Posted on

देश की सबसे महंगी फिल्म 2.0 #Most #Expensive #Film of #India

देश की सबसे महंगी इस फिल्म को लेकर इनके फैन्स इंतज़ार में थे, जिनके लिए ख़ुशी का मौका है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये डेट मुश्किल बन कर आई है ।

और वो हैं फिल्म केदारनाथ से जुड़े लोग । अभिषेक कपूर के निर्देशन में बन रही सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की ये फिल्म 30 नवंबर को रिलीज़ के लिए तय है, लेकिन शंकर निर्देशत 2.0 को 29 नवंबर को रिलीज़ किये जाने की घोषणा के साथ ही अब केदारनाथ के सामने संकट आ गया है। वैसे पहले से ही केदारनाथ संकट से घिरी रही है । निर्देशक और पूर्व निर्माता कंपनी के बीच हुए विवाद के बाद ये फिल्म लगभग ठंडे बस्ते में चली गई थी लेकिन प्रोड्यूसर रॉनी स्क्रूवाला ने फिल्म को संकट से उबार लिया । सैफ़ अली खान की बेटी सारा की ये डेब्यू फिल्म है और जब ये संकेत मिलने लगे थे कि केदारनाथ बन नहीं पायेगी तो करण जौहर ने उन्हें अपने प्रोडक्शन में बन रही फिल्म सिंबा में रणवीर सिंह के साथ कास्ट कर लिया ।

फिल्म 2.0 की 29 नवंबर को रिलीज़ का मतलब केदारनाथ को या तो अपनी डेट आगे-पीछे करनी पड़ेगी या मुकाबले के लिए तैयार होना होगा l वैसे नवंबर और दिसंबर में बड़ी फिल्मों का टकराव रहेगा । सात नवंबर को आमिर खान और अमिताभ बच्चन स्टारर ठग्स ऑफ हिंदोस्तान आएगी और 22 दिसंबर को शाहरुख़ खान की फिल्म ज़ीरो रिलीज़ होगी । फिल्म 2.0 के मेकर ने इंतज़ार करवा कर जो डेट चुनी है वो बॉक्स ऑफ़िस पर काफ़ी उपयुक्त मानी जा रही है क्योंकि करीब 500 करोड़ तक पहुंच गई फिल्म की लागत से पार पाने के लिए फिल्म को लॉन्ग रन चाहिए होगा । बताया जा रहा है कि फिल्म के बजट में 100 करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च जुट गया है क्योंकि फिल्म के स्पेशल इफ़ेक्ट्स का काम लगातार बढ़ता जा रहा था । रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर रोबोट/ इंधीरन का सीक्वल फिल्म 2.0 का पिछले दो साल से इंतज़ार हो रहा है ।

3 डी कन्वर्जन के साथ इंटरनेशनल स्तर के स्पेशल इफ़ेक्ट्स पर अब तक समय से काम पूरा न होने के कारण हुई है l अमेरिका की जिस कंपनी को फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स का ठेका दिया गया था वो कंपनी ही दिवालिया हो गई l इस फिल्म में रजनीकांत अपने पुराने वाले रोल में हैं जबकि अक्षय कुमार बड़े ही विचित्र गेट अप में विलेन बने दिखेंगे। पिछली बार फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन थीं तो इस बार एमी जैक्सन फीमेल लीड में होंगी। अक्षय कुमार जिस डॉक्टर रिचर्ड का रोल कर रहे हैं उसका गेटअप एक राक्षसी कौवे जैसा है।

Posted on

युवराज सिंह को मिली डॉक्टरेट की मानद उपाधि

स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह को खेल में दिये योगदान के लिये ग्वालियर के आईएमटी विश्वविद्यालय ने आज दर्शनशास्त्र में डाक्टरेट की मानद् उपाधि से नवाजा। युवराज को यह सम्मान मैदान में असाधारण खेल कौशल दिखाने के अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निजात पाने के बाद दूसरों को हौसला देने के लिये दिया गया।

यहा जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक युवराज के अलावा यह सम्मान डा. ए.एस किरण कुमार (अंतरिक्ष विज्ञान), गोविंद निहलानी (फिल्म), डा. अशोक वाजपेयी (कवि), रजत शर्मा ( मीडिया), डा. आर.ए माशेलकर (विज्ञान एवं तकनीक) और अरुणा राय (सामाजिक कार्य) को भी दिया गया।

