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आतंक रोधी अभियानों के लिए चीन ने नयी ‘लेजर गन’ विकसित की

  चीन ने एक नयी लेजर गन विकसित की है जो एक सेकंड के भीतर ही 200 मीटर के लक्ष्य पर निशाना साधने में सक्षम है. इसका इस्तेमाल आतंक रोधी अभियानों के लिए किया जाएगा. मीडिया में आई एक रिपोर्ट में गुरुवार को यह जानकारी दी गई. चीन के हुनान प्रांत में हाल में आतंकवाद रोधी एक अभ्यास के दौरान इस बंदूक का प्रदर्शन किया गया. इस बंदूक में निशाना लगाने के लिए एक हैंडसेट है और एक बैक पैक है जिसमें इसे संचालित करने संबंधी चीजें हैं. चाइना एरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (सीएएसआईसी) से संबद्ध कंपनी होंगफेंग ने इस गन का प्रदर्शन किया.आतंक रोधी अभियानों के लिए चीन ने नयी 'लेजर गन' विकसित की

यह बंदूक अन्य हथियारों की तुलना में अधिक तेजी से और सही निशाना लगाने में सक्षम है. इस गन का विकास करने वाले इंजीनियरों में शामिल रहे यान आजहे ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि इस बंदूक को चलाने के दौरान यह आवाज नहीं करती और इससे रोशनी नहीं निकलती है. यान ने कहा कि इसको चलाना आसान है क्योंकि यह पीछे की तरफ धक्का भी नहीं मारती और इसका रखरखाव भी महंगा नहीं है.

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आधार से भारत सरकार के 9 बिलियन डॉलर बचे: नंदन नीलेकणी

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने आधार कार्ड पर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि भारत सरकार की आधार कार्ड स्कीम ने करीब 1 बिलियन लोगों को जोड़ा है जिससे सरकारी खजाने के 9 अरब डॉलर बचे हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, इस योजना को यूपीए सरकार ने लॉन्च किया था. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे काफी जोरशोर से सपोर्ट किया. नीलेकणी ने ये बातें वर्ल्ड बैंक पैनल में डिजिटल इकोनॉमी पर चर्चा के दौरान कही. नीलेकणी बोले कि विकासशील देशों के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना आसान है. आधार कार्ड अब 100 करोड़ लोगों के पास है.

नीलेकणी ने कहा कि आधार कार्ड के यूनिक नंबर होने के कारण अब आप लोगों की पहचान कर सकते हो. जिससे पैसा सीधे उनके खाते में जाता है. उन्होंने कहा कि लगभग 50 करोड़ लोगों ने अपनी आईडी को बैंक खाते से जोड़ दिया है. भारत सरकार लगभग 12 बिलियन डॉलर सीधा बैंक खातों में भेज रही है, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा कैश ट्रांसफर सिस्टम है.

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मौत के 8 साल बाद लौटी थी इंदिरा। किया था ये काम।- कांग्रेस

मौत के 8 साल बाद इंदिरा गाँधी से करवाया पुल का उद्घाटन 
गज़ब की बात है न, की जो व्यक्ति 8 साल पहले मर गया हो, वो किसी पल का उद्घाटन कर रहा है, ऐसा सिर्फ कांग्रेस में ही संभव है 
 
कांग्रेस गाँधी-नेहरू खानदान की तारीफों के पुल बांधती रहती है 
पर इस बार तो कांग्रेस ने हद ही कर दी और 1992 में इंदिरा गाँधी से पुल का उद्घाटन करवा लिया, जबकि इंदिरा तो 8 साल पहले 1984 में ही परलोग सिधार गयी थी 
 
देखिये कांग्रेस का नया कारनामा 

 
 
आज 10 अक्टूबर है, गाँधी-नेहरू परिवार की स्तुति के तहत कांग्रेस ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर ये पोस्ट डाला जिसमे कांग्रेस ने बताया की 
 
आज के दिन यानि 10 अक्टूबर को, 1992 में इंदिरा गाँधी ने बंगाल में विद्यासागर पुल का उद्घाटन किया था 
ये पुल हुगली नदी पर बना हुआ है 
 
