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Elon Musk के बारे में हर वो बात जो आपको जरूर जाननी चाहिए

दुनिया का सबसे शक्तिशाली और दोबारा से इस्तेमाल किया जाने वाला रॉकेट फॉल्कन हैवी बनाने वाले करीब एक दर्जन कंपनियों के मालिक एलन मस्क के बारे में हम आज आपको हर वो बात बताएंगे जो आपको जरूर जाननी चाहिए।

बचपन में ही मिला कई देशों का अनुभव

एलन रीव मस्क 28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में एक कनाडाई- अफ़्रीकी दंपति के यहाँ जन्मे एक सुप्रसिद्ध बिजनेस टायकून हैं। एलन की माँ एक मॉडल और डाइटीशियन रहीं थीं वहीं एलन के पिता एक इलेक्ट्रोकेमिकल इंजीनियर, पायलट और सेलर थे। 1980 में इनके माता-पिता का तलाक होने के बाद ये पिता के साथ प्रिटोरिया में रहे। स्कूल में पढ़ने वाले एलन के सहपाठी इनकी अक्सर पिटाई कर दिया करते थे। एक बार तो एलन को हॉस्पिटल भी जाना पड़ा जब सहपाठियों द्वारा इन्हें सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया गया और बेहोश होने तक पिटाई की गई। कंप्यूटर में रूचि इनकी बचपन से थी। मात्र 10 वर्ष की छोटी उम्र में इन्होंने बेसिक लैंग्वेज खुद सीखनी शुरू की और 2 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद एक गेम ‘ब्लास्टर’ बनाया जो की एक मैगजीन “PC and Office Technology” द्वारा 500 डॉलर में ख़रीदा गया।

जून 1989 को अपने जन्मदिन से एक दिन पहले एलन अपनी माँ के पास कनाडा आ गए क्योंकि वो जानते थे कि अमेरिका में सपनों को जीने का सफर कनाडा आ जाने से और आसान हो जाएगा। इसके लिए इन्होंने अफ़्रीकी मिलेट्री की अनिवार्य सर्विस छोड़ दी और कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 2 साल बाद इन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में दाखिला लिया जहाँ इन्होंने इकोनॉमिक्स और फिजिक्स दोनों की पढ़ाई की। इसके बाद इन्होंने कैलिफोर्निया की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टैनफोर्ड में एनर्जी फिजिक्स में Ph.D में दाखिल लिया लेकिन 2 दिन बाद ही पढ़ाई छोड़ इंटरनेट बूम को देख कर व्यापार करने का फैसला किया।

इंटरनेट बूम मिलेनियम क्रैश और एलन के स्टार्टअप्स

एलन ने फरवरी 1995 में अपने भाई किम्भल मस्क के साथ मिलकर एक मार्केटिंग और सिटी सर्च कंपनी ‘Zip2’ बनाई जो की न्यूजपेपर्स के लिए सर्विस देती थी। Zip2 को Compaq ने 307 मिलियन डॉलर कैश और 34 मिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा।

मिलेनियम क्रैश के वक्त एक ओर जहाँ सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी वहीं ऐसे मौके पर एलन के पास मिलियंस डॉलर का मुनाफा था।

इसके बाद एलन ने मार्च 1999 में इंटरनेट पेमेंट ट्रांसफर सिस्टम ‘X.com’ की शुरुआत की जो बेहद सफल रही। कैलिफोर्निया में X.com के ऑफिस के पास ही पीटर थील का भी ऑफिस था जो अपनी कंपनी ‘Confinity’ के माध्यम से यही कार्य कर रहे थे। एक साल बाद दोनों ने अपनी कम्पनियों का विलय कर ‘PayPal Services’ की शुरुआत 2001 में की जिसका बाद में नाम ‘PayPal’ कर दिया गया।

मई 2002 में एलन ने ‘SpaceX’ की शुरुआत करी जिसका उद्देश्य मार्स ओएसिस को मंगल ग्रह पर बनाना और वहाँ मानव बस्तियाँ बसाने के साथ- साथ लांच वेहिकल्स और रेवोल्यूशनरी रॉकेट बनाना है। ऑक्टूबर 2002 को PayPal को Ebay ने 1.5 बिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा जिसमे से 11.7% के लिए एलन को 165 मिलियन डॉलर मिले जिसका निवेश इन्होने SpaceX में किया।