युवराज ने कहा, ‘‘ डाक्टरेट की उपाधि पाकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। इससे मुझे अतिरिक्त जिम्मेदारी का अहसास होता है और मैं अपने कार्यों से दूसरों के लिये उदाहरण बनना चाहता हूं।’’ युवराज ने देश के लिये 400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10,000 से ज्यादा रन बनाये हैं। उन्होंने भारत के टी20 विश्व कप 2007 और एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप 2011 जीतने में अहम भूमिका निभाई थी।

Posted on

अहमद पटेल के ‘करीबियों’ पर ईडी के छापे, 5500 करोड़ के घोटाले का आरोप

दिल्ली में संदेसारा ग्रुप के ठिकानों पर 5500 करोड़ के घोटाले के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा है. इस मामले में बड़ी बात ये है कि छापेमारी कुछ ऐसे लोगों के ठिकानों पर भी की गई है जो काम तो अहमद पटेल के यहां करते थे लेकिन उन्हें वेतन संदेसारा ग्रुप की ओर से दिया जाता था, अब प्रवर्तन निदेशालय इसी की जांच कर रहा है.

इस पूरे मामले पर अहमद पटेल ने कहा, ”जिन तीन लोगों के यहां छापे मारे गए (घनश्यान पांडे, संजीव महाजन और लक्ष्मीचंद शर्मा) उनमें संजीव महाजन उनके घर आते हैं.” अहमद पटेल ने इसके अलावा किसी भी प्रतिक्रिया ये इनकार कर दिया.

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय गगन धवन नाम के शख्स को गिरफ्तार भी कर चुका है. प्रवर्तन निदेशालय पीएमएलए के तहत मामला दर्ज है. बैंक से 5500 करोड़ रूपये का लोन दिलाने और इस पैसे को ठिकाने लगाने में अहमद पटेल की भूमिका की जांच हो रही है. दिल्ली में कुल सात ठिकानों पर छापेमारी चल रही है, सूत्रों के मुताबिक छापेमारी में प्रवर्तन निदेशालय के हाथ बेहद अहम दस्तावेज लगे हैं.

कौन हैं अहमद पटेल?
अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं. कांग्रेस पार्टी में अहमद पटेल की अहम भूमिका है. गुजरात के भरूच के रहने वाले हैं. कहा जाता है सोनिया गांधी के हर निर्णय के पीछे अहमद पटेल का ही दिमाग होता है.

Posted on

किम जोंग के तेवर, कहा- पूरा अमेरिका हमारे परमाणु हथियारों की जद में

चेतावनियों के बावजूद छह परमाणु परीक्षण कर चुके उत्तर कोरिया ने फिर दुस्साहस दिखाया है। उसने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासोंग-15 का परीक्षण करके अमेरिका को फिर आंख दिखाई। उत्तर कोरिया का दावा है कि ह्वासोग-15 की जद में पूरा अमेरिका है। यह मिसाइल अधिक विस्फोटक के साथ 13 हजार किमी की दूरी तय सकती है। इस परीक्षण के साथ ही उत्तर कोरिया कई देशों के लिए खतरा बन गया है।

परमाणु परीक्षण करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय पाबंदी झेल रहे उत्तर कोरिया ने दुनिया को धता बताते हुए अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का एक और परीक्षण कर डाला। भारतीय समयानुसार मंगलवार देर रात मिसाइल परीक्षण करने के बाद उत्तर कोरिया ने ऐलान किया कि ह्वासोंग-15 नामक उसकी मिसाइल का ताजा परीक्षण सफल रहा है। अब पूरा अमेरिका उसके परमाणु हथियारों के हमले की जद में गया है। भारी वजन के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम ह्वासोंग-15 की क्षमता 13,000 किलोमीटर से अधिक है जबकि अमेरिका की दूरी दस हजार किलोमीटर है।

