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किम के बड़े कदम से टली परमाणु आपदा, अब नए रिश्ते की होगी शुरुआत: डोनाल्ड ट्रम्प

सिंगापुर में मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने का वादा किया। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन डीसी लौटते वक्त ट्वीट किया, ‘अपने लोगों के उज्जवल भविष्य की खातिर साहसिक कदम उठाने के लिए मैं किम को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारी अप्रत्याशित मुलाकात से यह साबित होता है कि वास्तविक बदलाव संभव है।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘रॉकेट लांच, परमाणु परीक्षण या रिसर्च और नहीं। हम लोगों का एक साथ गुजरा दिन ऐतिहासिक रहा। धन्यवाद किम।’

दक्षिण कोरिया, चीन के दौरे पर पोंपियो

ट्रंप-किम शिखर वार्ता संपन्न होने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो दक्षिण कोरिया रवाना हो गए, जहां से वह चीन जाएंगे। पोंपियो दोनों देशों के अपने समकक्षों को शिखर वार्ता के बारे में जानकारी देंगे।

अन्य मिसाइल लांच स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे किम

शिखर वार्ता के एक दिन बाद ट्रंप ने बताया कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल परीक्षण स्थल को नष्ट करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम आगामी कुछ दिनों में अन्य मिसाइल स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे। उत्तर कोरिया ने पिछले महीने विदेशी मीडिया की मौजूदगी में अपना एक परमाणु परीक्षण स्थल ध्वस्त कर दिया था।

किम ने ट्रंप को दिया प्योंगयांग आने का न्योता

किम जोंग उन ने शिखर वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग आने का न्योता दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बुधवार को कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। दोनों ने इस आमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया है। इससे नए रिश्ते की शुरुआत होगी।

ट्रंप-किम वार्ता को उत्तर कोरिया के मीडिया ने बताया अपनी जीत

उत्तर कोरिया के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता को उत्तर कोरिया की जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर छाई रही। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट ने हालांकि शिखर वार्ता में हुए समझौते का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किए जाने पर सवाल भी उठाए।

दोनों अखबारों ने पहले पेज पर शिखर वार्ता की खबर को ट्रंप-किम की तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रॉडोंग सिनमुन ने अपने पहले पेज पर शिखर वार्ता को ‘सदी की बैठक’ बताया। सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने लिखा, ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को बंद करने, उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी देने और प्रतिबंधों को हटाने का इरादा जाहिर किया है।

उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन पर स्टार न्यूज एंकर री चुन ही ने भी इसी तरह की खबर पढ़कर सुनाई। 75 वर्षीय री आमतौर पर बड़ी घोषणाओं के मौके पर ही सामने आती हैं। पिछले साल सितंबर में उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण का एलान भी उन्होंने ही किया था।

सरकारी अखबार ने पहले पेज पर ट्रंप और किम के हाथ मिलाने समेत कई तस्वीरों को प्रकाशित किया है। जबकि अंदर के पेज पर अधिकारियों के साथ शिखर वार्ता, लंच और संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर करने की तस्वीरें छापी गई हैं।

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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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बख्तरबंद ट्रेन से बीजिंग आए तानाशाह किम, पूरी दुनिया की लगी रही निगाह, चीन रहा चुप

उत्तर कोरिया से चीन की राजधानी बीजिंग पहुंची एक खास ट्रेन पर कई देशों की नजर लगी हुई है। लेकिन इसको लेकर अब तक चीन ने असमंजस बरकरार रखा हुआ है। इस ट्रेन को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने यहां तक कहा है कि इस ट्रेन से बीजिंग कौन आया इसकी कोई जानकारी उन्‍हें नहीं है। चीन ने इस ट्रेन को लेकर जिस किस्‍म की खामोशी बरती है उसको जानने के लिए हर कोई उत्‍सुक है। अमेरिकी मीडिया ने फिलहाल इस ट्रेन के बीजिंग से वापस होने की भी खबर दी है। इसके बाद भी चीन अपने बयान पर कायम है।

