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अब ट्रेन की लोकेशन भी बताएगा गूगल, जानें अन्य नई सुविधाओं के बारे में

Google for India Edition 4 इवेंट में गूगल के भारत के भविष्य के प्लान्स के बारे में कई घोषणाएं की गई हैं। जिनमें गूगल सर्च और मैप्स के साथ ही पेमेंट सिस्टम्स के बारे में कई घोषणाएं शामिल हैं। गूगल के सीनियर इंजीनियरिंग डायरेक्टर प्रवीर गुप्ता ने बताया कि गूगल असिस्टेंट अब मराठी भाषा को भी सपोर्ट करेगा। आइए, जानते हैं गूगल की बड़ी घोषणाओं के बारे में

गूगल तेज का नाम बदला

प्रवीर गुप्ता ने आगे कहा, Google असिस्टेंट जल्द ही अन्य 7 भाषाओं को भी सपोर्ट करेगा। इतना ही नहीं, आप अब अपने Google असिस्टेंट पर ट्रेन की लोकेशन भी जान सकते हैं। गूगल तेज ऐप का नाम बदलकर ”गूगल पे” रखा गया है। Google ने हाल में घोषणा की थी कि ”Tez” ऐप के डाउनलोड की संख्या 5 करोड़ पार कर गई है। Google के इस सालाना इवेंट में मैप्स और असिस्टेंट में भी कुछ खास फीचर जोड़ा सकता है।

भारत में अपार संभावनाएं

गूगल के वाइस प्रेसिडेंट सेल्स एंड ऑपरेशन (साउथ ईस्ट एशिया) राजन आनंदन ने कहा, भारत में इस समय 400 मिलियन इंटरनेट यूजर्स हैं, जिसमें 45 फीसद महिलाएं हैं। भारत में गूगल के लिए अपार संभावनाएं हैं।भारत में वॉयस सर्च करने के मामले में 270 फीसद की वृद्धि देखी गई है। हमारा लक्ष्य अगले 2 वर्षों में 500 मिलियन तक पहुंचने की है। हम इसलिए भारतीय भाषाओं में सर्च के ऑप्शन को बढ़ा रहे हैं।

50 फीसद से ज्यादा सर्च करने वाले यूजर्स बढ़े

आनंदन ने आगे कहा, भारत में कई यूजर्स अब गूगल पर सर्च करके अपने जवाब पा रहे हैं। पिछले 12 महीने में हर दिन मोबाइल पर 50 फीसद से ज्यादा बार भारतीय यूजर्स कुछ न कुछ सर्च कर रहे हैं।

प्रोजेक्ट नवलेखा की शुरुआत

गूगल ने इस इवेंट में अपने ”प्रोजेक्ट नवलेखा” की शुरुआत की है। इस प्रोजेक्ट के तहत अब पब्लिशर्स अपने कंटेंट को ऑनलाइन पब्लिश कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत देश के 1,35,000 भारतीय पब्लिशर्स को डिजिटाइज्ड किया जाएगा।

एंड्रॉइड गो में जोड़े दो नए फीचर्स

गूगल के एंड्रॉइड गो में दो नए फीचर्स जोड़े गए है। अब गो यूजर्स दो भाषाओं में न्यूज फीड और ऑडियो प्लेबैक के द्वारा आर्टिक्ल्स चुन सकेंगे। बाद में इस फीचर में अंग्रेजी और हिंदी के अलावा कई भारतीय भाषाओं जैसे मराठी, मलयालम आदि को जोड़ा जाएगा।

वॉयस असिस्टेंट अब भारतीय भाषाओं में करेगा काम

गूगल का वॉयस असिस्टेंट अब हिंदी और अंग्रेजी के अलावा मराठी भाषा को भी सपोर्ट करेगा। इसके साथ ही कंपनी वॉयस असिस्टेंट के साथ 7 अन्य भाषाओं को भी जो़ड़ेगा।

मैप्स गो ऐप में जोड़ा गया टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन फीचर

गूगल के मैप्स गो ऐप के साथ टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन फीचर को जोड़ा गया है। गूगल मैप्स के इस लाइट वर्जन में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ भी वॉयस नेविगेशन फीचर काम करेगा। इसके अलावा कोलकाता के लाखों लोगों के लिए प्लस कोड भी प्रोवाइड करेगा।

