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दुनिया की इन 10 जगहों पर किसी को भी जाने की नहीं है इजाजत

आज इंसान अंतरिक्ष में रहने की तैयारियां कर रहा है। मगर इतनी तरक्की करने के बाद भी दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जहां इंसान नहीं पहुंच सकते हैं। इंसानों पर ये पाबंदी वहां की सरकारों ने लगाई है। ऐसे ही कुछ इलाकों की सैर इन तस्वीरों के जरिए करिए।

ग्लोबल सीड वॉल्ट, नॉर्वे- ये एक अंडरग्राउंड बीज भंडारण केंद्र है। जिसे नार्वे के एक आइलैंड पर पहाड़ के अंदर बनाया गया है। यहां दुनिया की 4 हजार प्रजातियों के लगभग 8,40,000 बीज संरक्षित किए गए हैं। यहां पर सिर्फ उन्हीं लोगों को आने की इज़ाजत है, जो इसके सदस्य हैं और अपने बीज सुरक्षित रखना चाहते हैं।

स्नैक आयलैंड, ब्राजील- ब्राजील के साओ पाउलो से कुछ 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद Ilha da Queimada Granda नाम के आईलैंड पर 5-10 सांप हर 10 वर्ग फ़ीट पर मौजूद हैं। ये सांप बहुत ही ज़हरीले हैं, इसलिए यहां लोगों का जाना मना है।

द क्वींस बेडरूम, यूनाइडेट किंगडम- ब्रिटेन की महारानी Buckingham Palace में रहती हैं और ये 1837 से राजघराने का शाही महल रहा है। इस महल के एक भाग को छोड़ कर बाकी सभी को टूरिस्टों के लिए खोला गया है। जो हिस्सा बचा के रखा गया है, वो है महारानी का बेडरूम। जहां किसी को भी जाने की मंजूरी नहीं है।

नॉर्थ सेंटिनेल आयलैंड, भारत- भारत के अंडमान में मौजूद इस आइलैंड पर कोई भी व्यक्ति नहीं जा सकता, अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो यहां मौजूद कुछ आदिवासी उसे जान से मारने पर उतारू हो जाते हैं। उनकी मानना है कि ये बहुत ही पवित्र क्षेत्र है, जहां इंसानों को नहीं जाना चाहिए।

एरिया 51, यूएसए- अमेरिका के नेवादा में मौजूद इस इलाके में भी घूमने-फिरना मना है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो इसे अमेरिकी सेना ने एलियन टेस्टिंग के लिए बनाया है। हालांकि ये बात सही है या नहीं, ये आज तक नहीं पता चल पाया है। लेकिन यहां जाना जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ने यहां लैंड माइंस बिछा रखी हैं।

निहाऊ, अमेरिका- इसे The Forbidden Island भी कहा जाता है,क्योंकि इसकी झलक आप दिन ढ़लने के बाद ही पा सकते हैं, इसका स्वामित्व 150 सालों से एक ही परिवार के हाथ में है।

पोवेगलिया, इटली- इटली के वीनस शहर के पास ये एक छोटा सा आइलैंड है। यहां 14वीं शताब्दी में प्लेग फैलने के कारण सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी भी कहानी है कि, 19वीं सदी में यहां एक पागल खाना बना था। इस पागल खाने में बहुत से मरीज़ों पर जानलेवा प्रयोग किए जाते थे। फिलहाल इस डरावनी जगह पर सैलानियों के जाने पर पूरी तरह से पाबंदी है।

किन शी हुआंग मकबरा, चीन- चीन के पहले सम्राट के पास टेराकोटा वारियर्स नाम की एक सेना थी। ये सैनिक अपने राजा की रक्षा के लिए तैनात थे। जब उनकी मौत हुई, तब क्रब में टेराकोटा वॉरियर्स की हजारों मूर्तियां दफन की गई थी। यहां जाना बैन है, क्योंकि इस मकबरे में मौजूद पारे के कारण लोगों की जान जाने का खतरा है।

