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स्वतंत्रता दिवस स्पेशल: आजाद भारत में इन 5 बाइक्स ने मचाया तहलका, इनमें से कौन सी बाइक है आपकी फेवरेट!

शक्तिशाली रॉयल एनफील्ड बुलेट से लेकर सबसे पुरानी मोटसाइकिलों में से एक को स्वतंत्र भारत में टू-स्ट्रॉक के साथ बेचा जाना था जो यामाहा RD 350 थी। भारत में आज भी इन मोटरसाइकिल्स को याद किया जाता है। 72 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज हम आपको उन बाइक्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो 1947 के बाद भारत में काफी पॉपुलर हुई हैं।

रॉयल एनफील्ड बुलेट

रॉयल एनफील्ड पहली मोटरसाइकिल्स में से एक ऐसी थी जो भारत आजाद होने के सबसे ज्यादा बेची गई। इस बाइक को सबसे पहले बॉर्डर पर गश्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था और यह अब भारतीय सेना की सबसे पसंदीदा बाइक है। 1955 में यूके की रॉयल एनफील्ड और मद्रास मोटर्स ने भारत में फैक्ट्री खोली जो कि अभ चेन्नई में स्थित है और इस फैक्ट्री में बुलेट 350 को असेम्बल किया गया जो कि रॉयल एनफील्ड की इग्लैंड फैक्टरी रेड्डिच से लाई गई थी। 1962 में बुलेट 350 को भारत में भारत में स्क्रैच द्वारा मैन्युफैक्चर किया गया और कंपनी ने यहा सालाना इसकी 20,000 यूनिट्स बनानी शुरू कर दी। आज 40 साल बाद भी रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 में समान टेक्नोलॉजी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। अब रॉयल एनफील्ड पूरी तरह भारत की आयशर मोटर्स के स्वामित्व वाली कंपनी बन चुकी है।

येज्दी रोडकिंग

येज्दी मूल रूप से चेक-मूल जावा मोटरसाइकिल का भारतीय वर्जन है और इसने भारतीय बाजार में स्वतंत्रता दिवस के बाद कई पॉपुलर बाइक्स बनाई हैं। भारत में इस कंपनी ने 1973 से बाइक्स की बिक्री शुरू की। भारतीय बाजार में येज्दी ने कई मॉडल्स उतारे लेकिन उनमें सबसे ज्यादा पॉपुलर मॉडल येज्दी रोडकिंग था, जिसे 1978 से लेकर 1996 तक मैसूर के आदर्श जावा फैक्ट्री में बनाया गया। इस बाइक में 250cc सिंगल-सिलेंडर 2-स्ट्रॉक इंजन है जो 16bhp की पावर और 24Nm का टॉर्क जनरेट करता है।

हीरो होंडा CD100

हीरो होंडा की प्रतिष्ठित मोटरसाइकिल हीरो होंडा CD100 आज भी भारतीय सड़कों पर दिखाई दे जाती है। हीरो ने इस मोटरसाइकिल को जापान की होंडा मोटर कंपनी के साथ मिलकर 1983 में बनाया था और यह दोनों कंपनी की भारत में पहली मोटरसाइकिल थी जिसे हीरो होंडा CD100 के नाम से 1984 में लॉन्च किया गया था। 80 और 90 के दशक में यह बाइक भारतीय सड़कों पर राज करती थी। यह भारत की पहली 4-स्ट्रॉक 100cc मोटरसाइकिल थी।

यामाहा RX 100

यामाहा की यह वो बाइक थी जो रेसिंग में लोगों का दिल जीत लेती थी। इस बाइक में 98cc टू-स्ट्रॉक इंजन लगा था, जो 7,500 rpm पर 11bhp की पावर और 6,500 rpm पर 10.39 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। बाइक का इंजन 4-स्पीड गियरबॉक्स से लैस था। यामाहा का दावा था कि 100cc बाइक में उनकी इस बाइक की टॉप स्पीड 100kmph थी। 1985 में इस बाइक की 5,000 यूनिट्स को जापान से नॉक्ड डाउन किट्स के तौर पर लाया गया। इसके बाद इस बाइक का प्रोडक्शन 1996 तक चला।