400 से ज्यादा एंड्रॉइड गो स्मार्टफोन इस साल होंगे लॉन्च

सैमसंग के फ्लैगशिप वाला गैलेक्सी J2 कोर स्मार्टफोन एंड्रॉइड गो ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करेगा। सैमसंग का यह पहला स्मार्टफोन होगा जो गूगल के एंड्रॉइड गो को सपोर्ट करेगा। इस साल के अंत तक 400 से ज्यादा एंड्रॉइड गो ऑपरेटिंग सिस्टम वाला स्मार्टफोन लॉन्च किया जाएगा।

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SBI को छोड़ सभी सरकारी बैंकों पर भारी पड़ा बंधन बैंक, लिस्टिंग का मिला फायदा

कोलकाता की प्राइवेट सेक्टर की बंधन बैंक ने मार्केट कैप के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को छोड़ सभी सरकारी बैंकों को पीछे छोड़ दिया। मंगलवार को बंधन बैंक की स्टॉक मार्केट में शानदार एंट्री हुई। बंधन बैंक का स्टॉक एनएसई पर 33 फीसदी प्रीमियम के साथ 499 रुपए पर लिस्ट हुआ। वहीं बीएसई पर स्टॉक 29.33 फीसदी प्रीमियम के साथ 485 रुपए पर लिस्ट हुआ। शुरुआती कारोबार में बीएसई पर स्टॉक 494.80 के हाई पहुंचा। हाई प्राइस बंधन बैंक मार्केट कैप 58,888.78 करोड़ रुपए हो गया।

21 सरकारी बैंकों पर पड़ा भारी

हाई प्राइस बंधन बैंक मार्केट कैप 58,888.78 करोड़ रुपए हो गया। मार्केट कैप के लिहाज से बंधन बैंक देश की 22 सरकारी बैंकों में 21 बैंकों से आगे निकल गई। बंधन बैंक देश की सबसे बड़ी सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से पीछे है जिसका मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। सरकारी बैंकों में पीएनबी, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, यूनियन बैंक, ओरिएंटल बैंक शामिल है।

प्राइवेट बैंकों के मार्केट कैप के लिहाज से बंधन बैंक सातवें नंबर पर पहुंच गई है। इससे आगे एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक और यस बैंक है।

14.6 गुना भरा था आईपीओ

– बंधन बैंक के आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। बंधन बैंक का आईपीओ 15 मार्च को खुला था और 19 मार्च 2018 को बंद हुआ था।
– बंधन बैंक का आईपीओ 14.6 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
– क्यूआईपी हिस्सा 38.67 गुना भरा। वहीं एचएनआई हिस्से को 13.89 गुना बिड मिली।
– बंधन बैंक ने आईपीओ के लिए 370-375 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था।

बैंक का बिजनेस

– बंधन बैंक लिमिटेड बैंकिंग और फाइनेंशियल कंपनी है। माइक्रो फाइनेंस कंपनी के रूप में यह शुरू हुआ था जिसे करीब 3 साल पहले बैंकिंग लाइसेंस मिला है। कंपनी का मार्केट कैप 45000 करोड़ रुपए है। इस फाइनेंशियल में कंपनी को 1500 करोड़ प्रॉफिट की उम्मीद है। पिछले 2 फाइनेंशियल से बैंक को अच्छा मुनाफा हो रहा है।

– 31 दिसंबर 2017 तक बंधन बैंक के 887 ब्रांच और 430 एटीएम हैं और उसके 21.3 लाख कस्टमर्स हैं। ईस्ट और नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के साथ बंगाल, असम और बिहार में बैंक का डिस्ट्रीब्यून नेटवर्क मजबूत है।

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विपक्ष के बर्हिगमन के बीच विधानसभा में UP-COCA विधेयक पारित

विपक्ष के व्यापक विरोध और सदन से बर्हिगमन के बीच विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध निरोधक विधेयक (यूपीकोका)आज एक बार फिर पारित हो गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधेयक पेश करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिये जरुरी बताया, जबकि विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका जमकर दुरुपयोग किया जायेगा। विपक्ष का कहना था कि विधेयक में कई खामियां हैं, इसलिये इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया जाये। इससे पहले विधानसभा से गत 21 दिसंबर को विधेयक पारित होने के बाद विधान परिषद भेजा गया था।

