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कुमारस्वामी ने आठवीं पास को बनाया कर्नाटक का उच्च शिक्षा मंत्री

59 वर्षीय कुमारस्वामी खुद बीएससी डिग्रीधारक हैं। उन्होंने सवाल किया-‘क्या मुझे वित्त विभाग मिलना चाहिए?’ जीटी देवेगौड़ा ने मैसुरु जिले में चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हराया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस नाते वह कोई अहम विभाग की अपेक्षा रखते थे।

इस संबंध में कुमारस्वामी ने कहा– ‘कुछ लोगों की इच्छा खास विभागों में काम करने की होगी, लेकिन सभी विभागों में प्रभावी तरीके से काम करने का मौका है। हमें दक्षतापूर्वक काम करना है।’ उन्होंने कहा-‘क्या काम करने के लिए उच्च शिक्षा और लघु सिंचाई से भी अच्छा विभाग है?’

कर्नाटक में विभागों के बंटवारे से जद एस कोटे के दो मंत्री नाराज बताए जा रहे हैं। उनमें एक हैं, जीटी देवेगौड़ा, जो आठवीं पास हैं और उन्हें उच्च शिक्षा विभाग मिला है।

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ताजमहल Ownership केस: सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां का वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
– ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
– पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, “शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।”
– कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
– सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
– एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
– बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
– एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
– 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
– बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

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चीन की हर चाल का जवाब देने के लिए भारत भी कर चुका है पूरी तैयारी

चीन एक बार फिर से भारत से लगती सीमा पर तनाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसको देखते हुए भारत ने सीमाओं पर अपने जवानों की संख्‍या बढ़ा दी है। दरअसल यह कवायद चीन की उस नापाक चाल के बाद की जा रही है जिसके तहत वह भारत की सीमा से सटे तिब्बती इलाके में तेजी से ढांचों का निर्माण करने में लगा है। इसके अलावा एक दिन पहले ही चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में लोहित घाटी के दूसरी और चीन की तरफ से टावर खड़ा करने और सैन्‍य गतिविधियों के लिए पक्‍का निर्माण करने की बात सामने आई है। लिहाजा यह जरूरी हो गया है कि भारत भी इन इलाकों में सड़कों का नेटवर्क बढ़ाए, जिससे सेना की शीघ्रता के साथ आवाजाही हो सके।

सीमा के नजदीक एक्‍सप्रेस वे

चीन की नापाक चाल को सफल होने से रोकने के लिए भारत भी अपनी तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत की तैयारियों से पहले हम आपको बता दें कि चीन भारत से लगती सीमाओं पर क्‍या कुछ अब तक कर चुका है। सितंबर 2017 में तिब्‍बत से नेपाल को जोड़ने वाला हाईवे खोलने के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब एक और एक्‍सप्रेसवे खोला जो तिब्‍बत की राजधानी ल्‍हासा और निंगची को जोड़ता है। यह एक्‍सप्रेसवे 5.8 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ है और इसकी लंबाई करीब 409 किमी है। निंगची अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक है। इस एक्‍सप्रेस वे के जरिए ल्हासा और निंगची के बीच की दूरी महज पांच घंटों में पूरी की जा सकती है। पहले इसमें करीब आठ घंटे का समय लगता था। यह एक्‍सप्रेस वे इस तरह से बनाया गया है कि समय आने पर सैन्‍य साजोसामान तेजी से सीमा तक ले जाया जा सके।

सीमा के नजदीक एयरपोर्ट

इसके अलावा पिछले वर्ष ही चीन ने अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा के नजदीक तिब्‍बत का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट भी खोला है। भारतीय सीमा के नजदीक स्थित यह एयरपोर्ट टर्मिनल 10300 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2020 तक यह सालाना 750000 यात्रियों और 3 हजार टन माल संभालने लायक हो जाएगा। नया टर्मिनल तिब्बत में खुला छठा टर्मिनल है जो न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट पर स्थित है। चीन के इन कदमों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है।

क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस चीन की वेस्टर्न थियेटर कमान

