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अविराम गौसेवा के लिए जर्मन मूल की मथुरा निवासी अम्मा जी को पद्मश्री। जानें गौसेवा से जुड़ी यह अनोखी दास्तां!

42 वर्षों से मथुरा में गोसेवा कर रही जर्मन मूल की सुदेवी गोवर्धन “अम्मा जी” को पद्मश्री मिलने पर बहुत बहुत बधाई।

पाँच बीघा के क्षेत्र में फैले सुरभि गौशाला का संचालन कर रही सुदेवी ने 1,500 से भी अधिक गायों को पाल रखा है, जिनकी वह लगातार देखभाल करती हैं। इन गायों में से अधिकतर बीमार, नेत्रहीन या अपाहिज हैं। इनमें से 52 गायें नेत्रहीन है जबकि 350 पैरों से अपाहिज है। उनके पैरों की नियमित मरहम-पट्टी की जाती है।

जर्मन महिला फ्रेड्रिन इरिन ब्रूनिंग उर्फ़ ‘सुदेवी दासी गोवर्धन’ को केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। सुदेवी राधाकुंड धाम में विगत 42 वर्षों से गौसेवा कर रहीं हैं। बीमार और असहाय गायों की सेवा करने के कारण उन्हें ‘गायों की मदर टेरेसा’ भी कहा जाता है। उन्हें पद्म सम्मान मिलने का समाचार पाकर स्थानीय निवासी भी ख़ुश हुए और गौशाला पहुँच कर उन्होंने सुदेवी को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्हें शनिवार (मार्च 16, 2019) को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

सुदेवी के अनुसार, जब मंत्रालय द्वारा उन्हें पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई, तब उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। फिर स्थानीय निवासियों ने उन्हें इस से अवगत कराया। ये तब की बात है, जब सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा की थी।

अपने माता-पिता की इकलौती संतान फ्रेड्रिन 42 वर्ष पहले भारत भ्रमण पर आई थी। इस दौरान उन्होंने ब्रज आकर श्रीकृष्ण के भी दर्शन किए। कृष्ण-भक्ति ने उन्हें अपनी तरफ ऐसा खींचा कि उन्होंने भारत में रहने की ठान ली। ब्रज में उन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिसके बीमार होने के बाद उन्होंने उसकी काफ़ी देखभाल की। इसके बाद वह जहाँ भी बीमार गाय देखती, उसकी देखभाल और सेवा में लग जाती। इसके बाद तो जैसे उन्होंने गोसेवा को ही अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन ही गोसेवा को समर्पित कर दिया।

सुदेवी के पिता तीस वर्ष पहले तक दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में कार्यरत थे। इकलौती संतान होने के कारण उन्होंने पिता से मिलने वाली सारी धनराशि को गोसेवा में ही ख़र्च किया। उनकी गौशाला में गायों के लिए एक स्पेशल एम्बुलेंस भी है। अगर किसी गाय की मृत्यु निकट आ जाए और उसके बचने की कोई संभावना न रहे, तब सुदेवी उसे गंगाजल का सेवन कराती है। मरणोपरांत गायों के शरीर का अंतिम संस्कार भी पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है।

सुदेवी बताती हैं कि गायों की सेवा में हर महीने ₹35 लाख तक ख़र्च होते हैं। गायों का इलाज डॉक्टरों द्वारा करवाया जाता है। सुदेवी दानदाताओं और जर्मनी से आने वाले रुपयों की मदद से इस गौशाला का संचालन कर रहीं हैं। सुरभि गौशाला में 70 से 80 कर्मचारी कार्यरत हैं। किराए की भूमि पर गौशाला चला रहीं सुदेवी को उम्मीद है कि उन्हें इस पुरस्कार के मिलने के बाद गौशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने इस बात की भी उम्मीद जताई कि अब गोसेवा के रास्ते में आने वाली अड़चनें दूर होंगी।

