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देश की सबसे महंगी फिल्म 2.0 #Most #Expensive #Film of #India

देश की सबसे महंगी इस फिल्म को लेकर इनके फैन्स इंतज़ार में थे, जिनके लिए ख़ुशी का मौका है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये डेट मुश्किल बन कर आई है ।

और वो हैं फिल्म केदारनाथ से जुड़े लोग । अभिषेक कपूर के निर्देशन में बन रही सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की ये फिल्म 30 नवंबर को रिलीज़ के लिए तय है, लेकिन शंकर निर्देशत 2.0 को 29 नवंबर को रिलीज़ किये जाने की घोषणा के साथ ही अब केदारनाथ के सामने संकट आ गया है। वैसे पहले से ही केदारनाथ संकट से घिरी रही है । निर्देशक और पूर्व निर्माता कंपनी के बीच हुए विवाद के बाद ये फिल्म लगभग ठंडे बस्ते में चली गई थी लेकिन प्रोड्यूसर रॉनी स्क्रूवाला ने फिल्म को संकट से उबार लिया । सैफ़ अली खान की बेटी सारा की ये डेब्यू फिल्म है और जब ये संकेत मिलने लगे थे कि केदारनाथ बन नहीं पायेगी तो करण जौहर ने उन्हें अपने प्रोडक्शन में बन रही फिल्म सिंबा में रणवीर सिंह के साथ कास्ट कर लिया ।

फिल्म 2.0 की 29 नवंबर को रिलीज़ का मतलब केदारनाथ को या तो अपनी डेट आगे-पीछे करनी पड़ेगी या मुकाबले के लिए तैयार होना होगा l वैसे नवंबर और दिसंबर में बड़ी फिल्मों का टकराव रहेगा । सात नवंबर को आमिर खान और अमिताभ बच्चन स्टारर ठग्स ऑफ हिंदोस्तान आएगी और 22 दिसंबर को शाहरुख़ खान की फिल्म ज़ीरो रिलीज़ होगी । फिल्म 2.0 के मेकर ने इंतज़ार करवा कर जो डेट चुनी है वो बॉक्स ऑफ़िस पर काफ़ी उपयुक्त मानी जा रही है क्योंकि करीब 500 करोड़ तक पहुंच गई फिल्म की लागत से पार पाने के लिए फिल्म को लॉन्ग रन चाहिए होगा । बताया जा रहा है कि फिल्म के बजट में 100 करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च जुट गया है क्योंकि फिल्म के स्पेशल इफ़ेक्ट्स का काम लगातार बढ़ता जा रहा था । रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर रोबोट/ इंधीरन का सीक्वल फिल्म 2.0 का पिछले दो साल से इंतज़ार हो रहा है ।

3 डी कन्वर्जन के साथ इंटरनेशनल स्तर के स्पेशल इफ़ेक्ट्स पर अब तक समय से काम पूरा न होने के कारण हुई है l अमेरिका की जिस कंपनी को फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स का ठेका दिया गया था वो कंपनी ही दिवालिया हो गई l इस फिल्म में रजनीकांत अपने पुराने वाले रोल में हैं जबकि अक्षय कुमार बड़े ही विचित्र गेट अप में विलेन बने दिखेंगे। पिछली बार फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन थीं तो इस बार एमी जैक्सन फीमेल लीड में होंगी। अक्षय कुमार जिस डॉक्टर रिचर्ड का रोल कर रहे हैं उसका गेटअप एक राक्षसी कौवे जैसा है।

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युवराज सिंह को मिली डॉक्टरेट की मानद उपाधि

स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह को खेल में दिये योगदान के लिये ग्वालियर के आईएमटी विश्वविद्यालय ने आज दर्शनशास्त्र में डाक्टरेट की मानद् उपाधि से नवाजा। युवराज को यह सम्मान मैदान में असाधारण खेल कौशल दिखाने के अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निजात पाने के बाद दूसरों को हौसला देने के लिये दिया गया।

यहा जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक युवराज के अलावा यह सम्मान डा. ए.एस किरण कुमार (अंतरिक्ष विज्ञान), गोविंद निहलानी (फिल्म), डा. अशोक वाजपेयी (कवि), रजत शर्मा ( मीडिया), डा. आर.ए माशेलकर (विज्ञान एवं तकनीक) और अरुणा राय (सामाजिक कार्य) को भी दिया गया।