यामाहा RD 350

RX100 के अलावा 80 के दशक में यामाहा की दूसरी बाइक RD 350 को रॉयल एनफील्ड की बुलेट के बाद सबसे ज्यादा प्यार मिला। हालांकि भारत में इस बाइक को 1983 से लेकर 1989 तक ही बेचा गया। भारत में बेची जाने वाली यामाहा RD350 पहली ट्विन-सिलेंडर परफॉर्मेंस मोटरसाइकिल थी। इस बाइक में 347cc पैरेलेल-ट्विन टू-स्ट्रॉक इंजन दिया गया था। यह इंजन 30.5bhp की पावर जनरेट करने में सक्षम था। इस बाइक की टॉप स्पीड 140kmph थी।

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मिलिए विजय से जिन्होने तय किया दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल से आइपीएस तक का सफर

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले विजय मूलत: एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गरीब और अभावग्रस्त छात्रों के लिए एक ट्रस्ट भी बनाया है। ट्रस्ट के माध्यम से वह छात्रों को न सिर्फ प्रोत्साहित करते हैं बल्कि आर्थिक सहायता भी देते हैं।

दसवीं में वह महज 55 फीसद अंक से पास हुए। बारहवीं में उनके 67 फीसद अंक आए। वह किसी नौकरी की तलाश में थे। इसमें सफलता न मिलने पर वह टाइल्स का कारोबार कर रहे दोस्त के साथ व्यवसाय करने की सोच रहे थे। उनके पास व्यवसाय के लिए पैसा नहीं था।

इस कारण पिता लक्ष्मण सिंह ने नौकरी की तलाश करने को कहा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। जून 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हो गया। दिल्ली आकर उन्हें पता चला कि एक आइपीएस अफसर के पास समाज सेवा के तमाम अवसर होते हैं। उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि अब आइपीएस ही बनना है। हालांकि, इसकी तैयारी में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम उनके पास नहीं था। इस कारण उन्होंने पहले दारोगा की तैयारी की। कड़ी मेहनत से दिसंबर 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में दारोगा के पद पर हो गया।

इसपद पर रहते हुए उन्हें तैयारी का समय नहीं मिल रहा था। फिर भी उन्होंने एसएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। उनका चयन सेंट्रल एक्साइज में हो गया, लेकिन तैनाती केरल के त्रिवेंद्रम में हो गई। सिविल सेवा की तैयारी दिल्ली में चल रही थी। त्रिवेंद्रम चले जाने से उनकी तैयारी प्रभावित होने लगी। उन्होंने फिर एसएससी की परीक्षा दी। इस बार उनका चयन इनकम टैक्स विभाग में हो गया और उनकी दिल्ली में तैनाती हो गई। इनकम टैक्स की नौकरी करने के साथ ही वह सिविल सेवा की तैयारी करते रहे। 2016 उन्होंने तीसरी बार सिविल सेवा की परीक्षा दी।

संस्कृत जैसे कठिन विषय से मुख्य परीक्षा देने के बाद भी उनका साक्षात्कार के लिए चयन हो गया। वह साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन आठ अंक कम होने के कारण उनका चयन न हो सका। इसके बाद भी विजय हार नहीं माने। वह लगातार 10 घंटे की पढ़ाई नौकरी के साथ करते रहे। जिसका नतीजा है कि पांचवें प्रयास में 2018 में उनका चयन आइपीएस के लिए हुआ। उनकी इस सफलता ने न सिर्फ परिवार का बल्कि पूरे गुर्जर समाज का नाम रोशन कर दिया। रविवार को नोएडा के इंदिरा गांधी कला केंद्र में गुर्जर समाज के सफल युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में विजय गुर्जर को सम्मानित कर समाज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।

अभाव व कम संसाधन कभी विजय रथ को रोक नहीं सकते। यह जरूर है कि अभाव के कारण सफलता पाने में समय लग जाता है। मेरी मां चंदा देवी और पत्नी सुनीता लगातार मेरा मनोबल बढ़ाती रहीं। अब मैं पत्नी सुनीता को सिविल सेवा की तैयारी करा रहा हूं। मैं सिपाही भी रहा हूं। इस कारण मुझे उनका दर्द पता है।

विजय गुर्जर, आइपीएस

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बिना नौकरी के कमाना चाहते हैं अच्छी रकम, आजमाएं ये 4 आसान ऑनलाइन तरीके

