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करवा चौथ स्पेशल: अनोखा है बरवाड़ा का चौथ माता मंदिर

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गांव में स्थित है चौथ माता का एक मंदिर, जिसके नाम पर इस गांव का नाम ही बरवाड़ा से बदल कर चौथ का बरवाड़ा हो गया। ये चौथ माता का सबसे प्राचीन आैर सबसे अधिक ख्याति प्राप्त मंदिर माना जाता है। कहते हैं इस मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी। चौथ का बरवाड़ा, अरावली पर्वत श्रंखला में बसा हुआ मीणा व गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र है। बरवाड़ा का नाम 1451 में चौथ माता के नाम पर चौथ का बरवाड़ा घोषित किया गया था।यहां पर चौथ माता मंदिर के अलावा मीन भगवान का एक भव्य मंदिर आैर भी है।

राजस्थानी शैली का खूबसूरत मंदिर

चौथ माता मंदिर करीब एक हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर शहर से करीब 35 किमी दूर है। ये स्थान पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है आैर इसकार प्राकृतिक सौंदर्य मन को मोहने वाला है। इस जगह पर सफेद संगमरमर से बने कई स्मारक हैं। दीवारों और छत पर जटिल शिलालेख के साथ यह मंदिर वास्तुकला की परंपरागत राजपूताना शैली के लक्षणों को प्रकट करता है। मंदिर में वास्तुकला की परंपरागत राजपूताना शैली देखी जा सकती है। यहां तक पहुंचने के लिए करीब 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। देवी की मूर्ति के अलावा, मंदिर परिसर में भगवान गणेश और भैरव की मूर्तियां भी हैं। 1452 में मंदिर का जीर्णोद्घार किया गया था। जबकि मंदिर के रास्ते में बिजली की छतरी और तालाब 1463 में बनवाया गया। बताते हैं महाराजा भीम सिंह पंचाल के पास एक गांव से चौथ माता की मूर्ति लाए थे।

लगता है भक्तों का जमावड़ा

चौथ का बरवाड़ा बेशक एक छोटा सा इलाका है, जहां शक्तिगिरी पर्वत पर मंदिर बना हुआ है। इसके बावजूद ये श्रद्घालुआें का प्रिय धार्मिक स्थल बना हु है। चौथ माता को हिन्दू धर्म की प्रमुख देवी मानी जाती है, जिनके बारे में विश्वास है कि वे स्वयं माता पार्वती का एक रूप हैं। यहां हर महीने की चतुर्थी पर लाखों दर्शनार्थी माता जी के दर्शन हेतु आते हैं। चौथ का बरवाड़ा शहर में हर चतुर्थी को स्त्रियां माता जी के मंदिर में दर्शन करने के बाद व्रत खोलती है एवं सदा सुहागन रहने आशीष प्राप्त करती है। करवा चौथ एवं माही चौथ पर यहां लाखों की तादाद में दर्शनार्थी पहुंचते है। चौथ माता के दर्शनों के लिए स्त्रियों की भीड़ पुरुषों की अपेक्षा अधिक रहती है क्योंकि इस मंदिर को सुहाग के लिए आर्शिवाद प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

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श्रीकृष्ण से लेकर इंद्र तक से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी, जानें क्यों मनाते हैं राखी

मुख्य रूप से रक्षाबन्धन को हिन्दू आैर जैन त्योहार के तौर पर मान्यता प्राप्त है। ये प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। सावन में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी अर्थात रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व होता है। ये सूत्र कच्चे सूत से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, सोने आैर चाँदी जैसी मंहगी धातु तक से र्निमित हो सकते हैं। हांलाकि राखी सामान्यतः बहनें ही भाई को बांधती हैं परन्तु कर्इ स्थानों पर बेटियों द्वारा पिता या परिवार के बड़े लोगों को, ब्राह्मणों, आैर गुरुओं को भी बांधने की परंपरा है। राखी बांधने के पीछे मूल भावना प्रेम आैर रक्षा का आश्वासन ही होता है। कन्याएं अपने भार्इ आैर पिता को राखी इसी भावना के तहत बांधती हैं। राखी से जुड़ी कथायें भी इसी का संदेश देती हैं। राखी कैसे शुरू हुर्इ इससे जुड़ी इसी तरह की कर्इ कथायें बतार्इ जाती हैं।