पर गज़ब की बात तो ये है की इंदिरा गाँधी तो 1992 से 8 साल पहले 1984 में ही परलोक सिधार गयी थी 
फिर कांग्रेस ने 1992 में उसी इंदिरा गाँधी से जो 8 साल पहले मर चुकी हो, उनसे पुल का उद्घाटन कैसे करवाया 
 
ऐसा चमत्कार तो सिर्फ कांग्रेस में ही संभव है ।
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रघुराम राजन को नहीं मिला अर्थशास्‍त्र का नोबेल: अमेरिकी अर्थशास्‍त्री रिचर्ड थैलर को चुना गया है

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए अमेरिकी अर्थशास्‍त्री रिचर्ड थैलर को चुना गया है. 2017 के लिए चुने गए इस पुरस्‍कार की रेस में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी शामिल थे. लेकिन उन्‍हें पुरस्‍कार नहीं मिला.थैलर शिकागो में व्यवहारिक विज्ञान के प्रोफेसर हैं.

अर्थशास्‍त्र-मनोविज्ञान के बीच की दूरी कम की
अवॉर्ड की घोषणा करते हुए रॉयल स्‍वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा है कि थैलर के योगदान ने एक व्यक्ति के फैसले लेने के मामले में आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दूरी के बीच पुल का काम किया है. उनके काम ने इकोनॉमिक्‍स और साइकोलॉजी के बीच के गैप को कम किया है. इनाम के तौर पर 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब 7.25 करोड़ रुपए) दिए जाएंगे.

नोबेल ज्यूरी के मुताबिक, थैलर ने लिमिटेड रेशनलिटी, सोशल प्रेफरेंसेज और खुद पर कंट्रोल में कमी के बीच संबंध स्‍थापित करने का काम किया है. उन्‍होंने स्‍थापित किया है कि ये तीनों चीजें व्यक्तिगत आर्थिक फैसलों के साथ ही बाजार के फैसलों को भी प्रभावित करती हैं.


कौन हैं थैलर 
थैलर यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में बिहेवियरल साइंस और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं. वे 2008 में आई पुस्‍तक Nudge के सह-लेखक हैं. थैलर ने यह पुस्‍तक कैस आर.संस्टीन के साथ लिखी थी. इसमें बताया गया था कि बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के जरिए सोसाइटी की कई समस्‍याओं को हल किया जा सकता है.

राजन भी थे रेस में
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इकोनॉमिक्‍स के नोबेल पुरस्‍कार की रेस में थे. लिस्‍ट तैयार करने वाली रिसर्च कंपनी क्‍लैरिवेट एनालिटिक्‍स के अनुसार, कॉरपोरेट फाइनेंस से जु़ड़े निर्णयों के दायरे को बढ़ाने में अनोखे योगदान के लिए राजन के नाम पर विचार किया जा रहा था. राजन इस समय यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्‍कूल ऑफ बिजनेस में कैथरीन डूसक मिलर डिस्टिंग्‍यूज्‍ड सर्विस प्रोफेसर हैं. इससे पहले 1998 में भारत के अमर्त्य सेन को वेलफेयर इकोनॉमिक्स के लिए अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

1968 में शुरू हुआ अर्थशास्‍त्र में नोबेल
अर्थशास्‍त्र में नोबेल पुरस्‍कार 1968 में शुरू हुआ. यह 1895 में अल्‍फ्रेड नोबेल द्वारा शुरू किए गए मूल पुरस्‍कारों में शामिल नहीं था.

अमेरिका का दबदबा है इकोनॉमिक्‍स के नोबेल में
इकोनॉमिक्‍स के नोबेल में अमेरिका का दबदबा रहा है. अभी तक जितने लोगों को अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्‍कार मिला है, उनमें लगभग आधे अमेरिकी ही हैं. 2000 और 2013 के बीच तो हर साल या तो अमेरिकी जीते, या फिर उन्‍होंने किसी और के साथ इसे शेयर किया.