युवराज ने कहा, ‘‘ डाक्टरेट की उपाधि पाकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। इससे मुझे अतिरिक्त जिम्मेदारी का अहसास होता है और मैं अपने कार्यों से दूसरों के लिये उदाहरण बनना चाहता हूं।’’ युवराज ने देश के लिये 400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10,000 से ज्यादा रन बनाये हैं। उन्होंने भारत के टी20 विश्व कप 2007 और एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप 2011 जीतने में अहम भूमिका निभाई थी।

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अहमद पटेल के ‘करीबियों’ पर ईडी के छापे, 5500 करोड़ के घोटाले का आरोप

दिल्ली में संदेसारा ग्रुप के ठिकानों पर 5500 करोड़ के घोटाले के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा है. इस मामले में बड़ी बात ये है कि छापेमारी कुछ ऐसे लोगों के ठिकानों पर भी की गई है जो काम तो अहमद पटेल के यहां करते थे लेकिन उन्हें वेतन संदेसारा ग्रुप की ओर से दिया जाता था, अब प्रवर्तन निदेशालय इसी की जांच कर रहा है.

इस पूरे मामले पर अहमद पटेल ने कहा, ”जिन तीन लोगों के यहां छापे मारे गए (घनश्यान पांडे, संजीव महाजन और लक्ष्मीचंद शर्मा) उनमें संजीव महाजन उनके घर आते हैं.” अहमद पटेल ने इसके अलावा किसी भी प्रतिक्रिया ये इनकार कर दिया.

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय गगन धवन नाम के शख्स को गिरफ्तार भी कर चुका है. प्रवर्तन निदेशालय पीएमएलए के तहत मामला दर्ज है. बैंक से 5500 करोड़ रूपये का लोन दिलाने और इस पैसे को ठिकाने लगाने में अहमद पटेल की भूमिका की जांच हो रही है. दिल्ली में कुल सात ठिकानों पर छापेमारी चल रही है, सूत्रों के मुताबिक छापेमारी में प्रवर्तन निदेशालय के हाथ बेहद अहम दस्तावेज लगे हैं.

कौन हैं अहमद पटेल?
अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं. कांग्रेस पार्टी में अहमद पटेल की अहम भूमिका है. गुजरात के भरूच के रहने वाले हैं. कहा जाता है सोनिया गांधी के हर निर्णय के पीछे अहमद पटेल का ही दिमाग होता है.

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13 हजार किमी तक मार कर सकती उत्तर कोरिया की हॉसॉन्ग मिसाइल, खतरे में यूएस

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से मिसाइल परीक्षण कर जहां अपनी मंशा जता दी है वहीं इस परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया समेत जापान में दहशत का माहौल है। इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका को सीधेतौर पर खतरा बढ़ गया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार उत्तर कोरिया ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया है वह न सिर्फ पहले से ज्‍यादा उन्‍नत है बल्कि ज्‍यादा घातक भी है। यह एक इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल आईसीबीएम थी जिसका नाम हॉसॉन्‍ग-15 बताया गया है। इस मिसाइल परिक्षण के बाद दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से करीब 20 मिनट तक बात की और अपनी चिंता भी जताई। इस दौरान उन्‍होंने अमेरिका से उत्तर कोरिया पर फिर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्‍होंने ने यहां तक कहा है कि यदि उत्तर कोरिया बातचीत की मेज पर आता है तो सभी का भविष्‍य उज्जवल हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ इस मिसाइल के सफल परीक्षण से उत्साहित किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया को एक न्‍यूक्लियर स्‍टेट घोषित कर दिया है। मिसाइल परिक्षण के बाद उन्‍होंने इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई भी दी है।

13 हजार किमी की दूरी तक जा सकती है मिसाइल

रक्षा विशेषज्ञ सी उदय भास्‍कर की नजर में उत्तर कोरिया का ताजा मिसाइल परीक्षण काफी शक्तिशाली है। उन्‍होंने सीधेतौर पर इसको अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने बताया कि यह मिसाइल आईसीबीएम रेंज की है। इस लिहाज से यह दस हजार या इससे भी ज्‍यादा किमी तक जा सकती है। इन हालातों में यह अमेरिका के लिए सीधा खतरा है। उनके अलावा योनहैप एजेंसी ने वैज्ञानिक डेविड राइट के ब्‍लॉग के हवाले से बताया है कि यदि आंकड़े सही हैं तो इस मिसाइल की रेंज करीब 13 हजार किमी तक हो सकती है।