भगवान विष्णु आैर बलि की कथा

कहते हैं कि भगवान विष्णु के प्रभाव से जब राजा बलि को पताल लोक में जाना पड़ा इससे देवताओं की रक्षा हुई तभी से हिंदू धर्मावलंबी रक्षाबंधन मनाते हैं। दूसरी आेर उसी समय बलि ने विष्णु जी से अपने साथ रहने का आर्शिवाद प्राप्त कर लिया आैर उससे अपने पति को वापस लाने आैर अपने साथ रखने के लिए माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधीं आैर बदले में अपने पति को वापस प्राप्त किया। तबसे राखी की परंपरा की शुरूआत मानी जाती है, क्योंकि इस तरह लक्ष्मी जी के सौभाग्य की रक्षा हुर्इ। बलि से जुड़ा ये श्लोक भी इसी की पुष्टि करता है। येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं। हे रक्षे मतलब राखी! तुम अडिग रहना यानि तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।

इंद्र से जुड़ी कथा

भविष्यपुराण के अनुसार देवराज इंद्र जब देव दानव युद्घ में दानवों से पराजित हो रहे थे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए उपरोक्त श्लोक पढ़ा था जिसके चलते ना सिर्फ इंद्र की रक्षा हुर्इ थी बल्कि उनकी जीत भी हुर्इ थी। इसे भी रक्षाबंधन की शुरूआत कहा जाता है।

कृष्ण आैर युधिष्ठिर की कथा

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में भी रक्षाबन्धन का प्रसंग है ये कहा जाता है। इसी प्रकार मान्यता है कि द्वापर युग में ही युधिष्ठिर ने वासुदेव नंदन श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा चली आ रही है। अपनी इन्हीं विशेषताआें के चलते धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने वाला माना जाता है।

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फेसबुक पर दिल लगा गायब हुई नाबालिग को मुंबई से रुड़की लेकर पहुंची पुलिस

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अपने प्रेमी से शादी करने घर से भागकर मुंबई पहुंची किशोरी को रुड़की पुलिस मंगलवार को ले आई। यहां पुलिस ने परिजनों को कोतवाली में बुलाकर नाबालिग के बयान दर्ज किए। साथ ही उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया। नाबालिग के सकुशल घर पहुंचने पर पुलिस ने भी राहत की सांस ली।

सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की किशोरी की मुंबई के युवक से फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। फेसबुक पर ही दोनों ने अपने मोबाइल नंबर एक-दूसरे को दिए और फिर बातचीत शुरू हो गई। इस बीच दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। युवक ने किशोरी को मुंबई में अपने घर का पूरा पता भी बताया। इस बीच वह अपने प्रेमी से शादी करने की जिद करने लगी। इस पर प्रेमी ने शादी करने से इंकार कर दिया। इस बात से नाराज होकर किशोरी घर पर बिना बताए प्रेमी से शादी करने के लिए मुंबई चली गई। परिजनों ने उसकी खोजबीन की, उसका पता नहीं लगने पर परिजनों ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस भी लगातार उसकी छानबीन कर रही थी। इस बीच करीब तीन दिन पूर्व रुड़की पुलिस के पास मुंबई पुलिस ने कॉल कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। साथ ही बताया कि वह मुंबई में नारी निकेतन में रह रही है। इंस्पेक्टर साधना त्यागी ने बताया कि पुलिस नाबालिग को मुंबई से रुड़की ले आई है और उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।

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एक कहानी जो यकीनंद आपके दिल को छु जायेगी।

एक लड़की की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ एक सीधे-साधे लड़के से की जाती है जिसके घर मे एक मां के आलावा और कोई नहीं है। दहेज में लड़के को बहुत सारे उपहार और पैसे मिले होते हैं। लड़की किसी और लड़के से बेहद प्यार करती थी और लड़का भी।

लड़की शादी हो के आ गयी अपने ससुराल, सुहागरात के वक्त लड़का दूध लेके आता है तो दुल्हन सवाल पूछती है अपने पति से…एक पत्नी की मर्जी के बिना पति उसको हाथ लगाये तो उसे बलात्कार कहते है या हक?