सुदेवी ने बताया कि अगर गौशाला के लिए उन्हें भूमि मिल जाती है तो मासिक किराए में ख़र्च हो रहे रुपयों की बचत होगी और उसका उपयोग गौसेवा में किया जाएगा। हाल ही में जब उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी तब उन्होंने मथुरा की सांसद हेमा मालिनी से लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक के दरवाज़े खटखटाए थे। इसके बाद उन्हें वीजा मिल गया था। सुदेवी अविवाहित हैं और अभी भी एक झोपड़ी में ही रहती हैं। स्थानीय निवासियों ने उन्हें भारतीय नागरिकता देने की भी माँग की है। उनके अतुलनीय सेवा कार्य के लिए हम सदा आभारी रहेंगे।

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New FDI rules for Ecommerce Marketplace: महत्वपूर्ण जानकारी और इसके प्रभाव। जानें क्यों हुआ अमेज़न को 45 अरब डॉलर का नुकसान!

The FDI changes in ecommerce policy came into effect from February 1.

According to the new guidelines, ecommerce marketplaces will not be allowed to sell products in which they own a stake.

Some of the other major changes include:

  • Ecommerce companies are allowed to do transactions with sellers only on a B2B basis
  • Ecommerce marketplaces will not exercise ownership or control over the inventory
  • Cash back provided by group companies of marketplace entity to buyers shall be fair
  • Etailers are not allowed to mandate any seller to sell any product exclusively on its platform
  • Bar sellers who drive more than 25% of the etailers overall sales from a single marketplace as entities

Following the implementation of the new rules, Amazon & Flipkart together lost $50 Bn in market capitalisation this week.

Amazon & Flipkart together lost $50 Bn in market capitalisation this week.

Amazon’s shares fell by 5.38% to $1,626.23, losing $45.22 Bn, Walmart’s share price fell by 2.06% to $93.86 on the New York Stock Exchange, losing $5.7 Bn in market capitalisation.

Amazon India has also removed all the product listings from its preferred sellers such as Cloudtail and Appario Retail in India to comply with the rulings.

removed all the product listings from its preferred sellers such as Cloudtail and Appario Retail in India to comply with the rulings.

During Amazon’s earnings call, Amazon’s CFO Brian Olsavsky had said that the company was uncertain about the impact that these new rules would have on the ecommerce sector and is currently analysing the situation to comply with the new rules.

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Story of Success 23 साल की उम्र में बना ली करोड़ों की कंपनी, जानिये कैसे

सफलता के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है और ना ही कोई समय तय है. आइडिया और विजन है तो आप किसी भी उम्र में सफल हो सकते हैं. ऐसी ही एक मिसाल हैं OYO के फाउंडर और मालिक 23 साल के रितेश अग्रवाल.

रितेश के माता-पिता दरअसल चाहते थे कि वो आईआईटी में दाखिला लें और इंजीनियर बनें. रितेश भी कोटा, राजस्‍थान में रह कर आईआईटी एंट्रेस एग्‍जाम की ही तैयारियों में जुटे थे.

पर अपने आइडियाज और वीजन को पूरा होता देखने के लिए रितेश इंतजार नहीं करना चाहते थे. उन्‍होंने IIT की तैयारी छोड़कर अपने बिजनेस की तैयारी शुरू कर दी.

19 साल के रितेश अग्रवाल महीनों घूमते और बजट होटल में रुकते, ताकि वहां की तमाम चीजों के बारे में जान सकें. अपने अनुभव के बल पर रितेश ने अपने पहले स्‍टार्ट-अप यात्रा की शुरुआत की.

रितेश ने एक वेबसाइट तैयार किया, जहां वो सस्‍ते और किफायती होटल्‍स के बारे में जानकारी देते थे. इस वेबसाइट का नाम रखा ‘ओरावल’.

कुछ दिनों तक वेबसाइट चलाने के बाद रितेश को लगा कि लोग शायद नाम के चलते वेबसाइट को समझ नहीं पा रहे हैं. इसलिए उन्‍होंने साल 2013 में उसका नाम बदल कर OYO Rooms कर दिया. द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की CB Insights ने OYO Rooms को उन कंपनियों में रखा, जो भविष्‍य में सफलता का परचम लहरा सकती हैं.