उत्तर कोरिया मसले को केंद्र में रखकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एशिया दौरे के दो हफ्ते बाद ही अमेरिका के सामने नई चुनौती पेश की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ताजा परीक्षण पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति और जापान के प्रधानमंत्री से बात की है। उत्तर कोरिया के सबसे बड़े सहयोगी चीन ने परीक्षण पर गंभीर चिंता जताई हैं। जबकि रूस ने तल्ख अंदाज में इसे भड़कावे की कार्रवाई कहा है। ज्ञात हो, तीन सितंबर को छठा परमाणु परीक्षण करने के बाद दुनिया के तमाम देशों ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगा दिया था।

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने आइसीबीएम की सफलता के लिए देश के परमाणु बल (न्यूक्लियर फोर्स) को बधाई दी है। कहा है कि इस सफल परीक्षण से उत्तर कोरिया ने गौरवशाली मुकाम हासिल कर लिया और वह पूर्ण परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन गया है। नई मिसाइल को ह्वासोंग-15 का नाम दिया गया है। उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में कार्य करेगा। उसकी शक्ति पूंजीवादी अमेरिका की परमाणु हमले की धमकी और ब्लैकमेल करने की नीति का जवाब है।

परमाणु परीक्षण पहला 

नौ अक्टूबर, 2006 में पहला परीक्षण। एक किलोटन से कम विस्फोटक ऊर्जा उत्पन्न। 4.3 तीव्रता का भूकंप आया।

दूसरा : 25 मई, 2009 को दूसरे परीक्षण में 2.35 किलोटन की विस्फोटक ऊर्जा निकली और 4.7 तीव्रता का भूकंप आया।

तीसरा : 12 फरवरी, 2013 को तीसरे परीक्षण में 16 किलोटन विस्फोटक ऊर्जा निकली। 5.1 तीव्रता का भूकंप आया।

चौथा : छह जनवरी, 2016 को चौथे परीक्षण से 15.5 किलोटन विस्फोटक ऊर्जा निकली। इसे हाइड्रोजन बम बताया। 5.1 तीव्रता का भूकंप आया।

पांचवां : नौ सितंबर, 2016 को पांचवें परीक्षण में 30 किलोटन तक विस्फोटक ऊर्जा निकली। 5.3 तीव्रता का भूकंप आया।

छठा : तीन सितंबर, 2017 को हाइड्रोजन बम का परीक्षण। 50 किलोटन ऊर्जा निकली। 6.3 तीव्रता का भूकंप आया।

मिसाइल कार्यक्रम के अहम पड़ाव 1987-92  

स्कड-सी (मारक क्षमता पांच सौ किमी) जैसी मिसाइल, रोडोंग-1 1,300, ताइपोडोंग-1 (2,500 किमी), मुसुदन-1 (3,000 किमी) और ताइपोडोंग-2 (6,700 किमी) का निर्माण शुरू।

1998 : जापान के ऊपर से ताइपोडोंग-1 का परीक्षण किया।

9 मार्च, 2016 : थर्मो न्यूक्लियर वारहेड को लघु रूप में निर्मित किए जाने की घोषणा।

23 अप्रैल, 2016 : पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण।

8 जुलाई, 2016 : अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम थाड लगाने की घोषणा की।

तीन अगस्त, 2016 : जापान के समुद्री क्षेत्र में पहली बार सीधी बैलिस्टिक मिसाइल दागी।

आखिर नहीं माना उत्तर कोरिया

2017 में बनाई अमेरिका तक पहुंच 14 मई : जापान सागर में ह्वासोंग-12 मिसाइल गिराई। सात सौ किमी दूरी तय की।

4 जुलाई : ह्वासोंग-14 दागी। अमेरिका के अलास्का तक पहुंच का दावा।

28 जुलाई : दस हजार किमी की दूरी तक मार करने वाली केएन-14 का परीक्षण।

29 अगस्त : जापान के ऊपर से छह हजार किमी तक वार करने वाली ह्वासोंग-12 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।

15 सितंबर : ह्वासोंग-12 का परीक्षण किया।

सुरक्षा परिषद करेगी हालात पर चर्चा 

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने माना है कि जापान के नजदीक गिरी मिसाइल लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल थी। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इसे पूरी दुनिया के लिए खतरा बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार आइसीबीएम में अधिक वजन का परमाणु हथियार फिट करने की उत्तर कोरिया की क्षमता को लेकर संदेह है। लेकिन जिस रफ्तार से वह हथियार विकसित कर रहा है, उससे लगता है कि वह क्षमता प्राप्त करने में उसे ज्यादा समय नहीं लगेगा। ट्रंप प्रशासन ने फिर कहा है कि उत्तर कोरिया को लेकर उनके पास सभी विकल्प हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बुधवार को उत्तर कोरिया के ताजा परीक्षण पर चर्चा करेगी।

