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बजट विशेष: जानिए कैसा रहा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट

अरुण जेटली ने गुरुवार को मौजूदा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। इस बजट में अगले 14 महीने में देश में होने वाले लोकसभा समेत 14 चुनावों का इफेक्ट नजर आया। मिडिल क्लास के लिए ऐसा कोई एलान नहीं हुआ, जिससे उसे टैक्स में फायदा मिले। लेकिन कांग्रेस के परंपरागत वोटरों को साधने के मकसद से गरीबों-किसानों के लिए कुछ एलान हुए। इनमें आयुष्मान भारत योजना शामिल है। इसके तहत 10 करोड़ परिवारों को हॉस्पिटलाइजेशन पर 5 लाख रुपए सालाना का हेल्थ कवर मिलेगा। इसका फायदा 40 से 50 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा। वहीं, किसानों को ध्यान में रखते हुए खरीफ की फसलों पर डेढ़ गुना मिनिमम सपोर्ट प्राइज देने की भी जेटली ने घोषणा की। सरकार इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन से 8,000 करोड़ रुपए तो गंवाएगी, लेकिन हेल्थ और एजुकेशन पर 1% सेस बढ़ाकर 11 हजार करोड़ रुपए वसूल लेगी।

बजट में हमारी चिंताओं पर क्या?

1) इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदला

– उम्मीद थी कि सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करेगी ताकि मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को फायदा हो, लेकिन स्लैब को बरकरार रखा गया। इससे देश के 4 करोड़ इंडीविजुअल टैक्स पेयर्स को निराशा हुई।
– 80C के तहत डेढ़ लाख रुपए इन्वेस्ट कर इनकम टैक्स में छूट हासिल करने की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई।

2) 1% सेस बढ़ाया, ताकि सरकार को 11000 करोड़ मिले
– पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स पर एजुकेशन पर 3% सेस लगता था। इसकी जगह अब हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर की फंडिंग के लिए 4% सेस लगेगा। इससे सरकार को 11 हजार करोड़ रुपए का एडिशनल रेवेन्यू मिलेगा।

3) पेट्रोल-डीजल पर जितनी एक्साइज ड्यूटी घटाई, उतना ही रोड सेस लगाया
– सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए की बेसिक एक्साइज ड्यूटी कम की और 6 रुपए एडिशनल एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। 8 रुपए की यह राहत आम आदमी को इसलिए नहीं मिलेगी, क्योंकि सरकार ने 8 रुपए का रोड सेस लगा दिया है।

4) स्टैंडर्ड डिडक्शन
– करीब 12 साल बाद सरकार सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन लाई है। ये डिडक्शन 40 हजार रुपए का होगा। लेकिन, इसे मेडिकल एक्सपेंस पर 15 हजार और ट्रैवलिंग अलाउंस पर 19200 रुपए की रिबेट के बदले लाया गया है यानी जो डिडक्शन पहले 34,200 रुपए का था, अब वह 40,000 रुपए का होगा। कुल फायदा साल में केवल 5,800 रुपए होगा।

14 महीने, 14 चुनाव. इसलिए गरीबों-किसानों-महिलाओं पर फोकस

# कब-कहां चुनाव
– 2018 में कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, नगालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में चुनाव होंगे। अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे। इसी के साथ आंध्र, तेलंगाना, ओडिशा, अरुणाचल, सिक्किम के चुनाव होंगे। अभी लोकसभा में बीजेपी है, बाकी 13 चुनावी राज्यों में से 7 में वह या एनडीए सत्ता में है।
– इन्हीं 14 चुनावों के मद्देनजर आम बजट में गरीबों-किसानों-महिलाओं से जुड़े एलान किए गए हैं। गरीब और किसान कांग्रेस के परंपरागत वोट माने जाते रहे हैं।

1) दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवर स्कीम का दावा
– जेटली ने आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम का एलान किया। इसका फायदा 10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा। उन्हें हॉस्पिटलाइजेशन पर सालाना 5 लाख रुपए का कवर मिलेगा।
– बजट के बाद मोदी ने भी दावा किया कि आयुष्मान भारत योजना से 40 से 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा और ये दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस योजना है।

3) किसान
– रबी की फसलों की तरह सरकार ने खरीफ की फसलों पर भी किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने का एलान किया।
– सरकार 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण एग्रीकल्चर मार्केट (Gram) में अपग्रेड करेगी। इन Grams को इलेक्ट्रॉनिकली e-NAM (नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) से जोड़ा जाएगा। इससे किसान अपनी उपज सीधे उपभोक्ता को बेच सकेंगे।