इन सभी के अलावा चीन ने इसी वर्ष फरवरी में भारत से लगती सीमा पर वेस्टर्न थियेटर कमान को क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस किया है। यह सब अमेरिकी फौज की तैयारियों की तर्ज पर किया गया है। आपको बता दें कि वेस्टर्न थियेटर कमान भारत से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी संभालती है। क्यूटीएस-11 दरअसल, अमेरिकी सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली की तरह है। इसके अलावा यह सभी तरह के फायरआर्म्‍स पर काबू पाने में सक्षम है। इसके अलावा यह एक पूरी तरह से डिजिटलीकृत समेकित व्यक्तिगत सैनिक लड़ाकू प्रणाली भी है। राइफल और 20 मिलीमीटर ग्रेनेड लांचर वाली यह प्रणाली लक्ष्य के अंदर के सैन्यकर्मियों को नष्ट करने में सक्षम है।

चीन ने सीमा पर तैनात किए हैं फाइटर जेट

भारतीय सीमा से सटे इलाकों में अपने सेना के जमावड़े के साथ-साथ चीन ने इसी वर्ष तिब्‍बत से लगती भारतीय सीमा के निकट स्थित अपने वायुसेना के ठिकानों पर फाइटर जेट्स की संख्या 47 से बढ़ाकर 51 कर दी है। ल्हासा-गोंगका में चीन ने आठ फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इसके अलावा एयर मिसाइल सिस्टम्स समेत 22 एमआई-17 हेलिकॉप्टर्स सहित कई अन्य हथियार भी तैनात हैं। होपिंग-रिकाजे में चीनी वायु सेना के 18 एयरक्राफ्ट्स तैनात हैं। इसके अलावा 11 एमआई-17 अनमैन्ड एरियल वीकल्स भी शामिल हैं। यही नहीं चीन ने तिब्बत में भारत से लगती सीमा में जमीन से हवा पर मार करने वाली मिसाइलों को भी तैनात कर दिया है।

चीन को देखते हुए भारत की तैयारी

चीन की इस रणनीति ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। लिहाजा भारत ने चीन सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है। बीजिंग की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए सामरिक रूप से महत्वूपर्ण अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गश्त भी तेज कर दी गई है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारत ने तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में चीन की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए अपने निगरानी तंत्र को भी बेहद चाकचौबंद कर लिया है। इन क्षेत्रों की टोह लेने के लिए नियमित रूप से हेलीकॉप्टरों से भी गश्त की जा रही है। भारत दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी जैसे दुर्गम इलाकों में अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है। इन इलाकों में 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और नदियां हैं। इन क्षेत्रों से लगती सीमाओं पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव की काट के तौर पर भारत ने यह रणनीति अपनाई है।

अहम सामरिक इलाकों पर भी ध्यान

चीन के तिब्बती क्षेत्र से लगते अरुणाचल के गांव किबिथू में तैनात सेना के एक अधिकारी का कहना है, ‘डोकलाम के बाद हमने सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत, चीन और म्यांमार के ट्राई जंक्शन समेत अहम सामरिक इलाकों में सेना की तैनाती बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्त (लांग रेंज पेट्रोल्स) को बढ़ा रही है। इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिनों के लिए गश्त पर भेजी जाती है।

टी 72 से लेकर सुखोई तक तैनात

भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती करके चीन के सामने शक्ति प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है। अकेले अरुणाचल प्रदेश की रक्षा के लिए चार इंफेंटरी माउंटेन डिविजन लगाई गई हैं जिसमें 3 कॉर्प्स (दीमापुर) और 4 कॉर्प्स (तेजपुर) की हैं और दो कॉर्प्स को रिजर्व में रखा गया है। हर डिवीजन में करीब 1200 जवान तैनात हैं। तवांग जिसपर कि चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता रहा है वहां भी सैनिकों की संख्या ज्यादा है जो किसी भी तरह की नापाक हरकत को विफल कर सकती हैं।

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विराट का दीपिका पादुकोण संग काम करने से इनकार, आरसीबी को हुआ 11 करोड़ का नुकसान!