फरवरी 2004 में ‘Tesla’ की Series A फंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जून 2003 में बनी इस कम्पनी के चेयरमैन बन गए। 2007 में CEO और प्रोडक्ट आर्किटेक्ट बनने के बाद 2008 में कंपनी ने पहली इलेक्ट्रिक कार Tesla Roadster लॉन्च की जो बेहद सफल रही।

मुश्किलें आती रही और कदम बढ़ते रहे

एलन को SpaceX की सफलता रातों रात नहीं मिली। सारी पूंजी और निवेशकों का धन लगाकर जो पहले 3 रॉकेट लॉन्च हुए वो फेल रहे। हार न मानने का जज्बा ही था कि इन्होने चौथा रॉकेट सफलता पूर्ण लॉन्च किया और SpaceX को नासा से 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ।


दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट फॉल्कन हेवी एलन की ही खोज है और रॉकेट को दोबारा से इस्तेमाल किये जाने की तकनीक भी एलन की ही देन है। जरूरत पड़ने पर Tesla और SpaceX कंपनी में स्लीपिंग बैग में सो जाना एलन को बेहद पसन्द है क्योंकि एलन काम के समय सिर्फ काम पर ही अपना सारा ध्यान देते हैं और किसी भी लक्ष्य को मुश्किल नही मानते।

एलन SpaceX, Tesla और Neuralink के CEO हैं। एलन Zip2, OpenAI, PayPal और Neuralink के Co-Founder हैं तथा X.com , theboringcompany और SpaceX के Founder हैं।

एलन एक बहुआयामी सोच वाले उत्कृष्ट बुद्धि से संपन्न वैज्ञानिक और आंत्रेप्रीन्योर हैं जिनकी विलक्षण प्रतिभा का लोहा समस्त विश्व मानता है। एलन 21वें सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व के स्वामी और दुनिया के 54वें सबसे धनी व्यक्ति हैं। एक बेहद खास रिपोर्ट के अनुसार एलन ने वर्ष 2017 में X.com को दोबारा से ख़रीदा है और जल्द ही इसके साथ एक नई पारी शुरू करना वो जरूर पसंद करेंगे।

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जानिए भारत में कैसे बढ़ती-घटती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमत

आइये जानते हैं वे कौन से फैक्टर हैं जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

बढ़ती मांग

भारत और अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास ने भी पेट्रोल और अन्य आवश्यक ईंधन की मांग में वृद्धि की है। हाल ही में निजी वाहनों के मालिकों की संख्या बढ़ी है, जिससे भारत में पेट्रोल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

आपूर्ति और मांग में असंतुलन
कच्चे तेल के इनपुट मूल्य की उच्च लागत के कारण भारत में तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाजार की मांगों को पूरा करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। जिससे देश में पेट्रोल की कम आपूर्ति और अधिक मांग होती है।

टैक्स रेट
पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर भी काफी हद तक निर्भर करती हैं। सरकार की ओर से टैक्स दरें बढ़ाने की स्थिति में कंपनियां अक्सर उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है।

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें
बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है। नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा। इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 105. 49 फीसदी और डीजल में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, फिलहाल पेट्रोल डीजल में कई सारे टैक्स शामिल हैं। मसलन, एक्साइज ड्यूटी और वैट (मूल्य संवर्धित कर)। इसके अलावा डीलर की ओर से लगाया गया रेट और कमीशन भी कीमतों में जुड़ते हैं। एक्साइज ड्यूटी तो केंद्र सरकार लेती है, जबकि वैट राज्यों की आमदनी (राजस्व) में जुड़ता है।

89.97 प्रति लीटर
महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल सोमवार को हो गया। यह पूरे देश में पेट्रोल की सर्वाधिक कीमत है।

रुपये की हालत
डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत भी उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करती हैं। भारतीय तेल कंपनियां अन्य देशों से आयातित तेल का भुगतान डॉलर में करती हैं। लेकिन उनके खर्च रुपये में दर्ज होते हैं। जब डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आती है, तो कंपनियों के लाभ पर असर पड़ता है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। इसी तरह रुपया मजबूत होने पर कीमतों में राहत मिलती है।

