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अफगानिस्तान ने लगाई शर्मनाक रिकॉर्ड्स की झड़ी, तोड़ा 90 साल का रिकॉर्ड

अफगानिस्तान की टीम ने इस मैच की अपनी पहली पारी में 109 रन बनाने के लिए सिर्फ 27.5 ओवर तक बल्लेबाज़ी की। इसी के साथ अफगानिस्तान ने पहला टेस्ट मैच में सबसे कम ओवर बल्लेबाज़ी करने का रिकॉर्ड भी बना दिया। अफगानिस्तान से पहले ये रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम था। बांग्लादेश की टीम ने अपने पहले टेस्ट की दूसरी पारी मेंं 46.3 ओवर बल्लेबाज़ी की थी। बांग्लादेश से पहले ये रिकॉर्ड न्यूज़ीलैंड के नाम था जो अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में 47.1 ओवर में ही सिमट गई थी।

भारत ने पहली पारी में 474 रन बनाए थे और इसके जवाब में अफगानिस्तान अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में सिर्फ 109 रनों पर सिमट गई। इस लिहाज़ से भारत को 365 रन की बढ़त मिली और फिर टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन खेलने का न्यौता दिया। पहले टेस्ट मैच में फॉलोऑन खेलते हुए ये किसी भी टीम पर बनाई गई सबसे बड़ी बढ़त रही। इससे पहले 1928 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज़ के बीच खेले गए मैच में इंग्लिश टीम ने कैरिबियाई टीम पर 224 रन की बढ़त बनाई थी। वो टेस्ट मैच लॉर्ड्‍स के मैदान पर खेला गया था और वो वेस्टइंडीज़ का पहला टेस्ट मैच था।

चिन्नास्वामी में अफगानिस्तान की टीम द्वारा बनाया गया 109 रन टेस्ट की एक पारी में सबसे कम रन हैं। इससे पहले 2017 में बेंगलुरु के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया की टीम के नाम इस मैदान पर सबसे कम रन बनाने का रिकॉर्ड था। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम सिर्फ 112 रन बनाकर सिमट गई थी।

पहली पारी में मिली बड़ी बढ़त के आधार पर भारत ने अफगानिस्तान को फॉलोआन खेलने पर मजबूर कर दिया और दूसरी पारी में मेहमान टीम 38.4 ओवर में सिर्फ 103 रन पर ऑल आउट हो गई। टेस्ट मैच में ये भारत की सबसे बड़ी जीत थी। इससे पहले भारत ने वर्ष 2017 में बांग्लादेश को पारी और 239 रन से हराया था। इस मैच में भारतीय बल्लेबाजों और उसके बाद गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन रहा। शिखर धवन को मैन ऑफ द मैच चुना गया। इस मैच में विराट की जगह रहाणे ने कप्तानी की थी और उनकी अगुआई में भारतीय टीम ने इस एतिहासिल टेस्ट मैच में जीत हासिल की। इस टेस्ट मैच के जरिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले अफगानिस्तान को भारत ने एक पारी और 262 रन से हराया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारत ने पहली बार किसी टीम के खिलाफ सिर्फ दो दिनों में ही टेस्ट मैच जीतकर खिताब पर कब्जा किया।

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IPL 2018: बॉल टैम्‍परिंग विवाद के बाद स्‍टीव स्मिथ ने राजस्‍थान रॉयल्‍स की कप्‍तानी छोड़ी, रहाणे करेंगे नेतृत्‍व

बॉल टैम्‍परिंग मामले के बाद दुनियाभर में आलोचना झेल रहे ऑस्‍ट्रेलिया ने स्‍टीव स्मिथ ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) टीम राजस्‍थान रॉयल्‍स की कप्‍तानी छोड़ दी है. स्मिथ के स्‍थान पर भारत के मध्‍यक्रम के बल्‍लेबाज अजिंक्‍य रहाणे को आईपीएल के 2018 के सीजन के लिए राजस्‍थान टीम का कप्‍तान बनाया गया है. राजस्‍थान रॉयल्‍स के हैड ऑफ क्रिकेट जुबिन भरूचा ने एक मीडिया विज्ञप्ति के जरिये यह जानकारी दी. गौरतलब है कि आईपीएल-2018  का आयोजन 7 अप्रैल से होना है.विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘केपटाउन टेस्‍ट की घटना के बाद समूचा क्रिकेट जगत स्‍तब्‍ध है. हम इस मामले को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के लगातार संपर्क में हैं. यही नहीं, हम स्‍टीव से भी संपर्क बनाए हुए हैं.’