भारतीय क्रिकेट टीम और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के कप्तान विराट कोहली क्रिकेट के मैदान पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के कारण देश का एक बड़ा ब्रांड बन चुके हैं। यही वजह है कि आजकल कोहली एडवर्टाइजिंग वर्ल्ड के चहेते बने हुए हैं और कई प्रोडक्ट के ब्रांड एंबेसडर हैं। इसी बीच खबर आयी है कि कोहली के कारण आरसीबी को 11 करोड़ की डील से हाथ धोना पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रैवल इंडस्ट्री के एक ब्रांड ने आईपीएल में आरसीबी के साथ जुड़ने का फैसला किया था, लेकिन कोहली के एक एक्ट्रेस के साथ स्क्रीन शेयर से इंकार के बाद यह डील निरस्त हो गई है।

खबर के अनुसार, ट्रैवल एंड होटल इंडस्ट्री की कंपनी गोआईबीबो आगामी आईपीएल सीजन के लिए आरसीबी की टीम से जुड़ना चाहती थी। गोआईबीबो आरसीबी की को-स्पांसर बनना चाहती थी। गोआईबीबो चाहती थी कि कप्तान कोहली और टीम उनकी ब्रांड एंबेसडर दीपिका पादुकोण के साथ मिलकर कैंपेन करें। एक रिपोर्ट के अनुसार, विराट कोहली ने दीपिका पादुकोण के साथ काम करने से इंकार कर दिया। जिसके बाद गोआईबीबो को इस डील से अपने हाथ पीछे खींचने पड़े। दरअसल गोआईबीबो अपनी ब्रांड एंबेसडर दीपिका पादुकोण के बिना कैंपेन नहीं करना चाहती थी।

विराट कोहली की कप्तानी में इस बार फिर से आरसीबी से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। आरसीबी हमेशा से ही आईपीएल की मजबूत टीम रही है, लेकिन वह कभी भी आईपीएल खिताब नहीं जीत सकी है। ऐसे में फैन्स को उम्मीद होगी कि आईपीएल के 11वें सीजन में आरसीबी बेहतर प्रदर्शन करेगी। टीम को देखते हुए यह उम्मीद बेमानी भी नहीं है। अब देखने वाली बात होगी कि आरसीबी की टीम इस बार मैदान पर कैसा प्रदर्शन करती है।

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लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे के चलते बुधवार को भी नहीं हुआ कोई काम

तेलंगाना में आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के और कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर अन्नाद्रमुक के भारी हंगामे के कारण बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। 12 बजे दोबारा जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई अन्नाद्रमुक और टीआरएस के सदस्य हंगामा करने लगे जिस कारण बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन में व्यवस्था नहीं होने की वजह से अविश्वास प्रस्ताव आज भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

बता दें कि ऐसी ही स्थिति राज्यसभा में भी देखने को मिली। यहां अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे की वजह से बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। बजट सत्र के दूसरे चरण में पिछले दो सप्ताह की कार्यवाही हंगामे के कारण बाधित रहने के बाद तीसरे सप्ताह में भी कोई कामकाज नहीं हो पा रहा है और बुधवार को लगातार 13वें दिन भी प्रश्नकाल हंगामे की भेंट लोकसभा चढ़ गया। लोकसभा की कार्यवाही सुबह जैसे ही आरंभ हुई तो अन्नाद्रमुक और टीआरएस के सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के निकट पहुंच गये।

वहीं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रश्नकाल चलाने की कोशिश की किया लेकिन हंगामा थमता नहीं देख उन्होंने सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित कर दी। अन्नाद्रमुक और टीआरएस के सदस्य ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगा रहे थे। टीआरएस के सदस्यों ने ‘एक राष्ट्र, एक नीति’ की मांग वाली तख्तियां ले रखी थीं। बजट सत्र के दूसरे चरण में पांच मार्च को आरंभ होने के बाद से लोकसभा की कार्यवाही पीएनबी धोखाधड़ी मामले, आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग और तेलंगाना में आरक्षण के मुद्दे समेत कई विषयों पर लगभग रोजाना बाधित हो रही है।

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ISIS के चंगुल से भागे भारतीय हरजीत मसीह की कहानी पर सुषमा ने उठाया पर्दा