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श्रीकृष्ण से लेकर इंद्र तक से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी, जानें क्यों मनाते हैं राखी

मुख्य रूप से रक्षाबन्धन को हिन्दू आैर जैन त्योहार के तौर पर मान्यता प्राप्त है। ये प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। सावन में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी अर्थात रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व होता है। ये सूत्र कच्चे सूत से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, सोने आैर चाँदी जैसी मंहगी धातु तक से र्निमित हो सकते हैं। हांलाकि राखी सामान्यतः बहनें ही भाई को बांधती हैं परन्तु कर्इ स्थानों पर बेटियों द्वारा पिता या परिवार के बड़े लोगों को, ब्राह्मणों, आैर गुरुओं को भी बांधने की परंपरा है। राखी बांधने के पीछे मूल भावना प्रेम आैर रक्षा का आश्वासन ही होता है। कन्याएं अपने भार्इ आैर पिता को राखी इसी भावना के तहत बांधती हैं। राखी से जुड़ी कथायें भी इसी का संदेश देती हैं। राखी कैसे शुरू हुर्इ इससे जुड़ी इसी तरह की कर्इ कथायें बतार्इ जाती हैं।

भगवान विष्णु आैर बलि की कथा

कहते हैं कि भगवान विष्णु के प्रभाव से जब राजा बलि को पताल लोक में जाना पड़ा इससे देवताओं की रक्षा हुई तभी से हिंदू धर्मावलंबी रक्षाबंधन मनाते हैं। दूसरी आेर उसी समय बलि ने विष्णु जी से अपने साथ रहने का आर्शिवाद प्राप्त कर लिया आैर उससे अपने पति को वापस लाने आैर अपने साथ रखने के लिए माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधीं आैर बदले में अपने पति को वापस प्राप्त किया। तबसे राखी की परंपरा की शुरूआत मानी जाती है, क्योंकि इस तरह लक्ष्मी जी के सौभाग्य की रक्षा हुर्इ। बलि से जुड़ा ये श्लोक भी इसी की पुष्टि करता है। येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं। हे रक्षे मतलब राखी! तुम अडिग रहना यानि तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।

इंद्र से जुड़ी कथा

भविष्यपुराण के अनुसार देवराज इंद्र जब देव दानव युद्घ में दानवों से पराजित हो रहे थे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए उपरोक्त श्लोक पढ़ा था जिसके चलते ना सिर्फ इंद्र की रक्षा हुर्इ थी बल्कि उनकी जीत भी हुर्इ थी। इसे भी रक्षाबंधन की शुरूआत कहा जाता है।

कृष्ण आैर युधिष्ठिर की कथा

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में भी रक्षाबन्धन का प्रसंग है ये कहा जाता है। इसी प्रकार मान्यता है कि द्वापर युग में ही युधिष्ठिर ने वासुदेव नंदन श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा चली आ रही है। अपनी इन्हीं विशेषताआें के चलते धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने वाला माना जाता है।

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मिलिए विजय से जिन्होने तय किया दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल से आइपीएस तक का सफर

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले विजय मूलत: एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गरीब और अभावग्रस्त छात्रों के लिए एक ट्रस्ट भी बनाया है। ट्रस्ट के माध्यम से वह छात्रों को न सिर्फ प्रोत्साहित करते हैं बल्कि आर्थिक सहायता भी देते हैं।

दसवीं में वह महज 55 फीसद अंक से पास हुए। बारहवीं में उनके 67 फीसद अंक आए। वह किसी नौकरी की तलाश में थे। इसमें सफलता न मिलने पर वह टाइल्स का कारोबार कर रहे दोस्त के साथ व्यवसाय करने की सोच रहे थे। उनके पास व्यवसाय के लिए पैसा नहीं था।

इस कारण पिता लक्ष्मण सिंह ने नौकरी की तलाश करने को कहा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। जून 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हो गया। दिल्ली आकर उन्हें पता चला कि एक आइपीएस अफसर के पास समाज सेवा के तमाम अवसर होते हैं। उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि अब आइपीएस ही बनना है। हालांकि, इसकी तैयारी में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम उनके पास नहीं था। इस कारण उन्होंने पहले दारोगा की तैयारी की। कड़ी मेहनत से दिसंबर 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में दारोगा के पद पर हो गया।