परिषद ने विधेयक को प्रवर समिति के हवाले कर दिया था। प्रवर समिति से बिना संशोधन के विधेयक परिषद वापस कर दिया गया था। परिषद में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिये सरकार ने आज इसे फिर सदन में पेश किया। विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच यूपीकोका विधेयक पारित हो गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे मंजूरी के लिये राज्यपाल रामनाईक के पास भेजा जायेगा। अगर जरूरी हुआ तो राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी संदर्भित कर सकते है। सरकार का दावा है कि यूपीकोका से भूमाफिया, खनन माफिया समेत अन्य संगठित अपराधों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। सफेदपोशों को बेनकाब करने वाले इस कानून में 28 ऐसे प्रावधान है जो गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) का हिस्सा नही थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपीकोका के जरिये फिरौती के लिये अपहरण,अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री, बाहुबल के बूते ठेकों को हथियाना, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और वन संपत्तियों का दोहन,वन्य जीवों का शिकार और बिक्री, फर्जी दवाओं का कारोबार, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा, रंगदारी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा। इसके जरिये संगठित अपराध करने वाले लोगों की मदद करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।

योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ यह कानून प्रभावी होगा। पांच वर्ष में एक से अधिक मामलों में जिसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होंगें, उन्हीं पर यह कानून लागू होगा। यूपीकोका लगाने से पहले पुलिस महानिरीक्षक या उपमहानिरीक्षक से अनुमोदन लेना जरुरी होगा। इसमें अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले भी इन्हीं अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग रोकने के लिये उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण बनाया जायेगा। इसमें प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। इसके लिये प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया जायेगा। ऐसी ही समिति जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाँ, समाज की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये एक साल में किये गये कार्यों का सिलसिलेवार ब्याैरा दिया।

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ये है भैयाजी जोशी के फिर से सरकार्यवाह बनने के पीछे की कहानी

तमाम कयासों के बाद आज आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक में 70 साल के भैयाजी जोशी को चौथी बार सर्वसम्मति से सरकार्यवाह चुना गया. भैयाजी जोशी 2009 से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शनिवार को दोपहर 3.40 बजे  सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. मध्य क्षेत्र के अशोक सोनी को चुनाव अधिकारी बनाया गया. पश्चिम क्षेत्र के जयंती भाई भदेसिया ने भैयाजी के कार्यकाल में जो काम हुए उसका उल्लेख करते भैयाजी जोशी का नाम फिर से सरकार्यवाह के लिए प्रस्तावित किया. उसके बाद जयंती भाई भदेसिया के प्रस्ताव का विरेंद्र सिंह पराक्रमदित्य, दक्षिण क्षेत्र रजेंद्रन, विठ्ठल जी और उमेश चक्रवर्ती ने समर्थन किया.

मजेदार बात ये है कि भैयाजी जोशी के अलावा किसी और उम्मीदवार ने अपनी दावेदारी पेश नहीं की और प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से भैयाजी जोशी को एक बार फिर से 3 साल के लिए सरकार्यवाह के लिए चुन लिया.

हर तीन साल में नागपुर में होने वाली बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव होता है. सूत्रों की माने तो संघ के कुछ नेता चाहते थे कि इस बार सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाए. लेकिन दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी चाहते थे कि भैयाजी जोशी को एक और सरकार्यवाह का कार्यकाल देना चाहिए.

पिछली बार की ही तरह भैयाजी जोशी ने सरकार्यवाह के चुनाव में भावुक भाषण दिया और कहा कि दो बार से मैं कह रहा हूं कि मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए और यंग ब्लड को आगे लाकर जिम्मेदारी दी जाये. तब आप लोगों ने मेरी बात को नहीं माना लेकिन इस बार मान लीजिए. लेकिन भैयाजी जोशी के कहने के बाद भी प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से उनको ही सरकार्यवाह चुना.