किम की बीजिंग यात्रा

माना जा रहा है कि इस ट्रेन से उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन अपने लाव-लश्‍कर के साथ बीजिंग पहुंचे हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ऐसी अटकलें लगाई गई हैं कि कथित तौर पर इस ट्रेन में बीजिंग पहुंचे किम यहां पर अमेरिका से होने वाली अहम वार्ता से पहले कुछ खास रणनीति बनाने पहुंचे हैं। बहरहाल, चीन, उत्तर और दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका ने भी अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि इस खास ट्रेन से किम ही बीजिंग पहुंचे हैं। इसको लेकर चल रही अटकलों के पीछे सबसे बड़ी वजह यह बताई गई है कि इसी ट्रेन से उत्तर कोरिया के पूर्व प्रमुख और किम के पिता किम जोंग इल और उनके दादा भी बीजिंग गए थे।

जवाब मिलना काफी मुश्किल 

बहरहाल, हमारी खबर सिर्फ इसको लेकर ही नहीं है बल्कि इससे आगे की है। प्‍योंगयोंग से बीजिंग पहुंची ट्रेन को लेकर जितने सवाल उठ रहे हैं उनके जवाब मिलना काफी मुश्किल है। इसकी वजह ये है कि चीन की मी‍डिया पर खास ट्रेन से आए मेहमान को लेकर पूरी तरह से खामोश है। यहां पर ये भी जानना बेहद दिलचस्‍प है कि आखिर जहां विश्‍व के तमाम नेता अपनी विदेश यात्रा के लिए विमान का इस्‍तेमाल करते हैं वहीं किम ने इस हाईप्रोफाइल बैठक के लिए ट्रेन को क्‍यों चुना है। खास ट्रेन से बीजिंग पहुंचे इस मेहमान के लिए बीजिंग में खास सुरक्षा व्‍यवस्‍था भी की गई है। कुछ खबरों में यहां तक कहा गया है कि किम को बीजिंग में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा। अटकलों के बीच बीजिंग में कई प्रमुख सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है।

बीजिंग की सड़कें सुनसान

सबसे पहले आपको बता दें कि किम की इस कथित यात्रा के बाद बीजिंग की सड़कें सुनसान हो गई हैं। चप्‍पे-चप्‍पे पर जवानों को तैनात किया गया है। बीजिंग में कई प्रमुख सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। त्यानआनमेन स्‍क्‍वायर पर भी अभू‍तपूर्व सुरक्षा व्‍यवस्‍था है। इसके अलावा बीजिंग के दिओयोयुतई स्‍टेट गेस्‍ट हाउस की तरफ आने वाली सभी गाडि़यों की जांच की जा रही है। इस ओर हर गाड़ी को आने की इजाजत भी नहीं दी गई है। इस ओर आने वाले मार्ग पर भी केवल खास गाडि़यां ही आ रही हैं। यहां आने वाले खास मेहमान पर यहां के लोगों की भी निगाहें लगी हुई हैं।

जापान के निप्‍पो टीवी नेटवर्क ने दोनों देशों के बीच बने फ्रेंडशिप ब्रिज से गुजरती हुई इस ट्रेन का वीडियो भी जारी किया है। इसके अलावा एक दूसरे वीडियो में स्‍टेशन के बाहर बाहरी सुरक्षा घेरे में लिमोजिन गाड़ी के अंदर जाने और बाहर आने का भी वीडियो सामने आया है। एक तीसरे वीडियो में सुरक्षा घेरे के बीच में एक लिमोजिन गाड़ी को चौराहे से गुजरते हुए भी दिखाया गया है।

किम की ट्रेन है बेहद खास

किम और उनकी खास ट्रेन को लेकर जिस तरह से अटकलों का बाजार गर्म है उसके बारे में आपको बेहद कम ही जानकारी होगी। आपको बता दें कि बीजिंग में प्‍योंगयोंग से पहुंची खास ट्रेन से वर्ष 2011 में किम के पिता किम जोंग इल ने भी बीजिंग की यात्रा की थी। उनसे पहले किम इल संग जो कि मौजूदा तानाशाह के दादा थे, ने भी इसी खास ट्रेन से बीजिंग और रूस की यात्रा की थी। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह महज एक ट्रेन ही नहीं है बल्कि एक चलता फिरती हाईटैक वैपंस से सुसज्जित वाहन है, जिसको खास किम परिवार के लिए ही तैयार किया गया है। यही वजह है कि किम के पिता और दादा ने विमान से यात्रा करने से ज्‍यादा इस खास ट्रेन पर ही भरोसा किया है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अपने निधन से कुछ पहले अगस्‍त 2011 में किम जोंग इल ने इसी खास ट्रेन से मास्‍को की यात्रा की थी। इस दौरान उन्‍होंने वहां पर रूसी राष्‍ट्रपति दमित्री मेडवेडेव से मुलाकात की थी।