इसपद पर रहते हुए उन्हें तैयारी का समय नहीं मिल रहा था। फिर भी उन्होंने एसएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। उनका चयन सेंट्रल एक्साइज में हो गया, लेकिन तैनाती केरल के त्रिवेंद्रम में हो गई। सिविल सेवा की तैयारी दिल्ली में चल रही थी। त्रिवेंद्रम चले जाने से उनकी तैयारी प्रभावित होने लगी। उन्होंने फिर एसएससी की परीक्षा दी। इस बार उनका चयन इनकम टैक्स विभाग में हो गया और उनकी दिल्ली में तैनाती हो गई। इनकम टैक्स की नौकरी करने के साथ ही वह सिविल सेवा की तैयारी करते रहे। 2016 उन्होंने तीसरी बार सिविल सेवा की परीक्षा दी।

संस्कृत जैसे कठिन विषय से मुख्य परीक्षा देने के बाद भी उनका साक्षात्कार के लिए चयन हो गया। वह साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन आठ अंक कम होने के कारण उनका चयन न हो सका। इसके बाद भी विजय हार नहीं माने। वह लगातार 10 घंटे की पढ़ाई नौकरी के साथ करते रहे। जिसका नतीजा है कि पांचवें प्रयास में 2018 में उनका चयन आइपीएस के लिए हुआ। उनकी इस सफलता ने न सिर्फ परिवार का बल्कि पूरे गुर्जर समाज का नाम रोशन कर दिया। रविवार को नोएडा के इंदिरा गांधी कला केंद्र में गुर्जर समाज के सफल युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में विजय गुर्जर को सम्मानित कर समाज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।

अभाव व कम संसाधन कभी विजय रथ को रोक नहीं सकते। यह जरूर है कि अभाव के कारण सफलता पाने में समय लग जाता है। मेरी मां चंदा देवी और पत्नी सुनीता लगातार मेरा मनोबल बढ़ाती रहीं। अब मैं पत्नी सुनीता को सिविल सेवा की तैयारी करा रहा हूं। मैं सिपाही भी रहा हूं। इस कारण मुझे उनका दर्द पता है।

विजय गुर्जर, आइपीएस

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बिना नौकरी के कमाना चाहते हैं अच्छी रकम, आजमाएं ये 4 आसान ऑनलाइन तरीके

जानें सोशल मीडिया पर आप क्या कुछ कर कमा सकते हैं पैसे:

ब्लॉंगिंग: लिखने का हुनर जानने वाले और भाषायी व्याकरण पर अच्छी पकड़ रखने वालों के लिए ब्लॉगिंग कमाल की चीज है। यानी अगर आपको लिखना पसंद है तो आप इसके जरिए कमाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको गूगल की ब्लॉ गिंग साइट ‘ब्लॉ गर’ पर अकाउंट बनाना होगा और इसके बाद आप वहां लिखना शुरू कर दीजिए। बेहतर होगा कि आप अपने ब्लॉग पर जो कुछ भी लिखते हैं उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक या ट्विटर पर शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आपका लिखा पहुंचे सके। इससे एक फायदा यह होगा कि आप अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा पाएंगे, आपकी प्रसिद्धी बढ़ेगी साथ ही आपके ब्लॉग को कई लोग जान पाएंगे। जब आपके पेज व्यूदज का काउंट काफी ज्या दा बढ़ जाएगा, तब आप गूगल एडसेंस के लिए अप्लाजई कर दें और अप्रूवल मिलते ही आपकी कमाई शुरू हो जाएगी।

वीडियो ब्लॉागिंग: फोटोग्राफी का शगल रखने वाले और इसे जज्बे के साथ अंजाम देने वालों के लिए इससे कमाल की कोई चीज नहीं हो सकती है। वीडियो ब्लॉकगिंग से भी आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। आप किसी एक टॉपिक को चुन लें और उस पर वीडियो बनाना शुरू कर दें। मान लीजिए आपको बाइक पसंद है तो आप उसके किसी खास टॉपिक पर रिव्यू देकर उसे हाईलाइट कर सकते हैं।