स्‍टीव का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह उचित होगा कि वह (स्मिथ) राजस्‍थान रॉयल्‍स की कप्‍तानी छोड़ दें. इससे टीम को टूर्नामेंट के पहले अच्‍छे तरह से तैयार होने में मदद मिलेगी. नए कप्‍तान के बारे में घोषणा करते हुए भरूचा ने कहा कि अजिंक्‍य रहाणे लंबे अरसे से राजस्‍थान की टीम का हिस्‍सा हैं. वे इस टीम की संस्‍कृति और मूल्‍यों से अच्‍छी तरह से वाफिक हैं. मुझे विश्‍वास है कि वे राजस्‍थान रॉयल्‍स के बेहतरीन कप्‍तान साबित होंगे.

टराजस्‍थान रॉयल्‍स की टीम ने स्‍पॉट फिक्सिंग के आरोपों के कारण दो साल का बैन झेलने के बाद इसी साल आईपीएल में वापसी की है. टीम ने इसी माह फरवरी में स्मिथ को कप्‍तान नियुक्‍त किया था. स्मिथ वर्ष 2014 और 2015 में राजस्‍थान की टीम का हिस्‍सा थे. वे ऐसे एकमात्र क्रिकेटर हैं जिन्‍हें 2018 के लिए फ्रेंचाइजी ने बरकरार रखा है. स्मिथ पिछले सीजन में राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स टीम के कप्‍तान थे. उनकी कप्‍तानी में टीम फाइनल तक पहुंची थी जहां मुंबई इंडियंस के हाथों उसे हार का सामना करना पड़ा था.

गौरतलब है कि स्मिथ और उनकी टीम तब विवादों में आ गई थी जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में कैमरून बेनक्रॉफ्ट को गेंद से छेड़छाड़ करते हुए पकड़ा गया था और बाद में बेनक्रॉफ्ट तथा स्मिथ दोनों ने इस बात को कबूला था कि गेंद से छेड़छाड़ टीम की योजना थी. इसके बाद क्रिकेट आस्ट्रेलिया (सीए) ने स्मिथ को कप्तानी और उप-कप्तान डेविड वार्नर को तीसरे दिन टेस्ट के बाकी बचे दो दिन के लिए पदों से हटा दिया था. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भी स्मिथ पर एक मैच का प्रतिबंध और पूरी मैच फीस का जुर्माना लगाया तो वहीं बेनक्रॉफ्ट पर मैच फीस का 75 फीसदी जुर्माना लगाया.

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विराट का दीपिका पादुकोण संग काम करने से इनकार, आरसीबी को हुआ 11 करोड़ का नुकसान!

भारतीय क्रिकेट टीम और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के कप्तान विराट कोहली क्रिकेट के मैदान पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के कारण देश का एक बड़ा ब्रांड बन चुके हैं। यही वजह है कि आजकल कोहली एडवर्टाइजिंग वर्ल्ड के चहेते बने हुए हैं और कई प्रोडक्ट के ब्रांड एंबेसडर हैं। इसी बीच खबर आयी है कि कोहली के कारण आरसीबी को 11 करोड़ की डील से हाथ धोना पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रैवल इंडस्ट्री के एक ब्रांड ने आईपीएल में आरसीबी के साथ जुड़ने का फैसला किया था, लेकिन कोहली के एक एक्ट्रेस के साथ स्क्रीन शेयर से इंकार के बाद यह डील निरस्त हो गई है।