ISS से तिगुनी ऊंचाई तक गई हॉसॉन्‍ग 15

यहां पर आपको बता दें कि किम जोंग उन के नेतृत्‍व में उत्तर कोरिया अब तक दर्जनों परमाणु परीक्षण कर चुका है। इस बार उसने इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल हॉसॉन्‍ग 15 का परिक्षण किया है जो जापान के स्‍पेशल इकॉ‍नमिक जोन में जाकर गिरी है। यह मिसाइल परिक्षण इसलिए भी खास है क्‍योंकि यह करीब 4475 किमी की ऊंचाई तक गई जो कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से भी तीगुनी ऊंचाई है। इसके अलावा इसने करीब 950 किमी की दूरी तय करने में करीब 53 मिनट का समय लगाया। इस लिहाज से भी यह उत्तर कोरिया की अब तक की सबसे उन्नत परमाणु मिसाइल है। यह मिसाइल हॉसॉन्‍ग 14 का ही उन्‍नत स्‍वरूप है। इस मिसाइल को लोफ्टेड एंगल से दागा गया था। जानकारों के मुताबिक यदि इसको स्‍टेंडर्ड तरीके से दागा जाता तो यह दस हजार किमी से अधिक ऊंचाई तक चली जाती।

 

पहले से ही मिल रहे थे मिसाइल परीक्षण के संकेत

यहां पर हम आपको यह भी बता देते हैं कि इस मिसाइल परीक्षण से पहले ही जापान को इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि प्योंगयांग एक और मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है। हालांकि किसी भी उपग्रह से परीक्षण स्थल पर इस तरह की किसी गतिविधि का पता नहीं लग सका था। इसी तरह के संकेत सियोल, टोक्यो और वाशिंगटन की सैन्य खुफिया एजेंसियों को भी हासिल हुए थे। उत्तर कोरिया के ताजा प‍रीक्षण के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने एक बार फिर कहा कि किम की कारगुजारियों से पूरी दुनिया को खतरा पैदा हो गया है।

खुद को बताया न्‍यूक्लियर पावर

सफल मिसाइल टेस्‍ट से उत्‍साहित किम ने अपने संदेश में कहा है कि य‍ह मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्‍से को निशाना बना सकती है। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस मिसाइल से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण हमेशा की ही तरह किम जोंग उन की देखरेख में ही किया गया है। इसके सफल परीक्षण के बाद किम ने यह भी कहा है कि इस मिसाइल परीक्षण के बाद आखिरकार हमने न्‍यूक्लियर पावर होने का अहसास हो रहा है। उन्‍होंने उत्तर कोरिया को एक उत्तरदायी परमाणु ताकत करार दिया है, जो अपने देश की रक्षा करना जानता है। इस दौरान किम ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ही मिसाइलें और घातक हथियार विकसित किए हैं। उन्‍होंने इस मौके पर अमेरिका को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अमेरिका परमाणु हमले की धमकी देकर बार-बार उत्तर कोरिया को धमकाता रहा है।

पहले भी कर चुका है हाइड्रोजन बम का परीक्षण

गौरतलब है कि 3 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने सबसे ताकतवर हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। यह परीक्षण करीब 100 किलोटन के हाईड्रोजन बम का था। इस परीक्षण के बाद उत्तरी हमक्योंग प्रांत के किजी इलाके में करीब 5.7 और 4.6 तीव्रता के भूकंप महसूस किए गए थे। यह परीक्षण जनवरी में किए गए परमाणु परीक्षण से करीब 11.8 गुणा अधिक शक्तिशाली था। इतना ही नहीं यह बम जापान में दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान गिराए गए परमाणु बमों से भी करीब पांच गुणा शक्तिशाली था। इसके अलावा 15 सितंबर को भी उत्तर कोरिया की तरफ से एक बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण किया गया था। यह मिसाइल जापान के होकाइडो द्वीप ऊपर से गुजरी थी। इस साल उसका यह 14वां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण था। उस वक्‍त जापान के नागरिकों को चेतावनी देने के लिए लगाए गए सायरन बज उठे थे। उस वक्‍त भी दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की थी। उत्तर कोरिया इससे पहले 2006, 2009, 2013 और 2016 में परमाणु बमों का परीक्षण कर चुका है।

(Source: Jagran)

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7वां वेतन आयोग: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के डेपुटेशन अलाउंस में हुआ दो गुना का इजाफा

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। करीब 48 लाख कर्मचारियों का डेपुटेशन अलाउंस (प्रतिनियुक्ति भत्ता) बढ़ने वाला है। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह भत्ता मौजूदा 2,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 4,500 रुपये हो गया है। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर यह कदम उठाया गया है।

मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, “एक ही स्थान पर प्रतिनियुक्ति होने पर भत्ता मूल वेतन का पांच फीसद होगा जो अधिकतम 4,500 रुपए मासिक तक हो सकता है।” बीते शुक्रवार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी किए गए आदेश में यह भी कहा गया कि अगर प्रतिनियुक्ति दूसरे शहर में की जाती है तो भत्ता मूल वेतन का 10 फीसद तथा अधिकतम 9,000 रुपए मासिक होगा। इससे पहले दूसरे शहरों में प्रतिनियुक्ति भत्ते की सीमा 4,000 रुपए थी। इसमें आगे कहा गया कि इसके अनुसार महंगाई भत्ता 50 फीसद बढ़ने पर इस भत्ते की सीमा को 25 फीसद बढ़ाया जाएगा।

बीते हफ्ते केंद्रीय कर्मचारियों जिन्होंने अपनी न्यूनतम सैलरी के मद में जीत हासिल कर ली थी उन्हें उस मीडिया रिपोर्ट के बाद निराश होना पड़ा जिसमें वित्त मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया था कि फिलहाल उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं है। आपको बता दें कि 7वें वेतन आयोग ने 2.57 के एक फिटन फैक्टर की सिफारिश की थी, जिसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति महीने किया जाना था।

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प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है मर्म विज्ञान: ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के परिसर निदेशक डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा वेदों पर आधारित प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो आयुर्वेद का ही एक अंग है।

वह सोमवार को नंदीपुरम नोरंगाबाद में आयोजित मर्म विज्ञान एवं मर्म चिकित्सा की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। पांच दिवसीय कार्यशाला में देश विदेश से आए चिकित्सक और जिज्ञासु भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति की जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संजीवनी विद्या सूर्य चिकित्सा स्वचिकित्सा, पंचमहाभूत चिकित्सा विलुप्त हो गई है। उसी प्रकार वैदिक चिकित्सा की विद्या मर्म चिकित्सा भी विलुप्त के कगार पर है। 107 मर्म बिंदुओं पर आधारित मर्म चिकित्सा दुष्प्रभाव रहित तुरन्त असर दिखाने वाली चिकित्सा पद्धति है जो सुश्रुत संहिता में निहित है। कार्यशाला के समन्वयक कनाडा से आए ज्ञानप्रकाश ने कार्यशाला में शरीर के ऊपरी भाग के मर्म बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि तल हृदय, शप्रि मर्म, मणि बंध, कूपर मर्म, अणि, उर्वी, गुल्फ, इन्द्र बस्ती, जानु मर्म को उत्प्रेरित करने से शरीर की व्याधियों का शमन किया जाता है।

मर्म चिकित्सक मयंक जोशी ने स्व मर्म चिकित्सा की जानकारी दी। कहा कि मनुष्य के शरीर में उसकी व्याधियों का निदान समाहित है। 107 मर्म बिंदुओं को उत्प्रेरित कर शरीर में छिपी हुई ऊर्जा को जाग्रत किया जाता है।

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GES में हिस्सा लेने पहुंची डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका, पीएम मोदी से की मुलाकात

आठवें वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन (जीईसी 2017) में भाग लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप आज तड़के हैदराबाद पहुंची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इवांका ट्रंप के साथ ‘वीमेन फर्स्ट, प्रॉस्पेरिटी फॉर ऑल’ (महिला पहले, सबके लिए समृद्धि) विषय पर आधारित तीन दिवसीय सम्मेलन का आज उद्घाटन करेंगे। सभी की निगाहें इवांका की स्पीच पर टिकी हैं। 

इसके साथ ही समिट में हिस्सा लेने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ भी मुलाकात की है। इवांका विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हाथों में हाथ डाले हुए नजर आईं। 

हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एचआईसीसी)में होने वाले इस सम्मलेन में 150 देशों के 1,500 उभरते हुए उद्यमी, निवेशक और पारिस्थिकि तंत्र के समर्थक हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मलेन को अमेरिकी विदेश विभाग व अमेरिका की अन्य एजेंसियां भारत के नीति आयोग के साथ मिलकर आयोजित कर रही हैं।