4,475 किमी की ऊंचाई तक गई 

ताजे परीक्षण में उत्तर कोरियाई मिसाइल सबसे ज्यादा ऊंचाई और सबसे ज्यादा दूरी तक जाकर जापान के नजदीक समुद्र में गिरी। उत्तर कोरिया ने बयान जारी कर कहा है कि यह मिसाइल आकाश में 4,475 किलोमीटर की ऊंचाई तक गई और उसने 950 किलोमीटर लंबा सफर तय किया। पूरा सफर तय करने में मिसाइल को कुल 53 मिनट लगे। अंतरिक्ष में जितनी ऊंचाई पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन मौजूद है, उत्तर कोरिया की मिसाइल उससे दस गुना ज्यादा ऊंचाई तक गई। इसके चलते उत्तर कोरियाई मिसाइलों के खतरे से अब अंतरिक्ष भी सुरक्षित नहीं रह गया है।

गुआम तक दो बार पहुंच चुकी है मिसाइल

उत्तर कोरिया वैसे तो बैलिस्टिक मिसाइलों के दर्जनों परीक्षण कर चुका है लेकिन अमेरिका के शहरों तक पहुंच होने का दावा उसने पहली बार किया है। बीते अगस्त में अमेरिकी द्वीप गुआम के नजदीक दो बार बैलिस्टिक मिसाइल पहुंचा चुके उत्तर कोरिया को लेकर विशेषज्ञ मान रहे थे कि कुछ ही महीनों में उसकी मिसाइलें अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम हो जाएंगी। गुआम प्रशांत महासागर में स्थित है और उत्तर कोरिया से उसकी दूरी करीब 3,500 किलोमीटर है।

Posted on

13 हजार किमी तक मार कर सकती उत्तर कोरिया की हॉसॉन्ग मिसाइल, खतरे में यूएस

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से मिसाइल परीक्षण कर जहां अपनी मंशा जता दी है वहीं इस परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया समेत जापान में दहशत का माहौल है। इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका को सीधेतौर पर खतरा बढ़ गया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार उत्तर कोरिया ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया है वह न सिर्फ पहले से ज्‍यादा उन्‍नत है बल्कि ज्‍यादा घातक भी है। यह एक इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल आईसीबीएम थी जिसका नाम हॉसॉन्‍ग-15 बताया गया है। इस मिसाइल परिक्षण के बाद दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से करीब 20 मिनट तक बात की और अपनी चिंता भी जताई। इस दौरान उन्‍होंने अमेरिका से उत्तर कोरिया पर फिर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्‍होंने ने यहां तक कहा है कि यदि उत्तर कोरिया बातचीत की मेज पर आता है तो सभी का भविष्‍य उज्जवल हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ इस मिसाइल के सफल परीक्षण से उत्साहित किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया को एक न्‍यूक्लियर स्‍टेट घोषित कर दिया है। मिसाइल परिक्षण के बाद उन्‍होंने इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई भी दी है।

13 हजार किमी की दूरी तक जा सकती है मिसाइल

रक्षा विशेषज्ञ सी उदय भास्‍कर की नजर में उत्तर कोरिया का ताजा मिसाइल परीक्षण काफी शक्तिशाली है। उन्‍होंने सीधेतौर पर इसको अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने बताया कि यह मिसाइल आईसीबीएम रेंज की है। इस लिहाज से यह दस हजार या इससे भी ज्‍यादा किमी तक जा सकती है। इन हालातों में यह अमेरिका के लिए सीधा खतरा है। उनके अलावा योनहैप एजेंसी ने वैज्ञानिक डेविड राइट के ब्‍लॉग के हवाले से बताया है कि यदि आंकड़े सही हैं तो इस मिसाइल की रेंज करीब 13 हजार किमी तक हो सकती है।

