कुछ सार्वजनिक बैंकों के समूह द्वारा कंपनी को दिए गए कर्ज में कथित प्रतिदान से जुड़ा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि नियामक ने निजी क्षेत्र के इस बैंक द्वारा बीते कुछ साल में किए गए विभिन्न खुलासों में शुरुआती जांच शुरू की है.

वहीं शेयर बाजार भी 2012 तक के कुछ सौदों के संबंध में हालिया रपटों के बारे में अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांग सकते हैं. उल्लेखनीय है कि आईसीआईसीआई बैंक देश का चौथा सर्वाधिक मूल्यवान बैंक है, जिसका बाजार पूंजीकरण लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये है.

ICICI ने चंदा कोचर का किया बचाव

ICICI बैंक के बोर्ड ने अपनी एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा जताया है. आईसीआईसीआई बैंक के अध्यक्ष एमके शर्मा ने शुक्रवार को अपनी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर के बचाव में उतरते हुए कहा कि बोर्ड को सीईओ पर पूरा भरोसा है.

साथ ही, उन्होंने वीडियोकॉन समूह को दिए लोन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज कर दिया है. शर्मा ने कहा कि बैंक ने कर्ज मंजूरी के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रिया की समीक्षा की और उन्हें मजबूत पाया.

उन्होंने कहा कि बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि विभिन्न अफवाहों में लगाए गए आरोपों जैसी कोई गड़बड़ी/ भाई भतीजावाद/हितों का टकराव नहीं है. उन्होंने कहा कि बैंक और इसके शीर्ष प्रबंधन की छवि खराब करने के लिए अफवाहें फैलाई जा रही हैं.

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नया बैंकिंग घोटाला 1394 करोड़ का एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का, CBI ने दर्ज किया केस

बैंक से जुड़े धोखाधड़ी और अरबों रुपए के घोटाले खत्म होने का नाम नहीं ले रहे. एक के बाद एक बैंक से जुड़े घोटाले सामने आ रहे हैं. एक नए घोटाले में सीबीआई ने टोटेम इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ 1,395 करोड़ के घोटाले के लिए केस दर्ज किया है.

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) की ओर से गुरुग्राम स्थित टोटेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (हैदराबाद) के खिलाफ मिली शिकायत के बाद इस कंपनी और इसके प्रोमोटर्स तथा निदेशक टोटेमपुड़ी सालालिथ और टोटेमपुड़ी कविता पर केस दर्ज कर लिया है. कंपनी पर आरोप है कि उसने 8 बैंकों के साथ धोखाधड़ी करते हुए 1,395 करोड़ रुपए का घोटाला किया.

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा ने सीबीआई को भेजे अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने बैंक के साथ 303.84 करोड़ की धोखाधड़ी की.

केस के अनुसार, कंसोर्टियम के जरिए यूबीआई की अगुवाई में 8 बैंकों से कर्ज लिया गया. इस तरह सभी बैंकों की कंसोर्टियम राशि 1394.43 करोड़ हो गई. टोटेम इंफ्रा रोड प्रोजेक्ट, वॉटर वर्क्स और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कारोबार से संबंधित है. टोटेम इंफ्रा ने देश की जानीमानी कंपनियां जैसे एलएंडटी, आरआईटीईएस और इरकॉन इंटरनैशनल के लिए सबकॉन्ट्रैक्ट पर भी काम किया है.

एक सीबीआई अधिकारी ने कहा, ‘ऋण यूबीआई समेत 8 बैंकों से लिया गया. कंपनी पर सभी बैंकों का कुल 1,394.43 करोड़ रुपए बकाया है. ऋण और ब्याज भुगतान डिफॉल्ट होने के बाद इस खाते को 30 जून 2012 को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में डाल दिया गया था.’ यह कंपनी सड़क निर्माण, जल कार्य और इमारत निर्माण से जुड़ी हुई है.

कर्ज देने वाले बैंक का दावा है कि कंपनी ने उससे कर्ज लेने के बाद फंड डायवर्ट किया है. वहीं अपना घाटा दिखाने के लिए कंपनी ने अपने खर्च और सैलरी के मद को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया है. बैंक के मुताबिक कर्ज में डिफॉल्ट करने के बाद से कंपनी के प्रमोटर्स फरार हैं और बैंक के पास उनके नए ठिकाने की कोई जानकारी नहीं मौजूद है.

इससे पहले, बुधवार को भी सीबीआई ने चेन्नई की ज्वैलर कंपनी कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 14 बैंकों से कुल 824.15 करोड़ रुपए ऋण धोखाधड़ी में मामला दर्ज किया था. इस राशि को भी एनपीए में डाल दिया गया है.

कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से पूछताछ की जा रही है. कंपनी द्वारा कर्ज की अदायगी न करने पर इनको दिए लोन को एनपीए में डाल दिया गया था.

पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद देश में वित्तीय फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आ चुके हैं. राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के अलावा कई जगहों पर विभिन्न कंपनियों द्वारा बैंकों को चूना लगाने का मामला सामने आ चुका है और जांच एजेंसियों पड़ताल में जुटी हैं.

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सीबीआइ की एक छापेमारी पड़ी भारी, लपेटे में आए कार्ति चिदंबरम

सियासी लोगों की पोशाक अक्सर सफेद होती है ये दिखाने के लिए वो दिल और दिमाग दोनों से पाकसाफ हैे। उनके लिए जनता की सेवा करना ही महान लक्ष्य है। लेकिन उन पोशाकों पर आरोपों के छीटें पड़ते ही रहते हैं। वो उस कमीज को दागदार करते हैं, तो कमीज बेदाग भी बनी रहती है। आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब वो विदेश से स्वदेश वापस लौट रहे थे। कार्ति की गिरफ्तारी किसी एक सामान्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है बल्कि इसमें सियासत भी जुड़ी हुई है।

2014 के आम चुनाव से पहले और प्रचार के दौरान भाजपा नेता कहा करते थे कि कांग्रेस का मतलब अब भ्रष्टाचार है ऐसी कोई जगह नहीं है जहां भ्रष्टाचार की गंगा न बह रही हो। चुनावी सभाओं में पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कहा करते थे कि अगर उनकी सरकार बनी तो एक एक गुनहगार जेल के अंदर होंगे। सरकार के चार साल बीत जाने के बाद लोग पूछते हैं कि आखिर मौजूदा सरकार क्यों नहीं कुछ कर पा रही है। इस सवाल के जवाब में भाजपा की तरफ से ये तर्क दिया जाता रहा है कि राजनीतिक विद्वेष की भावना से वो काम करने में यकीन नहीं रखते हैं। जिस किसी आरोपी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध होंगे तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी की अलग अलग ढंग से व्याख्या हो सकती है लेकिन ये तो साफ है कि कांग्रेस बैकफुट पर आ चुकी है। आगे हम बताएंगे कि भ्रष्टाचार के कुछ मामलों के सामने आने के बाद कांग्रेस बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरती लेकिन क्या ये दिलचस्प नहीं है कि हमलावर कांग्रेस के सामने अब रक्षात्मक उपाय अपनाने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं है।

चेन्नई में हुई कार्ति की गिरफ्तारी

आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिग केस में ईडी ने कार्ति चिदंबरम को चेन्नई से गिरफ्तार किया। सीबीआइ का कहना है कि जांच प्रक्रिया में वो सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे पहले एस भास्कर रमन कार्ति का सीए था जिसे सीबीआइ ने कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया था। विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड एफआइपीबी ने आइएनएक्स मीडिया को वर्ष 2007 में विदेशी पूंजी जुटाने की अनुमति दी थी। इस मामले में कार्ति का नाम सामने आया। कार्ति चिदंबरम, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे हैं जो उस समय वित्त मंत्री थे। ईडी ने दावा किया था कि सीए भास्कर रमन ने गलत तरीके के अर्जित संपत्ति के प्रबंधन में कार्ति की मदद की थी।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्ति और कई दूसरे आरोपियों पर पिछले साल मई में केस दर्ज किया गया था। कार्ति पर आरोप है अपने पिता के वित्त मंत्री रहते वक्त उन्होंने आइएनएक्स मीडिया को एफआइपीबी की मंजूरी दिलाने के एवज में 3.5 करोड़ की घूस ली थी। दरअसल ये मामला आसानी से नहीं खुला होता अगर शीना बोरा हत्याकांड में सीबीआइ ने पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी के घर में छापेमारी न की होती। सीबीआइ की छापेमारी में कुछ अहम दस्तावेज बरामद हुए जिससे पता चला कि एफआइपीबी को धता बता कर कार्ति ने फायदा उठाया था।

घोटालों के घेरे में कार्ति
-कार्ति चिदंबरम को 45 करोड़ रुपए के फॉरेन एक्सनचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) उल्लंघन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी आरोपी बना चुका है।

