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फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को पहुंचाएगा फायदा प्राइवेसी लॉ!

यूरोप में अगले माह एक नया नियम का प्रस्ताव आने वाला है, जिसके तहत प्राइवेट लोगों के हाथ में लोगों के निजी डाटा को जाने से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

इस नए नियम के तहत कंपनी डाटा शेयर करने से पहले उपभोक्ता से इसके लिए इजाजत लेगी। सरकार के इस कदम से जहां इंटरनेट पर बड़ी कंपनियों का वर्चस्व खत्म होगा। वहीं छोटी कंपनियों को भी फायदा होगा। हाल के वर्षों में कुछ छोटी कंपनियों ने निजता के नियमो का सम्मान किया है, जबकि बड़ी कंपनियों की ओर से हमेशा इन नियमों की अनदेखी की गई है।

टोरंटो विश्वविद्याल के मार्केटिंग प्रोफेसर एवी गोल्डफार्ब ने प्रतिस्पर्धा पर गोपनीयता नियमों के प्रभावों का अध्ययन किया। गोल्डफार्ब वर्ष 2013 की एक रिपोर्ट के सह-लेखक भी थे, जिसमें कहा गया था कि गोपनियाता से बाजार की प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर होगा क्योंकि उपभोक्ता से किसी चीज की इजाजत लेना एक छोटी कंपनी की लागत बढ़ा सकता है। ऐसे में ये स्टार्टअप के लिए नुकसानदायक होगा।

फेसुबक के मुताबिक एक राजनीतिक रिसर्च करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करीब 87 मिलियन यूजर्स की गोपनीय जानकारी हासिल करके उसका उपयोग किया। इसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस की ओर से मार्क जुकरबर्ग को निशाना बनाया गया। गूगल की वीडियो सर्विस यूट्यूब को लेकर भी कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं।

मॉडल की जांच कर सकेंगे दूसरे देश

यूरोप और अमेरिका की तरह ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश प्राइवेसी को लेकर फेसबुक औऱ गूगल जैसी कंपनियों के विज्ञापन आधारित मॉडल की जांच कर सकती है। अमेरिका के कानून निर्माताओं ने इस माह जुकरबर्गक की संसद में गवाही के दौरान सिलिकॉन वैली को गोपनियता के मुद्दे पर ज्यादा विनियमित बनाने पर जोर दिया। यूरोप में ऐसा ही एक प्रयोग सफल रहा है, जब वर्ष 2014 में वहां की उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लोगों की इच्छा के मुताबिक उनके कंटेट को ऑनलाइट होने से हटाया जा सकेगा।

नहीं पड़ा व्‍यापार पर असर

इसके अलावा वर्ष 2011 के यूरोपियन कानून बेबसाइटों की ओर से लोगों को कूकीज के बारे में जानकारी देने को कहा गया, जिससे कि वो ब्राउजिंग हिस्ट्री को सुरक्षित रखा जा सके और कोई इसका दुरुपयोग न कर सके। इसके बाद पॉपअप वार्निंग को लेकर काम किया गया। इसी के साथ आज के दौर में डेटा की गोपनियता के बीच फेसबुक और गूगल के उपयोग को कम किया जा रहा है। फेसबुक की ओर से कहा गया कि कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले से उनके व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है, जबकि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने कहा इस तिमाही में उनके कर संग्रह में 26 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी कंपनियां

यूरोप में डेटा रेग्यूलेशन को लेकर लाए जा रहे कानून को ‘द जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन’ का नाम दिया गया है। इस कानून के तहत टेक कंपनियों की ओर से यूजर्स के डेटा कलेक्शन, स्टोर और उनके प्रयोग पर कंट्रोल रखा जा सकेगा। यह नया नियम 25 मई से प्रभाव में आएगा। इसके बाद टेक कंपनियों को बताना होगा कि उन्होंने लोगों का डेटा किस तरह से प्राप्त किया है, कहां प्रयोग किया है, और कहां सुरक्षित किया है। ऐसे में कंपनियां उपभोक्ताओं के समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी।

कंपनियां होंगी मजबूत

कुछ लोगों का मानना है कि प्राइवेसी के नियन बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले होंगे। लेकिन छोटी कंपनियों को ये प्रतियोगिता से बाहर कर देंगे। लेकिन पेरिस की एक स्टार्टअप कंपनी के सीईओ की मानें तो डेटा प्रोटेक्शन के नए नियम से कंपनी मजबूत होगी क्योंकि उनका मूल संपत्ति ग्राहक का विश्वास है। गोपनियता कानून के बाद टारगेटेड विज्ञापनों को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी फेसबूक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां फायदे में रहेगी, क्योंकि विज्ञापन देने वाले ज्यादा ऑडियंस उसकी ओर रुख करेंगे। ऐसे में फेसबुक और गूगल की यूट्यूब जैसी कंपनियों को ज्यादा विज्ञापन मिलेगा, जिनके पास क्रमश: 2.2 मिलियन और 1.5 बिलियन मासिक उपभोक्ता हैं।

