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सीएम योगी ने खोया आपा, कुशीनगर में दी ‘नौटंकी’ बंद करने की चेतावनी

कुशीनगर में गुरुवार को रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना आपा खो बैठे। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह एक दुखद घटना है और इस वक्त नारेबाजी बंद कर दें। मैं अभी भी बोल रहा हूं नोट कर लो। यह नौटंकी बंद करो। दुखद घटना है और हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’

कुशीनगर में एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण हादसे में 13 स्‍कूली बच्‍चों की मौत हो गई। हादसे के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माना कि ड्राइवर ने कान में ईयरफोन लगा रखा था जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

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ISIS के चंगुल से भागे भारतीय हरजीत मसीह की कहानी पर सुषमा ने उठाया पर्दा

इराक में बीते दिनों अगवा हुए 39 भारतीय लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने मंगलवार को राज्‍यसभा में की। उन्‍होंने बताया कि 38 लोगों का डीएनए मैच हो गया है, जबकि 39वें का डीएनए 70 प्रतिशत तक मैच हो गया है। लाशों के ढेर में से भारतीयों के शवों को ढूंढा गया जिसके बाद उनके मारे जानें का पता चला। विदेश मंत्री ने बताया कि इन 39 भारतीयों के शवों को अमृतसर एयरपोर्ट लाया जाएगा। विदेश मंत्री ने बताया कि इनमें से 31 पंजाब के और चार हिमाचल प्रदेश के हैं। विदेश मंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के लोगों के प्रति संवेदना जताई। वहीं सुषमा ने बताया इनमें से एक भारतीय हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौट आया था लेकिन उसने जो कहानी सुनाई थी, वह झूठी थी।

सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा, जहां से उसने सुषमा स्वराज को फोन किया था। स्वराज ने कहा कि आईएसआईएस के आतंकियों ने एक कंपनी में काम कर रहे 40 भारतीयों को एक टेक्सटाइल कंपनी में भिजवाने को कहा था। उनके साथ कुछ बांग्लादेशी युवा भी थे। यहां पर उन्होंने बांग्लादेशियों और भारतीयों को अलग-अलग रखने को कहा लेकिन हरजीत मसीह ने अपने मालिक के संग जुगाड़ करके अपना नाम अली किया और बांग्लादेशियों वाले समूह में शामिल हो गया। यहां से वह इरबिल पहुंच गया। सुषमा ने बताया कि यह कहानी इसलिए भी सच्ची लगती है क्योंकि इरबिल के नाके से ही हरजीत मसीह ने उन्हें फोन किया था।

 

सुषमा ने आगे बताया, ‘हरजीत की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता।’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो।’

 

यह थी हरजीत मसीह की कहानी
मसीह ने बताया था कि किस तरह आईएस के आतंकी 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर किसी पहाड़ी पर ले गए थे। उसके मुताबिक, ‘आईएस के आतंकी हमें किसी पहाड़ी पर ले गए और हम सभी को किसी दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया। आतंकियों ने दो दिन तक हम सभी को अपने कब्जे में रखा।’

 

मसीह ने बताया, ‘एक रोज हम सभी को कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए। इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं। मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा। बाकी सभी लोग मारे गए।’ मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया।

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Group of People “beheading” a man in broad daylight in Darbhanga #Bihar

Group of People “beheading” a man in broad daylight in Darbhanga #Bihar is not even news on mainstream media and has no effect on #Hindus. This is how by selective muting of news they are slowly eliminating Hindus like frog in boiling water story!!

Indics – this exactly the fate of each of you & your loved ones if you lose the demographic war being waged.

Via – ANI

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काठमांडू विमान हादसा: तो क्या पायलट की ग़लती से गई 49 लोगों की जान?

नेपाल की राजधानी काठमांडू में त्रिभुवन एयरपोर्ट पर सोमवार को हुए विमान हादसे में 49 लोग मारे गए.