पति – आपको इतनी लम्बी और गहरी जाने की कोईजरूरत नहीं है..बस दूध लाया हूँ पी लिजीयेगा। हम सिर्फ आपको शुभरात्रि कहने आये थे कहके कमरे से निकल जाता है। लड़कीमन मारकर रह जाती है क्योंकि लड़की चाहती थी कीझगड़ा हो ताकी मैं इस गंवार से पिछा छुटा सकूँ ।है तो दुल्हन मगर घर का कोई भी काम नहीं करती। बसदिनभर online रहती और न जाने किस किस से बातेंकरती मगर उधर लड़के की माँ बिना शिकायत के दिन भरचुल्हा चौका से लेकर घर का सारा काम करती मगर हरपल अपने होंठों पर मुस्कुराहट लेके फिरती । लड़का एककम्पनी मे छोटा सा मुलाजीम है और बेहद ही मेहनती औरइमानदार। करीब महीने भर बित गये मगर पति पत्नीअब तक साथ नहीं सोये… वैसे लड़का बहुत शांत स्वाभाववाला था इसलिए वह ज्यादा बातें नहीं करता था, बसखाने के वक्त अपनी पत्नी से पूछ लेता था कि, कहा खाओगी..अपने कमरे में या हमारे साथ। और सोने से पहले डायरी लिखने की आदत थी जो वह हर रात को लिखता था।ऐसे लड़की के पास एक स्कूटी था वह हर रोज बाहरजाती थी पति के अफीस जाने के बाद और पति के वापसलौटते ही आ जाती थी। छुट्टी का दिन था लड़का भीघर पे ही था तो लड़की ने अच्छे भले खाने को भी गंदा कहके माँ को अपशब्द बोलके खाना फेंक देती है मगर वह शांत रहने वाला उसका पति अपनी पत्नी पर हाथ उठा देता है मगर माँ अपने बेटे को बहुत डांटती है। इधर लड़की को बहाना चाहिए था झगड़े का जो उसे मिल गयाथा, वह पैर पटकती हुई स्कूटी लेके निकल पड़ती है। लड़की जो रोज घर से बाहर जाती थी वह अपने प्यार से मिलने जाती थी, लड़की भले टूटकर चाहती थी लड़के को मगर उसे पता था की हर लड़की की एक हद होती है जिसे इज्जत कहते हैं, वह उसको बचाये रखी थी। इधर लड़कीअपने प्यार के पास पहुँचकर कहती है। अब तो एक पल भी उस घर मे नहीं रहना है मुझे । आज गंवार ने मुझपर हाथ उठाके अच्छा नही किया ।

लड़का – अरे तुमसे तो मैं कब से कहता हूँ की भाग चलो मेरेसाथ कहीं दूर मगर तुम हो की आज कल आज कल पे लगीरहती हो।

लड़की – शादी के दिन मैं आई थी तो तुम्हारे पास। तुमही ने तो लौटाया था मुझे ।

लड़का – खाली हाथ कहा तक भागोगे तुम ही बोलो..मैंनेतो कहा था कि कुछ पैसे और गहने साथ ले लो तुम तोखाली हाथ आई थी।आखिर दूर एक नयी जगह मे जिंदगी नये सिरे से शुरू करने केलिए पैसे तो चाहिए न?

लड़की – तुम्हारे और मेरे प्यार के बारे में जानकर मेरे घरवालो ने बैंक के पास बुक एटी एम और मेरे गहने तक रखलिये थे। तो मैं क्या लाती अपने साथ । हम दोनों मेहनत करके कमा भी तो सकते थे।

लड़का – चालाक इंसान पहले सोचता है और फिर काम करता है। खाली हाथ भागते तो ये इश्क का भूत दो दिन में उतर जाता, समझी?और जब भी तुम्हें छुना चाहता हूँ बहुत नखरे है तुम्हारे ।बस कहती हो शादी के बाद।

लड़की – हाँ शादी के बाद ही अच्छा होता है ये सब औरसब तुम्हारा तो है। मैं आज भी एक कुवारी लड़की हूँ ।शादी करके भी आज तक उस गंवार के साथ सो न सकीक्योंकि तुम्हें ही अपना पति मान चुकी हूँ बस तुम्हारेनाम की सिंदूर लगानी बाकी है। बस वह लगा दो सबकुछतुम अपनी मर्जी से करना।लड़का – ठीक है मैं तैयार हूँ । मगर इस बार कुछ पैसे जरूरसाथ लेके आना, मत सोचना हम दौलत से प्यार करते हैं ।हम सिर्फ तुमसे प्यार करते है बस कुछ छोटी मोटीबिजनेस के लिए पैसे चाहिए ।