4) महिलाओं के लिए 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन

– सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने का एलान किया। सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन दिए जाएंगे। फॉर्मल सेक्टर जॉब्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए EPF में महिलाओं की हिस्सेदारी पहले तीन सालों के लिए घटाकर 8% कर दी गई।

– नेशनल रूरल लिवली हुड मिशन के लिए बजट में 5750 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। महिलाओं के स्व सहायता समूहों के लिए लोन भी 75 हजार करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया।

5) सीनियर सिटिजन

– बजट में सीनियर सिटिजन को डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर छूट 10,000 से बढ़ाकर 50,000 सालाना कर दी गई। वहीं, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट भी 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। गंभीर बीमारियों के केस में डिडक्शन लिमिट 1 लाख कर दी गई।
– प्रधानमंत्री वय वंदना योजना मार्च 2020 तक बढ़ाई जाएगी। इस योजना में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) सीनियर सिटीजन्स को 8% निश्चित रिटर्न देता है। स्कीम में सीनियर सिटीजन के इन्वेस्टमेंट की लिमिट 7.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख कर दी गई है।

– जेटली ने कहा, “सोशियो-इकोनॉमिक कॉस्ट सेंसस के मुताबिक, सरकार हर बुजुर्ग, विधवा, अनाथ बच्चे, वंचितों तक सरकार पहुंचने की कोशिश करेगी। इस साल नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत 9,975 करोड़ रुपए के बजट का एलान किया गया।”

6) महंगा-सस्ता

महंगा सस्ता
कार कच्चा काजू, निकल
मोटरसाइकिल सोलर टेम्पर्ड ग्लास
सोना-चांदी सोलर पैनल और मॉड्यूल वाले ग्लास
वेजिटेबल, फ्रूट जूस एलएनजी, मेक इन इंडिया वाटर प्यूरीफायर
चश्मे
परफ्यूम, टॉयलेट वाटर्स
सनस्क्रीन, सनटैन, मैनीक्योर, पैडीक्योर प्रिपरेशंस
ओरल डेंटल हाईजीन प्रिपरेशंस, पेस्ट, पाउडर, डेंटल फ्लॉस
प्री शेव, शेविंग, आफ्टर शेव प्रिपरेशंस, सेंटेड स्प्रे, टॉयलेट स्प्रे
ट्रक, बस टायर
सिल्क फैब्रिक, फुटवियर, रंगीन पत्थर, हीरा,
स्मार्ट वॉच, वियरेबल डिवाइस, एलसीडी, एलईडी, फर्नीचर
मैट्रेस, लैंप, रिस्ट वॉच, पॉकेट वॉच, क्लॉक्स
ट्राइ साइकिल, स्कूटर, पैडल कार्स, व्हील्ड टॉयज, डॉल्स कैरिएज, टॉयज
वीडियो गेम्स कंसोल, स्पोर्ट्स और आउटडोर स्पोर्ट्स इक्विपमेंट
सिगरेट और दूसरे लाइटर्स, कैंडल्स, काइट्स
खाने का तेल

7) सफर में सहूलियत

रेलवे:आम बजट में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए दिए गए। लगातार चौथे साल किराए में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। सामान की ढुलाई में तेजी लाने का वादा किया गया। सबसे ज्यादा फोकस सेफ्टी और ट्रैक मेंटेनेंस पर किया गया। इसके तहत देश की सभी नैरोगज लाइनों को ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। 4267 अनमैन्ड रेलवे क्रॉसिंग को बंद किया जाएगा। ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे फिट किए जाएंगे। प्लेटफॉर्म पर इनकी तादाद बढ़ाई जाएगी। रेलवे का ग्रॉस बजटरी सपोर्ट बढ़कर 3 लाख करोड़ किया गया है।

