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संसद ने ‘टैक्स फ्री ग्रेच्युटी’ की सीमा की दोगुनी, 20 लाख की रकम तक नहीं देना होगा कोई कर

ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को गुरुवार को संसद की मंजूरी मिल गई. विधेयक में निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के ऐसे कर्मचारियों के उपदान (ग्रेच्यूटी) की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं. लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है. कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन और आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है. आज भी इन्हीं मुद्दों पर सदन में हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही बैठक शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई. लेकिन ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार के अनुरोध पर बिना चर्चा के, सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

गंगवार ने विधेयक पेश करते हुए कहा ‘यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और मैं अनुरोध करता हूं कि इसे चर्चा के बिना पारित कर दिया जाए.’ विधेयक के लिए कांग्रेस के डॉ सुब्बीरामी रेड्डी ने दो संशोधन पेश किए थे लेकिन आज उन्होंने अपने दोनों ही संशोधन वापस ले लिये. इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘प्रसूति छुट्टी की अवधि’ को अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है.

उल्लेखनीय है कि अभी दस अथवा अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए उपदान भुगतान अधिनियम 1972 लागू है जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने पांच वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है. इसी के तहत उपदान (ग्रेच्यूटी) संदाय की योजना अधिनियमित की गई थी. अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी.

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया. इसलिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी महंगाई और वेतन वृद्धि पर विचार करते हुए सरकार का अब यह विचार है कि उपदान भुगतान अधिनियम,1972 के अधीन शामिल कर्मचारियों के लिए उपदान (ग्रेच्यूटी) की पात्रता में संशोधन किया जाना चाहिए.

इस अधिनियम को लागू करने का मुख्‍य उद्देश्‍य सेवानिवृत्ति के बाद कामगारों की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे सेवानिवृत्ति की नियमावली के परिणामस्‍वरूप सेवानिवृत्ति हुई हो अथवा शरीर के महत्‍वपूर्ण अंग के नाकाम होने से शारीरिक विकलांगता के कारण सेवानिवृत्ति हुई हो.

विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि उपदान संदाय संशोधन विधेयक 2017 में अन्य बातों के साथ साथ अधिनियम की धारा 2क का संशोधन करने का प्रावधान किया गया है जिससे सरकार को निरंतर सेवा विधेयक में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘प्रसूति छुट्टी की अवधि’ को अधिसूचित किया जाए. ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि प्रसूति सुविधा संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से प्रसूति छुट्टी की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया था. ऐसे में केंद्र सरकार को वर्तमान 12 सप्ताह की अवधि को ऐसी अन्य अवधि के लिये अधिसूचित करने की बात कही गई है.

इसके तहत दस लाख रुपये शब्द के स्थान पर ‘एक ऐसी रकम जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय समय पर अधिसूचित की जाए’ शब्द रखने के लिये अधिनियम की धारा 4 का संशोधन करने का प्रस्ताव है.

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टुकड़े-टुकड़े में नीलाम होगी सहारा की एंबी वैली, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट में टुकड़े-टुकड़े में सहारा की एंबी वैली नीलाम होगी. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी के लिए और वक्त दिया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर ने कोर्ट में कहा कि एक साथ पूरी एंबी वैली को बेचना संभव नहीं है. इसके अलग-अलग हिस्सों को चल और अचल संपत्ति के हिसाब से बेचा जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि जैसे गोल्फ कोर्स, इंटरनेशनल स्कूल, रेस्तरां, कान्वेंशन हॉल, हवाई पट्टी आदि हैं जिन्हें अलग-अलग बेचा जा सकता है. सहारा की सभी 48 संपत्तियों को बेचा नहीं जा पा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने रिसीवर को कहा कि पहले चल संपत्ति को बेचा जाए इसके बाद अचल को. बॉम्बे हाईकोर्ट लिक्विडेटर ने कोर्ट को बताया कि एंबी वैली की संपत्ति को पहले बेचा जाए. कोर्ट को बताया गया कि दो बड़ी कंपनियां महिंद्रा और पिरामल एंबी वैली को खरीदने में रुचि दिखा रही हैं. सहारा की तरफ से कहा गया कि हमने डिजिटलाइजेशन में 50 करोड़ रुपये खर्च किया है, जिन्हें पैसा दिया है उनका वैरिफिकेशन किया जाए और जल्द मामले की सुनवाई हो. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई 19 अप्रैल को करेंगे.

बता दें कि सहारा सेबी विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को कहा कि वो एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाए. सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी के लिए रिसीवर नियुक्त किया था. बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को ऑफिसियल लिक्विडेटर को नियुक्त किया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीलामी सही तरीके से हो ये रिसीवर की जिम्मेदारी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को कहा कि आप नीलामी प्रकिया में बाधा न डाले, एंबी वैली प्रोपेर्टी को सुप्रीम कोर्ट ने अटैच की हुई है, अब आप प्रॉपर्टी से बाहर हैं.