खास ट्रेन को लेकर वीडियो वायरल 

बीजिंग में इस खास ट्रेन को लेकर एक वीडियो भी वायरल हो गया है। कहा जा रहा है इससे आए मेहमानों को बीजिंग के खास गेस्‍ट हाउस में ठहराया जाएगा। इस ट्रेन में किम की सुविधा और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। पूर्व रशियन डिप्‍लोमेटिक ने वर्ष 2001 में हुई किम की यात्रा को याद और इस ट्रेन के बारे में बताया था कि यह वास्‍तव में बेहद खास है। उनके मुताबिक यह ट्रेन बाहर और अंदर से बेहद सुंदर है और इसमें उनकी सुख-सुविधा के अलावा सुरक्षा के भी बेहतरीन उपाय किए गए हैं। इसके अंदर लेडी कंडक्‍टर हैं। इन सभी के अलावा ट्रेन में किम के परिवार के लिए दुनिया की बेहतरीन शराब का इंतजाम किया जाता है। पीली पट्टी वाली हरे रंग की यह ट्रेन में सोमवार दोपहर को बीजिंग पहुंची थी।

साथ चलती हैं दो और ट्रेन 

डिप्‍लोमेट के मुताबिक किम के मास्‍को आगमन पर वहां उनकी शान में कोरियाई और रूसी भाषा में गीत प्रस्‍तुत किए गए थे। यहां पर एक खास बात यह भी है कि जब कभी भी मौजूदा किम जोंग उन या उनके पिता और दादा ने इस ट्रेन की सवारी की तब-तब इस ट्रेन के साथ दो और ट्रेन चलती हैं। यह ट्रेन किम की सुरक्षा के लिए साथ चलती थी। हालांकि जिस ट्रेन में किम सफर करते हैं उस ट्रेन में भी उनकी सुरक्षा की पुख्‍ता व्‍यवस्‍था होती है। किम की ट्रेन में कांफ्रेंस रूम के अलावा ऑडियेंस चैंबर, बैडरूम, सैटेलाइट फोन, अलग से टीवी रूम की भी सुविधा मौजूद है।

सत्ता संभालने के बाद कभी देश से बाहर नहीं गए किम

आपको यहां पर ये भी बता दें कि जब से किम ने सत्ता संभाली है तब से वह कभी देश के बाहर नहीं गए हैं। ऐसे में उनका ट्रेन से बीजिंग जाना वह भी ऐसे समय जब ट्रंप से उनकी वार्ता होनी है कई तरह के सवाल खडे करता है। यहां ये भी जानना जरूरी है कि चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्‍यापारिक साझेदार है। उत्तर कोरिया का करीब 90 फीसद कारोबार महज चीन से होता है बाकि दस फीसद में पूरा विश्‍व समाया हुआ है। हालांकि अमेरिका और यूएन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने भी उत्तर कोरिया को भेजे जाने वाले सामान की आपूर्ति रोक दी थी। इन सभी के बीच जापान और अमेरिका की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया था कि चीन और रूस चोरी छिपे उत्तर कोरिया को चीजों की आपूर्ति करने में लगे हैं। दोनों देशों ने इसको लेकर सुबूत भी मुहैया करवाए थे।

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छलावा न हों कोरिया से आ रहे सकारत्मक बयान: ट्रंप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर बातचीत की इच्छा जाहिर करने पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है.

ट्रंप ने कहा कि ‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान काफ़ी सकारात्मक हैं’ लेकिन साथ ही कहा कि ये ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

दक्षिण कोरिया ने जानकारी दी थी कि सोमवार को जब उसके अधिकारी उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मिले थे तो ये मुद्दा उठाया गया था.