यूजर्स देंगे सहमति

यूरोपीय डेटा संरक्षण पर्यवेक्षक जोवोवानी बुट्टारेली के मुताबिक गूगल और फेसबुक की निगरानी आयरिश डेटा अथॉरिटी की ओर से की जाएगी, उनके यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय को अलग तरह से ट्रीट करने की बात कही। गूगल प्राइवेसी इंजीनियर योनातन जुंगर के मुताबिक बड़ी कंपनियां डेटा को उपयोग करने के लिए शर्त जोड़ सकती हैं, जबकि छोटी कंपनियां ऐसी शर्त नहीं जोड़ पाएंगी। जैसा कि पिछले दिनों फेसबुक ने वैश्विक स्तर पर उपयोगकर्ताओं से नया सहमति फार्म भरवाना शुरु किया है, जिसके तहत थर्ड पार्टी को उपभोक्ता की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक से इसकी इजाजत लेनी होगी।

नई चुनौती

गोपनियता के आलोचकों ने फेसबुक के नए सहमति फार्म की चुनौती दी है, उनके मुताबिक वे उपयोगकर्ताओं की सूचनाओं को व्यापक रुप में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। न्यू अमेरिका के ओपन टेक्नोलॉजी इंसटीट्यूट के एक वरिष्ठ सलाहकार बेन स्कॉट के मुताबिक नए कानून जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन (जीडीपीआर) को लेकर मेरी चिताएं हैं। मैं उन लोगों को लेकर चिंतित हूं, जो जीडीपीआर में काफी कुछ निवेश करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोपनियता कानून कितना सफल होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस तरह से लागू किया गया है।

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CBSE PAPER LEAK 2018 दिल्ली पुलिस ने बतायी इकोनॉमिक्स पेपर लीक करने वाले रोहित-ऋषभ व तौकीर की साठ-गांठ की कहानी

कड़कड़डूमा कोर्ट से पुलिस को पर्चा लीक करने वाले तीनों लोगों की दो दिन की पुलिस कस्टडी मिल गयी है.

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

ANI @ANI_news

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

सीबीएसइ पेपर लीक मामले में आज दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इस संंबंध में मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने कहा आज तड़के रोहित व ऋषभ नाम के दो स्कूल टीचर और कोचिंग के एक ट्यूटर तौकीर को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रश्न खुलने के समय पौने दस बजे से 30 से 40 मिनट पहले 12वीं इकोनॉमिक्स का प्रश्न पत्र खोल लिया गया और रोहित व ऋषभ नामक टीचर ने उसे कोचिंग ट्यूटर तौकीर को वाट्सएप पर भेजा, जिसने उसे बच्चों को भेज दिया. उन्होंने कहा कि एक बच्चे से इस संबंध में पूछताछ की गयी थी. डीसीपी ने यह नहीं बताया कि इस मामले का मास्टमाइंड तीनों में कौन है, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि ऋषभ के कहने पर रोहित ने प्रश्नपत्र तौकीर को भेजा और इन तीनों में अच्छी पहचान व दोस्ती है.

डीसीपी आलोक कुमार ने कहा कि पेपर लीक मामले की जांच की दो हिस्सों में हो रही है. इकोनॉमिक्स पेपर लीक की जांच डॉ रामगोपाल नायक व दसवीं मैथ्स पेपर लीक की जांच जॉय तिर्की की अगुवाई में हो रही है और पूरी जांच का सुपरविजन डॉ रामगोपाल नायक कर रहे हैं.

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 Two teachers and a tutor were arrested. Police custody remand of all three has been taken, they will be questioned: Delhi Police Joint CP Crime Branch on #CBSEPaperLeak

उन्होंने दसवीं पेपर लीक मामले की जांच के संबंध में अभी कोई तथ्य बताने से इनकार करते हुए कहा कि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि कोर्ट से दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है, पुलिस दो दिन इनसे पूछताछ करेगी और मामले के तह तक जाने का प्रयास करेगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि तौकीर 26-27 साल का एक युवक है, जो कोचिंग में पढ़ाता है.

ऐसे लीक किया इकोनॉमिक्स का पेपर 

नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसइ पेपर लीक मामले में दो टीचर व एक कोचिंग सेंटर के मालिक सहित कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. न्यूज एजेंसी एएनआइ के अनुसार, दोनों शिक्षकों ने 9.15 बजे सुबह हाथ से लिखे प्रश्न पत्र की तसवीर उतारी थी और फिर उसे कोचिंग सेंटर के ट्यूटर को भेज दिया था. फिर कोचिंग सेंटर के ट्यूटर ने उसे स्टूडेंट्स को भेज दिया. कोचिंग ट्यूटर एनसीआर के बवाना का है, जबकि दोनों टीचर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. 26 मार्च को 12वीं इकोनॉमिक्स पेपर लीक की पूरी घटना परीक्षा शुुरू होने के समय 9.45 बजे के डेढ़ घंटे पहले तक में घटी. यह जानकारी दिल्ली पुलिस ने दी है. इन पर आरोप है कि उन्होंने 26 मार्च को परीक्षा के  पहले इकोनाॅमिक्स के पेपर को लीक किया. हालांकि पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया है वे दोनों टीचर किस स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार शनिवार रात मीडिया को जानकादी देते हुए.


उधर, क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार रात इस मामले में सीबीएसइ के मुख्यालय भी पहुंची थी. सूत्रों का कहना है कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स एवं 10वीं के मैथ्स पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम को कुछ अहम तथ्यों की जानकारी हाथ लगी है. पुलिस ने अबतक इस मामले में 60 लोगों से पूछताछ की है. इसमें वे दस वाट्सएप ग्रुप के संचालक भी शामिल हैं, जिनके ग्रुप में प्रश्न वायरल किया गया था.