ISS से तिगुनी ऊंचाई तक गई हॉसॉन्‍ग 15

यहां पर आपको बता दें कि किम जोंग उन के नेतृत्‍व में उत्तर कोरिया अब तक दर्जनों परमाणु परीक्षण कर चुका है। इस बार उसने इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल हॉसॉन्‍ग 15 का परिक्षण किया है जो जापान के स्‍पेशल इकॉ‍नमिक जोन में जाकर गिरी है। यह मिसाइल परिक्षण इसलिए भी खास है क्‍योंकि यह करीब 4475 किमी की ऊंचाई तक गई जो कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से भी तीगुनी ऊंचाई है। इसके अलावा इसने करीब 950 किमी की दूरी तय करने में करीब 53 मिनट का समय लगाया। इस लिहाज से भी यह उत्तर कोरिया की अब तक की सबसे उन्नत परमाणु मिसाइल है। यह मिसाइल हॉसॉन्‍ग 14 का ही उन्‍नत स्‍वरूप है। इस मिसाइल को लोफ्टेड एंगल से दागा गया था। जानकारों के मुताबिक यदि इसको स्‍टेंडर्ड तरीके से दागा जाता तो यह दस हजार किमी से अधिक ऊंचाई तक चली जाती।

 

पहले से ही मिल रहे थे मिसाइल परीक्षण के संकेत

यहां पर हम आपको यह भी बता देते हैं कि इस मिसाइल परीक्षण से पहले ही जापान को इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि प्योंगयांग एक और मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है। हालांकि किसी भी उपग्रह से परीक्षण स्थल पर इस तरह की किसी गतिविधि का पता नहीं लग सका था। इसी तरह के संकेत सियोल, टोक्यो और वाशिंगटन की सैन्य खुफिया एजेंसियों को भी हासिल हुए थे। उत्तर कोरिया के ताजा प‍रीक्षण के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने एक बार फिर कहा कि किम की कारगुजारियों से पूरी दुनिया को खतरा पैदा हो गया है।

खुद को बताया न्‍यूक्लियर पावर

सफल मिसाइल टेस्‍ट से उत्‍साहित किम ने अपने संदेश में कहा है कि य‍ह मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्‍से को निशाना बना सकती है। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस मिसाइल से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण हमेशा की ही तरह किम जोंग उन की देखरेख में ही किया गया है। इसके सफल परीक्षण के बाद किम ने यह भी कहा है कि इस मिसाइल परीक्षण के बाद आखिरकार हमने न्‍यूक्लियर पावर होने का अहसास हो रहा है। उन्‍होंने उत्तर कोरिया को एक उत्तरदायी परमाणु ताकत करार दिया है, जो अपने देश की रक्षा करना जानता है। इस दौरान किम ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ही मिसाइलें और घातक हथियार विकसित किए हैं। उन्‍होंने इस मौके पर अमेरिका को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अमेरिका परमाणु हमले की धमकी देकर बार-बार उत्तर कोरिया को धमकाता रहा है।

पहले भी कर चुका है हाइड्रोजन बम का परीक्षण

गौरतलब है कि 3 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने सबसे ताकतवर हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। यह परीक्षण करीब 100 किलोटन के हाईड्रोजन बम का था। इस परीक्षण के बाद उत्तरी हमक्योंग प्रांत के किजी इलाके में करीब 5.7 और 4.6 तीव्रता के भूकंप महसूस किए गए थे। यह परीक्षण जनवरी में किए गए परमाणु परीक्षण से करीब 11.8 गुणा अधिक शक्तिशाली था। इतना ही नहीं यह बम जापान में दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान गिराए गए परमाणु बमों से भी करीब पांच गुणा शक्तिशाली था। इसके अलावा 15 सितंबर को भी उत्तर कोरिया की तरफ से एक बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण किया गया था। यह मिसाइल जापान के होकाइडो द्वीप ऊपर से गुजरी थी। इस साल उसका यह 14वां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण था। उस वक्‍त जापान के नागरिकों को चेतावनी देने के लिए लगाए गए सायरन बज उठे थे। उस वक्‍त भी दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की थी। उत्तर कोरिया इससे पहले 2006, 2009, 2013 और 2016 में परमाणु बमों का परीक्षण कर चुका है।

(Source: Jagran)