दक्षिण कोरिया के मुताबिक किम जोंग उन अमरीका से बातचीत के लिए तैयार हैं और हथियारों के परीक्षण पर भी रोक लगा सकते हैं.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

हालांकि, पूर्व में उत्तर कोरिया से हुई बातचीत में कुछ हासिल नहीं हुआ है. अमरीका और उत्तर कोरिया के कुछ अधिकारियों की राय है कि उत्तर कोरिया इसके जरिए हथियार विकसित करने के कार्यक्रम के लिए वक्त हासिल करने की कोशिश में हो सकता है. ये कड़े प्रतिबंधों से राहत पाने की कोशिश भी हो सकती है.

उत्तर कोरिया की ओर से हाल फिलहाल इस बारे में कोई टिप्पणी समाने नहीं आई है.

दक्षिण कोरिया की ओर से उत्तर कोरिया गए प्रतिनिधिमंडल के नेता चुंग इयू योंग ने ही जानकारी दी थी कि दोनों देशों के नेता अगले महीने एक शिखर सम्मेलन में मिलने के लिए सहमत हुए हैं

एक दशक से ज्यादा वक्त के दौरान ये ऐसी पहली मीटिंग होगी. किम जोंग उन साल 2011 से सत्ता में हैं. उनके उत्तर कोरिया का नेता बनने के बाद से ऐसी कोई मीटिंग नहीं हुई है.

फरवरी में दक्षिण कोरिया में हुए विंटर ओलिंपिक के दौरान दोनों देशों के बीच गर्माहट दिखी. यहां तक कि उत्तर कोरिया के खिलाड़ी ने दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों के साथ एक टीम में खेले.

उत्तर कोरिया, अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है: दक्षिण कोरिया

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ट्रंप ने क्या कहा

वाशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा ‘उत्तर कोरिया के मामले में यकीनन हमने एक लंबा रास्ता तय किया है.’

‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान सकारात्मक हैं. पूरी दुनिया के लिए ये बड़ी बात होगी.’

ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में हुए ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए उत्तर कोरिया की तारीफ़ भी की.

लेकिन इससे पहले उन्होंने एक चेताने वाला ट्वीट भी किया था जिसमें कहा गया था कि ये एक ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

इस बीच अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ बातचीत चाहे जिस दिशा में जाए, हमारा निश्चय दृढ़ है.

उन्होंने कहा, “सभी विकल्प मौजूद हैं और हमारा रूख उत्तर कोरिया के लिए तब तक नहीं बदलेगा जब तक हम उनका परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने की तरफ़ कोई ठोस कदम न देख लें.”

ऐसी उम्मीद है कि उत्तर कोरिया से हुई बातचीत की जानकारी देने के लिए दक्षिण कोरिया की टीम हफ्ते के आखिर में अमरीका जा सकती है.

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उत्तर कोरिया ने क्या कहा?

मंगलवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति दफ्तर से एक बयान जारी किया गया जिसमें बताया गया, “उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियार हटाने की इच्छा जताई है. अगर उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्रवाई का खतरा कम हुआ और सरकार बने रहने की गांरटी दी गई तो उत्तर कोरिया का कहना है कि परमाणु हथियारों को बनाए रखने की उसे कोई वजह नज़र नहीं आती.”

हालांकि आलोचक उत्तर कोरिया की मंशा पर शक जताते हैं. अतीत में भी उत्तर कोरिया अपनी कही बातों से मुकरा है. 2005 में हथियार घटाने का समझौता उनमें से एक है.