खबर के अनुसार, ट्रैवल एंड होटल इंडस्ट्री की कंपनी गोआईबीबो आगामी आईपीएल सीजन के लिए आरसीबी की टीम से जुड़ना चाहती थी। गोआईबीबो आरसीबी की को-स्पांसर बनना चाहती थी। गोआईबीबो चाहती थी कि कप्तान कोहली और टीम उनकी ब्रांड एंबेसडर दीपिका पादुकोण के साथ मिलकर कैंपेन करें। एक रिपोर्ट के अनुसार, विराट कोहली ने दीपिका पादुकोण के साथ काम करने से इंकार कर दिया। जिसके बाद गोआईबीबो को इस डील से अपने हाथ पीछे खींचने पड़े। दरअसल गोआईबीबो अपनी ब्रांड एंबेसडर दीपिका पादुकोण के बिना कैंपेन नहीं करना चाहती थी।

विराट कोहली की कप्तानी में इस बार फिर से आरसीबी से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। आरसीबी हमेशा से ही आईपीएल की मजबूत टीम रही है, लेकिन वह कभी भी आईपीएल खिताब नहीं जीत सकी है। ऐसे में फैन्स को उम्मीद होगी कि आईपीएल के 11वें सीजन में आरसीबी बेहतर प्रदर्शन करेगी। टीम को देखते हुए यह उम्मीद बेमानी भी नहीं है। अब देखने वाली बात होगी कि आरसीबी की टीम इस बार मैदान पर कैसा प्रदर्शन करती है।

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फेसबुक को डेटा लीक मामले से लगा तगड़ा झटका, 35 अरब डॉलर का नुकसान

फेसबुक में डेटा लीक का मामला सामने आने से पूरी दुनिया हैरान है. करोड़ों यूजर्स के

डेटा लीक मामले में फेसबुक को भी तगड़ा झटका लगा है।

सोमवार को इस अमेरिकी सोशल मीडिया के शेयर करीब 7 फीसदी टूट गए और कंपनी के मार्केट वैल्यू में करीब 35 अरब डॉलर तक की गिरावट आ गई।

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की मदद करने वाली एक फर्म ‘कैम्ब्रिज एनालिटिका’ पर लगभग 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के निजी जानकारी चुराने के आरोप लगे हैं।

इस जानकारी को चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया गया है। खबर आने पर अमेरिकी और यूरोपीय सांसदों ने

फेसबुक इंक से जवाब मांगा। वे जानना चाहते हैं कि ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका ने डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका में

राष्ट्रपति चुनाव जीतने में किस तरह से मदद की? इस खबर के बाद फेसबुक के शेयर सोमवार को 7% टूट गए।

शेयर की कीमत घटने की वजह से फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्क को ही एक दिन में 6.06 अरब डॉलर (करीब 395 अरब रुपये)

का झटका लग चुका है। फेसबुक पहले ही यह बता चुका है कि 2016 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले उसके प्लेटफॉर्म का,

प्रचार-प्रसार करने वाले रूसी लोगों ने कैसे इस्तेमाल किया था, लेकिन इसे लेकर जकरबर्ग कभी सवालों के घेरे में नहीं आए थे।

इस मामले से सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सख्त रेग्युलेशन का दबाव भी बन सकता है। ब्रिटेन के एक सांसद ने सोमवार को कहा कि देश के प्राइवेसी वॉचडॉग को अधिक ताकत मिलनी चाहिए।

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जीत के बाद बोले अखिलेश- उनका घमंड टूट गया, उम्मीद है अब भाषा भी बदल जाएगी

अखिलेश यादव में सभी सहयोगी दलों  और जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उन सभी लोगों के सहयोग के बिना यह जीत संभव नहीं थी। यह जीत बहुत बड़ी है। यह उन तमाम लोगों की जीत है, जो गरीब, मजदूर, किसान, दलित और अल्पसंख्यक है।

बीजेपी पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि फूलपुर में तो फूल मुरझा गया। उनका घमंड टूट गया है। उम्मीद है कि अब उनकी भाषा बदल जाएगी। जिन अधिकारियों से हमने काम लिया। उन्हीं पर बीजेपी ने आंख बंद करके भरोषा किया।

कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़े एक सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा कि से संबंधों पर अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस से संबंध बने हुए हैं। नौजवान वो भी हैं, हम भी हैं।