कोका-कोला रेसिपी वॉल्ट, अमेरिका- सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी कोका कोला को बनाने वाली रेसिपी को एक 6.6 फ़ीट की तिज़ोरी में अटलांटा में सुरक्षित रखा गया है। इसकी सुरक्षा में हर दम हथियारबंद गार्ड तैनात रहते हैं। जिमी होफा ने इसकी खोज की थी, जिनकी बाद में हत्या कर दी गई थी। इस तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है।

बोहेमियन ग्रोव, अमेरिका- कैलिफोर्निया के मोंटे रियो में ये जगह एक खेल मैदान की तरह है, मगर इस मैदान पर चुनिंदा शख्सियतों को ही जाने की इजाजत है। जिनमें कुछ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति, संगीतकार और बड़े सरकारी अफसर शामिल हैं। इसकी सदस्यता हासिल करना भी बड़ी टेढ़ी खीर साबित होता है। सदस्यतों की मंजूरी के बाद ही यहां कोई आ सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, अब बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम के लिए जरूरी नहीं आधार

कोर्ट ने कहा कि आधार कानून निजता का हनन नहीं करता इस अधिकार पर तर्क संगत नियंत्रण लगाया जा सकता है। आधार योजना के पीछे कानून है और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को सामाजिक योजनाओं का लाभ देना है। आधार कानून पूर्णता के सिद्धांत पर खरा उतरता है। निजता के अधिकार और भोजन, आश्रय आदि के अधिकार के बीच संतुलन कायम है क्योंकि व्यक्ति के बारे में सूचना बहुत कम एकत्रित की जाती है। कोर्ट ने मनी बिल के रूप में आधार को पास करने को सही ठहराया है।

कोर्ट की केंद्र को हिदायत
कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार बायॉमीट्रिक डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी।कोर्ट ने केंद्र को हिदायत भी दी है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट की धारा 57 को रद कर दिया है। अब प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।

मोबाइल और बैंक से आधार लिंक करना जरूरी नहीं

कोर्ट ने कहा कि मोबाइल और बैंक से आधार को लिंक करने का आदेश रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बैंक खाते के बारे में यह अनिवार्यता सिर्फ नये खाते खोलने के लिए नहीं रखी गई है बल्कि पुराने खातों के लिए भी आधार से लिंक कराना जरूरी किया गया अन्यथा खाता निष्कि्रय कर दिया जाएगा। ऐसा करना व्यक्ति को अपनी संपत्ति के अधिकार से वंचित करना है। ये नियम मनमाना है।

नहीं बढ़ाया जा सकता दायरा
कोर्ट यह भी साफ किया है कि सब्सिडी, सेवाओं का लाभ देने के लिए आधार का दायरा नहीं बढाया जा सकता। जाहिर तौर पर संदेश यह था कि किसी भी ऐसी योजना से आधार को नहीं जोड़ा जा सकता है जिसमें सिर्फ थोडी बहुत छूट हो। कोर्ट ने कहा कि धारा 7 के तहत सब्सिडी का लाभ देने वाली योजनाओं और वंचित वर्ग के लिए चलने वाली कल्याणकारी योजनाओं में आधार लागू होगा।