दिल्ली के प्रीत विहार स्थित सीबीएसइ मुख्यालय पहुंची पुलिस. 

इस पूरे मामले में पुलिस को उस विह्सलब्लोअर की भी जानकारी मिली है, जिन्होंने मेल के जरिये सीबीएसइ प्रमुख को गणित के प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी थी. पुलिस ने उस शख्स का पता लगाने के लिए गूगल की मदद मांगी थी, क्योंकि उस व्यक्ति ने जीमेल से मेल भेजा था.

ध्यान रहे कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को ली जाएगी.

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पेपर लीक: 12वीं की अर्थशास्‍त्र की परीक्षा का एलान हुआ

एजुकेशन सेक्रटरी अनिल स्‍वरूप ने बताया कि कक्षा 12वीं के इकनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को होगी। कक्षा 10वीं के गणित के पेपर की दोबारा परीक्षा की तारीखों का एलान 15 दिन में होगा। उन्‍होंने यहां साफ किया कि 10वीं के गणित की दोबारा परीक्षा केवल दिल्ली और हरियाणा में होगी, वो भी तब, जब जांच के बाद जरूरत महसूस की जाएगी। अगर 10वीं के गणित की परीक्षा दोबारा कराने की जरूरत महसूस होती है, तो वो जुलाई में कराई जा सकती है।

अनिल स्‍वरूप ने कहा कि कक्षा 12वीं के छात्रों ने कई विश्‍वविद्यालयों और संस्‍थानों में कोर्सों के लिए आवेदन कर रखे हैं। इसलिए उनकी परीक्षा जल्‍द कराना बेहद जरूरी है। हम इन छात्रों का समय ना बर्बाद करते हुए 25 अप्रैल को अर्थशास्‍त्र के पेपर की परीक्षा करा रहे हैं। हमें छात्रों के हितों की चिंता, छात्रों को दिक्कत ना हो, इसलिए हम काम कर रहे हैं। 10वीं की परीक्षा की तारीख के बारे में फैसला अभी नहीं लिया गया है, क्‍योंकि जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। हालांकि कक्षा 10वीं की दोबारा परीक्षा की तारीखों का एलान 15 दिन में कर दिया जाएगा। लेकिन अगर दोबारा परीक्षा का निर्णय लिया जाता है, तो सिर्फ दिल्ली और हरियाणा में परीक्षा होगी, अन्‍य किसी राज्‍य में नहीं। 10वीं के गणित की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय अगर लिया जाता है, तो परीक्षा जुलाई माह में होगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं के गणित व 12वीं के अर्थशास्त्र के पेपर लीक होने के मामले चारों ओर से विरोध प्रदर्शन का सामना कर रहा है। कई शहरों में पेपर लीक मामले को लेकर सीबीएसई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इधर कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले में मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है।

सीबीएसई पेपर लीक के खिलाफ लुधियाना, कानुपर और दिल्‍ली में छात्र और अभिभावक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन छात्रों ने चेयरमैन के इस्तीफे की मांग के साथ कहा है कि सीबीएसई की गलती की सजा सभी छात्रों को नहीं मिलनी चाहिए। कुछ छात्रों का कहना है कि जिस राज्‍य में पेपर लीक हुआ, वहीं पर फिर से परीक्षा होनी चाहिए। लगभग सभी छात्र पेपर लीक के लिए सीबीएसई को जिम्‍मेदार ठहरा रहे हैं। कुछ छात्र केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के घर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। इसके बाद दिल्ली में प्रकाश जावड़ेकर के घर के पास धारा 144 लागू कर दी गई है।

शुक्रवार को सुबह कांग्रेस पार्टी का स्टूडेंट्स विंग एनएसयूआइ भी छात्रों के साथ मार्च में शामिल हुआ। कांग्रेस पार्टी सरकार पर और ज्यादा हमलावर हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री ने एग्जाम वॉरियर्स किताब लिखी, जो परीक्षा के दौरान छात्रों का तनाव दूर करने के लिए है। अब उन्हें एग्जाम वॉरियर्स 2 लिखनी चाहिए, जिसे पेपर्स लीक होने के कारण तबाह हुई स्टूडेंट्स और पैरंट्स की जिंदगियों के बाद उनके तनाव को दूर करने के लिए पढ़ाया जाए।’

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह एचआरडी मिनिस्ट्री की विफलता है, 28 लाख स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर है। हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। वहीं कपिल सिब्‍बल ने कहा कि सीबीएसई पेपर लीक अकेला पेपर लीक का मामला नहीं है। एसएससी पेपर घोटाला भी बड़ी चिंता का विषय है। अगर इसके लिए सरकार की जवाबदेही नहीं है, तो फिर किसकी है।

कांग्रेस के साथ इस मुद्दे पर राज ठाकरे ने भी सरकार को घेरा। उन्‍होंने कहा कि यह सरकार की असफलता है, इस बात को स्‍वीकार करने के बजाय क्‍यों वे चाहते हैं कि छात्र फिर से एग्‍जाम दें। मेरी अभिभावकों से अपील है कि अपने बच्‍चों को फिर से एग्‍जाम देने के लिए ना भेजें।