-कार्ति पर वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से कथित तौर पर जुड़ने का मामला है।
-इस कंपनी से जुड़े विदेशी निवेशकों से कई अलग नामों से करीब 2100 करोड़ रुपए और इसके साथ ही 162 करोड़ रुपए अलग से भी लिए गए।
– आरोपों के मुताबिक इस लेन-देन में कार्ति चिदंबरम की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी। इस कंपनी को इसमें करीब 45 करोड़ रुपए मिले थे।
-कार्ति पर एयरसेल-मैक्सिस डील में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
-कार्ति की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड जांच के घेरे में
– पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए कई गैर कानूनी क्लीरियेंस दिलाने का आरोप।

मामले में पहली बार कार्ति का नाम सुब्रमण्यम स्वामी ने उछाला। साल 2015 में तत्कालीन जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यन स्वामी ने कार्ति चिदंबरम की विभिन्न कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया। स्वामी ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहते पी. चिदंबरम ने बेटे कार्ति को एयरसेल-मैक्सिस मर्जर से लाभ उठाने में मदद की। इसके लिए उन्होंने दस्तावेजों को जानबूझकर रोका और अधिग्रहण प्रक्रिया को नियंत्रित किया ताकि उनके बेटे को अपनी कंपनियों के शेयर की कीमत बढ़ाने की दिशा में कारोबारी कदम उठाने का वक्त मिल जाए।

कौन हैं कार्ति चिदंबरम ? 

तमिलनाडु के शिवगंगा में 16 नवंबर 1971 को जन्मे कार्ति चिदंबरम कांग्रेस के नेता और व्यापारी हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास और कैंब्रिज से उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ की पढ़ाई की है। वह तामिलनाडु टेनिस एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट रहे हैं। भरतनाट्यम नृत्यांगना श्रीनिधि रंगराजन से उनकी शादी हुई है।

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PNB और Rotomac के बाद अब CBI ने तीन नए घोटालों से उठाया पर्दा, मामला दर्ज

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले और रोटोमैक घोटाले से अभी देश ठंग से उबरा भी नहीं था कि अब सीबाआई ने कई और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को उजागर किया है। इन तीन मामलों में सीबीआई ने एक ज्वैलर, एक बिजनेस मैन और एक पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है क्योंकि इनके खिलाफ तीन अलग अलग बैंकों ने शिकायत दर्ज कराई है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है।

ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में हुआ 3.9 बिलियन का फ्रॉड

गुरुवार को सीबीआई ने कथित धोखाधड़ी के इस मामले में द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। 389.85 करोड़ रुपये का यह कथित कर्ज घोटाला ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) में हुआ है। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने आरोप लगाया है कि दिल्ली जौहरी द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल और उसके मालिक सभ्या सेठ ने उन्हें धोखा दिया। उनको दिया गया लोन 2014 में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गया, लेकिन बैंक ने पिछले साल 16 अगस्त को ही एजेंसी से संपर्क किया था, जब कंपनी ने अपना कारोबार समेट लिया और सेठ देश से भाग गए। सभ्या की कंपनी ने ओबीसी से 2007 से 2012 के दौरान कुल 389 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। बैंक की ओर से कराई गई जांच में पाया गया कि कंपनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल सोने और दूसरे कीमती रत्नों की खरीद का भुगतान करने के लिए किया। कंपनी ने फर्जी लेनदेन का उपयोग कर सोने और धन को देश से बाहर भेजा।

पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से नीरव मोदी और रोटोमैक ग्लोबाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पीएनबी के बाड़मेर ऑफिस ने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया, धोखाधड़ी की शिकायतों के साथ-साथ, इन्होंने एजेंसी के समक्ष ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र बैंक घोटाला: सीबीआई ने बुधवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायत के आधार पर व्यापारी अमित सिंगला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। बैंक ने आरोप लगाया कि जाली दस्तावेजों के आधार पर लोन लिया गया और इसका गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने दिल्ली के कारोबारी अमित सिंगला के खिलाफ 9.5 करोड़ रुपए के गबन का मामला दर्ज कराया है। शिकायत के मुताबिक सिंगला की कंपनी आशीर्वाद चेन ने बैंक से लोन लिया, लेकिन अब चुकाने में वो टालमटोल कर रहे हैं। सिंगला ने ये लोन कैश क्रेडिट फैसिलिटी के जरिए साल 2010 और 2012 में लिया था। आरोपी ने दिल्ली और हरियाणा में एक ही परिवार की तीन संपत्तियों को पेश किया था। लोन लेने के दौरान इन तीनों संपत्तियों का कुल मूल्य टेक महिंद्रा इंटरनेशनल की ओर से 180 मिलियन लगाया गया था।