Posted on

बिटकॉइन ने छुआ 10 हजार डॉलर का रिकॉर्ड हाई, जानिए इससे जुड़ी कुछ अहम बातें

मंगलवार को वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन में तेज उछाल देखने को मिला है। उसके बाद एक बिटकॉइन की कीमत 10,000 डॉलर क पार हो गई है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत 6,50,000 रुपये है। बीते एक वर्ष के दौरान इसमें 900 फीसद से ज्यादा का इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक तरह की पोंजी स्कीम है जिसमें निवेशकों के साथ धोखा हो सकता है।

क्या है बिटकॉइन:
बिटकॉइन एक वर्चुअल करेंसी (क्रिप्टो करेंसी) जैसी है जिसे एक ऑनलाइन एक्सचेंज के माध्यम से कोई भी खरीद सकता है। इसकी खरीद-फरोख्त से फायदा लेने के अलावा भुगतान के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल भारत में एक बिटकॉइन की कीमत करीब 65 हजार रुपये है।

इससे जुड़ी कुछ खास बातें-

  • पूरे विश्व में कुल 1.5 करोड़ बिटकॉइन चलन में होने का अनुमान
  • इस गुप्त करेंसी पर सरकारी नियंत्रण नहीं होता। इसे छिपाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इसे दुनिया में कहीं भी सीधा खरीदा या बेचा जा सकता है।
  • इन्हें रखने के लिए बिटकॉइन वॉलेट उपलब्ध होते हैं।
  • इन्हें आधिकारिक मुद्रा से भी बदला जाता है। इसे न तो जब्त किया जा सकता है और न ही नष्ट।
  • यह किसी देश की आधिकारिक मुद्रा नहीं है। ऐसे में इस पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगता है।
  • बिटकॉइन में ट्रेड करने के लिए कई एक्सचेंज हैं जिनमें जेबपे, यूनोकॉइन और कॉइनसिक्योर एक्सचेंज शामिल है।
  • अधिकांश एक्सचेंज के पास एंड्रॉयड और आईफोल एप्स हैं, जिनके जरिए बैंक एकाउंट से लिंकिंग के बाद क्विक ट्रांस्फर कर सकते हैं।
  • इसके केवाइसी अनिवार्य है। निवेशक के लिए पैन औप अन्य डिटेल्स के साथ आईडी प्रमाणित कराना जरूरी है।
  • बिटकॉइन बेचने पर पैसा तुरंत एकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है। कई एजेंट्स भी होते हैं जो कैश के लिए क्रिप्टो कंरसी की बिक्री करते हैं।

शुरुआत हुई 2009 में:
2008 में पहली बार बिटकॉइन के संबंध में एक लेख प्रकाशित हुआ। इस्तेमाल के लिए यह 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में उपलब्ध हुई। इसे अज्ञात कंप्यूटर प्रोग्रामर या इनके समूह ने सातोशी नाकामोटो के नाम से बनाया।

बिटकॉइन के अलावा और कौन सी हैं क्रिप्टो करंसी-
बिटकॉइन के अलावा इथेरम, रिप्पल, लाइटकॉइन, एनईएम, डैश, इथेरम क्लासिक, आईओटीए, मोनेरो और स्टैटस भी क्रिप्टो करंसी हैं।

Posted on

7वां वेतन आयोग: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के डेपुटेशन अलाउंस में हुआ दो गुना का इजाफा

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। करीब 48 लाख कर्मचारियों का डेपुटेशन अलाउंस (प्रतिनियुक्ति भत्ता) बढ़ने वाला है। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह भत्ता मौजूदा 2,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 4,500 रुपये हो गया है। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर यह कदम उठाया गया है।

मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, “एक ही स्थान पर प्रतिनियुक्ति होने पर भत्ता मूल वेतन का पांच फीसद होगा जो अधिकतम 4,500 रुपए मासिक तक हो सकता है।” बीते शुक्रवार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी किए गए आदेश में यह भी कहा गया कि अगर प्रतिनियुक्ति दूसरे शहर में की जाती है तो भत्ता मूल वेतन का 10 फीसद तथा अधिकतम 9,000 रुपए मासिक होगा। इससे पहले दूसरे शहरों में प्रतिनियुक्ति भत्ते की सीमा 4,000 रुपए थी। इसमें आगे कहा गया कि इसके अनुसार महंगाई भत्ता 50 फीसद बढ़ने पर इस भत्ते की सीमा को 25 फीसद बढ़ाया जाएगा।