इसके लिए आपको फेसबुक और यू ट्यूब पर लगातार सक्रिय रहना होगा। आप जो भी वीडियो बनाएं उसे फेसबुक और यू ट्यूब पर शेयर करें। इससे आपके वीडियो को देखने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी और लोग आपके यू ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करेंगे। जब आपके सब्सक्राइबर की संख्या बढ़ जाएगी फिर आपके पास पैसे आने लगेंगे। इतना ही नहीं इसके अलावा जो कंपनियां अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करना चाहती हैं वह आपके वीडियो का सहारा ले सकती हैं। इससे भी आपकी कमाई बढ़ जाएगी।

फ्रीलांसिंग: अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं लेकिन आपको मिलने वाली सैलरी आपके खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है तो यह भी पैसे कमाने का अच्छा जरिया है। यदि आपके भीतर हुनर है तो आप फ्रीलांसिंग का काम करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं। बहुत सारी ऐसी वेबसाइट हैं जो फ्रीलांस का काम करने का मौका देती हैं। इनके टास्क अलग अलग कैटिगरी के हिसाब से लिस्ट होते हैं। आप जो काम बेहतर कर सकते हैं उनके लिए अप्लाई कर दें। फ्रीलांसिंग से प्रति असाइनमेंट 5 डॉलर से 100 डॉलर तक की कमाई की जा सकती है।

ऑनलाइन सर्वे: ऑनलाइन वर्ल्ड में यह कमाई के लिए एक नए तरीके का आसान काम है। इसमें बस आपको कंपनियों की तरफ से ऑनलाइन सर्वे आयोजित कराना होता है। दैनिक आधार पर जिन सर्वे को आप पढ़ते हैं वे बाजार अनुसंधान फर्मों और मेगा-कॉरपोरेशन द्वारा तैयार नहीं किए जाते हैं। दरअसल सर्वे वाले ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते हैं जो अच्छे पैसे के बदले उत्पादों और सेवाओं पर सर्वे करने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं।

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स्काई डाइविंग के लिए इंडिया की ये 5 जगहें हैं बेस्ट

स्काई डाइविंग, सिंपल पैराशूटिंग का मॉर्डन रूप है जिसमें एयरक्रॉफ्ट द्वारा एक तय ऊंचाई से खुली हवा में जंप करना होता है और उसके कुछ समय बाद अपना पैराशूट खोलकर लैंड करना होता है।

इस एडवेंचर में एन्जॉयमेंट के साथ सुरक्षा के लिए आपको कुछ रूल्स भी फॉलो करने पड़ते हैं। जिसके लिए ट्रैनर्स मौजूद होते हैं। जहां कई जगहों पर 1-2 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है वहीं कुछ जगहों पर महज कुछ घंटों की। जिसके बाद आप तैयार होते हैं खुली हवा में आजाद चीड़िया की तरह उड़ने के लिए। तो आज हम इंडिया की ऐसी ही जगहों के बारे में जानेंगे, जहां जाकर आप अपने स्काई डाइविंग के शौक को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

इंडिया की ये 5 जगहें हैं स्काई डाइविंग के बेस्ट

मैसूर, कर्नाटक- बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स की लिस्ट में मैसूर सबसे ज्यादा पॉप्युलर है। बैंगलुरू से कुछ ही घंटे की दूरी पर बसे मैसूर में बहुत सारे स्काई डाइविंग कैंप्स मिलेंगे। यहां आकर स्काई डाइविंग करना बिल्कुल अलग ही तरह का एक्सपीरियंस होता है। टैंडेम से लेकर स्टेटिक और एक्सीलेरेटेड हर तरह के जंप्स के लिए प्रोफेशनल ट्रेनर्स द्वारा आपको 2-3 दिन की ट्रैनिंग दी जाती है। इसके बाद ही आप स्काई डाइविंग का मजा ले सकते हैं। हवा में फ्री होकर उड़ते हुए आसपास के खूबसूरत नजारों को देखने का एहसास अलग ही होता है

धाना, मध्यप्रदेश- धाना में इंडिया का पहला स्काई डाइविंग कैंप शुरू हुआ था। यहां आपको स्टेटिक और टैंडेम जंप्स के ऑप्शन्स मिलते हैं। 4000 फीट से जंप करते हुए यहां की खूबसूरती देखना वाकई बहुत अद्भुत होता हैशायद इसलिए ही धाना को इंडिया के बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स में शामिल किया गया है