जानें सोशल मीडिया पर आप क्या कुछ कर कमा सकते हैं पैसे:

ब्लॉंगिंग: लिखने का हुनर जानने वाले और भाषायी व्याकरण पर अच्छी पकड़ रखने वालों के लिए ब्लॉगिंग कमाल की चीज है। यानी अगर आपको लिखना पसंद है तो आप इसके जरिए कमाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको गूगल की ब्लॉ गिंग साइट ‘ब्लॉ गर’ पर अकाउंट बनाना होगा और इसके बाद आप वहां लिखना शुरू कर दीजिए। बेहतर होगा कि आप अपने ब्लॉग पर जो कुछ भी लिखते हैं उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक या ट्विटर पर शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आपका लिखा पहुंचे सके। इससे एक फायदा यह होगा कि आप अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा पाएंगे, आपकी प्रसिद्धी बढ़ेगी साथ ही आपके ब्लॉग को कई लोग जान पाएंगे। जब आपके पेज व्यूदज का काउंट काफी ज्या दा बढ़ जाएगा, तब आप गूगल एडसेंस के लिए अप्लाजई कर दें और अप्रूवल मिलते ही आपकी कमाई शुरू हो जाएगी।

वीडियो ब्लॉागिंग: फोटोग्राफी का शगल रखने वाले और इसे जज्बे के साथ अंजाम देने वालों के लिए इससे कमाल की कोई चीज नहीं हो सकती है। वीडियो ब्लॉकगिंग से भी आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। आप किसी एक टॉपिक को चुन लें और उस पर वीडियो बनाना शुरू कर दें। मान लीजिए आपको बाइक पसंद है तो आप उसके किसी खास टॉपिक पर रिव्यू देकर उसे हाईलाइट कर सकते हैं।

इसके लिए आपको फेसबुक और यू ट्यूब पर लगातार सक्रिय रहना होगा। आप जो भी वीडियो बनाएं उसे फेसबुक और यू ट्यूब पर शेयर करें। इससे आपके वीडियो को देखने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी और लोग आपके यू ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करेंगे। जब आपके सब्सक्राइबर की संख्या बढ़ जाएगी फिर आपके पास पैसे आने लगेंगे। इतना ही नहीं इसके अलावा जो कंपनियां अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करना चाहती हैं वह आपके वीडियो का सहारा ले सकती हैं। इससे भी आपकी कमाई बढ़ जाएगी।

फ्रीलांसिंग: अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं लेकिन आपको मिलने वाली सैलरी आपके खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है तो यह भी पैसे कमाने का अच्छा जरिया है। यदि आपके भीतर हुनर है तो आप फ्रीलांसिंग का काम करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं। बहुत सारी ऐसी वेबसाइट हैं जो फ्रीलांस का काम करने का मौका देती हैं। इनके टास्क अलग अलग कैटिगरी के हिसाब से लिस्ट होते हैं। आप जो काम बेहतर कर सकते हैं उनके लिए अप्लाई कर दें। फ्रीलांसिंग से प्रति असाइनमेंट 5 डॉलर से 100 डॉलर तक की कमाई की जा सकती है।

ऑनलाइन सर्वे: ऑनलाइन वर्ल्ड में यह कमाई के लिए एक नए तरीके का आसान काम है। इसमें बस आपको कंपनियों की तरफ से ऑनलाइन सर्वे आयोजित कराना होता है। दैनिक आधार पर जिन सर्वे को आप पढ़ते हैं वे बाजार अनुसंधान फर्मों और मेगा-कॉरपोरेशन द्वारा तैयार नहीं किए जाते हैं। दरअसल सर्वे वाले ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते हैं जो अच्छे पैसे के बदले उत्पादों और सेवाओं पर सर्वे करने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं।

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यात्रा तुंगनाथ-चंद्रशिला: रोमांच से भरपूर हैं तृतीय केदार के दर्शन

