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पीएम मोदी ने पाकिस्तान को कहा आतंकवाद की फैक्ट्री, तो बचाव में उतरा चीन

चीन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस्लामाबाद को आंतकवाद का निर्यात करने वाली फैक्ट्री बाताए जाने वाले बयान पर पाकिस्तान का बचाव किया। चीन ने इस संबंध में कहा कि पाकिस्तान की आंतकवाद से लड़ने में मदद किए जाने की जरूरत है।

लंदन में पीएम मोदी ने पाक पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत आतंकवाद को निर्यात करने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। मोदी ने आगे कहा कि यहां आतंकवाद की फैक्ट्री लगा रही है और सीधे युद्ध में सामना न कर पाने की ताकत न होने के कारण पीठ पर वार करते हैं। ऐसी स्थिति में हमे पता है कि कैसे जबाव देना है। जाहिर तौर पर मोदी का इशारा पाकिस्तान की ओर था।

मोदी के इस बयान पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हु आ चुनयिंग ने कहा कि आतंकवाद सभी का दुश्मन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों को मिलकर आतंकवाद से लड़ने की जरूरत है। साथ ही सभी देशों को पाकिस्तान की आतंकवाद से लड़ने में मदद करनी चाहिए।

इस बयान के साथ चीन ने इशारा किया है कि शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन(एससीओ) में आतंकवाद भी एक बड़ा मुद्दा होगा। पिछले साल एससीओ में भारत और पाकिस्तान दोनों शामिल थे। एससीओ का वार्षिक सम्मेलन अब जून में चीन के किंगदाओ शहर में होना है।

विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन में आतंकवाद पर चर्चा के सवाल पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मेरा मानना है कि एससीओ का उद्देश आतंकवाद के मुद्दे पर साथ मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ना है।

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भगत सिंह के केस से जुड़ी सभी फाइलें पाक में सार्वजनिक, दस्तावेजों से सामने आई एक अनोखी बात

शहीद भगत सिंह और उनके साथियों पर चल रहे मुकदमे और फांसी से जुड़ी सभी फाइलों को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने सार्वजनिक कर दिया है। इस केस से जुड़ी कुछ फाइलें हफ्ते की शुरआत में ही सार्वजनिक कर दी गई थीं। पंजाब सरकार ने भगत सिंह की फांसी के 87 साल गुजर जाने के बाद यह फैसला लिया था।

(वीडियो: पाक मीडिया रिपोर्ट)

भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव व राजगुरु को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या में 23, मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी। सार्वजनिक किए गए नए रिकार्ड में केस से जुड़ी खबरों की क्लिपिंग, सांडर्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुखदेव व राजगुरु को फांसी देने का वारंट समेत ब्रिटिश पुलिस द्वारा सिंह और उनके साथियों के अड्डे पर छाप मारने में बरामद हुए पिस्टल व बुलेट की तस्वीरें समेत कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

भगत सिंह द्वारा 27 अगस्त, 1930 को कोर्ट के फैसले की कॉपी मांगने के साथ सिंह की सजा के खिलाफ उनके पिता सरदार किशन सिंह की कोर्ट में दाखिल की गई याचिका को पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया था।

23 मार्च, 1931 को जेल निरीक्षक द्वारा बनाए गए मुत्यु प्रमाण पत्र को भी सार्वजनिक किया गया है। साथ ही जेल में किताबों और अखबार मुहैया कराने की मांग के लिए भगत सिंह के पत्र को भी आम नागरिकों के सामने प्रत्यक्ष किया गया है। कई दस्तावेज भगत सिंह के साथियों के ठिकानों पर ब्रिटिश पुलिस की छापेमारी से भी संबंधित हैं।

दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद भगत सिंह से जुड़ी एक अनोखी बात भी सामने आई है। सिंह अपने किसी भी पत्र में आपका आभारी या आज्ञाकारी लिखने की जगह आपका आदि, आदि लिखा करते थे। पंजाब के अभिलेख विभाग का कहना है कि अभी सिंह के केस से जुड़ी कुछ फाइलों को ही सार्वजनिक किया जा रहा है। बाकी दस्तावेज मंगलवार को सार्वजनिक किए जाएंगे।

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बदेशी भाषा बोलने वाले तीन आख़िरी इंसान

क्या आप उस भाषा के कुछ शब्द सीखना चाहेंगे जिसे बोलने वाले दुनिया में मात्र तीन ही लोग बचे हैं?

उत्तरी पाकिस्तान की पहाड़ियों में बर्फ से ढ़की दूर-दराज की एक घाटी में बदेशी भाषा बोली जाती है. लेकिन अब इस भाषा को लुप्त मान लिया गया है.

दुनिया की तमाम भाषाओं के बारे में जानकारी देने वाली एथनोलॉग के अनुसार बीते तीन या अधिक पीढ़ियों से इस भाषा को बोलने वाला कोई भी नहीं है.

