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यूएन के महासचिव ने किया नरेंद्र मोदी को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण अवॉर्ड चैंपियंस ऑफ अर्थ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यह अवॉर्ड यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दिया। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभारी हूं। यह सम्मान भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की प्रतिबद्धता का फल है। चैंपियन अर्थ अवॉर्ड भारत के जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है, जो अपने जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं।’

ये देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान :प्रधानमंत्री ने कहा- ‘यह देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान है। महिलाएं पौधों में भी भगवान देखती हैं, वे पत्तियां भी गिनकर तोड़ती हैं। मैं इस सम्मान के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए यह दोहरे सम्मान का मौका है। कोच्चि एयरपोर्ट को ऊर्जा क्षेत्र में सम्मान मिला है। पर्यावरण और प्रकृति का सीधा रिश्ता कल्चर से है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को विश्व स्वीकार कर रहा है। हम उस समाज का हिस्सा हैं, जहां सुबह उठने से पहले धरती पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगी जाती है। क्योंकि हम उस पर वजन डालने वाले हैं।’

भारतीयों के लिए प्रकृति ही सर्वोपरि है : उन्होंने कहा, ‘हमारे व्रत और त्योहारों में प्रकृति का जुड़ाव है। हमारे यहां प्रकृति को सर्वोपरि माना गया है। यजुर्वेद से लिए शांतिपाठ में वातावरण में शांति की प्रार्थना की गई है। यूएन ने जो सम्मान दिया, वह लोगों की आस्था का सम्मान है। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं। आबादी के एक हिस्से को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सूखे की वजह से सीमित संसाधन वाले गरीब परेशान हो रहे हैं। आज प्रकृति पर अतिरिक्त दवाब डाले बगैर विकास की जरूरत है।’

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पीएम मोदी बोले, कर्तव्य के बिना अधिकार की मांग संविधान की भावना के खिलाफ

अपने कर्तव्य का निर्वाह किये बिना सिर्फ अधिकार की मांग करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। लोगों को सूचना के अधिकार के साथ-साथ ‘एक्ट राइटली’ के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। केंद्रीय सूचना आयोग के नए भवन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सशक्त और जागरूक नागरिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आरटीआइ कानून की तरह ही ‘एक्ट राइटली’ यानी लोगों को उनके कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। बिना कर्तव्य के अहसास के सिर्फ अधिकार की बात करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार संविधान ने नागरिकों को मौलिक अधिकार के साथ-साथ उनके कर्तव्य भी तय कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीआइसी जैसी संस्थाएं, जहां आम जनता के साथ संपर्क बहुत ज्यादा होता हो, उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने आयोग को आरटीआइ का व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल होने के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि इसे रोकने की जिम्मेदारी आयोग की है।

प्रधानमंत्री ने सशक्त और जागरूक नागरिक को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सरकार की ओर इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार इंफोर्मेशन हाईवे की दिशा में काम कर रही है। जिसमें जनता और सरकार दोनों ओर से संवाद होता है। उन्होंन इस इंफोर्मेशन हाईवे के पांच स्तंभों के बारे में विस्तार से बताया। जो सवाल, सुझाव, संवाद, काम और सूचना पर आधारित हैं।

उन्होंने बताया कि माइ गोव दुनिया का सबसे बड़ा सिटिजन इंगेजमेंट प्लेटफार्म है, जहां लोग सीधे सरकार से सवाल पूछते हैं और हमारी सरकार उनकी बात सुनने के लिए लालायित रहती है। आम लोगों के इन सुझाव पर कई बार नीतियों में बदलाव भी किये गए हैं। जनता के संवाद और उसके अनुसार काम करने के बारे में बताते हुए उन्होंने जीएसटी लागू करने के अनुभवों को साझा किया। उनके अनुसार जीएसटी के बारे में सुबह कोई शिकायत मिलती, तो शाम को ठीक करने की कोशिश की गई। हमारी सरकार के मंत्री और मंत्रालय सिर्फ एक ट्वीट पर कई समस्याओं का निपटारा कर रहा है।

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…जब पीएम मोदी ने दावोस के मंच से पढ़े ये श्लोक