तुंगनाथ बहुत ही जाना-माना मंदिर है। तुंगनाथ, पंच केदार ( केदारनाथ, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रूद्रनाथ और कल्पेश्वर) में से एक है और यह तीसरे स्थान पर आता है। ज्यादातर लोग सिर्फ केदारनाथ के बारे में ही जानते हैं लेकिन ये पांचों केदार भी उतना ही महत्व रखते हैं, जितना केदारनाथ। तुंगनाथ मंदिर से चंद्रशिला एक किलोमीटर दूर है, लेकिन चढ़ाई बहुत खड़ी है। कई बार तो लोग सिर्फ तुंगनाथ से ही वापस लौट जाते हैं। बर्फबारी की वजह से रास्ता और भी फिसलन वाला हो जाता है। चंद्रशिला पीक पर मां गंगा का मंदिर बना हुआ है और यहां से चारों तरफ बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां दिखाई देती हैं। यहां से नंदादेवी चोटी को साफ-साफ देखा जा सकता है।

कब और कैसे पहुंचे

मार्च से नवंबर तक यहां आने के लिए सही समय है। हालांकि आ तो कभी भी सकते है, लेकिन सर्दियों में बर्फ ज्यादा होने की वजह से रास्ता बंद हो जाता है, जिससे ट्रैकिंग बढ़ जाती है।

यहां पहुंचने के दो रास्ते हैं

1. ऋषिकेश से गोपेश्वर 212 किमी और गोपेश्वर से चोपता 40 किमी।

2. ऋषिकेश से ऊखीमठ 183 किमी और ऊखीमठ से चोपता 25 किमी। ऋषिकेश से गोपेश्वर के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है। इससे आगे बस व शेयरिंग जीप व प्राइवेट टैक्सी करके भी जाया जा सकता है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है जो देश के सभी हिस्सों से जुड़ा है। नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून में है।

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इटली के डॉक्टर ने किया सिर्फ 10 रुपये में हर स्टेज का कैंसर खत्म करने का दावा

इटली के एक डॉक्टर ने चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि कैंसर का इलाज आपके घर में ही मौजूद है। डॉक्टर टुलियो का कहना है कि कैंसर एक तरह का फंगल है और इसे बेकिंग सोडा की मदद से आसानी से खत्म किया जा सकता है। हमारे घर में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बेकिंग सोडा कैंसर को खत्म करने के लिए रामबाण है। महज 2 से 10 रुपए की कीमत पर मिलने वाले बेकिंग सोडा की मदद से इटली के डॉ टुलियो सिमोनसिनी सैकड़ों मरीजों का इलाज कर चुके हैं। उनका दावा है कि इस तरीके के उपायोग से वो अब तक सभी स्टेज के कैंसर मरीजों का इलाज कर चुके हैं और सभी लोगों पर यह दवा 100 फीसद प्रभावी है।

डॉ. टुलियो कहते हैं कि यह थेरेपी बिल्कुल हानिकारक नहीं है। अधिक से अधिक कैंसर के मामलों की दर्दनाक वास्तविकता किसी न किसी तरह से ऑन्कोलॉजी की विफलताओं से जुड़ी हुई है। हमें यह साबित करना है कि आधुनिक ऑन्कोलॉजी कैंसर रोगियों के सभी सवालों के जवाब देने में असमर्थ है। यह हमारे समय की सबसे कठिन और घातक बीमारी है, जिसके असली इलाज खोजना हमारी नैतिक जिम्मेदारी और नैतिक प्रतिबद्धता है।

उनके मुताबिक, बेकिंग सोडा की मदद से हम जो इलाज कर रहे हैं उससे 10 दिन में किसी भी स्टेज के कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि फंगी हमेशा अपने साथ एक ट्यूमर लेकर आते हैं। यह विवो और इन विट्रो, दोनों तरह के अध्ययनों में साबित हुआ है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि वे बीमारी के बाद विकसित होते हैं। मगर, डॉ. टुलियो का मानना है कि वे पहले से ही मौजूद होते हैं।

उनके अनुसार, फंगस कैंसर को पैदा करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं और इसके बाद पूरे शरीर पर हमला करते हैं। हर तरह का कैंसर कैंडिडा फंगस की वजह से ही होता है। इसकी कई अध्ययनों से पुष्टि भी हो चुकी है। समय के साथ-साथ हमारी कोशिकाएं कमजोर और थकी हुई हो जाती हैं और अज्ञात कोशिकाओं को उत्पादन शुरू कर देती हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर एक अल्सर है, जिसमें विकृत कोशिकाएं जमा होती हैं और कॉलोनीज बना लेती हैं।