इवांका ट्रंप के स्वागत के लिए हैदराबाद पूरी तरह सजकर तैयार है। हैदराबाद के सड़क, प्लाईओवर को खूबसूरत ढंग से सजाया गया है। समिट के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी अतिथियों को रॉयल डिनर देंगे। इसके लिए ताज फलकनुमा होटल दुल्हन की तरह सजा है। सम्मेलन में 52.5 प्रतिशत प्रतिभागी शामिल होंगे, जो जीईएस के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा दर है। अफगानिस्तान, सऊदी अरब और इजरायल उन 10 देशों में शामिल हैं, जिनका प्रतिनिधित्व सर्व-महिला प्रतिनिधिमंडल करेंगे।

इवांका ट्रंप और पीएम मोदी करेंगे सम्मेलन का उद्धाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इवांका तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। नीति आयोग अमेरिकी विदेश मंत्रालय और अन्य अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इवांका उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। वह उद्घाटन सत्र के अलावा बुधवार को भी एक अन्य सत्र को संबोधित करेंगी। सम्मेलन में महिला उद्यमियों पर फोकस किया गया है। इस बार के सम्मेलन का विषषय भी ‘वीमेन फ‌र्स्ट, प्रॉस्पेरिटी फॉर ऑल (महिला पहल, सबके लिए खुशहाली)’ रखा गया है।
चार उद्योगों पर फोकस
सम्मेलन में नवोन्मेषषकों खासकर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए माहौल बनाने पर जोर होगा। चार नवोन्मेषषी और उच्च विकास वाले उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ये हैं स्वास्थ्य सेवा एवं जीव विज्ञान, डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं वित्तीय तकनीक, ऊर्जा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर और मीडिया एवं मनोरंजन। सम्मेलन में करीब 100 नवोन्मेषषी स्टार्टअप, उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रमुख वक्ता
सम्मेलन को कई जानीमानी हस्तियां संबोधित करेंगी। इनमें यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष जॉन चैंबर्स, चेरी ब्लेयर फाउंडेशन फॉर वीमेन की संस्थापक चेरी ब्लेयर, फेयरफैक्स फिनांशियल होल्डिंग्स लि. के अध्यक्ष एवं सीईओ प्रेम वत्स, आईसीआईसीआई बैंक की एमडी एवं सीईओ चंदा कोचर और डीआरडीओ निदेशक टेसी थॉमस प्रमुख हैं।
मानुषी छिल्लर भी होंगी शामिल
नई मिस व‌र्ल्ड मानुषी छिल्लर, अभिनेत्री सोनम कपूर एवं अदिति हैदरी, टेनिस स्टार सानिया मिर्जा, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज भी सम्मेलन की रौनक ब़़ढाएंगी।

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राजस्थान के युवक ने रिमोट से चलाया ट्रैक्टर

राजस्थान के बारां जिले के बम्बौरी कलां गांव के एक किसान के बेटे ने रिमोट से ट्रैक्टर चलाकर सबको हैरत में डाल दिया। रिमोट से ट्रेक्टर चलाने वाले युवक योगेश नागर ने बताया कि उसके पिता को ट्रैक्टर चलाते समय पेट में तकलीफ होती थी।

जिससे वह काम नहीं कर पाते थे। यह दर्द महसूस कर योगेश ने बिना चालक के ट्रैक्टर चलाने की तरकीब ढूंढ निकालने की ठानी तथा एक ऐसा रिमोट तैयार किया जिससे ट्रैक्टर को बिना चालक के चलाया जा सके।

योगेश ने बताया कि इस तकनीक को विकसित करने के लिए कुछ उपकरण स्वयं बनाए तथा कुछ उपकरण बाजार से खरीदे। जिस पर 47 हजार रूपये का खर्चा आया। इस रिमोट की सीमा करीब एक से डेढ़ किलोमीटर है।

युवक के इस आविष्कार से सभी हैरत में हैं तथा इसकी सफलता के बाद कयी किसान उससे यह तकनीक हासिल करना चाहते हैं। योगेश ट्रेक्टर तक ही अपने को सीमित नहीं रखना चाहता बल्कि भारतीय सेना के लिए भी उपकरण बनाना चाहता है।

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जानें भारतवर्ष को और नजदीक से: 15 रोचक तथ्य

 

I bet you didn’t know

“So far as I am able to judge, nothing has been left undone, either by man or nature, to make India the most extraordinary country that the sun visits on his rounds. Nothing seems to have been forgotten, nothing overlooked.”

Such a proud feeling when you hear these words by the famous writer Mark Twain. India is truly the mother of birthplace, the mother of history, the grandmother of legends, and the great-grandmother of tradition. With so many innovations, exotic architectures, a burst of cultures, religions and selfless brotherhood, it is what makes India, an Incredible India.