ये हादसा बांग्लादेश की निजी एयरलाइन ‘यूएस-बांग्ला’ के एक विमान के एयरपोर्ट पर हुई क्रैश लैंडिंग की वजह से हुआ.

हादसे की वजह जानने के लिए जांच शुरू होने से पहले आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं.

हादसे के लिए नेपाल एयरपोर्ट अथॉरिटी और यूएस बांग्ला एयरलाइंस एक-दूसरे को ज़िम्मेदार बता रहे हैं. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के मद्देनज़र जिस एक शख़्स की तरफ सबकी निगाहें जा रही हैं, वो हैं दुर्घटनाग्रस्त विमान से ज़िंदा बच निकले पायलट आबिद हसन.

विमान हादसाइमेज कॉपीरइटAFP

किस बात को लेकर खींचतान?

यूएस बांग्ला एयरलाइंस का कहना है कि फ्लाइट के पायलट ने किसी तरह की कोई ग़लती नहीं की, नेपाल के एयरपोर्ट ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी से मिली जानकारी के आधार पर ही पायलट ने विमान लैंड करवाने की कोशिश की.

लेकिन नेपाल एयरपोर्ट ट्रैफिक कंट्रोल इस हादसे के लिए पायलट आबिद को ज़िम्मेदार बता रहा है.

एयरपोर्ट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के डायरेक्टर जनरल संजीव गौतम ने कहा, “विमान को एयरपोर्ट के दक्षिण से रनवे पर उतरने की इजाज़त दी गई थी. लेकिन विमान उत्तर की तरफ से रनवे पर उतरा. क्योंकि विमान की असामान्य लैंडिंग हुई है, ऐसे में अभी ज़्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता.”

नेपाल में विमान हादसाइमेज कॉपीरइटAFP

विमान हादसा: पायलट और ट्रैफिक कंट्रोल की बातचीत

ढाका में यूएस बांग्ला एयरलाइंस के सीईओ आसिफ़ इमरान ने हादसे के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

आसिफ इमरान ने कहा, “हादसे से पहले विमान पायलट और काठमांडू एयर ट्रैफिक कंट्रोल की बातचीत की एक क्लिप मिली है. ये क्लिप यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध है.

  • एयरपोर्ट ट्रैफिक कंट्रोल की तरफ से पायलट को गलत संदेश दिए गए, जिसके चलते ये एक्सीडेंट हुआ है. कंट्रोलर की तरफ से गड़बड़ी की गई.
  • तीन मिनट के भीतर ट्रैफिक कंट्रोल की तरफ से कई मैसेज पायलट को दिए गए. मुझे लगता है कि इन मैसेज के चलते पायलट उलझन में आ गया. ये भी हादसे की वजह हो सकती है.
  • पायलट को गलत दिशा में रनवे से घुसने के लिए कहा गया था.

कुछ चश्मदीदों के अलावा नेपाल मीडिया का भी कहना है कि हादसे से पहले विमान सामान्य तरीके से रनवे की तरफ नहीं आता दिखा था.

विमान हादसाइमेज कॉपीरइटAFP

क्या पायलट से हुई ग़लती?

अब तक मिली जानकारी की मानें तो हादसे की वजह ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट के बीच बेहतर संवाद न होना हो सकती है.

यूएस बांग्ला की तरफ से हादसे के लिए पायलट के दोषी नहीं होने की बात कही जा रही है.

विमान हादसाइमेज कॉपीरइटAFP

आसिफ़ इमरान कहते हैं, ‘कैप्टन आबिद हसन ज़िंदा हैं. वो इससे पहले एयरफोर्स में थे. इससे पहले वो इंस्ट्रक्टर थे. हमने अब तक ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट की जो बात सुनी है, हमें नहीं लगता कि पायलट ने कोई ग़लती की है. अगर आप भी वो बातचीत सुनेंगे, तो आप भी यही कहेंगे.’