डॉ. टुलियो ने कहा कि सामान्य एंटी फंगल दवाएं कैंसर के खिलाफ अप्रभावी होती हैं क्योंकि वे केवल कोशिकाओं की सतह पर ही काम करती हैं। मुख्य संक्रमण एक बैक्टीरिया से अधिक शक्तिशाली है। यही कारण है कि फंगल संक्रमण इतने लंबे समय तक शरीर में बना रहता है। डॉ. टूलिओ का दावा है कि उन्होंने उन चीजों की पहचान की है, जो फंगस की कॉलोनीज पर हमला कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्किन कैंसर के लिए बेकिंग सोडा और आयोडीन टिंचर सबसे अच्छा पदार्थ है। कई अध्ययनों में यह बात साबित हुई है कि कैंसर के खिलाफ बेकिंग सोडा ने इंट्रासेल्यूलर एक्शन किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 20 से अधिक वर्षों से अपने मरीजों पर इलाज का उपयोग किया है। इन रोगियों में से कई ऐसे रोगी भी थे, जिन्हें डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी बीमारी लाइलाज है, लेकिन वे पूरी तरह से ठीक हो गए। ट्यूमर को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका बेकिंग सोडा के संपर्क में आना है।

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Bollywood: ये हैं 2018 के Top 10 Opening Weekends, जानिए कहां है ‘धड़क’

‘धड़क’ से बॉलीवुड विश्लेषकों को काफ़ी उम्मीदें थीं और ओपनिंग वीकेंड में फ़िल्म उस पर खरी भी उतरी है। फ़िल्म ने ओपनिंग वीकेंड में ₹33.67 करोड़ का शानदार कलेक्शन किया है। ‘धड़क’ इस कलेक्शन के साथ साल 2018 के ”Top 10 Opening Weekend Collections” की लिस्ट में एंटर हो गयी है। इसके साथ जॉन अब्राहम की फ़िल्म ‘परमाणु द स्टोरी ऑफ़ पोखरण’ लिस्ट से बाहर हो गयी है, जिसने ₹20.78 करोड़ का कलेक्शन ओपनिंग वीकेंड में किया था। ‘धड़क’ की रिलीज़ के बाद इस साल के टॉप 10 ओपनिंग वीकेंड कलेक्शंस की लिस्ट इस प्रकार है-

10. दसवें स्थान पर इस साल की सरप्राइज़ हिट ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ है। इस फ़िल्म को लव रंजन ने डायरेक्ट किया है, जो इससे पहले प्यार का पंचनामा सीरीज़ बनाते रहे हैं। लव की इसी विश्वसनीयता ने सोनू के टीटू की स्वीटी को शानदार ओपनिंग वीकेंड दिया। फ़िल्म ने ₹26.57 करोड़ पहले तीन दिन में जमा किये। ₹100 करोड़ से ज़्यादा जमा करके फ़िल्म सुपरहिट घोषित की गयी।

9. नौवें स्थान पर आलिया भट्ट की ‘राज़ी’ है, जिसने ओपनिंग वीकेंड में ₹32.94 करोड़ जमा किये। मेघना गुलज़ार निर्देशित ‘राज़ी’ इस साल की शानदार फ़िल्मों में शामिल है। हरिंदर सिक्का के नॉवल कॉलिंग सहमत पर बनी फ़िल्म में आलिया ने कश्मीरी लड़की का रोल निभाया, जो जासूसी के लिए पाकिस्तान जाती है।

8. आठवें स्थान पर आ गयी है धड़क, जिसने ₹33.67 करोड़ रिलीज़ के पहले तीन दिनों में जमा किये हैं। शशांक खेतान निर्देशित फ़िल्म को करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है। जाह्नवी-ईशान की धड़क ने आलिया भट्ट की राज़ी को ओपनिंग वीकेंड में तो नीचे धकेला ही है, साथ ही ओपनिंग डे कलेक्शंस की लिस्ट में भी फ़िल्म ने आलिया की पहली फ़िल्म स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर को पीछे छोड़ा है। 2012 में आयी स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर ने ₹7.48 करोड़ का कलेक्शन पहले दिन किया था, जबक धड़क ने 8.71 करोड़ ओपनिंग डे पर बटोरे हैं। स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर के करण जौहर निर्माता-निर्देशक थे, वहीं धड़क के वो निर्माता हैं।