बता दें कि रितेश के OYO Rooms में सॉफ्टबैंक ग्रुप, ग्रीनओक्‍स, सेक्‍यूइया कैपिटल और लाइटस्‍प्रेड इंडिया जैसी कंपनियों ने निवेश किया है. रितेश अग्रवाल को साल 2013 में Thiel Fellowship के ’20 अंडर 20′ के लिए चुना गया था.

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यूएन के महासचिव ने किया नरेंद्र मोदी को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण अवॉर्ड चैंपियंस ऑफ अर्थ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यह अवॉर्ड यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दिया। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभारी हूं। यह सम्मान भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की प्रतिबद्धता का फल है। चैंपियन अर्थ अवॉर्ड भारत के जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है, जो अपने जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं।’

ये देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान :प्रधानमंत्री ने कहा- ‘यह देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान है। महिलाएं पौधों में भी भगवान देखती हैं, वे पत्तियां भी गिनकर तोड़ती हैं। मैं इस सम्मान के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए यह दोहरे सम्मान का मौका है। कोच्चि एयरपोर्ट को ऊर्जा क्षेत्र में सम्मान मिला है। पर्यावरण और प्रकृति का सीधा रिश्ता कल्चर से है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को विश्व स्वीकार कर रहा है। हम उस समाज का हिस्सा हैं, जहां सुबह उठने से पहले धरती पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगी जाती है। क्योंकि हम उस पर वजन डालने वाले हैं।’

भारतीयों के लिए प्रकृति ही सर्वोपरि है : उन्होंने कहा, ‘हमारे व्रत और त्योहारों में प्रकृति का जुड़ाव है। हमारे यहां प्रकृति को सर्वोपरि माना गया है। यजुर्वेद से लिए शांतिपाठ में वातावरण में शांति की प्रार्थना की गई है। यूएन ने जो सम्मान दिया, वह लोगों की आस्था का सम्मान है। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं। आबादी के एक हिस्से को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सूखे की वजह से सीमित संसाधन वाले गरीब परेशान हो रहे हैं। आज प्रकृति पर अतिरिक्त दवाब डाले बगैर विकास की जरूरत है।’

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हर अंग के लिए उसी आकार के फल-सब्जी और अनाज, एक बार जानकर बच सकते हैं सैकड़ों बीमारियों से

यह कुदरत का करिश्मा है कि हमारे आसपास ऐसे फल, अनाज और सब्जियां हैं, जिनका आकार हमारे शरीर के किसी न किसी अंग से मिलता है और उन्हें खाने से शरीर विशेष की बीमारी होने का जोखिम कम किया जा सकता है। यही नहीं, अगर बीमारी हो जाए तो उसके ठीक होने की संभावना भी होती है।

हम जैसा खाते हैं वैसा ही होते हैं

यह प्राचीन मान्यता है कि हम जैसा खाते हैं, वैसा ही होते हैं। इसलिए सदियों से सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता रहा है। अब आधुनिक शोधों से पता चल रहा है कि ये मान्यताएं बिल्कुल सही हैं। इसी क्रम में हम आपका उन अनाज, फल और सब्जियों से परिचय करा रहे हैं, जो शरीर के खास हिस्से के लिए फायदेमंद होते हैं और आपको सेहतमंद रखते हैं।

गाजर और रोशनी का रिश्ता

अखरोट के बारे में हम बता चुके हैं। इस क्रम में अगला नंबर गाजर का है। इसे काटकर देखिए तो यह बिल्कुल आंखों के बीच के गोल हिस्से की तरह दिखता है। तभी तो इसे खाने से आंखों की रोशनी ठीक रहती है। इसमें विटामिन और बीटा केरोटीन जैसे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को खराब होने से बचाते हैं।

