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मालदीव में ‘महाभारत’ और भारत का धर्मसंकट

मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक गतिरोध के बीच 15 दिनों के आपातकाल की घोषणा की है.

देश के सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया था कि सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया जाए, राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के इसा आदेश को मानने से इंकार कर दिया था.

जब से सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया, तभी से मालदीव के राष्ट्रपति एक तरह से झिड़का हुआ महसूस कर रहे थे.

वे काफी समय से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और सत्ता की ताकत पूरी तरह से अपनी तरफ़ करने की कोशिशें कर रहे थे.

उन्होंने अपने विपक्षियों को जेल में डाल दिया था और फिर धीरे-धीरे सत्ता का केंद्रीकरण होने लगा था, ऐसे में उन्हें लग रहा था कि अब ताकत पूरी तरह उनके हाथों में है.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि उन्हें अपने फ़ैसले बदलने पड़ेंगे!

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सेना की भूमिका अहम

आपातकाल की घोषणा करने के बाद ऐसा लगता है कि वे अपना आखिरी दांव खेल रहे हैं और इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा चारा नहीं बचा था.

पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे तख्तापलट की तरह बताया है.

अबदुल्ला यमीन के पास दरअसल इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता बचा ही नहीं था.

अगर वे सत्ता दोबारा नशीद के हाथों में सौंप देते तो ज़ाहिर सी बात है कि उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही होती.

लेकिन अब ऐसा लगता है कि सेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है.

इसके साथ ही विपक्षी नेता किस तरह एकजुट होते हैं और उनका समर्थन कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर क्या कदम उठाते हैं, ये देखने वाली बात होगी.

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भारत की भूमिका

मालदीव के भीतर चल रही इस राजनीतिक उठापटक में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.

मौजूदा वक्त में नशीद और यमीन के बीच जब रस्साकशी चल रही थी तब भारत पीछे से अपनी भूमिका निभा रहा था.

कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की थी कि जब लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई नशीद सरकार को हटाया गया था तो उस समय भारत को खुलकर उनका समर्थन करना चाहिए था और लोकतांत्रिक ताकतों के बचाव के लिए भारत और अधिक मुखर होकर सामने आना चाहिए था.

लेकिन ये समझना चाहिए कि भारत के अपने भी कई हित हैं, जैसे भारत कभी भी ये नहीं चाहेगा कि मालदीव पूरी तरह चीन की तरफ चला जाए.

लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि भारत को अपना रुख स्पष्ट करना ही पड़ेगा हालांकि भारत के पास कई दूसरे रास्ते अभी मौजूद हैं.

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क्या चीन देगा यामीन का साथ?

आपातकाल लगाने के बाद अब अब्दुल्ला यामीन के पास कौन से रास्ते बाकी हैं. इस मसले मे अब ये देखना होगा कि बाहरी दबावों से वे किस तरह निपटते हैं.

यामीन ये भी सोच रहे होंगे कि उन्होंने चीन के साथ अपनी घनिष्टता बढ़ाई है तो चीन उनका पक्षधर बनेगा और जब पश्चिमी देशों और भारत की तरफ से उन पर दबाव बनाया जाएगा तब चीन उनका साथ देगा.

लेकिन शायद वो चीन की रणनीति को थोड़ा गलत समझ रहे हैं क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ जब सभी वैश्विक ताकतों के ख़िलाफ़ चीन अलग से किसी का अकेले समर्थन करने आया हो, इसलिए फिलहाल तो यामीन के पास बहुत कम विकल्प नजर आते हैं.

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बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर विजय आनंद को याद करें उनके 84वें जन्मदिवस के मौके पर

It is the 84th #BirthAnniversary of director Vijay Anand. Popularly known as Goldie Anand, his acclaimed movies included Teesri Manzil, Guide, Tere Mere Sapne and Jewel Thief. He was also known for the stylish picturisation of his songs – “O Haseena” -Teesri Manzil, “Kaaton Se Kheech” – Guide and “Honthon Mein Aisi Baat” – Jewel Thief.

विजय आनंद (२२ जनवरी १९३४ – २३ फ़रवरी २००४) अपनी फिल्मों के गानों के लिए जाने जाते थे, वह अपने गाने कुछ ऐसे फिल्माया करते थे की देखनेवाले पर जादू छोड़ जाए. गाइड तथा तीसरी मंजिल जैसी फिल्मों के गाने इसी बात का साबुत है.