बांग्लादेश सिविल एविएशन अथॉरिटी के चेयरमैन नईम हसन ने हादसे के बाद तीन सदस्यों की कमेटी बना दी है. ये टीम जल्द ही काठमांडू में जांच शुरू करेगी.

दुर्घटनाग्रस्त विमान हादसे के वक्त अचानक कितने नीचे आ गया था, इसकी एक झलक फ्लाइट रडार 24 के शेयर किए हुए ग्राफ से मिलती है.

फ्लाइट रडार 24 लिखता है, ‘ग्राफ से पता चलता है कि क़रीब 8 बजकर 26 मिनट पर विमान 4400 फीट की ऊंचाई पर आ गया और फ़िर 6600 फीट की ऊंचाई तक गया. और फ़िर क़रीब आठ बजकर 33 मिनट पर क्रैश हो गया.’

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हादसे के बाद विमान से ब्लैक बॉक्स को भी बरामद कर लिया गया है. ब्लैक बॉक्स के खुलने के बाद ही हादसे की सही वजह पता चल सकती है.

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सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 10 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर के नक्सल प्रभावित पुजारी कांकेर इलाके में तेलंगाना पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी (नक्सल ऑपरेशंस) ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में मिली इस सफलता की पुष्टि की है। इस ऑपरेशन में एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गया।

सुरक्षाबलों की यह कामयाबी इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया था। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन पुलिस जवान घायल हो गए थे। संयुक्त दल जब मुंगारी और दुलारगुफा के मध्य पहाड़ी में था, तभी घात लगाए नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी।

25 फरवरी को भी नक्सलियों ने विस्फोट कर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के दो जवान को जख्मी कर दिया था। घायलों में एक सहायक प्लाटून कमांडर भी शामिल था। वहीं, बीते 18 फरवरी को सुकमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों में एक एसटीएफ और एक डीआरजी से जुड़े थे।

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अमेरिका: पूर्व छात्र ने गुस्से में स्कूल में की अंधाधुंध गोलीबारी, 17 की मौत; 14 घायल

अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित हाईस्कूल में एक पूर्व छात्र ने अचानक फायरिंग कर दी। इस हमले में 17 लोगों के मारे जाने की खबर है और 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। भारतीय समयानुसार घटना  देर रात हुई। स्थानीय पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के कर्मी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं।

यह घटना पार्कलैंड के मार्जरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल में हुई। यह शहर मियामी से 80 किलोमीटर उत्तर की ओर है। गोलीबारी के दौरान छात्र बुरी तरह डर गए थे और चीखने लगे थे। उन्होंने अपने दोस्तो और परिवार के लोगों को बचाने के लिए संदेश भेजे।

आरोपी छात्र की पहचान 19 साल के निकोल्स क्रूज के रुप में की गई है। क्रूज इसी स्कूल में पढ़ता था। कुछ दिन पहले ही उसकी गलत आदतों और गलत व्यवहार के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया था जिसके बाद से वह गुस्सा में था। आरोपी छात्र के पास स्कूल से संबंधित सभी जानकारी थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले स्कूल का फायर अलार्म बजाया। फायर अलार्म बजते ही स्कूल में अफरा तफरी मच गई जिसके बाद आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। आरोपी छात्र ने इस वारदात में AR-15 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किया।

ब्रोवर्ड काउंटी स्कूल के सुपरिटेंडेंट रॉबर्ट रुन्सी ने कहा कि घटनास्थल पर स्थिति भयावह है। उन्होंने कहा कि स्कूल के पास संभावित हमलावर की कोई जानकारी नहीं थी। बंदूकधारी हमलावर ने चुपचाप पुलिस को आत्मसमर्पण कर दिया। हमले में घायल 14 लोगों को इलाज के लिए नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अमेरीकी टीवी चैनलों के अनुसार स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के परिवार के लोग बड़ी संख्या में पुलिस परिसर के बाहर जमा हो गए हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा में जुटे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट कर अपनी संवेदनाएं जतायीं। उन्होंने कहा, ‘मेरी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं फ्लोरिडा में हुई गोलीबारी में पीड़ितों के साथ हैं।’