आधार कहां जरूरी कहां नहीं
1- सिर्फ उन्हीं योजनाओं में आधार लागू किया जा सकता है जो कि समेकित निधि से खर्च पर चल रही हों।
2- सीबीएससी, नीट, जेईई, यूजीसी आदि पर आधार लागू नहीं होगा
3- बच्चों को आधार कानून में इनरोल करने के लिए उनके मातापिता की सहमति जरूरी होगी।
4- माता पिता की सहमति से आधार में इनरोल हुए बच्चे बालिग होने पर अगर योजना का लाभ नहीं लेना चाहते तो उन्हें आधार से बाहर जाने का विकल्प दिया जाएगा
5- स्कूल में एडमीशन के लिए आधार जरूरी नहीं होगा क्योंकि न तो ये सेवा है और न ही सब्सिडी
6- संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत 6 से 14 साल के बच्चों के लिए शिक्षा मौलिक अधिकार है ऐसे में उसे लाभ में नहीं गिना जा सकता
7- छह से चौदह साल के बच्चे सर्व शिक्षा अभियान में आते हैं और उनके लिए आधार जरूरी नहीं होगा
8- धारा 7 के तहत कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए बच्चों को मातापिता की सहमति से आधार नंबर के लिए इनरोल किया जा सकता है
9- आधार नंबर न होने के कारण किसी भी बच्चे को योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। अन्य दस्तावेजों के आधार पर पहचान करके उसे लाभ दिया जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना साझा करने का कानून रद
कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना साझा करने की धारा 33 (2) के मौजूदा स्वरूप को अस्वीकार्य बताते हुए रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर किसी व्यक्ति की सूचना साझा करने की अवधारणा में कोई खामी नहीं है लेकिन इसके लिए संयुक्त सचिव से ऊंची रैंक के अधिकारी की मंजूरी होनी चाहिए। इसके अलावा दुरुपयोग रोकने के लिए हाईकोर्ट के जज को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मौजूदा कानून रद करते हुए सरकार को इस बारे में नया प्रावधान बनाने की छूट दी है।

पांच न्यायाधीशों में से कुल तीन फैसले दिये गए जिसमें जस्टिस एके सीकरी ने स्वयं, मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस एएम खानविलकर की ओर से कानून को संवैधानिक ठहराने वाला फैसला दिया जबकि जस्टिस अशोक भूषण ने अलग से दिये फैसले में तीन न्यायाधीशों के फैसले के अधिकतर हिस्से से सहमति जताते हुए कुछ मुद्दों पर अपना अलग फैसला दिया और कानून के संवैधानिक ठहराया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने असहमति वाला अलग से फैसला सुनाया। तीन न्यायाधीशों का मिला कर कुल 1448 पेज का फैसला है।

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खाली समय का करें उपयोग, YouTube देखकर ऐसे कमाएं पैसे

अगर आपको यूट्यूब वीडियो देखना पसंद है तो आप इस शौक के जरिए पैसा भी कमा सकते हैं। आपका यह शौक औसतन आपको 20 से 30 हजार तक की कमाई करवा देगा। ध्यान रहे ऑनलाइन साइट्स सेकंडों के हिसाब से पेमेंट करती हैं। ऐसे में आप जितने ज्यादा वीडियोज देखेंगे, उतना ही ज्यादा आपको फायदा होगा। इसलिए आप अपने दिन के कुछ खाली घंटे निकालकर ये काम करें। जानिए कौन सी साइट देती हैं वीडियो देखने का पैसा।

पेड2यूट्यूब (paid2youtube): जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस साइट पर आपको सबसे पहले खुद को रजिस्टर्ड करवाना होगा। यहां पर 30 सेकंड का यूट्यूब वीडियो देखने और उस पर कमेंट करने के पैसे मिलते हैं। यहां आप 200 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। आप यह काम एक साथ और कुछ-कुछ देर बाद समय निकालकर भी कर सकते हैं। आपके खाते में एक बार 670 रुपए की रकम जमा होने के सात दिन बाद पेपाल अकाउंट से आपको पेमेंट कर दी जाती है।

स्वैगबक्स (swagbucks): यहां भी आपको सबसे पहले अपना अकाउंट बनाना होगा। यहां पर आप सर्वे के जरिए भी कमाई कर सकते हैं। आपकी ओर से किए गए हर क्लिक और वीडियो देखने पर स्वैगबक्स आपको एक एसबी से लेकर 30 एसबी तक प्वाइंट्स देता है। 500 एसबी प्वाइंट्स पर आपको 250 रुपए का फ्लिपकार्ट और एमेजन का गिफ्ट कार्ड दे दिया जाता है।