स्तन कैंसर से क्यों बचाता है संतरा

संतरे को बीच के काटने पर जो आकृति उभरती है वह स्तन के मैमोग्राम से मिलती जुलती है। संतरे एवं साइट्रिक एसिड वाले इसी आकार के अन्य फलों में पाया जाने वाला लिमोनॉयड्स का प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोग सफल रहा है और इससे कैंसर का असर करने में मदद मिली है।

दिल का दोस्त है टमाटर

टमाटर को काटने पर उसके अंदर से भी दिल की तरह चैंबर निकलते हैं। वैज्ञानिक शोधों से साबित हुआ है कि इसमें पाए जाने वाले लाइकोपिन नामक पदार्थ के कारण टमाटर खाने वालों से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं। टमाटर में थोड़ा मक्खन, घी या कोई भी फैट मिलाकर खाने से लाइकोपिन का असर दस गुना तक बढ़ जाता है।

अदरक को ध्यान से देखिए

अदरक के फायदे के कायल लोग से इसके मुरीद है लेकिन कई लोग इसके स्वाद के कारण इससे कोसों दूर रहना पसंद करते हैं। खैर, कभी ध्यान से इसे देखिए। यह बिल्कुल आमाशय (स्टमक) की तरह दिखता है। अपने देश में तो इसके गुणों से हम सदियों से परिचित हैं, लेकिन यूएस ड्रग एडिमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) तक ने इसका लोहा मान लिया है। इसकी सूची में अदरक के तेल को अजीर्ण और उल्टी में इस्तेमाल के लिए रामबाण बताया गया है।

एक बींस का नाम किडनी बींस क्यों है

कभी आपने सोचा है कि राजमा और फ्रेंच बींस या इस परिवार के अन्य बींस का आकार किडनी की तरह क्यों होता है। क्योंकि इनके सेवन से किडनी सेहमंद रहती है। यहां तक कि एक बींस का नाम ही किडनी बींस है। इसमें फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम पाया है। फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है, जबकि मैग्नीशियम और पोटैशियम किडनी स्टोन की समस्या से बचाता है।

आपके चेहरे पर मुस्कान लाता है केला

केला शायद दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल है और इसे कंप्लीट फूड भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अंदर ट्रिप्टोफैन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो केले के पचने के बाद सेरोटोनिन में बदल जाता है। यही सेरोटोनिन हमारे मूड को बुस्ट करता है। इसलिए, अगली बार जब भी आपका मूड डाउन हो तो उसे अप करने के लिए केला जरूर खाइएगा। शर्तिया फायदा होगा।

मशरूम भले न खाते हों लेकिन फायदा जान लीजिए

मशरूम को बीच के काटने पर यह बिल्कुल हमारे कान की तरह दिखता है। कान से ऊंचा सुनने वालों में मशरूम के सेवन से सुधार देखने को मिला है। कान के अलावा यह हड्डियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में विटामिन डी भी पाया जाता है।

जानिए, शकरकंद और पैंक्रियाज का रिश्ता

पैंक्रियाज का हमारे शरीर में काफी अहम रोल होता है। इस अंग का आकार शकरकंद से काफी मिलता-जुलता है। शोध से पता चला है कि शकरकंद में पाया जाने वाले तत्व पैंक्रियाज के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ठीक रखते हैं जिससे यह अंग सामान्य रूप से काम करता है।

अस्थमा से क्यों बचाता है अंगूर

हमारे फेफड़े के अंदर अंगूर के आकार की कई थैलीनुमा ग्रंथियां होती हैं जो कॉर्बन डाइ ऑक्साइड और ऑक्सीजन के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। इन्हें एल्वियोली कहा जाता है। अंगूर के सेवन से फेफड़े के संक्रमण और एलर्जी से होने वाली अस्थमा जैसी बीमारियों से लड़ने में फायदा मिलता है।