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जाक दुबोशे, जोआखिम फ्रैंक और रिचर्ड हेंडर्सन को रसायन का नोबेल

सूक्ष्म और ठंड से जमे हुए अणुओं की तस्वीर उतारने के लिए एक आसान और बेहतर पद्धति क्रायो- इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कॉपी विकसित करने को लेकर तीन वैज्ञानिकों जेक्स डबशेट, जोशीम फ्रैंक और रिचर्ड हेंडरसन को रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। इन वैज्ञानिकों की टीम की नई पद्धति से शोधकर्ता अब नियमित रूप से बायॉ-मोलेक्युल का त्रिआयामी (3डी) ढांचा बना सकते हैं।

बायॉ – मोलेक्युल जीवों के संभरण और उपापचय प्रक्रिया में शामिल होता है। इस पद्धति में कोशिकाओं के हिस्सों की तस्वीर उतारने के लिए इलेक्ट्रॉन बीम इस्तेमाल की गई। नोबेल कमेटी ने कहा कि शोधकर्ता अब बीच में ही बायॉ-मोलेक्युल को जमा सकते हैं और प्रक्रिया को दृश्य रूप दे सकते हैं जो वे पहले कभी नहीं कर सकते थे। यह चीज जीवन को समझने और दवाइयों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

यह पद्धति बायो-मोलेक्युल को प्राकृतिक अवस्था में जमी हुई अवस्था (ठंड से) में रखने में मदद करेगा। कोशिका के ढांचों, विषाणुओं और प्रोटीन के सूक्ष्मतम ब्योरे का अध्ययन करने में इसका इस्तेमाल किया गया। कमेटी ने कहा कि शोधकर्ताओं को जब संदेह हुआ कि जीका विषाणु ब्राजील में नवजात शिशुओं के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा कर महामारी फैला रहा है तब उन्होंने विषाणु को चित्रात्मक रूप देने के लिए क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का रुख किया। पुरस्कार के तौर पर 11 लाख डॉलर दिया जाएगा।

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सुपर-30 के आनंद कुमार बने ऋतिक रोशन, क्लियर करवाएंगे IIT Exam!

खास बातें

  1. विकास बहल करेंगे डायरेक्ट
  2. क्वीन के डायरेक्टर हैं विकास बहल
  3. ऋतिक बनेंगे मैथेमेटिशियन

ऋतिक रोशन ने कुछ समय पहले इस बात का खुलासा किया था कि सुपर-30 के आनंद कुमार की बायोपिक के लिए उनसे बातचीत चल रही है. अब इस बात की पुष्टि हो गई है कि ऋतिक रोशन को मैथेमेटिशियन आनंद कुमार के रोल के लिए फाइनल कर लिया गया है. ऋतिक रोशन की इस फिल्म को विकास बहल डायरेक्टर करेंगे. विकास बहल इससे पहले कंगना रनोट की ‘क्वीन’ को डायरेक्ट किया था. यह पहला मौका होगा जब ऋतिक रोशन किसी बायोपिक को करेंगे. इससे पहले वे ‘जोधा अकबर’ और ‘मोहनजोदाड़ो’  जैसी पीरियड फिल्में कर चुके हैं.

Video: पटना: सुपर-30 के सभी छात्रों ने क्रैक किया IIT JEE

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taran adarsh 

@taran_adarsh

#BreakingNews: Hrithik Roshan to play mathematician #AnandKumar in his biopic, titled #Super30… Vikas Bahl will direct the film.

आनंद कुमार पटना के रहने वाले मैथेमेटिशियन हैं. कुमार पटना में आईआईटी प्रतिभागियों के लिए ‘सुपर 30’ नाम से कोचिंग चलाते हैं. वह आईआईटी-जेईई के लिए मुख्य तौर पर आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को प्रशिक्षित करते हैं. उन्होंने 2002 में इस कोचिंग की शुरुआत की थी.

कुछ दिन पहले वे अमिताभ बच्चन के साथ कौन बनेगा करोड़पति की हॉट सीट पर भी नजर आए थे और उन्होंने 25 लाख रु. जीते थे. उन्होंने उस समय बताया था, ‘पिताजी चाहते थे कि हम और पढ़े लिखें, लेकिन उनका अचानक देहांत हो गया. इसके बाद हमारे घर की हालत बिगड़ गई. तब मां ने पापड़ बनाना शुरू किया. मैं और मेरा भाई पापड़ बेचने जाते थे.’ सुपर 30 के अभी तक 450 में से 390 स्‍टुडेंट आईआईटी में चुने जा चुके हैं.