7. सातवें स्थान पर आ गयी है ‘वीरे दी वेडिंग’, जिसने ओपनिंग वीकेंड में ₹36.52 करोड़ जमा किये। एक जून को रिलीज़ हुई फ़िल्म को शशांक घोष ने डायरेक्ट किया है। चार दोस्तों की इस कहानी में करीना कपूर, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तलसानिया और सुमित व्यास ने मुख्य भूमिकाएं निभायी हैं।

6. ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन की लिस्ट में छठे नंबर पर ‘पैडमैन’ है, जिसने ₹40.05 करोड़का कलेक्शन किया था। इस बायोपिक फ़िल्म में अक्षय कुमार ने अरुणाचलम मुरुगनाथम का किरदार निभाया, जबकि राधिका आप्टे उनकी पत्नी के किरदार में थीं। सोनम कपूर ने भी फ़िल्म में एक अहम किरदार प्ले किया था। अक्षय और निर्देशक आर बाल्की का ये पहला एसोसिशन था। ‘पैडमैन’ हिट रही।

5. पांचवें स्थान पर है राजकुमार गुप्ता निर्देशित‘रेड’, जिसने ओपनिंग वीकेंड में ₹41.01 करोड़ जमा किये। इस फ़िल्म में अजय देवगन ने इनकम टैक्स अधिकारी का रोल निभाया। इलियाना डिक्रूज़ ने उनकी पत्नी का किरदार प्ले किया। 100 करोड़ से अधिक कमाकर ये फ़िल्म भी हिट रही।

4. ओपनिंग वीकेंड की लिस्ट में चौथे स्थान पर टाइगर श्रॉफ़ की ‘बाग़ी2’ है, जिसे अहमद ख़ान ने डायरेक्ट किया। इस एक्शन-रोमांटिक फ़िल्म में दिशा पाटनी पहली बार टाइगर के साथ आयीं। एक्शन को लेकर टाइगर की इमेज के चलते फ़िल्म ने ₹73.10 करोड़ का शानदार ओपनिंग वीकेंड किया।

3. तीसरे स्थान पर आ गयी है रेस 3, जिसने ओपनिंग वीकेंड में ₹106.47 करोड़ जमा किया है। रेमो डिसूज़ा निर्देशित फ़िल्म में सलमान के अलावा बॉबी देओल, जैकलीन फ़र्नांडिस, अनिल कपूर, साक़िब सलीम और डेज़ी शाह ने मुख्य किरदार निभाये हैं।

2. लिस्ट में ‘पद्मावत’ दूसरे स्थान पर आ गयी है। संजय लीला भंसाली की इस मैग्नम ओपस ने ₹114 करोड़ का कलेक्शन किया, जिसमें ₹19 करोड़ पेड प्रीव्यूज़ का भी शामिल है। पद्मावत काफ़ी समय तक विवादों में भी रही थी, जिसकी वजह से इसे 2017 से हटाकर 2018 में रिलीज़ किया गया। फ़िल्म में दीपिका पादुकोण ने चित्तौड़ की रानी पद्मावती, शाहिद कपूर ने राजा महारावल रतन सिंह और रणवीर सिंह ने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का किरदार निभाया था। पद्मावत 2018 की पहली ₹300 करोड़ की फ़िल्म भी है। हालांकि बजट अधिक होने की वजह से फ़िल्म बहुत फ़ायदे में नहीं माना गया है।

1. ₹120.06 करोड़ के साथ Top 10 Opening Weekend Collections की लिस्ट में टॉप पर आ गयी है संजू। राजकुमार हिरानी निर्देशित संजय दत्त की इस बायोपिक में रणबीर कपूर, परेश रावल, सोनम कपूर, विक्की कौशल और मनीषा कोईराला ने मुख्य किरदार निभाये।

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स्काई डाइविंग के लिए इंडिया की ये 5 जगहें हैं बेस्ट

स्काई डाइविंग, सिंपल पैराशूटिंग का मॉर्डन रूप है जिसमें एयरक्रॉफ्ट द्वारा एक तय ऊंचाई से खुली हवा में जंप करना होता है और उसके कुछ समय बाद अपना पैराशूट खोलकर लैंड करना होता है।