2015 में प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह के चुनाव के समय भैयाजी जोशी के स्वास्थ को लेकर संघ के वरिष्ठ नेताओं को चिंता थी लेकिन उसके बावजूद, उन्हें ही तीसरी बार सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

सूत्रों की माने तो संघ के कई नेताओं का मानना है कि सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी तो वो वैसी ही परिस्तिथि पैदा होगी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के समय में केसी सुदर्शन संघ प्रमुख और मोहन भागवत सरकार्यवाह के रहते समय आयी थी. सुदर्शन पद में बड़े जरूर थे, लेकिन वो उम्र और तजुर्बे में कम थे. इस बार संघ नहीं चाहता था कि दोबारा ऐसी समस्या खड़ी हो.

सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को संघ के कई बड़े नेता इसीलिए सरकार्यवाह बनाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उनका इतिहास संघ के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का रहा है और संघ में हमेशा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को एक राजनीतिक संगठन के तौर पर ही देखा जाता है. दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह का इतिहास कभी संघ के सह सरकार्यवाह रहे मदनदास देवी का भी रहा है.

दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह मदनदास देवी में सरकार्यवाह बनने की योग्यताएं थीं लेकिन उसके बाद भी उन्हें सरकार्यवाह की जिम्मेदारी नहीं दी गई. सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह नहीं बनाने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि मोदी सरकार और बीजेपी संगठन में उनके अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समकालीन जुड़े नेता से अच्छे रिश्ते भी हैं.

मतलब साफ है कि संघ भले ही परदे के पीछे से राजनीति से जुड़ा हो लेकिन अभी संघ अपने दो सर्वोच्च पदों को राजनीति से जुड़ाव रखने वाले अपने नेताओं को ये पद नहीं देना चाहता था.

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SOCIAL FEED: ‘आख़िरकार एक विश्व कप, राहुल द्रविड़ के नाम’

भारतीय टीम के अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप जीतने पर बधाइयों का सिलसिला जारी है.

सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई है. ट्विटर पर टॉप-10 में से नौ ट्रेंड भारतीय टीम की जीत से जुड़े हैं.

बहुत सारे लोग इस जीत का श्रेय टीम के प्रदर्शन के साथ साथ कोच राहुल द्रविड़ को भी दे रहे हैं.

जीत के बाद मैदान पर भारतीय टीम ने इस तरह जश्न मनाया.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सीनियर टीम के कप्तान विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर, कई खिलाड़ियों और सिने सितारों ने भी भारतीय टीम को जीत की बधाई दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा,

“हमारे नौजवान क्रिकेटरों की विलक्षण उपलब्धि से बहुत प्रसन्न हूं. अंडर-19 विश्व कप जीतने पर उन्हें बधाई. इस जीत से प्रत्येक भारतीय गर्व महसूस कर रहा है. ”

राष्ट्रपति ने भी विजेता टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ और बाकी खिलाड़ियों पर गर्व जताते हुए बधाई दी.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने एक तस्वीर पोस्ट करते हुए बधाई दी. उन्होंने लिखा, “अंडर-19 के लड़कों की यह क्या शानदार जीत है. इसे मील के पत्थर की तरह लो, अभी बहुत आगे जाना है. इस क्षण का आनंद लो.”

सचिन तेंदुलकर ने एक वीडियो पोस्ट करके टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं.

केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने भी ट्वीट करके टीम और कोच को बधाई दी.

वीरेंद्र सहवाग ने लिखा, “ये लड़के इतने सुरक्षित हाथों में हैं. राहुल द्रविड़ के सुरक्षित हाथ. इन नौजवानों और भारतीय क्रिकेट के भविष्य में महान महान योगदान. हमारे पास कुछ शानदार प्रतिभाएं हैं.”

युवराज सिंह, रोहित शर्मा, सुरेश रैना, रवि शास्त्री, आर अश्विन और ज़हीर ख़ान ने भी टीम को बधाई दी है.

सुरेश रैना ने लिखा कि टीम के कोच राहुल द्रविड़ को विशेष मुबारकबाद, जिन्होंने पर्दे के पीछे लगातार कड़ी मेहनत करके इस टीम को अपनी असल क्षमता हासिल करने में मदद की.