एंबी वैली, महाराष्ट्र- अगर आपको एंडवेंचर करना पसंद है तो महाराष्ट्र के एंबी वैली में स्काई डाइविंग जरूर ट्राय करें। 45 मिनट की ये डाइविंग आपको लाइफटाइम याद रहेगी। फिलहाल यहां 10,000 फीट से टैंडेम जंप की सुविधा अवेलेबल है जिसमें बेशक मज़ा तो आता है लेकिन उतना ही डर भी लगता है। तो अगर आप थ्रील के साथ इस एडवेंचर को वाकई एन्जॉय करना चाहते हैं तो फिर वीकेंड में महाराष्ट्र आने का प्लान करें

दीसा, गुजरात- एक्सपीरियंस्ड हो या फिर नौखिसिया, गुजरात का दीसा हर किसी को लाइफटाइम एक्सपीरियंस देने के लिए बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन है।हां गुजरात स्पोर्ट्स अथॉरिटी और इंडियन पैराशूटिंग फेडरेशन द्वारा भी स्काई डाइविंग के कैंप्स लगाए जाते हैं

पांडिचेरी- इंडिया के खूबसूरत शहरों में शामिल पांडिचेरी सिर्फ स्कूवा ही नहीं स्काई डाइविंग के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है. ट्रैवलिंग के साथ एंडवेंचर पसंद वालों की तो ये सबसे पसंदीदा जगह है। पांडिचेरी में आपको स्टेटिक, टैंडेम और एक्सीलिरेटेड हर तरह के जंप्स के ऑप्शन मिलेंगे। फ्री बर्ड की तरह हवा में उड़ते हुए नैचुरल ब्यूटी को एक्सप्लोर करना है तो पांडिचेरी का ट्रिप रहेगा बेस्ट

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दुनिया की सबसे सुरक्षित जीप, कीमत 2.02 करोड़ रुपये!

Rezvani टैंक मिलिट्रि वाहन से प्रेरित नाम है, इस कार में डेड-बोल्ट मैगनेट के लगे हैं और साथ ही दरवाजों पर इलेक्ट्रिक हैंडल लगे है। इससे यात्री को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

बुलेट पूफ्र इस गाड़ी में बंदूक से हमला करने पर भी कुछ नहीं हो सकता। इसके रेडियेटर, बैटरी और फ्यूल टैंक को धमाके से बचाने के लिए kevlar में लपेटा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोफोन के जरिए ड्राइवर बाहर के खतरे को भांप लेता है।

इसके लिए उसे खिड़की या दरवाजे को भी खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। इस गाड़ी में ब्लाइडिंग लाइट भी है जो रात को दिन बना देती है। साथ में फुल इंटरकॉम सिस्टम है जिसमें स्पीकर बाहर की ओर लगे हैं।

इसे दुनिया का सबसे सुरक्षित जीप बताया जा रहा है। इस जीप में 6.4L V8 इंजन है जो 708HP जेनरेट करता है गाड़ी की कीमत 2.02 करोड़ रुपये है।

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आपके रोमांच को और बढ़ाएंगी भारत की ये रहस्यमय गुफाएं

आइए, जानते हैं भारत की रहस्यमय गुफाओं के बारे में,

बोरा गुफाएं

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विलियम किंग जॉर्ज ने 1807 में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले में अराकू वैली के पास अनंतगिरी की पहाडि़यों में खोजी थी। यहां कार्स्टिक चूना पत्थर से बनी हुई सबसे गहरी गुफा है। इसकी गहराई 80 मीटर है। ये भारत की सबसे गहरी गुफाओं में से एक है।

भीमबेटका रॉक शेल्‍टर

मध्‍य प्रदेश के रायसेन जिले में रतापानी वाइल्‍ड लाइफ सैंक्चुअरी के अंदर भीमबेटका गुफाएं हैं। ये गुफाएं पाषाण काल की बनी हुई हैं। गुफा की दीवारों पर इंसान और जानवरों की पेंटिंग उकेरी गई हैं। मानव सभ्‍यता की ये सबसे पुराने चिह्नों में से एक हैं। 2003 में इसे वर्ल्‍ड हैरिटेज साइट घोषित कर दिया गया था। ये गुफा लगभग 30 हजार साल पुरानी है। यहां पांच सौ से ज्‍यादा प्राकृतिक गुफाएं बनी हुई हैं। भीमबेटका में युद्ध की पेंटिंग दीवारों पर बनाई गई है। 1958 में इस पेंटिंग की खोज की गई थी।