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रूस ने उत्‍तर कोरिया के मुद्दे पर बातचीत के लिए अमेरिका को भेजा बुलावा

उत्‍तर कोरिया के मुद्दे को सुलझाने के लिए रूस अब अमेरिका से सीधे बातचीत करना चाहता है। रूस के उप-विदेश मंत्री इगोर मोर्गुलोव ने शनिवार को उत्तर कोरिया के मुद्दे पर संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच प्रत्यक्ष वार्ता करने का प्रस्‍ताव रखा है।

टीएएसएस समाचार एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका की चेतावनी को लगातार अनदेखा करते हुए परमाणु और मिसाइल परीक्षण करने वाले उत्तर कोरिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। उत्‍तर कोरिया के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने कई प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिका द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों की घोषणा के बाद रूस के उप-विदेश मंत्री ने ये टिप्‍पणी की है।

खबर के मुताबिक इगोर मोर्गुलोव ने कहा, ‘मुझे यकीन है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर वर्तमान स्थिति का को बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। इसलिए हम मुद्दे पर सक्रिय रूस-अमेरिकी वार्ता की मांग करते हैं।’ उन्‍होंने बताया कि मॉस्को ने उत्तर कोरिया नीति के यूएस विशेष प्रतिनिधि जोसेफ यून को वार्ता के लिए निमंत्रण भेजा है। वार्ता की तारीख के लिए अभी चर्चा चल रही है। रूसी राजनयिक ने भी वाशिंगटन और प्योंगयांग के बीच वार्ता की बात फिर से दोहराई।

गौरतलब है कि अमेरिका ने शुक्रवार को उत्तर कोरिया की शिपिंग इंडस्ट्री और ट्रेडिंग कंपनियों पर कई प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, ताकि किम जोंग-उन अपने घातक हथियारों के निर्माण पर विराम लगाए। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से उत्तर कोरिया के खिलाफ उठाया गया यह अब का सबसे बड़ा कदम है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने जिन 28 जलपोत और नौपरिवहन से जुड़ी जिन 27 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, वे उत्तर कोरिया, चीन और सिंगापुर में पंजीकृत हैं। लेकिन ऐसी आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई से अमेरिका और उत्‍तर कोरिया के बीच तनाव बढ़ सकता है।

दरअसल, उत्‍तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है जिससे पूरे विश्‍व पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका उत्‍तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग-उन का रोकने की हर संभव कोशिश कर रहा है। लेकिन उत्‍तर कोरिया लगातार अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी दे रहा है। शायद रूस और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ता में उत्‍तर कोरिया के मुद्दे का कोई हल निकले।

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क्या उत्तर और दक्षिण कोरिया की दुश्मनी ख़त्म हो गई है?

साल 2017 के जाते-जाते कोरियाई प्रायद्वीप में एक बड़ा बदलाव हुआ. परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी जिद पर अड़े उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कुछ नरमी दिखाते हुए अपने पड़ोसी देश से संबंध सुधारने के संकेत दिए.

फिर उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की मेज़बानी में हो रहे शीतकालीन ओलंपिक में अपनी टीम भेजने के फ़ैसला किया और एक क़दम और आगे बढ़ते हुए एलान किया कि उद्घाटन समारोह के दौरान दोनों देशों की टीमें एक ही झंडे के तले मार्च करेंगी.

किम जोंग उन ने ओलंपिक उद्घाटन के लिए अपनी बहन को प्योंगचांग भेजा और लौटने के बाद उनकी बहन ने जो रिपोर्ट सौंपी वो किम जोंग उन को पसंद भी आई.

उद्घाटन समारोह में जब उत्तर और दक्षिण कोरिया की टीमें एक झंडे तले मार्च कर रही थीं तो दुनिया के लिए ये बड़ा संदेश था, इसलिए भी कि जिस झंडे के नीचे ये टीमें थी उसमें सफेद पृष्ठभूमि पर एकीकृत कोरिया को दिखाया गया था.

अपने बीते कल और साझा इतिहास को याद कर उत्तर कोरिया के शीर्ष अधिकारियों की आंखें भी भर आईं और जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन और किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग एक साथ बैठे तो दूरियां कम दिखीं.

कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बनाए रखने के इच्छुक हैं दोनों देश

किम जोंग की बहन किम यो जोंग वहां संयुक्त महिला आइस हॉकी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद थीं तो उत्तर कोरिया की चीयरलीडर्स दुनियाभर से वहाँ पहुँचे दर्शकों का उत्साहवर्धन कर रही थीं.

लेकिन शीतकालीन ओलंपिक से रिश्तों में आई ये गर्माहट लंबे समय तक कायम रहेगी?