वैसे बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 10 से ज्यादा वॉट्सऐप ग्रुप्स की पहचान की, इनमें से हर ग्रुप में 50-60 सदस्य हैं। इन लोगों से जांच और पूछताछ जारी है। इससे पहले क्राइम ब्रांच की एसआइटी ने गुरुवार को 18 छात्र समेत कुल 34 लोगों से पूछताछ की। इनमें 11 विभिन्न स्कूलों के छात्र, सात विभिन्न कॉलेजों के छात्र, पांच ट्यूटर व दो अन्य लोग शामिल हैं। ट्यूटर में एक महिला भी शामिल है, जिसका लाजपत नगर में कोचिंग सेंटर है।

एसआइटी ने बुधवार रात दिल्ली-एनसीआर में करीब 10 जगहों पर छापेमारी की। जिन 34 लोगों से पूछताछ की गई है उन्होंने कबूल किया कि 10वीं के गणित व 12वीं के अर्थशास्त्र के पेपर, परीक्षा शुरू होने से 24 घंटे पहले लीक हो गए थे। असली पेपर देखकर पहले हाथ से सादे कागजों पर प्रश्नों को लिखा गया, फिर उसकी तस्वीरें वाट्सएप के जरिये बांटी गईं। 24 घंटे पहले पेपर मिलने से छात्र-छात्राओं को प्रश्नों की तैयारी करने का काफी समय मिल गया।

विशेष आयुक्त क्राइम ब्रांच आरपी उपाध्याय के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर उनसे फिर पूछताछ की जाएगी। पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल नंबर व अन्य जरूरी जानकारियां ले ली गई हैं। बता दें कि सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक की शिकायत पर दो मुकदमे दर्ज करने के बाद एसआइटी ने बुधवार रात से ही जांच शुरू कर दी थी और पेपर लीक से जुड़े सुबूत आरोपित कहीं मिटा न दें, इसलिए गुरुवार सुबह होते ही एसआइटी ने कार्रवाई तेज कर दी। सीबीएसई ने एक एफआइआर 27 मार्च व दूसरी 28 मार्च को दर्ज कराई थी। एसआइटी पता लगा रही है कि छात्र-छात्राओं के वाट्सएप पर किसने प्रश्नपत्र भेजे थे। साथ ही मुख्य आरोपित व उसके स्त्रोत के बारे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पूछताछ में कुछ छात्रों ने दोस्तों के जरिये पेपर मिलने की बात कही है। पेपर लीक के संभावित ठिकानों की पहचान की गई है, उनमें से कुछ जगहों की सीसीटीवी फुटेज भी जब्त की गई है।

एसआइटी में शामिल अधिकारी का कहना है कि सीबीएसई ने लिखित शिकायत में ओल्ड राजेंद्र नगर में पिछले दस सालों से कोचिंग सेंटर चलाने वाले विक्की पर शक जताया था। लिहाजा उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वह विद्या कोचिंग सेंटर का मालिक है और सेंटर में 10वीं व 12वीं के छात्रों को गणित व अर्थशास्त्र पढ़ाता है। उसने 1996 में डीयू से बीकॉम किया है। विक्की के अलावा हिरासत में लिए गए अन्य लोगों व उनसे जब्त दस्तावेजों के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है। एसआइटी ने सीबीएसई से कई जानकारी मांगी है। मसलन, परीक्षा केंद्रों व छात्रों तक पेपर पहुंचाने का तरीका क्या है? सुरक्षा के लिए किस तरह की सावधानियां बरती जाती हैं? पेपर किन-किन प्रिटिंग प्रेस से छपवाए गए?

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Congress poster spotted in Cambridge Analytica CEO Nix’s London office

Though the Congress has denied it has any links with Cambridge Analytica, the company accused of stealing Facebook data to influence elections, a documentary released last year by journalist and tech blogger Jamie Bartlett throws up an image the Congress may have hard time to explain.

The Persuasion Machine, the last of the two-part documentary series for the BBC, ‘Secrets of the SIlicon Valley’, shows Bartlett meeting Cambridge Analytica’s now-suspended CEO Alexander Nix in his London office. As Bartlett enters Nix’s room, he stands up and greets him. Right behind Nix, on the wall, is a poster showing the ‘hand’ symbol of the Congress party. Below the hand is written “Congress” in bold letters. The poster carries the slogan ‘Development for all’.

Bartlett’s documentary probes the role of technology in the election campaign of US President Donald Trump. Nix is one of the many people he interviews. Though Nix says nothing about the operations of Cambridge Analytica in India and talks about only the Trump campaign, the Congress poster on the wall behind him looks like proud showcasing of a big client.

In ‘The Persuasion Machine’, Bartlett narrates how Silicon Valley has opened a new frontier—controlling political expression and behaviour of the masses. “It was the biggest political earthquake of the century. But just how did Donald Trump defy the predictions of political pundits and pollsters?” begins Bartlett.

BJP Minister Smriti Irani shares this picture from her official Twitter handle and disclose this important news with mentioning economictimes article.

After Nix explains how the company created psychographic profiles of voters, Bartlett asks, “Where did all the information to predict voters’ personalities come from?” Nix says,”Very originally, we used a combination of telephone surveys and then we used a number of online platforms for gathering questions. As we started to gather more data, we started to look at other platforms such as Facebook, for instance.”

When Bartlett wonders if some people would find it a little bit creepy to predict a voter’s personality to persuade him, Nix says, “No, I can’t. Quite the opposite. I think that the move away from blanket advertising, the move towards ever more personalised communication is a very natural progression. I think it is only going to increase.”