यू-क्यूब्ज (you-cubez): यहां पर भी आपको सबसे पहले साइन अप करना होगा। यानी अपना अकाउंट बनाना होगा। इस एजेंसी पर प्रति क्लिक आपको 0.005 सेंट का भुगतान किया जा सकता है। यानी आप इस साइट पर अगर एक दिन में 400 बार क्लिक करते हैं तो आप 134 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह एक एडवरटाइजिंग एजेंसी की साइट है।

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जानिए भारत में कैसे बढ़ती-घटती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमत

आइये जानते हैं वे कौन से फैक्टर हैं जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

बढ़ती मांग

भारत और अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास ने भी पेट्रोल और अन्य आवश्यक ईंधन की मांग में वृद्धि की है। हाल ही में निजी वाहनों के मालिकों की संख्या बढ़ी है, जिससे भारत में पेट्रोल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

आपूर्ति और मांग में असंतुलन
कच्चे तेल के इनपुट मूल्य की उच्च लागत के कारण भारत में तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाजार की मांगों को पूरा करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। जिससे देश में पेट्रोल की कम आपूर्ति और अधिक मांग होती है।

टैक्स रेट
पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर भी काफी हद तक निर्भर करती हैं। सरकार की ओर से टैक्स दरें बढ़ाने की स्थिति में कंपनियां अक्सर उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है।

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें
बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है। नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा। इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 105. 49 फीसदी और डीजल में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, फिलहाल पेट्रोल डीजल में कई सारे टैक्स शामिल हैं। मसलन, एक्साइज ड्यूटी और वैट (मूल्य संवर्धित कर)। इसके अलावा डीलर की ओर से लगाया गया रेट और कमीशन भी कीमतों में जुड़ते हैं। एक्साइज ड्यूटी तो केंद्र सरकार लेती है, जबकि वैट राज्यों की आमदनी (राजस्व) में जुड़ता है।

89.97 प्रति लीटर
महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल सोमवार को हो गया। यह पूरे देश में पेट्रोल की सर्वाधिक कीमत है।

रुपये की हालत
डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत भी उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करती हैं। भारतीय तेल कंपनियां अन्य देशों से आयातित तेल का भुगतान डॉलर में करती हैं। लेकिन उनके खर्च रुपये में दर्ज होते हैं। जब डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आती है, तो कंपनियों के लाभ पर असर पड़ता है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। इसी तरह रुपया मजबूत होने पर कीमतों में राहत मिलती है।

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इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिल सकती है 1.4 लाख रुपये की सब्सिडी

महिंद्रा और टाटा मोटर्स की मौजूदा इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1.4 लाख रुपये तक सब्सिडी की उम्मीद की जा सकती है। आपको बता दें कि यह सब्सिडी 20 फीसद से ज्यादा नही होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जो महंगी और अच्छी गुणवत्ता की कारों पर सब्सिडी 4 लाख रुपये तक हो सकती हैं, यह फैसला ए. एन. झा (व्यय सचिव )की अगुवाई में उच्च अधिकार प्राप्त समिति की गुरुवार को हुई बैठक में लिया गया। FAME के दूसरे चरण के तहत हुई बैठक में हाईब्रिड गाड़ियों और ट्रक्स को बाहर रखने का फैसला किया गया।

5 साल तक चलने वाली इस योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। जबकि पहले यह राशि 4,000 करोड़ रुपये थी। वैसे फाइनल पॉलिसी पर केद्र सरकार की मुहर लगनी बाकी है। आपको बता दें कि लोगों को पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों को छोड़ने को प्रोत्साहित करने के लिए FAME-I के तहत 700 करोड़ रुपये का आवंटन किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सब्सिडी देने के साथ चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क भी तैयार करेगी। लेकिन बाद में सरकार ने बदलाव करते हुए योजना को सिर्फ सरकारी बसों तक सीमित रखने का फैसला किया, लेकिन एक बार फिर नीति में बदलाव किये गये हैं। नीति आयोग ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई सहित 11 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