इराक में बीते दिनों अगवा हुए 39 भारतीय लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने मंगलवार को राज्‍यसभा में की। उन्‍होंने बताया कि 38 लोगों का डीएनए मैच हो गया है, जबकि 39वें का डीएनए 70 प्रतिशत तक मैच हो गया है। लाशों के ढेर में से भारतीयों के शवों को ढूंढा गया जिसके बाद उनके मारे जानें का पता चला। विदेश मंत्री ने बताया कि इन 39 भारतीयों के शवों को अमृतसर एयरपोर्ट लाया जाएगा। विदेश मंत्री ने बताया कि इनमें से 31 पंजाब के और चार हिमाचल प्रदेश के हैं। विदेश मंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के लोगों के प्रति संवेदना जताई। वहीं सुषमा ने बताया इनमें से एक भारतीय हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौट आया था लेकिन उसने जो कहानी सुनाई थी, वह झूठी थी।

सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा, जहां से उसने सुषमा स्वराज को फोन किया था। स्वराज ने कहा कि आईएसआईएस के आतंकियों ने एक कंपनी में काम कर रहे 40 भारतीयों को एक टेक्सटाइल कंपनी में भिजवाने को कहा था। उनके साथ कुछ बांग्लादेशी युवा भी थे। यहां पर उन्होंने बांग्लादेशियों और भारतीयों को अलग-अलग रखने को कहा लेकिन हरजीत मसीह ने अपने मालिक के संग जुगाड़ करके अपना नाम अली किया और बांग्लादेशियों वाले समूह में शामिल हो गया। यहां से वह इरबिल पहुंच गया। सुषमा ने बताया कि यह कहानी इसलिए भी सच्ची लगती है क्योंकि इरबिल के नाके से ही हरजीत मसीह ने उन्हें फोन किया था।

 

सुषमा ने आगे बताया, ‘हरजीत की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता।’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो।’

 

यह थी हरजीत मसीह की कहानी
मसीह ने बताया था कि किस तरह आईएस के आतंकी 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर किसी पहाड़ी पर ले गए थे। उसके मुताबिक, ‘आईएस के आतंकी हमें किसी पहाड़ी पर ले गए और हम सभी को किसी दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया। आतंकियों ने दो दिन तक हम सभी को अपने कब्जे में रखा।’

 

मसीह ने बताया, ‘एक रोज हम सभी को कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए। इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं। मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा। बाकी सभी लोग मारे गए।’ मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया।

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इच्‍छा मृत्‍यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 7 सवालों के जवाब जो आपको पता होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने देश में इच्‍छा मृत्‍यु को मंजूरी दे दी है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय का यह फैसला एक व्‍यक्ति की इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत पर सुनवाई के दौरान सुनाया। अपने देश में दया मृत्‍यु को पहले से ही कानूनी मान्‍यता है।

7 सवालों के जवाब जो आपको पता होना चाहिए

1- क्‍या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
एक मरणासन्‍न व्‍यक्ति की लिविंग विल यानी इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत को चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के नेतृत्‍व में संविधान पीठ ने मंजूरी दे दी है। पीठ ने कहा कि कुछ ऐसा तरीका होना चाहिए जिससे सम्‍मान के साथ मृत्‍यु हो सके। कोर्ट ने फैसले में कहा कि लिविंग विल तभी मान्‍य होगी बशर्ते वह मजिस्‍ट्रेट और दो गवाहों के समक्ष तैयार की गई हो। इच्‍छा मृत्‍यु का दुरुपयोग न हो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन तय की गई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने लिविंग विल का विरोध किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था क्‍या किसी मरणासन्‍न व्‍यक्ति को उसकी इच्‍छा के बगैर लाइफ सपोर्ट पर जीवित रखने को मजबूर किया जाना ठीक रहेगा?

2- क्‍या है इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत?
कोई स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति पहले से ही कानूनी ढंग से इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत या लिविंग विल तैयार करता है। वह अपनी वसीयत में इस बात का जिक्र करता है कि यदि भविष्‍य में उसका स्‍वास्‍थ्‍य इतना बिगड़ जाए कि वह मरणासन्‍न अवस्‍था में पहुंच जाए। ऐसी अवस्‍था में उसे जीने की उम्‍मीद धूमिल हो जाए लेकिन उसके प्राण न निकल रहे हों तो उसे इच्‍छा मृत्‍यु दे दी जाए।

