Posted on Leave a comment

ताजमहल Ownership केस: सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां का वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
– ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
– पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, “शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।”
– कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
– सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
– एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
– बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
– एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
– 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
– बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

Posted on Leave a comment

सलमान को मिली जमानत, घर ले जाने बॉडीगार्ड के साथ पहुंची बहन

काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान की जमानत की अर्जी कोर्ट ने स्वीकार कर ली। शनिवार को जोधपुर सेशन कोर्ट में वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं, जिसके बाद 3 बजे कोर्ट ने 50 हजार के मुचलके पर सलमान को जमानत दे दी। उनके परिजनों को पूरी उम्मीद थी कि सलमान आज जेल से बाहर आ जाएंगे। इसी वजह से उनकी बहन अलवीरा सेशन्स कोर्ट पहुंची थीं

 

शेरा ने किया गार्ड

– जोधपुर सेशन्स कोर्ट के बाहर सलमान खान के समर्थकों की भारी भीड़ जमा थी। भीड़ से बचाने के लिए सलमान की बहन अलवीरा के साथ उनके बॉडीगार्ड शेरा भी मौजूद थे।

– शेरा लगातार अलवीरा को भीड़ से प्रॉटेक्ट करते रहे। उन्होंने मीडिया को भी उसके पास फटकने नहीं दिया।

आगे क्या होगा?

– विश्नोई समाज के वकील महीपाल विश्नोई ने बताया, “सलमान खान को 25-25 हजार के दो मुचलके भरने के ऑर्डर कोर्ट ने दिए हैं। वे अदालत की इजाजत के बिना देश नहीं छोड़ सकते हैं। उन्हें 7 मई को खुद अदालत के सामने पेश होना होगा।”

कोर्ट रूम में क्या हुआ?

– सलमान के वकील महेश बोड़ा ने कहा कि 20 साल से जारी इस केस में सलमान हमेशा जमानत पर रहे। उन्होंने हमेशा कोर्ट के आदेश का पालन किया और जब भी बुलाया गया वे हाजिर हुए। ऐसे में उन्हें जमानत दी जाए।

– इस पर सरकारी वकील पोकरराम ने कहा कि गवाहों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ है कि सलमान ने गोली मारकर हिरण का शिकार किया। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
– वहीं, विश्नोई समाज के वकील महिपाल विश्नोई ने कहा कि सलमान के खिलाफ आरोप साबित हो चुका है। ऐसे में उन्हें जमानत देने के बजाय जेल में रखने के मामले की सुनवाई जल्द करनी चाहिए। सबूतों के आधार पर उन्हें आगे भी दोषी ही माना जाएगा।

Posted on Leave a comment

शहाबुद्दीन, गैंगस्टर नीरज बवानिया समेत 80 कैदी तिहाड़ जेल में भूख हड़ताल पर

दिल्ली तिहाड़ जेल में बंद आरजेडी के पूर्व सांसद और बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन समेत 80 विचाराधीन कैदी पिछले तीन दिन से जेल में भूख हड़ताल पर हैं। यह सभी कैदी हाई रिस्क वार्ड के कैदी है। ये सब तिहाड़ और मंडोली जेल में बंद हैं।

हाईकोर्ट में दायर की याचिका
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि छोटा राजन को जेल के अंदर टीवी, किताबें और बाकी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। वहीं उन्हें सामान्य सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। इस बाबत शहाबुद्दीन की ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तिहाड़ जेल के सुपरिटेंडेंट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सुपरिटेंडेंट से 27 अप्रैल तक जवाब देने के लिए नोटिस जारी कर दिया है।

छोटा राजन को मिल रही सभी सुविधाएं
नीरज बबानिया, शहाबुद्दीन और छोटा राजन तीनों दो नंबर हाई रिस्क वार्ड में कैद हैं। वहीं नीरज और शहाबुद्दीन का आरोप है कि छोटा राजन को बैरक के अंदर तमाम तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। इसलिए शहाबुद्दीन ने भूख हड़ताल शुरू कर दी हैं और 80 कैदियों के भूख हड़ताल पर तिहाड़ जेल के स्टाफ ने चुप्पी साधी हुई है।