एयरपोर्ट:जेटली ने कहा, “56 अनसर्व्ड एयरपोर्ट्स और 31 अनसर्व्ड हेलिपैड्स को उड़ान योजना के तहत कनेक्ट किया जाएगा। 16 ऐसे एयरपोर्ट्स पर ऑपरेशंस पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। एयरपोर्ट्स की कैपेसिटी को पांच गुना ज्यादा बढ़ाया जाएगा ताकि आने वाले वक्त में एक अरब सालाना उड़ानों को हैंडल किया जा सके। तीन साल में डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक 18% कीदर से बढ़ा है। हमारी एयरलाइंस कंपनियों ने 900 नए एयरक्राफ्ट्स का ऑर्डर दिया है। रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान पिछले साल लॉन्च हुई। इसके लिए अनसर्व्ड, अंडरसर्व्ड एयरोपोर्ट्स को कनेक्ट करने की जरूरत है, साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए हवाई सफर मुहैया कराने की जरूरत है। उड़ान योजना से देश के हवाई चप्पल पहनने वाले लोग भी हवाई जहाज में यात्रा कर रहे हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया 124 एयरपोर्ट मैनेज करती है।”

8) राष्ट्रपति-सांसदों की सैलरी बढ़ाई

– अरुण जेटली ने बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गवर्नर्स की सैलरी बढ़ाए जाने का एलान किया। प्रेसिडेंट को अभी 1.5 लाख सैलरी मिलती है, उन्हें 5 लाख सैलरी दी जाएगी। वाइस प्रेसिडेंट की सैलरी 1.2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख की गई। गवर्नर्स को 1.1 लाख की बजाय अब 3.5 लाख सैलरी दी जाएगी।

– सासंदों की सैलरी को लेकर बहस होती रही हैं। अब सांसदों की सैलरी हर 5 साल में रिवाइज्ड की जाएगी। हालांकि, ये रिवीजन महंगाई को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

9) डिफेंस

– डिफेंस बजट में इस साल महज 7.81 फीसदी बढ़ोतरी की गई। डिफेंस के लिए 2018-19 में 2.95 लाख करोड़ रुपए अलॉट किए गए हैं। डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ाने के इंडस्ट्री के प्रमोशन के लिए सरकार 2 डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्री फ्रैंडली मिलिट्री प्रोडक्शन पॉलिसी लाई जाएगी। इसमें से 99,947 करोड़ रुपए से नए हथियार, एयरक्राफ्ट्स, वारशिप्स और दूसरे मिलिट्री हार्डवेयर खरीदे जाएंगे।

10) इन्फ्रास्ट्रक्चर

– जेटली ने कहा, “इकोनॉमी के विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर ड्राइवर की तरह है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर का बजट 1 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ाकर 5.97 लाख करोड़ रुपए कर रहे हैं। हमारे देश को जीडीपी ग्रोथ और रेल-रोड-एयर-इनलैंड वाटर के जरिए देश को कनेक्ट करने के लिए करीब 50 लाख करोड़ रुपए के बड़े इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में टारगेट और अचीवमेंट का रिव्यू किया। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम प्रगति के जरिए पता चला है कि 9.46 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट फास्ट ट्रैक मोड पर शुरू हो चुके हैं। 2018-19 तक 9000 किलोमीटर तक नेशनल हाईवे पूरे हो जाएंगे। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत भारत के दूरदराज और पिछड़े इलाकों को जोड़ा जाएगा। इसमें पहले चरण में 5.35 लाख करोड़ की लागत से 35,000 किलोमीटर हाईवे बनाए जाएंगे।”

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GST : नये साल में मिलेगी नई राहत, पेट्रोल-डीजल समेत होंगे ये 5 बड़े बदलाव

देश की टैक्स नीति के लिए साल 2017 काफी अहम रहा. इस साल न सिर्फ नई टैक्स नीति गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू किया गया, बल्क‍ि इसमें कई बदलाव भी किए गए. मोदी सरकार ने जीएसटी के तहत आम आदमी को राहत देने के लिए कई  उत्पादों का रेट घटाया. कारोबारियों के लिए भी रिफंड क्लेम करने का काम आसान कर दिया गया है.

नये साल में जीएसटी आम आदमी के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने का काम करेगी. अगले साल जहां जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना तय माना जा रहा है. वहीं, अर्थव्यवस्था के नये साल में जीएसटी के साइड इफेक्ट से उभरने की उम्मीद भी जताई जा रही है. आगे जानिए नये साल में जीएसटी आपके लिए क्या तोहफे ला सकती है.

सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल

नये साल में जीएसटी आम आदमी को सस्ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा दे सकती है. गुरुवार को बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने भी इस ओर संकेत‍ किया. इस साल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने के लिए ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नितिन गडकरी ने आवाज उठाई थी. इन नेताओं ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर लगाम कसने के लिए जीएसटी ही एकमात्र रास्ता है. सुशील मोदी का कहना है कि अगले साल बिजली भी जीएसटी के दायरे में आ सकती है.