3- क्‍या है दया मृत्‍यु?
जब कोई मरीज किसी गंभीर बीमारी से अचेत पड़ा हो और उसके ठीक होने की संभावना न बची हो। जैसे वह ब्रेन डेट हो चुका हो लेकिन उसका हार्ट काम कर रहा हो या फिर वह कोमा या उसकी जैसी स्थिति में लाइफ सपोर्ट पर पड़ा हो। दूसरे शब्‍दों में कहें तो डॉक्‍टर यह मान चुके हों कि अब उसे ठीक कर पाना संभव नहीं है तो उसका कोई नजदीकी रिश्‍तेदार या तीमारदार दया मृत्‍यु के लिए कहे।

4- कैसे दी जाती है इच्‍छा मृत्‍यु?
दुनिया में दो प्रकार से किसी को इच्‍छा मृत्‍यु दी जाती है। एक को एक्टिव यूथेनेशिया कहते हैं और दूसरे को पैसिव यूथेनेशिया कहा जाता है। दुनिया में जहां भी इच्‍छा मृत्‍यु कानूनी रूप से मान्‍य है वहां ज्‍यादातर पैसिव यूथेनेशिया दिया जाता है।

5- क्‍या है एक्टिव यूथेनेशिया?
जब कोई मेडिकल प्रैक्टिशनर या अन्‍य व्‍यक्ति के द्वारा कुछ करने से किसी मरणासन्‍न मरीज की मौत हो जाए तो इसे एक्टिव यूथेनेशिया कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी मरणासन्‍न मरीज को जहर का इंजेक्‍शन लगा देना ताकि उसकी मृत्‍यु हो जाए।

6- क्‍या है पैसिव यूथेनेशिया?
जब किसी मरणासन्‍न व्‍यक्ति के जीवित रहने के लिए डॉक्‍टरों द्वारा कुछ प्रयास न किया जाए ताकि वह मरीज मौत के रास्‍ते चला जाए तो इसे पैसिव यूथेनेशिया कहते हैं। उदाहरण के लिए सालों से कोमा में रह रहे व्‍यक्ति का लाइफ सपोर्ट हटा देना।

7- कब से लीगल है पैसिव यूथेनेशिया?
अरूणा शानबाग के दया मृत्‍यु वाली याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च, 2011 को एक फैसला दिया। कोर्ट ने माना कि कुछ शर्तों के साथ पैसिव यूथेनेशिया द्वारा मरणासन्‍न मरीज को दया मृत्‍यु की इजाजत दी जा सकती है। शर्तों के मुताबिक या तो मरीज के मस्तिष्‍क की मौत यानी ब्रेन डेड हो चुका हो या फिर वह ‘परसिस्‍टेंट वेजिटेटिव स्‍टेट’ यानी उसका मस्तिष्‍क कोई प्रतिक्रिया न दे रहा हो बोले तो कोमा जैसी स्थिति। ऐसे मरीज को मेडिकल बोर्ड की सहमति के बाद दया मृत्‍यु पैसिव यूथेनेशिया द्वारा दी जा सकती है।

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ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामला : ‘आप’ विधायकों को राहत, हाईकोर्ट ने उपचुनाव की नोटिफिकेशन जारी करने पर लगाई रोक

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में आम आदमी पार्टी के लिए थोड़ी राहत भरी खबर है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘आप’ के 20 विधायकों की अयोग्यता के फैसले पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली सुनवाई होने तक दिल्ली में उपचुनाव की नोटिफिकेशन जारी नहीं करने को कहा है. इसके साथ ही अदालत ने केंद्र की अधिसूचना पर अंतरिम स्थगनादेश जारी करने से इनकार कर दिया है. अयोग्य करार दिए जाने को चुनौती देने वाली आप विधायकों की याचिकाओं पर अदालत ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनावाई सोमवार को होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी के अयोग्य विधायकों की तरफ से कहा गया था कि चुनाव आयोग ने हमें पहले नहीं बताया था कि वह फैसला करने जा रहा है. न्यूज पेपर के माध्यम से हमें पता चला कि चुनाव आयोग फ़ैसला कर रहा है. अरोड़ा ने कभी हमें नहीं सुना न ही वह तस्वीर में थे, लेकिन ऑर्डर में उनका भी नाम है. चुनाव आयोग के एक सदस्य ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था, जबकि दूसरे ने कभी सुनवाई ही नहीं की. 18 मार्च 2016 को नोटिस हमें मिला जिसका जवाब हमनें दिया.

दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि ये स्पीकर चुनाव आयोग को कहते हैं कि सीट खाली है. उसके बाद चुनाव आयोग चुनाव को लेकर काम करता है. दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा कि कोई भी पक्ष इस दरमियान कोई कदम नहीं उठाएगा और चुनाव की घोषणा नहीं की जाएगी.

ये हैं अयोग्य करार दिए गए ‘आप’ के 20 विधायक

  1. आदर्श शास्त्री
  2. अलका लांबा
  3. संजीव झा
  4. कैलाश गहलोत
  5. विजेंदर गर्ग
  6. प्रवीण कुमार
  7. शरद कुमार चौहान
  8. मदन लाल
  9. शिव चरण गोयल
  10. सरिता सिंह
  11. नरेश यादव
  12. राजेश गुप्ता
  13. राजेश ऋषि
  14. अनिल कुमार बाजपेई
  15. सोम दत्त
  16. अवतार सिंह
  17. सुखबीर सिंह
  18. मनोज कुमार
  19. नितिन त्यागी
  20. जरनैल सिंह

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हम अगले हफ्ते सोमवार को सुनवाई करेंगे. तब तक चुनाव आयोग जवाब दाखिल करे.
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा कि अगर आप इस मामले में लिखित आदेश चाहते हैं तो हम दे सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि सोमवार को मामले की सुनवाई करे और उसी दिन इस पूरे मामले का निपटारा भी कर दे. हाईकोर्ट ने फिलहाल राष्ट्रपति के अयोग्य करार देने को नोटिफिकेशन पर रोक लगाने से इंकार किया.

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पाकिस्तान पहुंची UN टीम, पर सईद ने भारत-US की कोशिशों के खिलाफ चला अपना दांव

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की टीम के पैर रखने से पहले अपना दांव चल दिया है. इस टीम के पाक दौरे की वजह से हाफिज सईद को अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा था. बुधवार दोपहर को यह टीम पाकिस्तान पहुंची, लेकिन तब तक हाफिज खुद को सुरक्षित कर चुका था.

जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ने इस टीम के दौरे की वजह से मंगलवार शाम को लाहौर हाई कोर्ट में अपील की कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. कोर्ट ने हाफिज सईद की अपील सुनने के बाद उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

सईद ने कहा था कि भारत और अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तानी सरकार उसे फिर से गिरफ्तार कर सकती है. हाफिज की शिकायत के बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी सरकार को हाफिज के खिलाफ कोई आशंकित कदम लेने से रोक दिया है.

जानकारी के मुताबिक यूएनएससी की 1267 सेंक्शंस कमेटी की निगरानी समिति बुधवार दोपहर को पाकिस्तान पहुंच गई. समिति यह देखने के लिए आई है कि पाकिस्तान यूएन के प्रतिबंधों को लागू कर रहा है या नहीं. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तानी सरकार यूएन की कमेटी को हाफिज सईद या उसके परिसरों तक नहीं जाने देगी.

इससे पहले, हाफिज ने मंगलवार शाम को ही हाफिज सईद ने अपने वकील एके डोगर के जरिए अदालत में याचिका देकर कहा था कि उसके या उसके संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए. उसने इस याचिका में अपने चैरिटी अस्पतालों और स्कूलों का भी हवाला दिया था.

आपको बता दें कि हाफिज सईद को पिछले साल नवंबर में ही नजरबंदी से रिहाई मिली है. इसके बाद से वह पाकिस्तानी राजनीति में आने की कोशिश में लगा है. उसने इसके लिए नई राजनीतिक पार्टी ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ भी बनाई है.

माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना हाफिज सईद के राजनीति में आने में उसकी मदद कर रही है. पिछले दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस ही नहीं है तो उस पर कैसे कार्रवाई करें.

हाफिज का नाम 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 में शामिल किया गया था. वहीं अमेरिका ने जून 2014 में लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन करार दिया था.