Justifying the company using personal data people put in the public domain, Nix gives the example of a supermarket loyalty card where people get points and the company gathers the data on consumer behaviour. But Bartlett is puzzled. “I mean, we are talking about politics and we’re talking about shopping. Are they really the same thing?” he asks. Nix replies, “The technology is the same. In the next 10 years, the sheer volumes of data that are going to be available, that are going to be driving all sorts of things including marketing and communications, is going to be a paradigm shift from where we are now and it’s going to be a revolution, and that is the way the world is moving. And, you know, I think, whether you like it or not, it is an inevitable fact.”

For more than a week, the Congress and the Bharatiya Janata Party (BJP) have traded charges, accusing each other of having been clients of Cambridge Analytica. Christopher Wylie, the Cambridge Analytica whistleblowerat the heart of the Facebook privacy scandal, told British lawmakers yesterday that he “believes” Congress was the company’s client.

The Congress denies it has anything to do with Cambridge Analytica. However, Alexander Nix was not shy of displaying the Congress poster in his own office.

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CBSE Exams 2018: हफ्ते भर में आएंगी गणित और इकोनॉमिक्स के पेपर की नई तारीखें

पेपर लीक की खबरें आने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के गणित और 12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर को रद्द कर दिया है। 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर 26 मार्च को आयोजित हुआ था और 10वीं का गणित का पेपर 28 मार्च को। इन दोनों पेपरों का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर लीक होने की खबरें आई थीं।

यहां जानिए इस मामले से जुड़ी 10 खास बातें

1. 10वीं की गणित और 12वीं की इकोनॉकिक्‍स की परीक्षा रद्द करने के साथ ही बोर्ड ने यह भी ऐलान किया है कि दोनों पेपरों की नई तारीखों का ऐलान एक हफ्ते के भीतर कर दिया जाएगा।

2. 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर होने के बाद ऐसी खबरें आई थीं कि ये व्हाट्सएप पर लीक हुआ है। कहा जा रहा था कि जो पेपर सोशल मीडिया पर घूम रहा था वह असल इकोनॉमिक्स के पेपर से हूबहू मिल रहा था।

3. तब इन खबरों को सीबीएसई ने सिरे से खारिज कर दिया था। बोर्ड का कहना था किसी भी सेंटर में पेपर लीक नहीं हुआ है। सोशल मीडिया में चल रही खबर अफवाह है।

4. 28 मार्च को जब 10वीं का मैथ्स का पेपर हुआ तब भी इसके लीक होने की खबरें आईं।

5. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के कई पेपर इस बार विवादों में आए हैं। इससे पहले अकाउंटेंसी का पेपर लीक होने की खबरें आई थीं। अकाउंटेंसी के पेपर की लीक होने के आरोपों के बाद दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने संबंधित अधिकारियों से आरोपों की जांच के लिए कहा था।

6. इससे पहले सीबीएसई इकोनॉमिक्स, अकाउंटेंसी के पेपर होने की खबरों को सिरे से खारिज करती आई हैं। सीबीएसई ने इन खबरों को हमेशा अफवाह करार दिया।

7. 26 मार्च को इकोनॉमिक्स के पेपर लीक होने की खबरों को लेकर सीबीएसई ने कहा था कि सभी सेंटरों से बात की गई है। किसी सेंटर से पेपर लीक होने की खबर नहीं मिली है। ऐसे में यह कोरी अफवाहें हैं।

8. सीबीएसई 10वीं का इंग्लिश का पेपर भी सुर्खियों में आया था। काफी विद्यार्थियों और टीचरों ने कॉम्प्रिहेंशन पैसेज के प्रश्न को सही नहीं बताया था। इसके बाद एक खबर वायरल हुई थी कि सीबीएसई उस कथित गलत सवाल के बदले में दो मार्क्स देगा। लेकिन फिर बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि उसने फिलहाल इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है।

9. 10वीं का मैथ्स और 12वीं का इकोनॉमिक्स का पेपर रद्द होने से काफी स्टूडेंट्स और पेरेंट्स नाराज हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक होना ईमानदारी से मेहनत करके परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अब परीक्षा दोबारा होगी जिससे उन पर फिर से दवाब बनेगा। वह तनाव में रहेंगे।

28 मार्च को पेपर होने के बाद अधिकांश विद्यार्थियों और टीचरों ने कहा कि पेपर आसान और स्कोरिंग था। प्रश्न सिलेबस के मुताबिक ही थे। एनसीईआरटी की किताबों से ही था।

10. इस साल 5 मार्च से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं शुरू हुई थीं। इन परीक्षाओं में देशभर से 28 लाख, 24 हजार, 734 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। सीबीएसई के मुताबिक इस साल 10वीं की परीक्षा में 16 लाख, 38 हजार, 428 और 12वीं की परीक्षा में 11 लाख, 86 हजार, 306 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे।

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डेटा लीक: भारत-ब्राजील में चुनाव को देखते हुए अपने सिक्युरिटी फीचर्स में इजाफा करेगा फेसबुक: जुकरबर्ग

डाटा लीक मामला सामने आने के बाद फेसबुक अब भारत-ब्राजील में आगामी चुनावों के मद्देनजर सिक्युरिटी फीचर्स को और सख्त करने जा रहा है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने गुरुवार को इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए फेसबुक के सिक्युरिटी फीचर्स में और इजाफा किया जाएगा। इससे पहले जुकरबर्ग ने कहा था कि यूजर्स की डाटा सीक्रेसी को लेकर मेरी कंपनी ने गलती की है। किसी के पर्सनल डाटा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया ने दावा किया है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा का यूएस इलेक्शन में गलत इस्तेमाल किया था।