इस एडवेंचर में एन्जॉयमेंट के साथ सुरक्षा के लिए आपको कुछ रूल्स भी फॉलो करने पड़ते हैं। जिसके लिए ट्रैनर्स मौजूद होते हैं। जहां कई जगहों पर 1-2 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है वहीं कुछ जगहों पर महज कुछ घंटों की। जिसके बाद आप तैयार होते हैं खुली हवा में आजाद चीड़िया की तरह उड़ने के लिए। तो आज हम इंडिया की ऐसी ही जगहों के बारे में जानेंगे, जहां जाकर आप अपने स्काई डाइविंग के शौक को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

इंडिया की ये 5 जगहें हैं स्काई डाइविंग के बेस्ट

मैसूर, कर्नाटक- बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स की लिस्ट में मैसूर सबसे ज्यादा पॉप्युलर है। बैंगलुरू से कुछ ही घंटे की दूरी पर बसे मैसूर में बहुत सारे स्काई डाइविंग कैंप्स मिलेंगे। यहां आकर स्काई डाइविंग करना बिल्कुल अलग ही तरह का एक्सपीरियंस होता है। टैंडेम से लेकर स्टेटिक और एक्सीलेरेटेड हर तरह के जंप्स के लिए प्रोफेशनल ट्रेनर्स द्वारा आपको 2-3 दिन की ट्रैनिंग दी जाती है। इसके बाद ही आप स्काई डाइविंग का मजा ले सकते हैं। हवा में फ्री होकर उड़ते हुए आसपास के खूबसूरत नजारों को देखने का एहसास अलग ही होता है

धाना, मध्यप्रदेश- धाना में इंडिया का पहला स्काई डाइविंग कैंप शुरू हुआ था। यहां आपको स्टेटिक और टैंडेम जंप्स के ऑप्शन्स मिलते हैं। 4000 फीट से जंप करते हुए यहां की खूबसूरती देखना वाकई बहुत अद्भुत होता हैशायद इसलिए ही धाना को इंडिया के बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स में शामिल किया गया है

एंबी वैली, महाराष्ट्र- अगर आपको एंडवेंचर करना पसंद है तो महाराष्ट्र के एंबी वैली में स्काई डाइविंग जरूर ट्राय करें। 45 मिनट की ये डाइविंग आपको लाइफटाइम याद रहेगी। फिलहाल यहां 10,000 फीट से टैंडेम जंप की सुविधा अवेलेबल है जिसमें बेशक मज़ा तो आता है लेकिन उतना ही डर भी लगता है। तो अगर आप थ्रील के साथ इस एडवेंचर को वाकई एन्जॉय करना चाहते हैं तो फिर वीकेंड में महाराष्ट्र आने का प्लान करें

दीसा, गुजरात- एक्सपीरियंस्ड हो या फिर नौखिसिया, गुजरात का दीसा हर किसी को लाइफटाइम एक्सपीरियंस देने के लिए बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन है।हां गुजरात स्पोर्ट्स अथॉरिटी और इंडियन पैराशूटिंग फेडरेशन द्वारा भी स्काई डाइविंग के कैंप्स लगाए जाते हैं

पांडिचेरी- इंडिया के खूबसूरत शहरों में शामिल पांडिचेरी सिर्फ स्कूवा ही नहीं स्काई डाइविंग के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है. ट्रैवलिंग के साथ एंडवेंचर पसंद वालों की तो ये सबसे पसंदीदा जगह है। पांडिचेरी में आपको स्टेटिक, टैंडेम और एक्सीलिरेटेड हर तरह के जंप्स के ऑप्शन मिलेंगे। फ्री बर्ड की तरह हवा में उड़ते हुए नैचुरल ब्यूटी को एक्सप्लोर करना है तो पांडिचेरी का ट्रिप रहेगा बेस्ट

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दुनिया की सबसे सुरक्षित जीप, कीमत 2.02 करोड़ रुपये!