ईवीएम पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ईवीएम में खामिया न होतीं तो जीत और बड़ी होती। उन्होंने बताया कि कई गांवों में ईवीएम के चलते घंटों मतदान नहीं हो सका। कई ईवीएम जब चेक कराई गई तो उसमें वोट पहले से पड़े थे। अखिलेश  ने तंज कसते हुए कहा कि ईवीएम से पूरा गुस्सा नहीं निकला, अगर बैलेट बॉक्स होता तो आवाज सुनने को मिलती और गुस्सा भी पूरा निकलता।

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विजय माल्या को झटका, यूके में किंगफिशर हारी केस, चुकाने होंगे लगभग 579 करोड़

भारत में अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जा चुके विजय माल्याb को एक और बड़ा झटका लगा है। उनकी किंगफिशर एयरलाइंस यूके में एक केस हार गई है। इसमें उन्हें एक कंपनी को 90 मिलियन डॉलर (लगभग ₹579 करोड़) क्लेम के तौर पर देने को कहा गया है।

यह केस अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़ा था। 62 साल के माल्या की कंपनी के खिलाफ सिंगापुर की बीओसी एविएशन नाम की कंपनी ने दायर किया था। खबरों के मुताबिक, मामला 2014 का है, तब किंगफिशर ने बीओसी ने कुछ प्लेन लीज पर लिए थे।

बीओसी एविएशन और किंगफिशर एयरलाइंस के बीच का यह मामला लीजिंग अग्रीमेंट को लेकर था। दोनों के बीच चार प्लेन को लेकर डील हुई थी, जिसमें से तीन डिलीवर किए जा चुके थे। बता दें कि माल्या पर भारतीय बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपया बकाया है। बीओसी एविएशन सिंगापुर और बीओसी एविएशन (आयरलैंड) ने इस मामले में किंगफिशर एयरलाइंस और यूनाइटेड ब्रुअरीज का नाम लिया था। यूनाइटेड ब्रुअरीज में भी माल्या की बड़ी हिस्सेदारी है।

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जांबाजी की अनोखी मिसाल : 8 लोगों की जिंदगी बचाने वाले कांस्‍टेबल ने कहा, 14 लोगों की जान जाने का दुख

मुंबई के कमला मिल्स कॉम्प्लेक्स गुरुवार देर रात रूफटॉप पर स्थित एक पब में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई. वहीं मुबंई पुलिस के एक कांस्‍टेबल ने आठ लोगों की जिंदगी बचाई और 200 लोगों को बाहर निकाला. वहीं एक फोटोग्राफर ने कांस्‍टेबल सुदर्शन शिवाजी शिंदे एक फोटो खींची जो इन दिनों वायरल हो गई है. इस फोटो में पुलिस कांस्‍टेबल अपने कंधों में एक महिला को आग की लपटों से निकालकर लेकर आ रहा है. मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पदललगीकर और महापौर विश्वनाथ महादेववार ने सोमवार कांस्‍टेबल के प्रयासों की प्रशंसा की.

कांस्‍टेबल सुदर्शन शिवाजी शिंदे ने कहा कि यह अच्‍छी बात है कि साल के पहले दिन मेरी प्रशंसा की गई लेकिन मैं दुखी हूं कि 14 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी. कमला मिल्‍स के रूफ टॉप पर स्थि‍त 1 अबव रेस्‍टोरेंट में पार्टी के दौरान आग लगी और देखते ही देखते मोजो बिस्‍तरो समेत कई ऑफिस और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया.

इस हादसे में अपना 29वां जन्‍मदिन मानने पहुंची खुशबू मेहता समेत 11 महिलओं की मौत हुई थी. इस हादसे में मरने वालों की उम्र 20 से 30 साल थी. डॉक्‍टरों का कहना था कि मरने वाले सभी लोगों की मौत दम घुटने के चलते ही हुई है.

रात करीब 12.30 कांस्‍टेबल शिंदे को वायरलेस पर आग लगने की सूचना मिली. वह अपने साथियों के साथ घटनास्‍थल पर पहुंचे. उन्‍होंने वहां कई एंबुलेंस, फायर की गाड़ियां और पुलिस की कार देखी. लोग मदद के लिए चिल्‍ला रहे थे. कमला मिल्‍स की छत पर आग बहुत भयंकर थी जिसके चलते काफी दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. शिंदे ने एनडीटीवी को बताया कि उसने फायरकर्मियों के साथ सीढ़ियों की मदद से कमला मिल्‍स की छत पर जाने का फैसला लिया.