आर्टीफिशियल टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है फेसबुक
– जुकरबर्ग ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि इलेक्शन के दौरान न्यूज में हेरफेर (मैनुपुलेट) करने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले फेक अकाउंट का पता लगाने के लिए फेसबुक आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। ये टूल पहली बार फ्रेंच इलेक्शन में इस्तेमाल किए गए थे।

– “इन नए टूल्स को 2016 में 30,000 से ज्यादा फेक अकाउंट मिलने के बाद बनाया गया था। हमारा मानना है कि इन सभी का रशियन कनेक्शन था। इन्होंने उसी तरह की टैक्टिक्स अपनाने की कोशिश की थी, जो 2016 इलेक्शन में यूएस में अपनाई गई थींं। हम इन्हें बंद करने में कामयाब रहे। उधर, फ्रांस इलेक्शन में ऐसा होने से हमने बड़े स्तर पर रोका भी।”

2017 में भी हमने ऐसा ही किया?
– “पिछले साल अलबामा के विशेष चुनाव के दौरान हमने कुछ नए एआई टूल्स फेक अकाउंट और झूठी खबरों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया था। हमें बड़ी तादाद में मैसेडोनियन अकाउंट्स भी मिले थे, जो झूठी खबरें फैलाने की कोशिश कर रहे थे। हमने इन्हें हटा दिया था।”

भारत में चुनाव हमारे लिए अहम
– बकौल जुकरबर्ग, “हम 2018 में अमेरिका में होने वाले चुनावों पर ही नजर नहीं रख रहे। भारत समेत अन्य जगहों पर भी इस साल होने वाले आम चुनाव हमारे लिए अहमियत रखते हैं। रूस जैसे देशों के दखल को रोकने के लिए फेसबुक को कड़ी मशक्कत करनी होगी। हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि फेक न्यूज न फैलाई जाए। ये साल काफी अहम है। ब्राजील में भी चुनाव होने हैं। दुनियाभर में कई जगह इलेक्शन हैं। हम हर चीज के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भरोसा दिलाते हैं कि फेसबुक की सुरक्षा कायम रहेगी ताकि चुनावों की विश्वसनीयता बनी रहे।”
– सीएनएन को दिए इंटरव्यू में जुकरबर्ग ने आशंका जताई थी कि कोई 2018 में अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन में दखलअंदाजी कर सकता है।

जुकरबर्ग ने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा?

– “मैंने फेसबुक शुरू किया था। इस प्लेटफॉर्म पर जो होता है, उसके लिए अंत में मैं ही जिम्मेदार हूं। डाटा लीक रोकने के लिए मैं काफी गंभीर हूं। अपने यूजर्स का डाटा लीक होने से रोकने के लिए फेसबुक ही जिम्मेदार है। लेकिन हम इसमें नाकाम रहे। हम आपको सेवाएं देने के लिए लायक नहीं हैं। अब हमारी कंपनी को बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमने गलती की है। हम जरूरी कदम उठाएंगे। और हम ऐसा कर रहे हैं।”

5 प्वाइंट में समझिए क्या हैं ये मामला?

2016: ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव जीतने से शुरुआत
– आरोप लगा कि ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जिताने के लिए रूसी दखल था। हिलेरी की रणनीतियां हैक करके ट्रम्प को भेजी गईं। सोशल मीडिया डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ। एफबीआई ने रूस के 13 लोगों और तीन कंपनियों पर आरोप तय किए हैं।

17 मार्च 2018: अमेरिकी-ब्रिटिश मीडिया में खुलासा
– गार्डियन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापा कि ट्रम्प के कैंपेन से जुड़ी ब्रिटिश फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने 2014 में 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हासिल किया था। फेसबुक को इसका पता था, पर यूजर्स को सतर्क नहीं किया गया।

18 मार्च 2018: वादा नहीं निभाया एनालिटिका ने
– फेसबुक ने एनालिटिका को अपने प्लेटफॉर्म से सस्पेंड कर दिया। साथ ही सफाई दी कि 2015 में ही उसका एप बैन कर दिया था। एनालिटिका ने सारा डेटा डिलिट करने का भरोसा दिया था, पर अब पता चला कि उसने ऐसा नहीं किया।

19 मार्च 2018: सीईओ का स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा
– ब्रिटिश चैनल 4 ने एनालिटिका के सीईओ एलेग्जेंडर निक्स का स्टिंग किया। उन्होंने माना कि क्लाइंट को जिताने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं। डेटा पर काम करने के चलते ट्रम्प को बड़ी जीत हासिल हुई।

आखिर डेटा का गलत इस्तेमाल होता कैसे है…
– एनालिटिका के सीईओ ने बताया कि कंपनी फेसबुक यूजर्स के साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के साथ अपने क्लाइंट के समर्थन में और विरोधी के खिलाफ सूचनाएं प्लांट करती है। इससे जनमत बदलता है।

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अगर फ़ेसबुक बंद हो गया तो क्या होगा?

दिन हो या रात, ऑफ़िस का डेस्कटॉप हो या हाथों में समाने वाला स्मार्टफ़ोन, फ़ेसबुक वो दुनिया है जो हमारी दुनिया का अब अहम हिस्सा है.

