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फेक न्यूज पर लगाम कसने के लिए केंद्र ने जारी किए सख्त दिशानिर्देश

फेक न्‍यूज पर लगाम कसने के लिए केंद्र की ओर से पत्रकारों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं जिसके तहत ऐसी खबरों के प्रकाशन पर उनको सस्‍पेंड किया जा सकता है या उनकी प्रेस मान्‍यता रद कर दी जाएगी।

सोमवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि प्रिंट व टेलीविजन मीडिया के लिए दो रेगुलेटरी संस्‍थाएं- प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन (NBA), यह निश्‍चित करेगी कि खबर फेक है या नहीं। दोनों को यह जांच 15 दिन में पूरी करनी होगी। एक बार शिकायत दर्ज कर लिए जाने के बाद आरोपी पत्रकार की मान्यता जांच के दौरान भी निलंबित रहेगी।

दोनों एजेंसियों द्वारा फेक न्‍यूज की पुष्‍टि किए जाने के बाद पहली गलती पर छह माह के लिए मान्‍यता रद की जाएगी, दूसरी बार में एक साल के लिए मान्‍यता रद हो जाएगी लेकिन तीसरी बार में स्‍थायी रूप से पत्रकार की मान्‍यता खत्‍म कर दी जाएगी।

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2G स्पेक्ट्रम घोटाले ने ऐसे बदल दी देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री की सूरत

2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में गुरुवार को सीबीआई विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. इस मामले में फंसे सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. करीब 6 साल बाद इस मामले में फैसला आया है.

इन 6 सालों के दौरान टेलीकॉम सेक्टर भी काफी बदल चुका है. 2जी स्पेक्ट्रम ने टेलीकॉम सेक्टर को लेकर जहां सरकार को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर किया है वहीं, कॉरपोरेट्स ने भी अपनी रणनीत‍ि में भी बड़ा बदलाव किया है.

बदला स्पेक्ट्रम बेचने का तरीका

2-जी स्पेक्ट्रम से जुड़े इस घोटाले के सामने आने के बाद सरकार ने अपनी नीत‍ियों में बड़ा बदलाव किया और स्पेक्ट्रम बेचने का तरीका बदल दिया. अब स्पेक्ट्रम नीलामी के जरिये बेचे जाते हैं. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कई के टेलीकॉम लाइसेंस रद्द कर दिए थे. इसकी वजह से विदेशी टेलीकॉम कंपनियों ने भी भारत में अपना कारोबार शुरू करने से अपने हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया था.

बैंक लोन पर भी पड़ा असर

इस घोटाले का असर बैंकों की तरफ से टेलीकॉम कंपनियों को मिलने वाले लोन पर भी पड़ा. इसी साल की शुरुआत में भारतीय र‍िजर्व  बैंक ने टेलीकॉम सेक्टर को लेकर रेड फ्लैग जारी किया था.

उसने इस दौरान बैंकों से कहा था कि टेलीकॉम सेक्टर को लेकर अपने रुझान की समीक्षा करें. इसके अलावा सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समित‍ि का गठन भी किया है, जो टेलीकॉम सेक्टर का दबाव कम करने के लिए उपाय ढूंढ़ने में जुटी हुई है.

मर्जर की ओर बढ़ी कंपनियां

2012 में जब सु्प्रीम कोर्ट ने 18 ऑपरेटर्स का लाइसेंस कैंसल कर दिया गया था. वर्तमान में 11 ऑपरेटर्स देश में मोबाइल सर्विस मुहैया करते हैं. 2012 के बाद  से टेलीकॉम सेक्टर पर जिस तेजी से दबाव बढ़ा है. इसके साथ ही  रिलायंस जियो की एंट्री ने यह दबाव बढ़ा दिया है. इसकी वजह से मर्जर की नई बयार भी  इस सेक्टर में चल पड़ी है.

भारत में रह जाएंगे सिर्फ 5 प्रमुख प्लेयर

अगर प्रस्तावित मर्जर होता है, तो भारत में भी विकसित देशों की तरह ही 5 प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स रह जाएंगे. इसमें भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस जियो, बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसे प्रमुख प्लेयर हो सकते हैं.