क्रिकेट एक्सपर्ट मोहनदास मेनन ने इस जीत को पूरी तरह राहुल द्रविड़ की जीत बताते हुए लिखा, “आख़िरकार एक विश्व कप, राहुल द्रविड़ के नाम. इसका उनसे बड़ा हक़दार कोई नहीं.”

फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी ने लिखा, “अपनी उम्र को अपने स्कोर से पीछे छोड़ दिया! ‘दीवार’ की ओर से प्रशिक्षित इस टीम को शीर्ष पर पहुंचना ही था. क्या शानदार जीत है. अद्भुत राहुल द्रविड़. भारतीय होने पर गर्व है.”

अभिनेता अनिल कपूर ने लिखा, “और हमारे लड़कों ने यह फिर कर दिखाया. आप सबको खेलते देखना शानदार अनुभव था.”

भारत ने विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से हराया..

मनजोत कालरा (101) और हार्विक देसाई (47) के बेहतरीन नाबाद पारियों की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिला 217 रनों का लक्ष्य 38.5 ओवरों में दो विकेट गंवाकर हासिल कर लिया.

भारत ने चौथी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता है. इससे पहले भारतीय टीम साल 2000, 2008 और 2012 में ये ख़िताब अपने नाम किया था.

बीसीसीआई ने टीम के लिए पुरस्कार राशि का भी ऐलान किया है. टीम के कोच राहुल द्रविड़ को 50 लाख और टीम के खिलाड़ियों को 30-30 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा.

सपोर्ट स्टाफ़ के हर सदस्य को 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा.

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आयकर विभाग ने शाहरुख का घर किया सील, ये सितारे भी कर चुके हैं इस परेशानी का सामना

आयकर विभाग ने बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान का मुंबई स्थित अलीबाग में बने फार्म हाउस को सील कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शाहरुख़ पर आरोप है कि उन्होंने खेती की जमीन पर जालसाजी से एक फार्म हाउस बना लिया था। बताया जा रहा है कि आयकर विभाग ने इस मामले में शाहरुख को नोटिस भेजकर 90 दिन के भीतर जवाब मांगा है। अगर तय तारीख तक एक्टर जवाब नहीं देते हैं तो विभाग द्वारा उनपर कार्रवाई भी की जा सकती है। खैर, शाहरुख अकेले ऐसे बॉलीवुड सेलेब्रिटी नहीं हैं, जिनपर आयकर विभाग का रेड पड़ा है, इससे पहले ये सेलेब्रिटी भी इस परेशानी का सामना कर चुके हैं।

सलमान खान पर आय से अधिक संपत्ति का मामला 
बॉलीवुड के दबंग कहे जाने वाले सुपरस्टार सलमान खान भी एक बार आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंस चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2000 में आयकर विभाग ने सलमान के मुंबई स्थित पनवेल प्रॉपर्टी पर छापा मारा था, जिसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। उस दौरान विभाग ने सलमान के साथ उनके भाई अरबाज से भी इस मामले में पूछताछ की थी।

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प्रियंका चोपड़ा के घर विभाग का छापा 
बॉलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा भी आयकर मामले में फंस चुकी हैं। बताया जाता है कि प्रियंका के घर पर साल 2011 में आयकर विभाग ने छापा मारा था, जिसमें 7.5 करोड़ की बेनामी संपति बरामद हुई थी। इस मामले को लेकर प्रियंका और विभाग के बीच काफी दिनों तक विवाद चला था।

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कैटरीना के घर विभाग का छापा 
प्रियंका चोपड़ा के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ भी एक बार आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंस चुकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2011 में आयकर विभाग द्वारा कैटरीना के घर पर भी छापा मारा गया था। इस छापे में कई चीजें बरामद हुई, जिसको लेकर उनसे काफी सवाल जवाब किये गए, लेकिन उस समय उनके घर को सील नहीं किया गया।

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संजय दत्त के घर छापा 
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त भी आयकर मामले से बच नहीं पाए हैं। साल 2012 में आयकर विभाग ने संजय दत्त के मुंबई में बांद्रा स्थित घर पर छापा मारा था, जिसके बाद उनसे कुछ संपत्ति को लेकर पूछताछ भी की गई थी।

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माधुरी दीक्षित के घर छापा 
बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित के घर पर भी आयकर विभाग का छापा पड़ चुका है। बताया जाता है कि विभाग ने पैसे खोजने के लिए अभिनेत्री के निवास की दीवारों और फर्नीचर को भी तोड़ दिया था।

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श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?

