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आखिर ऐसा क्या हुआ जिसे याद कर आज भी कपिल शर्मा की आंखों से निकल जाते हैं आंसू, जानें

टेलीविजन किंग कॉमेडियन कपिल शर्मा ने फिर से छोटे पर्दे पर वापसी कर ली है. कपिल शर्मा ने सोनी टीवी पर फैमिली टाइम विद कपिल से कमबैक किया है. यूं तो कपिल शर्मा का नाम सुनते ही सभी के चेहरों पर मुस्कराहाट छा जाती है लेकिन पिछले कुछ समय से कपिल शर्मा का विवादों से चोली दामन का साथ सा बन गया था. आगे जानिए कॉमेडियन कपिल शर्मा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

आपको बताते हैं आखिर देश का सबसे बड़े कॉमेडियन कैसे बने कपिल शर्मा. कपिल शर्मा का सफर शुरू हुआ अमृतसर से. कपिल शर्मा का जन्म पंजाब के अमृतसर में 2 अप्रैल 1981 को हुआ था. कपिल के पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कांस्टेबल थे और मां जनक रानी एक हाउसवाइफ हैं. कपिल का बचपन अमृतसर की पुलिस कॉलोनी में बीता. यही वजह है कि कपिल अपने करियर की शुरुआत में अक्सर शमशेर सिंह नाम के पुलिसवाले के किरदार में नजर आते थे. कपिल ने अपनी पढ़ाई अमृतसर के हिंदू कॉलेज से की है लेकिन कपिल की जिंदगी इतनी आसान नहीं थी. जब कपिल दसवीं क्लास मे पढ़ रहे थे तो उन्होंने अपनी पॉकेट मनी के लिए अमृतसर के एक टेलीफोन बूथ में भी काम किया था.

कपिल ने एक इंटरव्यू मे बताया कि उन्होंने चंद पैसों के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के क्रेट्स तक उठाए हैं. साथ ही कपिल ने अपने कॉलेज में पढ़ाई करने के साथ साथ ऑर्ट ऑफ परफॉर्मेंस की क्लासेज भी देनी शुरू कर दी यानि अपने ही कॉलेज में कपिल स्टूडेंट भी थे और टीचर भी. कपिल की जिंदगी का एक अहम हिस्सा थियेटर करते हुए भी गुजरा. कपिल जिंदगी में स्ट्रगल कर रहे थे. वो सबको हंसाना चाहते थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब कपिल की आंखों में आ गए थे आंसू और आज भी उन बातों को याद कर भावुक हो जाते हैं कपिल. दरअसल, कैंसर से पीड़ित पिता का साया उनके सिर से 2004 में उठ गया तो वहीं दूसरी और परिवार को एक वक्त खाने कि दिक्कत देखनी पड़ी पर कपिल ने कभी हार नहीं मानी.

कपिल बड़े कॉमेडियन बनना चाहते थे लेकिन किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद कपिल को लगा कि उनकी जिंदगी बदल जाएगी. साल 2007 में कपिल को स्टार टीवी के कॉमेडी शो ‘ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज 3’ में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया लेकिन किस्मत ने यहां कपिल का साथ नहीं दिया और वो शो में सेलेक्ट नहीं हुए. कपिल को तो शो में नहीं लिया गया लेकिन कपिल के दोस्त चंदन प्रभाकर को सेलेक्ट कर लिया. चंदन प्रभाकर इन दिनों कपिल के शो में उनके नौकर राजू का किरदार निभाते हैं.

इस रिजेक्शन के बाद जैसे कपिल का दिल टूट गया. लेकिन किस्मत को अभी एक और करवट लेनी थी. कपिल को इस शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली और उसके बाद तो कपिल ने अपनी कॉमेडी का खूब जादू चलाया और ये शो जीत गए. कपिल शर्मा ने जब लाफ्टर चैलेंज जीता तो उन्हें 10 लाख रुपए का इनाम मिला. उस वक्त कपिल को अपनी बहन की सगाई करनी थी और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे. लेकिन जब ये दस लाख रुपए हाथ आए तो कपिल ने सबसे पहले अपनी बहन की ही ये बात बताई और फिर कपिल ने अपनी बहन की शादी धूमधाम से की.