सभी राज्य राजी, बस सही वक्त का है इंतजार

अक्टूबर महीने में महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगटीवार ने कहा था कि सभी राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की अनुमति दे दी है. उनके मुताबिक अब इन उत्पादों को इसके तहत लाने के लिए हमें सही वक्त का इंतजार करना होगा. उम्मीद जताई जा रही थी कि जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में इसको लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है, लेक‍िन ऐसा हुआ नहीं.

45 रुपये प्रति लीटर  हो जाएगा पेट्रोल

अब उम्मीद जताई जा रही है कि नये साल में जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल कर ही लेगी. अगर ऐसा होता है, तो आपको एक लीटर पेट्रोल करीब 45 रुपये में मिल सकेगा. डीजल की कीमत भी इसके आसपास रहने की संभावना है. दरअसल जीएसटी के तहत आने से कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सकेगा.

सस्ता होगा घर खरीदना

वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है. सुशील मोदी ने भी इस बात को दोहराया है. जेटली के मुताबिक इससे न सिर्फ आम आदमी को सस्ता घर खरीदने में मदद मिलेगी, बल्क‍ि यह कर चोरी पर भी लगाम कसने में मददगार साबित होगा.

कर चोरी पर लगेगी लगाम

जेटली के मुताबिक सबसे ज्यादा कर चोरी रियल इस्टेट क्षेत्र में ही होती है. अगर इसे जीएसटी के दायरे में ला दिया जाता है, तो कर चोरी पर काफी हद तक लगाम कसी जा सकती है. इस पर भी जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में फैसला लिये जाने की संभावना जताई जा रही थी, लेक‍िन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद नये साल में रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत लाना तय है.

टैक्स स्लैब होंगे कम

आने वाले नये साल में जीएसटी के तहत टैक्स स्लैब को घटाकर सिर्फ दो पर ही सीमित किया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में मौजूदा 5 टैक्स स्लैब को 2 में ही सीमि‍त किया जा सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब को खत्म किया जा सकता है. इसकी जगह सिर्फ 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब रखे जा सकते है.

वहीं, सुशील मोदी ने कहा है कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब की जगह 25 फीसदी अध‍िकतम स्लैब रहेगा.  अगर ऐसा होता है, तो आपके लिए 28 फीसदी में शामिल कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. जीएसटी परिषद अगली बैठक में कई उत्पादों का जीएसटी रेट भी कम कर सकती है. इससे अन्य कई उत्पादों पर भी आम आदमी को राहत मिलने की उम्मीद है.

कारोबारियों के लिए होगी राह आसान

जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में कारोबारियों को कई दिक्कतें पेश आ रही हैं. अभी भी छोटे कारोबारियों के मन में जीएसटी को लेकर कई उलझने हैं. उन्हें जीएसटी रिटर्न भरने में दिक्कतें पेश आ रही हैं. इन्हीं सभी दिक्कतों का समाधान ढूंढ़ने के लिए सरकार लगातार नई-नई चीजें ला रही है. हाल ही में सरकार ने जीएसटीएन नेटवर्क पर ऑफलाइन टूल जारी किया है.

ऑनलाइन होंगे सभी काम

इस ऑफलाइन टूल की मदद से कारोबारी अपने पूरे कारोबार और उस पर  लगने वाले जीएसटी का हिसाब-किताब आसानी से रख सकेंगे. इसके अलावा सरकार लगातार जीएसटी रिटर्न और रिफंड भरने में यूज किए जाने वाले फॉर्म्स भी कम करेगी. जीएसटी रिफंड समेत अन्य प्रक्र‍ियाओं को भी ऑनलाइन किए जाने की योजना है. अगले साल इस मोर्चे पर सरकार तेजी से काम कर सकती है.

सुधरेगी अर्थव्यवस्था

मॉर्गन स्टेनली, आईएमएफ और विश्व बैंक समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार कहती आ रही हैं कि नया साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर साबित होगा. मॉर्गन स्टेनली की मानें तो अगले साल जीडीपी की वृद्ध‍ि दर 7.5 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसी तरह विश्व बैंक और आईएमएफ समेत अन्य संस्थाओं ने भी अगला साल नोटबंदी और जीएसटी के असर को खत्म करने वाला बताया है.