Rezvani टैंक मिलिट्रि वाहन से प्रेरित नाम है, इस कार में डेड-बोल्ट मैगनेट के लगे हैं और साथ ही दरवाजों पर इलेक्ट्रिक हैंडल लगे है। इससे यात्री को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

बुलेट पूफ्र इस गाड़ी में बंदूक से हमला करने पर भी कुछ नहीं हो सकता। इसके रेडियेटर, बैटरी और फ्यूल टैंक को धमाके से बचाने के लिए kevlar में लपेटा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोफोन के जरिए ड्राइवर बाहर के खतरे को भांप लेता है।

इसके लिए उसे खिड़की या दरवाजे को भी खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। इस गाड़ी में ब्लाइडिंग लाइट भी है जो रात को दिन बना देती है। साथ में फुल इंटरकॉम सिस्टम है जिसमें स्पीकर बाहर की ओर लगे हैं।

इसे दुनिया का सबसे सुरक्षित जीप बताया जा रहा है। इस जीप में 6.4L V8 इंजन है जो 708HP जेनरेट करता है गाड़ी की कीमत 2.02 करोड़ रुपये है।

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प्रारंभ हो गया है सावन, जानें भगवान शिव के प्रिय बेलपत्र की विशेषताएं

ह‍िंदू शास्‍त्रों में भी मान्‍यता है क‍ि भगवान श‍िव को बेलपत्र बहुत पसंद हैं। ज‍िससे श‍िव पूजन में इसे शाम‍िल करना अन‍िवार्य माना जाता है। इससे भगवान श‍िव बहुत जल्‍दी पसंद होते हैं आैर भक्‍तों को मनचाहा वरदान देते हैं।

बेलपत्र से जुड़े हैं ये तीन तथ्य

1- मान्‍यता है कि‍ बेलपत्र चढ़ाने से शि‍व जी का मस्‍तक शीतल रहता है। यदि बेलपत्र में तीन पत्‍त‍ियां हों तो वो सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अलावा पत्‍त‍ियां खराब नही होनी चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय जल की धारा साथ में अर्पि‍त करने से इसका प्रभाव कर्इ गुना बढ़ जाता है।

2- सोमवार, अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा और सं‍क्रांति को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। सावन माह में इन दिनों की पूजा के लिए इन्हें पहले तोड़कर रख लें। बेलपत्र कभी भी खरीदकर लाया गया हो श‍िव जी पर चढ़ाया जा सकता है। इतना ही नहीं एक बेलपत्र को कई बार धोकर भी चढ़ा सकते हैं।

3- कहते हैं जि‍न घरों बेलवृक्ष लगा होता हैं वहां श‍िव कृपा बरसती है। बेलवृक्ष को घर के उत्तर-पश्चिम में लगाने से यश कीर्ति की प्राप्‍त‍ि होती है। वहीं उत्तर-दक्षिण में लगे होने पर भी सुख-शांति और मध्‍य में लगे होने से घर में धन और खुश‍ियां आती हैं।

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बेहद आसानी से घर पर डोनट बनाएं

कितने लोगों के लिए : 4

सामग्री :

मैदा 1 कप, यीस्ट 1 चम्मच, चीनी 1/3 कप (पिसी हुई आटे में डालने के लिए), नमक 2 चुटकी, बेकिंग पाउडर आधा चम्मच, बटर 1 बड़ा चम्मच, तलने के लिए रिफाइंड ऑयल, आधा कप पिसी चीनी ऊपर से लगाने के लिए

विधि :

-यीस्ट को गुनगुने पानी में भिगा दें।

-मैदे को छान ले उसमे बटर, चीनी, नमक, बेकिंग पाउडर, और यीस्ट मिला के मुलायम आटा गूंध ले।

-फिर उस आटे की एक बड़ी सी मोटी रोटी बेल ले, और उसे डोनट कटर या फिर किसी ग्लास से -गोल काट ले बीच से भी काट के डोनट का शेप बना दे।

-इसी तरह से सारे डोनट तैयार कर ले।

-फिर उसे ढककर चार घंटे के लिए रख दे या फिर जब तक डोनट फूल के दोगने मोटे न हो जाये तब तक उसे रखे।

-एक कड़ाही में तेल गरम करे और डोनट को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तल ले।

फिर ऊपर से पिसी हुई चीनी चारों तरफ से लगा दे।

-आप चाहे तो चाकलेट और क्रीम भी डोनट पर लगा सकते हैं।