प्याज के फायदे जान हो जाएंगे हैरान

प्याज को काटकर सलाद के रूप में खूब खाया जाता है। लोग इसे अलग-अलग आकार में काटते हैं, लेकिन गभी गोलाकार काटकर देखिए। यह आकार बिल्कुल इनसान की कोशिकाओं से मिलता है। शोधों से पता चला है कि प्याज में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल कोशिकाओं के अपशिष्ट पदार्थों की सफाई करते हैं और उन्हें स्वस्थ रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि ये कोशिकाएं ही जीवन का आधार हैं। कोशिकाओं से ही मिलकर ऊतक (टिश्यू) बनते हैं और कई टिश्यू मिलकर ऑरगन यानी अंग का निर्माण करते हैं।

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खाली समय का करें उपयोग, YouTube देखकर ऐसे कमाएं पैसे

अगर आपको यूट्यूब वीडियो देखना पसंद है तो आप इस शौक के जरिए पैसा भी कमा सकते हैं। आपका यह शौक औसतन आपको 20 से 30 हजार तक की कमाई करवा देगा। ध्यान रहे ऑनलाइन साइट्स सेकंडों के हिसाब से पेमेंट करती हैं। ऐसे में आप जितने ज्यादा वीडियोज देखेंगे, उतना ही ज्यादा आपको फायदा होगा। इसलिए आप अपने दिन के कुछ खाली घंटे निकालकर ये काम करें। जानिए कौन सी साइट देती हैं वीडियो देखने का पैसा।

पेड2यूट्यूब (paid2youtube): जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस साइट पर आपको सबसे पहले खुद को रजिस्टर्ड करवाना होगा। यहां पर 30 सेकंड का यूट्यूब वीडियो देखने और उस पर कमेंट करने के पैसे मिलते हैं। यहां आप 200 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। आप यह काम एक साथ और कुछ-कुछ देर बाद समय निकालकर भी कर सकते हैं। आपके खाते में एक बार 670 रुपए की रकम जमा होने के सात दिन बाद पेपाल अकाउंट से आपको पेमेंट कर दी जाती है।

स्वैगबक्स (swagbucks): यहां भी आपको सबसे पहले अपना अकाउंट बनाना होगा। यहां पर आप सर्वे के जरिए भी कमाई कर सकते हैं। आपकी ओर से किए गए हर क्लिक और वीडियो देखने पर स्वैगबक्स आपको एक एसबी से लेकर 30 एसबी तक प्वाइंट्स देता है। 500 एसबी प्वाइंट्स पर आपको 250 रुपए का फ्लिपकार्ट और एमेजन का गिफ्ट कार्ड दे दिया जाता है।

यू-क्यूब्ज (you-cubez): यहां पर भी आपको सबसे पहले साइन अप करना होगा। यानी अपना अकाउंट बनाना होगा। इस एजेंसी पर प्रति क्लिक आपको 0.005 सेंट का भुगतान किया जा सकता है। यानी आप इस साइट पर अगर एक दिन में 400 बार क्लिक करते हैं तो आप 134 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह एक एडवरटाइजिंग एजेंसी की साइट है।

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जानिए भारत में कैसे बढ़ती-घटती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमत

आइये जानते हैं वे कौन से फैक्टर हैं जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

बढ़ती मांग

भारत और अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास ने भी पेट्रोल और अन्य आवश्यक ईंधन की मांग में वृद्धि की है। हाल ही में निजी वाहनों के मालिकों की संख्या बढ़ी है, जिससे भारत में पेट्रोल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

आपूर्ति और मांग में असंतुलन
कच्चे तेल के इनपुट मूल्य की उच्च लागत के कारण भारत में तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाजार की मांगों को पूरा करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। जिससे देश में पेट्रोल की कम आपूर्ति और अधिक मांग होती है।

टैक्स रेट
पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर भी काफी हद तक निर्भर करती हैं। सरकार की ओर से टैक्स दरें बढ़ाने की स्थिति में कंपनियां अक्सर उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है।