 

जब भी प्रेम की मिसाल दी जाती है तो श्रीकृष्ण-राधा के प्रेम का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. राधा-श्रीकृष्ण के प्रेम को जीवात्मा और परमात्मा का मिलन कहा जाता है. सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ियां राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी पढ़ती चली आ रही हैं लेकिन जब भी हम राधा-श्रीकृष्ण की प्रेम कहानी सुनते हैं तो मन में यही सवाल आता है कि श्रीकृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया? इसके पीछे कई तरह की व्याख्याएं दी जाती हैं. आइए जानते हैं उन सभी कहानियों के बारे में…

 

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    कुछ विद्वानों के मुताबिक, राधा-कृष्ण की कहानी मध्यकाल के अंतिम चरण में भक्ति आंदोलन के बाद लोकप्रिय हुई. उस समय के कवियों ने इस आध्यात्मिक संबंध को एक भौतिक रूप दिया गया. प्राचीन समय में रुक्मिनी, सत्यभामा, समेथा श्रीकृष्णामसरा प्रचलित थी जिसमें राधा का कोई जिक्र नहीं मिलता है. 3228 ईसा पूर्व देवकी पुत्र श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. कुछ समय तक वह गोकुल में रहे और उसके बाद वृंदावन चले गए थे.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    श्रीकृष्ण राधा से 10 साल की उम्र में मिले थे. उसके बाद वह कभी वृंदावन लौटे ही नहीं. इसके अलावा कहीं यह जिक्र भी नहीं मिलता है कि राधा ने कभी द्वारका की यात्रा की हो. दक्षिण भारत के प्राचीन ग्रन्थों में राधा का कोई उल्लेख नहीं मिलता है.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    राधा ने श्रीकृष्ण से विवाह करने से किया था इनकार?एक मत यह भी है कि राधा ने श्रीकृष्ण से विवाह करने से मना कर दिया था क्योंकि उन्हें लगता था कि वह महलों के जीवन के लिए उपयुक्त नहीं हैं. राधा एक ग्वाला थीं जबकि लोग श्रीकृष्ण को किसी राजकुमारी से विवाह करते हुए देखना चाहते थे. श्रीकृष्ण ने राधा को समझाने की कोशिश की लेकिन राधा अपने निश्चय में दृढ़ थीं. राधा-श्रीकृष्ण के विवाह नहीं करने के पीछे एक व्याख्या ऐसी भी की जाती रही है.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    एक अन्य प्रचलित व्याख्या के मुताबिक, राधा ने एक बार श्रीकृष्ण से पूछा कि वह उनसे विवाह क्यों नहीं करना चाहते हैं? तो भगवान श्रीकृष्ण ने राधा को बताया कि कोई अपनी ही आत्मा से विवाह कैसे कर सकता है? श्रीकृष्ण का आशय था कि वह और राधा एक ही हैं. उनका अलग-अलग अस्तित्व नहीं है.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    राधा को यह एहसास हो गया था कि श्रीकृष्ण भगवान हैं और वह श्रीकृष्ण के प्रति एक भक्त की तरह उनकी श्रद्धा थी. वह भक्तिभाव में खो चुकी थीं जिसे कई बार लोग भौतिक प्रेम समझ लेते हैं. इसलिए कुछ का मानना है कि राधा और श्रीकृष्ण के बीच विवाह का सवाल पैदा ही नहीं होता है, राधा और श्रीकृष्ण के बीच का रिश्ता एक भक्त और भगवान का है. राधा का श्रीकृष्ण से अलग अस्तित्व नहीं है. विवाह के लिए दो लोगों की आवश्यकता होती है.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    समाज आया आड़े?कुछ लोग इसकी इस तरह से भी व्याख्या करते हैं कि सामाजिक नियमों ने राधा-कृष्णा की प्रेम कहानी में खलनायक की भूमिका निभाई. राधा और श्रीकृष्ण की समाजिक पृष्ठभूमि उनके विवाह की अनुमति नहीं देती थी.