दावोस में विश्व में आर्थिक क्षेत्र की महान हस्तियों के सम्मेलन के संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने संस्कृत के श्लोकों का सहारा लेते हुए भारतीय परंपरा और विचारधारा को लोगों के सामने रखा. पीएम ने दावोस संस्कृत के श्लोकों को पढ़ा और उसका मतलब भी बताया. वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम के उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मनीषियों ने विश्‍व को समावेशी विचार दिए. हमारी संस्‍कृति समावेशी रही है और हमारी सरकार भी सबका साथ सबका विकास की विचारधारा पर चल रही है.

हजारों साल पहले हमारे मनीषियों ने इसी विचार को आत्‍मसात कर विश्‍व को राह दिखाने का काम किया और आज हम भी उसी विचार मानने वाले हैं. प्रकृति से प्‍यार करने की सीख हमारे ग्रंथों में, हमारी जीवन शैली में शामिल है. पूरे विश्‍व को परिवार मानने की सीख हमारे मनीषियों ने दी.

पीएम मोदी ने कहा कि इसी सोच का नतीजा है कि भारत ने कभी किसी के भूभाग और संसाधन का दोहन खुद के लिए नहीं किया.

इसके अलावा पीएम मोदी ने दुनिया के दुखों को दूर करने की बात कही.

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत

अर्थात “सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मङ्गलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े.”

पीएम ने वसुधैव कुटुंबकम की बात कही. इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है (वसुधा एवं कुटुम्बकम्). यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है. इसका पूरा श्लोक कुछ इस प्रकार है.

अयं बन्धुरयं नेतिगणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
(महोपनिषद्, अध्याय ४, श्‍लोक ७१)

अर्थ यह है – यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं. उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है.

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2017 में पीएम मोदी की 6-1 से बंपर जीत, कमलमय हुए ये प्रदेश

21 वीं सदी का 17 वां साल दस्तक दे रहा था और इसके साथ ही इस वर्ष को अनेकों राजनीतिक घटनाओं का गवाह भी बनना था। राजनीतिक तौर पर साल 2017 के सभी महीने किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहे। लेकिन फरवरी-मार्च के साथ नवंबर और दिसंबर का महीना कुछ राजनीतिक दलों के लिए जहां खुशी का लमहा लेकर आया तो कुछ के हिस्से में सिर्फ दुख और दर्द आया। कुछ राजनीतिक दलों और शख्सियतों को आत्मावलोकन की सीख दे गया तो कुछ के लिए ये संदेश कि सफलता को महफूज रखने के लिए आप को लगातार कोशिश करनी होगी। 2017 के जनवरी से दिसंबर के कालखंड में हम पीएम मोदी के उस प्रभामंडल की चर्चा करेंगे जिसका असर देश के सात सूबों में होने वाले चुनाव परिणाम में दिखा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा 14 साल का वनवास खत्म
जनवरी और फरवरी में उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड थी। लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजां में गरमी थी। राजनीतिक दल अवध पर कब्जे की तैयारी कर रहे थे। अवध पर कब्जे की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ के जरिए जाता है और जिसके हाथ से लखनऊ फिसला वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का सिर्फ सपना ही देख सकता है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार अपने काम के दम और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर समाजवादी झंडे को निर्बाध फहराने की तैयारी कर रही थी। इसके साथ ही केसरियां रंग भी यूपी को अपने रंग में सराबोर करने की तैयारी में था। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों से अथक और अकथ कोशिश की गई। चुनाव प्रचार चरम पर था और राजनीतिक दल अपनी तरकश से एक से बढ़कर एक तीर के जरिए एक दूसरे पर निशाना साध रहे थे।