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यरुशलम पर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन, मनाया गया आक्रोश दिवस

इस्लामी अतिवादी संगठन हमास ने फलस्तीनी नेताओं से शांति प्रक्रिया से हट जाने और इजरायल के खिलाफ नए सिरे से संघर्ष छेड़ने की अपील की है। फलस्तीनियों के हक के लिए हिंसक संघर्ष करने वाले हमास ने शुक्रवार को आक्रोश दिवस मनाते हुए यह अनुरोध किया। हमास ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा दिए जाने के अमेरिकी फैसले के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में अमेरिका के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए और पथराव हुआ। दुनिया के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होने की खबर है। इस बीच इजरायल ने पूर्वी यरुशलम में नए आवास बनाने की घोषणा की है।

यरुशलम में अमेरिकी दूतावास स्थानांतरित करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले ने मुस्लिम जगत को हिला कर रख दिया है। अभी तक कोई भी मुस्लिम देश अमेरिका के फैसले के साथ खड़ा नहीं हुआ है। फैसले के खिलाफ स्वाभाविक रूप से सबसे तीखी प्रतिक्रिया फलस्तीन के कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में हुई है। गुरुवार को फलस्तीनी आंदोलनकारियों की इजरायली सेना के साथ हुई हिंसक झड़पों में 31 लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार ये लोग इजरायली सेना की फायरिंग और रबर बुलेट फायरिंग से घायल हुए। इजरायल की सेना के अनुसार गाजा पट्टी से एक विमान और एक टैंक को निशाना बनाने की कोशिश की गई।

वहां से कुल तीन रॉकेट दागे गए। नुकसान की जानकारी नहीं दी गई है। जिहादी सलाफी ग्रुप अल-तवाहीद ब्रिगेड्स ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में अमेरिका विरोधी नारेबाजी के बीच इजरायली सुरक्षा बलों पर रह-रहकर पथराव की घटनाएं हो रही हैं। इजरायल ने दोनों ही इलाकों में सेना की तैनाती बढ़ा दी है। पड़ोसी देश जॉर्डन में भी विरोध प्रदर्शन की खबर है। उल्लेखनीय है कि यरुशलम में मुस्लिम, यहूदी और ईसाई धर्मो की आस्था वाले प्रमुख धर्मस्थल हैं और वहां पर तीनों ही धर्मो के लोग भी रहते हैं। इजरायल और फलस्तीन, दोनों ही अपनी राजधानी यरुशलम को बनाना चाहते थे लेकिन ट्रंप के फैसले से इजरायल को दावा पक्का हो गया है।

ट्रंप ने फलस्तीनी हितों के लिए किया आश्वस्त

फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने ताजा घटनाक्रम पर चर्चा के लिए गुरुवार को जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला से मुलाकात की। जॉर्डन का शाही परिवार परंपरागत रूप से यरुशलम के धार्मिक स्थलों के रखरखाव का जिम्मेदार है। जॉर्डन ट्रंप के फैसले को कानूनी रूप से बेकार करार दे चुका है। वैसे राष्ट्रपति ट्रंप ने महमूद अब्बास को आश्वस्त किया है कि अमेरिका फलस्तीनियों के हक का भी ध्यान रखेगा। शांति प्रक्रिया आगे बढ़ने पर भविष्य की राह खुलेंगी।

नई बस्तियां बसाएगा इजरायल

इजरायल के आवास मंत्री योव गैलेंट ने कहा है कि अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में वह पूर्वी यरुशलम में 14 हजार नए घरों के निर्माण का प्रस्ताव रखेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले के बाद यरुशलम में बड़े पैमाने पर काम होंगे जिसके चलते वहां पर बड़ी संख्या आवासों की जरूरत होगी।

इंडोनेशिया और मलेशिया में बड़े प्रदर्शन

यरुशलम पर ट्रंप के फैसले का असर एशिया में भी दिखाई दिया। शुक्रवार को इंडोनेशिया और मलेशिया में हजारों मुसलमानों ने प्रदर्शन करके अमेरिकी फैसले की निंदा की। जकार्ता और कुआलालंपुर में हुए प्रदर्शनों में लोगों ने फलस्तीन के झंडे हाथ में लेकर उसके प्रति समर्थन का इजहार किया। विरोध प्रदर्शनों में उमड़ा गुस्सा देखते हुए दोनों देशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है। हाल के वर्षो में वहां पर कट्टरपंथियों का प्रभाव बढ़ा है।