उन्‍होंने कहा कि जब मैं ऊपर पहुंचा तो सब जगह धुंआ था और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इतना ही नहीं सांस लेना और आंखें खुला रखना एक चुनौती थी. इसके फायर की टीम ने एक्जिट वाले दरवाजे को तोड़ा ताकि आग पर काबू पाया जा सके. वहां हमने वॉशरूम के पास कुछ महिलाएं देखी और इसके बाद हमने एक-एककर उन महिलाओं को नीचे उतारा. उन्‍होंने बताया कि उस वक्‍त उन महिलाओं को वहां से ले जाने के लिए उनके पास कोई स्‍ट्रेचर नहीं था इसलिए उन्‍होंने उन महिलाओं को कंधों पर लादकर वहां से बाहर निकाला.

वहीं इस मामले में 18 वर्षीय एक छात्र ने बंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मध्य मुंबई में कमला मिल परिसर में एक पब में गत 29 दिसंबर को लगी भीषण आग की घटना की सीबीआई जांच कराने का निर्देश देने की मांग की है. ब्रिटेन में पढ़ रहे गर्व सूद ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि कमला मिल्स के मालिकों के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप लगाये जाएं.

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200 साल पुरानी जंग की बरसी पर पुणे में हिंसा, एक की मौत; मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में धारा 144 लागू

भीमा-कोरेगांव की 200 साल पुरानी जंग की बरसी के मौके पर भीमा, पबल और शिकरापुर गांव में दलितों और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई। ये विवाद पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर पुणे-अहमदनगर हाइवे में पेरने फाटा के पास हुआ। लोगों ने हाईवे पर करीब 100 गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की। इस घटना के विरोध में मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में हिंसा और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। उधर, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई है। ऐसी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

Q&A में समझें पूरा मामला?

किस जंग की बरसी मना रहे थे लोग?

– 1 जनवरी 1818 में कोरेगांव भीमा की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत दर्ज की थी। इसमें कुछ संख्या में दलित भी शामिल थे।

– अंग्रेजों ने कोरेगांव भीमा में अपनी जीत की याद में जयस्तंभ का निर्माण कराया था। बाद में यह दलितों का प्रतीक बन गया।

विवाद की वजह क्या है?

– हर साल हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोग जयस्तंभ पर श्रद्धांजलि देते हैं। सोमवार को रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) ने जंग की 200वीं बरसी पर खास कार्यक्रम कराया था। इसमें महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री गिरीश बापट, बीजेपी सांसद अमर साबले, डेप्युटी मेयर सिद्धार्थ डेंडे और अन्य नेता शामिल हुए। इस मौके पर देशभर से करीब 2 लाख दलित यहां इकट्ठा हुए थे। मराठा कम्युनिटी इस प्रोग्राम का विरोध कर रही थी।

सोमवार को कैसे शुरू हुआ विवाद?

– शनिवार रात वढू बुद्रुक गांव में दो गुटों में विवाद हो गया था। इसके बाद सोमवार को भी तनाव के हालात थे। भीमा परिसर में कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग भगवा झंडे लेकर पहुंचे और हिंसा शुरू हो गई।

कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने क्या इंतजाम किए थे?

– आईजीपी (कोल्हापुर रेंज) विश्वास नांगरे-पाटिल ने बताया कि इलाके में सोमवार सुबह से ही तनावपूर्ण माहौल था। जिसके चलते कार्यक्रम वाली जगह पर भारी सुरक्षा की गई थी।

हिंसा का असर कहां-कहां हुआ?

– हिंसा को लेकर असर औरंगाबाद, ठाणे, मुंबई के कुछ इलाकों में दलित संगठन आरपीआई से जुड़े लोगों ने प्रोटेस्ट किया है। इसके अलावा बीड, परभणी, सोलापुर, जालना और बुलढाणा में भी प्रोटेस्ट हुआ है। कई जगहों से तोड़फोड़ की खबरें हैं। चेंबुर और गोवंडी के बीच प्रदर्शन के बाद हार्बर लाइन पर लोकल ट्रेन सर्विस प्रभावित हुई है। मुंबई और परभणी में भी लोगों ने ट्रेन रोकी।

हालात काबू में करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

– मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। मोबाइल टॉवर बंद करने और नेटवर्क जैमर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सीआरपीएफ की दो टुकड़ियां शिकरापुर स्टेशन में तैनात की गई है। पुलिस की 6 कंपनियां लगाई गई हैं। एंटी रॉइट स्क्वॉड भी तैनात की गई है।

सरकार ने क्या एक्शन लिया?

– देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे। हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थीं। कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई। इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा।”

– सीएम ने मृतक की फैमिली को 10 लाख मुआवजा देने का एलान किया है। साथ ही घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दे दिए गए हैं।

अपोजिशन ने क्या कहा?
– एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने इस हिंसा के लिए दक्षिणपंथी संगठनों की जिम्मेदार बताया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
– पवार ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाई जा रही थी। हर साल यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने यहां की फिजा को बिगाड़ दिया।”
– आरपीआई लीडर रामदास अठावले ने जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि 200 साल में ऐसी घटना नहीं हुई है।

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2017 में पीएम मोदी की 6-1 से बंपर जीत, कमलमय हुए ये प्रदेश

21 वीं सदी का 17 वां साल दस्तक दे रहा था और इसके साथ ही इस वर्ष को अनेकों राजनीतिक घटनाओं का गवाह भी बनना था। राजनीतिक तौर पर साल 2017 के सभी महीने किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहे। लेकिन फरवरी-मार्च के साथ नवंबर और दिसंबर का महीना कुछ राजनीतिक दलों के लिए जहां खुशी का लमहा लेकर आया तो कुछ के हिस्से में सिर्फ दुख और दर्द आया। कुछ राजनीतिक दलों और शख्सियतों को आत्मावलोकन की सीख दे गया तो कुछ के लिए ये संदेश कि सफलता को महफूज रखने के लिए आप को लगातार कोशिश करनी होगी। 2017 के जनवरी से दिसंबर के कालखंड में हम पीएम मोदी के उस प्रभामंडल की चर्चा करेंगे जिसका असर देश के सात सूबों में होने वाले चुनाव परिणाम में दिखा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा 14 साल का वनवास खत्म
जनवरी और फरवरी में उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड थी। लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजां में गरमी थी। राजनीतिक दल अवध पर कब्जे की तैयारी कर रहे थे। अवध पर कब्जे की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ के जरिए जाता है और जिसके हाथ से लखनऊ फिसला वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का सिर्फ सपना ही देख सकता है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार अपने काम के दम और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर समाजवादी झंडे को निर्बाध फहराने की तैयारी कर रही थी। इसके साथ ही केसरियां रंग भी यूपी को अपने रंग में सराबोर करने की तैयारी में था। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों से अथक और अकथ कोशिश की गई। चुनाव प्रचार चरम पर था और राजनीतिक दल अपनी तरकश से एक से बढ़कर एक तीर के जरिए एक दूसरे पर निशाना साध रहे थे।


भाजपा जहां 14 साल के वनवास को खत्म करने के लिए अपने आपको मौका देने की मांग कर रही थी। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता यूपी के लड़के करेंगे विकास का नारा बुलंद कर रहे थे। पीएम मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक थे। वो लोगों से अपील कर रहे थे कि ये लड़ाई ईमानदारों और भ्रष्टाचारियों के बीच की है। वो ये भी कहा करते थे कि यूपी की जनता वंशवाद,जातिवाद से तंग आ चुकी है। इसके साथ ही इन नेताओं की अपील का कितना असर पड़ेगा इसे लेकर राजनीतिक टीकाकार अलग अलग ढंग से भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो वो सभी के अनुमानों से जुदा था। यूपी की जनता ने अपना मत दे दिया था, देश का सबसे बड़ा सूबा अब उस राह पर चलने को तैयार था जो केसरिया रंग में रंग चुका था।