भाजपा जहां 14 साल के वनवास को खत्म करने के लिए अपने आपको मौका देने की मांग कर रही थी। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता यूपी के लड़के करेंगे विकास का नारा बुलंद कर रहे थे। पीएम मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक थे। वो लोगों से अपील कर रहे थे कि ये लड़ाई ईमानदारों और भ्रष्टाचारियों के बीच की है। वो ये भी कहा करते थे कि यूपी की जनता वंशवाद,जातिवाद से तंग आ चुकी है। इसके साथ ही इन नेताओं की अपील का कितना असर पड़ेगा इसे लेकर राजनीतिक टीकाकार अलग अलग ढंग से भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो वो सभी के अनुमानों से जुदा था। यूपी की जनता ने अपना मत दे दिया था, देश का सबसे बड़ा सूबा अब उस राह पर चलने को तैयार था जो केसरिया रंग में रंग चुका था।

उत्तराखंड में प्रचंड विजय
उत्तर प्रदेश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड में चुनाव का आगाज हो चुका था। उत्तराखंड में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार दोबारा सरकार बनाने की तैयारी के साथ चुनाव मैदान में थी। लेकिन भाजपा देवभूमि की जनता को ये समझा रही थी कि किस तरह से कांग्रेस शासन में उत्तराखंड विकास की पटरी से उतर गया था। एक तरफ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनमत को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश करते रहे, वहीं भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी ने कहा कि एक ऐसी पार्टी के हाथ में आप सत्ता कैसे सौंप सकते हैं जिसका दामन दागदार है। देवभूमि की धरती पर दोनों दल अपने अपने अंदाज में एक दूसरे की वादों और दावों की धज्जियां उड़ा रहे थे। लेकिन जन का मत कुछ और ही था। इवीएम से जब परिणाम बाहर आने शुरू हुए तो नतीजे प्रत्याशित लेकिन चौंकाने वाले थे। देवभूमि की जनता का फैसला सार्वजनिक हो चुका था और केसरिया झंडा मैदान से लेकर पहाड़ तक फहर रहा था।

गोवा और मणिपुर बनाई सरकार
यूपी और उत्तराखंड के साथ पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और समुद्र के किनारे स्थित गोवा में भी चुनावी सरगर्मी तेज थी। भाजपा के विरोधी पणजी में जोरशोर से नोटबंदी के मुद्दे को उठा रहे थे। गोवा में विरोधी दल अपने तर्कों से समझाने की कोशिश कर रहे थे कि किस तरह से नोटबंदी ने गोवा की रीढ़ (पर्यटन व्यवसाय) को तोड़ दी है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी कहते रहे कि उनकी लड़ाई गरीबों के लिए है। नोटबंदी के समर्थन में उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। लेकिन गरीबों की पीड़ा को कम करने के लिए इस तरह का कदम उठाना जरुरी था। गोवा और मणिपुर में भाजपा-कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर में भाजपा भारी पड़ी और गोवा के साथ मणिपुर में कमल खिलने में कामयाब रहा।

पंजाब में  कांग्नेस को मिली कामयाबी
यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ ही पंजाब में विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार परवान चढ़ चुका था। पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस और आप मोर्चा खोले थी। कांग्रेस के नेता इस तथ्य को वहां की जनता के सामने रख रहे थे कि कैसे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में पंजाब नशे की गिरफ्त में आ गया। कांग्रेस और आप के नेता जनता को ये बताने में कामयाब रहे कि पंजाब का भला सिर्फ कांग्रेस सोचती है और मौका मिलने पर वो प्रदेश को तरक्की के राह पर ले जायेंगे। पंजाब की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया और सत्ता अमरिंदर सिंह के हाथों सौंप दी।


कमलमय हुआ गुजरात

साल 2017 के पहले तीन महीनों में देश के इन सूबों में चुनावी शोर खत्म हो चुका था। देश की राजनीति किसी और बड़ी घटना की गवाह बनने वाली थी। एक जुलाई 2017 को भारत एक बाजार में बदल चुका था। एक राष्ट्र और एक कर के जरिए जीएसटी को लाया जा चुका था। ठीक उसके बाद पीएम के गृहराज्य गुजरात और देवभूमि हिमाचल में विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी। राजनीति के जानकारों का मानना था कि गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के लिए लिटमस टेस्ट होगा। इसके साथ ही कई जानकारों का कहना था कि गुजरात में पाटीदार, दलित और पिछड़ो के मुद्दे पर मौजूदा भाजपा सरकार बैकफुट पर है। यही नहीं जीएसटी का फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी कहा करते थे कि केंद्र की मोदी सरकार महज कुछ लोगों के फायदे के लिए सोचती है। ये बात अलग है कि इवीएम से निकले हुए परिणाम कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे। गुजरात में छठी बार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन चुनाव नतीजे कुछ संकेत भी दे गए।