घर-परिवार की तस्वीरें हों या फिर ऑफ़िस से जुड़ी कोई अच्छी-बुरी ख़बर, अब निजी ज़िंदगी की ख़बरें फ़ेसबुक पर ब्रेक होती हैं.

इस ख़बर को पढ़ने वाले ज़्यादातर लोग ऐसा करते होंगे, इसलिए फ़ेसबुक से जुड़ी हालिया घटना और उसके संभावित नतीजे के बारे में आपको ज़रूर ख़बर होनी चाहिए.

दरअसल, फ़ेसबुक से जुड़ी एक ख़बर ने दुनिया के होश उड़ा दिए हैं. सुनने में ये कहानी बड़ी जटिल है. लेकिन जितनी जटिल है, उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल सामने ला सकती है.

फ़ेसबुक फंसा कैसे?

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रिसर्च फ़र्म कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप लगा है कि उसने 5 करोड़ फ़ेसबुक यूज़र से जुड़ी जानकारी का ग़लत इस्तेमाल किया है.

ये बहस एक बार फिर शुरू हो गई है कि सोशल नेटवर्क पर लोगों से जुड़ी जानकारी कैसे और किसके साथ साझा की जाती है और फ़ेसबुक के लिए ये सारी जानकारी या कहें डेटा, कमाई का मुख्य स्रोत है क्योंकि यही विज्ञापन देने वाली कंपनियों को उसके पास खींच लाती हैं और उसे कमाई कराती हैं.

लेकिन कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ी घटना ने फ़ेसबुक को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतने कि सोशल मीडिया में फ़ेसबुक डिलीट करने से जुड़ा हैशटैग #deletefacebook भी वायरल बना दिया है.

फ़ेसबुक डिलीट करने की सलाह

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वॉट्सऐप के को-फ़ाउंडर ब्रायन एक्टन ने टि्वटर पर ये सलाह दी है. फ़ेसबुक ने कुछ साल पहले 16 अरब डॉलर या 1 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा में वॉट्सऐप ख़रीदा था.

ये बात तो हुई ख़ुद फ़ेसबुक डिलीट करने की सलाह की, लेकिन क्या साल 2017 की अंतिम तिमाही में 2.2 अरब मासिक एक्टिव यूज़र रखने वाला फ़ेसबुक बंद भी हो सकता है? और अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा? समाज में इसकी वजह से कितना बड़ा बदलाव आएगा?

फ़ेसबुक के आकार को देखकर आज ऐसा लग सकता है कि ये मुमकिन नहीं है. लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में चीज़ें इतनी तेज़ी से बदलती हैं कि आज नामुमकिन-सी लगने वाली बात कल को सामान्य लग सकती है.

सीएनएन के मुताबिक ज़्यादा दिन नहीं बीते जब चुनिंदा इंटरनेट कंपनियों ने मिलकर पूरी दुनिया बदल दी थी. फ़ेसबुक ने पारंपरिक मीडिया को बदलकर रख दिया. उबर, नेटफ़्लिक्स और एयरबीएनबी जैसी चीज़ों ने टैक्सी, मूवी थियेटर और होटलों की जगह ले ली है.

क्या ज़रूरत से ज़्यादा बड़ा हुआ FB

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लेकिन कभी क्रांतिकारी दिखने वाली ये अपस्टार्ट कंपनियां अब ताक़तवर दिखने लगी हैं और वे अब हमारे बारे में काफ़ी कुछ जानती हैं और लोगों को इससे परेशानी हो रही है.

यही वजह है कि अब हमें ब्लॉकचेन शब्द बार-बार सुनाई दे रहा है. दूसरी चीज़ों के अलावा ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी वो हथियार है जो फ़ेसबुक की ताक़त ख़त्म कर सकता है. बिटकॉइन में इसकी झलक मिलती है.

बिना बैंक और सरकार की मदद के डिजिटल मनी पूरी दुनिया में फैल रहा है. दूसरे शब्दों में कहें तो ब्लॉकचेन मध्यस्थों को हटाता है और ये टेक्नोलॉजी कई इंडस्ट्री की मदद कर सकती है.

ब्लॉकगीक के मुताबिक डिजिटल इंफ़ॉर्मेशन को कॉपी नहीं बल्कि डिस्ट्रीब्यूट करने का ज़रिया देने वाली ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी नए तरह के इंटरनेट की रीढ़ है. इसे शुरुआत में बिटकॉइन के लिए बनाया गया था लेकिन आगे चलकर ये फ़ॉर्मूला दूसरे लोगों के भी काम आ सकता है.

ब्लॉकचेन से फ़ायदा क्या?

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ब्लॉकचेन होने से कई लोग रिकॉर्ड इंफॉर्मेशन में कई सारी एंट्री डाल सकते हैं और यूज़र मिलकर (कम्युनिटी) इस बात का कंट्रोल अपने हाथ में रख सकते हैं कि इस रिकॉर्ड को कैसे इस्तेमाल करना है, बदलाव और अपडेट कैसे करना है.

कॉइनडेस्क के अनुसार इसे सबसे आसान तरीके से समझने के लिए विकीपीडिया का उदाहरण है. इस वेबसाइट पर कोई भी एक पब्लिशर मौजूद जानकारी पर अधिकार नहीं रखता.

हालांकि, ये दोनों ही डिस्ट्रीब्यूटेड नेटवर्क पर चलते हैं, लेकिन विकीपीडिया वर्ल्ड वाइड वेब पर बिल्ट किया गया है जिसमें क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है.