लॉफ्टर चैलेज जीतने के बाद कपिल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इसके बाद कपिल सोनी टीवी के शो कॉमेडी सर्कस में नजर आए जहां कपिल ने अलग अलग किरादरों के जरिए दर्शकों को खूब हंसाया. कलर्स टीवी ने साल 2013 में कपिल के साथ एक नया शो शुरू किया जिसका नाम था कॉमेडी नाइट्स विद कपिल. ये शो कपिल के नाम से शुरू किया. कपिल ने इस शो से एक नई तरह की कॉमेडी की शुरुआत की. दर्शकों ने इस शो को खूब पसंद किया और देखते ही देखते कपिल ने कामयाबी का एक नया इतिहास रच दिया. कपिल के शो की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड का हर बड़ा कलाकार अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कपिल के शो में आता था.

कपिल शर्मा टेलीविजन तक ही सीमित नहीं रहे. साल 2015 में कपिल को अबास-मस्तान की फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ में काम किया. कपिल की इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद तो किया लेकिन फिल्म समीक्षकों ने यही कहा कि ये फिल्म कपिल के टीवी शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल जैसी ही है. कपिल की कामयाबी और उनकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति सीजन 8 के पहले एपिसोड में कपिल को बतौर गेस्ट बुलाया.

कपिल को करण जौहर भी अपने शो ‘कॉफी विद करण’ में बुला चुके हैं. जबकि कपिल बहुत अच्छी इंग्लिश नहीं बोल पाते और करण का शो अंग्रेजी भाषा का शो है लेकिन ये कपिल की पॉपुलैरिटी ही है कि करण को उन्हें अपने शो में बुलाना पड़ा.

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कपिल शर्मा की वापसी, ऐसा होगा नया शो

कॉमेडियन कपिल शर्मा एक बार फिर छोटे पर्दे पर वापसी करनेवाले हैं. खबरें है कि कपिल शर्मा अपने नये शो के साथ मार्च महीने में एकबार फिर टेलीविजन की दुनिया में वापसी करेंगे. एंटरटेनमेंट न्यूज पोर्टल स्पॉय बॉय की रिपोर्ट के अनुसार कपिल छोटे पर्दे पर एक नया गेम शो लेकर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह शो बिल्कुल नये तरह का होगा, जिसके लिए क्रिएटिव टीम काफी मेहनत कर रही है. बताया जा रहा है कि कपिल ने अपने इस नये शो का टीजर भी शूट कर लिया है. टीजर में सभी कलाकार नजर आयेंगे जो इस शो को हिस्‍सा है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कपिल शर्मा का यह नया शो सोनी चैनल पर ही प्रसारित होगा. लेकिन सुनील ग्रोवर और कपिल शर्मा को एकसाथ देखने की चाहत रखनेवाले फैंस के लिए खुशखबरी नहीं मिली है. सुनील इस शो का हिस्‍सा नहीं होंगे. आपको बता दें कि पिछले साल एक विवाद के चलते सुनील ग्रोवर ने ‘द कपिल शर्मा शो’ को छोड़ दिया था.

सुनील के शो छोड़ने के बाद अली असगर, सुगंधा मिश्रा और चंदन प्रभाकर ने भी शो को अलविदा कर दिया था. ‘द कपिल शर्मा शो’ के मुख्‍य कलाकारों के छोड़कर जाने के बाद शो की टीआरपी लगातार गिरती गई. नतीजा यह रहा कि चैनल ने कपिल को शो बंद करने की चेतावनी तक दे डाली.

इसके बाद कपिल ने अपने साथियों को वापस लाने और शो में कुछ नये कॉ‍मेडियंस को जोड़ने की कोशिश की. लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी शो चल नहीं सका और चैनल को शो बंद करना पड़ा. इसके बाद कपिल ने अपनी फिल्‍म फिरंगी से दर्शकों का दिल जीतने की कोशिश की लेकिन फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही.

मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो द कपिल शर्मा शो के बाद कपिल ने 6 महीने का ब्रेक लिया था. उन्‍होंने अपने फैंस से वादा किया था कि वो जल्‍द ही लौटेंगे. अब लगता है वे फैंस को गुदगुदाने के लिए वापस लौट रहे हैं. फैंस को उम्‍मीद है कि कपिल अपने नये शो से दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब होंगे.

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नहीं रहे Old Monk को बुलंदी पर पहुँचने वाले

Kapil Mohan, man behind the success of Old Monk, passes away at 88

Recipient of Padma Shri in 2010 Kapil Mohan led the much-needed diversification of the company after he took over the reins of the erstwhile Dyer Meakin Breweries.

Brigadier (retd.) Kapil Mohan, former Chairman and MD of Mohan Meakin Ltd and the man behind the rum Old Monk, passed away on January 6. He was 88 years old.

As per reports, Mohan, who was keeping unwell in his last years, died of a cardiac arrest in Ghaziabad’s Mohan Nagar area. He is survived by his wife Pushpa Mohan.

Recipient of Padma Shri in 2010, Kapil Mohan led the much-needed diversification of the company after he took over the reins of the erstwhile Dyer Meakin Breweries.

Before 1966, Mohan was at the helm of Trade Links Pvt Ltd.

After the launch of Old Monk on December 19, 1954, Mohan’s leadership saw the company develop three distilleries, two breweries and a host of new franchises in India.

Mohan Meakin has since then forayed into various business areas such as malt houses, glass factories, breakfast food, fruit products and juices, malt extract factories, cold storages and engineering works among others.

Many of his admirers took to Twitter to pay their tributes to Mohan who carried forward the legacy of his brother V R Mohan and father N N Mohan.
Currently, Mohan Meakin Ltd is a multi-faceted business house with a turnover exceeding Rs 400 crore.

History of the company

The company traces its origins to a brewery established by Edward Dyer in Kasauli in 1855.

During the same century, another man named HG Meakin, founded Meakin & Co. Ltd. He bought the old Simla and Kasauli Breweries and built others at Dalhousie, Ranikhet, Chakrarta, Darjeeling and Kirkee. The two firms soon joined hands and started a new joint stock venture under the style of Dyer Meakin & Co.Ltd.

In 1935, when Burma (now Myanmar) was dismembered from India, the name of the Company with Indian assets and liabilities was changed to Dyer Meakin Breweries Ltd., from Dyer Meakin & Co. Ltd., and the assets and liabilities of Burma Brewery in Burma were separated. Thereafter the Company’s name was changed from Dyer Meakin Breweries Ltd to Mohan Meakin Breweries Ltd in 1966 and from 1980, the name was further changed to Mohan Meakin Ltd.

 

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अयोध्या विवादः अकेले पड़े कपिल सिब्बल, वक्फ बोर्ड ने भी उनकी दलील से किया किनारा

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले की सुनवाई को 2019 लोकसभा चुनावों तक स्थगित किया जाए. पहले तो इस मसले पर बीजेपी ने उन पर हमला बोला लेकिन अब वो चारों तरफ से घिरते नजर आ रहे हैं. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ही अब उनके इस दलील से किनारा कर लिया है.

सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य और बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार हाजी महबूब ने सिब्बल के बयान को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि हां, कपिल सिब्बल हमारे वकील हैं लेकिन वो एक राजनीतिक पार्टी से भी जुड़े हुए हैं. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में उनका बयान गलत था. हम इस मामले में जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि हम इस लड़ाई को लंबे समय से लड़ रहे हैं. हम कोर्ट से इसका जल्दी समाधान चाहते हैं. मैं व्यक्तिगत तौर पर उनके इस दलील से सहमत नहीं हूं कि 2019 तक सुनवाई टाल दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर के लिए संसद में कानून लाने से पीएम मोदी को बचना चाहिए. उनका कहना था कि मुस्लिम पक्ष ने मामले को जीत लिया है. इसके बाद मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि को सौंपने का कोई विचार नहीं होना चाहिए.