उत्तराखंड में प्रचंड विजय
उत्तर प्रदेश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड में चुनाव का आगाज हो चुका था। उत्तराखंड में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार दोबारा सरकार बनाने की तैयारी के साथ चुनाव मैदान में थी। लेकिन भाजपा देवभूमि की जनता को ये समझा रही थी कि किस तरह से कांग्रेस शासन में उत्तराखंड विकास की पटरी से उतर गया था। एक तरफ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनमत को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश करते रहे, वहीं भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी ने कहा कि एक ऐसी पार्टी के हाथ में आप सत्ता कैसे सौंप सकते हैं जिसका दामन दागदार है। देवभूमि की धरती पर दोनों दल अपने अपने अंदाज में एक दूसरे की वादों और दावों की धज्जियां उड़ा रहे थे। लेकिन जन का मत कुछ और ही था। इवीएम से जब परिणाम बाहर आने शुरू हुए तो नतीजे प्रत्याशित लेकिन चौंकाने वाले थे। देवभूमि की जनता का फैसला सार्वजनिक हो चुका था और केसरिया झंडा मैदान से लेकर पहाड़ तक फहर रहा था।

गोवा और मणिपुर बनाई सरकार
यूपी और उत्तराखंड के साथ पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और समुद्र के किनारे स्थित गोवा में भी चुनावी सरगर्मी तेज थी। भाजपा के विरोधी पणजी में जोरशोर से नोटबंदी के मुद्दे को उठा रहे थे। गोवा में विरोधी दल अपने तर्कों से समझाने की कोशिश कर रहे थे कि किस तरह से नोटबंदी ने गोवा की रीढ़ (पर्यटन व्यवसाय) को तोड़ दी है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी कहते रहे कि उनकी लड़ाई गरीबों के लिए है। नोटबंदी के समर्थन में उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। लेकिन गरीबों की पीड़ा को कम करने के लिए इस तरह का कदम उठाना जरुरी था। गोवा और मणिपुर में भाजपा-कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर में भाजपा भारी पड़ी और गोवा के साथ मणिपुर में कमल खिलने में कामयाब रहा।

पंजाब में  कांग्नेस को मिली कामयाबी
यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ ही पंजाब में विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार परवान चढ़ चुका था। पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस और आप मोर्चा खोले थी। कांग्रेस के नेता इस तथ्य को वहां की जनता के सामने रख रहे थे कि कैसे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में पंजाब नशे की गिरफ्त में आ गया। कांग्रेस और आप के नेता जनता को ये बताने में कामयाब रहे कि पंजाब का भला सिर्फ कांग्रेस सोचती है और मौका मिलने पर वो प्रदेश को तरक्की के राह पर ले जायेंगे। पंजाब की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया और सत्ता अमरिंदर सिंह के हाथों सौंप दी।


कमलमय हुआ गुजरात

साल 2017 के पहले तीन महीनों में देश के इन सूबों में चुनावी शोर खत्म हो चुका था। देश की राजनीति किसी और बड़ी घटना की गवाह बनने वाली थी। एक जुलाई 2017 को भारत एक बाजार में बदल चुका था। एक राष्ट्र और एक कर के जरिए जीएसटी को लाया जा चुका था। ठीक उसके बाद पीएम के गृहराज्य गुजरात और देवभूमि हिमाचल में विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी। राजनीति के जानकारों का मानना था कि गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के लिए लिटमस टेस्ट होगा। इसके साथ ही कई जानकारों का कहना था कि गुजरात में पाटीदार, दलित और पिछड़ो के मुद्दे पर मौजूदा भाजपा सरकार बैकफुट पर है। यही नहीं जीएसटी का फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी कहा करते थे कि केंद्र की मोदी सरकार महज कुछ लोगों के फायदे के लिए सोचती है। ये बात अलग है कि इवीएम से निकले हुए परिणाम कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे। गुजरात में छठी बार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन चुनाव नतीजे कुछ संकेत भी दे गए।

देवभूमि हिमाचल में खिला कमल
इसके साथ ही देवभूमि हिमाचल में कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में भ्रष्टाचार का मामला छाया रहा। भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी लोगों तक ये छाप छोड़ने में कामयाब रहे कि कांग्रेस का मतलब ही भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए वीरभद्र की सरकार से छुटकारा पाना ही होगा। कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी लड़ाई में जनता ने अपने नायक पीएम मोदी पर भरोसा किया और राज्य की कमान भाजपा के हाथों में सौंप दी।