किस गाड़ी पर कितनी सब्सिडी?: अब सवाल यह आता है कि किस इलेक्ट्रिकल गाड़ी पर कितनी सब्सिडी मिलेगी, तो आपको बता दें कि यह गाड़ी की बैटरी पर निर्भर करेगा। बैटरी की हर किलोवॉट आवर (KwH) क्षमता पर 10,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, मौजूदा ई-कारें 14 KwH क्षमता वाली बैटरी के साथ आती हैं यानी सरकार की तरफ से इनकी खरीद पर 1.4 लाख रुपये की सब्सिडी देगी।

टू-व्हीर्ल्स और थ्री-वीलर्स पर कितनी सब्सिडी ?: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में 2 KwH क्षमता की बैटरी लगी होती हैं तो वही इलेक्ट्रिक थ्री-वीलर्स में 4 से 4.5 KwH क्षमता वाली बैटरी लगी होती हैं जिसकी वजह से टू-व्हीलर्स पर 20 हजार और थ्री-वीलर्स पर 45 हजार रुपये तक की की सब्सिडी मिलेगी।

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अब ट्रेन की लोकेशन भी बताएगा गूगल, जानें अन्य नई सुविधाओं के बारे में

Google for India Edition 4 इवेंट में गूगल के भारत के भविष्य के प्लान्स के बारे में कई घोषणाएं की गई हैं। जिनमें गूगल सर्च और मैप्स के साथ ही पेमेंट सिस्टम्स के बारे में कई घोषणाएं शामिल हैं। गूगल के सीनियर इंजीनियरिंग डायरेक्टर प्रवीर गुप्ता ने बताया कि गूगल असिस्टेंट अब मराठी भाषा को भी सपोर्ट करेगा। आइए, जानते हैं गूगल की बड़ी घोषणाओं के बारे में

गूगल तेज का नाम बदला

प्रवीर गुप्ता ने आगे कहा, Google असिस्टेंट जल्द ही अन्य 7 भाषाओं को भी सपोर्ट करेगा। इतना ही नहीं, आप अब अपने Google असिस्टेंट पर ट्रेन की लोकेशन भी जान सकते हैं। गूगल तेज ऐप का नाम बदलकर ”गूगल पे” रखा गया है। Google ने हाल में घोषणा की थी कि ”Tez” ऐप के डाउनलोड की संख्या 5 करोड़ पार कर गई है। Google के इस सालाना इवेंट में मैप्स और असिस्टेंट में भी कुछ खास फीचर जोड़ा सकता है।

भारत में अपार संभावनाएं

गूगल के वाइस प्रेसिडेंट सेल्स एंड ऑपरेशन (साउथ ईस्ट एशिया) राजन आनंदन ने कहा, भारत में इस समय 400 मिलियन इंटरनेट यूजर्स हैं, जिसमें 45 फीसद महिलाएं हैं। भारत में गूगल के लिए अपार संभावनाएं हैं।भारत में वॉयस सर्च करने के मामले में 270 फीसद की वृद्धि देखी गई है। हमारा लक्ष्य अगले 2 वर्षों में 500 मिलियन तक पहुंचने की है। हम इसलिए भारतीय भाषाओं में सर्च के ऑप्शन को बढ़ा रहे हैं।

50 फीसद से ज्यादा सर्च करने वाले यूजर्स बढ़े

आनंदन ने आगे कहा, भारत में कई यूजर्स अब गूगल पर सर्च करके अपने जवाब पा रहे हैं। पिछले 12 महीने में हर दिन मोबाइल पर 50 फीसद से ज्यादा बार भारतीय यूजर्स कुछ न कुछ सर्च कर रहे हैं।