नई दोस्ती नहीं आ रही रास

यही लाख टके का सवाल है जिसका जवाब शायद दुनिया का हर शख़्स पाना चाहेगा.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के खेल के बहाने ही सही एक-दूसरे के करीब आने की ख़बर दुनिया के हर कोने में चर्चा का विषय बनी.

लेकिन उत्तर और दक्षिण कोरिया की ये नई दोस्ती दक्षिण कोरिया में हर किसी को रास नहीं आ रही है.

किम यो जोंग
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ऐसे कई लोगों का मानना है कि मून सरकार ने अमरीका से अपना मुंह मोड़ लिया और उत्तर कोरिया की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है.

परंपरावादी इस कदर हतोत्साहित हैं कि उत्तर कोरिया का दक्षिणपंथी मीडिया अपने संपादकीयों में नियमित तौर पर हर चर्चा में उत्तर कोरिया के ज़िक्र पर आपत्ति जताता है.

एक चिंता ये भी है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने का वादा करने के बदले दक्षिण कोरिया और अमरीका के संयुक्त सैन्य अभ्यास को रोकने की मांग कर सकता है.

हक़ीक़त ये है कि उम्मीदें हर तरफ़ से हैं, साथ ही हर कोई ये भी चाहता है कि हालात और बुरे न हों. ये सही है कि एक खेल महोत्सव ने दोनों देशों को करीब लाने का मंच दिया, लेकिन इससे राजनीतिक गतिरोध एकदम दूर हो जाएगा, इसे लेकर संदेह है.

अविश्वास

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दशकों से चली आ रही बातचीत बेनतीजा रही है और बहुत अधिक उदासी या अविश्वास का मतलब प्रायद्वीप में तनाव, घबराहट और असहजता और वो भी स्थाई तौर पर.

65 साल पहले हुए कोरियाई युद्ध के बाद इन दोनों देशों के बीच रिश्ते अमूमन एक जैसे और स्थाई रहे हैं.

उत्तर कोरिया निश्चित तौर पर दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है और इसकी वजह है इसका परमाणु कार्यक्रम. किम जोंग उन के जखीरे में परमाणु हथियारों के होने से इसका ख़तरा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है.

तो क्या उत्तर कोरिया के व्यवहार या नीति में बदलाव रातों-रात आ गया और वो दक्षिण कोरिया के साथ दोस्ती करने के लिए बेताब है?

उत्तर कोरिया पहले भी बातचीत की मेज़ पर बैठ चुका है और कई दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका था. उत्तर कोरियाई बेहद चालाक होते हैं और मोलतोल में भी माहिर होते हैं.

वो हर इंच के लिए लड़ते हैं और हर बुरी बात का देर तक शोक मनाते हैं.

उत्तर कोरिया के साथ मोलभाव इतना आसान नहीं है, हां इतना तय है कि जो उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले बात तक करने को तैयार नहीं था, वो कुछ कदम तो बढ़ा ही है.

उत्तर कोरिया में वामपंथी विचारधारा के लोगों को उम्मीद है कि उनकी सरकार भी इस मौके को बेकार नहीं जाने देगी.

लेकिन राष्ट्रपति मून इस राह पर कितना बढ़ पाएंगे, ये कहना अभी जल्दबाज़ी होगी. राष्ट्रपति मून 41 फ़ीसदी वोटों के साथ सत्ता में आए हैं और शायद खुद के दम पर बहुत दूर न चल पाएं.

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अमरीका की भूमिका

दूसरी तरफ़, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच पनप रही ‘नई दोस्ती’ से ट्रंप प्रशासन असहज महसूस कर रहा है.

किम जोंग उन ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति को उत्तर कोरिया आने का निमंत्रण दिया है और हो सकता है कि आने वाले समय में राष्ट्रपति मून प्योंगयांग जाएं.

हालाँकि ये आमंत्रण औपचारिक तौर पर नहीं दिया गया है और मून ने कहा है कि वो चाहते हैं कि उत्तर कोरिया, अमरीका के साथ बातचीत के लिए तैयार हो.