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…जब पीएम मोदी ने दावोस के मंच से पढ़े ये श्लोक

दावोस में विश्व में आर्थिक क्षेत्र की महान हस्तियों के सम्मेलन के संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने संस्कृत के श्लोकों का सहारा लेते हुए भारतीय परंपरा और विचारधारा को लोगों के सामने रखा. पीएम ने दावोस संस्कृत के श्लोकों को पढ़ा और उसका मतलब भी बताया. वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम के उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मनीषियों ने विश्‍व को समावेशी विचार दिए. हमारी संस्‍कृति समावेशी रही है और हमारी सरकार भी सबका साथ सबका विकास की विचारधारा पर चल रही है.

हजारों साल पहले हमारे मनीषियों ने इसी विचार को आत्‍मसात कर विश्‍व को राह दिखाने का काम किया और आज हम भी उसी विचार मानने वाले हैं. प्रकृति से प्‍यार करने की सीख हमारे ग्रंथों में, हमारी जीवन शैली में शामिल है. पूरे विश्‍व को परिवार मानने की सीख हमारे मनीषियों ने दी.

पीएम मोदी ने कहा कि इसी सोच का नतीजा है कि भारत ने कभी किसी के भूभाग और संसाधन का दोहन खुद के लिए नहीं किया.

इसके अलावा पीएम मोदी ने दुनिया के दुखों को दूर करने की बात कही.

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत

अर्थात “सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मङ्गलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े.”

पीएम ने वसुधैव कुटुंबकम की बात कही. इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है (वसुधा एवं कुटुम्बकम्). यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है. इसका पूरा श्लोक कुछ इस प्रकार है.

अयं बन्धुरयं नेतिगणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
(महोपनिषद्, अध्याय ४, श्‍लोक ७१)

अर्थ यह है – यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं. उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है.

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ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामला : ‘आप’ विधायकों को राहत, हाईकोर्ट ने उपचुनाव की नोटिफिकेशन जारी करने पर लगाई रोक

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में आम आदमी पार्टी के लिए थोड़ी राहत भरी खबर है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘आप’ के 20 विधायकों की अयोग्यता के फैसले पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली सुनवाई होने तक दिल्ली में उपचुनाव की नोटिफिकेशन जारी नहीं करने को कहा है. इसके साथ ही अदालत ने केंद्र की अधिसूचना पर अंतरिम स्थगनादेश जारी करने से इनकार कर दिया है. अयोग्य करार दिए जाने को चुनौती देने वाली आप विधायकों की याचिकाओं पर अदालत ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनावाई सोमवार को होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी के अयोग्य विधायकों की तरफ से कहा गया था कि चुनाव आयोग ने हमें पहले नहीं बताया था कि वह फैसला करने जा रहा है. न्यूज पेपर के माध्यम से हमें पता चला कि चुनाव आयोग फ़ैसला कर रहा है. अरोड़ा ने कभी हमें नहीं सुना न ही वह तस्वीर में थे, लेकिन ऑर्डर में उनका भी नाम है. चुनाव आयोग के एक सदस्य ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था, जबकि दूसरे ने कभी सुनवाई ही नहीं की. 18 मार्च 2016 को नोटिस हमें मिला जिसका जवाब हमनें दिया.

दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि ये स्पीकर चुनाव आयोग को कहते हैं कि सीट खाली है. उसके बाद चुनाव आयोग चुनाव को लेकर काम करता है. दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा कि कोई भी पक्ष इस दरमियान कोई कदम नहीं उठाएगा और चुनाव की घोषणा नहीं की जाएगी.

ये हैं अयोग्य करार दिए गए ‘आप’ के 20 विधायक

  1. आदर्श शास्त्री
  2. अलका लांबा
  3. संजीव झा
  4. कैलाश गहलोत
  5. विजेंदर गर्ग
  6. प्रवीण कुमार
  7. शरद कुमार चौहान
  8. मदन लाल
  9. शिव चरण गोयल
  10. सरिता सिंह
  11. नरेश यादव
  12. राजेश गुप्ता
  13. राजेश ऋषि
  14. अनिल कुमार बाजपेई
  15. सोम दत्त
  16. अवतार सिंह
  17. सुखबीर सिंह
  18. मनोज कुमार
  19. नितिन त्यागी
  20. जरनैल सिंह

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हम अगले हफ्ते सोमवार को सुनवाई करेंगे. तब तक चुनाव आयोग जवाब दाखिल करे.
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा कि अगर आप इस मामले में लिखित आदेश चाहते हैं तो हम दे सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि सोमवार को मामले की सुनवाई करे और उसी दिन इस पूरे मामले का निपटारा भी कर दे. हाईकोर्ट ने फिलहाल राष्ट्रपति के अयोग्य करार देने को नोटिफिकेशन पर रोक लगाने से इंकार किया.