प्रोजेक्ट नवलेखा की शुरुआत

गूगल ने इस इवेंट में अपने ”प्रोजेक्ट नवलेखा” की शुरुआत की है। इस प्रोजेक्ट के तहत अब पब्लिशर्स अपने कंटेंट को ऑनलाइन पब्लिश कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत देश के 1,35,000 भारतीय पब्लिशर्स को डिजिटाइज्ड किया जाएगा।

एंड्रॉइड गो में जोड़े दो नए फीचर्स

गूगल के एंड्रॉइड गो में दो नए फीचर्स जोड़े गए है। अब गो यूजर्स दो भाषाओं में न्यूज फीड और ऑडियो प्लेबैक के द्वारा आर्टिक्ल्स चुन सकेंगे। बाद में इस फीचर में अंग्रेजी और हिंदी के अलावा कई भारतीय भाषाओं जैसे मराठी, मलयालम आदि को जोड़ा जाएगा।

वॉयस असिस्टेंट अब भारतीय भाषाओं में करेगा काम

गूगल का वॉयस असिस्टेंट अब हिंदी और अंग्रेजी के अलावा मराठी भाषा को भी सपोर्ट करेगा। इसके साथ ही कंपनी वॉयस असिस्टेंट के साथ 7 अन्य भाषाओं को भी जो़ड़ेगा।

मैप्स गो ऐप में जोड़ा गया टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन फीचर

गूगल के मैप्स गो ऐप के साथ टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन फीचर को जोड़ा गया है। गूगल मैप्स के इस लाइट वर्जन में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ भी वॉयस नेविगेशन फीचर काम करेगा। इसके अलावा कोलकाता के लाखों लोगों के लिए प्लस कोड भी प्रोवाइड करेगा।

400 से ज्यादा एंड्रॉइड गो स्मार्टफोन इस साल होंगे लॉन्च

सैमसंग के फ्लैगशिप वाला गैलेक्सी J2 कोर स्मार्टफोन एंड्रॉइड गो ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करेगा। सैमसंग का यह पहला स्मार्टफोन होगा जो गूगल के एंड्रॉइड गो को सपोर्ट करेगा। इस साल के अंत तक 400 से ज्यादा एंड्रॉइड गो ऑपरेटिंग सिस्टम वाला स्मार्टफोन लॉन्च किया जाएगा।

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दुनिया के कई देशों को आधी कीमत पर पेट्रोल डीजल बेच रहा है भारत, जानिए कारण!

पंजाब के रोहित सभ्रवाल की आरटीआई से पता चला है कि मैंग्लोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमि. से 1 जनवरी 2018 से 30 जून 2018 के बीच पांच देशों – हांगकांग, मलेशिया, मॉरिशस, सिंगापुर और यूएई को 32 से 34 रुपए प्रति लीटर में रिफाइंड पेट्रोल और 34 से 36 रुपए में रिफाइंड डीजल बेचा गया। इस दैरान भारत में पेट्रोल की कीमत 69.97 रुपए से 75.55 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 59.70 रुपए से 67.38 रुपए प्रति लीटर रही।

– इन पांच देशों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ईराक, इजराइल, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में भारत से रिफाइन्ड पेट्रोल-डीजल निर्यात किया जाता है।

देशवासियों पर 150 फीसद तक टैक्स

रोहित सभ्रवाल कहते हैं, बाकी देशों को भारत से भले ही बेहद सस्ता रिफाइंड पेट्रोल-डीजल मिल रहा हो, लेकिन यहां के लोगों पर 125 से 150 फीसद तक टैक्स लगाया जा रहा है। यही कारण है कि भारत के अधिकांश राज्यों में पेट्रोल 75 से 82 रुपए लीटर और डीजल 66 से 74 रुपए लीटर तक बेचा जा रहा है। ताजा खबर तो यह भी है कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लेने से इन्कार कर दिया है। यानी दाम कम होने की यह उम्मीद भी खत्म हो गई है।