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें
बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है। नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा। इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 105. 49 फीसदी और डीजल में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, फिलहाल पेट्रोल डीजल में कई सारे टैक्स शामिल हैं। मसलन, एक्साइज ड्यूटी और वैट (मूल्य संवर्धित कर)। इसके अलावा डीलर की ओर से लगाया गया रेट और कमीशन भी कीमतों में जुड़ते हैं। एक्साइज ड्यूटी तो केंद्र सरकार लेती है, जबकि वैट राज्यों की आमदनी (राजस्व) में जुड़ता है।

89.97 प्रति लीटर
महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल सोमवार को हो गया। यह पूरे देश में पेट्रोल की सर्वाधिक कीमत है।

रुपये की हालत
डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत भी उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करती हैं। भारतीय तेल कंपनियां अन्य देशों से आयातित तेल का भुगतान डॉलर में करती हैं। लेकिन उनके खर्च रुपये में दर्ज होते हैं। जब डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आती है, तो कंपनियों के लाभ पर असर पड़ता है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। इसी तरह रुपया मजबूत होने पर कीमतों में राहत मिलती है।

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जानिए कौन तय करता है ‘मैन ऑफ़ द मैच’

क्रिकेट मैच के दौरान या ख़त्म होते ही हम अंदाज़ा लगा लेते हैं कि किस खिलाड़ी को ‘मैन ऑफ़ द मैच’ मिलेगा. ज़्यादातर ये अंदाज़ा सही भी रहता है. जीतने वाली टीम की ओर से सबसे ज़्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले खिलाड़ी को ही ये पुरस्कार मिलता है. कुछ मामलों में हारने वाले टीम के भी खिलाड़ी को ‘मैन ऑफ़ द मैच’ मिल जाता है. ये तो तुक्के की बात हो गई, क्या आपको पता है कि ‘मैन ऑफ़ द मैच’ देने का फ़ैसला कौन लेता है?

ये जो कमेंटेटर होते हैं, जिनकी बारीक नज़र पर पूरे मैच पर होती है, जो खेल को अपने कमेंट्री से और ज़्यादा रोमांचक बना देते हैं.

ये वो लोग होते हैं जिनके पास खेल की अच्छी जानकारी होती है, इनमे से ज़्यादातर पुराने खिलाड़ी ही होते हैं. ‘मैन ऑफ़ द मैच’ चुनने का काम भी इन्हीं का होता है. सभी अन्य भाषाओं के कमंटेटर एक साथ बैठ कर ये फ़ैसला लेते हैं कि किसे आज के मैच के लिए ये पुरस्कार दिया जाए.

कभी-कभी कमंटेटर के अलावा मैच रेफ़्री और दूसरे वरिष्ठ खिलाड़ी भी ‘मैन ऑफ़ द मैच’ चुनने वाले पैनल का हिस्सा होते हैं.

बड़ी श्रृंख्ला जैसे चैंपियंस ट्रॉफ़ी या वर्ल्ड कप में ‘मैन ऑफ़ द मैच’ को चुनने के लिए अलग से पैनल तैयार किया जाता है.

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अमेजन एक ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप वाली दूसरी अमेरिकी कंपनी

amazon head quarter

अमेजन 1 ट्रिलियन डॉलर (71 लाख करोड़ रुपए) मार्केट कैप वाली अमेरिका की दूसरी और दुनिया की तीसरी कंपनी बन गई। इसका शेयर मंगलवार को 2% तेजी के साथ 2050.50 डॉलर पर पहुंच गया। इस बढ़त से मार्केट वैल्यू में इजाफा हुआ।

amazon jeff bezos

एपल दो अगस्त को 1 ट्रिलियन डॉलर की पहली अमेरिकी कंपनी बनी थी। अमेजन का मार्केट कैप एपल से 9900 करोड़ डॉलर कम है। एपल से पहले 2007 में शंघाई के शेयर बाजार में पेट्रोचाइना का मार्केट वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े पर पहुंचा था।