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ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान पर किया ड्रोन से हमला

पाकिस्तान की वित्तीय सहायता पर रोक के बाद अब अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ खुद ही कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिका ने बुधवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर ड्रोन से हमले कर हक्कानी नेटवर्क के 2 कमांडरों सहित 2 आतंकियों को ढेर कर दिया है। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसकी जमीन पर ड्रोन हमले उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है।

यह इलाका अफगानिस्तान सीमा से जुड़ा है। पाकिस्तानी अखबार डान के मुताबिक, बुधवार को स्पीन थाल क्षेत्र में एक मकान पर ड्रोन से दो मिसाइल दागे गए। इस हमले में हक्कानी नेटवर्क का कमांडर अहसान उर्फ खवारी और उसके दो साथी मारे गए। अमेरिकी जासूसी विमान के जरिये अफगान शरणार्थियों के घर को निशाना बनाकर ये हमले किए गए।

17 जनवरी को भी किया था ड्रोन अटैक

ओरकजाई एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क के ठिकानों पर हमले किए गए। इससे पहले 17 जनवरी को इस साल के पहले ड्रोन हमले में खुर्रम एजेंसी के बादशाह कोट इलाके में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। पिछले साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई अफगान नीति के बाद खुर्रम एजेंसी में ड्रोन हमलों में तेजी आई है। इस नीति में पाकिस्तान पर आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप भी लगाया गया है।  गौरतलब है कि 2016 में ऐसे हमले में तालिबान का शीर्ष आतंकी मुल्ला अख्तर मंसूर मार गया था।

ट्रंप ने कहा था झूठा और धोखेबाज देश है पाकिस्तान

नए साल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में साफ-साफ लिखा था, ‘अमेरिका मूर्खों की तरह पाकिस्तान को 15 सालों से सैन्य सहायता देता आ रहा है लेकिन इसके जवाब में उसे वापस धोखा और झूठ मिला है। 15 साल से अब तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है लेकिन हर बार हमें मूर्ख बनाया गया है। पाकिस्तान हमेशा से आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है।’

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा, राष्ट्रपति ने बिल्कुल सही कहा। पाकिस्तान ने 15 वर्षो में आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से 33 अरब डॉलर (दो लाख दस हजार करोड़ रुपये) लिये। लेकिन वास्तव में उसने आतंकियों को पाला-पोसा और पनाह दी। इन्हीं आतंकियों से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को लड़ना पड़ा। इससे पाकिस्तान का झूठा और धोखेबाज चरित्र सामने आया।

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साल 2017 में भारत ने 28 शहादतों का बदला 138 पाकिस्तानी जवानों को मार कर लिया

भारत और पाकिस्तान भले ही सीधे युद्ध की स्थिति में न हों, लेकिन दोनों देशों की सीमा पर गोलीबारी होती रहती है. इसी गोलीबारी में साल 2017 में भारत ने अपने 28 सैनिक गंवाए, लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान के 138 सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

यह आंकड़े जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर गोलीबारी में हुई मौतों के हैं और भारत सरकार के खुफिया सूत्रों ने जारी किए हैं. सूत्रों का कहना है कि अक्सर यह देखने को मिलता है कि पाकिस्तानी सरकार अपने सैनिकों की मौत को स्वीकार ही नहीं करती.

खुफिया सूत्रों का कहना है कि सीमा पर मारे जाने वाले सैनिकों को पाकिस्तानी सरकार आम नागरिक बताती है. सूत्रों के मुताबिकभारतीय सेना ने पिछले साल घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर काफी सख्त रुख अपनाया था.

सूत्रों के अनुसार कि साल 2017 में सीमा पर हुई गोलीबारी में पाकिस्तान के 138 सैनिकों की जानें गईं और 158 सैनिक घायल हुए. वहीं, इस दौरान 70 भारतीय सैनिक घायल हुए. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों की मौत पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है.