विजय आनंद को मिले प्रमुख अवॉर्ड्स

  • फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: गाइड (1965)
  • फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ डायलॉग: गाइड (1965)
  • फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संपादन: जॉनी मेरा नाम (1970)
  • फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले : जॉनी मेरा नाम(1970)
  • बी एफ जे ए अवार्ड सर्वश्रेष्ठ संपादक: जॉनी मेरा नाम(1970)
  • बी एफ जे ए अवार्ड सर्वश्रेष्ठ संपादक: डबल क्रॉस(1973)
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मेरे पास ज्यादा बड़ा और पावरफुल न्यूक्लियर बटन: नॉर्थ कोरिया की धमकी पर ट्रम्प

यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉर्थ कोरिया के तानाशाह की एटमी जंग की धमकी का जवाब उसी के अंदाज में दिया है। ट्रम्प ने एक ट्वीट में कहा- मेरे पास ज्यादा बड़ा और ताकतवर न्यूक्लियर बटन है। और ये काम भी करता है। बता दें कि नए साल पर किम जोंग उन ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा था कि एटमी हथियार लॉन्च करने का बटन हमेशा उनकी टेबल पर रहता है और वो इसके जरिए पूरे अमेरिका को तबाह कर सकते हैं। किम की धमकी का जवाब डोनाल्ड ट्रम्प ने दो दिन बाद दिया।

क्या कहा था नए साल पर किम जोंग ने?

– बता दें कि किम जोंग ने नए साल के मौके पर अपने देश को टीवी पर आकर संबोधित किया था। इस दौरान उसने अमेरिका को एटमी हथियारों से तबाह कर देने की धमकी दी थी। हालांकि, ये पहली बार नहीं था। किम जोंग उन पहले भी अमेरिका और उसके सहयोगियों की इस तरह की धमकी दे चुका है।
– किम जोंग उन ने कहा था- अमेरिका अब कभी भी हमारे खिलाफ जंग शुरू नहीं कर सकता, क्योंकि हमारे एटमी हथियार उसको तबाह कर देंगे। पूरा अमेरिका हमारे न्यूक्लियर वेपन्स की रेंज में है। इन हथियारों का बटन हमेशा मेरी टेबल पर रहता है। और यह एक सच्चाई है, इसे धमकी नहीं समझा जाना चाहिए।

ट्रम्प ने तंज कसते हुए दिया जवाब

– डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक ट्वीट के जरिए किम जोंग उन को उसी के अंदाज में जवाब दिया। इसमें तंज भी था। शायद ट्रम्प ये बताना चाहते थे कि नॉर्थ कोरिया के एटमी हथियार दिखावे के हैं। लेकिन, अमेरिका के हथियार हकीकत में काम करते हैं।
– ट्रम्प ने अपने ट्वीट में कहा- क्या कोई भुखमरी से जूझ रहे देश में उसे (किम जोंग उन को) ये बताएगा कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है। लेकिन, ये उनसे कहीं ज्यादा बड़ा और ज्यादा ताकतवर है। और मेरा बटन काम करता है।
– ‘मेरा बटन काम करता है’- किम जोंग उन की धमकी पर ट्रम्प की तरफ से किया गया तंज माना जा रहा है।
– व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी सराह सैंडर्स ने बाद में कहा- नॉर्थ कोरिया को लेकर अमेरिका की सोच बदली नहीं है। हम उसे दुनिया के लिए खतरा मानते हैं।

किम ने पिछले साल भी दी थी धमकी

– पिछले साल की शुरुआत में किम ने कहा था- नॉर्थ कोरिया उस स्टेज में पहुंच गया है, जहां से वो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बना सकता है और उन्हें लॉन्च भी कर सकता है। उसने ऐसी 15 मिसाइल तैयार करने का दावा किया था।
– साउथ कोरिया की न्यूज एजेंसी योन्हेप के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया दुनिया को तबाह करने में सक्षम हथियारों को बड़े पैमाने पर तैयार कर रहा है।
– किम की धमकी के बाद यूनाइटेड नेशन्स में अमेरिकी मिशन के स्पोक्सपर्सन जोनाथन वाशेल का बयान आया था। उन्होंने कहा था- अगर ऐसी कोई जंग हुई तो किम जोंग उन ही इसका पहला शिकार बनेंगे।