अभी ये सिर्फ़ माहौल है और एक छोटी सी मुलाक़ात को रिश्तों में सुधार के रूप में पेश नहीं किया जा सकता, वो भी तब जब ये भी पता न हो कि उनके बीच किस मुद्दे पर चर्चा हुई.

दक्षिण कोरिया में चर्चा ये है कि राष्ट्रपति मून बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन परंपरावादियों को डर है इसे कहीं तुष्टीकरण के रूप में न देखा जाए.

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दक्षिण कोरिया के इतिहासकार जॉन डेल्यूरी कहते हैं, “लोगों को लग रहा है कि मून जे इन को ठीक से श्रेय नहीं मिल रहा है. लोगों को लग रहा है उत्तर कोरिया मन बदल रहा है. अमरीका को समझना होगा कि दक्षिण कोरिया के हाथ बंधे हैं. समझना ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया से डर नहीं लगता, बल्कि दक्षिण कोरिया को लगता है, क्योंकि परमाणु हथियार उसके पास नहीं हैं.”

उत्तर कोरिया के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के दौर पूर्व में कामयाब नहीं रहे, लेकिन इस बार शायद उत्तर कोरिया अपने रुख़ में कुछ नरमी बरते- बिल्कुल ओलंपिक की भावना की तरह- आगे आए, बातचीत शुरू करे और उसे लेकर दुनियाभर में जो अविश्वास का माहौल बना है, उसे दूर करे.

लेकिन, ये भी तय है कि किम जोंग उन दक्षिण कोरिया और अमरीका को दूर-दूर करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि उत्तर कोरिया को ये पता है कि राष्ट्रपति ट्रंप को दक्षिण कोरिया में नापसंद करने वालों की कमी नहीं है.

इसलिए, शीतकालीन ओलंपिक के बाद उम्मीद तो बंधी है, लेकिन सच ये है कि इस पहल से बहुत ज़्यादा उम्मीदें न रखी जाएं.

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13 हजार किमी तक मार कर सकती उत्तर कोरिया की हॉसॉन्ग मिसाइल, खतरे में यूएस

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से मिसाइल परीक्षण कर जहां अपनी मंशा जता दी है वहीं इस परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया समेत जापान में दहशत का माहौल है। इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका को सीधेतौर पर खतरा बढ़ गया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार उत्तर कोरिया ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया है वह न सिर्फ पहले से ज्‍यादा उन्‍नत है बल्कि ज्‍यादा घातक भी है। यह एक इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल आईसीबीएम थी जिसका नाम हॉसॉन्‍ग-15 बताया गया है। इस मिसाइल परिक्षण के बाद दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से करीब 20 मिनट तक बात की और अपनी चिंता भी जताई। इस दौरान उन्‍होंने अमेरिका से उत्तर कोरिया पर फिर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्‍होंने ने यहां तक कहा है कि यदि उत्तर कोरिया बातचीत की मेज पर आता है तो सभी का भविष्‍य उज्जवल हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ इस मिसाइल के सफल परीक्षण से उत्साहित किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया को एक न्‍यूक्लियर स्‍टेट घोषित कर दिया है। मिसाइल परिक्षण के बाद उन्‍होंने इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई भी दी है।

13 हजार किमी की दूरी तक जा सकती है मिसाइल

रक्षा विशेषज्ञ सी उदय भास्‍कर की नजर में उत्तर कोरिया का ताजा मिसाइल परीक्षण काफी शक्तिशाली है। उन्‍होंने सीधेतौर पर इसको अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने बताया कि यह मिसाइल आईसीबीएम रेंज की है। इस लिहाज से यह दस हजार या इससे भी ज्‍यादा किमी तक जा सकती है। इन हालातों में यह अमेरिका के लिए सीधा खतरा है। उनके अलावा योनहैप एजेंसी ने वैज्ञानिक डेविड राइट के ब्‍लॉग के हवाले से बताया है कि यदि आंकड़े सही हैं तो इस मिसाइल की रेंज करीब 13 हजार किमी तक हो सकती है।