India is not just about cricket and celebrities. There are some unknown, unheard and unbelievable facts about our country which I bet you are not much aware of.

#1. Now you can float and post!

We all know that India has the largest number of post offices in the world but did you know that there

is a floating post office in India too? wow now my mind is floating. This post office is located in the

heaven of earth ‘Srinagar’. It was inaugurated by former Chief Minister Omar Abdullah in August 2011. Since then, it has been attracting tourists from all across the country.

Source: NDTV

#2. Can you please rub me well?

In Tamil Nadu, all the elephants receive a sumptuous and nutritious diet after a detailed and well-massaged bath in the ponds of Punnathoor Cotta Elephant Yard Rejuvenation Center. I too need a spa therapy after reading this.

Source: New York Post

#3. Kudos, India!

I can shout from any rooftop and proudly say that India has won all six men’s Kabaddi World Cups (circle style) held till now and have been undefeated throughout these tournaments.

Source: Wikipedia

#4. From Richest to Richer to Rich!

Apart from the ‘Golden bird’ we were also a ‘Diamond machine’. I can not believe how affluent we were. Initially, diamonds were only found in the deposits Krishna River. Until these rocks were found in Brazil during the 18th century, India ruled the world in diamond production.

Source: Wikipedia

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हिन्दू शास्त्रों से चुराए थे न्यूटन ने तीनों नियम: मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी

Manchester University confirms:

How Isaac Newton Stole Gravity concept

from a Gurukul Book

 

A little known school of scholars in south India discovered one of the founding principles of modern mathematics hundreds of years before Isaac Newton according to this new finding by Manchester University. Many would not believe how christian missionaries also helped in transporting this Information to Britian in 15th Century.

Dr George verghese Joseph from The University of Manchester says the ‘Kerala School’ identified the ‘infinite series’- one of the basic components of calculus – in about 1350. The discovery is currently and wrongly attributed in books to Sir Isaac Newton and Gottfried Leibnitz at the end of the seventeenth centuries.

The team from the Universities of Manchester and Exeter reveal the Kerala School also discovered what amounted to the Pi series and used it to calculate Pi correct to 9, 10 and later 17 decimal places.
And there is strong circumstantial evidence that the Indians passed on their discoveries to mathematically knowledgeable Jesuit missionaries who visited India during the fifteenth century. That knowledge, they argue, may have eventually been passed on to Newton himself.
Dr Joseph made the revelations while trawling through obscure Indian papers for a yet to be published third edition of his best selling book ‘The Crest of the Peacock: the Non-European Roots of Mathematics’ by Princeton University Press.

He said: “The beginnings of modern maths is usually seen as a European achievement but the discoveries in medieval India between the fourteenth and sixteenth centuries have been ignored or forgotten.
The brilliance of Newton’s work at the end of the seventeenth century stands undiminished – especially when it came to the algorithms of calculus. But other names from the Kerala School, notably Madhava and Nilakantha, should stand shoulder to shoulder with him as they discovered the other great component of calculus- infinite series.
There were many reasons why the contribution of the Kerala school has not been acknowledged – a prime reason is neglect of scientific ideas emanating from the Non-European world – a legacy of European colonialism and beyond. But there is also little knowledge of the medieval form of the local language of Kerala, Malayalam, in which some of most seminal texts, such as the Yuktibhasa, from much of the documentation of this remarkable mathematics is written.

He added: “For some unfathomable reasons, the standard of evidence required to claim transmission of knowledge from East to West is greater than the standard of evidence required to knowledge from West to East.
Certainly it’s hard to imagine that the West would abandon a 500-year-old tradition of importing knowledge and books from India and the Islamic world. But we’ve found evidence which goes far beyond that: for example, there was plenty of opportunity to collect the information as European Jesuits were present in the area at that time.
They were learned with a strong background in maths and were well versed in the local languages. And there was strong motivation: Pope Gregory XIII set up a committee to look into modernizing the Julian calendar.

On the committee was the German Jesuit astronomer/mathematician Clavius who repeatedly requested information on how people constructed calendars in other parts of the world. The Kerala School was undoubtedly a leading light in this area.
Similarly there was a rising need for better navigational methods including keeping accurate time on voyages of exploration and large prizes were offered to mathematicians who specialized in astronomy. Again, there were many such requests for information across the world from leading Jesuit researchers in Europe. Kerala mathematicians were hugely skilled in this area.

(Ref: http://mailonnews.com/2017/09/19)