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भारत बंद की सफलता का श्रेय लेने उतरी कांग्रेस, बोले “सबसे पहले उठाई आवाज”

दलित उत्पीड़न कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई का श्रेय कांग्रेस खुद लेने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस ने भारत बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए दावा किया कि सबसे पहले उसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राजनीतिक मोर्चाबंदी करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर बंद के दौरान हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के पास अधिकार है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद कर दे। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर जो फैसला दिया था उसे संसद में रद किया जा सकता था। सरकार कदम बढ़ाती को सभी दल साथ होते, लेकिन चुप्पी छाई रही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देती तो सोमवार को बंद के दौरान हिंसा नहीं होती।

अब तक कांग्रेस पुनर्विचार याचिका की बात कहती रही थी। अब सरकार ने पुनर्विचार याचिका पेश कर दी है तो कांग्रेस ने संसद के जरिये इसे रद करने का दबाव बढ़ाया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, सिर्फ पुनर्विचार याचिका से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसकी सुनवाई समान बेंच में होती है। इसके लिए सरकार को क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी चाहिए या फिर संसद बजट सत्र के बचे हुए चार दिनों में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करना चाहिए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने देश में दलित उत्पीड़न कानून लागू करने और उसे और मजबूत करने का श्रेय भी लेने की कोशिश की। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलित उत्पीड़न कानून राजीव गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और 2014 में संप्रग सरकार ने संशोधन का अध्यादेश लाकर इसे और कड़ा कर दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून के दुरुपयोग के सवाल को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग तो किसी भी कानून हो सकता है, लेकिन इसका उपाय उस कानून को खत्म करना नहीं होता। उनके अनुसार दलित उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के मामले 2-3 फीसद से अधिक नहीं हैं।

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PNB और Rotomac के बाद अब CBI ने तीन नए घोटालों से उठाया पर्दा, मामला दर्ज

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले और रोटोमैक घोटाले से अभी देश ठंग से उबरा भी नहीं था कि अब सीबाआई ने कई और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को उजागर किया है। इन तीन मामलों में सीबीआई ने एक ज्वैलर, एक बिजनेस मैन और एक पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है क्योंकि इनके खिलाफ तीन अलग अलग बैंकों ने शिकायत दर्ज कराई है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है।

ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में हुआ 3.9 बिलियन का फ्रॉड

गुरुवार को सीबीआई ने कथित धोखाधड़ी के इस मामले में द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। 389.85 करोड़ रुपये का यह कथित कर्ज घोटाला ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) में हुआ है। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने आरोप लगाया है कि दिल्ली जौहरी द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल और उसके मालिक सभ्या सेठ ने उन्हें धोखा दिया। उनको दिया गया लोन 2014 में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गया, लेकिन बैंक ने पिछले साल 16 अगस्त को ही एजेंसी से संपर्क किया था, जब कंपनी ने अपना कारोबार समेट लिया और सेठ देश से भाग गए। सभ्या की कंपनी ने ओबीसी से 2007 से 2012 के दौरान कुल 389 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। बैंक की ओर से कराई गई जांच में पाया गया कि कंपनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल सोने और दूसरे कीमती रत्नों की खरीद का भुगतान करने के लिए किया। कंपनी ने फर्जी लेनदेन का उपयोग कर सोने और धन को देश से बाहर भेजा।

पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से नीरव मोदी और रोटोमैक ग्लोबाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पीएनबी के बाड़मेर ऑफिस ने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया, धोखाधड़ी की शिकायतों के साथ-साथ, इन्होंने एजेंसी के समक्ष ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र बैंक घोटाला: सीबीआई ने बुधवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायत के आधार पर व्यापारी अमित सिंगला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। बैंक ने आरोप लगाया कि जाली दस्तावेजों के आधार पर लोन लिया गया और इसका गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने दिल्ली के कारोबारी अमित सिंगला के खिलाफ 9.5 करोड़ रुपए के गबन का मामला दर्ज कराया है। शिकायत के मुताबिक सिंगला की कंपनी आशीर्वाद चेन ने बैंक से लोन लिया, लेकिन अब चुकाने में वो टालमटोल कर रहे हैं। सिंगला ने ये लोन कैश क्रेडिट फैसिलिटी के जरिए साल 2010 और 2012 में लिया था। आरोपी ने दिल्ली और हरियाणा में एक ही परिवार की तीन संपत्तियों को पेश किया था। लोन लेने के दौरान इन तीनों संपत्तियों का कुल मूल्य टेक महिंद्रा इंटरनेशनल की ओर से 180 मिलियन लगाया गया था।