कपिल सिब्बल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दी गई इस दलील के बाद केंद्रीय मंत्री और भगवान राम के वकील रह चुके रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वकील के तौर पर वो दलील पेश कर सकते हैं लेकिन उनको यह नहीं भूलना चाहिए कि वो देश के पूर्व कानून मंत्री भी हैं. उन्होंने पूछा कि वो ऐसा क्यों चाहते हैं कि मामले की सुनवाई 2019 में हो. उनका यह बयान कई मामलों में गैर जिम्मेदाराना है.

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गुजरात चुनाव में राम मंदिर की एंट्री: मोदी बोले, सिब्बल ने क्यों की सुनवाई टालने की मांग

राहुल गांधी के धर्म पर विवाद के बाद अब अयोध्या मसले की भी गुजरात के विधानसभा चुनाव में एंट्री हो गई है। बुधवार को अहमदाबाद के धांधुका में चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मसले पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। पीएम मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल द्वारा अयोध्या मसले पर सुनवाई टालने की मांग पर तीखा हमला बोला।

नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘ मुझे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि कपिल सिब्बल मुस्लिम समुदाय की तरफ से लड़ रहे हैं पर वह यह कैसे कह सकते हैं कि अगले चुनाव तक अयोध्या मामले का कोई हल नहीं होना चाहिए? इसका संबंध लोकसभा चुनाव से कैसे है?’ पीएम मोदी ने कहा कि आखिर 2019 में चुनाव कांग्रेस लड़ेगी या फिर सुन्नी वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘यह साफ है कि मैं तीन तलाक के मुद्दे पर चुप नहीं रहूंगा। हर चीज चुनाव के बारे में नहीं होती। यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों का है। चुनाव इंसानियत के बाद आता है।’

राहुल के मंदिर दर्शन पर भी कसा तंज
राहुल गांधी के मंदिर दर्शन पर तंज करते हुए कहा कि मंदिर जाने से गुजरात में बिजली नहीं आई। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए तीन तलाक मामले पर कहा कि मैं चुनाव के लिए फैसले नहीं लेता। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गुजरात के 33 जिलों में चुनाव प्रचार की कमान थामे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अहमदाबाद के धंधुका में थे। यहां उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें याद किया। इसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस को लपेटे में लेकर कहा कि एक परिवार के लिए अंबेडकर और सरदार पटेल के साथ नाइंसाफी हुई। नरेंद्र मोदी ने आगे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व फैक्टर पर धावा बोलते हुए कहा, ‘मंदिर-मंदिर जाने से गुजरात में बिजली नहीं आई। मैं इतने सालों से माला नहीं जप रहा था बल्कि काम कर रहा था।’

दागा सवाल, राम मंदिर का चुनाव से क्या कनेक्शन?
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर अपना प्रहार जारी रखा और अयोध्या विवाद पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बयान पर कहा कि मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है कि कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल अयोध्या विवाद में मुस्लिम समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे हैं। लेकिन वह कैसे सुप्रीम कोर्ट से कह सकते हैं कि अगले चुनाव तक इसका हल ना निकालें। इस मुद्दे का लोकसभा चुनाव से भला कैसे कोई कनेक्शन है?

‘यूपी में हो सकता था नुकसान, फिर भी तीन तलाक पर रखी राय

वहीं तीन तलाक मामले पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में था, सरकार को अपना हलफनामा दाखिल करना था, अखबारों में आया कि यूपी चुनाव को देखते हुए मोदी इस मुद्दे पर शांत रहेंगे। लोगों ने मुझे इस मुद्दे पर न बोलने की राय दी। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यह साफ है कि मैं तीन तलाक के मुद्दे पर मैं चुप नहीं रहूंगा। हर चीज चुनाव के बारे में नहीं होती। यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों का है। चुनाव इंसानियत के बाद आता है। रैली में पीएम मोदी ने गुजरात के किसानों को राहत देते बड़ा ऐलान किया कि किसानों के कर्ज का ब्याज सरकार देगी।

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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट में 8 फरवरी 2018 को होगी अगली सुनवाई

अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले में सुनवाई टल गई है। अब 8 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट इस पर अगली सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच इस मामले की नियमित सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में शिया वक्फ बोर्ड ने मंदिर का समर्थन किया। वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों को पढ़ा, कहा कि सभी सबूत कोर्ट के सामने पेश नहीं किए गए।

उत्तर प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कपिल सिब्बल के सभी दावों को गलत बताया। मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सभी संबंधित दस्तावेज और जरूरी अनुवादित कॉपियां जमा की जा चुकी हैं।

 

वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन समेत दूसरे याचिकाकर्ताओं ने बड़ी बेंच बनाए जाने की मांग करते हुए कहा कि 7 जजों एक बेंच गठित की जाए। सिब्बल ने साल 2019 के बाद मामले की सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि 2019 के आम चुनाव में इस मसले को उठाया जा सकता!

अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान है और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी है। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी।

अयोध्या के विवादास्पद ढांचे को लेकर हाई कोर्ट ने जो फैसला दिया था उसके बाद तमाम पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई थी और याचिका सुप्रीम कोर्ट में 6 साल से लंबित है। पिछले साल 26 फरवरी को भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी को इस मामले में पक्षकार बनाया गया था। स्वामी ने राम मंदिर निर्माण के लिए याचिका दायर की थी।

11 अगस्त को 3 जजों की स्पेशल बेंच ने अयोध्या मामले की सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट में 7 साल बाद अयोध्या मामले की सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि 7 भाषा वाले दस्तावेज का पहले का अनुवाद किया जाए। कोर्ट से साथ ही कहा कि वह इस मामले में आगे कोई तारीख नहीं देगा।

क्या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

28 साल सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो एक के बहुमत से 30 सितंबर, 2010 को जमीन को तीन बराबर हिस्सों रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में बांटने का फैसला सुनाया था। भगवान रामलला को वहीं हिस्सा दिया गया, जहां वे विराजमान हैं। हालांकि, हाई कोर्ट का फैसला किसी पक्षकार को मंजूर नहीं हुआ और सभी 13 पक्षकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 को अपीलों को विचारार्थ स्वीकार करते हुए मामले में यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था, जो यथावत लागू है।

विवादित ढांचे के नीचे हैं मंदिर के साक्ष्य

विवादित ढांचे के नीचे हिंदू मंदिर होने के साक्ष्य मिले हैं। 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन में से दो न्यायाधीशों जस्टिस सुधीर अग्रवाल और धर्मवीर शर्मा ने अपने फैसले में माना कि अयोध्या में विवादित ढांचा हिंदू मंदिर तोड़ कर बनाया गया था। दोनों जजों के फैसले का आधार भारत पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रिपोर्ट है। एएसआइ की रिपोर्ट कहती है कि विवादित ढांचे के नीचे हिंदू मंदिर था। मस्जिद बनाने में मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल हुआ था। हालांकि, तीसरे न्यायाधीश एसयू खान के अनुसार, इस बात का कोई सुबूत नहीं मिलता कि बाबर ने मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ कर बनाई थी। उन्होंने ये जरूर माना कि मस्जिद का निर्माण बहुत पहले नष्ट हो चुके मंदिर के अवशेषों पर हुआ था।

हिंदू संगठनों की दलील

– श्रीरामलला विराजमान और हिंदू महासभा आदि ने दलील दी है कि हाई कोर्ट ने भी रामलला विराजमान को संपत्ति का मालिक बताया है।

– वहां पर हिंदू मंदिर था और उसे तोड़कर विवादित ढांचा बनाया गया था। ऐसे में हाई कोर्ट एक तिहाई जमीन मुसलमानों को नहीं दे सकता है।

– यहां न जाने कब से हिंदू पूजा-अर्चना करते चले आ रहे हैं, तो फिर हाई कोर्ट उस जमीन का बंटवारा कैसे कर सकता है?

मुस्लिम संगठनों की दलील

– सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने अयोध्या में 528 में 1500 वर्गगज जमीन पर मस्जिद बनवाई थी।

– इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है। मस्जिद वक्फ की संपत्ति है और मुसलमान वहां नमाज पढ़ते रहे।

– 22 और 23 दिसंबर 1949 की रात हिंदुओं ने केंद्रीय गुंबद के नीचे मूर्तियां रख दीं और मुसलमानों को वहां से बेदखल कर दिया।