अमरनाथ गुफा

अमरनाथ गुफा भारतीय आस्‍था का केंद्र है। यहां बर्फ से भगवान के शिवलिंग का निर्माण होता है। हजारों की संख्‍या में भक्‍त यहां आते हैं। ये भारत के सबसे पूज्‍यनीय तीर्थ स्‍थलों में से एक है। जम्‍मू कश्‍मीर में बनी यह गुफा हिमालय की पहाडि़यों से घिरी हुई है। ये गुफा ज्‍यादातर बर्फ से ढकी रहती है।

अंडावल्‍ली गुफा

यह गुफा प्रचीन काल का सबसे बेहतरीन नमूना है। इसे विश्‍वकर्मा स्‍थापथीस कहा जाता है। आंध्र प्रदेश में यह गुफा विजयवाड़ा से सिर्फ 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन गुफाएं चौथी-पांचवी शताब्‍दी की प्रतीत होती हैं। यह गुफाएं पत्‍थरों से निर्मित हैं। यह एक जैन गुफा थी। यह उदयगिरि और खांडगिरि के आर्कीटेक्‍चर का नमूना है। इसमें से प्रमुख गुफा गुप्‍त काल के आर्कीटेक्‍चर का नमूना है।

वैष्‍णो देवी

जम्‍मू कश्‍मीर में स्थित वैष्‍णो देवी मंदिर भारत की सबसे प्रचीन गुफाओं में से एक है। ये प्रमुख हिन्‍दू मंदिरों और शक्ति के 52 पीठों में से एक है। यह त्रिकूट पहाडि़यों पर स्थित है। यहां हर साल लाखों की संख्‍या में भक्‍त आते हैं।

उदयगिरि और खांडगिरि गुफा

उड़ीसा में बनी उदयगिरि और खांडगिरि गुफा प्रकृति और मानव निर्मित गुफा का अद्भुत नमूना है। इस आर्कियोलॉजिकल और हिस्‍टॉरिकल गुफा का अपना ही धार्मिक महत्‍व है। यह गुफा भुवनेश्‍वर के पास स्थित है। यहां की ज्‍यादातर गुफाएं जैन मॉंक का घर रहीं हैं। उदयगिरि का अर्थ होता है सूर्योदय गुफा। यहां 18 खांडगिरि गुफाएं भी है। जिनका अर्थ होता है टूटी हुई पहाडि़यां। जैन गुफाएं भारत में प्राचीन काल से हैं।

एलीफेंटा गुफाएं

महाराष्‍ट्र के एलीफेंटा आईसलैंड पर बनी ये गुफाएं मानव निर्मित गुफाओं का नेटवर्क है। इसे सिटी ऑफ केव्‍स भी कहा जाता है। ये मुंबई में हार्बॉर पर स्थित हैं। ये आइसलैंड दो गुफाओं का घर है। यहां दो ग्रुपो में पहली पांच हिन्‍दू गुफाएं है और छोटे ग्रुप में दो बुद्धिस्‍ट गुफाएं हैं। पहाड़ों को काट कर इन गुफाओं का निर्माण किया गया है।

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जानें आपकी कार से आने वाली हर आवाज का क्या है कारण। कैसे करें इसका उपाय! #Car #Maintenance #Sounds

कार में आने वाली इस तरह की आवाजें कार की परफॉर्मेंस के बारे में बताती हैं। आइये जानते हैं इन्ही आवाजों के बारे में।

1. इंजन से फट-फट की आवाज: अगर कार के इंजन से फट-फट की आवाज सुनाई दे तो इस बात को नजरअंदाज बिलकुल न करें क्योकिं इससे इंजन स्टार्ट करने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यह आवाज एयर फिल्टर गंदा होना, स्पार्क प्लग खराब होना, इग्निशन में प्रॉब्लम, गैसोलिन में पानी आना और कारब्यूरेटर में खराब पावर सर्किट के चलते आती हैं।