हालांकि, सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा है कि भारतीय सेना सीमा पर होने वाली गोलीबारी का कड़ा जवाब देती है और आने वाले दिनों में भी ऐसा करना जारी रखेगी.

एक आंकड़े के मुताबिक 2017 में पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम तोड़ने की 860 घटनाएं हुईं, जबकि 2016 में ऐसी 221 घटनाएं ही हुई थीं. भारतीय सेना का कहना है कि पाकिस्तान अपने सैनिकों की मौतों को कभी स्वीकार नहीं करता है. करगिल युद्ध में भारत के सबूत दिए जाने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने सैनिकों की मौत से इनकार किया था.

भारत सरकार के खुफिया सूत्रों ने 25 दिसंबर को हुई घटना का भी हवाला दिया, जब पांच पाक सैन्य कमांडो ने सीमा पार कर ली थी और उसमें से तीन कमांडो मारे गए थे. पहले पाकिस्तानी सेना ने एक ट्वीट करके इन मौतों की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में यह ट्वीट डिलीट कर दिया. दो दिन बाद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया था कि भारतीय सेना की गोलीबारी में तीन पाक सैनिक मारे गए हैं.

सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने एलओसी पर स्नाइपर फाइरिंग में 27 पाक सैनिकों को मारा, जबकि पाकिस्तान की ओर से की गई ऐसी कार्रवाई में 7 भारतीय सैनिक मारे गए.

भारतीय सेना लगातार कोशिश में है कि पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के गठजोड़ का मजबूती से सामना किया जाए. पिछले साल मई में भारतीय सेना ने कहा था कि वह एलओसी पर पाकिस्तानी सेना के बंकरों को निशाना बना रही है. इसके कुछ दिनों बाद ही दो भारतीय सैनिकों के सिर काट लिए गए थे.

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1984 सिख विरोधी दंगे: दोबारा खुलेंगे बंद किए गए 186 मामले

1984 के सिख विरोधी दंगे से जुड़े 186 मामलों की फिर से जांच होगी और इसके लिए एक तीन सदस्‍यीय कमेटी का गठन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया है। इससे पहले विशेष जांच दल (एसआइटी) ने इन मामलों को बंद कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में एसआइटी के इस फैसले को चुनौती दी गई, जिसे कोर्ट ने मान लिया। 186 मामलों की जांच के लिए गठित कमेटी में तीन सदस्‍य होंगे, जिनकी अध्यक्षता होई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे।

आपको बता दें कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख दंगे भड़के थे। इसमें अकेले दिल्ली में हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में दिल्ली कांग्रेस के नेता जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ को दंगों के लिए उकसाया था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से इन नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं दंगा पीड़ितों के लिए यह जरूर एक राहत भरी खबर है।

इससे पहले भी केंद्र सरकार की ओर से गठित एसआइटी द्वारा 293 में से 240 मामलों को बंद करने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी। इस फैसले पर संदेह जताते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से इनमें में 199 मामलों को बंद करने का कारण बताने के लिए कहा था।

3000 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में हजारों की संख्या में सिख मारे गए थे। याद दिला दें कि इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सिख अंगरक्षकों ने की थी। इंदिरा की हत्या के बाद पूरे भारत में दंगे की आग भड़की थी। इन दंगों में 3000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। 2000 से ज्यादा लोग सिर्फ दिल्ली में ही मारे गये थे। नरंसहार के बाद सीबीआइ ने कहा था कि ये दंगे राजीव गांधी के नेतृ्त्व वाली कांग्रेस सरकार और दिल्ली पुलिस ने मिल कर कराये हैं। उस समय तत्कालीन पीएम राजीव गांधी का एक बयान भी काफी सुर्खियों में था जिसमें उन्होंने कहा था कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तब पृथ्वी भी हिलती है।