लड़की – उस गंवार के पास कहा होगा पैसा, मेरे बाप से 3 लाख रूपया उपर से मारूती कार ली है।बस कुछ गहने है वह लेके आउगी आज।लड़का लड़की को होटल का पता देकर चला जाता है ।लड़की घर आके फिर से लड़ाई करती है।मगर अफसोस वह अकेली चिल्लाती रहती है उससे लड़नेवाला कोई नहीं था।रात 8 बजे लड़के का मैसेज आता है वाटसप पे की कब आरही हो?लड़की जवाब देती है सब्र करो कोई सोया नहीं है। मैं12 बजे से पहले पहुँच जाउगी क्योंकि यंहा तुम्हारे बिना मेरी सांसे घुटती है।

लड़का -ओके जल्दी आना। मैं होटल के बाहर खड़ा रहूंगाbye…लड़की अपने पति को बोल देती है की मुझे खाना नहीं चाहिए मैंने बाहर खा लिया है इसलिए मुझे कोई परेशानन करे इतना कहके दरवाजा बंद करके अंदर आती हैकी…पति बोलता है की…वह आलमारी से मेरी डायरी दे दो फिर बंद करना दरवाजा। हम परेशान नहीं करेंगे ।लड़की दरवाजा खोले बिना कहती है की चाभीया दो अलमारी की।

लड़का – तुम्हारे बिस्तर के पैरों तले है चाबी ।मगर लड़की दरवाजा नहीं खोलती वल्की जोर जोर से गाना सुनने लगती है। बाहर पति कुछ देर दरवाजापिटता है फिर हारकर लौट जाता है। लड़की ने बड़े जोर से गाना बजा रखा था। फिर वह आलमारी खोलके देखतीहै जो उसने पहली बार खोला था, क्योंकि वह अपना समान अलग आलमारी मे रखती थी।आलमारी खोलते ही हैरान रह जाती है।

आलमारी में उसके अपने पास बुक एटी एम कार्ड थे जो उसके घरवालोने छीन के रखे थे, खोलके चेक किया तो उसमें वह पैसे भी एड थे जो दहेज मेलड़के को मिले थे। और बहुत सारे गहने भी जो एक पेपर केसाथ थे और उसकी मिल्कीयेत लड़की के नाम थी, लड़कीबेहद हैरान और परेशान थी।