एकाउंट से ज़रिए मिलने वाली परमिशन के साथ कोई क्लाइंट या यूज़र सेंट्रलाइज़्ड सर्वर पर रखी विकीपीडिया की जानकारी बदल सकता है.

विकीपीडिया से समझें

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जब कोई यूज़र विकीपीडिया पेज पर जाता है तो उन्हें विकीपीडिया एंट्री की मास्टर कॉपी का अपडेटेड वर्ज़न मिलता है.

लेकिन डेटाबेस का कंट्रोल विकीपीडिया एडमिनिस्ट्रेटर के पास रहता है, जो ऐक्सेस और परमिशन देने से जुड़ी बातों का फ़ैसला सेंट्रल अथॉरिटी के खाते में रखते हैं.

अब फ़र्ज़ कीजिए कि फ़ेसबुक जैसी कोई साइट ऐसी ही बने जिस पर मौजूद डेटा का कंट्रोल किसी कंपनी नहीं बल्कि सभी के पास या कम्युनिटी के पास रहे तो कैसा होगा?

विकीपीडिया का डिजिटल आधार भी उन्हीं सुरक्षित और सेंट्रलाइज़्ड डेटाबेस की तरह है जो आम तौर पर सरकारें या बैंक या बीमा कंपनियां रखती हैं. इनका कंट्रोल भी सबसे ऊपर वाले लोगों के पास रहता है.

कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी?

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कंट्रोल में अपडेट, एक्सेस और साइबर हमलों से बचने के तौर-तरीके भी शामिल हैं. लेकिन ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में बुनियादी रूप से अलग डिजिटल आधार होता है. ये इस टेक्नोलॉजी का सबसे ख़ास और अलग फ़ीचर भी है.

विकीपीडिया की मास्टर कॉपी सर्वर पर एडिट होती है और सभी यूज़र को नया वर्ज़न दिखता है.

ब्लॉकचेन के मामले में नेटवर्क में मौजूद हर नोड एक ही निष्कर्ष तक पहुंचता है और उनमें से हरेक स्वतंत्र रूप से रिकॉर्ड को अपडेट करते हैं.

इसके बात जो सबसे ज़्यादा लोकप्रिय रिकॉर्ड होता है, वो मास्टर कॉपी की जगह आधिकारिक रिकॉर्ड माना जाता है. लेकिन फ़ेसबुक के बदलने या ऐसा कोई नया विकल्प आने में अभी वक़्त है.

जब तक फ़ेसबुक पर हैं, बचे रहें

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  • फ़ेसबुक पर लॉगइन करें और ऐप सेटिंग पेज पर जाएं
  • ऐप्स, वेबसाइट एंड प्लगइन के तहत एडिट बटन को क्लिक करें
  • प्लेटफ़ॉर्म को डिसएबल करें

इसका ये मतलब हुआ कि आपको फ़ेसबुक पर थर्ड-पार्टी साइट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे और अगर आपको इतना करना भी ज़्यादा लगता है तो ऐप इस्तेमाल करने के बावजूद पर्सनल इंफॉर्मेशन तक पहुंच सीमित बनाई जा सकती है.

  • फ़ेसबुक के ऐप सेटिंग पेज पर लॉगइन करें
  • हर वो कैटेगरी को अनक्लिक करें जिस तक आप किसी को पहुंचने नहीं देना चाहते. इनमें बायो, बर्थडे, फ़ैमिली, रेलीजियस व्यूज़ शामिल हैं.
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फेसबुक को डेटा लीक मामले से लगा तगड़ा झटका, 35 अरब डॉलर का नुकसान

फेसबुक में डेटा लीक का मामला सामने आने से पूरी दुनिया हैरान है. करोड़ों यूजर्स के

डेटा लीक मामले में फेसबुक को भी तगड़ा झटका लगा है।

सोमवार को इस अमेरिकी सोशल मीडिया के शेयर करीब 7 फीसदी टूट गए और कंपनी के मार्केट वैल्यू में करीब 35 अरब डॉलर तक की गिरावट आ गई।

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की मदद करने वाली एक फर्म ‘कैम्ब्रिज एनालिटिका’ पर लगभग 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के निजी जानकारी चुराने के आरोप लगे हैं।

इस जानकारी को चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया गया है। खबर आने पर अमेरिकी और यूरोपीय सांसदों ने

फेसबुक इंक से जवाब मांगा। वे जानना चाहते हैं कि ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका ने डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका में

राष्ट्रपति चुनाव जीतने में किस तरह से मदद की? इस खबर के बाद फेसबुक के शेयर सोमवार को 7% टूट गए।

शेयर की कीमत घटने की वजह से फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्क को ही एक दिन में 6.06 अरब डॉलर (करीब 395 अरब रुपये)

का झटका लग चुका है। फेसबुक पहले ही यह बता चुका है कि 2016 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले उसके प्लेटफॉर्म का,

प्रचार-प्रसार करने वाले रूसी लोगों ने कैसे इस्तेमाल किया था, लेकिन इसे लेकर जकरबर्ग कभी सवालों के घेरे में नहीं आए थे।

इस मामले से सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सख्त रेग्युलेशन का दबाव भी बन सकता है। ब्रिटेन के एक सांसद ने सोमवार को कहा कि देश के प्राइवेसी वॉचडॉग को अधिक ताकत मिलनी चाहिए।