2. गियर शिफ्ट के दौरान आवाज: गियर शिफ्ट के दौरान जब गियर अटकने की शिकायत आये तो इसकी सर्विस जल्दी करा लें, क्योकिं इसका कारण क्लच और गियरबॉक्स दोनों में खराबी हो सकता है। इसके साथ ही इसमें क्लच की खराबी, गियर शिफ्ट लिकेज, गियरबॉक्स खराब होना और गियर ऑयल की समस्या के कारण भी यह आवाज आती हैं।

3. जब कार मोड़ते समय आये ऐसी आवाज: कार को मोड़ते समय करहाने की आवाज आने लगे तो समाज जान चाहिये कि यह आवाज सीवी एक्सेल के टूटने से भी आ सकती है या फिर एक्सेल से ग्रीस लीक खत्म होने के चलते भी आती है। ग्रीस खत्म होने के चलते कॉम्पोनेंट सूख जाता है और सीवी एक्सेल का खराब कर देता है जिसके चलते आपको सीवी एक्सेल रिप्लेस करवाना पड़ता है। इस तरह की आवाज आते ही ग्रीस फिर से फिल करवा ले ताकि कोई दिक्कत न आए।

4. स्पीड बढ़ाने पर ऐसी आवाज़ को नजरअंदाज न करें: फर्स्ट गियर में गाड़ी को रेस देते समय अगर गाड़ी आगे स्पीड पकड़ते समय आवाज़ करे तो इसका मतलब यह है कि कार की फैन बेल्ट ढीली या फिर खराब हो रही है। फैन बेल्ट हम कार में समय के साथ ढीली हो जाती है और कार स्टार्ट करते समय रबड़ से रगड़ लगते समय आवाज आने लगती है। इसके लिए आपको अंत में फैन बेल्ट बदलवानी ही पड़ती है।

5. ब्रेक लगाते समय जब आये आवाज आवाज: ब्रेक लगाने के दौरान अगर ची-ची की आवाज आए तो समझ जाओ कि ब्रेक शूज पूरी तरह खराब हो गए हैं ऐसे में जितना जल्दी हो इन्हें बदलवा लेना चाइये, वरना ब्रेक लगने में काफी दिक्कत हो सकती है।

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मानसून के बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए खान-पान में क्या करें शामिल

जीवनशैली और नजरिए में थोड़ा सा फर्क लाकर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बना सकते हैं…

बरसात में इनका सेवन जरूरी

तुलसी: तुलसी दल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खांसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है। सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं। काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं। तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं। तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातपित्त विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।

शहद: शहद का सेवन हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। कारण, शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और यह एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है। शक्कर की तुलना में शहद में बीस प्रतिशत कम कैलोरी होती है। इसलिए शहद के सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा और शक्कर की तुलना में कम कैलोरीज मिलती हैं। शहद में अन्य पोषक तत्वों के अलावा शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स बी-1, बी-2, बी-5, बी-6 और विटामिन सी पाए जाते हैं। ये विटामिन्स हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

हर्बल टी: इसमें सिट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो कई बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से बचाता है। इससे पेट साफ रहता है और रक्त संचरण में सुधार होता है। इसका सेवन एग्जि़मा और त्वचा संबंधी संक्रमणों से भी बचाता है। आप चाहे तो इसमें अदरक, काली मिर्च और शहद का भी प्रयोग कर सकते हैं।

सूखे मेवे: सूखे मेवे में जिंक और विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत सहायता करते हैं। इसलिए अपनी डाइट में हर रोज किसी भी रूप में एक मुट्ठी मेवों को शामिल करें। शरीर भीतर से मजबूत होगा और बदलते मौसम का शरीर पर असर नहीं पड़ेगा।

लहसुन: खाली पेट कच्‍चे लहसुन से ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है एवं भुना हुआ लहसुन खाने से शरीर की आंतरिक सफाई होती है। लहसुन से हमारा वजन भी कंट्रोल में रहता है। यह एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक का काम करता है। लहसुन आपके शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ायेगा और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकाल फेकेगा।

करेला: करेले में कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन पाया जाता है। करेला खाने से खून साफ होता है और ये हीमोग्लोबिन बढ़ाने का अच्छा स्त्रोत है। लीवर संबंधी रोगों के लिये करेला बहुत लाभकारी है। श्वांस और दमे के रोगियों को करेले की सादी सब्जी का सेवन करना चाहिये। करेला हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

नीबू: नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है। इसमें पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है।