फिर उसकी नजर डायरी मेपड़ती है और वह जल्दी से वह डायरी निकालके पढ़ने लगती है। लिखा था, तुम्हारे पापा ने एक दिन मेरी मां की जान बचाइ थी अपना खून देकर । मैं अपनी माँ से बेहद प्यारकरता हूँ इसलिए मैंने झूककर आपके पापा को प्रणाम करकेकहा की…आपका ये अनमोल एहसान कभी नही भूलूंगा, कुछदिन बाद आपके पापा हमारे घर आये हमारे तुम्हारेरिश्ते की बात लेकर मगर उन्होंने आपकी हर बात बताईहमें की आप एक लड़के से बेहद प्यार करती हो। आपकेपापा आपकी खुशी चाहते थे इसलिए वह पहले लड़के कोजानना चाहते थे। आखिर आप अपने पापा की princessजो थी और हर बाप अपने Princess के लिए एक अच्छाइमानदार Prince चाहता है। आपके पापा ने खोजकर केपता लगाया की वह लड़का बहुत सी लड़की को धोखा देचुका है। और पहली शादी भी हो चुकी है पर आपको बतान सके क्योंकि उन्हें पता था की ये जो इश्क का नशा हैवह हमेशा अपनों को गैर और गैर को अपना समझता है।ऐक बाप के मुँह से एक बेटी की कहानी सुनकर मै अचम्भीतहो गया। हर बाप यंहा तक शायद ही सोचे। मुझे यकीनहो गया था की एक अच्छा पति होने का सम्मान मिले नमिले मगर एक दामाद होने की इज्जत मैं हमेशा पा सकताहूँ।मुझे दहेज मे मिले सारे पैसे मैंने तुम्हारे ए काउण्ट मे करदिए और तुम्हारे घर से मिली गाड़ी आज भी तुम्हारे घरपे है जो मैंने इसलिए भेजी ताकी जब तुम्हें मुझसे प्यार होजाये तो साथ चलेंगे कही दूर घूमने। दहेज…इस नाम सेनफरत है मुझे क्योंकि मैंने इ दहेज मे अपनी बहन और बापको खोया है। मेरे बाप के अंतिम शब्द भी येही थेकी..कीसी बेटी के बाप से कभी एक रूपया न लेना। मर्दहो तो कमाके खिलाना, तुम आजाद हो कहीं भी जासकती हो। डायरी के बिच पन्नों पर तलाक की पेपर हैजंहा मैंने पहले ही साईन कर दिया है । जब तुम्हें लगे कीअब इस गंवार के साथ नही रखना है तो साईन करके कहींभी अपनी सारी चिजे लेके जा सकती हो।लड़की …हैरान थी परेशान थी…न चाहते हुए भी गंवार केशब्दों ने दिल को छुआ था। न चाहते हुए भी गंवार केअनदेखे प्यार को महसूस करके पलके नम हुई थी।आगे लिखा था, मैंने तुम्हें इसलिए मारा क्योंकि आपने माको गाली दी, और जो बेटा खुद के आगे मा की बेइज्जतीहोते सहन कर जाये…फिर वह बेटा कैसा ।कल आपके भी बच्चे होंगे । चाहे किसी के साथ भी हो, तबमहसूस होगी माँ की महानता और प्यार।आपको दुल्हन बनाके हमसफर बनाने लाया हूँ जबरजस्तीकरने नहीं। जब प्यार हो जाये तो भरपूर वसूल कर लूँगाआपसे…आपके हर गुस्ताखी का बदला हम शिद्दत से लेंगे हमआपसे…गर आप मेरी हुई तो बेपनाह मोहब्बत करकेकिसी और की हुई तो आपके हक मे दुवाये माँग केलड़की का फोन बज रहा था जो भायब्रेशन मोड पे था,लड़की अब दुल्हन बन चुकी थी। पलकों से आशू गिर रहे थे ।सिसकते हुए मोबाइल से पहले सिम निकाल के तोड़ा फिरसारा सामान जैसा था वैसे रख के न जाने कब सो गई पतानहीं चला। सुबह देर से जागी तब तक गंवार अफीस जाचुका था, पहले नहा धोकर साड़ी पहनी । लम्बी सीसिंदूर डाली अपनी माँग मे फिर मंगलसूत्र ।जबकि पहले एक टीकी जैसी साईड पे सिंदूर लगाती थीताकी कोई लड़का ध्यान न देमगर आज 10 किलोमीटर से भी दिखाई दे ऐसी लम्बीऔर गाढी सिंदूर लगाई थी दुल्हन ने। फिर किचन मे जाकेसासुमा को जबर्दस्ती कमरे मे लेके तैयार होने को कहतीहै। और अपने गंवार पति के लिए थोड़े नमकीन थोड़े हलुवेऔर चाय बनाके अपनी स्कूटी मे सासुमा को जबर्दस्तीबिठाकर (जबकी कुछ पता ही नहीं है उनको की बहू आजमुझे कहा ले जा रही है बस बैठ जाती है)फिर रास्ते मे सासुमा को पति के अफीस का पता पूछकरअफीस पहुँच जाती है। पति हैरान रह जाता है पत्नी कोइस हालत मे देखकर।पति – सब ठीक तो है न मां?मगर माँ बोलती इससे पहले पत्नी गले लगाकर कहती हैकी..अब सब ठीक है…I love you forever…अफीस के लोग सब खड़े हो जाते है तो दुल्हन कहती हैकी..मै इनकी धर्मपत्नी हूँ । बनवास गई थी सुबह लौटीहूँअब एक महीने तक मेरे पतिदेव अफीस मे दिखाई नहीं देंगे

अफीस के लोग- ?????

दुल्हन – क्योंकि हम लम्बी छुट्टी पे जा रहें हैं साथ साथ।

पति- पागल..

दुल्हन – आपके सादगी और भोलेपन ने बनाया है।सभी लोग तालीया बजाते हैं और दुल्हन फिर से लिपटजाती है अपने गंवार से …जंहा से वह दोबारा कभी भी छूटना नहीं चाहती।बड़े कड़े फैसले होते है कभी कभी हमारे अपनों के मगर हम समझ नहीं पाते कि हमारे अपने हमारी फिकर खुद से ज्यादा क्यों करते हैं

** मां बाप के फैसलों का सम्मान करे**

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फॉर्च्यून की 50 हस्तियों की सूची में मुकेश अंबानी 24वें नंबर पर पहुंचे

एशिया के अमीरों की लिस्ट में शामिल कारोबारी मुकेश अंबानी को फॉर्च्यून की 50 मशहूर हस्तियों की लिस्ट में जगह मिली है।

इस लिस्ट में सुप्रीम कोर्ट की जानी-मानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंह और आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोषी को भी जगह दी गई है। आपको बता दें कि 19 अप्रैल को मुकेश अंबानी का जन्मदिन था और इस मौके पर इससे अच्छा तोहफा तो हो ही नहीं सकता है। अंबानी को इस लिस्ट में 24वां स्थान मिला है। गौरतलब है कि गुरुवार को वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट लीडर्स ऑफ 2018 में दुनियाभर के 50 महानतम पथप्रदर्शकों की रैंकिंग लिस्ट जारी की गई थी।