लेकिन बिशीग्राम घाटी में हमने तीन ऐसे लोगों को खोजा है जो अब भी बदेशी भाषा में जानते हैं और इस भाषा में बात करते हैं.

 

वो भाषा जिसे सिर्फ़ तीन लोग जानते हैं

रहीम गुल को नहीं पता कि उनकी उम्र कितनी है. उनके चेहरे से लगता है कि वो करीब 70-75 साल के होंगे. वो कहते हैं, “अब से एक पीढ़ी पहले तक इस गांव के साभी लोग बदेशी भाषा में ही बात करते थे.”

“लेकिन फिर हमरी गांव में शादी कर के जो लड़कियां दूसरे गांव से आईं वो तोरवाली भाषा बोलती थीं. उनके बच्चों ने भी अपनी मातृभाषा तोरवाली भाषा में ही बात करना शुरु किया और इस कारण हमारी भाषा मरने लगी.”

इस इलाके में अधिकतर लोग तोरवाली भाषा का प्रयोग करते हैं जिसका खुद का अस्तित्व अधिक बोली जाने वाली पश्तो के कारण ख़तरे में है. लेकिन इस भाषा ने बदेशी को लुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया है.

 

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

रहीम गुल के दूर के भाई सईद गुल कहते हैं, “अब हमारे बच्चे और उनके बच्चे तोरवाली ही बोलते हैं. हम चाहें भी तो अपनी भाषा में किससे बात करें?”

सईद गुल को भी अपनी उम्र के बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं है. जब उन्होंने अपनी उम्र 40 बताई तो गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें टोका और कहा, “आप 80 साल के लगते हैं.” सईद गुल ने तुंरत पलट कर कहा, “नहीं, 50 का हो सकता हूं, 80 का तो बिल्कुल ही नहीं हूं.”

इस इलाके में युवाओं के लिए रोज़गार के मौक़े लगभग ना के बराबर हैं. इस कारण यहां से लोगों ने स्वात घाटी का रुख़ किया जहां वो पर्यटन का व्यवसाय करने लगे. यहीं पर उन्होंने पश्तो सीखी और अब ये लोग अधिकतर इसी भाषा में बात करते हैं.

वक्त के साथ-साथ बदेशी बोलने वले कम होते गए और इस तीन लोगों के लिए बदेशी में बात करने के मौक़े कम होते गए जिस कारण अब ये भी बदेशी भूलते जा रहे हैं.

 

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

आपस में बात करते वक्त रहीम गुल और सईद गुल कई शब्द भूल जाते थे और काफी सोचने के बाद कुछ शब्दों को याद कर पा रहे थे.

रहीम के एक बेटे हैं जिनके पांच बच्चे हैं और सभी तोरवाली में बात करते हैं. रहीम के बेटे कहते हैं, “मेरी मां तोरवाली बोलती थीं और मेरे माता-पिता घर में बदेशी में बात नहीं करते थे. मुझे बचपन से ही ये भाषा नहीं सीखने का मौक़ा नहीं मिला. मैं कुछ शब्द तो जानता हूं लेकिन पूरी भाषा नहीं जानता. मेरे सभी बच्चे तोरवाली में ही बात करते हैं.”

“मुझे इस बात का पछतावा है, लेकिन मैं अब 32 साल का हूं और अब बदेशी सीख सकूंगा ऐसा नहीं लगता. मुझे दुख होता है कि ये भाषा मेरे पिता के साथ ही खत्म हो जाएगी.”

ग़ैरसरकारी संस्था फोरम ऑफ़ लैग्वेज इनिशिएटिव पाकिस्तान में लुप्त हो रही भाषाओं को बचाने की कोशिश कर रही है.

इस संस्था के साथ काम करने वाले भाषाविद सागर ज़मान कहते हैं, “मैंने तीन बार इस घाटी का दौर किया है. लेकिन इस भाषा को जानने वाले इस भाषा में सामने बात करने से हिचकिचा रहे थे.”

“मैंने और अन्य भाषाविदों ने मिल कर इस भाषा के करीब 100 शब्दों को लिखा है. इन शब्दों से संकेत मिलता है कि ये भाषा इंडो-आर्यन भाषा परिवार से है.”

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

सागर ज़मान कहते हैं तोरवाली और पश्तो बोलने वाले बदेशी भाषा को अपमान की नज़र से देखते हैं और इसीलिए इसे बालने वालों के लिए ऐसा करने कलंक के समान माना जाता है.

ऐसा लगता है कि बदेशी भाषा को बचाने में अब बहुत देर कर दी गई है. लेकिन आप कम से कम इस भाषा को कुछ सीख सकते हैं और इस भाषा को आंशिक रूप से ही सही जिंदा रखने में मदद कर सकते हैं.

मीन नाओ रहीम गुल थी – मेरा नाम है रहीम गुल

मीन बदेशी जिबे आसा – मैं बदेशी भाषा बोलता हूं

थीन हाल खाले थी? – आप कैसे हैं?