यही 35.90 रुपए प्रति लीटर वाला कच्चा पेट्रोल रिफाइन करने के बाद भारत में 77 से 82 रुपए लीटर हो जाता है, क्योंकि इसमें करीब 19.48 रुपए की एक्साइज ड्यूटी, 16.47 रुपए प्रति लीटर का VAT, अन्य टैक्स और डीलर कमीशन शामिल हो जाता है। डीजल पर भी ये सभी टैक्स लगते हैं।

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श्रीकृष्ण से लेकर इंद्र तक से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी, जानें क्यों मनाते हैं राखी

मुख्य रूप से रक्षाबन्धन को हिन्दू आैर जैन त्योहार के तौर पर मान्यता प्राप्त है। ये प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। सावन में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी अर्थात रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व होता है। ये सूत्र कच्चे सूत से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, सोने आैर चाँदी जैसी मंहगी धातु तक से र्निमित हो सकते हैं। हांलाकि राखी सामान्यतः बहनें ही भाई को बांधती हैं परन्तु कर्इ स्थानों पर बेटियों द्वारा पिता या परिवार के बड़े लोगों को, ब्राह्मणों, आैर गुरुओं को भी बांधने की परंपरा है। राखी बांधने के पीछे मूल भावना प्रेम आैर रक्षा का आश्वासन ही होता है। कन्याएं अपने भार्इ आैर पिता को राखी इसी भावना के तहत बांधती हैं। राखी से जुड़ी कथायें भी इसी का संदेश देती हैं। राखी कैसे शुरू हुर्इ इससे जुड़ी इसी तरह की कर्इ कथायें बतार्इ जाती हैं।

भगवान विष्णु आैर बलि की कथा

कहते हैं कि भगवान विष्णु के प्रभाव से जब राजा बलि को पताल लोक में जाना पड़ा इससे देवताओं की रक्षा हुई तभी से हिंदू धर्मावलंबी रक्षाबंधन मनाते हैं। दूसरी आेर उसी समय बलि ने विष्णु जी से अपने साथ रहने का आर्शिवाद प्राप्त कर लिया आैर उससे अपने पति को वापस लाने आैर अपने साथ रखने के लिए माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधीं आैर बदले में अपने पति को वापस प्राप्त किया। तबसे राखी की परंपरा की शुरूआत मानी जाती है, क्योंकि इस तरह लक्ष्मी जी के सौभाग्य की रक्षा हुर्इ। बलि से जुड़ा ये श्लोक भी इसी की पुष्टि करता है। येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं। हे रक्षे मतलब राखी! तुम अडिग रहना यानि तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।

इंद्र से जुड़ी कथा

भविष्यपुराण के अनुसार देवराज इंद्र जब देव दानव युद्घ में दानवों से पराजित हो रहे थे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए उपरोक्त श्लोक पढ़ा था जिसके चलते ना सिर्फ इंद्र की रक्षा हुर्इ थी बल्कि उनकी जीत भी हुर्इ थी। इसे भी रक्षाबंधन की शुरूआत कहा जाता है।

कृष्ण आैर युधिष्ठिर की कथा

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में भी रक्षाबन्धन का प्रसंग है ये कहा जाता है। इसी प्रकार मान्यता है कि द्वापर युग में ही युधिष्ठिर ने वासुदेव नंदन श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा चली आ रही है। अपनी इन्हीं विशेषताआें के चलते धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने वाला माना जाता है।

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ISIS चीफ बगदादी ने राहुल गांधी को शुक्रिया कहा। चाहता है राहुल से सहयोग। जानिए पूरा मामला!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जर्मनी के हैम्बर्ग में अपने भाषण के दौरान इराक में बेरोजगारी को खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के गठन की वजह बतलाया। उन्होंने इराक का उदाहरण देते हुए भारत सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ‘भारत सरकार की मौजूदा नीति में विकास की प्रक्रिया से आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को बाहर रखा जा रहा है, जिसके खतरनाक परिणाम होंगे।’ हैम्बर्ग में 23 देशों के प्रतिनिधियों के सामने कई विषयों पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने आगे कहा कि ’21वीं सदी में लोगों को बाहर रखना काफी खतरनाक है। अगर आप 21वीं सदी में लोगों को कोई विजन नहीं देते तो कोई और देगा और विकास प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखना असली खतरा है।’