देवभूमि हिमाचल में खिला कमल
इसके साथ ही देवभूमि हिमाचल में कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में भ्रष्टाचार का मामला छाया रहा। भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी लोगों तक ये छाप छोड़ने में कामयाब रहे कि कांग्रेस का मतलब ही भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए वीरभद्र की सरकार से छुटकारा पाना ही होगा। कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी लड़ाई में जनता ने अपने नायक पीएम मोदी पर भरोसा किया और राज्य की कमान भाजपा के हाथों में सौंप दी।

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BJP की मीटिंग में भावुक हुए नरेंद्र मोदी, बोले- इंदिरा गांधी की 18 राज्यों में सत्ता थी, हमारी 19 में है

बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग में गुजरात-हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में जीत के लिए बुधवार को नरेंद्र मोदीऔर अमित शाह का सम्मान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी नेताओं से 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बूथ लेवल पर बीजेपी को मजबूत करने की बात कही। नए चेहरों को पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी जाएं। इस दौरान गुजरात में पार्टी के संघर्ष के दिनों और अटल बिहारी वाजपेयी के कामकाज को याद करते हुए नरेंद्र मोदी कुछ देर के लिए भावुक हो गए। मोदी ने कहा कि एक वक्त इंदिरा गांधी की 18 राज्यों में सरकार थी, अब हमारी 19 राज्यों में है। वहीं, मीटिंग में जाते वक्त केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज गिर गए। उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया।

बूथ लेवल कैंपेन चुनाव के लिए मां की तरह

– मीटिंग के बाद पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अनंत कुमार ने बताया कि नरेंद्र मोदी ने 2019 का लोकसभा इलेक्शन जीतने के लिए देशभर में बूथ लेवल पर पार्टी को मजबूत करने की बात कही है। यह चुनाव में जीत के लिए मां की तरह होता है।
– साथ ही मोदी ने कहा कि बीजेपी में युवा चेहरों को अहम जिम्मेदारियां दी जाएं। सभी नेता सरकार के 2022 के न्यू इंडिया विजन के लिए साथ मिलकर काम करें। पीएम ने पार्टी नेताओं से कहा कि गुजरात और हिमाचल के चुनावों में विपक्ष के झूठे प्रचार से डरने की जरूरत नहीं है।

संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मोदी भावुक हुए

– पार्टी सूत्रों ने बताया कि नरेंद्र मोदी गुजरात में पार्टी के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कुछ वक्त के लिए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि एक वक्त 18 राज्यों में इंदिरा गांधी (कांग्रेस) की सरकार थी। आज बीजेपी इससे आगे 19 राज्यों तक पहुंच चुकी है।

– मोदी ने बताया कि अटलजी ने कैसे युवाओं में नई जान फूंकी थी। उन्होंने मुझे लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी। तब मैं आरएसएस में स्टेट जनरल सेक्रेटरी था और बीजेपी में नई भूमिका मिली थी। मोदी ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने से 14 साल छोटे अमित शाह को पॉलिटिक्स के लिए ग्रूम किया।
– केंद्र में सरकार चलाते हुए बीजेपी ने पिछले तीन सालों में विधानसभा चुनावों जिस प्रकार से जीत हासिल की। अब तक कोई पार्टी ऐसा नहीं कर पाई।

रूपाणी अभी भी पहली पसंद

– गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर अटकलें तेज हैं। गुजरात में सीटें कम होने के बावजूद मौजूदा सीएम विजय रूपाणी पहली पसंद बताए जा रहे हैं।फिर भी 2012 से इस बार सीटें कम होने के बाद दबी जुबान में उठ रहे सवालों की वजह से यहां बदलाव भी मुमकिन है। सीएम की रेस में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का भी नाम है।स्मृति अभी गुजरात से ही राज्यसभा सांसद हैं।