सीवान जेल से तिहाड़ जेल में किया गया शिफ्ट
पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उन्हें पिछले १३ महीनों से तिहाड़ जेल में ऐसी जगह रखा जा रहा है, जहां न ही रोशनी आती है और न ही हवा। उन्होंने कहा कि उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि जबसे वह तिहाड़ जेल में शिफ्ट हुए हैं, तब से उनका वजन 15 किलो घट गया है। शहाबुद्दीन का आरोप है कि अगर हालात यही रहे तो उन्हें गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

45 मामले दर्ज हैं शहाबुद्दीन पर
पूर्व सांसद ने मांग की है कि उन्हें एकांत कारावास से निकालकर आम कैदियों की तरह रखा जाए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल 15 फरवरी को करीब 45 आपराधिक मामलों में मोहम्मद शहाबुद्दीन को बिहार के सीवान जेल से तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया था। दो अलग-अलग घटनाओं में अपने तीन बेटे गंवा चुके चंद्रकेश्वर प्रसाद और आशा रंजन ने याचिका दायर कर आरजेडी नेता को तिहाड़ जेल में रखने का आग्रह किया था। उनके आग्रह पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था।

Posted on Leave a comment

चारा घोटाला: चाइबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में लालू को पांच साल की सजा, 10 लाख रुपये जुर्माना

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद को सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपये का गबन करने के मामले में पांच साल सजा सुनाई है. इसके साथ ही लालू यादव पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. लालू यादव के अलावा बिहार के ही पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को भी कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है.

इन्हें भी कोर्ट ने सुनाई सजा

इसके अलावा कोर्ट ने ध्रुव भगत को तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा दी. अदालत ने विद्यासागर निषाद को तीन साल और जगदीश शर्मा को पांच साल कैद की सजा सुनायी. अदालत ने तीन पूर्व आईएएस फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, सजल चक्रवर्ती को चार-चार साल की कैद और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. जुर्माना नहीं देने पर उन्हें तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. अदालत ने छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.

अदालत ने सभी राजनीतिक कैदियों और अधिकारियों को तीन से पांच साल की कैद, महिला आरोपियों को तीन साल की कैद और चारा आपूर्तिकर्ताओं को तीन से पांच साल कैद की सजा सुनायी. कोर्ट ने तीन साल की सजा पाने वाले आरोपियों को जमानत के लिए जमानत पत्र भरने के निर्देश दिये. इससे पूर्व देवघर कोषागार मामले में सीबीआई अदालत ने जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया था.

तेजस्वी यादव ने दिया ये बयान

इस बीच बिहार के पूर्व उपमुख्यमत्री तेजस्वी यादव और आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद यादव ने कहा कि लालू यादव को फंसाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

फिलहाल बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं लालू यादव

ये मामला चारा घोटाले के तीसरे केस चाईबासा कोषागार मामले से जुड़ा है. इससे पहले छह जनवरी को रांची में ही सीबीआई के विषेष न्यायाधीष षिवपाल सिंह की अदालत ने लालू यादव को देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. इस मामले में अब तक जमानत न मिल पाने से लालू यादव बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं.

इससे पहले चाईबासा कोषागार से ही गबन के एक दूसरे मामले में लालू यादव को साल 2013 में पांच साल कैद की सजा सुनायी जा चुकी है. जिस मामले में वह सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाकर रिहा हो चुके हैं.

डोरंडा कोषागार से फर्जी निकासी का मामला

इसके अलावा लालू यादव के खिलाफ रांची में डोरंडा कोषागार से 184 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी से जुड़ा और दुमका कोषागार से तीन करोड़ 97 लाख रुपये निकासी का मामला चल रहा है जिनकी सुनवाई अंतिम दौर में है. वहीं दुमका कोषागार से जुड़े मामले में भी गवाहियां लगभग पूरी हो गयी हैं और इस मामले में भी फरवरी में फैसले आने की उम्मीद की जा रही है.

केवल डोरंडा कोषागार से फर्जीवाड़ा कर 184 करोड़ रुपये गबन करने के मामले में चूंकि सौ से अधिक लोगों की गवाही होनी है लिहाजा वहां अभी भी गवाहियां जारी हैं. इसमें कुछ समय लग सकता है. दुमका कोषागार का मामला भी सीबीआई के विषेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में ही चल रहा है जिसने छह जनवरी को लालू यादव और 15 अन्य अभियुक्तों को देवघर मामले में सजा सुनायी थी.