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स्वदेशी लाइसेंस से इन 8 देशों में चला सकते हैं गाड़ी!

कई देशों में दूसरे देशों के लाइसेंस को कुछ समय तक वैध माना जाता है. आइए जानते हैं भारत के ड्राइविंग लाइसेंस से आप कहां-कहां गाड़ी चला सकते हैं.

अमेरिका- अमेरिका में भारतीय लाइंसेस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं. हालांकि इसके साथ ही आपके पास I-94 फॉर्म होना आवश्यक है, जिससे पता चलता है कि आपको अमेरिका में आए कितने दिन हुए हैं.

ग्रेट ब्रिटेन- ग्रेट ब्रिटेन (इंग्लैंड, सकॉटलैंड) में विदेशी अपने देश के लाइसेंस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया- ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड, साउथ ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरीटरी में भारतीय लाइंसेस के साथ गाड़ी चला सकते हैं.

जर्मनी- भारत से जर्मनी घूमने आए लोग यहां 6 महीने तक इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए गाड़ी चला सकते हैं. यहां इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की जरुरत नहीं पड़ती.

साउथ अफ्रीका- साउथ अफ्रीका में गाड़ी चलाने के लिए आपका ड्राइविंग लाइसेंस वैध और अंग्रेजी में होना चाहिए. साथ ही आपके लाइसेंस पर आपकी फोटो और सिग्नेचर होना जरुरी है. अगर आपके लाइसेंस में ऐसा है तो आप वहां गाड़ी चला सकते हैं.

स्विट्ज़रलैंड- यहां भी आप एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

नॉर्वे- मिडनाइट सन की भूमि कहे जाने वाले इस देश में गाड़ियां सड़क के दाईं तरफ चलायीं जाती हैं. यहां आप इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस पर सिर्फ 3 महीने ही गाड़ी चला सकते हैं, इसके साथ ही लाइसेंस का अंग्रेजी में होना भी जरूरी है.

न्यूजीलैंड- यहां गाड़ी चलाने के लिए 21 साल का होना जरुरी है. इसके अलावा आपका लाइसेंस अंग्रेजी में होना चाहिए.

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अब ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करना होगा जरूरी, सरकार ने शुरू की तैयारी

केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस को आधार नंबर से जोड़ने की प्रक्रिया में जुटी है। इससे जाली लाइसेंस बनवाना खत्म हो जाएगा। इसके लिए सभी राज्यों को कवर करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। सड़क सुरक्षा पर अदालत द्वारा नियुक्त समिति ने बुधवार को जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ को सूचित किया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज केएस राधाकृष्णन इस समिति के अध्यक्ष हैं।

आधार योजना और इसका समर्थन करने वाले 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। ऐसे समय में समिति द्वारा दी गई सूचना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शीर्ष अदालत में सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि उसने पिछले वर्ष 28 नवंबर को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव के साथ बैठक की थी। इस बैठक में फर्जी लाइसेंस लेने और इसे खत्म करने सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्जी लाइसेंस के मुद्दे पर मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने सूचित किया कि एनआईसी (नेशनल इन्फार्मेशन सेंटर) अब सारथी-4 तैयार कर रहा है। इसके तहत सभी लाइसेंस आधार से जु़ड़े होंगे। यह सॉफ्टवेयर सभी राज्यों को कवर करेगा। इससे किसी के लिए देश में कहीं भी डुप्लीकेट या फर्जी लाइसेंस लेना संभव नहीं होगा।

हाल ही में खबर आ रही थी कि आधार से निजी जानकारी चोरी होने का खतरा है, लेकिन सरकार ने इस खबर को सिरे से नकार दिया है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि  आधार डेटा पर किसी तरह का खतरा नहीं है और देश की एक बड़ी जनता इस योजना पर विश्वास करती है कि ये पूरी तरह से सुरक्षित है।। आधार को गेम चेंजर बताते हुए रविशंकर ने कहा कि देश की 120 करोड़ जनता के पास आधार है और 57 करोड़ बैंक अकाउंट इससे लिंक है जिससे देश में 57,000 करोड़ की बचत हुई है।

बता दें कि हाल ही में खाद्य सुरक्षा योजना के सभी लाभुकों के आधार सीडिंग 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से पूरा करने का निर्देश दिया गया था। यदि लाभुकों की आधार सीडिंग नहीं हुई तो केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आवंटित खाद्यान्न को रोक सकती है।

गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी कंपनी LIC ने भी आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। अब एलआईसी की नई पॉलिसी लेने या किसी बीमा की रकम लेने के लिए आधार कार्ड देना होगा। अब पॉर्टल पर आधार नंबर डाले बिना बीमा खरीदने जैसे काम नहीं किए जा सकते हैं। यहां तक की अपनी पुरानी पॉलिसी को एक्सेस करने के लिए भी आधार नंबर की जरूरत पड़ेगी। अगर पॉलिसी धारक ने अपना आधार नंबर अपडेट नहीं कर रखा है तो वह अपनी पॉलिसी को ऑनलाइ चैक नहीं कर सकता इसके अलावा पेमेंट हिस्ट्री को भी एक्सेसे नहीं कर सकता है।

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जीवित बच्चे को मृत घोषित करने वाले मैक्स हॉस्पिटल का दिल्ली सरकार ने लाइसेंस रद्द किया

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल के खिलाफ केजरीवाल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है. जीवित बच्चे को मृत घोषित करने और सील करके परिजनों को सौंपने के मामले में दिल्ली सरकार ने मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि हमने हॉस्पिटल को आपराधिक लापरवाही बरतने का दोषी पाया है. हॉस्पिटल की यह पहली गलती नहीं है. ऐसा करना उसकी आदत में शुमार हो चुका है. लिहाजा मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. उन्होंने कहा कि नवजात शिशु की मौत मामले में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है.

सत्येंद्र जैन ने कहा कि जो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उनका उपचार जारी रखा जा सकता है, लेकिन नए मरीजों की भर्ती नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि मरीज अगर चाहें, तो दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि सरकार ने जिस जांच के आदेश दिए थे, उसकी अंतिम रिपोर्ट शुक्रवार को मिल गई और उसके बाद यह निर्णय लिया गया.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पिछले महीने उन्होंने मैक्स शालीमार अस्पताल को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के तहत मरीजों के उपचार में समस्याओं के लिए नोटिस जारी किया था. उन्होंने कहा कि इसके अस्पताल खास अवधि के लिए आवंटित अतिरिक्त बेड का उपयोग जारी रखे हुए था, जबकि उसके उपयोग की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी.

दरअसल, 30 नवंबर को दिल्ली के शालीमार बाग स्थित MAX हॉस्पिटल ने जीवित बच्चो को मृत घोषित कर दिया था और शव को प्लास्टिक के थैले में भरकर परिजनों को दे दिया था. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की थी और मामला मेडिकल की लीगल सेल को फॉरवर्ड कर दिया था. इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में जमकर हंगामा किया. मैक्स हॉस्पिटल ने वहीं बयान जारी कर कहा है कि वह बच्चे के परिजनों से अस्पताल लगातार संपर्क में है.

मैक्स हॉस्पिटल ने कहा है, “दोनों बच्चों का जन्म 30 नवंबर 2017 को हुआ था. डिलीवरी के वक्त बच्चों की उम्र 22 सप्ताह थी. हम इस दुर्लभ घटना से सदमे में हैं. हमने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, बच्चे को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को तत्काल छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया है.”

क्या था मामला?

30 नवंबर को मैक्स हॉस्पिटल में एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. इनमें एक लड़का था और दूसरी लड़की. परिवार वालों ने बताया कि डिलीवरी के साथ ही बच्ची की मौत हो गई थी. डॉक्टरों ने दूसरे जीवित बचे बच्चे का इलाज शुरू कर दिया था, लेकिन एक घंटे बाद अस्पताल ने दूसरे बच्चे को भी मृत घोषित कर दिया था.

इसके बाद अस्पताल ने दोनों बच्चों की डेड बॉडी को प्लास्टिक में पैक करके परिजनों को सौंप दिया. दोनों बच्चों की डेड बॉडी लेकर परिजन लौट रहे थे. दोनों पार्सलों को महिला के पिता ने ले रखा था. रास्ते में उन्हें एक पार्सल में हलचल महसूस हुई. उन्होंने तुरंत उस पार्सल को फाड़ा, तो अंदर बच्चा जीवित मिला. इसके बाद उसको अग्रवाल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई.

फोर्टिस हॉस्पिटल में भी धांधली का मामला

मैक्स हॉस्पिटल के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में भी इलाज के दौरान धांधली का एक मामला सामने आया है. इसमें हॉस्पिटल ने सात साल की बच्ची के डेंगू के इलाज के लिए 15 लाख 59 हजार रुपये का बिल थमा दिया. इसमें बच्ची की मौत भी हो गई. इसके बाद मामले की जांच में हॉस्पिटल को दोषी पाया गया.

हरियाणा सरकार ने हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि मामले में राज्य सरकार फोर्टिस हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करेगी. हॉस्पिटल ने लामा प्रोटोकॉल नहीं माना और बच्ची के परिजनों से हर मामले में ज्यादा फीस वसूला.

विज ने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भी खत लिखकर फोर्टिस हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि यह एक तरीके की हत्या है. लिहाजा मामले में हरियाणा सरकार एफआईआर दर्ज कराने जा रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-A के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने लीगल विभाग को एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश भेजी है.