स्मृति इसलिए रेस में

– बीजेपी उत्तर प्रदेश की तरह गुजरात में भी नया चेहरा दे सकती है। संगठन क्षमता और गुजराती भाषा जानने की वजह से स्मृति और पाटीदार कम्युनिटी से आने वाले केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का नाम भी सीएम रेस में चल रहा है। हालांकि, बीजेपी में ये ट्रेंड रहा है कि जिनके नाम सामने आते हैं, वो मुख्यमंत्री नहीं बनते।

हिमाचल में धूमल की हार से बढ़ी मुश्किल
– हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हार जाने के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और 5 बार के विधायक जयराम ठाकुर रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।

– हालांकि, सातवीं बार चुनाव जीतने वाले मोहिंदर सिंह, पांचवीं बार विधायक बने राजीव बिंदल, हिमाचल के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज और चौथी बार चुनाव जीतने वाले कृष्ण कपूर के नाम भी चल रहे हैं।

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मोदी जी की ये सच्चाई आपकी आँखें नम कर देगी

गुजरात के वडनगर में जहाँ पीएम मोदी का पूरा परिवार रहता है सभी भाई रहते है वही घर से 2 km की दुरी पर रैली हो रही थी। लाखो की भीड़ में पीएम मोदी के छोटे भाई भी नजर आये जो काफी पीछे बेठे थे। मिडिया की नजर आखिर तक उन पर रही। उनकी आँखों में आंसू थे क्योंकि परिवार आज भी तंगहाली बदहाली का जीवन जी रहा है। बीपीएल कार्ड से गुजर बसर हो रहा है।

पीएम मोदी के छोटे भाई प्राइवेट जॉब करते है। रैली खत्म होने के बाद मिडिया ने उनसे सवाल पूछा कि आप अपने भाई मोदी से कब मिले तो जवाब था जब उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दिया। फिर पूछा आप उनसे मदद क्यों नही माँगते ? जवाब था वे संयासी है वे खुद के लिए कुछ नही कर सके तो हमको क्या देंगे, उन पर देश की जिम्मेदारी है। जो देना है सबको देंगे।

फिर पूछा कि मोदी जी नजदीक ही है आप मिल सकते हो तब उन्होंने कहा के उनका एक एक मिनट बहुत कीमती है। फिर पूछा दिल्ली जाकर पूरा परिवार मिल क्यों नही लेता शायद आपकी मदद भी हो जाये तब उन्होंने रुला देने वाला जवाब दे दिया, कहा के आज तक देश की मिडिया ने हम सब भाईयो को हमारे परिवार को कभी चैनल पर नही दिखाया, हम क्या करते है हम क्या खाते है हमारे घर कैसे है। हमारे बच्चे कहाँ पढ़ रहे है। शायद इसलिए नही दिखाया के हमारा हाल देखकर कहि विपक्षी पार्टियो का मुँह बंद न हो जाये और देश की जनता के दिल में मोदी भगवान की तरह जगह न बना ले। दिल्ली जाकर मिल लिए तो यही मिडिया बढ़ा चढ़ाकर दिखाएगी और पूरा विपक्ष कहेगा के मोदी ने अरबो खरबो रूपये अपने भाइयो को दे दिए। बड़ी बड़ी कंपनी दे दी। बड़े बिजनेश करा के दे दिए। हम नही चाहते के हमारी वजह से मोदी पर जरा भी ऊँगली उठे।

इतना कहते ही वे पार्किंग में खड़ी अपनी पुरानी सी स्कूटर उठाकर चले गए। उनकी आँखों के दर्द को जिसने भी देखा वो रो पड़ा।

यही महानता मोदी को दुनिया में सबसे अलग बनाती है। भले ही आप मोदी से नफ़रत करे पर उनको इज्ज़त दीजिए उनके परिवार को इज्जत दीजिए। एक यही परिवार ऐसा है जो लालू, मुलायम, मायावती, बादल, केजरीवाल, ममता, जैसे नेताओ के परिवार की तरह नही फला फूला.

साभार – हेमन्त भाई. गुजरात से।