गद्दाफी और सद्दाम हुसैन जैसा होगा हश्र

– अमेरिकी न्यूज हेडक्वॉर्टर के होस्ट कैली राइट ने कहा था- अगर किम जोंग अमेरिका पर हमले की प्लानिंग करते हैं तो उनका हश्र भी लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी या फिर इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन जैसा ही होगा।
– वहीं, वाशेल ने कहा था कि रूस और चीन कभी नहीं चाहेंगे कि उनके आसपास कोई न्यूक्लियर ताकत मौजूद रहे। वैसे, अमेरिका और उसके सहयोगी देश किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं।

सतर्क रहे अमेरिका

– यूएस आर्मी के पूर्व चीफ ऑफ स्टाप माइक मुलेन एक टीवी शो में अमेरिका को नॉर्थ कोरिया से सतर्क रहने की हिदायद दे चुके हैं। मुलेन ने कहा था- अमेरिका नॉर्थ कोरिया से जंग के करीब पहुंचता जा रहा है। अब डिप्लोमैटिक तरीके से मामला हल करने की गुंजाइश काफी कम बची है।
– मुलेन ने कहा था – मेरे हिसाब से हालात अब काफी खतरनाक हो चुके हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इसका अंत किस तरह होगा। मुझे लगता है कि हम नॉर्थ कोरिया से एटमी जंग के काफी करीब आ गए हैं।

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पाक पर कब्जे की कोशिश में चीन, बड़ी योजना पर कर रहा काम

पाकिस्तान के लोगों का दिल जीतने के लिए चीन ने नई चाल चली है। हाल ही में चीन ने पाकिस्तान के छोटे से तटीय शहर ग्वादर के लिए 50 करोड़ डॉलर यानी करीब 3300 करोड़ रुपए  ग्रांट दी है । इस छोटे से शहर के् लिए इतनी बड़ी ग्रांट देकर चीन का पाकिस्तान में पैर जमाने का है। पाक पर कब्जे के लिए  वो योजना बनाकर काम कर रहा है। ग्वादर शहर में चीन कई महत्वकांशी योजनाओं पर काम कर रहा है। ये जगह अरब सागर के तट पर स्थित है और ये कमर्शियल तौर पर चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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आगे चलकर चीन ग्वादर में नौसेना का बेस  तैयार करने की योजना बना रहा है जिससे भारत और अमरीका की चिंताओं को बल मिला है, क्योंकि दोनों देश इस बात को जानते हैं कि आने वाले समय चीन ग्वादर को अपनी नौसेना के बेस के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। ग्वादर में चीन एक मेगापोर्ट विकसित करके दुनिया भर में निर्यात करना चाहता है। यहां से चीन पश्चिमी क्षेत्र से जुड़ने के लिए एनर्जी पाइपलाइन्स, सड़कों और रेल का लिंक का जाल बिछाएगा। पाकिस्तानी अधिकारी यहां अगले साल 12 लाख टन कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं जो साल 2022 में बढ़कर 1.3 करोड़ टन तक पहुंच जाएगा।

पाकिस्तान का ये इलाका प्राकृतिक तेल और गैस के परिवहन के लिए जाना जाता है। चीन यहां अपने लिए भविष्य में कई फायदे देख रहा है। हाल ही में ग्वादर में नया इंटरनैशनल एयरपोर्ट बनाने के लिए भी चीन ने 23 करोड़ डॉलर यानी करीब 1500 करोड़ रुपए की ग्रांट दी थी।  ग्वादर में चीन के लिए काफी चुनौतियां भी हैं। यहां पीने के पानी की गंभीर समस्या के साथ-साथ बिजली की समस्या भी आम लोगों को काफी परेशान करती है। इतना ही नहीं पाकिस्तानी अलगाववादी विद्रोहियों से भी चीन के प्रॉदेक्ट्स को खतर बना हुआ है। स्थानीय लोगों का संतुष्ट होना अलगाववादियों के लिए मुश्किलें पैदा करता है।