दुनिया की टॉप-3 मार्केट कैप वाली कंपनियां

कंपनी मार्केट कैप (डॉलर)
एपल 1099 अरब
अमेजन 1000 अरब
माइक्रोसॉफ्ट 856 अरब

एक साल में शेयर 100% से ज्यादा चढ़ा: पिछले 12 महीने में अमेजन के शेयर ने 108% रिटर्न दिया। इस साल जनवरी से अब तक इसमें 74% तेजी आई। पिछले तीन महीने में निवेशकों को 20% और एक महीने में करीब 12% मुनाफा दिया।

21 साल में शेयर प्राइस बढ़कर 114 गुना: 15 मई 1997 को 18 डॉलर पर अमेजन के शेयर की लिस्टिंग हुई। मंगलवार की तेजी के बाद शेयर 2050 के ऊपर चला गया। आईपीओ में 1000 डॉलर के निवेश की वैल्यू अब 13 लाख 41 हजार डॉलर से भी ज्यादा हो गई।

तारीख शेयर प्राइस
15 मई 1997 18 डॉलर
23 अक्टूबर 2009 100 डॉलर
27 अक्टूबर 2017 1000 डॉलर
30 अगस्त 2018 2000 डॉलर

जेफ बेजोस दुनिया में सबसे अमीर: अमेजन के फाउंडर और सीईओ लंबे समय से दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 166 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बेजोस नंबर-1 हैं। शेयर में तेजी से इस साल उनकी दौलत में 66.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। बिलेनियर इंडेक्स में 98.1 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बिल गेट्स दूसरे नंबर पर हैं। एशिया के सबसे अमीर मुकेश अंबानी 47.7 अरब डॉलर के साथ 12वें नंबर पर हैं।

 

अमेजन का सफर

1994 किताब बेचने से शुरुआत
मई 1997 अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टिंग
जून 1998 आईएमडीबी का अधिग्रहण

ऑनलाइन म्यूजिक स्टोर की शुरुआत

दिसंबर 2000 कैमरा, फोटो स्टोर शुरू किया

अमेजन मार्केटप्लेस लॉन्च

फरवरी 2005 अमेजन प्राइम लॉन्च
नवंबर 2007 अमेजन किंडल, अमेजन म्यूजिक शुरू
सितंबर 2011 किंडल फायर, किंडल टच, किंडल टच 3जी बाजार में उतारे
दिसंबर 2016 अमेजन वीडियो लॉन्च

ड्रोन सर्विस प्राइम एयर से पहली डिलीवरी

अगस्त 2017 13 अरब डॉलर में होल फूड्स का अधिग्रहण
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Teacher’s Day Special सफलता की राह दिखाते हैं Sarvepalli Radhakrishnan के ये 10 विचार

sarvepalli radha krishnan

राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद और महान दार्शनिक थे. उनका कहना था कि जहां कहीं से भी कुछ सीखने को मिले उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. आज हम आपको राधाकृष्णन के 10 ऐसे विचारों के बारें में बताने जा रहे हैं, जो आपको हमेशा जीवन में प्रेरणा देते रहेंगे.

सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 10 विचार (Teacher’s Day Quotes)

1. भगवान की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके नाम पर बोलने का दावा करते हैं.

2. शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें.

3. शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है. अत: विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए.

4. किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है.

5. कोई भी आजादी तब तक सच्ची नहीं होती है, जब तक उसे पाने वाले लोगों को विचारों को व्यक्त करने की आजादी न दी जाये.

6. पुस्तकें वह माध्यम हैं, जिनके जरिये विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण किया जा सकता है.

7. शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए, जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ लड़ सके.

8. ज्ञान के माध्यम से हमें शक्ति मिलती है. प्रेम के जरिये हमें परिपूर्णता मिलती है.

9. हमें तकनीकी ज्ञान के अलावा आत्मा की महानता को प्राप्त करना भी जरूरी है.

10. शांति राजनीतिक या आर्थिक बदलाव से नहीं आ सकती बल्कि मानवीय स्वभाव में बदलाव से आ सकती है.