ISS से तिगुनी ऊंचाई तक गई हॉसॉन्‍ग 15

यहां पर आपको बता दें कि किम जोंग उन के नेतृत्‍व में उत्तर कोरिया अब तक दर्जनों परमाणु परीक्षण कर चुका है। इस बार उसने इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल हॉसॉन्‍ग 15 का परिक्षण किया है जो जापान के स्‍पेशल इकॉ‍नमिक जोन में जाकर गिरी है। यह मिसाइल परिक्षण इसलिए भी खास है क्‍योंकि यह करीब 4475 किमी की ऊंचाई तक गई जो कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से भी तीगुनी ऊंचाई है। इसके अलावा इसने करीब 950 किमी की दूरी तय करने में करीब 53 मिनट का समय लगाया। इस लिहाज से भी यह उत्तर कोरिया की अब तक की सबसे उन्नत परमाणु मिसाइल है। यह मिसाइल हॉसॉन्‍ग 14 का ही उन्‍नत स्‍वरूप है। इस मिसाइल को लोफ्टेड एंगल से दागा गया था। जानकारों के मुताबिक यदि इसको स्‍टेंडर्ड तरीके से दागा जाता तो यह दस हजार किमी से अधिक ऊंचाई तक चली जाती।

 

पहले से ही मिल रहे थे मिसाइल परीक्षण के संकेत

यहां पर हम आपको यह भी बता देते हैं कि इस मिसाइल परीक्षण से पहले ही जापान को इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि प्योंगयांग एक और मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है। हालांकि किसी भी उपग्रह से परीक्षण स्थल पर इस तरह की किसी गतिविधि का पता नहीं लग सका था। इसी तरह के संकेत सियोल, टोक्यो और वाशिंगटन की सैन्य खुफिया एजेंसियों को भी हासिल हुए थे। उत्तर कोरिया के ताजा प‍रीक्षण के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने एक बार फिर कहा कि किम की कारगुजारियों से पूरी दुनिया को खतरा पैदा हो गया है।

खुद को बताया न्‍यूक्लियर पावर

सफल मिसाइल टेस्‍ट से उत्‍साहित किम ने अपने संदेश में कहा है कि य‍ह मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्‍से को निशाना बना सकती है। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस मिसाइल से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण हमेशा की ही तरह किम जोंग उन की देखरेख में ही किया गया है। इसके सफल परीक्षण के बाद किम ने यह भी कहा है कि इस मिसाइल परीक्षण के बाद आखिरकार हमने न्‍यूक्लियर पावर होने का अहसास हो रहा है। उन्‍होंने उत्तर कोरिया को एक उत्तरदायी परमाणु ताकत करार दिया है, जो अपने देश की रक्षा करना जानता है। इस दौरान किम ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ही मिसाइलें और घातक हथियार विकसित किए हैं। उन्‍होंने इस मौके पर अमेरिका को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अमेरिका परमाणु हमले की धमकी देकर बार-बार उत्तर कोरिया को धमकाता रहा है।

पहले भी कर चुका है हाइड्रोजन बम का परीक्षण

गौरतलब है कि 3 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने सबसे ताकतवर हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। यह परीक्षण करीब 100 किलोटन के हाईड्रोजन बम का था। इस परीक्षण के बाद उत्तरी हमक्योंग प्रांत के किजी इलाके में करीब 5.7 और 4.6 तीव्रता के भूकंप महसूस किए गए थे। यह परीक्षण जनवरी में किए गए परमाणु परीक्षण से करीब 11.8 गुणा अधिक शक्तिशाली था। इतना ही नहीं यह बम जापान में दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान गिराए गए परमाणु बमों से भी करीब पांच गुणा शक्तिशाली था। इसके अलावा 15 सितंबर को भी उत्तर कोरिया की तरफ से एक बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण किया गया था। यह मिसाइल जापान के होकाइडो द्वीप ऊपर से गुजरी थी। इस साल उसका यह 14वां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण था। उस वक्‍त जापान के नागरिकों को चेतावनी देने के लिए लगाए गए सायरन बज उठे थे। उस वक्‍त भी दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की थी। उत्तर कोरिया इससे पहले 2006, 2009, 2013 और 2016 में परमाणु बमों का परीक्षण कर चुका है।

(Source: Jagran)