मै ग्रोट खेतकी – मैंने खाना खा लिया है

ईशू काले हीम काम इकथी – इस साल कुछ ज़्यादा बर्फबारी नहीं हुई

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ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान पर किया ड्रोन से हमला

पाकिस्तान की वित्तीय सहायता पर रोक के बाद अब अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ खुद ही कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिका ने बुधवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर ड्रोन से हमले कर हक्कानी नेटवर्क के 2 कमांडरों सहित 2 आतंकियों को ढेर कर दिया है। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसकी जमीन पर ड्रोन हमले उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है।

यह इलाका अफगानिस्तान सीमा से जुड़ा है। पाकिस्तानी अखबार डान के मुताबिक, बुधवार को स्पीन थाल क्षेत्र में एक मकान पर ड्रोन से दो मिसाइल दागे गए। इस हमले में हक्कानी नेटवर्क का कमांडर अहसान उर्फ खवारी और उसके दो साथी मारे गए। अमेरिकी जासूसी विमान के जरिये अफगान शरणार्थियों के घर को निशाना बनाकर ये हमले किए गए।

17 जनवरी को भी किया था ड्रोन अटैक

ओरकजाई एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क के ठिकानों पर हमले किए गए। इससे पहले 17 जनवरी को इस साल के पहले ड्रोन हमले में खुर्रम एजेंसी के बादशाह कोट इलाके में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। पिछले साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई अफगान नीति के बाद खुर्रम एजेंसी में ड्रोन हमलों में तेजी आई है। इस नीति में पाकिस्तान पर आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप भी लगाया गया है।  गौरतलब है कि 2016 में ऐसे हमले में तालिबान का शीर्ष आतंकी मुल्ला अख्तर मंसूर मार गया था।

ट्रंप ने कहा था झूठा और धोखेबाज देश है पाकिस्तान

नए साल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में साफ-साफ लिखा था, ‘अमेरिका मूर्खों की तरह पाकिस्तान को 15 सालों से सैन्य सहायता देता आ रहा है लेकिन इसके जवाब में उसे वापस धोखा और झूठ मिला है। 15 साल से अब तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है लेकिन हर बार हमें मूर्ख बनाया गया है। पाकिस्तान हमेशा से आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है।’

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा, राष्ट्रपति ने बिल्कुल सही कहा। पाकिस्तान ने 15 वर्षो में आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से 33 अरब डॉलर (दो लाख दस हजार करोड़ रुपये) लिये। लेकिन वास्तव में उसने आतंकियों को पाला-पोसा और पनाह दी। इन्हीं आतंकियों से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को लड़ना पड़ा। इससे पाकिस्तान का झूठा और धोखेबाज चरित्र सामने आया।

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पाकिस्तान पहुंची UN टीम, पर सईद ने भारत-US की कोशिशों के खिलाफ चला अपना दांव

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की टीम के पैर रखने से पहले अपना दांव चल दिया है. इस टीम के पाक दौरे की वजह से हाफिज सईद को अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा था. बुधवार दोपहर को यह टीम पाकिस्तान पहुंची, लेकिन तब तक हाफिज खुद को सुरक्षित कर चुका था.

जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ने इस टीम के दौरे की वजह से मंगलवार शाम को लाहौर हाई कोर्ट में अपील की कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. कोर्ट ने हाफिज सईद की अपील सुनने के बाद उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

सईद ने कहा था कि भारत और अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तानी सरकार उसे फिर से गिरफ्तार कर सकती है. हाफिज की शिकायत के बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी सरकार को हाफिज के खिलाफ कोई आशंकित कदम लेने से रोक दिया है.

जानकारी के मुताबिक यूएनएससी की 1267 सेंक्शंस कमेटी की निगरानी समिति बुधवार दोपहर को पाकिस्तान पहुंच गई. समिति यह देखने के लिए आई है कि पाकिस्तान यूएन के प्रतिबंधों को लागू कर रहा है या नहीं. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तानी सरकार यूएन की कमेटी को हाफिज सईद या उसके परिसरों तक नहीं जाने देगी.

इससे पहले, हाफिज ने मंगलवार शाम को ही हाफिज सईद ने अपने वकील एके डोगर के जरिए अदालत में याचिका देकर कहा था कि उसके या उसके संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए. उसने इस याचिका में अपने चैरिटी अस्पतालों और स्कूलों का भी हवाला दिया था.

आपको बता दें कि हाफिज सईद को पिछले साल नवंबर में ही नजरबंदी से रिहाई मिली है. इसके बाद से वह पाकिस्तानी राजनीति में आने की कोशिश में लगा है. उसने इसके लिए नई राजनीतिक पार्टी ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ भी बनाई है.

माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना हाफिज सईद के राजनीति में आने में उसकी मदद कर रही है. पिछले दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस ही नहीं है तो उस पर कैसे कार्रवाई करें.

हाफिज का नाम 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 में शामिल किया गया था. वहीं अमेरिका ने जून 2014 में लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन करार दिया था.