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हाफिज सईद का राजनीतिक दल आतंकी संगठन घोषित; यूएस की कार्रवाई का स्वागत- भारत

अमेरिका ने मंगलवार को मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। यह मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राजनीतिक संगठन है। ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पाकिस्तान में एमएमएल को एक राजनैतिक दल के रूप में मान्यता देने की कवायद चल रही थी। वहीं, भारत ने अमेरिका की कार्रवाई का स्वागत किया है।

एमएमएल के 7 मेंबर भी आतंकी घोषित
– द यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही एमएमएल और तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर (टीएजेके) को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया गया।
– इनके अलावा एमएमएल के 7 सदस्यों को लश्कर के लिए काम करने की वजह से आतंकी घोषित किया गया है।

पाकिस्तान ने नहीं की प्रभावी कार्रवाई

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत यूएस की कार्रवाई का स्वागत करता है। मिल्ली मुस्लिम लीग लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। यह लीग आतंकी संगठन के लिए काम कर रही थी। अमेरिका की कार्रवाई भारत के दावे को पुख्ता करती है कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।”

हाफिज जारी कर चुका अपना घोषणापत्र
– हाफिज ने 23 मार्च को एमएमएल का घोषणा पत्र जारी कर दिया था। मिल्ली मुस्लिम लीग को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया था।

17 साल पहले लश्कर घोषित किया गया था आतंकी संगठन
– लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 के दशक में हुआ था। वह 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
– अमेरिका ने लश्कर को 26 दिसंबर 2001 में विदेशी और वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके मुखिया हाफिज सईद को भी वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था।

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ये है भैयाजी जोशी के फिर से सरकार्यवाह बनने के पीछे की कहानी

तमाम कयासों के बाद आज आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक में 70 साल के भैयाजी जोशी को चौथी बार सर्वसम्मति से सरकार्यवाह चुना गया. भैयाजी जोशी 2009 से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शनिवार को दोपहर 3.40 बजे  सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. मध्य क्षेत्र के अशोक सोनी को चुनाव अधिकारी बनाया गया. पश्चिम क्षेत्र के जयंती भाई भदेसिया ने भैयाजी के कार्यकाल में जो काम हुए उसका उल्लेख करते भैयाजी जोशी का नाम फिर से सरकार्यवाह के लिए प्रस्तावित किया. उसके बाद जयंती भाई भदेसिया के प्रस्ताव का विरेंद्र सिंह पराक्रमदित्य, दक्षिण क्षेत्र रजेंद्रन, विठ्ठल जी और उमेश चक्रवर्ती ने समर्थन किया.

मजेदार बात ये है कि भैयाजी जोशी के अलावा किसी और उम्मीदवार ने अपनी दावेदारी पेश नहीं की और प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से भैयाजी जोशी को एक बार फिर से 3 साल के लिए सरकार्यवाह के लिए चुन लिया.

हर तीन साल में नागपुर में होने वाली बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव होता है. सूत्रों की माने तो संघ के कुछ नेता चाहते थे कि इस बार सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाए. लेकिन दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी चाहते थे कि भैयाजी जोशी को एक और सरकार्यवाह का कार्यकाल देना चाहिए.

पिछली बार की ही तरह भैयाजी जोशी ने सरकार्यवाह के चुनाव में भावुक भाषण दिया और कहा कि दो बार से मैं कह रहा हूं कि मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए और यंग ब्लड को आगे लाकर जिम्मेदारी दी जाये. तब आप लोगों ने मेरी बात को नहीं माना लेकिन इस बार मान लीजिए. लेकिन भैयाजी जोशी के कहने के बाद भी प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से उनको ही सरकार्यवाह चुना.

2015 में प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह के चुनाव के समय भैयाजी जोशी के स्वास्थ को लेकर संघ के वरिष्ठ नेताओं को चिंता थी लेकिन उसके बावजूद, उन्हें ही तीसरी बार सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

सूत्रों की माने तो संघ के कई नेताओं का मानना है कि सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी तो वो वैसी ही परिस्तिथि पैदा होगी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के समय में केसी सुदर्शन संघ प्रमुख और मोहन भागवत सरकार्यवाह के रहते समय आयी थी. सुदर्शन पद में बड़े जरूर थे, लेकिन वो उम्र और तजुर्बे में कम थे. इस बार संघ नहीं चाहता था कि दोबारा ऐसी समस्या खड़ी हो.

सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को संघ के कई बड़े नेता इसीलिए सरकार्यवाह बनाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उनका इतिहास संघ के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का रहा है और संघ में हमेशा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को एक राजनीतिक संगठन के तौर पर ही देखा जाता है. दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह का इतिहास कभी संघ के सह सरकार्यवाह रहे मदनदास देवी का भी रहा है.

दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह मदनदास देवी में सरकार्यवाह बनने की योग्यताएं थीं लेकिन उसके बाद भी उन्हें सरकार्यवाह की जिम्मेदारी नहीं दी गई. सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह नहीं बनाने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि मोदी सरकार और बीजेपी संगठन में उनके अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समकालीन जुड़े नेता से अच्छे रिश्ते भी हैं.

मतलब साफ है कि संघ भले ही परदे के पीछे से राजनीति से जुड़ा हो लेकिन अभी संघ अपने दो सर्वोच्च पदों को राजनीति से जुड़ाव रखने वाले अपने नेताओं को ये पद नहीं देना चाहता था.

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ISRO ने लॉन्‍च किया 100वां सैटेलाइट, अंतरिक्ष जगत में भारत की उपलब्धि से घबराया पाकिस्‍तान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को अपने अंतरिक्ष केंद्र से दूर संवेदी कार्टोसैट -2 और 30 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। ऐसे में ISRO ने अपना 100वां सैटलाइट सफलतापूर्वक स्पेस में लॉन्च कर दिया है। इसरो के पूर्व चेयरमैन ए.एस. किरण कुमार ने चेन्नई से लगभग 80 किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर में मिशन नियंत्रण केंद्र में बताया, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) ने भारत के 710 किलोग्राम वजनी कार्टोसैट और 10 किलोग्राम नैनो उपग्रह और 100 किलोग्राम वजनी माइक्रो उपग्रह सहित 28 विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया।

श्रीहरिकोटा हाई आल्टीट्यूड रेंज (एसडीएससी-एसएचएआर) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट और 33 सेकंड के बाद 320 टन वजनी रॉकेट ने काटरेसैट-2 को सूर्य की तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया। कार्टोसैट-2 ने सूर्य की 505 किलोमीटर कक्षा में प्रवेश किया और यह पांच वर्षो की अवधि तक यहां रहेगा। 100 किलोग्राम वजनी माइक्रो उपग्रह ने पृथ्वी से 359 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य की तुल्यकालीक कक्षा में प्रवेश किया। इसकी लॉन्चिंग के बाद ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से बयान आया कि भारत के इस सैटेलाइट क्षेत्र के स्‍थायित्‍व के लिए संकट पैदा होने की आशंका तक जता दी। पाकिस्तान के मुताबिक, दोहरी प्रकृति वाले सेटलाइट से क्षेत्र की सामरिक स्थिरता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

बता दें कि यह 2018 का पहला अंतरिक्ष मिशन है, जो कि हमारे देश की नए साल की नई उपलब्धि है। यह हमारे लिए बेहद गौरवान्वित करने वाली बात है। गौरतलब है कि इससे पहले 31 अगस्त, 2017 को पीएसएलवी-सी39 मिशन असफल हो गया था। किरण कुमार ने कहा, हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रबंध किए थे कि पिछले मिशन (पीएसएलवी-39) की असफलता का कारण बनी हीट शील्ड संबंधी समस्या फिर सामने न आए। इसरो ने कुल 31 उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं, जिनमें से कार्टोसैट-2, नैनो उपग्रह और माइक्रो उपग्रह भारत के हैं। कुमार ने कहा कि मिशन केंद्र से की जा रही निगरानी से पता चला है कि स्थापित किया गया काटरेसैट-2 संतोषजनक प्रदर्शन कर रहा है।