मुकेश अंबानी को लिस्ट में 24वां स्थान मिला

मुकेश अंबानी को लिस्ट में 24वां स्थान मिला

मुकेश अंबानी ने इस लिस्ट में जगह जियो के कारण मिली है। जिसने पिछले दो सालों से भी कम समय में बड़ी संख्या में भारतीयों के हाथ में इंटरनेट और मोबाइल डेटा पहुंचाया है और देश के टेलिकॉम मार्केट की तस्वीर को पूरी तरह से बदल दी है।

फॉर्च्यून ने मुकेश अंबानी की तारीफ की

फॉर्च्यून ने मुकेश अंबानी की तारीफ की

फॉर्च्यून ने मुकेश अंबानी की तारीफ करते हुए लिखा है कि मुकेश अंबानी ने एक सपने को पूरी तरह से हकीकत में बदल दिया, जिसके कारण बेहद कम पैसों में मुफ्त कॉल्स और डेटा मुहैया कराना, जिससे जियो के सारे कंपीटिटर या तो खत्म हो गए या उन्हें अपनी कीमतें कम करनी पड़ी हैं।

जियो कंपनी के 16 करोड़ ग्राहक बन चुके

जियो कंपनी के 16 करोड़ ग्राहक बन चुके

भारत में डेटा की खपत में भी 1100 प्रतिशत का उछाल आया है। जिससे जिओ को फायदा हुआ, आज जियो की वजह से भारत का हर छोटा-बड़ा इंसान इंटरनेट से जुड़ गया है, जो एक बहुत बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन है। आपको बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सितंबर 2016 में जिओ लॉन्च किया था। तब से अब तक कंपनी के 16 करोड़ ग्राहक बन चुके हैं।

 कौन हैं मुकेश अंबानी

कौन हैं मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी एक भारतीय उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। मुकेश रिलायंस के संस्थापक स्वर्गीय धीरुभाई अम्बानी के पुत्र और ‘रिलायंस धीरुभाई अम्बानी ग्रुप’ के अध्यक्ष अनिल अंबानी के बड़े भाई हैं।

मुंबई इंडियन्स टीम के भी मालिक हैं मुकेश अंबानी

मुंबई इंडियन्स टीम के भी मालिक हैं मुकेश अंबानी

मुकेश के रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल, तेल, गैस और रिटेल जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। वे इंडियन प्रीमियर लीग के अंतर्गत आने वाली क्रिकेट टीम मुंबई इंडियन्स टीम के भी मालिक हैं। सन 2012 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर ‘स्पोर्ट्स ओनर्स’ की सूची में स्थान दिया। अपनी कंपनी के अलावा मुकेश अंबानी अलग-अलग समय पर विभिन समितियों के सदस्य, अध्यक्ष और प्रतिष्ठित कंपनियों के बोर्ड मेंबर भी रहे हैं। वे भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट बैंगलोर’ के बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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नव वर्ष 2018 की आप सबको बधाई। Live, Love & Laugh!

बात ही कुछ ऐसी थी

मांगना ही क्यों मगर…

बड़ी दुविधा है यार!

ट्राय करके देख लो

वाह! क्या बात है।

मॉडर्न सांप है भाई!

भगवान ने पूरी दुनिया का दिमाग पप्पू को ही दे दिया है।

पति के सारे पैसे पत्नी पर खर्च हो जाते हैं।

देखा मैंने पहले ही बोला था, ये पप्पू के पास दिमाग बहुत ज्यादा है।

शादी से पहले जितना बोलना चाहते हो, उतना बोल लो जनाब।

कानून के हाथ और पत्नी की जुबान बहुत लंबी होती है।

इसके बाद तो पति खो गया होगा और इसके लिए कोई इश्तेहार भी नहीं आया होगा।

आपके शादी नहीं हो रही हो तो आप भी ये उपाय ट्राई करके देखिएगा।

आप नॉन-वेजिटेरियन है तो यह तरकीब आपके भी काम आएगी।

वो फ्रेशनेस भी क्या फ्रेशनेस हुआ करती थी।

आपने ठहाके लगा लिए हो तो अपने दोस्तों को भी मौका दीजिएगा।

(सौजन्य: Wittyfeed)