बीते हफ्ते केंद्रीय कर्मचारियों जिन्होंने अपनी न्यूनतम सैलरी के मद में जीत हासिल कर ली थी उन्हें उस मीडिया रिपोर्ट के बाद निराश होना पड़ा जिसमें वित्त मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया था कि फिलहाल उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं है। आपको बता दें कि 7वें वेतन आयोग ने 2.57 के एक फिटन फैक्टर की सिफारिश की थी, जिसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति महीने किया जाना था।

Posted on

उत्तराखण्ड में बिजली दरें बढ़ाने की तैयारी, जानिए कितना बढ़ेगा भार

राज्य में बिजली दरों को बढ़ाने की तैयारी है। सोमवार को ऊर्जा निगम की बोर्ड बैठक में यह फैसला किया गया। प्रस्तावित टैरिफ का प्रस्ताव अब विद्युत नियामक आयोग को भेजा जाएगा। नियामक आयोग इस पर अंतिम फैसला लेगा।

ऊर्जा निगम मुख्यालय में सोमवार को नई बिजली दरों को लेकर हुई बोर्ड बैठक में ऊर्जा निगम प्रबंधन ने कहा कि पावर सप्लाई सिस्टम को सामान्य बनाने में बहुत अधिक खर्च हो रहा है। उस अनुरूप बिजली बिल नहीं मिल पा रही है। बिजली की दरें खर्च की अपेक्षा बहुत कम है। दूसरी ओर यूजेवीएनएल बोर्ड ने 8 फीसदी व पिटकुल बोर्ड ने 5 फीसदी टैरिफ को बढ़ाने की मंजूरी दी। कुल साढ़े 13 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी है।

बिजली सभी के लिए महंगी करने का प्रस्ताव 

बिजली के दामों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आवासीय, व्यावसायिक, उद्योग समेत सभी वर्गों के लिए है। ऊर्जा निगम प्रबंधन की ओर से अब इस प्रस्ताव को विद्युत नियामक आयोग को भेजा जाएगा। बोर्ड बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, एमडी बीसीके मिश्रा आदि मौजूद रहे।

प्रदेश भर में होंगी सुनवाई 

ऊर्जा निगम की ओर से बिजली दरों में साढ़े 13 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव का नियामक आयोग पहले तकनीकी व वित्तीय आधार पर परीक्षण करेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में कई स्थानों में प्रस्तावित दरों पर आम जनता से आपत्ति व सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद मार्च अंतिम सप्ताह में आयोग की ओर से वर्ष 2018-19 की दरों की घोषणा की जाएगी।

करंट लगने पर मुआवजा दोगुना 

करंट लगने से होने वाली मौत पर आश्रितों को अब मुआवजा दोगुना मिलेगा। यूपीसीएल बोर्ड ने मुआवजा दो लाख से बढ़ा कर चार लाख रुपये किए जाने को मंजूरी दी। इस मुआवजे का लाभ यूपीसीएल के उपनल कर्मचारी, स्वयं सहायता समूह के कर्मचारियों समेत आम जनता को भी मिलेगा।

नये सब स्टेशनों को मंजूरी 

ऊर्जा निगम बोर्ड बैठक में पॉवर सप्लाई सिस्टम को सुधारने के लिए मोथरोवाला, सिकंदरपुर रुड़की, हरिद्वार सिडकुल सेक्टर पांच, सेक्टर 11, आर्यनगर हरिद्वार, चौरास श्रीनगर में नये सब स्टेशन बनाने का फैसला लिया गया।

माजरा सब स्टेशन पर लोड होगा कम 

राजधानी दून के पॉवर सप्लाई सिस्टम को सुधारने के लिए 33 केवी के छह नये फीडर विकसित करने पर भी मुहर लगी। ये छह नये फीडर 220 केवी आईआईपी बिजलीघर से तैयार होंगे। 33 केवी के ये नये फीडर मियांवाला, रिंग रोड, अजबपुर, रायपुर, स्पोर्ट्स कालेज, आईआईपी के लिए विकसित होंगे। इन नये फीडरों से माजरा व पुरुकुल बिजली घर पर लोड कम होगा।