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    राधा को ठीक तरह से समझने के लिए रस और प्रेम के रहस्य को समझना होगा. ये आध्यात्मिक प्रेम की आनंददायक अनुभूति है. एक व्याख्या के अनुसार, कृष्ण और राधा ने बचपन में खेल-खेल में शादी की थी जैसे कि कई बच्चे शादी का खेल खेलते हैं लेकिन असलियत में दोनों का विवाह कभी नहीं हुआ. वैसे भी उनका प्यार वैवाहिक जीवन के प्यार से ज्यादा स्वाभाविक और आध्यात्मिक था.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    श्रीकृष्ण और राधा एक दूसरे रूप से आत्मीय तौर पर जुड़े हुए थे इसीलिए हमेशा राधा-कृष्णा कहा जाता है, रुक्मिनी-कृष्णा नहीं. रुक्मिनी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए बहुत जतन किए थे. वह अपने भाई रुकमी के खिलाफ चली गई. रुक्मिनी भी राधा की तरह श्रीकृष्ण से प्यार करती थीं, रुक्मिनी ने श्रीकृष्ण को एक प्रेम पत्र भी भेजा था कि वह आकर उन्हें अपने साथ ले जाएं.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    प्रेम पत्र में रुक्मिनी ने 7 श्लोक लिखे थे. रुक्मिनी का प्रेम पत्र श्रीकृष्ण के दिल को छू गया और उन्हें रुक्मिनी का अनुरोध स्वीकार करना पड़ा. इस तरह रुक्मिनी श्रीकृष्ण की पहली पत्नी बन गईं. वहीं, दूसरी तरफ श्रीकृष्ण और राधा को विवाह की आवश्यकता ही नहीं थी. उनके प्रेम को शादी के बंधन नहीं चाहिए था.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    राधा श्रीकृष्ण का बचपन का प्यार थीं. श्रीकृष्ण जब 8 साल के थे तब दोनों ने प्रेम की अनुभूति की. इसके बाद पूरी जिंदगी श्रीकृष्ण से नहीं मिलीं. राधा श्रीकृष्ण के दैवीय गुणों से परिचित थी. उन्होंने जिंदगी भर अपने मन में प्रेम की स्मृतियों को बनाए रखा. यही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    श्राप ने राधा-कृष्ण का नहीं होने दिया मिलन?ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, पृथ्वी पर आने से पहले राधा की एक बार कृष्ण की सेविका श्रीद्धमा से बहस हो गई थी. राधारानी क्रोधित हो गईं और श्रीदमा को राक्षस के रूप में पैदा होने का श्राप दे दिया. बदले में श्रीदम ने भी राधा को श्राप दे दिया कि वह एक मानव के रूप में जन्म लेगी और अपने प्रियतम से 100 साल के लिए बिछड़ जाएगी. उसके बाद तुम्हें फिर से श्रीहरि की संगति प्राप्त होगी और तुम गोकुल को वापस लौटोगी.
  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    श्रीकृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया क्योंकि वह साबित करना चाहते थे कि प्रेम और विवाह दो अलग-अलग चीजें हैं. प्रेम एक नि:स्वार्थ भावना है जबकि विवाह एक समझौता या अनुबंध है.एक मत के मुताबिक, श्रीकृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया ताकि मानव जाति को बेशर्त और आंतरिक प्रेम को सिखाया जा सके. राधा-श्रीकृष्ण का संबंध कभी भी भौतिक रूप में नहीं रहा बल्कि वह बहुत ही आध्यात्मिक प्रकृति का है. पौराणिक कथाओं में प्रचलित अन्य कथाओं की तुलना राधा-कृष्ण से नहीं की जा सकती है.

  • श्रीकृष्ण ने राधा से कभी विवाह क्यों नहीं किया?
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    हालांकि राधा-कृष्ण के प्रेम की कितनी भी व्याख्याएं क्यों ना कर ली जाए, सब कम ही है. उनका प्रेम हमेशा मानव जाति के लिए आध्यात्मिक प्रकाश की तरह जीवित रहेगा.

 

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टोक्यो मोटर शो: गाड़ी जो स्पीड में शेप बदल ले!