बुधवार को अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने यहां जीएसटी, नोटबंदी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की थी। लेकिन अब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के बयान को लेकर मजाक उड़ाया जा रहा है। कई तरह के फनी मीम्स भी इसे लेकर शेयर किये जा रहे हैं। एक यूजर ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ‘आईएस चीफ अबु बकर अल बगदादी ने राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए उनसे कहा है कि वो सभी आईएसआईएस सदस्यों को अमेठी में रोजगार उपलब्ध कराएं।’

बहरहाल आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष के इस भाषण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिस प्रकार से आतंकवाद को सही ठहराने का प्रयास किया और आईएसआईएस के बारे में जो जस्टिफिकेशन दिया है उससे भयावह और चिंताजनक कुछ नहीं हो सकता है।

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विदेश व्यापार में इजाफे का जरिया बनी भारत की बदली रणनीति, बढ़ रहा निर्यात

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद ही भारत के सभी विदेशी दूतावासों और राजदूतों व उच्चायुक्तों को उन देशों में भारतीय वस्तुओं/उत्पादों की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया था। यहां तक कि द्विपक्षीय संबंधों के लिए होने वाली बातचीत में भी आपसी कारोबार को बढ़ाने के उपायों को शामिल करने पर जोर दिया गया। पूर्वी यूरोप के एक देश में रह चुके एक राजदूत के मुताबिक सरकार का यह स्पष्ट संदेश था कि भारतीय निर्यात की संभावनाओं को सदैव ध्यान में रखा जाए।

बीते चार साल में सरकार को तमाम दूतावासों से विदेश व्यापार को लेकर तमाम सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। सभी दूतावासों से यह जानकारी मांगी गई थी कि उन देशों में किन भारतीय उत्पादों की मांग की संभावना है। सरकार ने अपने दूतावासों की मदद से बीते चार साल में काफी जानकारी जुटाई है। कुछ उत्पादों के संबंध में मसलन इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के मामले में तो वाणिज्य मंत्रालय ने तत्काल कदम उठाए हैं जिनका असर निर्यात पर दिखा भी है। बीते छह महीने में निर्यात में वृद्धि का जो सिलसिला शुरू हुआ है, इसमें दूतावासों की तरफ से प्राप्त सूचनाओं का भी योगदान है।

इस पूरी एक्सरसाइज का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि सरकार को भविष्य के लिए अपनी निर्यात रणनीति तैयार करने में काफी मदद मिल रही है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इन सूचनाओं के आधार पर एक मैट्रिक्स तैयार किया जा रहा है। इसके तहत जिस देश में जिस वस्तु या उत्पादों की मांग सामने आई है वहां उसके निर्यात को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह मैट्रिक्स विभिन्न देशों के आधार के साथ साथ दुनिया के विभिन्न जोनों में उत्पादों की मांग के आधार पर तैयार किया जा रहा है।

दूतावासों की सूचना के आधार पर इस मैट्रिक्स में कई ऐसे देशों के नाम भी जोड़े जा रहे हैं जो अभी तक भारत की निर्यात सूची में प्राथमिकता पर नहीं थे। लेकिन वहां से भी भारतीय वस्तुओं की मांग की सूचना मिली है। इन सूचनाओं के आधार पर ही सरकार निर्यातकों और उनके संगठनों को जानकारी उपलब्ध करा रही है ताकि भारतीय निर्यात को तेज वृद्धि की राह पर लाया जा सके। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु की निर्यात संगठनों के साथ हुई बातचीत में भी यह मुद्दा चर्चा में आया है।