Posted on

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी में विस्फोट का खतरा, बाली से भागे हजारों लोग, प्रार्थनाएं शुरू की

इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर किसी भी क्षण भीषण ज्वालामुखी विस्फोट की चेतावनी सोमवार को जारी की गई। इस सिलसिले में अलर्ट को उच्चतम स्तर तक बढ़ा दिया गया है। इसे देखते हुए हजारों लोग घर से भागकर सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं। हवाई अड्डा और उड़ानें बंद कर दी गई हैं जिससे बड़ी संख्या में पर्यटक वहां फंसे हैं।

ज्वालामुखी में विस्फोट बंद करने के लिए स्थानीय लोगों ने प्रार्थनाएं भी शुरू कर दीं। बड़ी तादाद में पुरुष व महिलाएं ज्वालामुखी की ओर हाथ जोड़कर बैठे रहे। ज्वालामुखी माउंट आगुंग में पिछले सप्ताह से मोटा गुबार निकल रहा है जो आसमान में करीब तीन किलोमीटर ऊंचा फैल गया है। ज्वालामुखी से लगातार राख निकल रही है और विस्फोट भी हो रहे हैं। रात में आग की ऊंची लपटें देखी गईं। इससे बड़ा विस्फोट होने के संकेत मिलते हैं।

ज्वालामुखी के आसपास रहने वाले करीब 40 हजार लोग घर छोड़कर चले गए हैं। लेकिन करीब एक लाख लोगों को ऐसा करना पड़ेगा। पर्यटनस्थल कुटा के तट से 75 किमी की दूरी पर आगुंग के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र को बढ़ाकर 10 किमी कर दिया गया है। सितंबर में आगुंग ज्वालामुखी से गड़गड़ाहट के बाद आसपास के 1.40 लाख लोगों को भागना पड़ा था।

54 साल पहले हुआ था भीषण विस्फोट

इंडोनेशिया दुनिया का सबसे ज्यादा ज्वालामुखी वाला क्षेत्र है जहां करीब 130 सक्रिय ज्वालामुखी हैं। इससे पहले आगुंग ज्वालामुखी में 1963 में विस्फोट हुआ था जिसमें करीब 1,600 लोग मारे गए थे। यह इंडोनेशिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट था। पिछले साल सुमात्रा में माउंट सिनाबुंग ज्वालामुखी विस्फोट से सात लोगों की जान गई थी। जबकि 2014 में इसमें विस्फोट से 16 लोगों की मौत हुई थी।

Posted on

प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है मर्म विज्ञान: ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के परिसर निदेशक डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा वेदों पर आधारित प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो आयुर्वेद का ही एक अंग है।

वह सोमवार को नंदीपुरम नोरंगाबाद में आयोजित मर्म विज्ञान एवं मर्म चिकित्सा की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। पांच दिवसीय कार्यशाला में देश विदेश से आए चिकित्सक और जिज्ञासु भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति की जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संजीवनी विद्या सूर्य चिकित्सा स्वचिकित्सा, पंचमहाभूत चिकित्सा विलुप्त हो गई है। उसी प्रकार वैदिक चिकित्सा की विद्या मर्म चिकित्सा भी विलुप्त के कगार पर है। 107 मर्म बिंदुओं पर आधारित मर्म चिकित्सा दुष्प्रभाव रहित तुरन्त असर दिखाने वाली चिकित्सा पद्धति है जो सुश्रुत संहिता में निहित है। कार्यशाला के समन्वयक कनाडा से आए ज्ञानप्रकाश ने कार्यशाला में शरीर के ऊपरी भाग के मर्म बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि तल हृदय, शप्रि मर्म, मणि बंध, कूपर मर्म, अणि, उर्वी, गुल्फ, इन्द्र बस्ती, जानु मर्म को उत्प्रेरित करने से शरीर की व्याधियों का शमन किया जाता है।

मर्म चिकित्सक मयंक जोशी ने स्व मर्म चिकित्सा की जानकारी दी। कहा कि मनुष्य के शरीर में उसकी व्याधियों का निदान समाहित है। 107 मर्म बिंदुओं को उत्प्रेरित कर शरीर में छिपी हुई ऊर्जा को जाग्रत किया जाता है।