जापान में टोक्यो मोटर शो का आयोजन चल रहा है। 45वें एडिशन में कई कॉन्सेप्ट कारें पेश की गई हैं।

जापान की ऑटो पार्ट मेकर टोयोडा गोसेई की ये पेशकश ‘फ्लेश्बी’ केवल एक सीट वाली है। कंपनी का दावा है कि ‘फ्लेश्बी’ ई-रबर की खूबियां लिए हुए है और हाई स्पीड में ड्राइविंग करते वक्त इसकी बॉडी ज़रूरत के मुताबिक़ अपनी शेप बदल सकती है।

तस्वीर में टोयोटा की कॉन्सेप्ट-आई जिसे 25 अक्टूबर को पेश किया गया।

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टोक्यो मोटर शो 5 नवंबर तक चलेगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर कंपनियां की दुनिया की बड़ी कंपनियों अपने नए प्रोडक्टश इस इवेंट में पेश करती हैं। तस्वीर में सुज़ुकी मोटर्स की ई-सर्वाइवर।

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यामाहा की ये हाई टेक बाइक ‘मोटरआईडी’ भी टोक्यो मोटर शो का एक ख़ास आकर्षण रहा।

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दिखने में बाइक जैसी लगती है लेकिन इसमें ज्यादा पहिए हैं। टोक्यो मोटर शो में यामाहा की एमडब्लूसी-4।

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टोयोटा मोटर्स ने अपनी इस कॉन्सेप्ट कार को वंडर-कैप्सूल का नाम दिया है।

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शराब पीने के बाद लोग अंग्रेज़ी क्यों बोलते हैं?

गैर-अंग्रेजीभाषियों के साथ आपने अक्सर ऐसा महसूस किया होगा?

अगर आप किसी दूसरी भाषा में बोलने की कोशिश करते हैं तो कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा. सही शब्द आपको मुश्किल से मिलेंगे और उनका ठीक से उच्चारण करना भी चुनौती जैसा लगेगा.

लेकिन अगर आप थोड़ी सी शराब पी लें तो उस दूसरी भाषा के शब्द अपने आप मुंह से धारा प्रवाह निकलेंगे. लफ्जों की तलाश खत्म हो जाएगी और आपकी बातें लच्छेदार लगने लगेंगी. मानो ये जुबान आपकी अपनी हो.

सांकेतिक तस्वीरइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

सामाजिक व्यवहार

ये शराब को लेकर कोई अंदाज़े की बात नहीं है. बल्कि इसे लेकर एक अध्ययन आया है. साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक थोड़ी सी शराब किसी दूसरी भाषा में बोलने में मदद करती है.

ये भी सही है कि शराब हमारी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर असर डालती है और इस लिहाज से ये एक बाधा है. लेकिन दूसरी तरफ ये हमारी हिचकिचाहट भी दूर करती है, हमारा आत्म-विश्वास बढ़ाती है और सामाजिक व्यवहार में संकोच कम करती है.

जब हम किसी दूसरे शख्स से मिलते हैं और बात करते हैं तो इन सब बातों का असर हमारी भाषाई क्षमता पर पड़ता है. इस विचार अब तक बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ही स्वीकार किया जाता था.

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थोड़ा एल्कोहल

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल, ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज और नीदरलैंड्स के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास्ट्रिच के शोधकर्ताओं ने इस विचार को टेस्ट किया. टेस्ट के लिए 50 जर्मन लोगों के एक समूह को चुना गया जिन्होंने हाल ही में डच भाषा सीखी थी.

कुछ लोगों को पीने के लिए ड्रिंक दिया गया जिनमें थोड़ा एल्कोहल था. लोगों के वजन के अनुपात में एल्कोहल की मात्रा दी गई थी. कुछ के ड्रिंक्स में एल्कोहल नहीं था. टेस्ट में भाग लेने वाले जर्मन लोगों को नीदरलैंड्स के लोगों से डच में बात करने के लिए कहा गया.

डच भाषियों को ये पता नहीं था कि किसने शराब पी रखी है और किसने नहीं. जांच में ये बात सामने आई कि जिन्होंने शराब पी रखी थी वे बेहतर उच्चारण के साथ बात कर रहे थे. शोधकर्ताओं ने ये साफ किया कि उन्हें ये नतीजे शराब की बहुत कम मात्रा में खुराक देने से मिले हैं.